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अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य ने एक्साइज केस को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट…

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दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य ने एक्साइज केस को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा है.

उन्होंने एक्साइज केस को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से हटाकर किसी दूसरी बेंच को ट्रांसफर करने की मांग की है.

उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के खिलाफ भेदभाव के सबूत पेश किए हैं. उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने एक्साइज केस में उनके सभी ऑर्डर पलट दिए हैं. निष्पक्षता तय करने और न्याय में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए ट्रांसफर करें.

अरविंद केजरीवाल ने पत्र में लिखा है, अगर यही बेंच सुनवाई करती है तो निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं हो पाएगी. ‘इंसाफ सिर्फ होना ही नहीं चाहिए, होते हुए नज़र भी आना चाहिए’. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा का रवैया उन पर संदेह पैदा करता है. आरोप मुक्त होने के खिलाफ सीबीआई की अपील पर पहली ही सुनवाई में उन्होंने दूसरा पक्ष सुने बिना जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगा दी.

पहली नजर में निचले आदेश को गलत बता दिया

केजरीवाल ने कहा, उन्होंने पहली नजर में निचले आदेश को गलत भी बता दिया. ईडी के केस में सुनवाई पर रोक लगा दी. आबकारी नीति मामले में इससे पहले दिए अपने किसी फैसले में उन्होंने किसी भी आरोपी को कोई राहत नहीं दी थी. उनके कई फैसलों को बाद में जाकर सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया और आरोपियों को ज़मानत मिल पाई. बता दें कि दो दिन पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट ने आबकारी नीति में कथित घोटाले मामले से जुड़े सीबीआई मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट से बरी अरविंद केजरीवाल समेत सभी 23 लोगों को नोटिस जारी किया था. इस मामले में अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी. हाई कोर्ट केस की जांच करने वाले सीबीआई ऑफिसर के खिलाफ डिपार्टमेंटल एक्शन लेने के ट्रायल कोर्ट के ऑर्डर पर रोक लगा चुका है.

रिहाई के आदेश पर रोक लगाने से कोर्ट का इनकार

सीबीआई की याचिका पर सोमवार को हाई कोर्ट ने केजरीवाल-सिसोदिया समेत अन्य की रिहाई के आदेश पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया था. सीबीआई ने लोअर कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. सीबीआई की तरफ से SG तुषार मेहता ने केजरीवाल समेत 23 लोगों की रिहाई के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी.

यह देश के लिए शर्म की बात है: एसजी

इस पर कोर्ट ने मना कर दिया. जस्टिस ने ट्रायल कोर्ट से ईडी केस को तब तक टालने को भी कहा, जब तक हाई कोर्ट सभी आरोपियों को डिस्चार्ज करने के खिलाफ सीबीआई की रिवीजन अर्जी पर फैसला नहीं कर लेता. एसजी तुषार मेहता ने कहा था, यह इस देश की राजधानी दिल्ली के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक है और उनकी राय में यह देश के लिए शर्म की बात है.

साजिश का हर पहलू साबित भी हुआ

उन्होंने कहा, इसकी साइंटिफिक जांच की गई थी. साजिश का हर पहलू साबित भी हुआ. आरोप लगाया कि हवाला के जरिए और कई हिस्सों में पैसे ट्रांसफर किए गए. ऐसे मामले में कोई पार्टी बदले की भावना वगैरह का आरोप लगा सकती है. सभी खास गवाहों से मजिस्ट्रेट के सामने पूछताछ की गई.

शंकराचार्य पर पाबंदी देख भड़के अखिलेश! बताया सनातन का अपमान…

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लखनऊ में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के प्रस्तावित कार्यक्रम को प्रशासन ने सशर्त अनुमति दे दी है। लखनऊ विकास प्राधिकरण की स्मारक समिति और पुलिस ने आयोजन के लिए कुल 26 शर्तें तय की हैं।

इस फैसले पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव A(khilesh Yadav) ने सरकार पर तंज कसते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।

सपा प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि जब किसी को कोई कार्यक्रम पसंद नहीं आता, तो वह उस पर शर्तों का अंबार लगा देता है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर इतनी पाबंदियां लगानी ही थीं तो यह भी तय कर दिया जाता कि आंख और मुंह कितने सेंटीमीटर तक खोले जा सकते हैं।

सनातन के अपमान का लगाया आरोप

सपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में लिखा कि अगर भाजपा सनातन परंपरा का सम्मान नहीं कर सकती, तो कम से कम उसका अपमान भी नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सरकार एक खास समाज के सम्मान को ठेस पहुंचा रही है और यह बात उस समाज के लोग भी समझ रहे हैं।

भाजपा नेताओं पर भी साधा निशाना

अखिलेश यादव ने कहा कि इस मुद्दे पर भाजपा के कई मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि खुलकर बोलने से बच रहे हैं। उनके मुताबिक अपने ही समाज के सम्मान के सवाल पर चुप रहने वाले ऐसे नेता धीरे-धीरे जनता के बीच अपनी साख खो रहे हैं और आने वाले चुनाव में जनता उन्हें सबक सिखाएगी।

कोविड नियमों को लेकर भी उठाए सवाल

सपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में कोविड-19 नियमों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अगर कोविड-19 अभी भी लागू है तो सरकार बताए कि आखिरी बार किसी सरकारी बैठक या भाजपा के आयोजन में इन नियमों का पालन कब हुआ था। उन्होंने यह भी तंज किया कि क्या भाजपा और उसके सहयोगियों की बंद कमरों में होने वाली बैठकों में भी ये नियम लागू होते हैं।

आँख और मुँह कितने सेंटीमीटर खुल सकते हैं, ये शर्त भी रख देते…

किसी को ‘हाता नहीं भाता’, इसीलिए वो ‘शर्तों’ का है अंबार लगाता। भाजपाई सनातन का सम्मान नहीं कर सकते हैं तो भले न करें परंतु अपमान भी न करें। उप्र की अहंकारी सरकार जिस समाज विशेष के मान की बाँह मरोड़ रही है, वो बात…

अतार्किक बंदिशें कमजोर सत्ता की पहचान’

अखिलेश यादव ने कहा कि इस तरह की अतार्किक बंदिशें लगाना कमजोर सरकार की पहचान होती है। उन्होंने इस फैसले को निंदनीय और घोर आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को ऐसे फैसलों से बचना चाहिए।

PM Modi Kerala Visit: ‘LDF-UDF के बारी-बारी के खेल ने केरल को बर्बाद किया’, एर्नाकुलम में गरजे पीएम मोदी…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केरल के एर्नाकुलम (कोच्चि) में एक भव्य रोड शो के साथ राज्य को 10,800 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात दी।

विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर पीएम का यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां उन्होंने बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और रेलवे क्षेत्र से जुड़ी कई बड़ी योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। एर्नाकुलम में आयोजित एक विशाल जनसभा में एनडीए कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से अभिनंदन किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कोच्चि रिफाइनरी में 5,500 करोड़ रुपये की लागत वाली ‘पॉलीप्रोपाइलीन इकाई’ की आधारशिला रखी और केरल की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए कई नेशनल हाईवे व रेलवे प्रोजेक्ट्स राष्ट्र को समर्पित किए।

10,800 करोड़ की सौगात: विकास का नया अध्याय

प्रधानमंत्री ने केरल के विकास के लिए ₹10,800 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण किया। इनमें सबसे प्रमुख बीपीसीएल (BPCL) की कोच्चि रिफाइनरी में पॉलीप्रोपाइलीन यूनिट का शिलान्यास है। 400 किलो टन प्रति वर्ष की क्षमता वाली यह इकाई पैकेजिंग और ऑटोमोटिव जैसे उद्योगों को मजबूती देगी। इसके साथ ही, पीएम ने ग्रामीण कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत 23 नई सड़कों का उद्घाटन भी किया।

एर्नाकुलम रोड शो: उमड़ा जनसैलाब

कोच्चि के जवाहरलाल नेहरू अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम के पास आयोजित रोड शो में प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उमड़ पड़े। केसरिया टोपी और बीजेपी के झंडे थामे समर्थकों ने ‘मोदी-मोदी’ के नारों के साथ उनका अभिनंदन किया। लगभग 300 मीटर लंबे इस रोड शो के जरिए प्रधानमंत्री ने केरल की जनता से सीधा संवाद किया और राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एनडीए के अभियान का औपचारिक शंखनाद किया।

मलयालम में की भाषण की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एर्नाकुलम में अपने संबोधन की शुरुआत मलयालम भाषा में करके स्थानीय लोगों का दिल जीत लिया। उन्होंने गर्व के साथ घोषणा की कि उनकी सरकार ने राज्य का नाम आधिकारिक तौर पर ‘केरलम’ करने की जनभावना का सम्मान किया है, जो मलयाली विरासत और संस्कृति के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि है। पीएम ने स्पष्ट किया कि अब पूरी दुनिया इस महान राज्य को ‘केरलम’ के नाम से ही पहचानेगी, जो हर मलयाली के लिए गौरव का क्षण है।

LDF-UDF के चक्रव्यूह और विकास पर प्रहार

पीएम मोदी ने केरल के पिछड़ने के लिए LDF और UDF के बारी-बारी सत्ता में आने वाले पैटर्न को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इस “बारी-बारी” के खेल ने राज्य में भ्रष्टाचार को बढ़ाया है, क्योंकि दोनों गठबंधन जानते थे कि उनकी बारी पांच साल बाद फिर आएगी। पीएम ने दावा किया कि केरल की जनता अब इस दुष्चक्र से ऊब चुकी है और विकास के लिए एनडीए के रूप में एक नया विकल्प चुन रही है।

Job Alert: मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती पैटर्न में बड़ा बदलाव, UP Police SI भर्ती लिखित परीक्षा पर अपडेट, पढ़ें जॉब अलर्ट…

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देश के अलग-अलग राज्यों में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए कई अहम अपडेट सामने आए हैं. मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया को आसान बनाने की तैयारी चल रही है, जिससे उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिल सकती है.

वहीं उत्तर प्रदेश में पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती 2025 की लिखित परीक्षा की तारीख तय कर दी गई है और जल्द ही एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे. दूसरी ओर इंडियन आर्मी में अग्निवीर बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण खबर है, क्योंकि बरेली में अग्निवीर भर्ती रैली शुरू होने जा रही है. इन तीनों अपडेट का असर हजारों युवाओं के करियर पर पड़ने वाला है.

मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती के नियमों में बड़ा बदलाव

मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने की तैयारी चल रही है. स्कूल शिक्षा विभाग नया प्रस्ताव भेज रहा है, जिसके अनुसार अब शिक्षकों का चयन सिर्फ टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) के अंकों के आधार पर किया जाएगा. पहले भर्ती के लिए दो परीक्षाएं देनी पड़ती थीं, लेकिन नए नियम से यह प्रक्रिया आसान हो जाएगी. TET के अंक जीवनभर मान्य रहेंगे. राज्य में इसी साल करीब 30 हजार शिक्षकों की भर्ती भी होने की संभावना है.

यूपी पुलिस SI भर्ती 2025

उत्तर प्रदेश में पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती 2025 को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है. भर्ती बोर्ड ने लिखित परीक्षा की तैयारियां पूरी कर ली हैं और जल्द ही एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे. यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के अनुसार SI भर्ती 2025 की लिखित परीक्षा 14 और 15 मार्च को प्रदेश के 1090 परीक्षा केंद्रों पर होगी. इस भर्ती के जरिए 4543 पद भरे जाएंगे और करीब 15.75 लाख उम्मीदवार परीक्षा में शामिल होंगे. 14 मार्च की परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड 11 मार्च को और 15 मार्च की परीक्षा के लिए 12 मार्च को आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकेंगे. इंडियन आर्मी की अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अहम खबर सामने आई है. बरेली में 11 मार्च से अग्निवीर भर्ती रैली शुरू होने जा रही है, जो 23 मार्च तक चलेगी. यह भर्ती जाट रेजिमेंट सेंटर में आयोजित होगी. इसमें उत्तर प्रदेश के 12 जिलों के उम्मीदवार भाग ले सकेंगे. सेना ने अलग-अलग पदों के लिए अलग दिन तय किए हैं. उम्मीदवारों को अपने निर्धारित दिन से एक दिन पहले रैली स्थल पर पहुंचने और एडमिट कार्ड साथ लाने की सलाह दी गई है.

दिल्ली जल बोर्ड का पानी बिल मोबाइल से कैसे डाउनलोड करें? यहां देखें स्टेप-बाय-स्टेप गाइड…

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दिल्ली जैसे बड़े शहर में आबादी लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण पानी की मांग भी तेजी से बढ़ी है। ऐसे में जल आपूर्ति को व्यवस्थित रखने के लिए संबंधित विभाग लगातार अपनी इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑनलाइन सेवाओं को अपग्रेड कर रहे हैं।

दिल्ली में पानी की आपूर्ति और प्रबंधन की मुख्य जिम्मेदारी दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board) की है। दिल्ली में रहने वाले लोगों के लिए पानी की सप्लाई और उससे जुड़े बिल का भुगतान अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है।

डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के चलते अब उपभोक्ता घर बैठे ही अपने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) या संबंधित जल प्राधिकरण की वेबसाइट से पानी का बिल देख सकते हैं और उसकी रसीद भी डाउनलोड कर सकते हैं।आज के डिजिटल युग में, आपको अपना पानी का बिल प्राप्त करने या भुगतान की रसीद लेने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। आप घर बैठे अपने स्मार्टफोन से इसे डाउनलोड कर सकते हैं।

DJB Bill Download By Mobile Number: मोबाइल नंबर और KNO से दिल्ली जल बोर्ड का बिल कैसे डाउनलोड करें?

दिल्ली जल बोर्ड अपने उपभोक्ताओं को KNO (Consumer Number) के माध्यम से बिल देखने और डाउनलोड करने की सुविधा देता है। यदि आपको अपना KNO नहीं पता है, तो आप इसे अपने मोबाइल नंबर से भी खोज सकते हैं।

आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं:

सबसे पहले अपने मोबाइल ब्राउज़र में दिल्ली जल बोर्ड के RMS पोर्टल (djb.gov.in/DJBRMSPortal) पर जाएं।

View/Print Latest Bill चुनें:

होम पेज पर आपको ‘View/Print Latest Bill’ का विकल्प दिखाई देगा, उस पर ।

KNO नंबर डालें:

अपना 10 अंकों का KNO नंबर दर्ज करें।

यदि KNO नहीं पता:

‘Know Your KNO’ विकल्प पर जाएं और अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालकर ओटीपी (OTP) के जरिए अपना उपभोक्ता नंबर प्राप्त करें।

ओटीपी वेरिफिकेशन:

 अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालें और ‘Fetch OTP’ पर । मोबाइल पर आए ओटीपी को दर्ज कर सबमिट करें।

बिल देखें और डाउनलोड करें: स्क्रीन पर आपके बिल का विवरण दिखाई देगा। यहां ‘View Bill’ या ‘PDF’ आइकॉन पर के आप अपना लेटेस्ट बिल डाउनलोड कर सकते हैं।

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DDA क्षेत्रों द्वारका, रोहिणी के लिए रसीद कैसे डाउनलोड करें?

यदि आप DDA द्वारा संचालित क्षेत्रों में रहते हैं, तो प्रक्रिया थोड़ी अलग है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) कुछ विशिष्ट क्षेत्रों जैसे द्वारका, रोहिणी और वसंत कुंज में पानी की सेवाओं की देखरेख करता है।

DDA की वेबसाइट पर जाएं:

DDA की आधिकारिक वेबसाइट (dda.gov.in) पर ‘Online Payment’ सेक्शन में जाएं।

लॉगिन करें:

अपनी रजिस्टर्ड आईडी और पासवर्ड का उपयोग करके लॉगिन करें।

वाटर बिल सेक्शन:

‘Services’ टैब के तहत ‘Water Bill Payment’ या ‘Bill History’ चुनें।

उपभोक्ता विवरण:

अपना कंज्यूमर नंबर डालें।

रसीद डाउनलोड: भुगतान इतिहास (Payment History) दिखाई देने पर संबंधित ट्रांजेक्शन के सामने ‘Receipt’ विकल्प पर और इसे भविष्य के लिए सेव कर लें।

Delhi Jal Board Bill Payment: डिजिटल पेमेंट से आसान हुआ बिल भुगतान

आजकल कई डिजिटल प्लेटफॉर्म भी पानी के बिल का भुगतान करने की सुविधा दे रहे हैं। उपभोक्ता UPI, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए आसानी से भुगतान कर सकते हैं। ऑनलाइन भुगतान का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें समय की बचत होती है और भुगतान का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहता है।

ऑनलाइन बिल और रसीद डाउनलोड करने से उपभोक्ताओं को कई फायदे मिलते हैं। घर बैठे बिल और भुगतान की जानकारी मिल जाती है। रसीद तुरंत डाउनलोड और प्रिंट की जा सकती है और भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। लोगों को सरकारी दफ्तर जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सलाह

अगर आप पानी का बिल ऑनलाइन भरते हैं, तो हमेशा आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें। साथ ही अपने कंज्यूमर नंबर और लॉगिन डिटेल्स सुरक्षित रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर आसानी से बिल और रसीद डाउनलोड की जा सके। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ अब दिल्ली के उपभोक्ताओं के लिए पानी का बिल भरना और उसकी रसीद निकालना पहले से कहीं ज्यादा सरल, तेज और सुरक्षित हो गया है।

”लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने संसद में बोलते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया और सदन की कार्यवाही”

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Rahul Gandhi’ संसद में मचे घमासान के बीच राहुल गांधी का तीखा हमला, अध्यक्ष की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल…

लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने संसद में बोलते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया और सदन की कार्यवाही को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद पूरे देश की आवाज का प्रतिनिधित्व करती है, न कि किसी एक पार्टी का। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि जब भी विपक्ष अपनी बात रखने के लिए खड़ा होता है तो उसे बोलने से रोका जाता है। उन्होंने कहा कि पिछली बार जब उन्हें बोलने का मौका मिला था, तब उन्होंने प्रधानमंत्री के फैसलों और कुछ समझौतों से जुड़े एक बुनियादी सवाल को उठाया था।

क्या है विवाद की मुख्य वजह?

सदन में जारी गतिरोध की मुख्य वजह विपक्षी सांसदों का यह आरोप है कि उन्हें महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में सत्तापक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी वे सदन में कोई बुनियादी सवाल उठाते हैं, तो उन्हें बोलने से रोकने का प्रयास किया जाता है। विपक्षी दलों का कहना है कि लोकसभा अध्यक्ष को तटस्थ होकर सदन चलाना चाहिए, लेकिन वे सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं। सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि उन्हें और विपक्षी सांसदों को सदन में अपनी बात रखने से बार-बार रोका जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकसभा किसी एक दल की नहीं, बल्कि पूरे देश की आवाज है, जहां हर पक्ष को बोलने का पूर्ण अधिकार मिलना चाहिए। राहुल गांधी ने इस दौरान प्रधानमंत्री पर ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ होने का गंभीर आरोप भी मढ़ा, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

इस तीखी बहस की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने की। उन्होंने स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव को खारिज करते हुए इसे किसी नेता के अहंकार की संतुष्टि का साधन करार दिया। प्रसाद ने राहुल गांधी के आचरण और उनके बयानों पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक पदों से जुड़े मुद्दों पर राजनीति करते समय विपक्षी नेताओं को मर्यादा और गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने आपातकाल के समय का जिक्र करते हुए विपक्ष को आईना दिखाने की कोशिश की। रविशंकर प्रसाद की तीखी टिप्पणियों के बाद सदन में विपक्षी सांसदों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया और वे आसन के सामने (वेल में) आ गए। कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे दिलीप सैकिया ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। हंगामे के बीच जब राहुल गांधी को अपनी बात रखने का मौका मिला, तो उन्होंने दोहराया कि यह चर्चा केवल स्पीकर की भूमिका के बारे में नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि पिछली बार भी जब उन्होंने प्रधानमंत्री से बुनियादी सवाल किए थे, तब भी उन्हें बोलने से रोका गया था। इस मामले को लेकर सदन में जबरदस्त राजनीतिक खींचतान जारी है।

कच्चे तेल की कीमतों में U-टर्न, रातों-रात धड़ाम हुए भाव, इस संगठन ने बदला खेल…

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अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के बीच बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें अचानक नीचे आ गईं. इसकी वजह है कि इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने अपने तेल भंडार से इतिहास का सबसे बड़ा रिलीज करने का प्रस्ताव दिया है.

यह कदम तेल की कीमतों को काबू में करने के लिए उठाया गया है. यह ऑयल रिलीज 182 मिलियन बैरल तेल से भी ज्यादा हो सकता है. इससे पहले IEA के सदस्य देशों ने 2022 में तब दो बार बाजार में ऑयल रिलीज किया था. जब रूस ने यूक्रेन पर बड़ा हमला किया था.

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव मंगलवार को संगठन के 32 सदस्य देशों के ऊर्जा अधिकारियों की आपात बैठक में रखा गया है. मामले से जुड़े अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया है कि बुधवार को इस प्रस्ताव पर फैसला होने की उम्मीद है. हालांकि, यह ऑयल रिलीज तभी होगा, जब IEA का कोई भी सदस्य देश इसका विरोध नहीं करेगा. लेकिन अगर एक भी देश विरोध करता है, तो इस प्लान को टाला जा सकता है.

क्या है इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी?

IEA एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका मुख्यालय पेरिस में है. इसकी स्थापना 1974 में की गई थी. इसका काम दुनिया में तेल की सप्लाई में बड़ी समस्या आने पर देशों के बीच तालमेल बनाना है. यह संगठन आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के तहत काम करता है. IEA सरकारों और कंपनियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता है कि ऊर्जा सुरक्षित, सस्ती और लंबे समय तक चलने वाली (सस्टेनेबल) हो.

IEA में 32 सदस्य देश हैं, जिनमें अमेरिका, जापान, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा प्रमुख हैं. ज्यादातर OECD के सदस्य हैं. इसके अलावा भारत, चीन और इंडोनेशिया जैसे 13 सहयोगी सदस्य हैं. हालांकि, भारत जल्द ही इसका फुल टाइम मेंबर बन सकता है, क्योंकि पिछले महीने उसके सदस्य देशों ने एकमत होकर ब्राजील, कोलम्बिया, भारत और वियतनाम को साथ लाने पर सहमति जताई थी.

कच्चे तेल में आई गिरावट

बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली. ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.26% गिरकर 87.57 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि WTI कच्चे तेल के फ्यूचर्स 0.44% गिरकर 83.08 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए. रात भर के कारोबार में अमेरिकी WTI और ब्रेंट क्रूड के फ्रंट-मंथ फ्यूचर्स 11% से ज्यादा गिरकर बंद हुए. मंगलवार को तेल की कीमतों में चार साल की सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट देखी गई. हालांकि, इसकी एक वजह ये भी थी कि ट्रंप प्रशासन की ओर से ईरान युद्ध को लेकर अलग-अलग संकेत थे, जिससे बाजार में भारी उतार-चढ़ाव आ गया.

यह उतार-चढ़ाव तब और बढ़ गया जब अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने गलती से सोशल मीडिया पर यह पोस्ट कर दिया कि अमेरिकी नौसेना ने एक तेल टैंकर को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित निकालकर ले गई है. बाद में उन्होंने यह पोस्ट हटा दी और व्हाइट हाउस ने कहा कि ऐसा कोई ऑपरेशन हुआ ही नहीं था.

LPG Crisis: एलपीजी संकट का असर रेलवे कैटरिंग पर, IRCTC ने स्टॉल संचालकों के लिए जारी की नई एडवाइजरी…

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देश में कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की कमी की आशंका बरकरार है। मिडिल ईस्ट संकट का असर तेल के बाद गैस पर भी पड़ रहा है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े असर के बीच इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) ने रेलवे स्टेशनों पर चलने वाली खान-पान सेवाओं को लेकर नई एडवाइजरी जारी की है।

इस एडवाइजरी के तहत रेलवे स्टेशनों पर मौजूद कैटरिंग यूनिट्स और स्टॉल संचालकों को गैस की कमी से निपटने के लिए सतर्क रहने की अपील की गई है। स्टॉल संचालकों को वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।

IRCTC ने कहा है कि अगर गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में बाधा आती है, तो वैकल्पिक उपाय अपनाएं। कैटरिंग यूनिट्स को माइक्रोवेव और इंडक्शन जैसे बिजली से चलने वाले उपकरणों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। इसका उद्देश्य है कि यात्रियों को भोजन और नाश्ते की सुविधाओं में किसी तरह की कमी न हो।

LPG Crisis: आईआरसीटीसी ने जारी किया एडवाइजरी- जारी दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह आदेश चलती ट्रेनों में मिलने वाली कैटरिंग सेवाओं पर लागू नहीं होगा।

– यह नियम केवल रेलवे स्टेशनों पर मौजूद स्थिर (स्टेटिक) कैटरिंग यूनिट्स और दुकानों के लिए लागू किया गया है।

– नए नियमों के तहत इन यूनिट्स को अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करना होगा ताकि गैस की संभावित कमी के बावजूद सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहें।

– IRCTC ने यह भी कहा है कि यदि किसी यूनिट में गैस के माध्यम से खाना पकाना पूरी तरह बंद हो जाता है, तो इसकी जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को देनी होगी।

– इससे रेलवे प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करने में मदद मिलेगी और यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराने में कोई दिक्कत नहीं होगी।

IRCTC ने रेडी टू ईट फूड का स्टॉक रखने का दिया सुझाव

इसके अलावा, कैटरिंग संचालकों को ‘रेडी टू ईट’ (RTE) फूड का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। मानक पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर (PAD) और अन्य खाद्य पदार्थों के साथ-साथ RTE भोजन का पर्याप्त भंडार रखने से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि अगर ताजा भोजन बनाना संभव न हो तो भी यात्रियों को आसानी से खाने के पैकेट उपलब्ध कराए जा सकें।

रेलवे प्रशासन का कहना है कि ऊर्जा संकट के इस दौर में यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी करना जरूरी है। इसलिए कैटरिंग यूनिट्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करें और खाद्य सामग्री का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखें, ताकि रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को खाने-पीने की कोई कमी महसूस न हो।

कोर्ट ने शाही इमाम पर ठोका 6.94 करोड़ का जुर्माना, मस्जिद-दरगाह और मकान पर चल सकता है बुलडोजर…

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उत्तर प्रदेश के संभल जिले की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के शाही इमामपर गंभीर आरोप लगे हैं. सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण के आरोप में कोर्ट ने ईमाम और उनके भाई पर 6.94 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है.

प्रशासन के मुताबिक, गांव सैफ खां सराय में ग्राम समाज की जमीन पर मस्जिद, दरगाह और मकान बनाए जाने का आरोप है. इस मामले में तहसीलदार न्यायालय ने कब्जाधारियों को जमीन खाली करने का आदेश दिया है और भारी जुर्माना भी लगाया है.

प्रशासन का दावा है कि गांव सैफ खां सराय में ग्राम समाज की है. राजस्व रिकॉर्ड में इसे पौधारोपण के लिए आरक्षित बताया गया है. स्थानीय लेखपाल की रिपोर्ट में बताया गया है कि 1340 वर्ग मीटर जमीन पर संभल की ऐतिहासिक जमा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना आफताब हुसैन वारसी और उनके भाई मेहताब हुसैन का मकान, मस्जिद और दरगाह बने हुए हैं. बताया जा रहा है कि यह निर्माण कई दशक पहले किया गया था. इस जमीन पर शाही ईमाम और उनके भाई का पूरी तरह से कब्जा है.

जमीन खाली करने का दिया निर्देश

मामले की जांच के बाद तहसीलदार की कोर्ट ने ईमाम और उनके भाई को जमीन खाली करने का निर्देश दिया है. साथ ही दोनों पर करीब 6.94 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. प्रशासन के अनुसार, आदेश के बाद संबंधित पक्ष को 30 दिन का समय दिया गया है. यदि इस अवधि में जमीन खाली नहीं की जाती है तो राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन कब्जा हटाने के लिए आगे की कार्रवाई करेगा. यानी मस्जिद, मकान और दरगाह को बुलडोजर चलेगा. प्रशासन के इस आदेश के बाद से गांव सैफ खां सराय में हडकंप मचा हुआ है. बताया जा रहा है कि ईमाम और उनके भाई का परिवार यहां रहता है.

कोर्ट ने ईमाम का सुना पक्ष

वहीं कोर्ट में सुनवाई के दौरान ईमाम मौलाना आफताब हुसैन वारसी ने इस जमीन को वक्फ संपत्ति बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी. इमाम पक्ष की ओर से कहा गया कि यह स्थान एक धार्मिक स्थल है और मस्जिद व मजार का निर्माण कई वर्ष पहले हुआ था. उनका कहना है कि यह परिसर वक्फ बोर्ड में दर्ज है और यहां होने वाले धार्मिक कार्यक्रम प्रशासन की जानकारी में आयोजित होते रहे हैं. हालांकि राजस्व विभाग का कहना है कि उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर जमीन ग्राम समाज की है और उस पर किए गए निर्माण को वैध नहीं माना जा सकता. यह मामला सामने आने के बाद पूरे जिले में सरकारी जमीनों पर कब्जे को लेकर प्रशासन की सख्ती भी चर्चा का विषय बन गई है.

17 मस्जिदें, 12 मजारें और दो मदरसों पर चला बुलडोजर

संभल जिले में प्रशासन द्वारा अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है. इसी क्रम में पहले भी कई स्थानों पर कार्रवाई की जा चुकी है. सलेमपुर सालार, राया बुजुर्ग और नरौली जैसे क्षेत्रों में अवैध निर्माण हटाए गए हैं. प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार अब तक जिले में लगभग 17 मस्जिदें, 12 मजारें और दो मदरसों को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है. इसके अलावा कुछ अन्य स्थानों पर भी नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है.

ममता बनर्जी ने क्यों खत्म किया 5 दिन से जारी धरना, क्या मान ली गईं सारी मांगें…

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में अपना धरना खत्म कर दिया है. हालांकि ममता ने मतदाताओं से वादा किया है वो उनके अधिकार के लिए लड़ती रहेंगी. ममता वोटर लिस्ट में से काटे गए नामों के खिलाफ 5 दिन से धरने पर बैठे थीं.

उन्होंने कहा था कि वो उन लोगों को भी पेश करेंगी जिनको चुनाव आयोग ने मृत घोषित कर दिया है.

ममता बनर्जी ने कहा, अगर चुनाव आयोग 15-16 मार्च को चुनाव की तारीखों का ऐलान कर देता है तो खेल वहीं नहीं खत्म होगा. लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में जारी रहेगी. उन्होंने आगे कहा कि हमारा धरना दो कारणों से था. एक उन लोगों के लिए था जिनके नाम गलत तरीके से वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे और दूसरा उन लोगों को न्याय दिलाने के लिए था जिनके नाम एडज्यूडिकेशन में थे और यह पक्का करना था कि उन्हें उनके वोटर अधिकार वापस मिलें.

6 मार्च को शुरू हुआ था धरना

ममता बनर्जी ने 6 मार्च को धरना शुरू किया था. इसके बाद पार्टी के अन्य नेता भी प्रदर्शन में शामिल हुए, जिसमें सांसद और मंत्री भी शामिल थे. टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने ममता से धरना खत्म करने की अपील की थी. ममता ने भतीजे की मांग की मानते हुए धरना खत्म किया.

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमारी मांगें मान ली हैं, इसलिए मैं दीदी से सबकी तरफ से अपील कर रहा हूं कि आप पिछले पांच दिनों से सड़क पर हैं… अब इस धरने को खत्म करें. अभिषेक बनर्जी ने कहा कि लड़ाई यहां खत्म नहीं हो रही है. हम ये तभी खत्म करेंगे जब हर नागरिक को वोट देने का अधिकार मिल जाएगा. उन्होंने कहा कि TMC के कार्यकर्ता अभी भी वहीं हैं और वे यहां से सड़क पर लड़ाई जारी रखेंगे और सभी 80,000 बूथों पर BJP को हराएंगे.

ममता ने क्यों खत्म किया धरना?

सीएम ममता बनर्जी ने धरना खत्म करते वक्त सुप्रीम कोर्ट में हुए घटनाक्रम का जिक्र किया. दरअसल, अदालत ने मंगलवार को ट्रिब्यूनल बनाने का सुझाव दिया.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अपील से निपटने के लिए पूर्व चीफ जस्टिस और हाई कोर्ट के जजों की एक बेंच बना सकते हैं और EC से सुनवाई के लिए एक अपील बॉडी बनाने को कहा.

ममता ने बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लोगों की जीत बताते हुए कहा कि इसने वोटिंग के अधिकार से वंचित लोगों के लिए बंद दरवाजा खोल दिया है. CM ने कहा, अदालत ने एक बंद दरवाज़ा खोल दिया है. इसका इस्तेमाल करें. विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित होने के बाद भी मामला कोर्ट में पेंडिंग रहेगा. मेरी याचिका अभी भी वहां है. यह मत सोचिए कि अगर चुनाव की तारीखें घोषित हो जाती हैं तो आपके पास कोई मौका नहीं है. उन्होंने कहा है अगर आपका नाम लिस्ट में नहीं है तो चुनाव से एक दिन पहले तक हमारे पास आएं. ममता बनर्जी ने कहा कि मामले की सुनवाई 25 मार्च को SC में होगी और जिन लोगों के नाम काटे गए हैं, उनसे हिम्मत न हारने की अपील की.