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यहाँ जाने भारत में पर्दा प्रथा कहाँ से आयी और कौन है इसका जिम्मेदार

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जब हमारी औरते यहाँ उपस्थिति होती थी तो वे यहाँ बिना पर्दे के आती थी महिलाये गांव में भी बिना चेहरा ढके काम रक्ति थी महिला स्वंत्रता का यहाँ पूरा पालन मिलता है पुराने प्राचीन वेदो एवं धर्मग्रंथो में पर्दा प्रथा का कही भी विवरण नहीं मिलता है हिन्दुओ के पवित्र ऋग्वेद में लोगो को विवाह के समय में कन्या की और देखने को कहा गए है इस समय भी महिला बिना पर्दे के रह सकती थी।

धर्मशास्त्र का इतिहास पुस्तक के पेज क्रमांक 336 के अनुसार सबसे पहले महाकाव्य में पर्दा प्रथा मिलती है पर यहाँ भी केवल कुछ राज परिवारों में ये मिलता है जो घराने भर बड़े और नामी होते थे केवल वह ही ऐसा करते थे अपने रामायण भी देखी होइ और महाभारत भी यहाँ आपने माता सीता और कुंती दोनों में से किसी को भी पर्दे में नहीं देखा होगा इसका मतलब की यहाँ भी पर्दा महिलाओ के लिए नहीं था।

जातक कथाओ की रचनाओं में कही कही स्त्रियों के पर्दे का उल्लेख मिलता है अंता और खजुराहो की कलाकृतियों में भी स्त्रियों को बिना घूंघट दिखाया गया है अब हम मुगलकालीन इतिहास के पन्नो को पलटना शुरू करते है तो यहाँ पर दो बाते साफ होती है पहली की जब मुश्लिम शाशक भारत आये तब यहाँ स्त्रियों के साथ रेप के मामले सामने आने लगे क्योंकि इस पहले रेप भी हमारे यहां कही नजर नहीं आता।

हमारे धर्म में स्त्रियों के साथ चल तो नजर आता है पर रेप कही नहीं दिखता दूसरी बात की पर्दा प्रथा भी मुश्लिमों के देश में आगमन होने के बाद ही नजर आने लगी हिन्दू स्त्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से ये प्रथा लागू की गयी थी महिलाओ को सुरक्षा देना अब जरूरी हो गया था आये दिन महिलाओ को निशाना बनाया जा रहा था मुस्लिम समाज की स्त्रियों में ये था तो हमारे समाज ने भी खुलेपन को रोकने के लिए और अपनी महिलाओं को बुरी नजर से बचाने के लिए इसको लागू करवाया।

राजस्थान का अनोखा रेलवे स्टेशन जहां कोई कर्मचारी नहीं, ग्रामीण बांटते हैं टिकट

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राजस्थान में नागौर में स्थित हैं जालसू नानक रेलवे स्टेशन। यह एक ऐसा स्टेशन हैं, जहां कोई रेलवे अधिकारी या कर्मचारी नहीं है। इसके बावजूद भी यहां 10 से ज्यादा ट्रेनें रुकती हैं। गांव के लोग ही टिकट काटते हैं और चंदा जुटाकर हर माह करीब 1500 टिकट खरीदते हैं। दरअसल, जानसू नानक गांव में हर घर से एक व्यक्ति फौज में हैं। उनकी सुविधा के लिए सरकार ने 43 साल पहले 1976 में गांव में स्टेशन की सौगात दी। वर्तमान में गांव से 160 से ज्यादा लोग सेना, बीएसएफ, नेवी, एयरफोर्स और सीआरपीएफ में हैं। जबकि गांव में 200 से ज्यादा सेवानिवृत्त फौजी हैं।

पूर्व सरपंच गिरवर सिंह ने बताया कि सरकार ने 2005 में जोधपुर रीजन में कम आमदनी वाले स्टेशनों को बंद कर दिया था। यह स्टेशन भी बंद हो गया था। इसके बाद सेवानिवृत्त फौजियों और ग्रामीणों ने धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया। जिसके बाद रेलवे ने 11वें दिन स्टेशन तो शुरू कर दिया, लेकिन ग्रामीणों के सामने एक शर्त रखी। शर्त में रेलवे ने ग्रामीणों से कहा कि उन्हें हर माह 1500 टिकट और प्रतिदिन 50 टिकट बिक्री करने होंगे।

विंडो संचालक रह चुके रतन सिंह ने बताया कि ग्रामीणों ने स्टेशन संचालन के लिए एक लाख 50 हजार रुपये का चंदा कर रखा है। यह राशि गांव में ब्याज पर दी गई है। इससे हर महीने तीन हजार रुपये ब्याज मिलता है। वहीं, 1500 टिकट बिक्री के चलते बुकिंग संभालने वाले ग्रामीण को 15 प्रतिशत कमीशन मिलता है। इस राशि से मानदेय भुगतान किया जाता है।

1976 में रेलवे स्टेशन स्वीकृत होने के बाद रेलवे ने यहां एक लकड़ी की कुटिया बनाकर ट्रेनों का ठहराव शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने टिकट वितरण तो शुरू कर दिया। लेकिन 2001 तक इस स्टेशन पर किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं थी।

तब तत्कालीन सरपंच सुशीला कंवर ने पंचायत मद से यहां एक हॉल और बरामदे का निर्माण करवाया। साथ ही ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर प्याऊ बनवाया। साथ ही सेवानिवृत्त फौजियों ने मिलकर फूलों का बगीचा तैयार किया।

नौ फुट के अजगर को महंगा पड़ा मोटी बिल्ली निगलना, हुआ यह हाल…

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गुजरात में वड़ोदरा जिले के एक मकान के पिछवाड़े नौ फुट के एक विशालकाय अजगर ने एक मोटी बिल्ली को निगल लिया लेकिन उसे पचाने में दिक्कत होने पर उसने उसे बाहर निकाल दिया.

एक वनरक्षक ने एक स्थानीय गैर सरकारी संगठन की मदद से अजगर को बचाया. वन रक्षक विजय परमार ने बताया कि वेजलपुर गांव में एक मकान के पिछवाड़े मंगलवार को अजगर ने बिल्ली को दबोच लिया और उसे निगलने की कोशिश की.

कुछ स्थानीय लोगों ने अजगर देखा और वन विभाग को इसकी जानकारी दी जिसके बाद परमार और स्थानीय गैर सरकारी संगठन ‘वाइल्डलाइफ रेसेक्यू ट्रस्ट’ के स्वयंसेवी घटनास्थल पहुंचे.

परमार ने कहा, अजगर लकड़ियों के ढेर के पीछे छुपा हुआ था, उसने बिल्ली को निगलने की कोशिश की लेकिन बाद में उसे लगा कि वह उसके लिए बहुत बड़ी है और उसने बिल्ली को बाहर निकाल दिया.

उन्होंने कहा कि करीब एक घंटे के प्रयास के बाद, अजगर को बचाया गया और उसे बाद में जंगल में छोड़ दिया गया.

राजनांदगाव : 1 लीटर दूध बेचने से महिलाओं ने की थी शुरूआत, अब कमा रहीं 3 करोड़!

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छत्तीसगढ़ के राजनांदगाव की महिलाएं बेहद मामूली से गांव में रहकर करोड़ों का कारोबार कर रही हैं। यह महिलाएं उनके लिए प्रेरणा है जिन्हें अक्सर लगता है कि अभावों में रहकर कभी कामयाब नहीं हुआ जा सकता।

जिले के छुईखदान ब्लॉक के संडी गांव की इन महिलाओं ने नामुमकिन को मुमकिन कर दिया है। कभी बमुश्किल एक लीटर दूध बेचने वाली महिलाओं का यह ग्रुप अब 800 लीटर तक का कारोबार कर रहा है। इस सोसाइटी का सालाना टर्न ओवर ढाई से तीन करोड़ तक पहुंच गया है।

साल 2016 से पहले इस गांव की महिलाओं के पास कोई खास रोजगार नहीं था। खेती, किसानी के अलावा ये कुछ नहीं करतीं थीं। परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत करने की इनकी ललक, इन्हें डेयरी कारोबार के पास ले आई। पशु चिकित्सकों से मवेशियों की अच्छी देख भाल का तरीका सीखा। कुछ ही दिनों में हालात बदले और यह महिलाएं अब देवभोग और अमूल जैसे ब्रांड को दूध सप्लाई करती हैं।

इस समूह का नाम मां बम्लेश्वरी दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति मर्यादित है। सदस्य धनेश्वरी वर्मा ने बताया कि दुग्ध उत्पादन के लिए मवेशी खरीदने पैसे नहीं थे। बैंक से लोन लेने की प्लानिंग हुई पर बैंक वाले यकीन नहीं करते थे कि महिलाएं डेयरी के क्षेत्र में कुछ पाएंगी।

पद्मश्री फुलबासन बाई यादव ने भी मदद की और लोन मिला। सोसाइटी की अध्यक्ष लता जंघेल ने बताया कि 2016 की बात है, लोन मिलने पर मवेशी तो खरीद लिए पर कुछ दिन बाद एक-एक कर मवेशी बीमार होते गए।

हालांकि महिलाओं ने हौसला नहीं खोया। समूह से जुड़ी महिलाओं ने बताया कि पहले परिवार के सदस्यों के साथ ही गांव के लोग भी रोकटोक करते थे। ताने मारते थे कि महिलाएं सिर्फ समय बर्बाद कर रहीं हैं। अब आलम यह है कि इस सफलता को देखकर अब दूसरे जिले और ब्लॉक की महिलाएं भी इनसे संपर्क कर जानना चाहती हैं कि इन्होंने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में बेहतर काम कैसे किया। संडी सहित जंगलपुर, चकनार, गोपालपुर, उदयपुर, ठंडार व गंडई क्षेत्र में दूध की सप्लाई कर रहीं हैं।

इसे कहा जाता है दुनिया की सबसे सुरक्षित तिजोरी, इसमें रखा हुआ है 4600 टन सोना

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इस दुनिया में अगर सबसे पावरफुल देशों की बात की जाए। तो इस लिस्ट में सबसे पहला नाम आता है अमेरिका का। और अमेरिका के पास काफी सोना है। दरअसल आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका के ऑफिशियल गोल्ड रिजर्व का एक बहुत बड़ा हिस्सा कैंटटूकी के फोर्ट नॉक्स स्थित बुलियन डिपॉजिटरी में रखा है। वही रखे हुए इस गोल्ड की मात्रा 4600 टन है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फोर्च नॉक्स एक आर्मी पोस्ट है और करीब 109,000 एकड़ में इसका विस्तार है। दरअसल इसके अंदर रखा हुए गोल्ड वाल्ट मोटी ग्रेनाइट की दीवारों से घिरा हुआ है। वही इसकी छत की बात की जाए तो इसकी छत बम प्रूफ है। अगर बात करें दुनिया की सबसे सुरक्षित बिल्डिंग की तो इसका नाम सबसे ऊपर आता है।

● वहीं अगर फेडरल रिजर्व की माने। इस बिल्डिंग में करीब 147.3 मिलियन आउंस यानी कि 4600 मीट्रिक टन सोना रखा हुआ है। इसे एक तरह से यूनाइटेड स्टेट डिपॉजिटरी भी कहा जाता है।

● आपको बता दें कि इस बिल्डिंग के अंदर जहां पर गोल्ड को रखा गया है। उस जगह की दीवारें ग्रेनाइट की मोटी दीवारों से बनी हुई है। तो साथ ही फोर्ट नॉक्स बिल्डिंग मल्टीपल अलार्म वाली, फेसिंग से भी घिरी हुई है। और इस बिल्डिंग की निगरानी अपाचे हेलीकॉप्टर से होती है।

● इस बिल्डिंग में लगे हुए दरवाजों का वजन 22 टन है। वही दरवाजे के लॉक की बात की जाए। तो दरवाजे का लॉक स्टाफ के 10 अलग-अलग लोगों के कॉम्बिनेशन के कोड से लॉक किया गया है। हर मेंबर को बस अपना ही कोड पता होता है। उसे बाकी 9 मेंबर का कोड बिल्कुल भी नहीं पता होता।

● अगर कोई इस बिल्डिंग के पास में जाने के बारे में सोचता भी है। तो उसे सुरक्षा के लिए मौजूद अपाचे हेलीकॉप्टर, टैंक्स, फेंसिंग, गार्ड, कंक्रीट लाइन वाली ग्रेनाइट की दीवारें और चारों तरफ दीवारों के लगे हुए अलार्म किसी को भी इस काम में सफल नहीं होने देते है।

और साथ ही आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आप इस बिल्डिंग की सिक्योरिटी सिस्टम के बारे में इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं। कि जब सेकंड वर्ल्ड वार हुआ था। तो तब आखिर क्यों फोर्ट नॉक्स को प्राइमरी स्टोरेज ऑप्शन के रूप में ही चुना गया था। दरअसल यहां पर यूरोपीय नेशन के गोल्ड रिज़र्व, मैग्ना कार्टा, UK का क्राउन ज्वेल्स और अमेरिकी संविधान को रखा गया था।

दरअसल इस बिल्डिंग के कंट्रक्शन का काम साल 1936 में अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने किया था। अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट को यह जमीन अमेरिकी मिलिट्री आर्मी ने दी थी। और उस दौरान जब इस बिल्डिंग का निर्माण किया गया था। तो उस समय करीब 3 करोड रुपए का खर्चा आया था। वहीं अमेरिका ने साल 1988 में इस जगह को नेशनल रजिस्टर ऑफ हिस्टोरिक प्लेसेज़ के रूप में शामिल कर लिया।

रेल यात्रियों को बड़ा तोहफा! ट्रेन में मिलेगा ‘व्रत का खाना’, जानिए कैसे और किन स्टेशन पर मिलेगी ये सुविधा

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इस त्योहारी सीजन में भारतीय रेलवे (Indian Railway) ने एक नई शुरुआत की है. नवरात्रि (Navratri) के मौके पर रेलवे नौ दिनों तक यात्रियों को व्रत का खाना मुहैया कराएगा. इस से व्रत के दौरान यात्रियों को खाने की दिक्कत नहीं होगी. रेलवे व्रत करने वाले यात्रियों के लिए सात्विक मेन्‍यू (Vrat Meals) का इंतजाम करेगा. रेलवे 29 सितंबर से 7 अक्‍टूबर तक इच्‍छुक यात्रियों को व्रत वाला खाना मुहैया करा रहा है. इस मेन्‍यू से आप अपनी पसंद के हिसाब से चीजें ऑर्डर कर सकते हैं.

कैसे आर्डर कर सकते हैं व्रत वाला खाना: व्रत रख रहे लोग ट्रेन में अपनी यात्रा के दौरान ई-केटरिंग और फूड ऑन ट्रैक (Food on Track) मोबाइल ऐप के जरिए भी खाना प्री-ऑर्डर भी कर सकते हैं. व्रत वाला खाना ऑर्डर कर सकते हैं. IRCTC ने अपने बयान में कहा है कि नवरात्रि का खाना रेलवे के चुनिंदा स्‍टेशनों पर चयनित रेस्‍टोरेंट के जरिए मुहैया कराया जाएगा.

रेलवे के बयान के मुताबिक इस सर्विस को लेने के लिए यात्रियों को वैध पीएनआर नंबर (PNR Number) से अपनी यात्रा के तय समय से कम से कम दो घंटे पहले खाना बुक कराना होगा. यात्री अपनी सुविधानुसार पहले या ऑर्डर मिलने के बाद पेमेंट कर सकते हैं.

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इन स्टेशनों पर मिलेगा व्रत का खाना
जिन स्‍टेशनों पर नवरात्रि का खाना मिलेगा उनमें कानपुर सेंट्रल, जबलपुर, रतलाम, जयपुर, बीना, पटना, राजेंद्र नगर, हजरत निजामुद्दीन, अंबाला कैंट, झांसी, औरंगाबाद, अकोला, इतारसी, वसई रोड, वापी, कल्‍याण, बोरिवली, दुर्ग, दौंड, ग्‍वालियर, मथुरा, नागपुर, भोपाल, उज्‍जैन और अहमदनगर शामिल हैं.

व्रत के मेन्यू में होंगी ये चीजें शामिल
व्रत मेन्‍यू में साबूदाना, सेंधा नमक, कुट्टू का आटा, साबूदाना खिचड़ी, सूखे मखाने, साबूदाना मूंगफली नमकीन, आलू की टिक्‍की, नवरात्रि थाली, जीरा आलू, फ्रेंच फ्राइज़, साबूदाना वड़ा, फलहारी चूड़ा, फलहारी थाली, मलाई बर्फी, रसमलाई, मिल्‍क केक, लस्‍सी, दही और लस्‍सी जैसी चीजें शामिल हैं.

चौकी में घुसकर प्रभारी की बेदम पिटाई, मारता रहा लात-घूंसे से, फिर बोला शिकायत की तो मार दूंगा

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जिले की उमेश्वरपुर सलका चौकी में मंगलवार की रात बदमाशों ने घुसकर पुलिसकर्मियों के सामने ही दरोगा की बेदम पिटाई कर दी है। मामले में चौकी प्रभारी निर्मल वर्मा ने प्रेमनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। घटना के 18 घंटे बीत जाने के बात भी आरोपी को अब तक पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है। प्रेमनगर थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार मंगलवार की रात को चौकी प्रभारी निर्मल वर्मा चौकी में बैठे हुए थे।

इसी दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष अशोक जगते के साथ खामी सिंह व क्षितिज उईके पहुंचे। चौकी प्रभारी का आरोप है कि सभी नशे में थे और इसी दौरान एक वारंटी को नही पकड़े जाने की बात को लेकर चौकी प्रभारी से हुज्जत करने लगे। इतना ही नहीं खामी सिंह ने तो चौकी प्रभारी की चौकी में ही जोरदार पिटाई करते हुए जातिगत मामले में फंसाने की धमकी दी और भाग गया।

पिटाई के दौरान कहा कि शिकायत की तो मार दूंगा। घटना के दौरान कांग्रेस के जिला पंचायत अध्यक्ष मूकदर्शक बने रहे। चौकी प्रभारी ने इसकी शिकायत प्रेमनगर थाने में दर्ज कराई है। घटना के बाद सूरजपुर इलाके में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि चौकी के अंदर जब पुलिस ही सुरक्षित नहीं है तो आम आदमी की बिसात ही क्या है। बताया जा रहा है कि आरोपियों की ऊंची पहुंच के कारण पुलिस भी हाथ डालने से कतरा रही है। 

श्रीलंका में खुदाई के दौरान मिली हनुमान गदा, वजन जानकर आप भी रह जायेंगे दंग

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हनुमान जी को भगवान श्रीराम का परम भक्त माना जाता है। हनुमान जी अंजनी मैया और पवन देव के पुत्र हैं। कुछ समय पहले ही हनुमान जी की गदा खुदाई के दौरान मिली है। इस गदा को देखकर हर कोई हैरान है। जिसने भी इस विशालकाय गदा को देखा, उसे देखते ही आश्चर्य हुआ और भगवान के इस चमत्कार को नमस्कार किया। सभी लोग इस गदा को देखने के लिए उत्सुक हो उठे। आइए आपको इस गदा के बारे में जानकारी देते हैं।

हम आपको यह बता दें कि इस गदा का वजन लगभग 1000 किलो से भी अधिक है। और यह गदा स्वर्ण धातु (सोने) की बनी है। यह खबर बहुत तेजी से इंटरनेट और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है कि श्रीलंका में खुदाई के दौरान हनुमान जी की गदा पाई गई है। कुछ समय पहले भारत की इंटरनेशनल रामायण रिसर्च सेंटर ने इस बात का पता लगाया था कि श्रीलंका में रामायण काल से जुड़े कुछ अवशेष जमीन में दबे हुए हैं। जब इंटरनेशनल रामायण रिसर्च सेंटर ने श्रीलंका में खुदाई करवाई, तो वहां हनुमान जी की विशालकाय गदा प्राप्त हुई।

भारत की इंटरनेशनल रामायण रिसर्च टीम लगातार श्रीलंका में अलग-अलग जगह पर खुदाई करके, रामायण काल से जुड़े अवशेषों के बारे में जानकारी जुटा रही है। रामायण रिसर्च टीम को श्रीलंका में अभी तक 50 से भी अधिक अवशेष मिल चुके हैं। यह बात सभी के लिए चौंका देने वाली हैं। इस रिसर्च टीम का कहना है कि इससे पहले भी रावण महल, अशोक वाटिका, विभीषण महल और एक विशालकाय नरकंकाल प्राप्त हुआ, जो की रामायण रिसर्च टीम के पास है। यह टीम इस कंकाल पर अपनी रिसर्च कर रही है।

पुलिस को गुजरात एक्सप्रेस से मिले सोने के आभूषण, हीरे और रुपयों से भरे 35 बैग, गहनों की कीमत करोड़ों में

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मुंबई (Mumbai) में गुजरात एक्सप्रेस ट्रेन (Gujarat Express) से बोरीवली रेलवे पुलिस यानी जीआरपी ने 18 लोगों के पास से सोने के आभूषण, हीरे और रुपयों से भरे करीब 35 बैग बरामद किए हैं। प्राथमिक जांच में पता चला है कि बरामद गहनों की कीमत 7 करोड़ के करीब है और 8 लाख के करीब कैश भी है।

पुलिस के मुताबिक चुनाव आयोग (Election Commission) और आयकर अधिकारियों (Income Tax) को इसकी सूचना दे दी गई है। बैग साथ में ले जाने वाले यात्री बरामद गहनों और पैसों के बारे में सही जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। शक है कि सभी आंगडिया वाले हैं।

CM भूपेश बघेल ने कहा- नेहरू जी ने देश के लिए अपनी संपन्नता त्याग दी और वर्तमान PM कुछ नहीं थे तो दस लाख का सूट पहनते हैं

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महात्मा गांधी की 150वीं जयंती को छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार द्वारा यादगार बनाने के लिए विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र भी आयोजित किया जा रहा है। सत्र के पहले दिन जहां गांधी और गोडसे को लेकर कांग्रेस और भाजपा सदस्यों में तीखी तकरार हुई। वहीं दूसरे दिन संस्कृत के श्लोकों से शुरू हुए भाषण के शुरुआत बाद नेहरू जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कपड़ा पर आकर रूक गई। जिसके बाद सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष नेहरू और मोदी की तुलना पर एक बार फिर आमने सामने हो गए।

भाजपा विधायक सौरभ सिंह ने कहा, एक प्रधानमंत्री का कपड़ा इंग्लैंड से धुलकर आता था। जिसके बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेन तत्काल तंज कसते हुए कहा, आपको नाम लेने में क्यों हिचक होती है। नेहरुजी किस कुल में पैदा हुए थे और उनकी संपन्नता क्या थी, पूरी दुनिया जानती है। आपके नेता के पास खुद की कोई संपत्ति नहीं थी, लेकिन वे दस लाख का सूट पहनते हैं।

सीएम भूपेश के सवाल का जवाब देते हुए डॉ. रमन सिंह ने कहा, गांधीजी की मौजूदगी इस देश में संत के रूप में थीं। उन्होंने इस देश में राजनीति को रामराज से जोड़ने का काम किया है। उन्होंने सत्य अहिंसा और अपरिग्रह को राजनीति से जोड़ने का काम किया। दुनिया की राजनीति में एक नया शब्दकोश देने वाले व्यक्ति महात्मा गांधी थे। सत्याग्रह का इतना प्रभावी प्रयोग किसी ने किया तो वे महात्मा गांधी ने किया।

उनकी व्यापकता पूरी दुनिया में थी, नेल्सन मंडेला और मार्टिन लूथर किंग ने उनसे प्रेरणा ली। बाबा आम्टे और विनोबा भावे ने पूरी जिंदगी उनकी प्रेरणा से जनहित में सौंप दी। इन बातों का अहसास नई पीढी को करने की आवश्यकता है। सबसे अधिक बोलने, लिखने और पदयात्राओं के माध्यम से पूरे देश को नापने वाले महात्मा गांधी थे।