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पाकिस्तान में मचा हाहाकार, एक किलो चिकन की कीमत हुई इतनी

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पाकिस्तान में मचा हाहाकार, एक किलो चिकन की कीमत हुई इतनी। दोस्तों जैसा कि आप सभी जानते है, कि अर्थव्यवस्था खराब होने के कारण पाकिस्तान महंगाई की मार झेल रहा है। जिसके चलते पाकिस्तान में रहने वाले हर नागरिक को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन आज हम आपको पाकिस्तान में बिकने वाले एक किलो चिकन की कीमत बताने जा रहे है। जिसके बाद पाकिस्तान में हाहाकार मच गया है, तो आइये जानते है।
पाकिस्तान में इतनी हुई एक किलो चिकन की कीमत
दोस्तों पाकिस्तान में इन दिनों चिकन सबसे महंगा बिक रहा है। एक कारोबारी के मुताबिक पाकिस्तान में एक किलो चिकन (बोन) का दाम 480 से 500 रुपए हो गया है, और वहीं चिकन (बोनलेस) के दाम 650 से 700 रुपए प्रति किलो हो गए हैं। आमतौर पर चिकन के दाम 150 से 200 रुपए के बीच रहते हैं। लेकिन, पिछले कुछ दिनों में इसके दाम में बेहताशा वृद्धि हुई है।
इस वजह से महंगा हुआ चिकन
दोस्तों खबरों के मुताबिक, पोल्ट्री कारोबारियों का कहना है, कि शादियों का सीजन शुरू हो चुका है। ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए पोल्ट्री कारोबारी सप्लाई घटा रहे हैं। यही वजह है, कि कीमतों में भारी इजाफा हुआ है।

Madhya Pradesh : हुस्न के जाल में फंसाकर 15 लाख वसूलने का प्रयास, दो युवतियों सहित पांच पर केस दर्ज

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अशोकनगर में एक युवक को हुस्न के जाल में फंसाकर उससे 15 लाख रुपए वसूलने के प्रयास का मामला सामने आया है। युवक की शिकायत पर पुलिस ने दो युवतियों सहित 5 लोगों पर केस दर्ज किया है। एक युवक और एक युवती को पकड़ लिया। जबकि बाकी की तलाश जारी है।

सिटी कोतवाली टीआई प्रेम प्रकाश मुदगिल के मुताबिक उड़ीसा के इच्छापुर निवासी शशिकांत राउत(38) अशोकनगर में एक ठेकेदार के यहां सुपरवाइजर है। शशिकांत और उसके साथी जयराम को निक्की नामक युवती ने फोन कर पुराना बाजार स्थित नीम के पेड़ के पास बुलाया था। फिर जयराम को वहीं के एक कमरे में ले गई।

वहां निक्की और उसके साथियों ने जयराम के कपड़े उतारकर उसे झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर डेढ़ लाख रुपए वसूल लिए। बाद में 15 लाख रुपए और देने की मांग की।

टीआई ने बताया कि शशिकांत की शिकायत पर पुलिस ने निक्की उर्फ नीलू, पूजा जैन दोनों निवासी पुराना बाजार, सुखदेव पुत्र राम सिंह यादव निवासी विदिशा रोड, विशाल अग्रवाल, संजीव यादव पर केस दर्ज किया था। इनमें से सुखदेव को गिरफ्तार किया है। निक्की को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। बाकी आरोपितों की तलाश जारी है।

महिला नागा साधू अपने साथ वो करती है जो आप सोच भी नहीं सकते

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भारत एक ऐसा देश हैं जहां तमाम तरह की परंपराएं मौजूद हैं। यहीं नहीं वह अपनी संस्कृति के लिए पूरे विश्व भर में जाना जाता है । हालांकि इस मामले में कुछ परंपराएं ऐसी भी हैं जो बहुत ही चौंका देने वाली हैं। हम यहां महिला नागा साधु बनने की परंपरा से रूबरू करवाने जो रहे हैं जिसे जानकर आपको भी हैरानी होगी। आज हमारे समाज में ऐसे भी लोग है जिन्होंने इसके बारे में बेहद ही गलत धारणा रखते हैं, कुछ लोगों का तो ऐसा भी मानना है की महिला नागा साधू जैसा कुछ भी नहीं होता पर आज हम आपको यहाँ पर इस विचित्र परंपरा के बारे में बताने वाले है।

बता दें की एक महिला नागा साधु बनने के लिए करीब 6 से 12 साल का कठिन ब्रम्हचर्य का अनुशरण करना होता है।

इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव की तैयारी, जानिए मिडिल क्लास को मिलेगी कितनी राहत

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कंपनियों को कॉरपोरेट टैक्स के बाद अब केंद्र सरकार मध्यम वर्द को भी आयकर में राहत दे सकती है।कार्यबल ने कर स्लैब में बदलाव कर मध्यम वर्ग को भी राहत देने का सुझाव दिया है। पांच से 10 लाख की आय पर टैक्स दर 20 से 10 फीसदी की जा सकती है। वहीं 10 से 20 लाख रुपये सालाना कमाने वालों को 20 फीसदी कर देना होगा। कार्यबल ने सुझाव दिया है कि 20 लाख रुपये से दो करोड़ रुपये तक की आय पर 30 फीसदी और इससे अधिक आय पर 35 फीसदी आयकर लगाया जाना चाहिए। आयकर पर लगाए गए अधिभारों और उपकरों को हटाने का भी सुझाव है।

कॉरपोरेट टैक्स के बाद कंपनियों को एक और राहत देने की तैयारी, जानें क्या है केंद्र की योजना
केंद्र सरकार कॉरपोरेट टैक्स के बाद कंपनियों को एक और राहत दे सकती है। दरअसल, निवेश को प्रोत्साहन के लिए प्रत्यक्ष कर संहिता पर बने कार्यबल ने लाभांश वितरण कर (डीडीटी) खत्म करने की सिफारिश की है। सूत्रों के मुताबिक, कार्यबल ने कहा है कि डीडीटी टैक्स पर टैक्स है और यह विदेशी निवेश के प्रवाह में रुकावट पैदा करता है।

किसी घरेलू कंपनी को सकल लाभांश पर 15 फीसदी लाभांश वितरण कर देना पड़ता है। सरचार्ज और सेस मिलाकर यह टैक्स 20.35 फीसदी हो जाता है। कुल टैक्स पर 12 फीसदी अधिभार और तीन फीसदी शिक्षा उपकर लगता है। सूत्रों के मुताबिक, इस कर को हटाए जाने से सरकार को राजस्व का नुकसान बेहद मामूली होगा, क्योंकि शेयरधारकों द्वारा चुकाए गए कर से इसकी भरपाई हो जाएगी। नई प्रत्यक्ष कर संहिता मौजूदा आयकर कानून की जगह लेगी। इससे जुड़े कार्यबल ने पिछले महीने वित्त मंत्रालय को रिपोर्ट सौंप दी है, जिस पर मंथन चल रहा है।

कार्यबल ने राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए नियमों के अनुपालन का भी कड़ाई से पालन करने का सुझाव दिया है। सरकार ने पिछले माह रिपोर्ट की एक सिफारिश को मानकर सभी घरेलू कंपनियों पर टैक्स 35 से घटाकर 25 फीसदी कर दिया है। अगर उपकर और अधिभार को हटा दें तो कंपनियों को 22 फीसदी कर देना होगा। इसे 28 सालों में सबसे बड़ा आर्थिक सुधार माना जा रहा है। नई विनिर्माण इकाइयों को महज 17 फीसदी टैक्स देना होगा, जो सेस को हटाकर महज 15 फीसदी होगा।

संकट में साथ देता है यह पड़ोसी, कीमत बढ़ी तो 15 रुपये में भेज रहा प्याज, पाक को झटका

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प्याज की कीमतों को लेकर अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि भारत के पड़ोसी देश ने प्याज भेजना शुरू कर दिया है। पंजाब के अमृतसर स्थित अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर प्याज की खेप पहुंचना शुरू हो गई है। भारत सरकार ने पड़ोसी देश अफगानिस्तान से प्याज का आयात शुरू कर दिया है। पिछले तीन दिन से अफगानिस्तान से प्याज के दस ट्रक अटारी सीमा पर स्थित इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) पहुंच चुके हैं। अफगानिस्तान से 26 ट्रक माल भारत पहुंचा। इसमें 21 ट्रक ड्राई फ्रूट, रतनजोत के दो, मिलान सीड के दो व दो ट्रक प्याज आईसीपी में पहुंचे थे। सोमवार को चार ट्रक प्याज अफगानिस्तान से भारत आया था। एक्सपोर्टर मानव तनेजा ने बताया की बुधवार को अफगानिस्तान से चार ट्रक भारत पहुंचे हैं।

अफगानिस्तान से आने वाला प्याज लगभग 15 रुपये किलो के हिसाब से मंगवाया जा रहा है। कुछ दिनों के बाद प्याज की आमद की रफ्तार बढ़ जाएगी। वर्ष 2015 में भी जब प्याज के भाव आसमान छू रहे थे, तब भारत सरकार ने पाकिस्तान से भी प्याज आयात किया था।

अनुच्छेद 370 हटने के बाद पाकिस्तान-भारत के बीच सभी व्यापारिक सबंध टूट चुके हैं। इसलिए भारत ने अफगानिस्तान से प्याज का आयात किया है। इससे पहले भी भारतवासी अफगानिस्तान का प्याज अपनी रसोई में प्रयोग कर चुके हैं।

अफगानिस्तान का प्याज बड़ा मोटा होता। अफगानी प्याज व भारतीय प्याज के स्वाद में अंतर भी होता है। देश में प्याज की फसल बाढ़ में बह जाने के बाद किल्लत आ गई है। अब भारतीय रसोई में अफगानी प्याज का तड़का लगेगा।

नासा के वैज्ञानिकों ने किया होश उड़ाने वाला खुलासा , गोली की रफ्तार से टकराएंगे लोग, क्योंकि अब धरती.

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 बीते कल को तगड़े भूकंप के झटकों ने दर्जनों जिंदगियां निगल लीं। कई भागों निरंतर लगातार ऐसे भूकंप के झटकों का सामना कर रहे हैं। इस विषय पर NASA के वैज्ञानिकों ने होश उड़ाने वाला खुलासा किया है।

NASA के अनुसार, पृथ्वी की अपनी धुरी पर घूमने की रफ्तार अपेक्षा से धीमी हो रही है, इस कारण भूकंप आने की संभावनाएं बढ़ती जा रही हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल, पृथ्वी अपनी धुरी पर 1,670 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रही है, जो कि सामान्य गति से धीमी है। इसके चलते चंद्रमा धरती से दूर होता जा रहा है। अब वैज्ञानिकों ने चेताया है कि इस रफ्तार के कम होने से बड़े भूकम्प आने की प्रबल आशंका है।

NASA के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के सोलर सिस्टम एम्बेस्डर मैथ्यू फुन्के ने इस रिपोर्ट के बारे में बताया। उनके मुताबिक, चंद्रमा की ग्रैविटी (गुरुत्वाकर्षण) पृथ्वी पर एक ज्वारीय उभार बनाता है जो धरती की घूर्णन गति से घूमने का प्रयास करता है। इसके परिणामस्वरूप धरती की रफ्तार सुस्त पड़ती जा रही है। ऐसी स्थिति में भूकंपीय घटनाएं बढ़ जाती है।

रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि चंद्रमा हर साल लगभग डेढ़ इंच धरती से दूर जा रहा है। और पृथ्वी की रफ्तार धीमी पड़ रही है। अब तक तो धरती की रफ्तार मंद पड़ने पर चंद्रमा इसे संतुलित करने के लिए अपनी कक्षा में थोड़ा और आगे बढ़ जाता है। लेकिन अब जो योग बन रहे हैं उससे भविष्य में धरती पर बड़े भूकम्प आ सकते हैं। आपको बता दें कि भूकम्प एक ऐसी विपदा है जिसे मनुष्य आज तक डीकोड नहीं कर सका है।

यह है भारत के 5 सबसे अमीर बाबा, नंबर 4 की संपत्ति चौकाने वाली है !

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आज हम बात करने वाले हैं भारत के 10 सबसे अमीर बाबाओं के बारे में जिन्होंने धर्म के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाकर करोड़ों का साम्राज्य खड़ा किया है और उनकी लोकप्रियता किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं है।
1. आसाराम बापू
आसाराम बापू भारत की सबसे लोकप्रिय बाबा में से एक है। इनकी फैन फॉलोइंग काफी लंबी है । आसाराम बापू अपने भक्तों के सामने नृत्य करने के लिए जाने जाते हैं। 2013 में इनके आश्रम की ही एक लड़की ने इन पर रेप का मुकदमा दायर किया था । जिसके कारण 2013 में इन्हें आजीवन जेल हो गई थी। इनकी कुल संपत्ति 430 करोड़ की है।
2. गुरु राम रहीम
गुरु राम रहीम भारत के सबसे ज्यादा फैन फॉलोइंग वाले बाबा हैं। गुरु राम रहीम का पूरा नाम गुरमीत राम रहीम सिंह है। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरु राम रहीम के पास 1500 करोड़ की संपत्ति है। गुरु राम रहीम ने अपने प्रशंसकों के लिए एक फिल्म भी बनाई थी । जिस फिल्म का नाम था मैसेंजर ऑफ गॉड गुरु राम रहीम के पास 10 लग्जरी गाड़ियां, 3 बंगले और 4000 एकड़ की जमीन है।
3. स्वामी ओम जी महाराज
स्वामी ओम जी महाराज बिग बॉस के शो में एक महिला के ऊपर गलत रूप से व्यवहार के मामले में उन पर केस दर्ज किया गया था । स्वामी ओम जी महाराज के पास कुल 100 करोड़ों की संपत्ति है।
4. बाबा रामदेव
दोस्तों बाबा रामदेव आज के समय में सबसे मशहूर बाबा हैं। जिनके खिलाफ एक भी गैर कानूनी रिकॉर्ड दर्ज नहीं है ।बाबा रामदेव आज के समय में भारत के सबसे अमीर बाबा में से एक है। इनकी कुल संपत्ति दो हजार करोड़ के भी ऊपर है। बाबा रामदेव योग गुरु के नाम से प्रसिद्ध है।
5. निर्मल बाबा
निर्मल बाबा बड़े ही अनोखे तरीकों से अपने भक्तों के दुखों का इलाज करने के लिए मशहूर थे । बड़ी संख्या में लोग इनके पास अपनी समस्या लेकर आते थे। निर्मल बाबा भी भारत के पाखंडी बाबाओं में शामिल है। जिनकी कुल संपत्ति 300 करोड़ की है।

सिर्फ एक खाते ने हिला दी पीएमसी बैंक की बुनियाद, और पाई-पाई को मोहताज हो गए आम ग्राहक

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पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक के बाहर लंबी कतारें लगी हैं और लोग रो रहे हैं। पैसे-पैसे को मोहताज हुए इन लोगों में टैक्सी-ऑटो ड्राइवर, बुजुर्ग, महिलाएं और बेहद साधारण पृष्ठभूमि वाले लोग हैं। यह तस्वीर उस भारत की है जिसका प्रधानमंत्री अमेरिका में दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों के साथ व्यापारिक समझौते करने के लिए बैठकें कर रहा है, जिस देश की सरकार आने वाले दिनों में देश की अर्थव्यवस्था को 5 खरब डॉलर तक पहुंचाने की बात कर रही है।

आखिर ऐसा क्या हुआ जो 1984 में स्थापित इस बैंक की करीब 130 शाखाओं के बाहर इसके ग्राहकों की कतारें लग गईं और हालात बेकाबू न हो जाएं, इसके लिए पुलिस का बंदोबस्त करना पड़ा।

इस पूरे मामले की जड़ें उस एक शब्द में छिपी हैं, जो हाल के वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र के लिए अभिशाप बन चुका है। यह शब्द है एनपीए यानी ऐसी परिसंपत्तियां जिनसे वसूली नहीं हो सकती। आम भाषा में समझें तो बैंकों द्वारा दिए गए ऐसे कर्ज जिन्हें लेने वालों ने लौटाने से या तो इनकार कर दिया या अपनी असमर्थता जता दी। पीएमसी बैंक के साथ भी मामला ऐसा ही है।

सिर्फ एक खाते ने हजारों लाखों पीएमसी ग्राहकों के बीच बेचैनी फैला दी। रिजर्व बैंक ने पाबंदी लगा दी है कि अगले 6 महीने तक इस बैंक से कोई भी ग्राहक एक हजार रुपए से ज्यादा नहीं निकाल सकता। बैंक अपनी कोई संपत्ति नहीं बेच सकता, कोई नया कर्ज नहीं दे सकता आदि आदि। लोगों की परेशानी बैंक से निकाले जाने वाले पैसे की सीमा तय करने पर है।

इस बैंक में बहुत से लोगों ने अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी की एफडी करा रखी है, कई लोगों ने बचत खाते खोले हुए हैं, बहुत सो के सेलरी अकाउंट इस बैंक में हैं। लेकिन विदड्राल यानी पैसे निकालने की सीमा तय होने से सबकुछ गड़बड़ा गया है।

एक खाता जिससे पीएमसी बैंक की बुनियाद हिल गई, वह है रियल एस्टेट की बड़ी कंपनी एचडीआईएल यानी हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड का। एचडीआईएल ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया है और पीएमसी ने इसे 2500 करोड़ का कर्ज दे रखा है। आरबीआई का एतराज है कि पीएमसी बैंक ने इस कर्ज को अपने मुनाफे में से कम करके नहीं दिखाया।

बैंक के सूत्रों का कहना है कि पीएमसी बैंक के ऑडिटर्स ने एचडीआईएल को दिए गए कर्ज को एनपीए के रूप में नहीं घोषित किया, जबकि एचडीआईएल काफी समय से कर्ज नहीं चुका पा रही थी। पीएमसी के पास कैश रिजर्व सिर्फ 1000 करोड़ रुपए का है, जो कि 2500 करोड़ से कहीं कम है। ऐसे में आरबीआई को यह कदम उठाना पड़ा।

लेकिन, सवाल है कि आखिर इतने दिनों तक बैंक ने क्यों एचडीआईएल के कर्ज को लेकर चुप्पी साधे रखी? और सवाल यह भी है कि आखिर इसमें उन खाताधारकों का क्या दोष जिनकी गृहस्थी इस बैंक में जमा उनकी अपनी गाढ़ी कमाई से चलती है।

गुजरात में 400 करोड़ के घोटाले का खुलासा, जानिए कैसे की गई सरकारी खजाना हड़पने की साजिश

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 जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (डीजीजीआई) के अहमदाबाद जोन ने गांधीधाम के कांडला एसईजेड में एक ऐसे केस का खुलासा किया है, जिसमें 400 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी होने का अनुमान है। जांच एजेंसी डीजीसीआई से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, कुछ इकाइयों ने कथित तौर पर सामानों की ओवरलोडिंग की और धोखाधड़ी से इनपुट टैक्स क्रेडिट की साजिश रची गई। यह साजिश राष्ट्रीय निर्यातक क्षेत्र (एनसीआर) में स्थित 20 निर्यातक फर्मों और कंपनियों के साथ मिलकर की गई। कांडला एसईजेड में की कुछ इकाइयों के संचालकों से इस मामले में पूछताछ की गई तो पोल खुली। जिसके बाद डीजीजीआई ने एसईजेड में तीन इकाईयों और एनसीआर स्थित निर्यातकों दफ्तर और गोदामों पर छापा मारा।

डीजीजी अधिकारी के अनुसार, एसईजेड-आधारित इकाइयों द्वारा आईटीसी रिफंड के साथ मिलकर निर्यात धोखाधड़ी का एक प्रमुख पता लगाना है। मॉडस ऑपरेंडी में बड़े पैमाने पर ओवरवैल्यूएशन शामिल था, जो सेज (शून्य-रेटेड आपूर्ति) को निर्यात किए गए माल के बाजार मूल्य के 3,000% की सीमा तक और धोखाधड़ी के साधनों द्वारा आईटीसी रिफंड का दावा करता था। साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि निर्यात के खिलाफ दावा किए गए आईटीसी रिफंड का स्रोत स्वयं धोखाधड़ी है। इतना ही नहीं, घपले में लिप्त संस्थाओं द्वारा चुनी गई वस्तुओं में तंबाकू और संबंधित उत्पाद शामिल हैं, जो 93% और 188% की दर से भारी कर के दायरे में हैं।

डीजीजीआई ने 25 से अधिक ऐसे आपूर्तिकर्ताओं की पहचान की है, जो असम, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, एमपी और यूपी जैसे राज्यों में स्थित हैं। जिन्होंने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के नकली चालान जारी किए हैं। जो माल की आपूर्ति के बिना NCR- आधारित निर्यातकों को दिए जाते हैं। इन आपूर्तिकर्ताओं ने गैर-मौजूद हैं या अप्रत्यक्ष रूप से निर्यातकों द्वारा खुद को नियंत्रित किया है।

यह घोटाले के प्रमुख साजिशकर्ताओं और लाभार्थियों की पहचान करने में सक्षम हैं, जो भाग रहे हैं। डीजीजीआई की सक्रिय कार्रवाई के कारण, आईटीसी ने 300 करोड़ रुपये से अधिक के रिफंड के दावों को खारिज कर दिया था, जिन्हें घोटालेबाजों के हाथों में जाने से रोक दिया गया है। डीजीजीआई की ओर से एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि, इस तरह के निर्यातकों के क्रेडिट बहीखाता पर 100 करोड़ रुपये से अधिक के अधिशेष आईटीसी को भी संभावित रिफंड दावों के माध्यम से बंद करने से रोक दिया गया है।

नोटबंदी के दुष्परिणाम अब सामने आ रहे हैं, अब शुरू हो चुका है साख का खेल

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अर्थशास्त्र का एक शब्द है “साख” अर्थात विश्वसनियता और अर्थशास्त्र का पूरा सिद्धांत इसी एक शब्द “साख” पर टिका है। किसी भी देश की बैंकिंग प्रणाली हो या वित्तीय संस्थान , उनका प्रदर्शन “साख” पर ही चलता है।

भारत की यदि बात करूँ तो सरकारी बैंक हों या “जीवन बीमा निगम” इनकी जितनी “साख” है उतनी किसी की नहीं , यही कारण है कि लोग सरकारी बैंकों में अपनी बचत पूँजी जमा करना अधिक पसंद करते हैं तो एलआईसी में अपने जीवन का बीमा कराना अधिक सुरक्षित मानते हैं। इसी लिए ऐसे संस्थान प्राईवेट वित्तीय संस्थानों से अधिक डिपाजिट लिए होते हैं , जिस बैंक की जितनी अधिक “साख” उस बैंक के पास उतना डिपाडिट। पर अब यह साख दरक रही है , रिज़र्व बैंक आफ इंडिया और उसके द्वारा जारी करेन्सी की साख नोटबंदी ने गिरा दी तो उसके द्वारा संचालित बैंकों की खस्ता हालत की भी यही वजह थी , रिजर्व बैंक आफ इंडिया का देश की जनता के पास तो कोई विकल्प नहीं , पर नेपाल के पास विकल्प था और उसने अपने यहाँ प्रचलित भारतीय करेन्सी के ₹100 से ऊपर के नोटों को प्रतिबंधित कर दिया।

भारतीय जनता के पास ऐसा कोई विकल्प नहीं , वर्ना रिज़र्व बैंक आफ इंडिया रिज़र्व कर दी जाती। नोटबंदी के कारण बैंक एक एक करके बर्बाद हो रहे हैं , ताज़ा खबर पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक की है जो बर्बाद हो गया बै और रिज़र्व बैंक आफ़ इंडिया ने इस बैंक के खाताधारकों को अपने खाते से 6 महीने में कुल ₹1000 से ज़्यादा निकालने पर रोक लगा दी है। मुझे भरोसा है कि बैंक के 10 लाख ग्राहकों में से 50% ने केन्द्र की नयी सरकार हिन्दुत्व का एजेन्डा लागू करने के लिए फिर से चुना होगा तो उनको इस वित्तीय नुकसान से कोई अधिक तकलीफ नहीं होगी।

मार्च 2019 में बैंक की बैलेंस शीट में ₹11,617 करोड़ डिपाजिट और ₹8383 करोड़ एडवांस है थे , इस बैंक के एमपी और दिल्ली समेत 6 राज्यों में ब्रांच हैं। कोई बात नहीं , पैसा फ्रीज़ हुआ पर हिन्दूराष्ट्र बनने की उम्मीदें तो ज़िन्दा हैं।

आप यकीन मानिये कि बैंको का एक दूसरे में विलय सरकार नहीं करती तो कम से कम 6 बैंक ऐसे ही डूब जाते। और इसका एक मात्र कारण है “नोटबंदी”।

नोटबंदी और नगद संचालन पर सख्ती ने लोगों को बैंकों में पैसे रखने को मजबूर कर दिया , लोग धड़ाधड़ बैंकों में पैसे जमा करने लगे , निकासी पर तरह तरह की रोक और चार्ज लगा दिया गया , और इस कारण ग्राहकों की जमा राशि पर बैंकों को ब्याज देना भारी पड़ गया , मंदी और व्यापार की खस्ताहालत ने बैंकों की कर्ज़ दे कर कमाने के कार्य को प्रभावित किया और बैंकों की हालत हो गयी “आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैय्या”। और बैंक और रिज़र्व बैंक खस्ता हो रहे हैं , इनकी साख गिर रही है। यही हालत जीवन बीमा निगम की भी है , ₹57000 करोड़ की लगी चोट से उसके पालिसी धारक भी संशंकित हैं , चारों और अफरा तफरी का माहौल है।