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भारत में कमजोर मानसून के बाद भी खाद्य उत्पादों की कीमतें स्थिर…

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भारत में कमजोर मानसून के बाद भी खाद्य वस्तुओं की कीमतें स्थिर बनी हुई है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

साप्ताहिक खुदरा आंकड़ों के मुताबिक, सब्जियों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत और अंडों की कीमतों में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि अनाज की कीमतों में 0.5 प्रतिशत और तेल व फैट की कीमतों में 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।

तेल और फैट की कीमतों में 11 प्रतिशत, अंडों में 6 प्रतिशत, सब्जियों में 3 प्रतिशत, दूध में 3 प्रतिशत, मसालों में 3 प्रतिशत, अनाज में 2 प्रतिशत और दालों में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे मुख्य खाद्य-उत्पादक राज्यों में मानसून की लगातार कमी से आने वाले हफ्तों में खाद्य आपूर्ति पर खतरा मंडरा सकता है और कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बन सकता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 3 जुलाई तक कुल बारिश लंबे समय के औसत से 31 प्रतिशत कम रही।

जून के महीने में बारिश लंबे समय के औसत से 40 प्रतिशत कम रही, जिससे यह पिछले दशक में बारिश के लिहाज से सबसे खराब जून का महीना बन गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बुवाई का काम कम हो गया है, क्योंकि मानसून कमजोर बना हुआ है, जिससे जलाशयों में पानी का स्तर बहुत कम हो गया है।

पूरे देश में जलाशयों का जलस्तर उनकी क्षमता का सिर्फ 26 प्रतिशत है और पिछले साल इसी समय की तुलना में 39 प्रतिशत कम है।

मध्य भारत में सबसे ज्यादा क्षमता (32 प्रतिशत) है, इसके बाद उत्तर भारत (29 प्रतिशत) और पश्चिम भारत (28 प्रतिशत) का स्थान है। दक्षिण भारत (20 प्रतिशत) और पूर्वी भारत (19 प्रतिशत) में जलस्तर काफी कम है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग को उम्मीद है कि जुलाई 2026 में बारिश सामान्य से कम होगी, जिससे मानसून और खरीफ की बुवाई के मौसम को लेकर चिंता बनी रहेगी।