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मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान: छत्तीसगढ़ में कुपोषण और एनीमिया मुक्ति का महायज्ञ…

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छत्तीसगढ़ को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए 2 अक्टूबर 2019 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी कीे 150वीं जयंती के अवसर पर प्रदेशव्यापी ‘मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान‘ का शुभारंभ किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के बस्तर सहित वनांचल के कुछ ग्राम पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सुपोषण अभियान की सफलता को देखते हुए अब इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार वर्तमान में छत्तीसगढ़ के पांच वर्ष से कम आयु के 35.6 प्रतिशत बच्चे कुपोषित और 15 से 49 वर्ष की 41.5 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। ये आंकड़े न सिर्फ प्रभावित व्यक्ति के परिवारों के लिए बल्कि प्रदेश के आर्थिक, समाजिक विकास के लिए भी चिंताजनक हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के मुखिया श्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में कुपोषण मुक्ति को एक महाअभियान के रूप में शुरू करने का निर्णय लिया है।
    विश्व का प्रत्येक देश आज कुपोषण के किसी न किसी रूप से प्रभावित हैं। कुपोषण वास्तविक अर्थों में शरीर में आवश्यक पोषक पदार्थों असंतुलन है। इससे प्रभावित व्यक्ति गंभीर बीमारियों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं और आसानी से कई तरह की बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। इससे शारीरिक और बौद्धिक विकास भी रूक सकता है। शिशु,बच्चे तथा महिलाएं इससे सबसे अधिक ग्रसित पाए गए हैं। माताओं और शिशुओं की मृत्यु का एक प्रमुख कारण समुचित पोषण आहार का न मिल पाना पाया गया है। गरीबी, अशिक्षा और अज्ञानता, स्वच्छता की कमी, कम उम्र में विवाह और गर्भधारण, लिंग भेद जैसे कई कारण इसके लिये जिम्मेदार हैं। पूरी दुनिया की एक बड़ी आबादी के स्वास्थ्य और विकास के लिए कुपोषण एक बड़ा खतरा है।
     कुपोषण को हराना वर्तमान समय की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। इसी चुनौती को स्वीकार करते हुए प्रत्येक शून्य से 5 वर्ष तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं सहित 15 से 49 आयु वर्ग की महिलाओं को कुपोषण और एनीमिया मुक्त कराने के लिए ‘मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान‘ को एक महायज्ञ के रूप लेकर सफल बनाने का प्रयास किया जाएगा। आगामी 3 वर्षों में प्रदेश केा कुपोषण से मुक्ति दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों के समन्वय से जिला स्तर पर कुपोषण मुक्ति के प्रयास किये जाएंगे। अभियान का क्रियान्वयन, अनुश्रवण, मूल्यांकन और अभिलेख संधारण जिला प्रशासन करेगा। इसके लिए जिला स्तर पर कलेक्टर, विकासखण्ड स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच की अध्यक्षता में अनुश्रवण एवं मूल्यांकन समिति का गठन किया जाएगा। धमतरी जिले में लइका जतन ठउर और दंतेवाड़ा में कुछ पंचायतों के माध्यम से गर्म पोष्टिक भोजन देने जैसे नवाचार कार्यक्रमों के जरिए इसकी शुरूआत कर दी गई हैं।
    सुपोषण अभियान के लिए वजन त्यौहार में लिये गये आंकड़ों के आधार पर शून्य से 5 आयु वर्ग के कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन कर लिया गया है। एनीमिया पीड़ित बच्चों और महिलाओं की वास्तविक संख्या की जानकारी के लिए गांवों में ग्राम पंचायतों और शहरों के वार्डों में शिविर लगाया जाएगा। ग्रामवार और नामवार चिन्हांकन की प्रक्रिया जैसे-जैसे पूरी होती जाएगी, चिन्हांकित हितग्राहियों को चरणबद्ध रूप से अभियान में शामिल कर लाभान्वित किया जाएगा। अभियान के तहत कुपोषण प्रभावित बच्चों और महिलाओं को आंगनवाड़ी केन्द्र में दिए जाने वाले पूरक पोषण आहार के अतिरिक्त स्थानीय स्तर पर उपलब्ध और आवश्यकतानुसार पौष्टिक आहार निःशुल्क दिया जाएगा। निःशुल्क काउंसलिंग और परामर्श सेंवाएं देने के साथ नियमित मॉनिटरिंग भी जाएगी जाएंगी। प्रभावितों को आयरन पोलिक एसिड, कृमिनाशक गोली देने की व्यवस्था की जाएगी। जनजागरूकता के लिए सुपोषण रथ, शिविरों और परिचर्चा का आयोजन किया जाएगा।
    प्रदेश में कुपोषण दूर करने के लिए पूरक पोषण आहार, महतारी जतन योजना,मुख्यमंत्री अमृत योजना, किशोरी बालिका योजना, पोषण अभियान, मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना और प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना का संचालन किया जा रहा है। इन योजनाओं के तहत प्रदेश के 50 हजार से अधिक आंगनबाड़ियो और मिनी आंगनबाड़ियों में शिशुओं,बच्चों को और गर्भवती महिलाओं और शिशुवती माताओं को पूरक पोषण आहार और रेडी टू ईट की व्यवस्था की गई है। महतारी जतन योजना के तहत गर्भवती माताओं को गर्म भोजन भी दिया जाता है।
    कुपोषण एक समाजिक कुरीती है,इसका निदान जन जागरूकता और समाज के प्रत्येक वर्ग के सक्रिय भागीदारी से ही संभव है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल और महिला बाल विकास विभाग की मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया ने भी कुपोषण मुक्ति के लिए जनसहयोग की अपील की है। सरकार के सभी प्रयासों के बावजूद ‘स्वस्थ छत्तीसगढ़‘ की कल्पना को साकार रूप देने के लिए अधिक से अधिक जनप्रतिनिधियों, नागरिकों, स्वयं सेवी संगठनों को अभियान से जुड़ना होगा। इससे हम विकास के चमकते सितारे के रूप में एक ‘नवा छत्तीसगढ़‘ देख पाएंगे।

छत्तीसगढ़ – मुख्यमंत्री श्री बघेल ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर उन्हें नमन किया…

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के अवसर पर उन्हें नमन करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए हैं। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपिता को याद करने, श्रद्धासुमन अर्पित करने और नमन करने से हमारा काम खत्म नहीं होता बल्कि यहां से हमारा काम शुरू होता है। श्री बघेल ने कहा कि गांधीजी के दिखाए गए मार्ग पर चलते हुए ग्राम स्वराज के लक्ष्य को साधने के लिए हमने ग्राम सुराजी योजना शुरू की है और नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी को नये रूप में विकसित करने का काम शुरू किया है। मुख्यमंत्री सुपोषण योजना और सार्वभौम पीडीएस से हमने तय किया है कि न कोई भूखे पेट सोने को मजबूर हो और न ही पोषण युक्त आहार से वंचित रहे। हमने कुपोषण के खिलाफ निर्णायक जंग का ऐलान किया है जो गांधीवादी सत्याग्रह की राह पर चलेगी। गांधी जी ने सबकी अच्छी सेहत के लिए कई प्रयोग किए इसलिए हमने सार्वभौम स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिता दी है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना, मुख्यमंत्री शहरी श्रम स्वास्थ्य योजना के माध्यम से हम अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेंगे। महात्मा गांधी की करूणा को हमने सरकार का मूलमंत्र बनाया है।
    श्री बघेल ने महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास को याद करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान छत्तीसगढ़ में उनके कंडेल आने की खबर ने ही किसानों को जीत दिला दी। छत्तीसगढ़ में अछूतोद्यार यात्रा के लिए गांधीजी का छत्तीसगढ़ आना और गंजडबरी के सतनामी आश्रम, रायपुर के जैतूसाव मठ में गांधी जी द्वारा की गई सभा, बिलासपुर के बैतलपुर के कुष्ठ आश्रम में महात्मा गांधी की यादें आज भी जीवंत हैं। गांधीजी के छत्तीसगढ़ आगमन ने महिलाओं, विद्यार्थियों, सफाई कर्मचारियों सहित सभी नागरिकों को देश प्रेम के नये जोश और ऊर्जा से भर दिया और प्रदेश में सत्य-अहिंसा, समरसता और सांप्रदायिक सद्भाव की अलख जगायी। श्री बघेल ने कहा कि हम सब मिलकर गांधीजी के सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे और उनके पदचिन्हों पर चलते हुए ‘नया छत्तीसगढ़‘ गढ़ेंगे।  

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें नमन किया…

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कल दो अक्टूबर को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री लाल बहादुर शास्त्री सच्चे गांधीवादी थे, उन्होंने अपना जीवन सादगी से बिताया और गरीबों की सेवा में अर्पित किया। भारतीय स्वाधीनता संग्राम में उनका महत्वपूर्ण योगदान था। उन्होंने वर्ष 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय देश को कुशल नेतृत्व प्रदान किया और ‘जय जवान-जय किसान’ का नारा देकर जनता का मनोबल बढ़ाया, जिससे सारा देश एकजुट हो गया। श्री बघेल ने स्वर्गीय श्री शास्त्री को याद करते हुए उन्हें नमन किया है।

जियो फोन सिर्फ 699 रुपए में, दिवाली के लिए है ये खास ऑफर

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जियो दिवाली पर एक खास ऑफर लेकर आया है। जियो ‘जियोफोन दिवाली 2019 ऑफर’ के तहत त्योहारी सीजन में जियोफोन को 699 रुपए में उपलब्ध रहेगा। इसकी कीमत फिलहात 1500 रुपए है, ऐसे में ऑफर के तहत फोन आधे से भी कम कीमत में मिलेगा। यह ऑफर 4 अक्टूबर से शुरू होगा। खास बात ये है कि इसमें पुराने फोन को एक्सचेंज करने जैसी कोई शर्त भी नहीं है। इसके अलावा कंपनी यूजर्स को 700 रुपए के डेटा बेनिफिट का ऑफर भी दे रही है।

जियो फोन में 1.2 गीगाहर्ट्ज़ ड्यूल-कोर प्रोसेसर और 512 एमबी रैम है। इसमें 2.4 इंच डिस्प्ले व 4 जीबी इनबिल्ट स्टोरेज दी गई है। फोन में 2000 एमएएच बैटरी है और वाई-फाई सपॉर्ट करता है। यह फोन फेसबुक, यूट्यूब और वॉट्सऐप जैसे ऐप्स सपॉर्ट करता है।

जियो फोन 22 भारतीय भाषाओं के सपॉर्ट के साथ आता है। इसमें गूगल असिस्टेंट सपॉर्ट भी दिया गया है। हैंडसेट और टीवी को एक केबल से कनेक्ट कर कॉन्टेन्ट को टीवी पर मिरर किया जा सकता है। जियो फोन में जियो सिनेमा, जियो म्यूज़िक, जियो टीवी और जियोएक्सप्रेसन्यूज ऐप इंस्टॉल आते हैं। जियो का ये फोन जुलाई 2017 में लॉन्च किया गया था। उस समय इसकी कीमत 1500 रुपए थी।

भूख से मरा 8 साल का बच्चा, मध्य प्रदेश का परिवार 3 दिन से भूखा था

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मध्य प्रदेश के बड़वानी से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां एक 8 साल के बच्चे की इसलिए मौत हो गई क्योंकि उसने पिछले तीन दिनों से अन्न का एक भी दाना नहीं खाया था. जबकि उसके परिवार के 5 सदस्य गंभीर हालत में हॉस्पिटल में भर्ती हैं. पूरे परिवार ने पिछले कई दिनों से खाना नहीं खाया था. जिसके चलते सभी की तबीयत खराब हुई.

इस परिवार में कुल 6 सदस्य थे, जिनमें से 8 साल के एक बच्चा भूख नहीं सह पाया और अंत में उसने दम तोड़ दिया. परिवार के बाकी 5 लोगों को डायरिया की शिकायत है. उनकी हालत काफी गंभीर है. फिलहाल डॉक्टर उन्हें लिक्विड डाइट दे रहे हैं.

नहीं मिल रहा था सरकारी योजना का लाभ

इस मामले के सामने आने के बाद इलाके की एसडीएम भी मौके पर पहुंची और हॉस्पिटल में भर्ती परिवार वालों से बातचीत की. इस परिवार के एक रिश्तेदार ने बताया कि ये सभी लोग मजदूरी करके अपना गुजर बसर करते थे. लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक इन्हें किसी भी योजना से नहीं जोड़ा गया है. अभी तक इनका राशन कार्ड तक नहीं बना है. इन सभी लोगों ने कई दिनों से खाना नहीं खाया है. इनके पास खाने का कोई इंतजाम नहीं है.

एसडीएम ने हॉस्पिटल का दौरा करने के बाद और परिवार से मुलाकात के बाद कहा,फिलहाल यही लग रहा है कि परिवार ने कई दिनों से खाना नहीं खाया है. अगर कुछ खाया भी है तो डायरिया के चलते पच नहीं पाया. इसी के चलते ये लोग काफी कमजोर हो चुके हैं. हमारा फील्ड स्टाफ इस मामले की जांच में जुट गया है. अगर जांच में निकलता है कि इन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा था, तो कार्रवाई की जाएगी.

हॉस्पिटल के डॉक्टर का कहना है कि परिवार के सभी सदस्यों में डी-हाईड्रेशन के लक्षण मिले हैं. ये सभी लोग गंभीर हालत में उल्टी दस्त की शिकायत लेकर आए थे.

बैन के बावजूद सरकार को ऐसे चकमा देकर मोबाइल पर धड़ल्‍ले से खुल रही हैं ये पॉर्न वेबसाइट्स

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भारत सरकार द्वारा पोर्न वेबसाइट्स पर बैन लगाने के दावे फेल होते नजर आ रहे हैं। डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्यूनिकेशन्स की तरफ से बड़ी वैश्विक पोर्न वेबसाइट्स को प्रतिबंध किए जाने के बाद भी वो आसानी से स्‍मार्टफोन पर एक्‍सेस हो रहे हैं। उन्‍होंने भारत में फिर से एंट्री के लिए एक नया ‘खेल’ शुरू किया है। इन वेबसाइट्स ने अपने डोमेन में हल्‍का सा फेरबदल कर दिया है और फिर से बिना किसी बैन बाईपास को पार किए आसानी सेअलग-अलग स्‍क्रीनों पर आसानी से देखे जा रहे हैं। आपको बता दें कि डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्यूनिकेशन्स ने देश की सभी इंटरनेट सर्विस लाइसेंसीज को एक पत्र लिख पॉर्न वेबसाइट्स को बंद करने का आदेश दिया था। भारत सरकार ने साल 2015 में 857 पॉर्न वेबसाइट्स को इसलिए बैन कर दिया था कि उनके कॉन्टेंट अनैतिक और अश्लील थे।कार्रवाई डॉट कॉम डोमेन पर हुई तो पोर्न वेबसाइट्स ने निकाल लिया काट

दो वैश्विक पोर्न पोर्टल – रेडट्यूब और पोर्नहब ने भारत में वापसी की है और किसी को इन साइटों पर एक्सेस करने के लिए कोई तरकीब लगाने की जरूरत नहीं है। डोमने नेम में हल्‍का से बदलाव कर ये आसानी से चल रहे हैं। चूंकि कार्रवाई डॉट कॉम डोमेन पर हुई है, तो पोर्न वेबसाइट्स बिना किसी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन), वैकल्पिक ब्राउजर्स, प्रॉक्सीज और अन्य उपायों की जरूरत के बिना विभिन्न स्क्रीन्स पर आसानी से एक्सेस की जा सकती हैं। आपको बता दें कि डॉट ओआरजी (.org) ज्यादातर नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। वहीं डॉट नेट (.net) का इस्तेमाल एक्सटेंशन नेटवर्क के लिए होता है। .net डोमेन अधिकतर इंटरनेट, ईमेल और नेटवर्किंग सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा इस्तेमाल किया जाता है।

भारत में साइबर सिक्यॉरिटी के लिए कड़े कानून लाने की जरूरत

इस बारे में देश के जाने-माने साइबर लॉ एक्सपर्ट पवन दुग्गल का कहना है कि भारत में साइबर सिक्यॉरिटी के लिए कड़े कानून लाने की जरूरत है। हाल ही में दिल्ली में हुई बैठक में एक्सपर्ट्स मे साइबर क्राइम से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई जिसमें चाइल्ड पॉर्न, सेक्सटिंग, सेक्स ट्रैफिकिंग, साइबर ट्रोलिंग और महीलाओं के खिलाफ हिंसा जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। उन्‍होंने कहा कि चकमा देकर दोबारा भारत में एंट्री करने वाले विदेशी पोर्टल्स के खिलाफ दोबारा नए सिरे से कार्रवाई के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है।

जान लीजिये कितनी कमाई करती हैं पोर्न साइटें

यह एक बड़ी इंडस्ट्री है ठीक वैसे ही जैसे हॉलीवुड, बॉलीवुड, टॉलीवुड, सैंडलवुड, आदि। इसमें बाकायदा फिल्म मेकर्स हैं, डायरेक्टर हैं, राइटर हैं और स्टार्स हैं। इन्हीं स्टार को हम पोर्न स्टार कह कर पुकारते हैं। हां यह जरूर है कि इनका बजट हॉलीवुड-बॉलीवुड फिल्मों जितना बड़ा नहीं होता। मूवी शूट करने के बाद इनकी फिल्में थ‍ियेटर में जाती हैं। चूंकि तमाम देशों के सिनेमाघरों में पोर्न मूवीज़ दिखाना प्रतिबंध‍ित है, लिहाजा कमाई का एक मात्र जरिया बजता है इंटरनेट। इंटरनेट पर ये मूवी अपलोड कर देते हैं और वहीं से इनका धन-मीटर चालू हो जाता है। जितने व्यूज़ उतनी कमाई। डेस्कटॉप के बाद अब मोबाइल व टैब पर इंटरनेट यूजर्स तेजी से बढ़ रहे हैं। लिहाजा छोटी स्क्रीन पर गंदी फिल्में देखने वालों की संख्या भी।

कैसे बढ़ती है कमाई

  • एक बार जब कोई एडल्ट कंटेंट सर्च करता है, तो उसके सिस्टम की कुकीज में कीवर्ड स्टोर हो जाते हैं।
  • दोबारा लॉग इन करने पर वो कुछ भी पढ़े, सिस्टम बार-बार उसे एडल्ट कंटेंट सजेस्ट करेगा।
  • इससे व्यूज बढ़ते हैं। सेक्स टॉय डीलर्स से लेकर कई अन्य ‘स्टार्स’ भी डेटिंग से लेकर पॉर्न साइट से संपर्क साधते हैं। ताकि व्यूज बढ़ें।
  • जिन साइट्स का ट्रैफिक ज्यादा होता है, उस साइट को विज्ञापनदाता अपनी लिस्ट में शामिल कर लेते हैं। इससे मुनाफा बढ़ता है।
  • जो लोग बिकनी, कंडोम, आदि सर्च करते हैं, उन्हें भी ये एडल्ट साइट्स के विज्ञापन सजेस्ट करते हैं, ताकि वे इसका आदि हो जाये।
  • कुछ ऐसे भी पोर्न साइट्स हैं जहां यूजर्स साइन इन करने के लिए चार्ज भी देना पड़ता है। इससे भी साइट्स की कमाई होती है। शुरुआत में छूट देती हैं, जैसे एक महीने की फ्री मेंबरशिप, आदि। जब इंसान आदी हो जाता है, तब उससे पैसे चार्ज होते हैं। इस तरह से साइट की कमाई में इजाफा होता रहता है और विज्ञापन के अलावा यूजर्स के जरिए भी पॉर्न साइट्स कमाई कर ले जाती हैं।

किसी अप्सरा से कम नहीं है गोविंदा की बेटी, क्लिक कर देखें तस्वीरें

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दोस्तों गोविंदा एक समय में भारत के सबसे मशहूर अभिनेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने पिछले कई सालों से भारत के लोगों का मनोरंजन करते आ रहे हैं। गोविंदा ने अपनी क्लासिक कॉमेडी से बहुत से लोगों को हंसाया है। आज हम आपको गोविंदा की बेटी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो दिखने में किसी अप्सरा से कम नहीं लगती हैं। तो आइए जानते हैं गोविंदा की बेटी के बारे में।l

गोविंदा की बेटी का नाम टीना आहूजा है। टीना का जन्म 16 जुलाई 1989 को महाराष्ट्र के मुंबई शहर में हुआ था। हम आपको बता दें टीना ने अपनी पढ़ाई फैशन डिजाइनिंग में की है और उन्होंने लंदन फिल्म स्टूडियो से एक्टिंग का प्रशिक्षण लिया है। टीना बॉलीवुड फिल्म ‘सेकंड हैंड हसबैंड’ में नजर आ चुकी हैं। टीना आहूजा खूबसूरती में किसी अप्सरा से कम नहीं है। वह अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरों को अपने फैंस के साथ शेयर करती हैं। टीना आहूजा को फिटनेस में काफी रुचि हैं, वह अक्सर जिम के बाहर देखी जाती हैं।

ये हैं दुनिया के सबसे रईस जानवर, इनकी लाइफस्टाइल देखकर अमीरों को भी होने लगती है जलन

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धरती पर ना जाने कितनी अनोखे और विचित्र तरह के जानवर पाए जाते हैं, जिनमें से बहुत से जानवरों के बारे में हम नहीं जानते. विश्व में बहुत से लोग ऐसे हैं, जो जानवरों से बहुत प्यार करते हैं और उनको खरीदने के लिए लाखों रुपए खर्च कर देते हैं.

ग्रीन मंकी नाम का एक घोड़ा है ,जो बहुत ही दुर्लभ और महंगा है. यह घोड़ा अमेरिकन थ्रूघब्रेड रेसहॉर्स नस्ल का है, जिसका जन्म 2004 में हुआ था. ग्रीन मंकी पहली बार दौड़ में 9.8 सेकंड में 8 मील तक भागा था. इसे 1,60,00,000 डॉलर (1,16,38,40,000 रुपये) में बेच दिया गया था. 2018 में उसकी मौत हो गई.

ब्रिटेन के अरबपति व्यवसायी माइल्स ब्लैकवेल ने अपनी सारी संपत्ति बेचकर उसमें से 1.5 करोड़ डालर की संपत्ति अपने मुर्गे गीगू के नाम कर दी. कुछ समय बाद माइल्स की मौत हो गई. अबू गीगू की देखभाल उसके नए मालिक कर रहे हैं.

हॉस्टीन नस्ल की ईस्टसाइड लेविसडेल गोल्ड मिस्सी नामक एक गाय है, जो सामान्य गायों की अपेक्षा 10 गुना दूध देती है. हॉस्टीन नस्ल की गायों ने कई प्रतियोगिताओं को भी जीता है, जिसमें से सभी नस्लों की ग्रैंड चैंपियन का खिताब भी शामिल है. इस गाय की कीमत आठ करोड़ 40 लाख रुपए है.

तिब्बती मैस्टिफ एक प्रकार का बड़ा कुत्ता है जिसके कान और होंठ लटके हुए होते हैं. यह कुत्ता बिल्कुल शेर की तरह लगता है. इसकी कीमत लगभग 5,82,000 डॉलर (4,23,34,680 रुपये) होती है.

डी ब्राज्जा प्रजाति का बंदर लगभग 30 साल तक जीता है. यह अफ्रिका में पाया जाता है, जिनकी कीमत लगभग 7000 से 10,000 डॉलर (5,09,180 से 7,27,400 रुपये) है.

टाइनी चीनी क्रेस्टेड कुत्ता विश्व के सबसे महंगे कुत्ता में से एक है. सैम दुनिया का सबसे प्रसिद्ध टाइनी चीनी क्रेस्टेड कुत्ता है जिसने 2003-2005 में विश्व की अग्लिएस्ट कुत्ता प्रतियोगिता जीती थी. इस कुत्ते की कीमत पांच हजार डॉलर है.

अरब प्रायद्वीप में पाए जाने वाले रॉयल नस्ल के घोड़े की कीमत लगभग 1,00,000 डॉलर (72,74,000) है. यह घोड़े विशेष आकार के होते हैं.

अजगर रेसस्सिव जीन का लैवेंडर एल्बिनो बॉल पाइथन दुनिया के सबसे सुंदर सांपों में से एक है, जिसे हाई कंट्रास्ट साँप के रूप में भी जाना जाता है. इनकी कीमत लगभग 40,000 डॉलर (29,09,600 रुपये) है.

उत्तर प्रदेश में मंदिर की खुदाई करते वक्त मिला करोड़ों का खजाना

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आमतौर पर मामले सामने आते है कि किसी प्राचीन जगह पर खूदाई करते वक्त कुछ ना कुछ मिल जाता है जिससे लोगों की किश्मत खुल जाती है। इतना ही नहीं हाल ही में राजस्थान से मामला सामने आय़ा था कि एक किसान खेत में खुदाई कर रहा था उसको करोडों के हीरे मिल गए।

आज हम आपको एक ऐसा ही मामला बताने जा रहे है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये मामला उत्तर प्रदेश से सामने आया है। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों के पास, एक समूह को चार किलोग्राम सोने के गहने मिले हैं, जिन्हें एक ही स्थान पर दफनाया गया था।

यह हादसा रविवार को काजीपुरा गांव में हुआ था, जहां एक मंदिर बनाने के लिए समूह खुदाई कर रहा था। उन्हें मिट्टी के बर्तन में रखे सोने के गहने मिले। ग्रामीणों द्वारा सैकड़ों करोड़ का सोना मिलने के बाद ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस और राजस्व विभाग की टीम को सूचित किया।

जांच अधिकारियों के अनुसार, गहने सोने के हैं और यह पाया गया है कि प्राचीन ठीक है। यह सूचना जंगल की आग की तरह फैल गई और लोग वहां पहुंचने लगे। गाँव में खबर फैलने के कुछ ही मिनटों के बाद, आकर्षण देखने के लिए भारी भीड़ जमा हो गई,

जिसमें दो हार, चूड़ियाँ और कई अन्य आकर्षण शामिल थे। यह करोड़ों रुपये का पाया गया है। भारी मात्रा में सोने से उत्साहित, ग्रामीणों ने आसपास के क्षेत्रों में भी खुदाई की लेकिन कुछ और नहीं मिला।

क्या आप जानते हैं कि भारत में किसके पास होता है परमाणु हमले का बटन? अगर नहीं तो आज जान लीजिए

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सुरक्षा के नाम पर विभिन्न देशों ने समय समय पर विभिन्न तरह के हथियार बनाए हैं. इस तरह के कई ऐसे हथियार बनाए गये हैं, जो एक बार में एक बड़े क्षेत्र को पूरी तरह से तबाह कर सकता है. विभिन्न तरह के बम और हथियारों की तरह ही हाइड्रोजन बम का अविष्कार हुआ है. बता दें कि हाइड्रोजन बम या परमाणु बम एक थर्मो न्यूक्लियर बम होता है, जिसका विस्फोट न्यूक्लियर फ्यूज़न प्रक्रिया के द्वारा होता है.

लेकिन परमाणु बम कौन दाग सकता है ? क्या किसी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के पास इसका बटन होता है? क्या भारत के प्रधानमन्त्री की टेबल पर भी परमाणु बटन होता है और क्या परमाणु हमला सिर्फ चुटकी बजाते ही किया जा सकता है?

ऐसे सभी सवालों के जवाब आज हम जानने की कोशिश करेंगे परमाणु हमले के लिए किस प्रकार की प्रक्रिया अपनायी जाती है और इसमें कितना समय लगता है.

दरअसल परमाणु मामलों के विशषज्ञों के अनुसार, प्रधानमंत्री की टेबल पर ऐसा कोई बटन परमाणु बटन नही होता है जिसे दबाकर किसी भी देश पर परमाणु हमला किया जा सके. हां, प्रधानमंत्री के पास एक स्मार्ट कोड जरूर होता है जिसके बिना परमाणु बम को छोड़ा नही जा सकता है. बता दें कि किसी देश पर परमाणु हमले करने के लिए एक पूरा प्रोसीजर होता है. ऐसा नहीं होता है कि प्रधानमन्त्री ने कहा कि किसी देश पर परमाणु हमला कर दो और वैज्ञानिकों ने तुरंत हमला कर दिया.

परमाणु हमले का आदेश कौन दे सकता है

जैसा कि हमने बताया कि परमाणु बम छोड़ने के लिए प्रधानमन्त्री के पास सिर्फ एक स्मार्ट कोड होता है. परमाणु बम को दागने का असली बटन तो परमाणु कमांड की सबसे निचली टीम के पास होता है जिसे वाकई में यह मिसाइल दागनी होती है.

भारत की बात करें तो परमाणु हमला करने का निर्णय सिर्फ प्रधानमन्त्री के पास होता है. हालाँकि प्रधानमन्त्री अकेले निर्णय नही ले सकता है, उसे अपनी सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, चेयरमैन ऑफ़ चीफ ऑफ़ स्टाफ कमेटी से राय लेना आवश्यक है.

परमाणु हमला करने की क्या है पूरी प्रक्रिया

चरण 1. परमाणु ब्रीफकेस

आपने अक्सर देखा होगा कि प्रधानमंत्री के संग हमेशा एक सिक्यूरिटी गार्ड चलता है जिसके पास एक ब्रीफकेस जैसा बॉक्स होता है, दरअसल इसे परमाणु ब्रीफकेस कहा जाता है. इसका वजन लगभग 20 किलो होता है. इसमें कंप्यूटर और रेडियो ट्रांसमिशन उपकरण आदि सामान होता है और यह बुलेट प्रूफ भी होता है.

आपको बता दें कि इस ब्रीफकेस में उन ठिकानों की जानकारी होती है जहाँ पर परमाणु हमला करना होता है. मालूम हो कि अभी तक लगभग 5000 ठिकानों की पहचान की जा चुकी है और समय-समय पर इनकी समीक्षा करके इसमें नए ठिकानों को जोड़ा जाता है.

चरण 2. स्मार्ट कोड

जैसा हमने अभी बताया कि प्रधानमंत्री के पास एक स्मार्ट कोड होता है. यह कोड परमाणु हमला करने के लिए वेरिफिकेशन कोड के रूप में परमाणु कमांड को भेजा जाता है. बता दें कि भारत में सिर्फ प्रधानमन्त्री के पास यह अधिकार होता है कि वह इस कोड का नाम अपने मन मुताबिक रख सके.

चरण 3. दो अन्य सेफ कोड

शायद आपको यह न पता हो कि प्रधानमन्त्री के स्मार्ट कोड के अलावा भी दो अन्य कोड होते हैं। ये कोड एक तरह के लॉकर में बंद होते हैं और ये कहाँ रखे हैं इन्हें हर कोई नही जानता है.

चरण 4. परमाणु हमले की तैयारी

आपको बता दें कि प्रधानमन्त्री का स्मार्ट कोड मिलने के बाद कमांडिंग ऑफिसर दोनों साथी अधिकारियों को यह कोड बताता है जो अपने-अपने सेफ कोड खोलकर उसका मिलान करते हैं. यदि तीनों कोड सही पाए जाते हैं तो परमाणु हमला कर दिया जाता है.

प्रधानमन्त्री का स्मार्ट कोड मिलने के बाद क्या होता है तुरंत हमला

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री का स्मार्ट कोड मिलने के बाद तुरंत ऐसा हमला नहीं होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि हवाई हमले के लिए लड़ाकू विमान को तैयार करना या थल सेना बैटरियों और नौसेना द्वारा मिसाइलों को दागने की तैयारी में 35 से 40 मिनट तक का समय लग सकता है.