भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) का बीसीसीआई अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है. ऐसे में हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक के बाद सौरव गांगुली ने उन अटकलों को खारिज कर दिया है, जिसमें कयास लगाए जा रहे थे कि वह बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. सौरभ गांगुली ने कहा कि ”अभी” ऐसा नहीं होगा क्योंकि न तो उन्होंने और न ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (AMIT SHAH) ने हाल में हुई अपनी बैठक में इस बारे में कोई चर्चा की. शाह ने शनिवार को गांगुली से मुलाकात की थी जिससे ये अटकलें लगने लगी कि पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान को BCCI अध्यक्ष पद की पेशकश इस बदले में की गई कि वह 2021 में महत्वपूर्ण पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगे.
बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) के अध्यक्ष गांगुली ने सोमवार को एक और पूर्व भारतीय बल्लेबाज ब्रजेश पटेल को पीछे छोड़ दिया और बीसीसीआई (BCCI) के शीर्ष पद के लिए नामांकन भरने वाले वह इकलौते उम्मीदवार हैं. गांगुली ने कैब में पत्रकारों से कहा, ”जब मैं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता दीदी से मिला था तब भी मैंने ऐसे ही राजनीतिक सवाल सुने थे.” उन्होंने कहा, ”मैं पहली बार अमित शाह से मिला था. न तो मैंने इसके बारे में कोई सवाल पूछा कि बीसीसीआई में क्या होने जा रहा है और मुझे पद मिल रहा है या नहीं और न ही वहां ऐसी कोई चर्चा हुई कि ‘आपको यह (बीसीसीआई अध्यक्ष पद) तभी मिलेगा अगर आप वह करने पर राजी होंगे’. इसलिए इस वक्त कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं है.”
शाह के बेटे जय शाह बीसीसीआई के नये सचिव होंगे और अरुण धूमल नए कोषाध्यक्ष होंगे. धूमल वित्त राज्यमंत्री और पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर के छोटे भाई हैं. पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने सोमवार को कहा था कि अगर गांगुली राजनीति में आ जाते हैं तो इससे ”राजनीति समृद्ध होगी.” उन्होंने कहा था, ”गौतम गंभीर भाजपा में शामिल हुए. भाजपा के दरवाजे हर किसी के लिए खुले हैं.
मध्य प्रदेश की कांग्रेस नीत सरकार के एक मंत्री के विवादास्पद बयान ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद की याद दिला दी है. कमलनाथ कैबिनेट में मंत्री पीसी शर्मा ने मंगलवार को मीडियाकर्मियों के खराब सड़कों के सवाल पर बयान देते हुए कहा कि ये वॉशिंगटन और न्यूयॉर्क की सड़कें कैसी थीं? पानी गिरा जम के और यहां गड्ढ़े ही गड्ढ़े हो गए, कैलाश विजयवर्गीय के जो गाल हैं, वैसी ही हो गईं.. 15- 20 दिन में चका-चक सड़कें हेमा मालिनी के गाल जैसी हो जाएंगी.
जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने जब यह बयान दिया तो उनके साथ पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा भी मौजूद थे. मंत्री शर्मा ने भोपाल के हबीबगंज इलाके में घूमने के दौरान ये बात मीडियाकर्मियों से कही है.
बता दें कि 2017 में एमपी के सीएम शिवराजसिंह चौहान ने अपनी यूएस की यात्रा के दौरान कहा था कि अमेरिका की सड़कों से अच्छी मध्य प्रदेश की सड़कें हैं. चौहान ने कहा था कि जब वह वॉशिंगटन एयरपोर्ट पर उतरे और सड़कों पर यात्राएं की तो उन्हें महसूस हुआ कि मध्य प्रदेश अमेरिका से बेहतर है.
तत्कालीन बीजेपी सरकार के मुख्यमंत्री चौहान के इस बयान का खूब मजाक उड़ाया गया था और कांग्रेस ने भी जमकर हमला बोला था.
बता दें कि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत राज्य के अधिकांश इलाकों में भारी बारिश हुई है, जिससे सड़कों की हालत बेहद खराब है. एक ओर जहां बीजेपी कांग्रेस को दिग्विजय सिंह के कार्यकाल की सड़कों की याद दिला रही है तो कांग्रेस के मंत्री ने मध्य प्रदेश में बीजेपी के कार्यकाल में बनाई गई सड़कों की गुणवत्ता को लेकर निशाना साधा है.
नागपुर: बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने सोमवार को नागपुर में कहा कि वह बाबा साहेब की तरह बौद्ध धर्म की दीक्षा लेंगी. नागपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने इसका ऐलान किया. उन्होंने कहा कि सही समय पर इसका फैसला करेंगी.
मायावती ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने अपने देहांत से कुछ वक्त पहले अपना धर्म परिवर्तन कराया था. आप लोग मेरे धर्म परिवर्तन के बारे में भी सोचते होंगे. मैं भी बौद्ध धर्म की अनुयायी बनने के लिए दीक्षा अवश्य लूंगी लेकिन यह तब होगा जब इसका सही समय आ जाए.
‘संघ प्रमुख की बात से सहमत नहीं’
मायावती ने रैली में यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत की बात से सहमत नहीं हैं कि भारत एक हिंदू राष्ट्र था. मायावती ने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर ने सेकुलरिज्म के आधार पर संविधान की रचना की थी. मायावती नागपुर में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीएसपी उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार कर रही हैं. यहां 21 अक्टूबर को मतदान है और वोटों की गिनती 24 अक्टूबर को होगी.
बीजेपी, कांग्रेस पर निशाना
मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गलत नीतियों के चलते देश की अर्थव्यवस्था में सुस्ती आई है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियों में दलित और आदिवासियों को प्रमोशन से वंचित करने के लिए कांग्रेस और बीजेपी ने एक दूसरे से साठगांठ की है. मायावती ने कहा कि मौजूदा सरकार ने दलित और आदिवासियों के लिए बने कानून को निष्प्रभावी करने का काम किया है.
नागपुर– मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए प्रचार का दौर अपने चरम पर पहुंच गया. रोजाना विभिन्न परिसरों से मुख्यमंत्री के लिए पदाधिकारियों की ओर से पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है . मंगलवार 15 अक्टूबर को भगवान् नगर परिसर में मनपा के सत्तापक्ष नेता संदीप जोशी के नेतृत्व में पदयात्रा निकाली गई. इस पदयात्रा में सैकड़ों की तादाद में भाजपा के कार्यकर्ता, परिसर के नागरिक और समर्थक मौजूद थे.
यह पदयात्रा हावरापेठ शिवमंदिर के पास से निकली . इस दौरान पदयात्रा भगवान् नगर, रामेश्वरी, बेनर्जी ले आउट,पार्वती नगर, जय भीम नगर, ओंकार नगर, शुक्ला नगर घूमी. परिसर के नागरिकों की ओर से पदयात्रा को बढ़िया प्रतिसाद दिया गया . परिसर में जगह जगह जोशी का स्वागत किया गया और उनकी आरती उतारी गई.
इस दौरान पदयात्रा में नगरसेविका विशाखा शरद बांते,पूर्व नगरसेवक शरद बांते, दक्षिण पश्चिम के महामंत्री सचिन तराटकर, अजय हिवरकर, गोलू बोरकर, मंगेश मोरे, मुकुंद जोशी, अनिकेत बांगले, विवेक पोकळी ,गिरीश पबल, सोनू मुळे, योगेश मड़ावी, सुरेंद्र खरे, संजय बोरकर, मधु तितरमारे, सुनील वाहने, विनोद भिरभाविकार, सचिन जाधव, डॉ. तलाह, विवेक बोरकर, शक्ति वराड़िया, मंगेश दात्रे, नत्थूजी साठवणे, सुरेश बारई, नरेंद्र बारई, नत्थूराव साठवणे, रेखा शिरपुरकर, रेशमा कुरैशी, सुमन साठवणे, श्रुति तलवेकर, नलिनी वंजारी, रेनू कोटरुन्गे, कल्पना लांजेवार,पंकज जोशी, संजय वर्मा समेत सैकड़ो की तादाद में कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद थे.
महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार करने पहुंचे सीएम भूपेश बघेल एक बार फिर भड़क गए हैं. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्विटर पर लिखा है कि 2 दिन पहले जिस स्थान पर पीएम मोदी सभा करके गए हैं. वहां पर एक निर्वाचित मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर उतरने नहीं देना लोकतंत्र की हत्या है.
बता दें कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को साखौली में सभा की अनुमति नहीं दी गई. सीएम भूपेश के हेलीकॉप्टर को वहां पर लैंड करने की अनुमति देने से भी जिला प्रशासन ने मना कर दिया. सीएम भूपेश बघेल को साखौली में आमसभा को संबोधित करना था. साखौली में कांग्रेस के प्रत्याशी किसान नेता नाना पटौले हैं, जो कि भारतीय किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं.
सीएम भूपेश बघेल की सख़्त नाराज़गी उनके अधिकृत ट्विटर हैंडल पर भी ज़ाहिर की है. सीएम भूपेश बघेल ने आगे लिखा है कि ‘भाजपा और आरएसएस ने आज फिर दिखा दिया कि उनका राष्ट्रवाद हिटलर और मुसोलिनी से प्रेरित है, लेकिन अंत हर तानाशाही का होता है.
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) का नया अध्यक्ष बनना अब तय हो गया है. उनकी इस नई टीम में जय शाह, अरुण धूमल, महिम वर्मा, बृजेश पटेल और जयदेव शाह शामिल हैं.
बता दें कि बीसीसीआई में हाल ही में पूर्वप्रशासकों के कई रिश्तेदारों के नाम हैं. बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर के छोटे भाई अरुण धूमल बीसीसीआई में कोषाध्यक्ष बनेंगे.
भारत के गृह मंत्री और गुजरात क्रिकेट संघ के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह सचिव बनेंगे. बीसीसीआई के अगले संयुक्त सचिव जयदेव शाह सौराष्ट्र क्रिकेट संघ के पूर्व अध्यक्ष निरंजन शाह के बेटे हैं. निरंजन शाह के भतीजे हिमांशु शाह भी सौराष्ट्र क्रिकेट संघ के सचिव हैं.
बीसीसीआई के पुराने प्रशासक एन श्रीनिवासन, निरंजन शाह, अनुराग ठाकुर, अमित शाह, परिमल नाथवानी और चिरायु अमिन जैसे लोग अब बीसीसीआई का हिस्सा नहीं हैं. लेकिन, 23 अक्टूबर से इन्हीं लोगों के बेटे-बेटियां और भाई-भतीजे बीसीसीआई का कामकाज देखेंगे.
बीसीसीआई और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन की बेटी रूपा गुरुनाथ तमिलनाडु क्रिकेट संघ की नई अध्यक्ष हैं. बीसीसीआई के पूर्व उपाध्यक्ष चिरायु अमीन के बेटे प्रणव बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं. जबकि बीसीसीआई के पूर्व सचिव दिवंगत जयवंत लेले के बेटे अजीत लेले बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव हैं.
बीसीसीआई और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के पूर्व अध्यक्ष दिवंगत जगमोहन डालमिया के बेटे अभिषेक डालमिया बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव हैं.
लखनऊ और दिल्ली के बीच तेजस एक्सप्रेस जबसे चली है, तब से उसे लेकर कई खबरें उड़ रही हैं. उन्हीं में से एक है कि तेजस अगर किसी भी प्लेटफॉर्म से निकलेगी तो उसे सबसे पहले प्रायोरिटी दी जाएगी. यानी कि उसे ही सबसे पहले निकाला जाएगा.
अब इस बात में कितनी सच्चाई है?
तेजस भारत की पहली निजी सार्वजनिक साझेदारी (PPP- Public Private Partnership) के तहत चलने वाली ट्रेन है. इसे पहले कॉर्पोरेट ट्रेन भी कहा जा रहा है. इसमें मिलने वाली सुविधाएं लोगों का ध्यान तभी से खींच रही हैं जब से ये लॉन्च हुई है. चाहे वो इसका इंटीरियर हो, या फिर फ्लाईट अटेंडेंट्स की तर्ज पर इनमें ट्रेन अटेंडेंट्स का होना. इसकी टिकटें दूसरी ट्रेनों के बनिस्बत महंगी हैं, और कहा ये जा रहा है कि तेजस को बाकी सभी गाड़ियों के ऊपर प्रायोरिटी दी जाएगी.
तेजस के लॉन्च वाले दिन भी सोशल मीडिया पर काफी अटेंशन खींची थी इस ट्रेन ने.
किन ट्रेनों को प्रायोरिटी मिलती है?
फ़र्ज़ कीजिए, कि एक साथ एक स्टेशन पर या एक जगह दो से अधिक ट्रेनें इकठ्ठा हो रही हैं. या किसी लाइन पर दो ट्रेनें क्रॉस कर रही हैं. अब उनमें से कोई पहले जाएगी, कोई बाद में. ये कैसे तय होगा कि पहले कौन सी ट्रेन जाएगी? इसके लिए रेलवे के कुछ नियम हैं. भारतीय रेलवे के ऑपरेटिंग मैन्युअल के अनुसार ट्रेनों की वरीयता का क्रम ये है:
# किसी दुर्घटना स्थल पर राहत के लिए जा रही ट्रेन. इसे सबके ऊपर प्राथमिकता दी जाएगी. चाहे कोई भी ट्रेन रास्ते में क्यों न हो.
# राष्ट्रपति और वीवीआईपी की ट्रेन. (भारत के राष्ट्रपति के लिए एक ख़ास ट्रेन चलती है, जिसे प्रेसिडेंशियल सैलून कहा जाता है. आखिरी बार इसमें एपीजे अब्दुल कलाम ने सफ़र किया था. उसके बाद इसे अनसेफ घोषित किया गया था. सरकार ने कहा नया सैलून बनवाने के लिए, लेकिन तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी ने इसके लिए मना कर दिया था. अब रेल मंत्रालय आठ करोड़ की लगत से नया सैलून बनवायेगा, ऐसी खबरें आ रही हैं)
# उस जोन की ट्रेन जो सबसे भीड़भाड़ वाली समय में चल रही हो. जैसे अगर कोई वेस्टर्न लोकल ट्रेन है जिसका उस समय वहां स्टेशन से निकलना बेहद ज़रूरी है, तो उसे बाकी ट्रेनों के ऊपर प्राथमिकता मिलेगी. (रेलवे के अलग-अलग जोन होते हैं, जैसे उत्तर पूर्व, उत्तर पश्चिम, कोंकण इत्यादि)
# सुपरफ़ास्ट ट्रेनें. जैसे राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, गतिमान एक्सप्रेस, गरीब रथ, तेजस. इनमें भी राजधानी को सबसे टॉप प्रायोरिटी पर रखा जाएगा. उसके बाद शताब्दी. फिर तेजस, गतिमान जैसी ट्रेनें आती हैं.
# मेल/ एक्सप्रेस ट्रेनें.
# मिलिट्री के लोगों के लिए चलाई जा रही स्पेशल ट्रेन (अगर इमरजेंसी कंट्रोल की तरफ से निर्देश दिए जा रहे हों तो)
# फास्ट पैसेंजर ट्रेन. (ये छोटे-छोटे स्टेशनों पर रुकती हैं, लेकिन हर स्टेशन पर नहीं. इनकी स्पीड आम पैसेंजर ट्रेन्स से थोड़ी ज्यादा होती है.
#स्पेशल ट्रेनें
# पैसेंजर ट्रेनें
# मिक्स्ड ट्रेनें
# मिलिट्री स्टोर वाली ट्रेनें
# स्पेशल गुड्स ट्रेनें (सामान ले जाने वाली)
# बिना किसी शंटिंग के सामान ले जाने वाली ट्रेनें
# राहत कार्य से लौट रही ट्रेनें
# शंटिंग वाले ट्रेनें
# डिपार्टमेंटल ट्रेनें
कौन सी ट्रेन पहले जाएगी, इस का निर्णय काफी सोच समझ कर ज़रूरत के हिसाब से लिया जाता है
ये आम तौर पर ट्रेनों की वरीयता का क्रम होता है. लेकिन ये बात भी साफ़-साफ़ निर्देश के तौर पर कही गई है इस मैन्युअल में कि सुरक्षा के लिए इसमें बदलाव किए जा सकते हैं. कुछ चीज़ें हैं जिनपर ध्यान देने की बात कही जाती है:
# जो पैसेंजर ट्रेन अपने गंतव्य पर पहुंचने के करीब हो, उसे रोका नहीं जाना चाहिए. भले ही उसके साथ कोई एक्सप्रेस या फास्ट ट्रेन (जो लम्बी दूरी की है) का कनफ्लिक्ट क्यों न हो रहा हो. ऐसा इसलिए क्योंकि लम्बी दूरी वाली ट्रेन के पास अपना समय सुधारने का / मेकअप करने का समय होता है. वो समय पर अपने गंतव्य पहुंच सकती है. लेकिन अगर पैसेंजर को रोक दिया जाए तो उसके पास इतना समय नहीं होगा कि वो अपने गंतव्य पर समय से पहुंचे.
# अगर सिग्नल पर क्रासिंग है, और वहां ऐसी ट्रेन खड़ी है जो बिल्कुल अपने समय पर चल रही है, तो उसे ज्यादा देर नहीं रोका जाना चाहिए.
# अगर कोई ट्रेन तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से लेट चल रही है, और आगे भी उसके लेट होने की आशंका है, तो आम तौर पर ठीक-ठाक या बिना किसी दिक्कत के चल रही ट्रेनों को उस पर वरीयता दी जाती है.
ये तो हमने बता दिया कि वरीयता की एक लिस्ट है जो फॉलो की जाती है. चाहे वो स्टेशन पर स्टेशन कंट्रोलर हों, या फिर ट्रेनों के रूट तय कर रहे कंट्रोलर. लेकिन अगर दो समान वरीयता वाली, या सेम ग्रुप की ट्रेनों में दिक्कत हो गई तो?
इसमें ये ध्यान रखा जाता है कि समय पर कौन सी ट्रेन चल रही है. जो समय पर होती है, उसे वरीयता मिलती है. जिस ज़ोन की वो ट्रेन होती है, उसे वरीयता मिलती है. अगर समान वरीयता की दो ट्रेनें आमने-सामने आ रही हैं, तो जिसका गंतव्य स्थान नज़दीक होता है, उसे वरीयता दी जाती है.
यानी दिल्ली से लखनऊ जाने वाली स्वर्ण शताब्दी और तेजस अगर किसी एक जगह पर एक साथ हों. तो दोनों में से उस ट्रेन को पहले सिग्नल दिया जाएगा जो समय पर चल रही है. इसी तरह मान लीजिए कि दिल्ली से रांची के लिए चली राजधानी और लखनऊ के लिए चली तेजस दोनों कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर आने वाली हैं. अब इन दोनों में उस ट्रेन को प्राथमिकता मिलेगी जो समय पर चल रही है और जिसका डेस्टिनेशन करीब है. इस स्थिति में चूंकि तेजस का डेस्टिनेशन यानी लखनऊ सिर्फ एक स्टेशन दूर है, इसलिए तेजस को पहले सिग्नल दिया जाएगा.
इसलिए तेजस की वरीयता वैसी ही है जैसी किसी भी सुपरफ़ास्ट ट्रेन की. राजधानी और शताब्दी के बाद इसी का नंबर आता है. लेकिन जैसा आपको हमने बताया, और भी कई कारक हैं जो ये तय करते हैं कि कौन सी ट्रेन किस स्टेशन/क्रासिंग/रूट से पहले निकलेगी.
इस बाबत दी लल्लनटॉप ने मिनिस्टर ऑफ स्टेट (रेलवेज) सुरेश अंगादी से बात की. उनसे पूछा कि तेजस को क्या सच में वरीयता दी जा रही है? क्या ऐसा कोई आधिकारिक निर्देश है उसे ये वरीयता देने का? उन्होंने बताया,
ऐसा कुछ नहीं है. तेजस के लिए लाइन क्लियर करने की कोई बात नहीं है. कोई स्पेसिफिक केस ऐसा सामने आ रहा हो, ऐसा भी नहीं है. ये हम भी सिर्फ मीडिया में ही देख रहे हैं. ये (तेजस) बाकी ट्रेनों की तरह ही है. इसमें सुविधाएं हैं, लोग उसके लिए पैसे दे रहे हैं. ट्रेन तो शताब्दी और बाकी ट्रेनों जैसी ही है. अगर ऐसा कहीं हो रहा है कि तेजस को प्रेफेरेंशियल ट्रीटमेंट दिया जा रहा है तो आप हमें बताइए. सरकार की तरफ से ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया गया है.
यानी सिग्नल के मामले में तेजस को कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं दिया जाता है और तय मैनुअल के हिसाब से ही उसे रास्ता दिया जाता है.
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ के युवाओं को विशेष अवसर एवं मंच प्रदान करने, सांस्कृतिक गतिविधियों से युवाओं को जोड़ने और उनकी प्रतिभा को निखारने के उद्देश्य से स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य में खण्ड, जिला एवं राज्य स्तरीय युवा महोत्सव मनाने का निर्णय लिया गया है। यह महोत्सव विकासखण्ड मुख्यालयों में 15 अक्टूबर से 15 नवम्बर के मध्य, जिला मुख्यालयों में 15 नवम्बर से 15 दिसंबर के मध्य और राजधानी रायपुर में राज्य स्तरीय महोत्सव 12 से 14 जनवरी के मध्य आयोजित किया जाएगा। युवा महोत्सव के सफल आयोजन के लिए मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।
युवा महोत्सव ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़‘ की थीम पर आधारित होगा। युवा महोत्सव में भारतीय संस्कृति एवं छत्तीसगढ़ की संस्कृति के आधारभूत मूल्यों का प्रदर्शन आवश्यक होगा। युवा महोत्सव में प्रत्येक विधा मंे निर्धारित संख्या के आधार पर ही प्रतिभागी भाग ले सकेंगे। विकासखण्ड स्तरीय युवा महोत्सव में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले कलाकार को ही जिला युवा महोत्सव में भाग लेने की पात्रता होगी और जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले कलाकार को ही राज्य स्तरीय युवा महोत्सव में भाग लेने की पात्रता होगी।
जिला कलेक्टरों से कहा गया है कि युवा महोत्सव का आयोजन ओपन कैटेगरी की प्रतियोगिता पर आधारित होगा, जिसमें अधिक से अधिक युवओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसके लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा पृथक से जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुरूप युवा महोत्सव आयोजित करें। युवा महोत्सव में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) एवं नेहरू युवा केन्द्र (एनवायके) जिला प्रमुखों की भागीदारी सुनिश्चित करें। विकासखण्ड एवं जिला स्तरीय आयोजनों में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करें। युवा महोत्सव आयोजन के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग नोडल विभाग होगा। युवा महोत्सव का प्रिन्ट, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया के जरिए तथा शहर के विभिन्न स्थानों पर होर्डिंग्स, विज्ञापन एवं बैनर आदि के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें। जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त करें, वे युवा महोत्सव के आयोजन की समीक्षा करेंगे।
थर्मल पावर की तरह सौर ऊर्जा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को हब बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। यह पॉवर हब डोंगरगढ़ के पास स्थापित होगा। राज्य विद्युत मंडल व क्रेडा दोनों ही एनटीपीसी के सहयोग से 2000 करोड़ निवेश करने जा रहे हैं। इनका लक्ष्य है कि अगले दो सालों में 500 मेगावाट बिजली इस हब में तैयार हो। इससे बिजली की कीमतें कम होने के आसार हैं। इसका सीधा फायदा राज्य के लोगों को मिलेगा। वैसे सरकार हर साल 200 मेगावाट अतिरिक्त सोलर एनर्जी पैदा करने की योजना पर पहले से ही काम कर रही है।
बता दें कि छत्तीसगढ़ पहले से ही पॉवर सरप्लस राज्यों में शामिल है। अभी राज्य में वास्तविक मांग का पांच गुना बिजली बनाने की कैपेसिटी है। वितरण कंपनी के लगभग 5 हजार मेगावाट की मांग के विरूद्ध राज्य में 15 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जबकि इंस्टाल्ड केपेसिटी 22 हजार से 23 हजार मेगावाट है। इसमें 13 हजार मेगावाट थर्मल पॉवर, 485 मेगावाट सोलर एनर्जी, 272 मेगावाट जलविद्युत अाैर 234 मेगावाट बायोमास से उत्पादन हाे रहा है। छत्तीसगढ़ को सोलर पावर हब बनाने और इस बिजली को कम दर पर स्टोर करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित किया गया है। फिलहाल, राज्य में राज्य में रिन्युएबल एनर्जी के जरिए 485 मेगावाट बिजली बन रही है। डोंगरगढ़ के नए पावर हब के लिए भूमि अधिग्रहण के साथ प्लांट्स के लिए टेंडर भी शुरू कर दिए गए हैं। इसमें सोलर और विंड एनर्जी के अलावा बायोमास प्लांट्स दोनों शामिल है। देश में जल्द ही सोलर और विंड एनर्जी के द्वारा 30 हजार मेगावाट बिजली पैदा करने की इंस्टाल्ड केपेसिटी होगी। क्रेडा के सीईओ आलोक कटियार ने कहा कि राज्य में रिन्युएबल एनर्जी खासकर सोलर एनर्जी अाैर बायाेमास की अपार संभावनाएं है। स्टोरेज कैपेसिटी बढ़ाकर रिन्युएबल एनर्जी से ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनी के चेयरमैन शैलेंद्र शुक्ला ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राज्य को अफोर्डेबल एनर्जी की दिशा में ले जाना चाहते हैं। इसके लिए सोलर और विंड एनर्जी के स्टोरेज दर को थर्मल पॉवर से कम करने की कोशिश है। इसके लिए 4 रुपए प्रति यूनिट की दर पर सोलर एनर्जी को स्टोर करने और बेहतर तकनीक के लिए एमओयू करने की कोशिश की जा रही है। आने वाले समय में सोलर और विंड एनर्जी को थर्मल पॉवर से कम दर में स्टोर किया जा सकेगा। रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में राज्य में भी बहुत जल्द बदलाव नजर आने लगेगा, खासकर सोलर एनर्जी के क्षेत्र में। हम 500 मेगावाट के प्लांट लगाने जा रहे हैं। सारी प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
प्रत्यक्ष विधि से चुनाव की स्थिति में राज्य निर्वाचन आयोग को मेयर और अध्यक्षों के व्यय निरीक्षण के लिए प्रेक्षकों, चैक पोस्ट, आबकारी, राज्य के राजस्व विभाग और टैक्स अधिकारियों की तैनाती भी करनी पड़ती। अब इनकी जरूरत नहीं पड़ेगी इनके मानदेय का करीब दस लाख रुपए बचेगा। चैक पोस्ट वीडियो सर्विलांस के लिए जिलों को सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ ये सारे प्रबंध आउटसोर्स करने पड़ते हैं। इसमें भी अनुमानित रूप से करीब तीस लाख रुपए की बचत होगी। ईवीएम से चुनाव करवाने में पूरे चुनाव के दौरान समय-समय पर तकनीकी मदद के लिए हैदराबाद से ईवीएम बनाने वाली कंपनी ईसीआईएल से इंजीनियरों को बुलवाना पड़ता। ट्रांसपोर्ट वगैरह को मिलाकर औसतन दस से तीस लाख रुपए का खर्च भी बचेगा। वार्ड मेंबर के वोट ही गिने जाएंगे इसमें वोटों की गिनती के लिए कम अमला लगेगा।
बैलेट बनाम ईवीएम
नगरीय निकायों के 3217 पार्षदों और वार्ड मेंबरों के चुनाव के लिए पचास लाख से भी ज्यादा वोटरों के लिए बैलेट पेपरों की छपाई होगी। इसमें प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने की संख्या के आधार पर बैलेट का आकार तय होगा। आम तौर पर एक बैलेट पेपर की छपाई में 5 रुपए न्यूनतम से अधिकतम 250 रुपए तक का खर्च होने का अनुमान है। हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग के पास डबल वोटिंग वाली कुल 10 हजार कंट्रोल यूनिट और 20 हजार बैलेट यूनिट हैं। एक ईवीएम की औसत लागत 12 से 15 हजार रुपए के बीच है। इस तरह लगभग 25 करोड़ रुपए की ईवीएम मशीनें इस बार इस्तेमाल नहीं होंगी।
ये खर्च अनुमानित
व्यय प्रेक्षकों का खर्च (ट्रेनिंग से लेकर चुनाव के दौरान
गाड़ियों से घूमने वगैरह का) – 25 से 30 लाख रुपए
ईवीएम के लिए तकनीकी सलाह ट्रेनिंग – 10 से 30 लाख रुपए
सुरक्षा बलों की तैनाती – 10 से 50 लाख करीब
वाहनों पर होने वाला अतिरिक्त खर्च – 10 से 50 लाख रुपए
चुनाव संचालन से जुड़े विविध खर्च – 10 से 50 लाख रुपए
कुछ खर्च पहले से कम, कुछ वैसे ही
आयोग विधानसभा व लोकसभा चुनाव की तरह मतदाताओं के घरों तक पर्चियां नहीं पहुंचाता है। इस मद के बीस लाख रुपए स्वभाविक रूप से बच जाते हैं। अमिट स्याही में नगरीय व ग्रामीण चुनाव को मिलाकर 65 लाख की अमिट स्याही खर्च होगी।