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चलती ट्रेन की सील बंद बोगी से गायब हो गई बाइक

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ट्रेन पटरियों पर अपनी स्पीड से दौड़ रही थी. ट्रेन की लगेज बोगी पिछले रेलवे स्टेशन से सील बंद कर आगे के लिए रवाना की गई थी. उसके ठीक पीछे ट्रेन का गॉर्ड भी बैठा हुआ था. जब ट्रेन रवाना हुई तो लगेज बोगी का फर्श सही सलामत था. बोगी की छत भी नहीं कटी हुई थी. बोगी के दरवाजे भी ठीक तरह से बंद थे. लेकिन इसके बाद भी चलती ट्रेन की लगेज बोगी से एक बाइक गायब हो गई. ये बाइक मुगलसराय स्टेशन के रास्ते से गायब हुई. एक आरटीआई हालांकि रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने कुछ दिन बाद बाइक को बरामद करने का दावा किया है.

बाइक ही नहीं चलती ट्रेन से यह सामान भी हुआ चोरी

बाइक सिर्फ चलती ट्रेन से ही चोरी नहीं हुई है. स्टेशन पर बने पॉर्सल घर से भी एक बाइक चोरी जा चुकी है. इतना ही नहीं एक साथ घी के 30 कनस्तर भी चोरी हो चुके हैं. जबकि स्टेशन पर हर वक्त इंडियन रेलवे के पुलिसकर्मी गश्त करते हैं. अब अगर सिर्फ चलती ट्रेन की बात करें तो पालक्कड डिविजन से 2 साइकिल, बिलासपुर इलाके में 3 फ्रिज, 21 बंडल इंसानी बाल तक चोरी जा चुके हैं. पश्चिम बंगाल इलाके की बात करें तो वहां एक बार में 200 से 500 किलो तक गुटखा और पान मसाला चोरी हो रहा है.

चलती ट्रेन से चोरी पर क्या बोला रेल मंत्रालय

आरटीआई के जवाब में रेल मंत्रालय ने चलती ट्रेन से चोरी होने पर बताया है कि रेलों पर पुलिस की व्यवस्था राज्य सरकार का विषय है. चलती ट्रेन में अपराधों को रोकना और उसकी रिपोर्ट दर्ज करना उनका काम है. लेकिन आरपीएफ उनकी मदद भी करता है. मंत्रालय के अनुसार 2009 से 2018 तक 4293 मामले चलती ट्रेन में चोरी के दर्ज किए जा चुके हैं. 21.19 करोड़ का माल हो चुका है चोरी. और चलती ट्रेन में सबसे ज्यादा चोरी सेंट्रल, नॉर्थ और ईस्ट फ्रंटियर रेलवे ज़ोन में हो रही हैं. वहीं एक और खुलासा करते हुए मंत्रालय ने बताया कि चलती ट्रेन में चोरों के निशाने पर सबसे ज्यादा रेडीमेड गारमेंट्स और इलेक्ट्रोनिक सामान रहता है.

आरटीआई में मांगी गई थी यह जानकारी

हाल ही में रेल विभाग में एक आरटीई दाखिल की गई थी. आरटीआई के माध्यम से जानकारी चाही गई थी कि चलती ट्रेन की लगेज बोगी से कितना सामान चोरी होता है. वहीं रेल स्टेशन पर बने पॉर्सल घर से कितना सामान चोरी होता है. बीते 10 साल में कितनी रकम का कितना सामान चोरी गया और कितना बरामद हुआ. सामान चुराने वाले कितने लोग पकड़े गए. इतना ही नहीं आरटीआई में यह जानकारी भी चाही गई थी कि किस तरह का सामान चोरों के निशाने पर होता है और रेलवे के किस इलाके में चलती ट्रेन से सबसे ज्यादा सामान चुराया जाता है.

VIDEO : Microsoft ने लॉन्च किया फोल्डेबल फोन, एकसाथ चला सकेंगे दो-दो ऐप्स

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Microsoft ने Surface Duo इवेंट के दौरान अपना फोल्डेबल फोन पेश करके सबको किया. इसकी बिक्री एक साल के अंदर शुरू कर दी जाएगी. इसके साथ साथ माइक्रोसॉफ्ट ने एक फोल्डेबल टेबलेट सर्फेस निओ भी लॉन्च किया है. फोन का यह डिज़ाइन सर्फेस नियो लैपटॉप से काफी मिलता-जुलता है. यह काफी कुछ उसका छोटा रूप लगता है. सर्फेस डुओ में 5.6 इंच के दो डिस्प्ले हैं जो कि 360 डिग्री पर घूम सकते हैं जो कि साथ मिलकर 8.3 इंच का हो जाता है.

क्या होंगे फीचर्स-
हार्डवेयर की बात करें तो माइक्रोसॉफ्ट डुओ 855 SoC क्वॉलकॉम स्नैपड्रैगन से पावर्ड होगा. हालांकि कंपनी ने फोन के सारे फीचर्स नहीं बताए हैं. वैरिएंट्स और कलर ऑप्शन को लेकर भी अभी तमाम जानकारी का इंतज़ार है.

देखने में ये फोन काफी स्लिम और हल्का है. दरअसल ये पॉकेट साइज की नोटबुक की तरह दिखता है. खास बात है कि दोनों डिस्प्ले में एक ही समय पर अलग-अलग ऐप्स चल सकते हैं. या दूसरी स्क्रीन को लैंडस्केप मोड में बदला जा सकता है जिससे दूसरी स्क्रीन को कीबोर्ड की तरह या गेम कंट्रोलर की तरह यूज़ कर सकते हैं.

साल 2017 में कंपनी ने बंद कर दिया था विंडोज फोन बनाना

कंपनी ने नोकिया के साथ मिलकर विंडोज़ फोन लाने के लिए 7 बिलियन डॉलर खर्च किए थे लेकिन पूरी तरह से सफलता नहीं मिली जिससे साल 2017 में कंपनी ने विंडोज़ आधारित फोन को डेवेलप करने से बंद कर दिया. हालांकि, अब दुबारा कंपनी ने बाज़ार पर अपनी पकड़ मज़बूत करने का फैसला लिया है.

रूसी शख्स का ऐपल पर आरोप, कहा- मुझे बना दिया Gay, ठोका 11 लाख रुपये का मुकदमा

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रूस के एक व्यक्ति ने टेक कंपनी ऐपल पर आरोप लगाया है कि आईफोन के एक ऐप) ने की वजह से वह समलैंगिक हो गया. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एएफपी द्वारा देखी गई शिकायत की कॉपी से इस बात का पता लगा है. शख्स ने इस मामले में मॉस्को की एक कोर्ट में मुकदमा करते हुए दस लाख रूबल (लगभग 15 हज़ार डॉलर या तकरीबन 11 लाख रुपये) मुआवज़े के तौर पर मांग की है.

बिटक्वॉइन कि जगह डिलीवर हुआ गेक्वॉइन-
शख्स का आरोप है कि उसने ऐपल के स्मार्टफोन ऐप से बिटक्वॉइन मंगाया था, लेकिन उसकी जगह उसे गेक्वॉइन डिलीवर हो गया. शख्स के वकील ने कहा, ‘यह मामला काफी गंभीर है और मेरा क्लाइंट काफी डरा हुआ है.’

उसने अपनी शिकायत में लिखा है कि गेकॉइन पर एक नोट लिखा था, ‘ट्राई करने से पहले जज न करें.’ उसने लिखा, ‘यह पढ़ने के बाद मैंने सोचा कि बिना किसी को ट्राई किए मैं कैसे किसी के बारे में जज कर सकता हूं? फिर मैंने समलैंगिक संबंधों को ट्राई किया.’

आगे उस शख्स ने लिखा, ‘अब मेरे पास एक बॉयफ्रेंड है, लेकिन मुझे यह समझ नहीं आता कि मैं पैरेंट्स को इस बारे में कैसे बताऊं. मेरी जिंदगी बहुत बुरी तरह से बदली है और शायद अब कभी नॉर्मल नहीं हो सकेगी. ऐपल ने गलत तरीके से मेरी ज़िंदगी बदल दी जिससे मुझे मानसिक रूप से काफी नुकसान हुआ है.’

हालांकि, रूस में मौजूद ऐपल के रिप्रेज़ेंटेटिव ने इस मामले में एएफपी की रिक्वेस्ट पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. शख्स के वकील ने कहा कि अपने सभी प्रोग्राम के लिए कंपनी ज़िम्मेदार होती है भले ही उसमें तीसरी पार्टी शामिल हो. सूचना के मुताबिक मुकदमा 20 सितंबर को किया गया था और कोर्ट 17 अक्टूबर को इस मामले में सुनवाई करेगी.

मॉस्को ने साल 2013 में ‘गे प्रोपेगैंडा’ के खिलाफ एक नियम बनाया था जो कि आधिकारिक रूप से तो बच्चों या नाबालिगों में गैर-पारंपरिक लाइफस्टाइल के प्रमोशन पर रोक लगाता है लेकिन वास्तव में ये एलजीबीटी ऐक्टिविज़म के खिलाफ है.

MP : हाईकोर्ट पहुंचा हाईप्रोफाईल हनीट्रैप मामला, जांच में गड़बड़ी की आशंका

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 मध्यप्रदेश का हाईप्रोफाईल मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में गत दिवस एक जनहित याचिका दायर लगाई गई है, जिसमें मामले की जांच में गड़बड़ी होने की आशंका जताई गई है, साथ ही मांग की गई है कि मामले की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में कराई जाए। यह याचिका इंदौर निवासी शेखर चौधरी नामक व्यक्ति द्वारा दायर की है।

याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता धर्मेन्द्र चेलावत के माध्यम से दायर याचिका में कहा है कि राज्य शासन ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन तो कर दिया है, लेकिन बार-बार एसआटी में अधिकारियों को बदला जा रहा है। कुछ दिन पहले आईपीएस संजीव शमी को एसआईटी का प्रमुख बनाया था, लेकिन बाद में बदल दिया गया। जो भी अधिकारी जांच कर रहे हैं, वे राज्य शासन के अधीन हैं, ऐसी स्थिति में जांच के अप्रभावित रहने की संभावना कम है। जांच सीबीआई या किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जाए और हाई कोर्ट दिन प्रतिदिन इसकी निगरानी करे, जिससे निष्पक्ष जांच हो सके। याचिका में आरोप है कि सरकार इस मामले की जांच की दिशा भटकाने का प्रयास भी कर रही है। बार-बार जांच अधिकारी बदले जा रहे हैं। जैसे ही जांच आगे बढ़ती है, सरकार एसआईटी के अधिकारियों को बदल देती है। ऐसी स्थिति में जांच में गड़बड़ी की आशंका है।

दरअसल, मध्यप्रदेश में हाईप्रोफाईल हनीट्रैप मामले की जांच के लिए पुलिस मुख्यालय द्वारा विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन गिया है, जिसमें आईजी डी श्रीनिवास वर्मा चीफ थे। इसके दो दिन बाद ही उन्हें हटाकर संजीव शमी को एसआईटी चीफ बना दिया गया। उन्होंने भी तीन दिन मामले की जांच की, लेकिन इसके बाद उन्हें भी हटा दिया गया और डीजी राजेंद्र कुमार को एसआईटी चीफ बना दिया गया। बार-बार एसआईटी चीफ बदलने से हनीट्रैप मामले की गोपनीयता पर सवाल खड़े हो गए। इसी के चलते हाईकोर्ट में गुरुवार को याचिका दायर की गई है, जिसमें हाईकोर्ट की निगरानी में सीबीआई या किसी केन्द्रीय जांच एजेंसी से मामले की जांच करने की मांग की गई है।

RBI ने घटाई जीडीपी वृद्धि दर, रेपो रेट में की 0.25 फीसदी की कटौती, जानिए आपको क्या फायदा होगा

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देश की बिगड़ी अर्थव्यवस्था के बीच आरबीआई ने बड़ा फैसला लिया है। आरबीआई ने जीडीपी वृद्धि दर में कटौती कर दी है। केंद्रीय बैंक ने इसे 6.9 फीसदी से घटाकर 6.1 फीसदी कर दिया है। इसके साथ ही आरबीआई ने शुक्रवार को अपनी प्रमुख नीतिगत दर में लगातार 5वीं बार कमी की है। आरबीआई ने मौद्रिक नीति समिति की समीक्षा बैठक में रेपो दर 25 आधार अंक घटाकर 5.15 प्रतिशत कर दिया है। गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में 6 सदस्यीय एमपीसी की बैठक हुई, जिसमें यह फैसला लिया गया।

आरबीआई के इस फौसले के साथ ही इस साल रेपो दर में कुल कटौती 135 आधार अंक हो गई है। पहले यह दर 5.40 प्रतिशत थी। बताया जा रहा है कि 9 सालों में पहली बार रेपो रेट इतना कम किया गया है। रिवर्स रेपो रेट को 4.90 प्रतिशत कर दिया गया है और बैंक रेट 5.40 प्रतिशत हो गया है।

आरबीआई के इस फैसले के बाद बैंक, लोन पर ब्याज दर कम सकते हैं। इसका मतलब यह है कि लोगों को जिस दर पर ब्याज चुकाना होता है, वह कम होगी। इसका सीदा असर लोगों पर पड़ेगा। लोगों का ईएमआई अब कम हो सकता है। अगर बैंक ब्याज दरों में कटौती करते हैं तो लोगों को इसका फायदा होगा। जो होम, ऑटो या दूसरी तरह के लोन फ्लोटिंग रेट पर लिए गए हैं, उनकी ईएमआई में भी कमी आएगी।

इससे पहले इसी साल 7 अगस्त को आरबीआई ने ने आम लोगों को राहत दी थी। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की समीक्षा बैठक में लगातार चौथी बार रेपो रेट में कटौती की घोषणा की गई थी। फैसले के मुताबिक, रेपो रेट को घटाकर 5.40 प्रतिशत कर दिया गया था। आरबीआई ने 35 आधार अंकों की कटौती की गई थी। आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट को 5.15 प्रतिशत किया था।

नेटफ्लिक्स फिल्म ‘Drive’ का गाना ‘मखना’ रिलीज, यूं पूल पार्टी के मजे ले रहे सुशांत-जैकलीन

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सुशांत सिंह राजपूत और जैकलीन फर्नांडीस की नेटफ्लिक्स पर आने वाली वेब फिल्म ‘ड्राइव’ का नया गाना ‘मखना’ सॉन्ग रिलीज हो गया है. यह एक पार्टी सॉन्ग है, जिसमें सुशांत और जैकलीन अपने दोस्तों के साथ ट्रिप पर मौज-मस्ती करते हुए दिखाई दे रहे हैं.

इस गाने के वीडियो में आप देख सकते हैं कि जैकलीन और सुशांत अपने दोस्तों संग पूल पार्टी और नाइट क्लब में फुल ऑन मस्ती कर रहे हैं. यह एक पैप्पी ट्रेक है जो कि आपको अपनी ट्रिप याद दिला सकता है या फिर एक नई ट्रिप प्लान करा सकता है.

मखना गाने के बोल ओजिल दलाल और तनिष्क बागची ने लिखे हैं. इसके अलावा तनिष्क, यासेर और असीस कौर ने इस गाने को अपनी आवाज दी है.

इस सीरीज का निर्माण करण जौहर ने किया है. पहले फिल्म ‘ड्राइव’ को लेकर कहा जा रहा था कि ये 20 सिंतबर को देश के सभी सिनेमा हॉल में रिलीज होगी, लेकिन बाद में करण जौहर ने इसे नेटफ्लिक्स पर रिलीज करने का फैसला लिया.

तरुण मनसुखानी द्वारा निर्देशित यह वेब फिल्म 1 नवंबर को रिलीज होगी. सुशांत और जैकलीन के अलावा इस फिल्म में बोमन ईरानी, पंकज त्रिपाठी, विभा छिब्बर, सपना पब्बी और विक्रमजीत वर्क अहम भूमिका में नजर आएंगे.

महाराष्ट्र : अधिकारी पर कीचड़ फेंकने वाले MLA नीतीश राणे को BJP ने दिया टिकट

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महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे के बेटे और कांग्रेस के पूर्व विधायक नीतेश राणे ने गुरुवार को बीजेपी में शामिल हो गए। 21 अक्टूबर को राज्य में वोटिंग होनी है। 37 साल के नीतेश राणे ने साल 2014 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर कंकावली विधानसभा सीट से जीते थे। उन्होंने तब बीजेपी के तत्कालीन विधायक प्रमोद जत्थार को मात दी थी। नीतेश राणे एक अधिकारी के साथ बदसलूकी को लेकर चर्चा में आए थे।

नीतेश राणे को बीजेपी ने दिया टिकट

बीजेपी ने नीतेश राणे को कंकावली सीट से टिकट दिया है। राणे को बीजेपी ने शिवसेना की नाराजगी के बावजूद कोंकण क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए उम्मीदवार बनाया है। उनके पिता और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे शिवसेना भी रह चुके हैं। उन्होंने साल 2005 में शिवसेना छोड़ी थी और कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

साल 2107 में बनाई नई पार्टी

नीतेश राणे के पिता नारायण राणे ने साल 2017 में कांग्रेस छोड़कर महाराष्ट्र स्वामिभान पार्टी का गठन किया था। नारायण राणे ने अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर दिया था। इसके बाद वो बीजेपी के समर्थन से राज्यसभा के लिए चुने गए।

अधिकारी के साथ की बदसलूकी

गौरतलब है कि इसी साल जुलाई में नीतेश राणे एक अधिकारी पर कीचड़ फेंकने और दुर्व्यवहार के मामले में गिरफ्तार किए गए थे। उन्होंने मुंबई हाइवे के नजदीक अधिकारी पर कींचड़ फेंका था। उनका आरोप था इस अधिकारी की वजह से सड़कों की हालत खराब है। जूनियर राणे और उनके समर्थकों की ये हरकत कैमरे में कैद हो गई थी। इस दौरान वो इंजीनियर को पूल में बांधने की कोशिश भी कर रहे थे। इसी तरह साल 2017 में वो एक मीटिंग के दौरान अपना आपा खो बैठे थे और सरकारी अधिकारी पर मछली फेंक दी थी।

वीजा के चक्कर में पिछले कई महीनों से फंसा है परिवार, नहीं जा पा रहे हैं अमेरिका वापस

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वीजा और पासपोर्ट को लेकर एक तरफ जहां सरकार बेहतर व्यवस्था का दावा कर रही है। वहीं दूसरी तरफ लोग ऑफिसों का चक्कर काटकर परेशान हो गए हैं। इसी सिलसिले में एक ताजा मामला सामने आया है, जहां एक परिवार अपना वीजा रिन्यू कराने वॉशिंगटन डीसी से अपने देश भारत लौटे थे। पूरा परिवार दो हफ्ते का प्लान बनाकर आया था, लेकिन ऑफिसों के चक्कर में वह वहां फंस गए हैं। उनका कामकाज, बच्चों की पढ़ाई सहित कई चीजों का नुकसान हो रहा है। वैसे ये पूरा मामला साफ तौर पर दर्शा रहा है कि हमारा सिस्टम कैसे काम करता है।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक सौरव मजूमदार अपने परिवार सहित भारत आए हुए हैं ताकि वो अपना एच-वनबी वीजा रिन्यूअल कराने आए थे। लेकिन कागजी कार्रवाई में देरी के कारण अब वह यहां फंसे हुए है। उनके दो बच्चे भी हैं, जो अमेरिका में ही पढ़ते हैं। माता-पिता के फंसे होन के कारण बच्चे भी यहीं हैं और उनकी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है।

सौरव मजूमदार की पत्नी इश्तिा मेनन का कहना है कि हमने इतना नहीं सोचा था कि हमारे साथ ये सबकुछ होगा। इश्तिा जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रही हैं। सौरव का कहना है कि अपने 6 साल के बेटे को यह बताना बहुत मुश्किल पड़ रहा है कि हम वापस क्यों नहीं जा पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बच्चे के शिक्षक क्लास की फोटो भेजते हैं और बताते हैं कि वो लोग कितना उसे याद कर रहे हैं।

सौरव और इश्तिा 19 साल पहले अपनी मास्टर डिग्री पूरी करने के लिए यूएस गए थे। सौरव ने कहा कि ‘वो बहुत सारे देशों में रह चुके हैं, लेकिन वॉशिंगटन डीसी से उनको प्यार है। और दूसरे जगहों के लोगों से बिल्कुल अलगा हैं यूएस के लोग। वहां के लोग बहुत ही शानदार हैं।’

पूरा परिवार करीब छ महीने से अपने वीजा को रिन्यूअल कराने के इंतजार में है। सौरव अपने परिवार के साथ हर तीन साल पर आते हैं और पासपोर्ट के साथ-साथ वीजा भी रिन्यूअल कराते हैं। वहीं बच्चे भी अपने दादा-दादी से मिल पाते हैं। लेकिन इस बार उनको आए हुए काफी लंबा समय हो गया है लेकिन अभी तक कागजात तैयार नहीं हुए हैं। हालांकि परिवार ने अमेरिका में रहने के लिए आठ साल पहले ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई कर दिया है।

परिवार के साथ सब खुश थे। उन्हें लगा कि अब उनका पासपोर्ट तैयार हो जाएगा। जब उसे एक ईमेल मिला, आठ दिन बाद, यह कहते हुए कि उसका पासपोर्ट तैयार था तो परिवार में खुशी थी। लेकिन जब वह उसे लेने गया, तो कोई मुहर नहीं थी। इसके बजाय, उन्हें एक पत्र मिला जिसमें कहा गया था कि उन्हें इंटरव्यू के लिए आने की आवश्यकता है।

इसलिए वह अगले दिन गया, एक सीधा इंटरव्यू हुआ, फिंगरप्रिंट मिला, और एक दस्तावेज मिला, जिसमें बताया गया कि सब कुछ आयोजित किया जा रहा है। परिवार ने अपने डीसी के लिए बुक की गई 13 अगस्त के हवाई जहाज के टिकट को कैंसल कर दिया और वकील को काम पर रखा।

विदेश विभाग मजूमदार के ईमेल का जवाब एक चेतावनी के साथ दिया कि “प्रशासनिक प्रसंस्करण की स्थिति के बारे में पूछताछ करने से पहले, आवेदकों को साक्षात्कार की तारीख से कम से कम 180 दिनों तक इंतजार करना चाहिए या पूरक दस्तावेजों को प्रस्तुत करना चाहिए, जो भी बाद में हो।”

जलजमाव में शहर का वीआईपी इलाका क्यों नहीं डूबा?

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पिछले सात दिनों से पटना शहर का आधे से अधिक हिस्सा जलमग्न है. 72 घंटे में लगभग 300 मिमी. बारिश हुई और पानी इतना भर गया कि लोग डूबने लगे, सड़कों पर नावें चलने लगी.

लगातार हो रही बारिश थम तो गयी है मगर पानी अब तक नहीं निकल सका है. इतने दिनों में पानी सड़कर काले पानी जैसा हो गया है.

शहर की एक बड़ी आबादी अपनी ज़मीन छोड़ चुकी है. जिनके घर ऊंचे थे, वे ऊपर चढ़ गए हैं. जिनके घर नहीं थे वे डूबते-उतराते किसी तरह पलायन कर गए. जानवरों का कुछ नहीं था. बहुत से डूब गए. सड़ गए. अब पानी में उतरा रहे हैं.

वैसे तो सरकार ने बाढ़ में डूबने के कारण फ़िलहाल किसी तरह की मानवीय क्षति की बात नहीं स्वीकारी है. मगर पानी जैसे-जैसे कम हो रहा है, शंकाएं गहरी होती जा रही हैं.

कंकड़बाग, राजेंद्रनगर, पाटलिपुत्र कॉलोनी, गर्दनीबाग, बेउर, रामकृष्ण नगर, इंद्रपुरी, शिवपुरी जैसे कई रिहायशी इलाकों में पानी छह से सात फीट तक भर गया था.

कई दिनों तक जलजमाव रहने के कारण शहर पर महामारी का संकट भी मंडरा रहा है.

आख़िर इतने अधिक समय तक जलजमाव क्यों रह गया?

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कह रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण असमय बहुत ज़्यादा बारिश हो गई. विपक्ष कह रहा है ड्रेनेज सिस्टम फ़ेल हो जाने की वजह से ऐसा हुआ.

लेकिन कंकड़बाग स्थित अपने घर के डायनिंग हॉल में हफ़्ते भर से जमा बदबूदार काले पानी में खड़े वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्रा कहते हैं, “पानी इसलिए नहीं निकल सका क्योंकि प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने तत्परता नहीं दिखाई

उन्होंने कहा, “यहां के लगभग सारे पंप हाउस तो पहले से बंद पड़े ही थे, जिस दिन (सोमवार को) विलासपुर के साउथ इस्टर्न कोल्डफ़ील्ड्स लिमिटेड (SECL) से ज्यादा क्षमता के साथ पानी निकालने वाली एचपी मशीनें आयीं थीं, उस दिन वीआईपी मूवमेंट बढ़ गया था. नीतीश कुमार और सुशील मोदी समेत कई मंत्री ओर वीआईपी उसी दिन जायज़ा लेने भी निकले थे. क्योंकि वर्षा बारिश बंद हो चुकी थी.”

मिश्रा के मुताबिक़, “अधिकारी वीआईपी मूवमेंट में ही लगे रहे. उधर दूसरे राज्य से एचपी मशीनें लेकर आने वाले 18 लोग की टीम ट्रकों को लेकर पूरे दिन इधर से उधर घूमती रहीं. कोई उनसे को-ऑर्डिनेट नहीं कर सका. अगले दिन तक भी ये मशीनें नहीं लगाई जा सकी थीं.”

उन्होंने बताया, “शुरू में तो उन्हें गैस कटर तक के लिए जूझना पड़ा था. अब जाकर पांच में से चार मशीनें चालू हो सकी है़. मगर स्थानीय निकायों और विभागों के अधिकारियों का अभी भी कोई सामंजस्य नहीं है. वे सभी 18 लोग अपने ख़र्चे पर और अपने प्रबंध पर यहां रुककर शहर का पानी निकाल रहे हैं. देखिए कब तक निकाल पाते हैं.”वीआईपी इलाका

शहर डूबा मगर वीआईपी इलाके में उड़ रही है धूल

क्या वीआईपी लोगों के कारण ही शहर का पानी निकालने में ही देरी हो रही है? क्योंकि उन्हीं वीआईपी लोगों पर शहर की ड्रेनेज व्यवस्था दुरुस्त करने का जिम्मा भी है.

राजेंद्र नगर, कंकड़बाग का हाल देखने के बाद हम उसी वीआईपी इलाक़े में पहुंचे जहां पर वीआईपी लोगों का निवास है.

गुरुवार को सातवें दिन भी राजेंद्र नगर के कदमकुआं इलाके में इतना पानी था कि नाव से राहत सामग्री पहुंचायी जा रही थी. कंकड़बाग में भी अधिकांश जगहों पर तीन से चार फ़ीट जमा था.

इसके उलट, एक अणे मार्ग जहां मुख्यमंत्री का निवास है, वहां राजेन्द्र चौक से जब तेज़ रफ़्तार में गाड़ियां गुज़रतीं तो धूल उड़ती दिखती.

केवल एक अणे मार्ग ही नहीं, बल्कि सर्कुलर पथ भी (जहां पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी रहती हैं), देशरत्न मार्ग (जहां उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी) का सरकारी बंगला है, कौटिल्य मार्ग, स्ट्रैंड रोड समेत उस एरिया में कहीं भी एक बूंद पानी ज़मीन पर नहीं दिख रहा था. ऐसा लग ही नहीं रहा था कि हम उसी पटना में खड़े हैं जहां के जलजमाव के ख़बरें राष्ट्रीय मीडिया की सुर्ख़ियां बनी हुई हैं.

क्यों नहीं डूबा वीआईपी इलाका?

क्या इस इलाके में जलजमाव नहीं हुआ था? देशरत्न मार्ग से अणे मार्ग को जोड़ने वाले चौक पर कुछ युवक खड़े थे. वहीं बगल में नौकठिया की झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले भी थे.

उनमें से एक युवक अंगद ने कहा, “मेन रोड पर तो एक मिनट भी पानी नहीं जमा था. हां, हमारी झुग्गियों की ओर थोड़ा ज़रूर जम गया था क्योंकि वो निचले इलाके में है. मगर वो भी तुरंत हट गया था. नगर निगम वाले मशीन लेकर आए थे. कचरा साफ़ कर दिए. सारा पानी चला गया.”

क्या वीआईपी इलाके में रहने के कारण उन्हें जलजमाव नहीं झेलना पड़ा?

इसके जवाब में अंगद ने कहा, “कह सकते हैं. क्योंकि प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाई. शायद इसलिए क्योंकि बगल में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री का घर है, गवर्नर हाउस है.”

बेली रोड के किनारे से एयरपोर्ट तक बसे वीआईपी इलाके में राजभवन, मुख्यमंत्री निवास, मुख्यमंत्री कार्यालय, मंत्रियों के आवास, वरीय प्रशासनिक अधिकारियों के आवास, सरकारी संस्थाओं के दफ़्तर, विधानमंडल और सचिवालय हैं.मुख्यमंत्री आवास का रास्ता

ऐसे सुधरा था यहां का ड्रेनेज सिस्टम

अंग्रेज़ों के ज़माने में इसे न्यू पटना का नाम दिया गया था. 1911 में दिल्ली दरबार में किंग जॉर्ज पंचम ने यह घोषणा की, कि उड़ीसा और बिहार को मिलाकर एक नया प्रांत बनेगा जिसके एक ही लेफ़्टिनेंट गवर्नर होंगे. इस प्रांत की राजधानी पटना को बनाया गया.

1912 में जब लॉर्ड हार्डिंग उड़ीसा और बिहार के लेफ़्टिनेंट गवर्नर थे, तभी नई राजधानी बनाने के क्रम में अंग्रेजों ने इस एरिया में गवर्नर हाउस बनाने की आधारशिला रखी. 1917 में यह इमारत बनकर तैयार हुई. शुरू में इसका विस्तार 100 एकड़ था. 1970 में पटना का चिड़ियाघर बनाने के लिए इसी के कंपाउंड से जमीन दी गई थी.

वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्रा कहते हैं, “1967 के बाढ़ में गवर्नर हाउस, अणे मार्ग, देशरत्न मार्ग, सब जगह पानी भर गया था. फिर उसके बाद यहां का ड्रेनेज सिस्टम सुधार लिया गया. यहां के इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर बहुत काम हुआ. तब से इस इलाके में कभी पानी नहीं जमा हुआ.”

लव से ही बातचीत में पता चला कि 1997 में जब एक बार और राजेंद्र नगर तथा कंकड़बाग जलमग्न हुआ था, तब तत्कालीन हाई कोर्ट के वकील श्याम किशोर शर्मा ने इसी बात को लेकर याचिका दायर की थी.

उसी मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के आदेश पर जलनिकासी के लिए अलग से एक कमिश्नर नियुक्त किया गया था, जिसका यही काम ही था देखना कि जल निकासी की समस्याएं क्या हैं और इसे कैसे दूर किया जा सकता है. फिर बहुत दिनों तक पटना में जलजमाव नहीं हुआ. अब वह व्यवस्था खत्म हो चुकी है.

वीआईपी बनाम बाकी पटना

जब पूरा पटना डूब रहा था, शहर की पॉश कॉलोनियां जलमग्न थीं. तब भी यह वीआईपी एरिया कैसे बचा रह गया?

इनटैक (इंडियन नेशनल ट्रस्ट फ़ॉर आर्ट एंड कल्चर हेरिटेज) के पटना संयोजक जेके लाल कहते हैं, “क्योंकि एक तो यह इलाका ऊंचे जगह पर स्थित है और दूसरा कि यहां की ड्रेनेज व्यवस्था बाकी शहर के मुकाबले ज्यादा-चाक चौबंद है. यहां का ड्रेनेज सिस्टम पुराना वाला ही है. जबकि बाकी शहर का पुराना ड्रेनेज सिस्टम अब ध्वस्त हो चुका है. यह योजनाबद्ध तरीके से बसा-बसाया गया इलाका है. शहर में आबादी बढ़ने के साथ बेतरतीब ढंग से निर्माण हुए हैं. उसी में ड्रेनेज सिस्टम खराब हुआ. “

वीआईपी इलाका होने और सामान्य इलाका होने के बीच का फ़र्क एक अणे मार्ग, मुख्यमंत्री आवास से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित हज भवन के पीछे वाले इलाके की तरफ़ जाने से हो जाता है.

यहां सैकडों झुग्गी-झोपड़ियां जलमग्न थीं. उनमें से आधे से अधिक झोपड़ियां तो तहस-नहस हो चुकी थीं. वहां का प्राथमिक विद्यालय काले पानी से घिरा था.

पुरुष, महिलाएं और बच्चे सामान के साथ सड़क पर थे. कुछ स्वयंसेवी राहत समूह सामग्रियां बांट रहे थे. उस सड़क पर किसी तरह का वीआईपी मूवमेंट नहीं था…

सरकार की नई पहल! प्लास्टिक का विकल्प बनेगा बांस लाखों में होगी कमाई, जानिए इसके बारे में सबकुछ

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प्लास्टिक (Single Use Plastic) पर बैन के बाद अब बांसप्लास्टिक के सामान का बड़ा विकल्प बनने जा रहा है. घर बनाने से लेकर फर्नीचर तक सब बांस के तैयार हो रहे हैं. मोदी सरकार ने इसकी खेती और बिजनेस के लिए एक बड़ा प्लान बनाया है, जिसमें वो किसानों को हर पौधे पर 120 रुपये की मदद भी दे रही है. इस स्कीम के बारे में जानिए और फायदा उठाईए. पीएम नरेंद्र मोदी सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करने की कई बार अपील कर चुके हैं. खादी ग्रामोद्योग आयोग ने बांस की बोतल को लॉन्च कर दिया है.

क्या है राष्ट्रीय बैंबू मिशन? 
कृषि मंत्रालय की एडिशनल सेक्रेटरी अल्का भार्गव ने बताया कि मोदी सरकार ने बांस की खेती का बड़ा प्लान बनाया है. इससे बिजनेस की बड़ी संभावना बन रही है. इसके लिए राष्ट्रीय बैंबू मिशन बनाया गया है. ताकि इसकी खेती और बिजनेस बढ़े. हर राज्य में मिशन डायरेक्टर बनाए गए हैं. वो जिलेवार अधिकारी तय कर रहे हैं कि कौन इस काम को देखेगा. इसमें एग्रीकल्चर , फॉरेस्ट और इंडस्ट्री तीन विभाग शामिल है. इंडस्ट्री इसके प्रोडक्ट की मार्केट बताएगी.

बांस से क्या-क्या बना सकते हैं आप?
बांस की बोतलें बना सकते हैं. यह कंस्ट्रक्शन के काम आ रहा है. आप इससे घर बना सकते हैं. फ्लोरिंग कर सकते हैं. फर्नीचर बना सकते हैं. हैंडीक्रॉफ्ट और ज्वैलरी बनाकर कमाई कर सकते हैं. बैंबू से अब साइकिलें भी बनने लगी हैं. कृषि मंत्रालय के अधिकारियों का दावा है कि सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई), रुड़की ने इसे कंस्ट्रक्शन के काम में लाने की मंजूरी दी है. अब शेड डालने के लिए सीमेंट की जगह बांस की सीट भी तैयार की जा रही है. हरिद्वार में रेलवे ने इसी से स्टेशन का शेड बनाया है.

किसान को कितनी सहायता मिलेगी?
>>तीन साल में औसतन 240 रुपये प्रति प्लांट की लागत आएगी. जिसमें से 120 रुपये प्रति प्लांट सरकारी सहायता मिलेगी.
>>नार्थ ईस्ट को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में इसकी खेती के लिए 50 फीसदी सरकार और 50 फीसदी किसान लगाएगा.
>>50 फीसदी सरकारी शेयर में 60 फीसदी केंद्र और 40 फीसदी राज्य की हिस्सेदारी होगी. जबकि नार्थ ईस्ट में 60 फीसदी सरकार और 40 फीसदी किसान लगाएगा. 60 फीसदी सरकारी पैसे में 90 फीसदी केंद्र और 10 फीसदी राज्य सरकार का शेयर होगा.
>>हर जिले में इसके नोडल अधिकारी बनाए गए हैं वो आपको पूरी जानकारी दे देंगे

सितंबर में ही झारखंड सरकार ने दो दिवसीय बांस कारीगर मेले का आयोजन किया था. जिसमें सीएम ने कहा कि बांस की खेती करने वाले किसानों को सरकार चीन और वियतनाम भेजेगी. वहां वे बांस के प्रोड्क्टस बनाने की ट्रेनिंग लेंगे और फिर मास्टर ट्रेनर बनकर यहां अन्य किसानों को ट्रेनिंग देंगे.

कितने साल में तैयार होती है खेती?
>>बांस की खेती आमतौर पर तीन से चार साल में तैयार होती है. चौथे साल में कटाई शुरू कर सकते हैं.
>>इसका पौधा तीन-चार मीटर की दूरी पर लगाया जाता है इसलिए इसके बीच की जगह पर आप कोई और खेती कर सकते हैं.
>>इसकी पत्तियां पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल हो सकती हैं. बांस लगाएंगे तो फर्नीचर के लिए पेड़ों की कटान कम होगी. इससे आप पर्यावरण रक्षा भी करेंगे.
>>अभी हम काफी फर्नीचर चीन से मंगा रहे हैं, इसलिए आप इसकी खेती से इंपोर्ट कम कर सकते हैं.

कितनी होगी कमाई?
>>जरूरत और प्रजाति के हिसाब से एक हेक्टेयर में 1500 से 2500 पौधे लगा सकते हैं.
>>अगर आप 3 गुणा 2.5 मीटर पर पौधा लगाते हैं तो एक हेक्टेयर में करीब 1500 प्लांट लगेंगे. साथ में आप दो पौधों के बीच में बची जगह में दूसरी फसल उगा सकते हैं.
>>4 साल बाद 3 से 3.5 लाख रुपये की कमाई होने लगेगी. हर साल रिप्लांटेशन करने की जरूरत नहीं. क्योंकि बांस की पौध करीब 40 साल तक चलती है.
>>दूसरी फसलों के साथ खेत की मेड़ पर 4 गुणा 4 मीटर पर यदि आप बांस लगाते हैं तो एक हेक्टेयर में चौथे साल से करीब 30 हजार रुपये की कमाई होने लगेगी.
>>इसकी खेती किसान का रिस्क फैक्टर कम करती है. क्योंकि किसान बांस के बीच दूसरी खेती भी कर सकता है.

निजी जमीन पर नहीं लगेगा वन कानून लेकिन…
जनवरी 2018 में केंद्र सरकार ने बांस को पेड़ की कैटेगरी से हटा दिया. हालांकि ऐसा सिर्फ निजी जमीन के लिए किया गया है. जो फारेस्ट की जमीन पर बांस हैं उन पर यह छूट नहीं है. वहां पर वन कानून लागू होगा.

136 तरह की प्रजातियां
सरकारी नर्सरी से पौध फ्री मिलेगी. इसकी 136 प्रजातियां हैं. अलग-अलग काम के लिए अलग-अलग बांस की किस्में. लेकिन उनमें से 10 का इस्तेमाल सबसे ज्यादा हो रहा है. यह देखकर प्रजाति का चयन करना होगा कि आप किस काम के लिए बांस लगा रहे हैं. अगर फर्नीचर के लिए लगा रहे हैं तो संबंधित प्रजाति का चयन करना होगा.