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प्याज के दाम सुनकर दिमाग में आया लालच, फिर कर डाली ये हरकत, पोल खुली तो हुआ गिरफ्तार

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जहां देश में प्याज के दाम आसमान छूह रहे हैं तो वहीं यूपी के सहारनपुर जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है। जिसे जानकर हर कोई हैरान रह गया। प्याज के दाम सुनकर एक शख्स के दिमाग में लालच आ गया और फिर उसने ये हरकत कर डाली। आगे जानिए आखिर माजरा है क्या-

ये है पूरा मामला
सहारनपुर में नई सब्जी मंडी स्थित एक दुकान से रात में एक व्यक्ति प्याज चोरी कर ले गया। पूरा मामला सीसीटीवी में कैद हो गया। दूसरे दिन मंडी में पहुंचे आरोपी को लोगों ने दबोच लिया। लोगों ने आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपी के कब्जे से चोरी किया हुआ प्याज भी बरामद कर लिया। मंडी कोतवाली क्षेत्र के चिलकाना रोड स्थित नई सब्जी मंडी में मोहल्ला गोटेशाह निवासी नौशाद खां की आढ़त है। नौशाद खां ने बताया कि रात में एक व्यक्ति ने उसकी दुकान से प्याज का कट्टा उठाया और स्कूटर पर रख लिया। जब वहां के चौकीदार ने उससे पूछा कि वह प्याज क्यों ले जा रहा है तो आरोपी ने बताया कि उसने प्याज खरीदा है। उसके बाद आरोपी प्याज स्कूटर पर रखकर चला गया। यह पूरा मामला पास में ही लगे सीसीटीवी में कैद हो गया। सुबह जब उन्हें प्याज चोरी होने का मामला पता चला तो सीसीटीवी फुटेज खंगाली गई। जिसमें एक व्यक्ति प्याज चोरी करता हुआ नजर आया। उन्होंने अन्य दुकानदारों को भी इस बारे में बताया। दूसरे ही दिन आरोपी मंडी में पहुंच गया तो लोगों ने उसे पकड़ लिया।

वहीं चौकीदार को बुलवाकर पहचान कराई गई। जिसके बाद आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने आरोपी के पास से चोरी किया गया प्याज भी बरामद कर लिया।

मंडी कोतवाली प्रभारी अशोक सोलंकी ने बताया कि प्याज चोरी करने के आरोप में अनीस अहमद निवासी रायवाला, गली नंबर तीन को गिरफ्तार किया गया है।

क्या थी सच्चाई-निजाम ने 65 के युद्ध में सेना को दिया था 5000 किलो सोना

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लंदन की कोर्ट में हैदराबाद के निजाम द्वारा पाकिस्तान को दी गई रकम भारत को लौटाने का फैसला दिया है. ये मामला सातवें निजाम से जुड़ा है. इस निजाम की रईसी के किस्से दुनियाभर में कहे और सुने जाते हैं. एक किस्सा ये भी है कि इस निजाम ने 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध भारतीय सेना के फंड में 5000 किलो सोना दान में दे दिया था. ये चर्चा लगातार कही-सुनी जाती है.

क्या ये वास्तव में सच है. हैदराबाद के सातवें निजाम मीर उस्मान अली खान की कंजूसी की बातें भी आमतौर पर उतनी ही चर्चाओं में रहती हैं लेकिन ये सही है कि हैदराबाद रियासत अंग्रेजों के जमाने में भारत की सबसे बड़ी, ताकतवर और सबसे ज्यादा पैसे वाली रियासत थी.

अब हम अपने मूल सवाल पर आते हैं कि क्या निजाम ने वास्तव में भारतीय सेनाओं के लिए अपने निजी कोष से 5000 किलो सोना दान में दिया था. माना जाता था कि निजाम के पास टनों सोना और किलो के हिसाब से बेशकीमती हीरे थे. 

आरटीआई में पूछा गया था सवाल
पिछले दिनों ये बात आरटीआई में भी पूछी गई थी कि क्या वास्तव में निजाम ने नेशनल डिफेंस फंड में 5000 किलो सोना दान किया था. तब तत्कालीन प्रधानमंत्री पाकिस्तान के खिलाफ हुए युद्ध के बाद पूरे देश से सेना के कोष में दान की अपील कर रहे थे. इस सिलेसिले में उन्होंने पूरे देश का दौरा किया था. वो हैदराबाद जाकर निजाम से भी मिले थे.

युद्ध के बाद डगमगाई हुई थी अर्थव्यवस्था
युद्ध के बाद हमारी अर्थव्यवस्था डगमगाई हुई थी. तब ये अटकलें फैलने लगीं थीं कि निजाम ने बड़े पैमाने पर देश को सोना दिया और कहा था कि उन्हें केवल इसके बॉक्स लौटा दिए जाएं.

निजाम ने दिया था कितना सोना
वास्तव में निजाम ने सोना दिया जरूर था लेकिन दान के रूप में नहीं और 5000 किलो भी नहीं बल्कि 425 किलो. ये सोना उन्होंने तब नेशनल डिफेंस गोल्ड स्कीम में निवेश किया था. आर्थिक तौर पर उन खस्ताहाल दिनों में उन्हें तब इस पर 6.5 फीसदी की दर से ब्याज मिलना था.

एक अंग्रेजी की अखबार की रिपोर्ट
तब एक अखबार की 11 दिसंबर 1965 की रिपोर्ट ज्यों की त्यों प्रस्तुत है-
प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और हैदराबाद के निजाम के बीच एयरपोर्ट पर मुलाकात हुई. दोनों ने आपस में हल्की बातचीत भी की. हैदराबाद के वृद्ध पूर्व शासक एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री का स्वागत करने और उनसे मिलने गए थे.
बाद में शाम को एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए श्री शास्त्री ने निजाम को 4.25 लाख ग्राम सोना निवेश करने के लिए उन्हें बधाई दी. ये धन उन्होंने गोल्ड बांड में निवेश किया था. जिसकी कीमत 50 लाख रुपए थी. इसमें सोने की मोहरें थीं, जिनकी असली कीमत उनकी शुद्धता की जांच के बाद ही सही तरीके से की जाएगी.

तब तिरुपति ने किया था 125 किलो सोने का दान
शास्त्री ने कहा था, हम इन सोने की मोहरों को गलाना नहीं चाहते लेकिन किसी बाहर किसी दूसरे देश में भेजना चाहते हैं ताकि इसकी ज्यादा कीमत मिल जाए. इससे हमे करोड़ रुपए भी मिल सकते हैं.
रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ने भी 1.25 लाख ग्राम सोने को दान में दिया है और एक तेलुगु फिल्म स्टार ने दान के रूप में सरकार को आठ लाख रुपए दिए हैं.

फूल गोभी की खेती के लिए यह है उत्तम समय, जानें क्या है बुवाई का सही तरीका

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फूल गोभी भारत वर्ष की शीतकालीन गोभी वर्गीय सब्जियों में से एक प्रमुख सब्जी है. इसकी खेती मुख्य रुप से अविकसित गठे हुए पुष्प पुंज के उत्पादन के लिए की जाती है. फूल गोभी का उपयोग सब्जी, सूप, अचार, पकौड़ा आदि बनाने में किया जाता है. इसकी सफल खेती के लिए ठड़ी एवं आर्द्र जलवायु सर्वोत्तम होती है अच्छी फसल के लिए 15-20 डिग्री तापमान उत्तम होता है.

बुवाई का समय, भूमि खाद व उर्वरक

सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफसर उद्यान डाक्टर एसके लोधी ने बताया कि फूल गोभी की मध्यम और पछेती किस्मों की बुवाई 30 अक्टूबर तक कर देनी चाहिए एवं अगेती किस्मों का बीज 600-700 ग्राम एवं मध्यम एवं पछेती किस्मों के लिए 350-400 ग्राम प्रति हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है.

बीज को स्टेप्टोसाइक्लिन का आठ लीटर पानी में घोल बनाकर 30 मिनट तक पानी में डूबाकर उपचारित करें. इसकी रोपाई में कतार से कतार एवं पौधे से पौधे की दूरी 45 से 45 सेमी और पछेती किस्मों के लिए कतार से कतार एवं पौधे से पौधे की दूरी 60 से 45 सेमी रखनी चाहिए.

फूल गोभी की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए बलुई दोमट भूमि उत्तम होती है, जिसमें जीवांश की प्रचुर मात्रा उपलब्ध हो. रोपाई से पूर्व खेत की जुताई कर समतल कर देना चाहिए. उपरोक्त खेती के लिए 200-250 क्विंटल सड़ी हुई गोबर खाद रोपाई के लगभग एक माह पूर्व अच्छी तरह मिला देना चाहिए.

BMW, सोना, जमीन: इतने करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं आदित्य ठाकरे

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ठाकरे खानदान के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा. पहली बार ठाकरे परिवार के किसी सदस्य ने चुनावी पर्चा भरा. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने मुंबई की वर्ली सीट से गुरुवार को नामांकन दाखिल किया. इस दौरान आदित्य ठाकरे की कुल संपत्ति की जानकारी भी सामने आई. आदित्य ठाकरे के पास करीब 16 करोड़ रुपये की संपत्ति है.

ये है चल संपत्ति

आदित्य ठाकरे ने हलफनामे में जानकारी दी है कि उनके हाथ में 30000 हजार रुपये कैश है. जबकि 10 करोड़ 36 लाख 15 हजार 218 रुपये बैंक में जमा हैं. आदित्य का निवेश करीब साढ़े 20 लाख का है, जबकि उनके पास एक BMW कार है जिसकी कीमत साढ़े 6 लाख बताई गई है. इसके अलावा आदित्य के पास 64 लाख 64 हजार की ज्वैलरी है. वहीं, 10 लाख 22 हजार की अन्य संपत्ति है. इस तरह आदित्य के पास कुल 11 करोड़ 38 लाख 5 हजार 258 रुपये की चल संपत्ति है.

न लोन, न कोई आपराधिक केस

वहीं, अचल संपत्ति की बात की जाए तो उनके पास कुल 4 करोड़ 67 लाख 6 हजार 914 रुपये की संपत्ति है. आदित्य ठाकरे ने अपने हलफनामे में जो जानकारी दी है उसमें बताया गया है कि न ही उनके ऊपर कोई लोन है और न ही कोई आपराधिक केस उनके खिलाफ है.

आदित्य ठाकरे ने नामांकन से पहले मुंबई में बड़ा रोड शो किया, जिसमें बड़ी तादाद में लोग जुटे. रोड शो के दौरान आदित्य ने आजतक से कहा कि जनता का प्यार देखर बेहद खुशी हो रही है और जनता हमारी सबसे बड़ी ताकत है. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने फोन पर उन्हें आशीर्वाद दिया है.

INDORE में फ्लेक्स के बैनर-पोस्टर प्रतिबंधित

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देश के सबसे साफ-सुथरे शहर का तमगा पा चुके इंदौर ने स्वच्छता के मानकों को और सख्त करते हुए अब प्लास्टिक के बैनर-पोस्टरों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इंदौर नगर निगम की गुरुवार को हुई बैठक में यह प्रस्ताव पास किया गया। इसके तहत निगम के सभी सदस्यों ने इस बात पर सहमति जताई कि अब कोई भी संस्था या संगठन शहर में प्लास्टिक के बैनर-पोस्टरों का इस्तेमाल नहीं करेगा।

हर प्रकार की सिंगल-यूज प्लास्टिक बैन

शहर के पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए स्वयंसेवी संस्थाएं या सरकारी संगठन या फिर राजनीतिक दल, कोई भी प्लास्टिक के बैनर-पोस्टर नहीं लगाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी के सिंगल-यूज प्लास्टिक (Single Use Plastic) पर रोक लगाने की अपील के मद्देनजर इंदौर नगर निगम ने यह प्रस्ताव पास किया है।

लंबे समय के बाद हुई निगम की बैठक

इंदौर नगर निगम परिषद की बैठक लंबे समय के बाद हुई है। भारी हंगामे के बीच हुई इस बैठक में निगम के सदस्यों ने सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध के साथ-साथ रूफ वाटर हार्वेस्टिंग को भी शहर में अनिवार्य करने पर सहमति जताई। निगम परिषद की पिछली बैठक काफी हंगामेदार रही थी। इसके मद्देनजर गुरुवार की बैठक के लिए बड़ी संख्या में पुलिसबल को तैनात किया गया था। बैठक में कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्लास्टिक के बैनर-पोस्टर पर प्रतिबंध लगाने का था, जिसे नेता प्रतिपक्ष फौजिया शेख ने पेश किया। उनके प्रस्ताव पर निगम के सभी सदस्यों ने सहमति जताई। इसके तहत शहर में किसी भी राजनीतिक दल के पोस्टर नहीं लगाने का प्रस्ताव पास किया गया। कहा गया कि अगर किसी दल ने पोस्टर लगा भी दिया, तो उसे हटाने पर किसी को आपत्ति नहीं होगी।

बैठक की शुरुआत से ही हंगामा

इंदौर नगर निगम परिषद के सम्मेलन की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई। नेता प्रतिपक्ष के पहले प्रश्न पर ही जमकर हंगामा हुआ। दरअसल, नेता प्रतिपक्ष फौजिया शेख ने मामला उठाया था कि देवगुराड़िया में ट्रैचिंग ग्राउंड पर लगाई गई कंपनी को किस आधार पर आठ करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। इसी कंपनी के संचालक अरशद वारसी को कंसल्टेंट नियुक्त किया गया और संचालक की पार्टनर कंपनी को ठेका भी दे दिया गया। इस मामले पर खूब हंगामा हुआ।

इसके अलावा सत्ता पक्ष के कुछ पार्षदों ने स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत किए जा रहे कामों को लेकर भी आपत्ति जताई। बैठक में नगर निगम का बकाया वसूलने और 1500 वर्गफीट पर बने मकानों, जिनमें बोरिंग है, उनमें रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य करने का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया। इंदौर नगर निगम के परिषद सम्मेलन में गुरुवार को पेश हुए सभी प्रस्तावों पर सदस्यों ने सहमति जताई। सभापति अजय नरुका के मुताबिक सभी प्रस्तावों का पास होना शहर और यहां रहने वालों के हित में है।

विधवा मां ने मजदूरी करके अपनी 3 बेटियों को बनाया अफसर!

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वृद्ध विधवा मां ने खेतों में मेहनत-मजदूरी कर अपनी तीन बेटियों को अफसर बनाने का सपना साकार कर दिखाया। मां का कहना है कि उसने अपने पति की अंतिम इच्छा पूरी की। जो चाहते थे कि उनकी तीनों बेटियां बड़ी अफसर बनें। इकलौता बेटा भी पिता की इच्छा पूरी करने के लिए पढ़ाई छोड़ मेहनत-मजदूरी में जुट गया, ताकि बहनें पढ़ सकें।

जज्बातों से भरी यह कहानी जयपुर जिले के सारंग का बास गांव की है। जहां 55 वर्षीय मीरा देवी की तीन बेटियों कमला चौधरी, ममता चौधरी और गीता चौधरी ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (IRS ) परीक्षा में सफलता हासिल की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसारमीरा का कहना है कि स्वर्गवासी पति गोपाल की अधूरी इच्छा पूरी करना ही उनके जीवन का मकसद था। गोपाल अपनी तीनों बेटियों को अफसर बनाना चाहते थे। विधवा मां ने इस सपने को पूरा करने के लिए गरीबी को आड़े नहीं आने दिया। बेटे ने भी त्याग किया।

गांव के छोटे से कच्चे घर में रहने वाली बेटियों ने भी मन लगाकर पढ़ाई की। तीनों ने मिलकर योजना बनाई और दो साल जमकर प्रशासनिक सेवा की तैयारी की। उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा भी दी थी, लेकिन कुछ अंक से पीछे रह गईं। फिर राजस्थान प्रशासनिक सेवा की परीक्षा दी और उसमें वे सफल हो गईं।

तीनो में सबसे बड़ी कमला को ओबीसी रैंक में 32वां स्थान मिला, वहीं गीता को 64वां और ममता को 128वां स्थान मिला। मीरा देवी का कहना है कि कई सालों तक बीमार रहे पति का दो साल पहले देहांत हो गया। इसके बाद से बेटियों ने पिता का सपना पूरा करने के लिए दिन-रात पढ़ाई करना शुरू किया।

इतिहास की सबसे हसीन स्त्री जिसे हर व्यक्ति पाना चाहता था, नाम जानकर यकीन नहीं करोगे

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क्लियोपेट्रा इतिहास की सबसे सुंदर स्त्री मानी जाती है, इससे मिस्त्री को कीजिए का लगभग हर व्यक्ति पाना चाहता था। इस स्त्री का शासनकाल 51 से लेकर 30 ईसा पूर्व हुआ करता था। बता दे क्लियोपेट्रा एक हसीन इस्त्री होने के साथ-साथ एक बड़ी चालाक और राजनीतिज्ञ भी थी।

क्लियोपेट्रा के सुंदरता के चलते कई कवियों ने अपनी कविताओं में भी लिखी थी इसके अलावा इसकी सुंदरता पर कई मूर्तिकारों ने मूर्तियां भी बनाई थी। बता दे यहां एक गरीब परिवार में पैदा हुई थी किंतु उसने गिफ्ट रखें सम्राट सीजर को अपने प्रेम जाल में फंसा लिया और इजिप्ट में अपना राज्य स्थापित कर लिया।

कहा जाता है कि उसके बाद क्लियोपेट्रा ने इतिहास के कई राजाओं के साथ संबंध बनाए थे। क्लियोपेट्रा नितिन बच्चों को जन्म दिया था। बता दें क्लियोपेट्रा बहुत ही ज्यादा लालची थी जो सत्ता पाने के लिए अपने छोटे भाई को जहर देकर मार दिया था। 39 साल की उम्र में क्लियोपैट्रा की मृत्यु एक सांप के काटने की वजह से हो गई थी।

दुर्गा पूजा पर कर्मचारियों की बल्ले- बल्ले- मिलेगा 64,700 रुपये का बोनस

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कोल इंडिया अपने कर्मचारियों को इस बार 64,700 रुपये बोनस का फेस्टिव बोनस देगी। दुर्गा पूजा के मौके बांटे जाने वाले इस बोनस पर कंपनी कुल 1,700 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

मंगलवार को कंपनी की 6 केंद्रीय कोल यूनियनों ने घंटों चली बैठक में मैनेजमेंट से बात की और बोनस की रकम पर विचार किया। इससे करीब तीन लाख कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। बैठक में सीटू नेता डीडी रामानंदन ने 70 हजार रुपये बोनस की मांग रखी थी।

2018-19 में कोल इंडिया को बेहतर मुनाफा हुआ है

बैठक में सीटू नेता डीडी रामानंदन ने 70 हजार रुपए बोनस की मांग रखी। उनका कहना था कि 2018-19 में कोल इंडिया को बेहतर मुनाफा हुआ है इसलिए ज्यादा बोनस मिलनी चाहिए।

कोल इंडिया चेयरमैन पीके सिन्हा ने कहा कि पिछले साल की तरह 60,500 रुपए बोनस ही दिया जा सकता है। नेताओं ने विरोध किया। फिर प्रबंधन ने 62,600 और इसके बाद 64,500 रुपए देने का अंतिम प्रस्ताव दिया। आखिरकार रात 10:10 बजे 64,700 रुपए देने पर सहमति बनी।

युवक ने नास्तिक होने का सर्टिफिकेट मांगा, बोला- ‘मैं भगवान को नहीं मानता’, जानिए हाईकोर्ट ने क्या कहा?

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हरियाणा में एक युवक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके खुद के नास्तिक होने का प्रमाणपत्र दिलाए जाने की मांग की। उसने कहा कि मुझे राज्य सरकार से ‘नो कास्ट’, ‘नो रिलीजन’ और ‘नो गॉड’ सर्टिफिकेट दिलाया जाए। हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई की। याचिका देख जज बोले, ”यदि तुम नास्तिक हो तो सरकार से प्रमाण पत्र लेने की क्या जरूरत है? भगवान, जाति-धर्म को मानना या न मानना किसी भी व्यक्ति का निजी मामला है।’

वहीं, इसी मामले का दूसरा दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया कि युवक की ​बात तहसीलदार ने मान ली और युवक को अपनी तरफ से सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया। बाद में सरकार ने उसे खारिज किया। जिसके बाद वह युवक सरकार के कदम के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच गया। हाईकोर्ट ने भी उसकी याचिका खारिज कर दी है।

युवक ने कहा, मुझे ‘नास्तिक का सर्टिफिकेट’ मुहैया कराया जाए

संवाददाता के अनुसार, फतेहाबाद जिले में टोहाना तहसील के रहने वाले रवि कुमार ने खुद को नास्तिक मानते हुए प्रशासनिक अधिकारियों से कहा था कि वह जातिहीन समाज में विश्वास रखता है। यानी, जाति-धर्म या भगवान में यकीन नहीं रखता। उसने यह भी बताया कि वह अनुसूचित जाति से है, लेकिन सरकार द्वारा अनुसूचित जाति को मिलने वाले लाभ व आरक्षण का फायदा भी नहीं लेना चाहता। ऐसे में ‘नास्तिक का सर्टिफिकेट’ मुहैया कराया जाए।”

तहसीलदार ने 24 अप्रैल को प्रमाण पत्र जारी किया

रवि कुमार की बातें सुनने पर तहसीलदार ने 24 अप्रैल 2019 को उसको प्रमाण पत्र जारी किया था। बाद में 4 मई 2019 को सरकार ने यह प्रमाण पत्र रद्द कर दिया था। जिसके बाद रवि ने हाईकोर्ट से आग्रह किया।

‘नागरिकों को जाति, धर्म की स्वतंत्रता’

रवि ने कहा कि हाईकोर्ट हमारी सरकार को आदेश दे कि मुझे नो कास्ट, नो रिलीजन, नो गॉड सर्टिफिकेट जारी करे। मगर, हाईकोर्ट की बेंच ने साफ कह दिया कि राज्य अपने नागरिकों को जाति, धर्म की स्वतंत्रता देता है। अलग से सर्टिफिकेट नहीं होगा।

मोटी बिल्ली निगलना नौ फुट के अजगर को पड़ा महंगा, हुआ यह हाल…

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गुजरात में वड़ोदरा जिले के एक मकान के पिछवाड़े नौ फुट के एक विशालकाय अजगर ने एक मोटी बिल्ली को निगल लिया लेकिन उसे पचाने में दिक्कत होने पर उसने उसे बाहर निकाल दिया.

एक वनरक्षक ने एक स्थानीय गैर सरकारी संगठन की मदद से अजगर को बचाया. वन रक्षक विजय परमार ने बताया कि वेजलपुर गांव में एक मकान के पिछवाड़े मंगलवार को अजगर ने बिल्ली को दबोच लिया और उसे निगलने की कोशिश की.

कुछ स्थानीय लोगों ने अजगर देखा और वन विभाग को इसकी जानकारी दी जिसके बाद परमार और स्थानीय गैर सरकारी संगठन ‘वाइल्डलाइफ रेसेक्यू ट्रस्ट’ के स्वयंसेवी घटनास्थल पहुंचे.

परमार ने कहा, अजगर लकड़ियों के ढेर के पीछे छुपा हुआ था, उसने बिल्ली को निगलने की कोशिश की लेकिन बाद में उसे लगा कि वह उसके लिए बहुत बड़ी है और उसने बिल्ली को बाहर निकाल दिया.

उन्होंने कहा कि करीब एक घंटे के प्रयास के बाद, अजगर को बचाया गया और उसे बाद में जंगल में छोड़ दिया गया.