राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 150 वीं जयंती के अवसर पर गांधी जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने प्रदेश मंे द्वितीय चरण के तहत सभी ब्लॉकों में आज से सप्ताहव्यापी गांधी विचार पदयात्रा की शुरूआत की गई। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में 4 अक्टूबर को धमतरी जिले के ग्राम कंडेल से गांधी विचार पदयात्रा का प्रथम चरण प्रारंभ किया था और 10 अक्टूबर को रायपुर के ऐतिहासिक गांधी मैदान में इसका समापन किया गया। गांधी विचार पदयात्रा का द्वितीय चरण के रूप में प्रदेश के सभी विकासखण्डों में आज से यह पदयात्रा प्रारंभ हुई। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व में प्रदेश के कोने-कोने से यह पदयात्रा प्रारंभ हुई। इसमें बड़ी संख्या में विभिन्न वर्गो के लोगों ने हिस्सा लिया।
मुंगेली जिले में नगर पंचायत सरगांव में गृह मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू और बालोद जिले के ग्राम सम्बलपुर में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया के नेतृत्व में यह पदयात्रा आयोजित हुुई। दंतेवाडा जिले के चित्तानुर, हाउरनार में विधायक श्रीमती देवकी कर्मा, कांकेर जिले में ग्राम दशपुर में कांकेर के विधायक श्री शिशुपाल शोरी, जिला पंचायत सदस्य बिरेश ठाकुर, कांकेर नगर पालिका के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र सिंह के नेतृत्व में पदयात्रा आयोजित हुई। गरियाबंद जिले में विश्व प्रसिद्ध भूतेश्वरनाथ धाम से पदयात्रा प्रारंभ की गई। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के राजपुर में विधायक श्री चिंतामणी महराज के नेतृृत्व में तथा जांजगीर-चांपा जिले के नगर पालिका परिशद चांपा, विकासखण्ड सक्ती, नगर पंचायत बलौदा अड़भार में गणमान्य जनप्रतिनिधियोंसहित बडी संख्या में आम नागरिक शामिल हुए। इसी प्रकार अन्य जिलों के ब्लॉकों एवं नगरीय निकायों में भी बड़े ही उत्साह से गांधी विचार पदयात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
साथी हाथ बढ़ाना, एक अकेला थक जाए तो मिलकर बोझ उठाना। कुछ इन्ही अल्फाजों के साथ इस गाँव के सैकड़ों लोगों ने कुछ ऐसा काम कर दिखाया है कि गाँव की पहचान प्रदेश भर में होने लगी है। गांववासियों की मेहनत, लगन, दूरदृष्टि सोच और दानशीलता ने आपसी भाईचारे की एक मिसाल पेश की है। यहाँ सभी ग्रामीणों ने आपस में तन,मन और धन लगाकर ऐसा गोकुलधाम गोठान बनाया है जो इस गाँव के लगभग एक हजार पशुओं का आश्रय स्थल बन गया है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा गाँव-गाँव गोठान बनाने की मुहिम से प्रेरित होकर गाँव वालों ने आपस में ही सलाह-मशविरा कर तय किया कि गांव में गोकुलधाम गोठान बनाना है,जिसकों जो राशि और सामग्री देनी है अपनी हैसियत के अनुसार अपनी मर्जी से दे सकते है लेकिन इस गोकुलधाम गौठान के निर्माण में गाँव के सभी समाज के लोगों का श्रम दान करना होगा। सबने हा में हा मिलाई, फिर क्या था, गाँव के प्रत्येक नौजवान, महिला, पुरुष, बुजुर्ग मिलकर गैती,फावड़ा,कुदाल,टोकरियाँ लेकर उबड़-खाबड़ और अस्त व्यस्त जगह पर पहुँचे। यहां लगातार 21 दिन तक सबने अपना पसीना बहाया और देखते ही देखते जनसहयोग से प्रदेश का एक ऐसा आदर्श गोकुलधाम गोठान का निर्माण पूरा कर लिया जो अपने आप में एक मिसाल हैं। अब गोठान निर्माण कर गाँववासी चर्चा में आ गए है, प्रदेश के मुखिया श्री भूपेश बघेल जब यहाँ पहुंचे और उन्हें मालूम हुआ कि यह गोठान गाँव वालों ने आपस में पांच लाख जुटाकर अपने परिश्रम से तैयार किया है तो उन्होंने गांववासियों की खूब प्रशंसा की। यहाँ पहुँचे मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ,अधिकारियों ने भी गांववासियों की इस पहल की सराहना की। गांववासियों का सपना है कि वे इस गोकुलधाम गोठान में गायों को रखने के साथ गाँव के बेरोजगार लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य करेंगे।
हालांकि यह गाँव किसी पहचान का मोहताज नही है। धमतरी जिला के अंतर्गत आने वाला यह ग्राम कंडैल है। महात्मा गांधी जी और कंडैल सत्याग्रह की वजह से गाँव की पहचान है। अब एक बार फिर गाँव वालों ने अपनी सोच, अपनी मेहनत और एकजुटता से यहाँ गोकुलधाम गोठान बनाकर गांव की एक नई पहचान स्थापित कर दी है। दअरसल 100 साल पहले हुए कंडैल सत्याग्रह की स्मृति ने गाँववालों को सदैव ही गांधीजी के बताए रास्तों में चलने प्रेरित किया है। गाँव वाले उनकों याद तो हमेशा करते है लेकिन यात्रा के 100 साल पूरे होने और गांधीजी की 150 वी जयंती के उपलक्ष्य में वे कुछ ऐसा कर दिखाना चाहते थे जो गांधीजी को सच्ची श्रद्धांजलि हो। जब गांव में बैठक हुई और गाँववालों ने कुछ करने की ठानी तो उन्हें अपने प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा गाँव गाँव बनाये जा रहे गोठान ही सबसे बड़ा सेवा का कार्य नजर आया। गाँव के पशुओं को सुरक्षित रखने के साथ, आने वाले समय में यहाँ के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह गोठान वरदान साबित हो सकता है यह बात सबके दिमाग में आई। गाँव में रहने वाले गुरुजी जनक राम साहू ने 21 हजार रूपये अपनी ओर से गोठान के लिए देने की घोषणा की तो गाँव के ही तुलाराम ने 20 हजार,नारायण साहू ने 10 हजार,जगदीश राम ने 10 हजार, नारायण सिंह ने 10 हजार, विसाहू राम ने 7 हजार, साहू समाज ने 17 हजार, निषाद समाज ने 10 हजार, केदार राम ने 30 बोरी सीमेंट, चमेली बाई उईके ने दो किवंटल छड़, संतुराम ने दो ट्रैक्टर बालू, कली राम ने एक ट्रैक्टर गिट्टी देने की बात कही। इस तरह दान देने के लिए गाँववालों की होड़ लग गई, सभी कुछ न कुछ देकर इस पुण्य कार्य में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना चाहते थे। आखिरकार गोठान बनाने का अभियान प्रारंभ हुआ और सबकी भागीदारी से इस गाँव में सुरक्षित गोठान बनकर तैयार हो गया है। ईट जोड़ाई से लेकर साफ सफाई तक सभी मे गाँववालों का रहा योगदान इस गाँव के लोगों ने आपसी सहभागिता से ऐसी मिसाल कायम की है जो गांधी जी और हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री के सपनों के गांव, स्वावलंबन की राह में एक बड़ा कदम है। आपसी सहभागिता से ग्राम कंडैल के ग्रामीणों ने पांच लाख रुपए जोड़कर लगभग 5 एकड़ गोठान बनाया। यहाँ सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल, जैविक खाद के लिए स्ट्रक्चर, कोटना, टंकी,गोबर गैस प्लांट,छायादार मचान, कुटिया, विश्राम कक्ष आदि का निर्माण भी आपस में मिलकर किया है। गाँव के जानकारों ने कृषि,क्रेडा विभाग के अधिकारियों से कुछ तकनीकी मार्गदर्शन लेकर भू-नाड़ेप, कोटना,टंकी,बाउंड्रीवाल सहित अन्य निर्माण किया। जैविक खाद बनाने का काम कृषि विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। आपसी सहमति से हुआ गोकुलधाम का निर्माण कराया गाँव के विसंभर साहू 70 वर्ष ने बताया कि आज जो गोकुलधाम गोठान के रूप में नजर आ रहा है वहाँ कुछ दिन पहले बहुत गंदगी का आलम था। गाँववालों की आपसी सहमति के बाद श्रमदान से इसे सँवारा गया है। गाँव के बच्चे, नौजवान, बुजुर्ग, महिला, पुरुषों ने इसमें तन,मन,धन से सहयोग दिए। इसी गांव की मितानिन ललिता साहू के योगदान को गाँववाले तारीफ करते नही थकते। ललिता बाई ने बताया कि भू-नाडेप, जैविक खाद,कोटना, गोबर गैस प्लांट का निर्माण कर आत्मनिर्भर की राह में आगे बढ़ने का प्रयास किया जा रहा। गाँव की पांच जानकी साहू ने बताया कि इस पुण्य कार्य में गाँव के लोगों का पूरा योगदान रहा। गौ सेवा के साथ आत्मनिर्भर की राह आसान होगी। आज गांधीजी भले ही इस दुनियां में नही है। लेकिन उनकी आदर्श और विचार को अपनाने वाले इस गाँव में मौजूद है। इसी का परिणाम है कि कंडैल के लोगों ने 100 साल पहले कंडैल सत्याग्रह के समय गांधी जी के छत्तीसगढ़ आगमन को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलते हुए सभी जाति धर्म के लोगों को साथ लेकर जो काम किया है वह उनके आदर्शों और दिए जाने वाले संदेश पर सटीक बैठती है। गांधीजी का भी सपना था कि पंचायतों का विकेंद्रीकरण हो,कुटीर और ग्रामोद्योग के माध्यम से गाँव के लोग और सशक्त बने। स्वावलंबन की राह में आगे बढ़ते हुए गाँव आत्मनिर्भर बने। कंडैल के ग्रामीण भी इसी राह पर चल पड़े है। गोठान से जहाँ गाँव के गायों को सुरक्षित रखने का बीड़ा उठाया है वही गोबर से खाद एवं अन्य उत्पाद का निर्माण कर भविष्य में आत्मनिर्भर बनने का सपना संजोए हुए है।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने सातवें वेतनमान के एरियर्स की द्वितीय किश्त का भुगतान दीपावली के पूर्व करने की स्वीकृति प्रदान की है। राज्य शासन के वित्त विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ के शासकीय सेवकों को सातवें वेतनमान के एरियर्स की द्वितीय किश्त का भुगतान करने के आदेश आज जारी कर दिया गया है। जारी आदेश के अनुसार द्वितीय किश्त के रूप में माह अपैल 2016 से जून 2016 तक का अवशेष वेतन देयक तैयार कर कोषालय संहिता भाग-1 के सहायक नियम 268 के प्रावधानों का पालन करते हुए आहरण किया जाए।
ज्ञातब्य है कि राज्य शासन के कर्मचारियों के लिए एक जनवरी 2016 से छत्तीसगढ़ वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 लागू किया गया है, तथा एक जुलाई 2017 से नियमित भुगतान किया जा रहा है। राज्य शासन द्वारा सातवें वेतनमान का एक जनवरी 2016 से 30 जून 2017 तक कुल 18 माह का वेतन एरियर्स की राशि का नगद भुगतान 6 समान वार्षिक किश्तों में देने का निर्णय लिया गया है। प्रथम किश्त का भुगतान अगस्त 2018 में हो चुका है। सातवें वेतनमान के एरियर्स की द्वितिय किश्त का भुगतान करने के आदेश अध्यक्ष, राजस्व मंडल, बिलासपुर सहित शासन के समस्त विभाग, समस्त विभागाध्यक्ष, सभी संभागायुक्त और जिलों के कलेक्टरों को भेज दिया गया है ।
पंजाब-महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (PMC) बैंक में हुए फाइनेंस फ्रॉड मामले को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि पीएमसी बैंक के 12 डायरेक्टर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी से संबंध रखते हैं.
कांग्रेस नेता ने कहा कि हर रोज पीएमबी बैंक के पीड़ितों के रोते-बिलखते वीडियो सामने आ रहे हैं. लेकिन वित्त मंत्री अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहीं हैं.
गौरव वल्लभ ने कहा, ‘अगर वित्त मंत्रालय और आरबीआई की कोई जिम्मेदारी नहीं है, तो 1 से 10 हजार और फिर 25 हजार रुपये निकालने की बंदिश क्यों लगाई गई.’गौरव वल्लभ, प्रवक्ता, कांग्रेस पीएमसी बैंक के 12 डायरेक्टर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी से संबंध रखते हैं. 12 साल से निदेशक के पद पर काबिज एक व्यक्ति बीजेपी के चार बार से विधायक का बेटा है. क्या इन डायरेक्टरों की कोई जिम्मेदारी नहीं है?
कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि महाराष्ट्र की मुलुंड सीट से बीजेपी विधायक के बेटे रणजीत सिंह PMC बैंक और HDIL दोनों में डायरेक्टर है और पीएमसी बैंक ने सबसे ज्यादा लोन HDIL को ही दिया है.
कांग्रेस की सरकार से मांग
निकासी पर लगी बंदिश पूरी तरह से हटाई जाए
पीएमसी के 73% लोन HDIL को दिए गए हैं, उससे रिकवरी कैसे की जाएगी, इसकी रिपोर्ट एक सप्ताह में देश को बताई जाए
25,00 से ज्यादा वाले 30% जमाकर्ता कौन हैं, जिनका उल्लेख ये कर रहे हैं, उनकी जानकारी दी जाए
धन निकासी पर बंदिश लगाने के एक सप्ताह पहले तक 50,000 या उससे ज्यादा पैसा निकालने वाले लोगों के नाम बताए जाएं
हाउसिंग सोसायटी को पैसे निकालने की तुरंत इजाजत दी जाए
पूछताछ पूरी होने तक पीएमसी के डायरेक्टरों को देश छोड़ने की इजाजत न दी जाए
कांग्रेस ने मांग की है कि वित्त मंत्री पीएमसी मामले पर श्वेत पत्र जारी कर देश को इस घटनाक्रम की पूरी जानकारी दें.
सरकार से कांग्रेस का सवाल?
कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि साल 2013-14 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का बट्टा खाते का बैलेंस कुल 34,409 करोड़ रुपये था, जो 2018-19 में बढ़कर 1.72 लाख करोड़ रुपये हो गया.
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सार्वजनिक बैंकों के बट्टा खाते की रकम में लगभग 5 गुना वृद्धि हुई है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किसको फायदा पहुंचाने के लिए इतनी बड़ी रकम को बट्टा खाते में डाला जा रहा है?
बढ़ते NPA पर कांग्रेस ने उठाया सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि आरबीआई और बैंकों ने SME सेक्टर के एनपीए को एक साल तक नहीं दिखाने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि एक रेटिंग एजेंसी के अनुसार ये एनपीए लगभग पौने दो लाख करोड़ रुपये का है और सरकार को अपने प्रॉफिट/कैपिटल से उसका प्रावधान करना पड़े, इसलिए इन्हें छिपाया जा रहा है.
गौरव वल्लभ ने कहा कि अब सरकार ने एक नया चलन शुरू किया है. बैंकों के बढ़ते एनपीए को कम करने के लिए उन्हें बट्टा खाते में डाला जा रहा है. आरटीआई से मिली सूचना के अनुसार, वाणिज्यिक बैंकों का साल 2018-19 में करीब 2.75 लाख करोड़ रुपया बट्टा खाते में डाला गया है.
उत्तर प्रदेश के बरेली में बेहद हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक श्मशान में जमीन की खुदाई के दौरान अंदर एक मटका मिला। इस मटके के अंदर बच्ची थी, जिसकी सांसें चल रही थीं। बच्ची को देखकर लोगों के होश उड़ गए।
मृत बच्ची को दफनाने गए थे, मिली जिंदा बच्ची
बरेली के सीबीगंज के रहने वाले हितेश कुमार की पत्नी वैशाली महिला दरोगा हैं। गर्भावस्था के बाद उन्होंने प्रीमेच्योर बच्ची को जन्म दिया, जिसकी कुछ देर बाद ही मौत हो गई। हितेश मृत बच्ची को दफनाने श्मशान पहुंचे और उन्होंने बच्ची को दफनाने के लिए गड्ढा खुदवाना शुरू किया। करीब तीन फीट की खुदाई के बाद फावड़ा किसी चीज से टकराया तो मिट्टी को हटाकर देखा गया तो अंदर से एक मटका निकला। मटके के अंदर एक बच्ची थी जिसकी सांस चल रही थीं।
हितेश ने रो रही बच्ची को सीने से लगाया
हितेश ने मटके से निकली बच्ची को अपने सीने से लगा लिया। बच्ची रो रही थी तो उसके लिए दूध का इंतजाम किया गया। हितेश ने इस दौरान पुलिस को भी सूचना दे दी और पुलिस ने बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद हितेश ने अपनी मृत बच्ची को दफन किया। बच्ची को कौन गड्ढे में दबा गया इसकी जानकारी नहीं हो पाई है। इस बच्ची का नाम अस्पताल के स्टाफ ने ‘सीता’ रखा है।
बच्ची को जिंदा दफनाने वालों की तलाश कर रही पुलिस
इस मामले में एसपी सिटी अभिनंदन सिंह का कहना है कि जिस किसी ने भी इस बच्ची को जिंदा दफन करने का अमानवीय कृत्य किया है उसे सजा जरूर दी जाएगी। उनका कहना है की पुलिस की टीमें उस परिवार की तलाश में जुट गई है, जिन्होंने बच्ची को मटके में जिंदा दफन किया है।
सर्दियों का मौसम आते ही हमे गरम चीजें को खाने की हिदायत दी जाती है सर्दियों में कुछ चीजें ऐसी है जैसे खाने से गरमी तो मिलती ही है। साथ में स्किन संबंधित समस्याएं से भी छुटकारा मिलता है आइये जानते है पेन खजूर के फायदे पेन खजूर को सर्दियों का मेवा कहा जाता है। खजूर में कैल्शियम, सेलेनियम, मैंगनीज, कॉपर और लवण होते हैं।
वजन बढ़ाने के लिए इसमें शुगर, विटामिन और प्रोटीन होता है जो वजन बढ़ाने में सहायक है। दुबले-पतले लोगो वजन बढ़ाने के लिए रोजाना खजूर का सेवन करें। कुछ ही हफ्तों में फर्क दिखाई देने लगेगा।
त्वचा में निखार खजूर खाने से चेहरे पर दिखाई देने वाली महीन रेखाएं कम होने के साथ ही त्वचा में निखार भी आने लगता है।
एनीमिया की समस्या से राहत खजूर खून को बढ़ाने में हैल्पफूल है। यह शरीर में खून की कमी को पूरा करकें एनीमिया की समस्या को दूर करता है। खजूर में फ्लूरिन भी होता है जो दांतों के क्षय होने की प्रकिया को धीमी को करने में सहायक है।
आंखो की रोशनी बढ़ना आजकल आंखों से संबंधित समस्याएं आम देखने को मिलती है। रोजाना खजूर का सेवन करने से आंखों की रोशनी बढ़ने लगती हैं। कुछ हफ्तों तक लगातार खजूर का सेवन करने से आखों की रोशनी बढ़ने लगती है।
मुड फ्रेश करना निराशा और उदासी को दूर करने का खजूर एक अच्छा स्त्रोत है। जब भी मन उदास या निराशा हो तो 1 या 2 खजूर का सेवन करें। आपको तुंरत आराम मिलेगा।
आवश्यक सामग्री गुथने के लिए सामग्री 2 कप मैदा 1 चम्मच चीनी 1 चम्मच baking soda 2 चम्मच तेल 1/4 कप ताज़ी दही नमक स्वादानुसार पानी आवश्यकतानुसार अन्य सामग्री 2 चम्मच बटर 1 चम्मच धनिया की पत्ती बारीक कटी हुई बनाने की विधि सबसे पहले गुथने की सभी सामग्री एक बर्तन में डालेंगे फिर इसे अच्छे से 10 मिनट तक गुथेंगे. जब आप इसे soft और smooth dough बना ले तो इसे किसी गीले सूती कपडे से ढँक कर किसी गर्म जगह पर 2 घंटे के लिए छोड़ दे. 2 घंटे बाद कपड़ा को हटा दे और एक बार फिर से थोड़ा देर गूँथ ले. अब इसके 10 बराबर बराबर हिस्से कर लीजिये और इसे हथेली पर हल्का सा तेल या पानी लगा कर इसे गोलाकार shape में ढाल ले. अब इसे अपने पसंद के size में बेल ले. ध्यान रहे आपका तवा किस size का है. अब तवा को आंच पर चढ़ाये और जब यह अच्छे से गर्म हो जाए तो हल्का सा पानी का छींटा इस पर मार दीजिये. अब बेले हुए नान को तवा पर रखे और मध्यम आंच पर इसे पकाए. जब यह निचे से फूलता हुवा दिखे तो इसे पलट कर दूसरे side से भी golden brown color में आने तक इसे पका ले. इसके ऊपर बटर से पुताई करे और धनिया की पत्ती से garnish कर ले और पलट कर दूसरे side भी ऐसे ही कर ले. ऐसे ही बाकी बचे हुए नान को बना कर तैयार कर ले. लीजिये तैयार है हमारा शानदार और स्वादिष्ट नान जिसे आप अपने पसंद के gravy की सब्जी के साथ परोसे और खाए.
सर्दी-जुकाम की समस्या बदलते मौसम की सबसे आम परेशानी है। कुछ लोगों को यह अक्सर हो जाती है। थोड़ा सा भी मौसम में बदलाव आता है तो उन्हें ऐसी बीमारियां घेर लेती हैं। वैसे तो यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है, लेकिन इसका सही समय पर उपचार जरूरी है। इलाज नहीं करने से यह घर के दूसरे लोगों को भी हो सकती है। पर इसके लिए आप कुछ घरेलू उपचार ही करें तो ज्यादा फायदेमंद हो सकते हैं। वैसे सर्दी-जुकाम में आपको अपने खानपान पर भी विशेष घ्यान देना चाहिए। ऐसे में हम आपको कुछ फूड्स बताने जा रहे हैं, जिनके सेवन से सर्दी में राहत और आराम मिलती है।
अदरक
अदरक का इस्तेमाल सबसे ज्यादा सर्दियों में चाय में किया जाता है, क्योंकि अदरक को सर्दी-खांसी, जुकाम जैसी बीमारियों में फायदेमंद पाया गया है। इसका रस यदि शहद में मिलाकर सेवन करें, तो खांसी की सबसे अच्छी दवाई है। अदरक पाचन और सामान्य दर्द से लेकर कैंसर, दिल के रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों में भी फायदेमंद होता है।
चिकन सूप
यदि आप नॉनवेज खाते हैं, तो बहुत जल्दी सर्दी-जुकाम से बच सकते हैं, क्योंकि चिकन सूप को सर्दी-जुकाम का एक बहुत अच्छा घरेलू दवा कहा गया है। दो बार इस सूप को पिएं, असर जरूर दिखेगा. चिकन सूप में विटामिन, खनिज, प्रोटीन और कैलोरी भरपूर मात्रा में पाई जाती है। इनकी कमी शरीर में नहीं होने पर आप बीमारियों से दूर रहते हैं।
नारियल पानी
यदि सर्दी-जुकाम है, तो शरीर में पानी की कमी हो जाती है। आप पानी पिएं लेकिन ठंडा पानी पीने से बचें। आप नारियल पानी पिएं। यह फायदेमंद होती है। इसमें ग्लूकोज और इलेक्ट्रोलाइट्स मौजूद होते हैं, जो शरीर को हाइड्रेट रखते हैं। शरीर में पानी की कमी नहीं होती है।
हरी सब्जियों का करें खूब सेवन
कोई भी बीमारी हो, हमेशा हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए। पालक, पत्ता गोभी, सरसों का साग आदि में भरपूर मात्रा में विटामिन और खनिज होता है। इनके सेवन से सर्दी-जुकाम के लक्षण कम होते हैं।
औद्योगिक उत्पादन के मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है. जुलाई के मुकाबले अगस्त में इंडस्ट्रियल ग्रोथ (Index of Industrial Production) 4.3 फीसदी से घटकर -1.10 फीसदी पर आ गई है. फरवरी 2013 के बाद ये सबसे कमजोर आंकड़े है. देश की 23 इंडस्ट्री ग्रुप्स में से 15 में मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ गिरकर निगेटिव हो गई है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई सेक्टर्स में उत्पादन घटने से औद्योगिक उत्पादन में गिरावट आई है. आपको बता दें कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में खास महत्व होता है. इससे पता चलता है कि उस देश की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक वृद्धि किस गति से हो रही है. अर्थशास्त्री बताते हैं कि देश के मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज सेक्टर में आर्थिक सुस्ती का दौर जारी है. देश में अभी तक प्राइवेट प्लेयर्स इन्वेस्टमेंट करने से झिझक रहे है. इसीलिए कई सेक्टर्स की कंपनियों में छंटनी हो रही है.
अब क्या होगा- एसकोर्ट सिक्योरिटी के रिसर्च हेड आसिफ इकबाल ने बताया है कि आईआईपी ग्रोथ के गिरने का अनुमान पहले से था. लेकिन ये नंबर्स अनुमान से बेहद खराब है. ऑटो सेल्स में आई गिरावट का असर भी इन आंकड़ों पर है. अगले कुछ महीनों तक ऐसे ही रहने की आशंका है. हालांकि, आरबीआई की ओर से कम की गई ब्याज दरें इसे सहारा दे सकती है.
आईआईपी (IIP) आंकड़ों पर एक नज़र- मैन्यूफैक्चरिंग ग्रोथ 4.2 फीसदी से गिरकर -1.2 फीसदी पर आ गई है. वहीं, माइनिंग ग्रोथ 4.9 फीसदी गिरकर 0.10 फीसदी रही है. इलेक्ट्रिसिटी ग्रोथ 4.8 फीसदी से घटकर -0.9 फीसदी रही है.
इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल ग्रोथ -2.7 फीसदी से गिरकर -9.1 फीसदी हो गई है. कंज्यूमर नॉन ड्यूरेबल ग्रोथ 8.3 फीसदी गिरकर 4.1 फीसदी रही है.
क्या होता है आईआईपी-औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में खास महत्व होता है. इससे पता चलता है कि उस देश की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक वृद्धि किस गति से हो रही है.आईआईपी के अनुमान के लिए 15 एजेंसियों से आंकड़े जुटाए जाते हैं.
>> इनमें डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस, सेंट्रल स्टेटिस्टिकल आर्गेनाइजेशन और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी शामिल हैं.
>> सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा मानकों के मुताबिक किसी उत्पाद के इसमें शामिल किए जाने के लिए प्रमुख शर्त यह है कि वस्तु के उत्पादन के स्तर पर उसके उत्पादन का कुल मूल्य कम से कम 80 करोड़ रुपए होना चाहिए.
>> इसके अलावा शर्त है कि वस्तु के उत्पादन के मासिक आंकड़े लगातार उपलब्ध होने चाहिए.इंडेक्स में शामिल वस्तुओं को तीन समूहों-माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिसिटी में बांटा जाता है.
>> फिर इन्हें बेसिक गुड्स, कैपिटल गुड्स, इंटरमीडिएट गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स जैसी उप-श्रेणियों में बांटा जाता है.
अमूमन किसी भी समय हवा में सफर करने वालो की संख्या 10 लाख के आसपास होती है ये बात तो सब जानते है की हवाई जहाज पेट्रोलियम ईंधन से चलता है वो एक खास तरिके से जैसे बाइक, कार में ईधन पड़ता है वैसे ही हवाई जहाज में भी ईधन पड़ता है लेकिन क्या आप जानते है इसका माइलेज कितना होता है आपको बता दे की बोईंग 747 के जैसे विमान प्रति सेकंड में लगभग 4 लीटर ईंधन खर्च कर देता है।
10 घंटे की उड़ने में करीब 150,000 लीटर fuel खर्च होता है बोईंग की वेबडसाइट के अनुसार बोईंग 747 एक किलोमीटर में लघभग 12 लीटर ईंधन खर्च करता है यानि की बोईंग 747 में 12 लीटर ईंधन में 500 लोग एक किलोमीटर का सफर कर सकते है इसका मतलब ये है की एरोप्लेन प्रति व्यक्ति किमी पर 0.024 लीटर का ईंधन खर्च कर रहा है एक कार एक लीटर में लगभग 15 किलोमीटर की माइलेज देती है इसलिए अगर देखा जाए तो वोइंग 747 में किसी एक व्यक्ति का सफर कार की तुलना में बेहतर होता है लेकिन जब कर में चार लोग सफर करते है तो कर बेहतर विकल्प होती है।
लेकिन यहां इस बात को भी ध्यान में रखना चाहिए कि 747 वोइंग 900 किमी/घंटे की तफ्तार से उड़ता हैलेकिन क्या आप जानते है हवाई जहाजों में ईंधन बचाने का क्या तरीका अपनाया जाता है इसके लिए सबसे महत्पूर्ण तरीका है विमानों की डायरेक्ट रूटिंग. यानी विमानों को सीधे रास्तों से ले जाना इसे ईंधन की बचत होती है।
इसके आलावा फ्यूल की खपत को कंट्रोल करने के लिए विमान को एक निश्चित स्पीड पर उड़ाया जाता है जिससे ईंधन की खपत कम होती है ईंधन के खपत में हवाई जहाज का वजन भी खास भूमिका निभाता है जिस हवाई जहाज का वजन जितना कम रहेगा उसमें ईधन की खपत उतनी ही कम होती है।