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पीएम मोदी को बदनाम करने के लिए पाकिस्तानियों ने की ऐसी हरकत!

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दूसरी अनौपचारिक वार्ता करने के लिए शुक्रवार (11 अक्टूबर) की सुबह तमिलनाडु आए थे। इस दौरान ट्विटर पर #GoBackModi ट्रेंड में बना हुआ था। ऐसा कहा गया कि हैशटैग GoBackModi पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित किया गया था। खुफिया एजेंसियों की एक जांच ने ट्विटर पर #GoBackModi ट्रेंड में पाया कि इसमें से ज्यादातर ट्वीट पाकिस्‍तानी यूजर्स के थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक जैसे ही पीएम मोदी 11 अक्टूबर को तमिलनाडु एयरपोर्ट पर पहुंचे पाकिस्तान के ट्विटर हैंडल से काफी मात्रा में हैशटैग गोबैक मोदी के साथ ट्वीट किए गए।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि #GoBackModi ट्रेंड के साथ ट्वीट करने वाले पाकिस्तानियों में ज्यादातर ट्विटर हैंडल ऐसे हैं, जो चरमपंथी समूहों के साथ जुड़े हुए हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया था कि जब पिछले महीने में भी पीएम मोदी ने तमिलनाडु का दौरा किया था को इन यूजर्स ने विरोधी ट्वीट किए थे।

इस बार खुफिया एजेंसियों ने ट्विटर हैंडल और प्रोफाइल को ट्रैक किया और भारत विरोधी प्रचार के एक आम सूत्र का पता लगाया। हालांकि, शनिवार सुबह से एक नया हैशटैग DontGoBackModi ट्विटर पर छाया हुआ है। जब मोदी तमिलनाडु में थे तब भारतीय एजेंसियां ट्विटर पर #GoBackModi ट्रेंड की जांच कर रही थी।

अयोध्या मामले में फैसला मुसलमानों के पक्ष में आएगा : मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

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अयोध्या मामले की सुप्रीमकोर्ट में हो रही सुनवाई को लेकर आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने शनिवार को उम्मीद जताई कि फैसला मुसलमानों के पक्ष में आएगा। बोर्ड की कार्यकारिणी कमेटी की यहां नदवतुल उलमा में हुई बैठक में अयोध्या मामले, समान नागरिक संहिता और तीन तलाक के मामले पर खुलकर चर्चा हुई। हालांकि इस बैठक से मीडिया को दूर रखा गया है।

बैठक में मौजूद बोर्ड के एक सदस्य ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना राबे हसनी नदवी की अध्यक्षता में हुई बैठक में अयोध्या प्रकरण को लेकर उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में चल रही सुनवाई पर भरोसा जताते हुए अपने अधिवक्ताओं के काम को सराहा गया। बैठक में कहा गया कि मुस्लिम पक्ष के पास मजबूत दलीलें हैं और इस बात की उम्मीद भी है कि मामले का फैसला मुस्लिमों के पक्ष में आएगा।

सदस्य ने बताया, “बैठक में तय किया गया कि बोर्ड समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर अपने पुराने रुख पर कायम रहेगा। यह संहिता हिन्दुस्तान के लिए फायदेमंद नहीं है और न ही जमीनी स्तर पर उसे लागू किया जा सकता है।”

सदस्य ने बताया कि कमेटी ने माना कि समान नागरिक संहिता न सिर्फ मुसलमानों के लिए, बल्कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति तथा आदिवासियों के लिए भी अव्यवहारिक है।

उन्होंने बताया कि बैठक में तीन तलाक के सिलसिले में बना कानून न सिर्फ शौहर, बल्कि बीवी और बच्चों के भी भविष्य के लिए नुकसानदेह है। इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी या नहीं, इस बारे में बोर्ड की लीगल कमेटी फैसला करेगी।

उल्लेखनीय है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी की बैठक में महासचिव मौलाना वली रहमानी, उपाध्यक्ष फखरुद्दीन अशरफ किछौछवी, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी, मौलाना महमूद मदनी, जफरयाब जीलानी, मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी और मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली समेत अनेक सदस्य मौजूद रहे।

चेहरा हो चाहे जितना काला, एक हफ्ते में हो जागा गजब गोरा, बस ऐसे करें इसका इस्‍तेमाल

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गोरा रंग हर किसी को पसंद आता हैं| इसलिए हर कोई चाहता हैं कि वो भी दूध की तरह सफ़ेद दिखे| इसके लिए वह बाजार से महंगे-महंगे प्रॉडक्ट लाता हैं और इस्तेमाल करता हैं| लेकिन फिर भी उसे वैसी गोरी तंगत नहीं मिल पाती हैं जिसकी वह कामना करता हैं| ऐसे में लोग निराश हो जाते हैं कि वो औरों की तरह गोरे नजर नहीं आ सकते हैं|

आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि ये बाजार के महंगे प्रॉडक्ट कुछ समय के लिए तो आपको गोरा कर सकते हैं लेकिन हमेशा के लिए नहीं कर सकते हैं बल्कि इनके इस्तेमाल से आपकी त्वचा कुछ समय बाद और भी खराब हो जाती जाती हैं और आपकी त्वचा पर ना जाने कैसे-कैसे दाग-धब्बे पड़ जाते हैं|

इसलिए यदि आप भी गोरी त्वचा पाना चाहते हैं तो आप घरेलू नुस्खो का इस्तेमाल करे| इससे आपकी त्वचा निखर सकती हैं और कुछ हद तक गोरी भी हो सकती हैं| दरअसल ये घरेलू नुस्खो के इस्तेमाल से कोई साइड इफेक्ट नहीं होता हैं| आइए आज हम बताते हैं उन घरेलू नुस्खो के बारे में जिसके इस्तेमाल से आपकी त्वचा गोरी हो सकती हैं|यहां हम बात कर रहे हैं रागी के आटे की जिसमें कैल्शियम, प्रोटीन, ट्रिपटोफैन, आयरन, मिथियोनिन, रेशे, लेशिथिन जैसे पौष्टिक तत्‍व उपस्थित होते हैं। जो त्वचा को पोषण देने में मदद करते हैं। रागी के आटे में एंटी एजिंग तत्व मौजूद होते हैं।

इसके प्रयोग से त्वचा हमेशा चमकदार बनी रहती है। वहीं इसे गुलाब जल में मिलाकर फेस पैक लगाने से स्किन हाइड्रेटेड रहती है और आपकी त्वचा खिली-खिली नजर आती हैं| यह त्वचा की रंगत को निखारने में सहायता करती हैं| इसमें मौजूद एमिनो एसिड स्किन की टिशूज को हेल्दी रखती हैं| जिसके कारण त्वचा में झुर्रियां नहीं पड़ती है। इसके साथ इसमें पाई जाने वाली ब्लीचिंग प्रॉपर्टीज त्वचा की रंगत को निखारती हैं|

चीन के राष्ट्रपति शि जिनपिंग को परोसा गया ‘थक्काली रसम’, जानें बनाने का तरीका #Recipe

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हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शि जिनपिंग भारत के अनौपचारिक दौरे पर भारत आए थे और उनकी अच्छे से खातिरदारी की गई थी। भोजन में कई पकवान शामिल किए गए थे जिसमें थक्काली रसम भी शामिल था। थक्काली रसम तीखी और गर्म होती है। इसमें टमाटर का खट्टापन भी लोगों को अच्छा लगता है। यह टमाटर, कालीमिर्च, लहसुन, जीरा, नमक आदि से तैयार किया जाता है। तो आइये जानते है ‘थक्काली रसम’ बनाने की Recipe के बारे में।

आवश्यक सामग्री

– 2 टमाटर, छोटे टुकड़ों में काट लें
– 2 टमाटर, बारीक टुकड़ों में कटे हुए
– 1 टीस्पून जीरा
– 12 साबुत काली मिर्च
– 4 कलियां लहसुन की
– 1 टेबलस्पून तेल
– 1/4 टीस्पून राई
– चुटकीभर हींग
– 5 करी पत्ता
– 2 साबुत सूखी लाल मिर्च
– 3 टेबलस्पून, बारीक कटी धनियापत्ती
– 1/2 टीस्पून लाल मिर्च पाउडर
– 1 1/2 कप पानी
– नमक स्वादानुसार
– मिक्सर जार

बनाने की विधि

– लहसुन, काली मिर्च और जीरा को पीस लें। इस मिश्रण को एक कटोरी में निकाल लें।
– उसी मिक्सर जार में बड़े टुकड़े वाले टमाटर को पीस लें।
– इसके बाद एक पैन में तेल गर्म करें।
– जब तेल गर्म हो जाए तो इसमें हींग, राई, करी पत्ता और साबुत लाल मिर्च डालें।
– इसके बाद तेल में जीरा, लहसुन और काली मिर्च वाला मिश्रण डाल दें।
– एक मिनट तक भूनने के बाद इसमें टमाटर की प्यूरी (पीसा हुआ पेस्ट) डालकर 4-5 मिनट तक पकाएं।
– फिर इसमें 2 चम्मच धनियापत्ती डालकर अच्छी तरह मिक्स करें।
– इसके बाद रसम में नमक और लाल मिर्च पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाते हुए 1 मिनट तक पकाएं।
– इसके बाद इसमें बारीक कटे टमाटर डालें और 2 मिनट तक चलाते हुए पका लें।
– आखिर में रसम में पानी डालें और अच्छी तरह मिला लें।
– जब इसमें उबाल आने लगे तो आंच धीमी करके 5 मिनट तक पकाएं।
– आंच बंद रसम में धनियापत्ती डालकर अच्छी तरह मिला लें।
– तैयार रसम को चावल के साथ परोसें या फिर एक कप ऐसे ही पीएं।

मोदी सरकार करने जा रही है ऐसा काम, सूचना के लिए नहीं पड़ेगी आरटीआई लगाने की जरूरत

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केंद्र सरकार जल्द ही मंत्रालयों और विभागों के कामों में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ी योजना पर काम कर रही है। अगर सरकार की इस योजना पर अमल हुआ तो आरटीआई लगाने वालों की संख्या घट जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का कहना है कि सब कुछ इतना पारदर्शी हो जाएगा कि लोगों को आरटीआई लगाने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी। सरकार खुद आगे आकर सारी सूचनाएं जनता के सामने रख देगी। किसी मंत्रालय या विभाग में कौन सा टेंडर लगा है, उसकी क्या शर्तें हैं, कौन-कौन आवेदक हैं, किस आवेदक के कितने नंबर बनते हैं, टेंडर प्रक्रिया और परिणाम, यह सब वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा।


जनता, आवेदक और टेंडर अलॉट करने वाली संस्था, सारी कार्यवाही देख सकेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री का कहना है कि जब इतना कुछ पारदर्शी हो जाएगा कि आरटीआई लगाने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी।

संसाधन बचाने के लिए ड्रोन का उपयोग

शनिवार को केंद्रीय सूचना आयोग के 14वें स्थापना दिवस समारोह में बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह बात कही है। उन्होंने संसाधन बचाने का एक उदाहरण देते हुए बताया कि केदारनाथ में विकास कार्यों पर किस तरह नजर रखी जा रही है। एक ऐसी तकनीक, जिसमें भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं होती है और पारदर्शिता सौ फीसदी रहती है। वहां चल रहे विकास कार्यों पर निगरानी रखने के लिए ड्रोन की मदद ली जा रही है। अधिकारी अपने दफ्तर में बैठकर विकास कार्यों पर नजर रख रहे हैं। छोटे से छोटा कार्य ऑनलाइन होता है।

जैम पोर्टल है उदाहरण

शाह ने एक दूसरा उदाहरण जैम पोर्टल का बताया। lउन्होंने कहा कि शनिवार को वे सुबह खुद इस पोर्टल को चेक करके आए हैं। खरीददार और सप्लायर, सब प्रक्रिया का हिस्सा बन रहे हैं। सारी सूचनाएं लोगों के सामने हैं। इसके अलावा डैश बोर्ड भी बहुत काम की चीज है। किस गांव में कब शौचालय बनेगा, सिलेंडर का नंबर कब आएगा, सौभाग्य और दूसरी योजनाओं का पल-पल का अपडेट वेबसाइट पर उपलब्ध है। थानों में ऑनलाइन एफआईआर हो रही है, उसका प्रगति रिपोर्ट भी ऑनलाइन देख सकते हैं।

सरकारी जानकारी को लोगों तक पहुंचाएं सूचना अधिकारी

गृहमंत्री अमित शाह ने केंद्रीय सूचना आयोग से आग्रह किया कि वे सरकार की सभी सूचनाएं लोगों तक पहुंचाने में मदद करें। चूंकि देशभर में करीब पांच लाख सूचना अधिकारी हैं, इसलिए वे इस काम में सरकार की सहायता कर सकते हैं। सूचना अधिकारी लोगों के बीच रहते हैं, लिहाजा वे सुगमता से सरकारी कदमों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने में सक्षम हैं।

इसके लिए आयोग के सदस्य प्रेसवार्ता करें। इसका फायदा यह होगा कि लोगों को सूचना लेने के लिए आरटीआई लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्हें वे सभी सूचनाएं पहले ही मिल जाएंगी। मोदी सरकार ने इस दिशा में काम शुरु कर दिया है। आने वाले समय में इसका असर उस वक्त दिखेगा, जब आरटीआई आवेदकों की संख्या तेजी से घटने लगेगी।

क्या अब देश में भाजपा के लिए एक और विपक्ष के लिए दूसरा निजाम है : आनंद शर्मा

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कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि नरेंद्र मोदी सरकार अर्थव्यवस्था के संकट को दूर करने के लिए कदम उठाने के बजाय राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है. पीटीआई के मुताबिक कांग्रेस के एक अकॉउंटेंट के यहां आयकर विभाग की छापामारी की पृष्ठभूमि में पार्टी नेता आनंद शर्मा ने कहा, ‘यह सरकार प्रतिशोध की भावना से काम कर रही है…जो देश लूटकर चले गए उनसे इस सरकार को कोई मतलब नहीं है.’ उन्होंने सवाल किया, ‘क्या अब देश में भाजपा के लिए एक और विपक्ष के लिए दूसरा निजाम है?’

आनंद शर्मा ने यह भी दावा किया कि भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति बहुत गंभीर है. उनका कहना था, ‘यह राष्ट्रीय चिंता का विषय है. निवेश टूट गया है, लोगों की नौकरियां जा रही हैं और पूंजी नहीं है.’ आनंद शर्मा ने दावा किया कि अगर सरकार के पास अर्थव्यवस्था की स्थिति ठीक करने के लिए कोई सोच और नीयत नहीं है तो आने वाले दिन देश के लिए और भी तकलीफदेह होंगे. उन्होंने कहा कि अगर वित्त मंत्री को अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर कोई चिंता है तो उन्हें इससे जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए.

हरे मिर्च का अचार कभी इतना स्वादिष्ट नही बन सका, बनाएं आप

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आवश्यक सामग्री
1 1/2 कप हरी मिर्च कटी हुई
6 चम्मच सरसों के दाने
3 चम्मच सेंधा नमक
2 चम्मच हल्दी पाउडर
1 कप सरसों का तेल
6 निम्बू या 1/3 कप निम्बू का रस
बनाने की विधि
हरी मिर्च को पहले अच्छे से धो ले और पूरी तरह सिखा ले जिससे उस पर पानी की मात्रा बिलकुल भी ना रहे. इसे ऊपर से काटे और 1 inch के टुकड़े में काट ले और एक बर्तन में अलग रख ले.
एक सूखे food processor या mixer में 6 चम्मच सरसों के दाने डाले और इसे बारीक बुरादा बनने तक पीस ले और इसे एक सूखे जार में डाले और साथ में हरी मिर्च के टुकड़े और नमक डालकर हिला कर mix कर ले. इसे ऐसे ही 2 से 3 दिन तक रहने दे. अगर धुप बहुत तेज है तो फिर 1 से 2 दिन पर्याप्त होगा. अगर धुप नही हो रहा तो भी आप इसे बाहर 3 दिन तक ढँक कर रखे.
इसके बाद जार में हल्दी पाउडर और निम्बू का रस डालकर अच्छे से किसी सूखे चम्मच से मिलाये जिससे सब कुछ आपस में अच्छे से mix हो जाये. इसे एक बार फिर 1 से 2 दिन तक धुप में रखे.
सरसों के तेल को मध्यम आंच पर अच्छे से गर्म हो जाने तक गर्म करे और जब यह अच्छे से गर्म हो जाय तो आंच बंद कर दे और तेल के ठंडा होने तक इन्तेजार करे. जब तेल ठंडा हो जाये या हल्का गर्म रहे तब हम इसे जार में डालेंगे. इसे अच्छे से एक बार फिर सूखे चम्मच के मदद से mix करेंगे और इसे ढक्कन से बंद कर के अगले 4 से 5 दिन सामान्य तापमान पर रखेंगे. लीजिये तैयार है हमारा लाजवाब चटकीले स्वाद वाला हरी मिर्च का शानदार अचार. इसे अपने मनपसंद recipe के साथ खाए.

ग्रुप सेक्स के लिए दोस्तों ने किया ब्लैकमेल तो छात्रा ने खुद को लगाई आग, मौत

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ग्रुप सेक्स करने के लिए दोस्तों ने एक 20 साल की छात्रा को ब्लैकमेल किया तो उसने खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना पर पहुंची मोरबी पुलिस ने गंभीर हालत में छात्रा को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया, जहां कुछ देर चले उपचार के बाद उसकी मौत हो गई। पुलिस इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस के मुताबिक, छात्रा को ब्लैकमेल करने वाले आरोपियों की पहचान जीतेंद्र मकवाणा, राहुल वोरा, अखिल परमार और गौरी उभाडिया के रूप में हुई है। अपने सुसाइट नोट में छात्रा ने लिखा है कि जीतेंद्र ने कुछ दिन पहले चुपके से उसकी एक किसिंग वीडियो बना ली थी। बाद में इसी वीडियो के आधार पर जीतेंद्र और दूसरे आरोपियों ने उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। जिसके बाद सभी ने उसके साथ ग्रुप सेक्स के लिए कहा। बताया जाता है कि गौरी जो सोनल की दोस्त थी उसने भी इस पूरी घटना में आरोपियों की मदद की।

इस दौरान पुलिस ने राहुल और गौरी को गिरफ्तार कर लिया है और दूसरे आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। खबर के मुताबिक, छात्रा गर्ल्स स्कूल में 12 वीं कक्षा में पढ़ती थी। उसके पिता राजमिस्त्री हैं जबकि मां एक फैक्ट्री में मजदूरी का काम करती है। माता-पिता जब काम पर गए थे उसी दौरान सोनल ने यह आखिरी कदम उठा लिया था। इस घटना को लेकर आसपास के इलाकों में सनसनी फैल गई है।

वो डॉक्टर जिसने बताया था पाकिस्तान में लादेन का पता

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पाकिस्तान की एक अदालत बुधवार को एक बेहद दिलचस्प अर्जी पर सुनवाई करने जा रही है। अर्जी एक डॉक्टर को रिहा करने की है। इनका नाम है डॉक्टर शकील अफरीदी। डॉक्टर अफरीदी पर आरोप है कि उन्होंने अल-कायदा के आतंकी सरगना ओसामा बिन लादेन को पकड़वाने में अमेरिका की मदद की थी। इस अर्जी पर पेशावर हाई कोर्ट में सुनवाई होगी। ये पहला मौका है जब पाकिस्तान में कोई सुनवाई खुली अदालत में हो रही है। डॉ शकील अफरीदी पर साल 2011 में ओसामा बिन लादेन को मारने वाले अमेरिकी ऑपरेशन में मदद पहुंचाने का आरोप तो है लेकिन उन पर कभी औपचारिक रूप से केस दर्ज नहीं हुआ।

डॉ अफरीदी हमेशा से ये कहते आए हैं कि उनके मामले की कभी निष्पक्ष सुनवाई नहीं हुई। जब डॉ अफरीदी को जेल भेजा गया तो इसका काफी विरोध हुआ। विरोध इस हद तक हुआ कि अमेरिका उनकी हर साल की जेल की सजा के लिए पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में से 3.3 करोड़ डॉलर की कटौती करने लगा।

इतना ही नहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने साल 2016 में अपने चुनावी अभियान के दौरान कहा था कि वो राष्ट्रपति बने तो डॉक्टर अफरीदी को ‘दो महीने’ में रिहा करा लेंगे, मगर ऐसा हुआ नहीं।

अमेरिका में हीरो, पाकिस्तान में विलेन

डॉक्टर शकील अफरीदी को अमेरिका में नायक माना जाता है जबकि पाकिस्तान में कई लोग उन्हें एक ऐसा ‘गद्दार’ मानते जो अपने देश के लिए शर्मिंदगी की वजह बना।

पाकिस्तान में लोगों का मानना है कि डॉ अफरीदी की मदद से ही अमेरिकी नौसैनिकों ने 9/11 हमलों के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को मारकर बिना किसी चुनौती के वापस चले गए। इतना ही नहीं, उन्होंने लादेन के शव का अता-पता भी नहीं चलने दिया।

इन सबने पाकिस्तान की सुरक्षा नीति की बागडोर चलाने पाकिस्तानी सेना पर असहज सवाल खड़े कर दिए। सवाल ये था कि क्या पाकिस्तानी सेना को ये पता भी है कि ओसामा बिन लादेन उनके देश में था?

नतीजा ये हुआ कि अमेरिका के नेतृत्व में चल रही इस्लामी चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान आज भी एक ‘असहज सहयोगी’ के रूप में नजर आता है।

कौन हैं डॉ शकील अफरीदी?

डॉ अफरीदी पाकिस्तान के कबाइली खैबर जिले में बड़े डॉ के तौर पर काम करते थे। अमेरिका के फंड से चलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं और कई टीकाकरण कार्यक्रमों के प्रमुख थे। एक सरकारी कर्मचारी के तौर पर उन्होंने कई शहरों में हेपेटाइटिस बी के लिए टीकाकरण कार्यक्रम चलाए थे। उनमें से एक वो एबटाबाद शहर भी था जहां ओसामा बिन लादेन पाकिस्तानी सेना की नाक के नीचे रह रहे थे।

अमेरिकी खुफिया एजेंसी की योजना था कि वो एबटाबाद में रह रहे किसी बच्चे के खून का सैंपल ले सके ताकि डीएनए टेस्ट के जरिए पता चल सके कि उनका ओसामा बिन लादेन से कोई रिश्ता है या नहीं।

ऐसा कहा जाता है कि डॉक्टर अफरीदी के स्टाफ के एक व्यक्ति ने वहां से खून का सैंपल इकट्ठा किया। हालांकि ये मालूम नहीं है कि अमेरिका को इससे बिन लादेन की लोकेशन खोजने में मदद मिली या नहीं। ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के 20 दिन बाद यानी 23 मई, 2011 डॉक्टर अफरीदी को को हिरासत में ले लिया गया। उस वक्त उनकी उम्र 40 के करीब रही होगी।

छिपता फिरता है डॉक्टर अफरीदी का परिवार

डॉक्टर अफरीदी की निजी जिंदगी के बारे में ज्यादा कुछ मालूम नहीं है। हां, ये जरूर पता है कि वो एक गरीब परिवार से आते थे और उन्होंने साल 1990 में खैबर मेडिकल कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था।

उन्हें गिरफ्तार किए जाने के बाद से उनका परिवार इधर-उधर छिपता रहता है क्योंकि उन्हें जानलेवा हमलों का डर है। उनकी पत्नी एबटाबाद की एक शिक्षा विशेषज्ञ हैं। पहले वो एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल थीं लेकिन पति की गिरफ्तारी के बाद वो कहीं छिपकर रहती हैं। उनके तीन बच्चे हैं- दो बेटे और एक बेटी।

जनवरी 2012 में अमेरिकी अधिकारियों ने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया था कि डॉक्टर अफरीदी ने अमेरिकी खुफिया विभाग के लिए काम किया था। हालांकि अब भी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें सीआईए में अपनी भूमिका के बारे में कितना पता था।

पाकिस्तानी जांचकर्ताओं का कहना है कि जब सीआईए ने डॉक्टर अफरीदी को अपने लिए काम करने पर राजी किया तब उन्हें ये मालूम नहीं था कि इस ऑपरेशन का निशाना कौन था।

डॉक्टर अफरीदी को जेल क्यों हुई?

शुरुआत में डॉक्टर अफरीदी पर देशद्रोह का आरोप लगा था लेकिन मई, 2012 में उन्हें प्रतिबंधित चरमपंथी समूह लश्कर-ए-इस्लाम को फंड देने का दोषी पाया गया था और इसीलिए उन्हें जेल भेजा गया। लश्कर-ए-इस्लाम अब सक्रिय नहीं है।

उन्हें प्रतिबंधित समूह से संबंध रखने के लिए 33 साल जेल की सजा सुनाई गई। हालांकि बाद में इसे घटाकर 23 साल कर दिया गया था। डॉक्टर अफरीदी पर लश्कर-ए-इस्लाम के लड़ाकों को इमर्जेंसी में चिकित्सकीय मदद पहुंचाने और अपने अस्पताल में बैठकें करने की जगह देने का भी आरोप था।

डॉक्टर अफरीदी के परिजनों ने शुरुआत से इन सभी आरोपों से इनकार किया है। उनके वकीलों का कहना है कि उन्होंने लश्कर-ए-इस्लाम को सिर्फ एक बार पैसे दिए थे और वो भी 10 लाख पाकिस्तानी रुपयों की फिरौती। वो भी तब जब समूह ने उन्हें 2008 में अगवा कर लिया था।

वर्ष 2012 में उन्होंने जेल से ही फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों ने उन्हें अगवा करके उनका उत्पीड़न किया था। इसके एक साल बाद उन्होंने किसी तरह अपने वकीलों को हाथ से लिखी एक चिट्ठी भेजी थी जिसमें उन्होंने लिखा था कि उन्हें इंसाफ नहीं मिला है।

ये बहुत स्पष्ट नहीं है लेकिन इतना तो सच है कि ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान से पकड़े जाने की वजह से पाकिस्तान को भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था। पाकिस्तानी अधिकारी इस बात से खफा थे कि अमेरिका ने उनकी संप्रभुता का उल्लंघन किया।

वहीं पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार करना पड़ा था कि उन्हें ये बिल्कुल नहीं मालूम था कि अल-कायदा का संस्थापक ओसामा बिन लादेन कई वर्षों से एबटाबाद की एक तीन मंजिला इमारत में रह रहे थे।

उस वक्त वाइट हाउस के तत्कालीन आतंकरोधी प्रमुख जॉन ब्रेनन ने कहा था कि “कल्पना से बाहर था कि लादेन बिना किसी सपोर्ट सिस्टम पाकिस्तान में रह रहा था।’ हालांकि पाकिस्तान ने बेनन की बात को खारिज कर दिया था। लेकिन अगर डॉक्टर अफरीदी पर अमेरिका को मदद पहुंचाने का मुकदमा होता तो वो पाकिस्तान के लिए बदनामी की और बड़ी वजह बनता।

अदालत अब क्यों सुनवाई कर रही है?

इस मामले में अब तक जो भी कानूनी कार्यवाही हुई है वो ब्रिटिश कालीन ‘फ्रंटियर क्राइम रेग्युलेशन’ के तहत हुई है। पिछले साल तक अफगानिस्तान की सीमा से सटे केंद्र शासित आदिवासी इलाके में ‘फ्रंटियर क्राइम रेग्युलेशन’ के तहत ही कार्यवाही होती थी।

एक साल पहले तक इस इलाके की अदालतें अलग तरह से काम करती थीं। इनमें आदिवासी समुदाय के लोगों की भूमिका ही महत्वपूर्ण होती थी और वो तय कार्यवाही का पालन करने के लिए बाध्य नहीं होती थीं।

पाकिस्तान सरकार के लिए भी डॉक्टर अफरीदी के मामले से निबटने के लिए ये आसान तरीका था क्योंकि ये बाहरी दुनिया की नजरों से दूर था। हालांकि अब कबाइली इलाकों का खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत में विलय कर दिया गया। नतीजन डॉक्टर अफरीदी का मामाला भी पेशावर हाई कोर्ट तक पहुंच गया।

बुधवार को होने वाले सुनवाई में डॉक्टर अफरीदी की जेल की सजा कम भी हो सकती है और बढ़ भी सकती है। पिछले साल डॉक्टर अफरीदी को पेशावर जेल से पंजाब की एक जेल में शिफ्ट किया गया था। उसके बाद से ऐसी चर्चा भी है कि उन्हें रिहा किया जा सकता है।

Ford Diwali offers: इन कारों पर कंपनी दे रही भारी छूट

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इस दिवाली अगर आप फोर्ड की नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए यह काम की खबर साबित हो सकती है। फोर्ड इंडिया अपनी तीन कार एस्पायर, ईकोस्पोर्ट और फ्रीस्टाइल पर आकर्षक ऑफर्स की पेशकश कर रही है। यहां देखिए किस कार कितनी छूट मिल रही है।

नकद डिस्काउंटएक्सचेंज बोनस7.99% की दर से फाइनेंसअतिरिक्त लाभ
फोर्ड ईकोस्पोर्टहांहां
फोर्ड फ्रीस्टाइल10,000 रुपये15,000 रुपयेहांहां
फोर्ड एस्पायर15,000 रुपये15,000 रुपयेहांहां

फोर्ड ईकोस्पोर्ट : ईकोस्पोर्ट पर कंपनी नकद डिस्काउंट और एक्सचेंज ऑफर की पेशकश नहीं कर रही है। इस गाड़ी पर कंपनी 7.99 फीसदी की दर पर फाइनेंस मुहैया करा रही है

फोर्ड फ्रीस्टाइल और एस्पायर: फ्रीस्टाइल और एस्पायर दोनों ही फीगो हैचबैक पर बनी है और इन दोनों कारों के ऑफर भी एक जैसे हैं। इन कारों पर कंपनी 10,000 रुपये का नकद डिस्काउंट और 15,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस दे रही है। इसके साथ ही इन कारों पर कंपनी 7.99% की दर से फायनेंस की सुविधा भी दे रही है।

यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि यह ऑफर केवल 31 अक्टूबर 2019 तक मान्य है। इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए अपने नजदीकी फोर्ड डीलरशिप से सपंर्क करें।