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Health Tips: बाल हो रहे हैं उम्र से पहले सफेद! ये हो सकती है वजह

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आजकल समय से पहले कई लोगों में बाल सफेद होने की समस्या सामने आ रही है. यहां तक कि कई बार स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के बाल भी पकने लगते हैं. कई बार इसके लिए अनियमित जीवनशैली को जिम्मेदार करार दिया जाता है जबकि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. हालांकि हमारा खानपान और आदतें एक मुख्य वजह है इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन उन कारणों को भी जानना जरूरी है जिनसे आपको पता चल सके कि क्यों असमय सफेद हो रहे हैं आपके बाल…

विटामिन की कमी:

विटामिन केवल बॉडी के लिए ही नहीं बल्कि बालों के लिए भी बेहद जरूरी होते हैं. अगर आपके शरीर में विटामिन B-6, B-12, बायोटिन (biotin), विटामिन D या विटामिन E की कमी है तो आपके सामने समय से पहले बाल सफेद होने की समस्या सामने आ सकती है. साल 2015 में एक journal Development notes में भी ये बात सामने आ चुकी है.

अनुवांशिक कारण:

साल 2013 में प्रकाशित इंडियन जनरल ऑफ़ डर्मेटोलॉजी, वेनेरोलॉजी और लेप्रोलॉजी (Indian Journal of Dermatology, Venereology and Leprology) के अनुसार असमय बाल सफेद होने की समस्या के पीछे अनुवांशिक कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं.

स्मोकिंग:

साल 2013 में प्रकाशित Italian Dermatology Online Journal के मुताबिक़ स्मोक करने वाले 2 1/2 लोगों में 30 साल की उम्र से पहले ही बाल सफेद होने की समस्या शुरू हो जाती है बजाये कि उन लोगों के जो धूम्रपान नहीं करते हैं.

अयोध्या केस की सुनवाई खत्म होने में 72 घंटे बाकी, अब आगे क्या होगा?

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उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 17 अक्टूबर को खत्म हो जाएगी. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या केस की रोजाना सुनवाई 5 अगस्त से शुरू हुई थी. तभी से हफ्ते में पांच दिन ये केस सुना जा रहा है. बीते दिनों से इस मामले की सुनवाई कोर्ट में एक घंटे अधिक हो रही है. अब तक मुस्लिम और हिंदू दोनों ही पक्ष दलीलें दे चुके हैं. अब क्रॉस क्वेश्चन होना बाकी है, जो अगले 72 घंटों में पूरा कर लिया जाएगा.

मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई ने पहले ही कह दिया था कि अयोध्या मामले की सुनवाई 17 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाए. इसके बाद फैसला लिखने के लिए कम से कम एक महीने का वक्त लगेगा. माना जा रहा है कि नवंबर के दूसरे-तीसरे हफ्ते में अयोध्या मामले पर शीर्ष अदालत का फैसला आ सकता है. ऐसे में सबकी नज़र सुप्रीम कोर्ट में अगले तीन दिन की सुनवाई पर है. बता दें कि मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है. इस संवैधानिक पीठ में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर भी शामिल हैं.

सुनवाई के आखिरी दौर के कारण अयोध्या में 10 दिसंबर तक धारा 144 (Section 144) लागू कर दी गई है. हालांकि, अयोध्या में आने वाले दर्शनार्थियों और दीपावली महोत्सव पर धारा 144 का कोई असर नहीं होगा.

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सुप्रीम कोर्ट में 5 अगस्त से अयोध्या केस की रोजाना सुनवाई हो रही है.

पूरी तरह से अलर्ट है प्रशासन
बताया जा रहा है कि धारा 144 लागू करने के पीछे अयोध्या विवाद का संभावित फैसला और विश्व हिंदू परिषद (VHP) की दीपोत्सव मनाने की मांग है. साथ ही मुस्लिम पक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है. वहीं अयोध्या पर आने वाले फैसले को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट है.

इन पक्षों के क्या दावे हैं?

अयोध्या में विवादित जमीन को लेकर दायर 14 याचिकाओं में तीन प्रमुख हैं, जो निर्मोही अखाड़ा, राम लला विराजमान और सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से दायर किए गए हैं. निर्मोही अखाड़ा का मुख्य दावा संप्रदाय की सामूहिक स्मृति पर आधारित है, जिसकी स्थापना 14वीं शताब्दी में संत-कवि रामानंद ने की थी. निर्मोही अखाड़े का ये भी दावा है कि वे सात शताब्दियों से भगवान राम के भक्त हैं. ऐसे में अयोध्या में राम जन्मभूमि कहे जाने वाली भूमि पर उनका अधिकार है.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या की विवादित जमीन पर फैसला दिया था.

अयोध्या ज़मीनी विवाद में आठ मुस्लिम पक्षकार हैं जिनमें चार निजी याची इकबाल अंसारी, हाजी महबूब, मोहम्मद उमर, मिजबाहुद्दीन और मौलाना महफूजुर्रहमान हैं. जबकि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद का रिप्रेजेंटेटिव सूट है. इनमें से ज़्यादातर याची पहले से ही विवादित जमीन छोड़ने को लेकर लचीला रुख़ रखते हैं. इनमें इकबाल अंसारी और हाजी महबूब भी शामिल हैं.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या दिया था फैसला?
इसके पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या की विवादित जमान पर फैसला दिया था. कोर्ट ने 2.77 एकड़ जमीन को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. इस फैसले के खिलाफ 14 याचिकाएं दायर की गई थीं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मई 2011 में हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी और विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया. बीच-बीच में इन 14 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होती रही. 5 अगस्त से अयोध्या केस की शीर्ष अदालत में रोजाना सुनवाई हो रही है.

जब आलू खाने से 8 गुनी बढ़ गई इस देश की आबादी

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आलू  हम सभी के घर हर वक्त मौजूद रहने वाली सब्जी है. आलू से हम न जाने कितने ही नमकीन, मीठी, तीखे और खट्टे व्यंजन बना सकते हैं. शायद ही कोई ऐसा हो जिसने कभी आलू न खाया हो.

वैसे ये आलू बस खाने के ही काम नहीं आता. ये बड़े काम की चीज है. यही खाने वाला आलू आपकी चोट भी ठीक कर सकता है. अगर आपका हाथ किसी धारदार चीज़ से कट गया है तो आप तुरंत उस पर आलू को काटकर रगड़ लें. इससे खून बहना तुरंत बंद हो जाता है. यही नहीं अगर आपके काम की पुरानी सीडी या डीवीडी स्क्रैचेज़ की वजह से ठीक से काम नहीं कर रही है तो उस पर आप आलू रगड़ दें. वह दोबारा पहले की तरह काम करने लगती है.

हां, हां इंटरनेट पर आपने आलू से मोबाइल चार्ज करने वाले वीडियो भी जरूर देखे होंगे, लेकिन उनके चक्कर में अपना मोबाइल मत खराब कीजिएगा. बहरहाल ये तो रही आलू के इस्तेमाल की बात लेकिन क्या आपको मालूम है कि सारी सब्जियों के साथ फिट हो जाने वाला आलू आपके सब्जी के थैले में आया कहां से?

आज हर घर में मौजूद रहने वाले आलू को पुर्तगाली भारत लेकर आए 1498 में. कहा जाता है कि पुर्तगाली भारत से मसालों के बदले में आलू दे गए. उस समय भारत में आया आलू यहीं का होकर रह गया और धीरे-धीरे सब्जियों का राजा बन गया.

पुर्तगाली 1498 में आलू को भारत लेकर आए. उसके बाद से आलू यहीं का होकर रह गया.

लूटने गए थे सोना-चांदी मिल गए आलू

आलू की पैदाइश दक्षिण अमेरिका के पेरू की बताई जाती है. इतिहासकारों का मानना है कि पेरू में 8000 साल से आलू की खेती हो रही है.

पेरू में 1438 से 1532 तक राज करने वाले इंका साम्राज्य का आलू की खेती में बड़ा योगदान माना जाता है. बताया जाता है कि इंका सभ्यता के लोग कुशल कृषक थे और इन्होंने ही सीढ़ीदार खेतों पर खेती करने की शुरुआत की थी.

1532 में स्पेन ने सोना-चांदी लूटने के मकसद से पेरू पर हमला किया. वहां उन्हें सोना-चांदी तो मिला ही साथ ही उनका परिचय आलू से भी हुआ. वहां से शुरू हुआ आलू का सफर पूरी दुनिया में फैल कर ही खत्म हुआ.

200 तक किसी ने पूछा सब्जियों के राजा को

आलू जब यूरोप पहुंचा तो लंबे समय तक वहां के लोगों ने उसे खाया ही नहीं क्योंकि यूरोप के लोग बेस्वाद और दिखने में बुरी लगने वाली चीजें खाते ही नहीं थे.

लातीनी देशों में प्राचीन समय में आलू और आलू की देवी कही जाने वाली अक्सोमामा को पूजने की प्रथा थी, ताकि आलू की बेहतर फसल उन्हें मिल सके

अब आलू पूरे यूरोप में फैल ही गया था तो ऐसे में आलू जिस बैलेडैना नाम के पौधे के नीचे लगता उसका इस्तेमाल वह सजावट के लिए कर लेते. पूरे यूरोप को आलू को अपनाने में 200 साल लग गए. तब तक ये निचले वर्ग के लोगों के लिए भोजन का मुख्य हिस्सा बन चुका था.

आलू के कारण बढ़ी और कम हुई जनसंख्या

यूरोप के ही एक और देश आयरलैंड में आलू के इस्तेमाल के बाद से कुछ अलग ही परिणाम देखने को मिला. बताया जाता है कि सन् 1590 से लेकर 1845 के बीच आयरलैंड की जनसंख्या बेहद तेज़ी से बढ़ती हुई 10 लाख से 80 लाख तक पहुंच गई.

इसके बाद जो हुआ वह इतिहास में दर्ज अपने जैसा एक अनोखा मामला है. दरअसल आयरलैंड में 1845 से 1849 तक आलू की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई. उस वक्त वहां की करीब 40 प्रतिशत जनसंख्या के भोजन का मुख्य हिस्सा आलू ही था.

परिणाम ये हुआ कि लाखों लोग भूख से मरने लगे और करीब 20 लाख लोग अपने घर छोड़कर दुनिया के दूसरे हिस्सों में चले गए. इससे अचानक वहां की जनसंख्या में 20-25 प्रतिशत की कमी आ गई. लेकिन यहीं आलू का अंत नहीं हुआ. 1849 के बाद धीरे-धीरे आलू की फसल स्वस्थ होती गई और एक बार फिर यूरोप की जनसंख्या बढ़ने लगी.

अंग्रेज गए तो अंग्रेजी छोड़ गए, पुर्तगाली गए तो आलू

जिसे आप आलू के नाम से जानते हैं उसे पुर्तगाली बटाटा कहते हैं. भारत के समुद्री छोरों खासकर कि गोवा और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में आज भी आलू को बटाटा ही कहा जाता है.

भारत में आलू आ तो पहले ही चुका था लेकिन सन् 1850 में जब अंग्रेजी साम्राज्य भारत में अपनी जड़ें पूरी तरह से जमा चुका था. तब उन्होंने ही भारतीयों को आलू बनाना सिखाया. धीरे-धीरे भारत में आलू की खेती शुरू हुई.

भारत में आलू की खेती 1850 में शुरू हुई. अब तो भारत दुनिया के बड़े आलू उत्पादकों में है

आलू भारत के लिए कितना ज़रूरी होता गया इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों ने सन् 1935 में शिमला, कुफरी हिमाचल और कुमायूं हिल्स में पोटैटो ब्रीडिंग सेंटर की शुरुआत कर दी. बाद में भारत सरकार ने इसका नाम सेन्ट्रल पोटैटो रिसर्च इंस्टिट्यूट कर दिया और इन तीनों रिसर्च सेंटर को मिलाकर 1956 में शिमला को हेडक्वाटर बनाया. इसी बीच सन् 1949 में पटना में इस संस्थान की एक और शाखा खुल चुकी थी.

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बता दें चावल और गेंहू के बाद आलू ही स्टेपल फूड के रूप में भारत की तीसरी मुख्य फसल है. दुनिया भर में चीन और रूस के बाद भारत सबसे ज़्यादा आलू उगाता है. तमिलनाडु और केरल को छोड़कर हमारे देश के हर राज्य में आलू का उत्पादन होता है. भारत में पटैटो रिसर्च सेंटर शिमला ने 48 उन्नत किस्मों का विकास किया है, जिसे भारत भर के किसान आलू की खेती में इस्तेमाल करते हैं. पूरी दुनिया में आलू की तकरीबन 5000 किस्में लोग इस्तेमाल कर रहें हैं. वहीं अभी तक जंगली आलू की 200 से अधिक प्रजातियां खोजी जा चुकी हैं.

केटी प्राइस ने अपने बचपन के नियम साझा किए…

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सिंगर केटी प्राइस ने हाल ही में अपने स्कूली दिनों की कॉपी के कुछ पन्ने सोशल मीडिया पर साझा कर अपने बचपन के नियम साझा किए। मिरर डॉट को डॉट यूके की रिपोर्ट के अनुसार, केटी ने इस सप्ताहांत पर इंस्टाग्राम स्टोरी पर अपनी 12 साल की उम्र के समय के कुछ पुराने नोट्स साझा किए।

उनकी लिस्ट में यह भी शामिल था कि उन्हें कसम भी नहीं खानी चाहिए।

नियमों के अनुसार, उन्हें हमेशा अपने माता और पिता का सम्मान करना चाहिए और व्याभिचार नहीं करना चाहिए।

उनकी नियमों की लिस्ट में आगे लिखा है, ‘उन्हें किसी पर झूठा आरोप नहीं लगाना चाहिए, और किसी से ईष्र्या नहीं करनी चाहिए।’

प्राइस (41) ने एक पेज भी शेयर किया, जिसमें एक निबंध था, जिसका शीर्षक था ‘व्हेन आई ग्रो अप’।

निबंध में लिखा था, ‘जब मैं बड़ी होऊंगी (व्हेन आई ग्रो अप) तो मुझे उम्मीद है कि मुझे एक अच्छा और सुंदर पुरुष मिलेगा, जिसके पास बहुत सारा पैसा होगा और मैं चाहती हूं कि मेरे पास घोड़ों का अस्तबल हो और मैं पूरी दुनिया घूमना चाहती हूं।’

क्या करीना कपूर की भाभी बनेगी ये अभिनेत्री, जानिए…

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आलिया और रणबीर फिल्म ब्रह्मास्त्र की शूटिंग के दौरान ऑन स्क्रीन कपल बने और इस दौरान दोनों को एक-दूसरे का साथ इतना पसंद आया कि इन्हें एक-दूसरे से प्यार हो गया। दोनों मीडिया को दिए अलग-अलग इंटरव्यूज में जाहिर कर चुके हैं कि वे एक-दूसरे को कितना पसंद करते हैं। आलिया भट्ट अक्सर कपूर फैमिली के मैंबर्स से मिलती रहती हैं। खासतौर पर रिद्धिमा कपूर और नीतू कपूर से उनकी मुलाकात होती रहती है। जब ऋषि कपूर बीमार चल रहे थे तो आलिया भट्ट उनके लिए भी फिक्रमंद नजर आईं। इन सभी चीजों से अटकलें लगाई जा रही थीं कि आलिया भट्ट और रणबीर कपूर जल्द ही शादी कर सकते हैं। अब करीना कपूर के नए बयान से लग रहा है कि इनकी शादी के दिन दूर नहीं हैं। दरअसल करीना कपूर ने करण जौहर को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि अगर आलिया भट्ट उनकी भाभी बनती हैं तो वह दुनिया की सबसे खुश महिला होंगी।

MAMI फिल्म फेस्ट‍िवल के दौरान करीना कपूर ने आलिया को लेकर दिया बयान
मुंबई में आयोजित हुए जियो MAMI फिल्म फेस्ट‍िवल में फिल्ममेकर करण जौहर ने रणबीर और आलिया की शादी को लेकर करीना से सवाल किया कि क्या उन्होंने कभी ऐसे दिन के बारे में सोचा है जब आलिया उनकी भाभी होंगी। इस पर करीना कपूर ने कहा, ‘अगर ऐसा होता है तो मैं दुनिया की सबसे खुश लड़की होऊंगी।’ आलिया भट्ट ने इस पर कमेंट करते हुए अपनी पॉजिटिविटी जाहिर की। आलिया ने कहा, ‘सच में, मैंने कभी इस बारे में नहीं सोचा है, लेकिन मैं इस विषय में अभी भी सोचना नहीं चाहती। जब वक्त आएगा, तब देखेंगे।’ इस पर करण जौहर ने अपना शानदार जवाब दिया, ‘जब भी ऐसा होगा तो मैं बहुत खुश होऊंगा और एक थाली पकड़े वहां खड़ा मिलूंगा।’

करीना कपूर से इंस्पायर्ड हैं आलिया भट्ट
आलिया भट्ट लंबे समय से करीना कपूर की प्रशंसक रही हैं। करीना कपूर की फिल्मों की अक्सर ही आलिया भट्ट ने तारीफ की है। साल 2017 में उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मैं करीना की फैन हूं। मैं उनकी फिल्में देखकर ही बड़ी हुई हूं। वह मेरी इस्पिरेशन ही नहीं हैं, बल्कि मेरी फेवरेट भी हैं।’

करण जौहर ने की करीना कपूर की तारीफ
करीना कपूर ने अपने करियर के साथ-साथ अपने परिवार को भी पर्याप्त समय दिया और वर्कलाइफ बैलेंस स्थापित करने में कामयाब रहीं। इस बात के लिए करीना कपूर की अक्सर तारीफ की जाती है।

सलमान खान के साथ 2009 में फिल्म कर छोड़ दिया था बॉलीवुड, जब आई अब कैमरे के सामने तो लगी शर्माने..

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हम आपको एक ऐसी ही अभिनेत्री के बारे में बताने वाले हैं जिनका नाम आयशा टाकिया है। आयशा को आपने बॉलीवुड फिल्मों में देखा होगा। आयशा भी बॉलीवुड में ज्यादा सफल नहीं हो सकी और पिछले 10 सालों से इन्हें फिल्म नहीं मिली। और हाल ही में वह अपने पति के साथ पार्टी में दिखी।

पति के साथ पार्टी में आई तो लगी शर्माने
आयशा टाकिया 33 साल की हो गई है और जब से वह फिल्मों से दूर हुई है तब से वह लाइमलाइट से भी दूर हो गई है और अपने शादीशुदा जीवन में काफी व्यस्त हो गई है। हाल ही में वह देर रात अपने पति फरहान आजमी के साथ एक पार्टी में पहुंची और इतने समय बाद जब वह कैमरे के सामने दिखी तो शर्माने लगी।

पार्टी में आयशा के साथ उनका क्यूट सा बेटा भी था और ब्लैक कुर्ते में बेहद प्यारा भी लग रहा था। वही बात की जाये आयशा की तो लॉन्ग कुर्ता और प्लाजो में वह भी हॉट लग रही थी उन्होंने अपने चेहरे पर काफी मेकअप किया हुआ था जो कैमरे की फ्लैश में साफ दिखाई दे रहा था। कैमरामैन जब उन्हें अपने कैमरे में कैद करने लगा तो वह पोज देते समय शर्माने लगी। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उन्हें इसे लेकर ट्रोल भी कर दिया।

राजकुमारी रत्ना सिंह आज थामेंगी BJP का दामन, पिता थे इंदिरा-राजीव गांधी के करीबी…

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प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से तीन बार की सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह आज (मंगलवार) को कांग्रेस का दामन छोड़ देंगी. मंगलवार को गड़वारा में होने वाली सीएम योगी आदित्यनाथ की चुनावी जनसभा में वह बीजेपी में शामिल होंगी. इस दौरान उनके बेटे भुवन्यु सिंह भी मौजूद रहेंगे.

शुरू से ही कांग्रेसी रहा ये राजपरिवार

रत्ना सिंह कालाकांकर राजघराने से हैं. यह राजपरिवार शुरू से ही कांग्रेसी रहा है. रत्ना सिंह पूर्व विदेश मंत्री राजा दिनेश सिंह की बेटी हैं. राजा दिनेश सिंह प्रतापगढ़ से चार बार और उनकी बेटी राजकुमारी रत्ना सिंह तीन बार 1996, 1999 और 2009 में सांसद रह चुकी हैं.

कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में शामिल

इनके परिवार के रामपाल सिंह कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे हैं. पिता दिनेश सिंह कांग्रेस पार्टी में इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के बहुत करीबी लोगों में शामिल थे. इसके चलते नेहरू-गांधी परिवार उनको बहुत महत्व देता था. बिना सांसद रहे भी उनको मंत्री बनाया गया था.

ये रही वजह

रत्ना सिंह स्थानीय नेताओं और सैकड़ों समर्थकों के साथ कांग्रेस छोड़ेंगी. रत्ना सिंह लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद से ही नाराज चल रहीं थीं. प्रियंका गांधी खेमे से ज्यादा महत्व नहीं मिलने से भी वह नाराज थीं. उनकी नाराजगी तब और बढ़ गई जब अजय लल्लू को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया.

विधायक अदिति सिंह के बाद कांग्रेस के लिए ये दूसरा झटका होगा.

रत्ना सिंह का बीजेपी में शामिल होना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका होगा. रत्ना सिंह के बीजेपी में शामिल होने को लेकर कुछ समय पहले से लोग सोशल मीडिया पर अटकलें लगा रहे थे.

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी में शामिल होने का कार्यक्रम पहले लखनऊ में तय था. लेकिन गड़वारा रैली में शामिल होने से प्रतापगढ़ सदर की विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में बीजेपी के सहयोगी अपना दल के प्रत्याशी को मजबूती मिल सकती है.

ये बाइक डिज़ाइन में भी है दमदार देगी इस बाइक को टक्कर..

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इस बाइक पर बेहद गाढ़ा लाल और क्रीम कलर के पेंट स्कीम का इस्तेमाल किया गया है, जो 1929 में बनाई गई जावा 500 मोटरसाइकिल से मिलता जुलता है। जहाँ अन्य जावा बाइक्स की डिलीवरी 2 से 3 महीने के बीच होनी है वही इस बाइक की डिलीवरी कंपनी ग्राहक के बुक करने के बाद बहुत जल्द ही कर देगी।

जावा बाइक्स को मुख्य रूप से रॉयल एनफील्ड बाइक्स को टक्कर देने के लिए लॉन्च किया गया था। जावा बाइक्स के लॉन्च होते ही रॉयल एनफील्ड बाइक्स के सेल में गिरावट दर्ज की गई थी। क्योंकि जावा 300 बाइक भी रॉयल एनफील्ड को टक्कर देने के लिए ही बनी है इसलिए इसका डिज़ाइन भी रॉयल एनफील्ड बाइक्स की तरह बेहद क्लासिक है। इस बाइक में 293 सीसी का इंजन देखने को मिलता है। जो अधिकतम 26 बीएचपी का पावर 28 न्यूटन मीटर के टार्क पर प्रदान करता है। यह इंजन 6 स्पीड गियरबॉक्स द्वारा संचालित किया जाता है।

इस बाइक में टेलेसकॉपिक फ्रंट और रियर में ड्यूल स्प्रिंग सस्पेंशन के साथ ब्रेकिंग के लिए फ्रंट और रियर डिस्क ब्रेक के साथ एबीएस शामिल है। सिंगल चैनल एबीएस की कीमत 1.64 लाख रुपये वही ड्यूल चैनल एबीएस की कीमत 1.72 लाख रुपये रखी गई है। आने वाले समय में जावा अपनी बाइक्स के तीन नए मॉडल को लॉन्च करने वाली है। जो रॉयल एनफील्ड बाइक्स के सेल पर सीधा असर डालेंगी।

गर्ल्स को बेहद पसंद आते है इस टाइप के mirror लगे लहंगे…

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लड़कियों को हद से ज्यादा एक रंग सुंदर लगने लग जाता हैं तो लड़कियां ज्यादातर एक ही कलर के ऑउटफिट के रूप में पिंक कलर के ही ड्रेस का चयन करती है।

ये हैं पिंक कलर की मिरर वर्क डिजाइन लहंगा चोली ड्रेसेस
शादी में लहंगा पहन रही हों तो यह पिंक कलर का मिरर वर्क डिजाइन का लहंगा चोली ड्रेस कैरी करें| यह आकर्षक मिरर वर्क लहंगा चोली की खूबसूरती आपका दिल लूट लेगी|

शादी में लडकियाँ ग्लैमरस लुक पाने के लिए इस तरह के लेटेस्ट व ट्रेंडी मिरर वर्क लहंगा चोली पहन सकती हैं जो आपको खूबसूरती के साथ स्टाइलिश लुक देंगे|

शादी में लडकियाँ अलग हटकर लुक पाने के लिए पिंक कलर का मिरर वर्क व लटकन डिजाइन का लहंगा चोली ड्रेस पहन सकती हैं| यह ड्रेस आपको शादी के अवसर पर ट्रेडिशनल लुक देंगी|

भाजपा को कब मिलेगा नया राष्ट्रीय अध्यक्ष, अमित शाह ने खुद बताया…

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 गृह मंत्री के तौर पर अमित शाह के पदभार संभालने के बाद से ही भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। दरअसल भाजपा के संविधान के मुताबिक, एक व्यक्ति एक पद पर ही रह सकता है। ऐसे में अमित शाह के मंत्री बनने के बाद भाजपा के नए अध्यक्ष का चुनाव होना है। वर्तमान में अमित शाह ही भाजपा के अध्यक्ष हैं और पूर्व केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस बीच अमित शाह ने बताया है कि भारतीय जनता पार्टी को उसका अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कब मिलेगा।’कब मिलेगा भाजपा को नया अध्यक्ष’

सोमवार को अमित शाह ने बताया, ‘अभी भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक चुनाव चल रहे हैं, जो इस साल के अंत तक खत्म होंगे। इसके बाद भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन किया जाएगा। उम्मीद है कि भाजपा को दिसंबर तक नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल जाएगा।’ साथ ही अमित शाह ने इस बात को खारिज किया कि नया अध्यक्ष चुने जाने के बाद भी वो पर्दे के पीछे से पार्टी में ‘सुपर पावर’ बने रहेंगे। उनसे पूछा गया कि कई लोगों का मानना है कि वह ‘सुपर पावर’ बने रहेंगे और भाजपा अध्यक्ष के पद पर ना होने के बावजूद पार्टी के मामलों में उनका दखल रहेगा।

‘कांग्रेस की तरह नहीं है भाजपा’

अमित शाह ने कहा, ‘ऐसी ही बातें उस वक्त भी कही गईं थी, जब 2014 में मैंने पार्टी अध्यक्ष के तौर पर कार्यभार संभाला था। जैसे ही पार्टी के नए अध्यक्ष का चुनाव होगा, इस तरह की कयासबाजी अपने आप ही बंद हो जाएगी। भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस पार्टी की तरह नहीं है, जहां पर्दे के पीछे से कोई पार्टी का संचालन करे। भाजपा हमेशा अपने संविधान के अनुसार ही चलती है।’ आपको बता दें कि ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा के वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ही पार्टी के नए अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। जेपी नड्डा का नाम पिछले काफी समय से राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद के लिए चर्चाओं में है।

शाह ने बताया, महाराष्ट्र में कौन होगा सीएम

वहीं, अमित शाह ने महाराष्ट्र में सीएम पद को लेकर भाजपा और शिवसेना के नेताओं के बीच चल रही बयानबाजी पर भी जवाब दिया। अमित शाह से पूछा गया कि भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना लगातार यह दावा कर रही है कि इस बार महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री उनकी पार्टी से होगा। इसपर शाह ने कहा, ‘भारतीय जनता पार्टी का गठबंधन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ रहा है और चुनावों में जीत हासिल करने के बाद फडणवीस ही राज्य के सीएम होंगे।’