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” गुरुवार सुबह दिल्ली और नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में मॉनसून की भारी बारिश…”

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गुरुवार सुबह दिल्ली और नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में मॉनसून की भारी बारिश हुई, जिससे सड़कें पानी में डूब गईं, लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और इलाके के कई हिस्सों में लोगों का रोज़ाना का आना-जाना प्रभावित हुआ।

दिल्ली, नोएडा, गाज़ियाबाद और बुलंदशहर में जलभराव की स्थिति साफ़ दिखी, जिसमें गाड़ियाँ पानी भरी सड़कों पर रेंगती नज़र आईं और लोगों को पानी से भरी सड़कों से गुज़रने में काफ़ी परेशानी हुई।

2 जुलाई को दिल्ली में मौसम प्रणाली के देर से पहुँचने के बाद, इस मॉनसून सीज़न में दिल्ली-NCR में हुई यह बारिश पहली ज़ोरदार बारिश थी।

8 जुलाई की सुबह से ही उत्तर-पूर्वी दिल्ली, गाज़ियाबाद और नोएडा के कुछ हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई है।

दिल्ली के मयूर विहार में पिछले 24 घंटों में 10 सेंटीमीटर से ज़्यादा बारिश दर्ज की गई, जिससे पता चलता है कि गुरुवार को बारिश कितनी ज़ोरदार थी।

लेकिन बारिश की तेज़ी सिर्फ़ आगे बढ़ते मॉनसून की वजह से नहीं थी, हालांकि मॉनसून ही इसकी मुख्य वजह था।

भूमध्य सागर से आई एक और चीज़ ने भी ज़ोरदार बारिश में अहम भूमिका निभाई। वह थी-वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ)।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली के लिए रेड अलर्ट जारी किया है और चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय राजधानी में दिन के ज़्यादातर समय भारी बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग ने 10 जुलाई तक दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में काफी ज़्यादा से लेकर व्यापक बारिश का अनुमान लगाया है, जबकि अधिकारी बारिश से जुड़ी दिक्कतों से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर हैं।

‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ (पश्चिमी विक्षोभ) मौसम का एक ऐसा सिस्टम है जो भूमध्य सागर या उसके आस-पास के इलाकों में बनता है और पूरब की ओर बढ़ता है, जिससे उत्तरी भारत में नमी और ठंडी हवाएँ आती हैं।

इस मौसम सिस्टम की वजह से अक्सर बारिश या आंधी-तूफान आते हैं और यह सर्दियों में ज़्यादा आम है, हालाँकि गर्मियों में इसके आने से मॉनसून की गतिविधि काफी बढ़ सकती है।

प्राइवेट मौसम एजेंसी स्काईमेट के अनुसार, हाल ही में हुई भारी बारिश की वजह उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर बने डिस्टर्बेंस का मध्य भारत के ऊपर बने तेज़ कम दबाव वाले क्षेत्र और अरब सागर से आ रही नमी वाली तेज़ हवाओं के साथ मिलना था।

इस डिस्टर्बेंस ने हवा के अलग-अलग सिस्टम के मिलने (कन्वर्जेंस) की स्थिति बनाई, जिससे और ज़्यादा नमी खिंची चली आई और माहौल बहुत अस्थिर हो गया।

इसी वजह से घने बादल बने, हवा के तेज़ ऊपर उठने (अपड्राफ्ट) की स्थिति बनी और मॉनसून की सामान्य बारिश के मुकाबले कहीं ज़्यादा और लंबे समय तक भारी बारिश हुई।