Home Blog Page 2534

तेजस एक्सप्रेस में सफर करने से मिलेंगे ये 5 बड़े फायदे

0

भारतीय रेलवे की पहली निजी रेल आईआरसीटीसी लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस आज से शुरू हो जाएगी। इसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हरी झंडी दिखाएंगे। पहली बार किसी रेल का पूर्ण परिचालन और टिकटिंग नियंत्रण आईआरसीटीसी के पास है।रेल संख्या 82501/82502 नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से लखनऊ के बीच हफ्ते में छह दिन चलेगी।

चलिए अब बात करते हैं कि इस रेल में सफर करने से कौन से बड़े फायदे मिलेंगे।

देरी होने पर मुआवजा

अक्सर लोगों की ट्रेन लेट हो जाती है, जिसके कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लेकिन आईआरसीटीसी की दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस के यात्रियों को इस इंतजार के लिए भी मुआवजा दिया जाएगा। एक घंटे से अधिक का विलंब होने पर 100 रुपये और दो घंटे से अधिक का विलंब होने पर 250 रुपये की मुआवजा राशि दी जाएगी।

25 लाख का निःशुल्क बीमा

यात्रियों को मिलने वाला दूसरा बड़ा फायदा है 25 लाख रुपये का निःशुल्क बीमा। यात्रा के दौरान लूटपाट या फिर सामान के चोरी हो जाने की स्थिति में भी एक लाख रुपये के मुआवजे की व्यवस्था है।

नाश्ते के साथ मिलेगा तोहफा

आईआरसीटीसी ने तेजस में यात्रा को यादगार बनाने के लिए कई नई चीजें शुरू की हैं। आईआरसीटीसी प्रबंधन ने फैसला लिया है कि रेल में पहली बार सफर करने वाले सभी यात्रियों को नाश्ते के साथ ही लंच भी करवाया जाएगा। जबकि किराए में सिर्फ नाश्ते के ही पैसे लिए जाएंगे। इसके साथ ही यात्रा को यादगार बनाने के लिए तोहफे देने का फैसला भी किया गया है।

फ्लाइट के जैसा स्वागत

इसके लिए खासतौर पर तेजस के संचालन से पहले ही कर्मचारियों को यात्रियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ ही विशेषज्ञों ने कॉर्पोरेट के अफसरों व कर्मचारियों को मेहमानों से पेश आने के अच्छे तरीके भी सिखाए हैं। यात्रियों के सवालों का जवाब मुस्कान के साथ देने पर भी जोर दिया जाएगा।

प्लैटफॉर्म पर ही बुक हो जाएंगी टिकट

ये भी सुझाव दिया गया है कि अगर किसी भी यात्री को परेशानी होगी या फिर किसी चीज की जरूरत होगी तो वह सफेद रंग का बटन पुश कर सके। इसे पुश करते ही मुस्कान के साथ मे आई हेल्प यू कहकर उसकी समस्या का समाधान किया जाएगा। इसके साथ ही प्लैटफॉर्म पर ही टिकट की बुकिंग करने के लिए दो काउंटर खोलने पर भी विचार किया जा रहा है।

हैदराबाद के मौजूदा निजाम की कहानी- पांच शादियों से लेकर अब दो कमरे के मकान में जिंदगी

0

हैदराबाद के निजाम फिर चर्चाओं में है. चर्चा की वजह है लंदन की हाईकोर्ट में वो मुकदमा, जिसमें पाकिस्तान को हार का झटका लगा है. दरअसल सातवें निजाम ने 1948 में बैंक के जरिए पाकिस्तान को 30 करोड़ की रकम ट्रांसफर की लेकिन फिर अपना इरादा बदल लिया. अब ये रकम 300 करोड़ के आसपास हो चुकी है और निजाम के वंशजों और भारत सरकार को मिलेगी. हालांकि हैदराबाद का आठवां निजाम काफी लंबे समय से कर्जों में डूबा हुआ है. उस पर कई मुकदमे चल रहे हैं. अब ये निजाम भारत की बजाए तुर्की के दो कमरे के एक फ्लैट में करीब- करीब अकेली जिंदगी गुजार रहा है.

हालांकि इस निजाम की कहानी भी खासी दिलचस्प है. 1948 में जब भारतीय फौजों ने ऑपरेशन पोलो के जरिए हैदराबाद रियासत पर कब्जा किया, तब तक ये रियासत देश की सबसे बड़ी, ताकतवर और सबसे धनी रियासत थी. तब सातवें निजाम उस्मान अली खान सत्ता में थे. उनकी गिनती दुनिया के सबसे रईस लोगों में होती थी.

कहा जाता है कि इस निजाम के पास बेहिसाब दौलत थी. कहा जाता है कि उसके अपने निजी खजाने में किलो में हीरे तौले जाते थे और टनों में सोने के जेवर थे. बहुमूल्य सामान तो ना जाने कितने थे और साथ में थी लंबी चौड़ी प्रॉपर्टी, महल और नगदी.

उस जमाने में कहा जाता था कि बैंक में जितना पैसा और घर में जितनी नकदी निजाम के पास थी, उतनी देश में शायद किसी के पास नहीं रही होगी. लेकिन इस निजाम को उतना ही कंजूस भी माना जाता था, जिसकी कंजूसी के भी ना जाने कितने ही किस्से प्रचलित थे. इस निजाम के बारे ये भी कहा जाता है कि उनकी कई बीवियां हैं.

सातवें निजाम का निधन 1967 में हुआ. उसके बाद कायदे से निजाम के पद पर उनके सबसे बड़े बेटे आजम जाह को बैठना चाहिए था लेकिन ऐसा हुआ नहीं बल्कि आठवें निजाम के तौर पर जिस शख्स की ताजपोशी हुई वो आजम का ही सबसे बड़ा बेटा मुकर्रम जाह था. मुकर्रम का जन्म वैभव के बीच फ्रांस के एक महल में हुआ था. उसकी मां धुर्रशहवर सुल्तान को तब दुनिया की सबसे सुंदर महिलाओं में गिना जाता था.

पहले दून स्कूल और फिर लंदन में पढ़ाई मुकर्रम को पढ़ने के लिए दून स्कूल भेजा गया. फिर हैरो लंदन और कैंब्रिज. उन्होंने बाद में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में भी दाखिला लिया. जब 1967 में मुकर्रम की ताजपोशी हुई, उस समय वो खुद भारत के सबसे रईस लोगों में गिना जाता था. लेकिन मुकर्रम की जीवनशैली भी उतनी खर्चीली थी. हैदराबाद में रहने से उसको अरुचि थी.

आस्ट्रेलिया में बड़ी प्रापर्टी खरीदी और वहीं रहने लगा
फिर 70 के दशक में खबर आई कि नए निजाम ने ऑस्ट्रेलिया में एक बहुत बड़ा एस्टेट खरीद लिया है, जहां उसका फॉर्म हाउस है, जिसमें भेडों का एक बड़ा फॉर्म भी है. यही नहीं मुकर्रम ने पर्थ में एक आलीशान बंगला भी खरीदा. आस्ट्रेलिया के मीडिया में उसकी चटखदार खबरें अक्सर चर्चा में रहती थीं. निजाम दरअसल वहां अपनी पहली बीवी इजरा के साथ ही जाना चाहता था लेकिन बीबी ने जब मना कर दिया तो उसने उसे तलाक दे दिया. जिसकी एवज में उसे मोटा मुआवजा देना पड़ा.

खूबसूरत एयरहोस्टेस से दूसरी शादी
बस यहीं से निजाम के जिंदगी की अजब कहानी शुरू होती है. आस्ट्रेलिया में वो बेहिसाब पैसा लूटा रहा था. लाइफ स्टाइल ऐसी कि कोई भी रश्क करे. वहां उसका दिल एक एयर होस्टेस सिमोंस पर आया. जो बीबीसी में भी काम कर चुकी थी. बला की खूबसूरत थी सिमोंस, शादी के बाद उसने अपना धर्म बदला और वो आयशा बन गई. इस शादी की ऑस्ट्रेलिया में बड़ी चर्चा हुई थी.

बाद में ये भी खबर आई कि आयशा की एड्स से मौत हो गई. लेकिन इससे भी बड़ी खबर ये थी कि मुकर्रम को आस्ट्रेलिया में अपने खर्च के लिए जब भी पैसे की जरूरत होती थी वो तुरंत हैदराबाद में महल और प्रॉपर्टी की देखभाल कर रहे लोगों से पैसा भेजने को कहता था. उसे कितना पैसा भेजा गया, इसका हिसाब किसी के पास नहीं है लेकिन ये जरूर हुआ कि उसके महल से बेशकीमती सामान और आभूषण गायब होने लगे. एक समय ये आया कि खजाना लगभग खाली हो चुका था.

कर्ज में डूबे निजाम के हाथ से निकली ऑस्ट्रेलिया की प्रॉपर्टी
90 का दशक आते आते आठवां निजाम कर्ज में डूबने लगा था. तब उसने हैदराबाद के एक बड़े ज्वैलर सरादुद्दीन जवेरी को अपनी प्रापर्टी का मैनेजर बनाया और उससे पैसा लेने लगा. ये 90 का दशक था. जवेरी बेशक पैसा दे रहा था लेकिन उसकी कीमत भी उसे वसूल करनी थी. जब ये कर्ज की रकम बहुत ज्यादा हो गई तो जवेरी ने आस्ट्रेलिया की दोनों प्रापर्टी पर कब्जा कर लिया. हालांकि उसका कहना था कि अब भी निजाम ने उसके कर्ज की पूरी रकम चुकाई नहीं है. निजाम के साथ उसका मुकदमा चल रहा है.

निजाम की हालत अब ये थी कि उसके पास हैदराबाद अचल संपत्तियां महल और प्रापर्टी जरूर थीं लेकिन वो सब ट्रस्ट के जरिए संचालित थीं, जिसे वो चाहकर भी बेच नहीं सकता था. 90 के दशक के आखिर तक जब इन महलों और प्रापर्टी का बुरा हाल होने लगा तो पहली बीबी इजरा ने इसे ट्रस्ट के साथ मिलकर अपने हाथों में लिया और सही किया. काफी हद तक ट्रस्ट और राजशाही की आर्थिक स्थिति को भी उबारना शुरू किया. फलकनुमा पैलेस को होटल ताज ग्रुप को दे दिया गया.

निजाम की मिस तुर्की से शादी और तलाक
निजाम मुकर्रम ने तीसरी शादी 1992 में रचाई. ये शादी उसने तुर्की की एक मिस तुर्की रह चुकी ओत्तोमान वंश की शहजादी मनोलिया ओनुर से रचाई लेकिन पांच साल चली और फिर तलाक हो गया. इसमें भी काफी पैसा हर्जाने के तौर पर देना पड़ा. हालांकि निजाम ने इसके बाद दो और शादियां रचाईं. आठवें निजाम के कुल पांच बच्चे हैं.

अब दो कमरे के फ्लैट में बीत रही है जिंदगी
अब वो लंबे समय से तुर्की में एक दो कमरे के फ्लैट में रह रहे हैं. हैदराबाद बहुत कम आते हैं. हैदराबाद के ट्रस्टों से जो कमाई होती है, उसका कुछ हिस्सा उनके पास जाता है लेकिन माना जाता है कि वो 84 की उम्र में भी कर्जों से दबे हुए हैं. ढेर सारी बीमारियां उन्हें घेर चुकी हैं. याददाश्त भी साथ नहीं देती. आमतौर पर वो सबसे कटा हुआ है और जिंदगी अकेलेपन के बीच बीत रही है.

हालांकि माना जाता है कि वो अब भी करीब 700 करोड़ की संपत्ति का मालिक है लेकिन कानूनी तौर पर वो अकेले इनमें किसी भी संपत्ति को बेच नहीं सकता. मुकर्रम के बारे में पिछले कुछ सालों में जो कुछ प्रकाशित हुआ, उससे लगता है कि वो अपनी जिंदगी में फिर आस्ट्रेलिया लौटना चाहते थे. अपनी वहां की खोई प्रापर्टी हासिल करना चाहते थे लेकिन ऐसा हो नहीं सका.

मुकर्रम जाह का कहना है कि वो नेहरू के दोस्त थे. जब नेहरू प्रधानमंत्री थे तब उन्होंने उनके सामने मुस्लिम देश में भारत का राजदूत बनने का प्रस्ताव भी रखा था, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया था.

लंदन की अदालत में 300 करोड़ की रकम का जो मुकदमा उन्होंने जीता है, उसमें रकम किसे किसे मिलेगी, ये अभी तय नहीं. क्योंकि इसके कई हिस्सेदार हो सकते हैं. हालांकि मुख्य तौर पर इसका हिस्सा निजाम मुकर्रम, उनके छोटे भाई मुफ्फकम जाह और भारत सरकार के पास जानी है.

पान मसाला निर्माता और विक्रेता को छह माह की सजा, अगर आपकी जेब में मिला तो क्या होगी कार्रवाई

0

राज्य सरकार की ओर से बुधवार को पान मसाले में हानिकारक तत्वों की सूचना जारी करने और ऐसे पान मसालों पर प्रतिबंध की घोषणा के बाद प्रदेश के पान मसाला कारोबारियों और इनका सेवन करने वालों में हड़कंप मच गया। प्रदेश में व्यापारी पूछताछ करने में लगे रहे कि उनके पास रखे पान मसाले के स्टॉक का अब क्या होगा। बाद में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हींं पान मसालों को हटाना होगा, जिनमें प्रतिबंधित किए गए तत्व तंबाकू, निकोटीन, मैग्नेशियम, कार्बोनेट, निकोटीन, और मिनरल ऑइल पाए जाएंगे। विभाग की ओर से इनके नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच करवाई जाएगी। प्रदेश में इस समय करीब 400 करोड़ के पान मसाले बाजार में मौजूद है।

 सालाना करीब 4 हजार करोड़ के इस कारोबार की खुदरा बिक्री
प्रदेश की करीब दो ढाई लाख थडिय़ों पर यह बेचा जा रहा है। जयपुर शहर में ही करीब 20 हजार थडिय़ों पर इनकी बिक्री हो रही है।
ये है जैमो जवाब
सवाल – बाजार में अब पान मसाले मिलेंगे या नहीं?
जवाब – पहले की तरह ही बिकते रहेंगे, पान मसाले के वे ही नमूने बाजार से हटेंगे, जिनके नमूने फेल हो जाएंगे
सवाल – बाजार में जो पान मसाला उपलब्ध है, उसे खाने वाला व्यक्ति कैसे पहचानेगा कि उसमें हानिकारक तत्व हैं या नहीं
जवाब – प्रथमदृष्टया खाने वाला व्यक्ति उसे नहीं पहचान पाएगा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी ही उसके नमूने लेंगे, जिसके बाद प्रयोगशाला में उनकी जांच होगी
सवाल – मेरी जेब में पुडिय़ा है, तो मुझ पर भी कार्यवाही हो सकती है क्या?
जवाब – नहीं खाने वाले की जेब में पान मसाला मिलता है तो उस पर कार्यवाही नहीं होगी।
सवाल – तो फिर कार्यवाही किस पर होगी
जवाब – जांच में नमूना फेल होने पर भी संबंधित पान मसाले का बैच बिकता हुआ पाया जाता है, तो उसके निर्माता और विक्रेता दोनों पर कार्यवाही होगी। खाद्य सुरक्षा लाइसेंस निलंबन जैसी कार्यवाही भी हो सकती है। पूरी कंपनी को भी प्रतिबंधित किया जा सकता है, पहले से मौजूद प्रावधानों में भी 6 महीने से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है
सवाल – बाजार से इनके सैंपल किस तरह उठाए जाएंगे
जवाब – बाजार से इनके सैंपल खाद्य सुरक्षा अधिकारी उठाएंगे।
राजस्थान की स्थिति
– 21.4 प्रतिशत (15 वर्ष से अधिक) धूम्रपान रहित तंबाकू का उपयोग करते हैं, जबकि 10.7 प्रतिशत धूम्रपान करते हैं
– जिसका मुख्य कारण 90 प्रतिशत मुंह का कैंसर है
– राजस्थान में वर्तमान में 13.2 प्रतिशत लोग धूम्रपान के रूप में तंबाकू का सेवन करते है, जिसमें 22 प्रतिशत पुरुष, 3.7 प्रतिशत महिलांए शामिल हैं
– यहां पर 14.1 प्रतिशत लेाग चबाने वाले तंबाकू उत्पादों का प्रयोग करते हुए हैं, जिसमें 22 प्रतिशत पुरुष और 5.8 प्रतिशत महिलाएं हैं।
91 पान मसाले सही पाए गए थे
हानिकारक तत्वों के बिना पहले भी निर्माता पान मसाला बना रहे हैं। इसकी पुष्टि खुद स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट कर रही है। विभाग ने 310 नमूनों की जांच अब तक करवाई है। जिनमें से 91 सही पाए गए हैं। साफ है कि हानिकारक तत्वों के बिना भी पान मसालों का निर्माण किया जा सकता है।

अगर अपना मकान है तो ये खबर जरूर पढ़ें, 1000 से 25000 रूपए का लग सकता है जुर्माना

0

सरकार की तरफ से ऐसे कई कड़े निर्णय लिए जा रहे हैं। जिससे लोगों को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है क्योंकि सरकार की तरफ से ऐसे नियम लेने का सबसे बड़ा कारण यही होता है ताकि, लोग नियमों का उल्लंघन ना करें और, ज्यादा जुर्माने की वजह से वह नियमों का पालन करें ताकि, भारत और तेजी से प्रगति पर जाएं और इसी वजह से एक ऐसा नियम लागू हुआ है जो आपको जानना जरूरी है।
सरकार कर रही है नियम और भी कड़े
सरकार का नियम कड़े करने का केवल यही एक अहम मुद्दा है ताकि, लोग नियमों का पालन करें और उनका उल्लंघन ना करें। जिसकी वजह से लोगों में हमेशा यह डर बने रहे कि, अगर वह नियमों का उल्लंघन करेंगे तो उनको भारी जुर्माना देना पड़ जाएगा। एक ऐसा ही नियम लागू हुआ है जिनके पास अपना खुद का मकान है उनके लिए तो इस खबर को आखिर तक जरूर पढ़ें।
अगर मकान में दिखी यह चीज तो लग सकता है हजार रुपए से लेकर ₹25000 का जुर्माना
मोदी सरकार की तरफ से अब पूरे देश में सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर हमेशा के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है। जिसके तहत अब नगर निगम की टीम हर घर पर सर्वे भी करेगीम जिससे अगर किसी भी घर में सिंगल यूज़ प्लास्टिक पाया गया तो उस पर हजारों रुपए से लेकर ₹25000 का जुर्माना लगा दिया जाएगा तो, ऐसे में सिंगल न्यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल ना करें।

छत्तीसगढ़ : निगम-मंडलों में नियुक्ति नहीं होने से कांग्रेस कार्यकर्ता निराश, बीजेपी ने लगाया ये आरोप

0

छत्तसीगढ़ में 15 सालों बाद सत्तासीन होने वाली कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता अब हताश और निराश होते जा रहे हैं. इसकी वजह सरकार बनने के करीब दस महीने बाद भी कार्यकर्ताओं की बारी नहीं आने को माना जा रहा है. दरअसल, सत्ताधारी दल कांग्रेस अपनी जीत का श्रेय भले ही कार्यकर्ताओं को दे, मगर हकीकत ये है कि सरकार बनने के करीब दस महीने बाद भी कार्यकर्ताओं की बारी अब तक नहीं आई है. आगामी दो-चार महीने तक ऐसी कोई उम्मीद भी नहीं है. अब ये बात अलग है कि कांग्रेस ने अपने नेताओं को पहले विधायक बनाया. फिर उन्हीं विधायकों से एक मुख्यमंत्री, बारह मंत्री बने, आधा दर्जन के करीब प्राधिकरणों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाए गए. इतना ही नहीं विधायकों को कई मंडलों में सदस्य भी बनाया गया. लेकिन जब बारी कार्यकर्ताओं की आई तो सत्ताधारी दल के मुखिया भूपेश बघेल ने एक बड़ा बयान दे दिया. सीएम भूपेश बघेल से साफ कह दिया कि नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव के बाद ही निगम-मंडलों में नियुक्ति की जाएगी. इस वजह से कार्यकर्ताओं में मायूसी छा गई है. आने वाले दिनों में कार्यकर्ताओं की ये निराशा पार्टी के लिए परेशानी का सबब भी बन सकती है.

नियुक्ति को लेकर सियासय भी

कांग्रेस ने अपनी जीत (Win) का श्रेय कार्यकर्ताओं को दिया था. लेकिन अब पार्टी पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लग रहा है. सरकरा ने मंडल गठन-विस्तार करने में, प्राधिकरण में विधायकों की नियुक्ति करने में काफी तेजी दिखाई. तो वहीं कार्यकर्ताओं को निगम-मंडल में जगह देने में पीछे हो गई है.

इस मसले पर कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह का कहना है कि हताश और निराश वो ही हो सकता है जो कांग्रेस का सिपाही नहीं है. हमारी सरकार 15 साल नहीं थी, तब हम निराश नहीं हुए तो अब क्या होंगे. मुख्यमंत्री ने साफ कह दिया है कि नगरीय निकाय चुनाव के बाद पार्टी इस ओर गंभीरता से ध्यान देगी. तो वहीं बीजेपी (BJP) प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास का कहना है कि कांग्रेस में कलह है. कांग्रेस नेताओं की पार्टी है, लेकिन बीजेपी कार्यकर्ताओं की पार्टी है. कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं के साथ धोखा कर रही है.

बड़ी खबर : भारतीय वायुसेना ने वीडियो जारी कर बताया कैसे दिया बालाकोट एयर स्ट्राइक को अंजाम, देखें वीडियो

0

वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया ने वार्षिक वायुसेना दिवस पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक प्रमोशनल वीडियो जारी कर बालाकोट हवाई हमलों की कहानी बताई है। इस वीडियो में दिखाया गया है कि भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में आंतकी ठिकानों पर किस तरह से हमला किया। वीडियो में ये भी दिखाया गया है कि बालाकोट में एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने अगले दिन (27 फरवरी) को भारतीय वायुक्षेत्र में घुसने की कोशिश की, लेकिन भारतीय वायुसेना के जवानों ने उन्हें खदेड़कर बाहर कर दिया।

महाराष्ट्र बीजेपी के वो बड़े और ताकतवर नेता, जिनका पार्टी ने इस चुनाव में पत्ता काट दिया

0

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 बीजेपी (BJP) ने फडणवीस कैबिनेट में कई दिग्गज मंत्रियों के टिकट काट दिए हैं. सूबे के शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े को विधानसभा चुनाव से ऐन पहले तगड़ा राजनीतिक झटका लगा है और तावड़े का इस चुनाव को लड़ने का सपना टूट गया है. नामांकन पर्चा दाखिल करने के आखिरी दिन शुक्रवार की सुबह बीजेपी उम्मीदवारों की जारी हुई चौथी लिस्ट के आने के साथ ही शिक्षा मंत्री तावड़े का टिकट कटने की पुष्टि हो गई. विनोद तावडे मुंबई के पश्चिमी उपनगर बोरीवली विधानसभा सीट से विधायक है.

अब इस सीट पर विनोद तावड़े की जगह बीजेपी और शिवसेना गठबंधन के उम्मीदवार सुनील राणे को पार्टी ने टिकट थमा दिया है. सुनील राणे बीजेपी मुंबई का युवा चेहरा हैं. सुनील राणे पहले मुंबई की वर्ली विधानसभा सीट पर चुनाव लड चुके हैं. हालांकि अब वर्ली सीट पर शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे शिवसेना और बीजेपी गठबंधन के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड रहे हैं.

माना जा रहा है कि कथित फर्जी इंजीनियरिंग डिग्री और दूसरे आरोपों की वजह से विपक्षी दलों के नेताओं के आरोपों से घिरे शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े से बीजेपी ने किनारा करने मे ही पार्टी की भलाई समझी है और शिक्षा मंत्री तावड़े का टिकट काटकर चुनाव प्रचार में विपक्षी दलों की धार को कुंद कर दिया है.

विनोद तावडे किसी वक्त में सूबे के मुख्यमंत्री की कुर्सी के भी प्रबल दावेदार थे. तावड़े महाराष्ट्र की मराठा जाति के नेता हैं. सूबे की सियासत में मराठा बेहद ताकतवर हैं. अब तक प्रदेश के ज्यादातर मुख्यमंत्री मराठा जाति से ही बने हैं. साल 2014 कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन को हराकर प्रदेश में सत्ता में आई देवेंद्र फडणवीस सरकार मे पहली बार शिक्षा मंत्री कुर्सी पर आसीन हुए विनोद तावड़े इससे पहले महाराष्ट्र विधान परिषद के विपक्ष के नेता थे.

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी और शिवसेना गठबंधन दोबारा सत्ता में लौटने की तगड़ी सियासी तैयारी करके चुनावी समर में कूद पडा है और किसी भी राजनीतिक चूक से गठबंधन बच रहा है. बीजेपी और शिवसेना गठबंधन प्रदेश की 288 विधानसभा सीटों में से कम से कम 220 पर जीत का लक्ष्य बना चुका है.

भाजपा की चौथी लिस्ट जारी हुई तो सूबे के दूसरे धाकड़ बीजेपी नेताओं को भी तगड़ा राजनीतिक झटका लगा है. बीजेपी के कद्दावर नेता पूर्व राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे का भी पार्टी ने जलगांव से टिकट काट दिया है. हालांकि एकनाथ खडसे के लिए थोड़ी राहत की बात है कि पार्टी ने खडसे की जगह उनकी बेटी को टिकट थमा दिया है. एकनाथ खडसे को कथित जमीन घोटाले में उनका नाम उछलने पर खडसे को फडणवीस कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ा था.

बीजेपी ने मुंबई की कोलाबा सीट से विधायक कैबिनेट मंत्री दर्जा हासिल राज पुरोहित का भी पत्ता काट दिया है. राजपुरोहित की जगह राहुल नार्वेकर को टिकट मिल गया है. हाउसिंग घोटाले के आरोपों के बाद महाराष्ट्र की कैबिनेट से बाहर हुए पूर्व गृह निर्माण मंत्री प्रकाश मेहता को भी पार्टी ने इस बार घर बैठा दिया है. घाटकोपर ईस्ट विधानसभा सीट पर पूर्व मंत्री प्रकाश महेता का टिकट काटकर बीजेपी ने पराग शाह को टिकट दिया है.

दिवाली से पहले सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, ‘हाउस बिल्डिंग एडवांस’ पर ब्याज दर घटी

0

सरकारी कर्मचारियों को घर खरीदने के लिए मिलने वाली अग्रिम राशि पर ब्याज दर घटा दी गई है। केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के हाउस बिल्डिंग एडवांस एचबीए) पर ब्याज दर 8.5 प्रतिशत से घटाकर 7.9 प्रतिशत कर दी है। गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।

केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने कहा कि नई ब्याज दर एक अक्टूबर से प्रभावी होगी। यह दर एक साल तक प्रभावी रहेगी। सरकार के इस कदम को आवासीय क्षेत्र में मांग बढ़ाने की दिशा में उठाये गये एक और कदम के रूप में देखा जा रहा है। मंत्रालय ने कहा, ‘सरकारी कर्मचारियों के लिए एक साल के लिये हाउस बिल्डिंग एडवांस पर ब्याज दर को मौजूदा 8.5 प्रतिशत से घटाकर 7.9 प्रतिशत कर दिया गया है। कर्ज की राशि चाहे कितनी भी हो उस पर 7.9 प्रतिशत की दर से ब्याज देय होगा।’ सरकार के स्थायी कर्मचारियों और पांच साल तक लगातार सवा में रह चुके अस्थायी कर्मचारियों को मकान के लिए कर्ज के रूप में अग्रिम राशि देने की व्यवस्था है।

बयान में कहा गया है, ‘मंत्रालय-विभागों के पास अपने कर्मचारियों को एचबीए नियमों के तहत एसबीए देने का अधिकार होता है।’ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने कहा था कि हाउस बिल्डिंग एडवांस पर ब्याज दर को कम किया जाएगा और इसे 10 साल की सरकारी प्रतिभूतियों के प्रतिफल से जोड़ जायेगा। सीतारमण ने कहा, ‘घरों की मांग में सरकारी कर्मचारियों का बड़ा योगदान होता है। इस फैसले से अधिक से अधिक सरकारी कर्मचारी नया घर खरीदने को प्रोत्साहित होंगे।’

जानिए क्या होता है हाउस बिल्डिंग अडवांस?

सरकार के स्थायी कर्मचारियों और 5 साल तक लगातार सवा में रह चुके अस्थायी कर्मचारियों को मकान के लिए कर्ज के रूप में अग्रिम राशि देने की व्यवस्था है। हाउस बिल्डिंग अडवांस की सुविधा केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों को मिलती है। इसके तहत, कर्मचारी अपनी जमीन पर मकान बनाने के लिए अग्रिम भुगतान हासिल कर सकते हैं। इस योजना के तहत नए घर या फ्लैट की खरीदारी के लिए भी अग्रिम भुगतान मिलता है। इस अग्रिम भुगतान का उपयोग हाउजिंग लोन के रिपेमेंट में किया जा सकता है।

हनी ट्रैप एमपी : जेल में श्वेता जैन ने अपना खास शौक पूरा करने के लिए जेल प्रशासन के सामने रखी यह डिमांड

0

 मध्य प्रदेश हनी ट्रैप की आरोपी श्वेता जैन गिरोह की चार अन्य साथियों के साथ इंदौर की जिला जेल में बंद है। जेल में श्वेता को जैन पढ़ाई को शौक लगा है। जिसके चलते उसने जेल प्रशासन से चश्मे की डिमांड कर डाली है। उसका तर्क है कि उसे जेल में पढ़ने के दौरान परेशानी हो रही है। इसलिए उसे चश्मा भी उपलब्ध करवाया गया है।

बता दें कि हनी ट्रैप के आरोपित श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्निल जैन, बरखा सोनी, आरती और उनके साथ बीएससी की छात्रा ​इंदौर जिला जेल में बंद है। श्वेता और बरखा पहले भी जेल में रह चुकी हैं। इसके चलते उनका सामना जेल अफसरों से नहीं हुआ, लेकिन राउंड के दौरान श्वेता विजय जैन ने अफसरों से उसका सामान गेट पर ही रखवाए जाने की बात कही।

इस पर उन्होंने नियमों का हवाला देकर अंदर किसी भी प्रकार का सामान नहीं जाने की बात कही थी। इस पर श्वेता ने उसका चश्मा देने के लिए कहा। उसका कहना था कि नजर कमजोर हैं और पढ़ने के लिए चश्मे की जरूरत लगती है। इसके चलते चश्मा दिया जाए। चश्मा अंदर दिया जा सकता था। इसके चलते उसे चश्मा दे दिया गया। वहीं, हाथ काटने वाली श्वेता की कल मरहम पट्टी करने के साथ ही जेल में उसे दवा भी दी गई।

शायद खुल गया राज.. क्या इसीलिये धारा 370 हटाने का पाकिस्तान से भी ज्यादा विरोध कर रही थी कांग्रेस ? वो सच जो रौंगटे खड़े कर देगा

0

जिस दिन मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने का एलान किया था तो देश की सियासत में खलबली मच गई थी. पूरे देश ने देखा था कि खुद को देश की आजादी का ठेकेदार बताने वाली कांग्रेस ने संसद में किस तरह से धारा 370 हटाए जाने का विरोध किया था. स्थिति ये थी धारा 370 हटाए जाने के विरोध में कांग्रेस नेताओं के बयानों पाकिस्तान अपने रक्षा कवच के रूप में इस्तेमाल कर भारत के खिलाफ माहौल बनाने की नापाक कोशिशें करने लगा.

अब शायद ये राज खुल गया है कि कांग्रेस पार्टी की तरफ से धारा 370 हटाने का पाकिस्तान से भी तीव्र विरोध कांग्रेस पार्टी की तरफ से क्यों कहा जा रहा था. खबर के मुताबिक़, जम्मू कश्मीर के कांग्रेस नेता के भाई पर आतंकियों को पनाह देने का आरोप लगा है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के भाई जी एम सरूरी के भाई मोहम्मद शफी सहित 12 लोगों के खिलाफ जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ में आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के साथ संबंध होने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है. अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि मामले दो अलग अलग एफआईआर के जरिए दर्ज किये गये हैं.

बताया गया है कि पहली प्राथमिकी में छह लोगों के नाम हैं और उन सभी को गिरफ्तार कर लिया गया हैं वहीं दूसरी प्राथमिकी में जिसमें प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री जी एम सरूरी के भाई मोहम्मद शफी साहित छह अन्य लोगों के नाम हैं. पुलिस के अनुसार, पूर्व मंत्री जीएम सरूरी के भाई मोहम्मद शफी सरूरी समेत मसूद अहमद, मोहम्मद मुजफ्फर शाह, गुलाम मोहम्मद कमाल, तौसीफ अहमद गुंदना और सईद अहमद के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. ये सभी किश्तवाड़ के रहने वाले हैं. तौसीफ अहमद गुंदना आ‌र्म्ड केस के एक मामले में पहले से ही जेल में बंद है. मोहम्मद सफी सरूरी भी कांग्रेस से जुड़ा रहा है तथा पूर्व सरपंच है.

आइजी मुकेश सिंह ने बताया कि पिछले दिनों पकड़े गए आतंकियों से पूछताछ के आधार पर इन सभी के खिलाफ राष्ट्रविरोधी व गैर कानूनी गतिविधियों मे संलिप्त होने का केस दर्ज किया गया है. अभी किसी को गिरफ्तार नहीं किया है. आरोपों की जांच की जा रही है. इन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया है. बता दें कि कांग्रेस नेता के भाई और अन्य पांच लोगों का नाम बीते साल किश्तवाड़ में हुई भाजपा नेता अनिल परिहार व उनके भाई और इसी वर्ष आरएसएस कार्यकर्ता चंद्रकांत शर्मा व उनके अंगरक्षक की हत्या में शामिल नौ आतंकियों ने पूछताछ के दौरान लिया है.

ये आतंकी किश्तवाड़ के जिला उपायुक्त के अंगरक्षक और गत माह पीडीपी नेता के अंगरक्षक से हथियार लूटने की वारदात में भी शामिल रहे हैं. इन आतंकियों के तीन साथी गत सप्ताह बटोत में मुठभेड़ में मारे गए हैं. पकड़े गए आतंकियों ने पूछताछ में बताया कि कांग्रेस नेता के भाई मोहम्मद शफी व अन्य लोगों को शुरू से ही किश्तवाड़ में आतंकी गतिविधियों की साजिश का पूरा पता था. ये लोग न सिर्फ जिहादी तत्वों को अपने घर में पनाह देते थे, बल्कि एक जगह से दूसरी जगह सुरक्षित आने जाने में भी उनकी मदद करते थे. वित्तीय व अन्य प्रकार का भी सहयोग करते थे.