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प्लास्टिक मुक्त हुए मप्र के रेलवे स्टेशन, पत्तों के दोने में परोसा जा रहा खाना

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मादी के प्लास्टिक के खिलाफ अभियान का असर राज्य के रेलवे स्टेशनों पर नजर आने लगा है। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल में प्लास्टिक को ना कहते हुए पेड़ के पत्तों से बने दोने में खाना परोसा जाने लगा है। मंडल के रेलवे स्टेशनों पर यह पहल रविवार से शुरू हो चुकी है। यहां समोसा, बड़ा, भजिया, पोहा सहित तमाम तरह के खाद्य व्यंजन पत्तों से बने दोने में मिलने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अभी तक खाने के ये व्यंजन प्लास्टिक से लेकर कागज और सिंथेटिक बाउल आदि में मिला करते थे।

कहा जा रहा है कि पश्चिम रेलवे जोन के साथ ही भारतीय रेलवे में यह पहला ऐसा प्रयोग है, जब खाद्य सामग्री पत्ते से बने दोने में देना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नियम को मंडल के रतलाम, इंदौर, उज्जैन, देवास, चित्तौड़गढ़, दाहोद सहित अन्य कई स्टेशनों पर लागू किया गया है।

मंडल के डीआरएम आर. एन. सुनकर ने ट्वीट कर बताया, “मंडल के स्टेशनों पर खाद्य सामग्री देने में अब केवल पत्तों के दोने का ही उपयोग किया जाएगा। इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को रोजगार भी मिलेगा। साथ ही कागज व पॉलीथिन का उपयोग नहीं होने से पर्यावरण सुरक्षा के साथ यात्रियों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर नहीं पड़ेगा।”

रेलवे सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों स्टेशनों की सफाई के बाद एकत्रित हुए तीन हजार किलो से ज्यादा के कचरे में 50 किलो प्लास्टिक निकला था। इसके बाद ही खाद्य सामग्री परोसने में प्लास्टिक पर रोक लगाए जाने पर विचार किया गया।

डीआरएम द्वारा मंडल के सभी रेलवे स्टेशनों पर कागज और प्लास्टिक के बर्तनों में खाद्य सामग्री नहीं परोसने के निर्देश दिए गए हैं। नियम को सुनिश्चित तौर पर लागू कराने के लिए खाद्य सामग्री बेचने वाले सभी स्टॉलों पर नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही इन स्टालों की तस्वीरें भी ली जा रही हैं, ताकि यह पता चल सके कि खाद्य सामग्री देने के लिए किस चीज का इस्तेमाल हो रहा है।

पीएम मोदी से ज्यादा देश के इन राज्यों के सीएम की सैलरी

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लोकसभा में सांसदों का नेता होता है प्रधानमंत्री और किसी राज्य की विधानसभा में विधायक दल का नेता होता है मुख्यमंत्री यानी देश में जो हैसियत प्रधानमंत्री की होती है, वही एक राज्य में मुख्यमंत्री की होती है. लेकिन, आपको ताज्जुब होगा ये जानकर कि कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री भारत के प्रधानमंत्री से कहीं ज़्यादा वेतन (Salary) पाते हैं, जी हां! ढाई गुने से भी ज़्यादा तक. आइए जानें कि किन राज्यों में मुख्यमंत्रियों के वेतन के क्या आंकड़े हैं और इस वेतन की राशि के पीछे क्या कारण हैं.

प्रधानमंत्री की सैलरी में बार बार संशोधन होते रहे हैं और ताज़ा आंकड़ों के हिसाब से पीएम नरेंद्र मोदी की सैलरी 1 लाख 60 हज़ार रुपये प्रतिमाह है. लेकिन, कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों की सैलरी 4 लाख रुपये तक या उससे भी ज़्यादा है. पहले देश के विभिन्न राज्यों के सीएम की सैलरी जानें और फिर पढ़ें कि ये वेतन कैसे और किन प्रावधानों के तहत तय होता है.

सबसे ज़्यादा सैलरी तेलंगाना सीएम की
तेलंगाना राज्य के मुख्यमंत्री की सैलरी 4 लाख 10 हज़ार रुपये प्रतिमाह है. मुख्यमंत्रियों की सैलरी की लिस्ट में ये सबसे बड़ा आंकड़ा है. इसके बाद दिल्ली के सीएम का नंबर है, जिसकी सैलरी 3 लाख 90 हज़ार रुपये है. गुजरात के सीएम का वेतन 3.21 लाख रुपये प्रतिमाह है. उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों का वेतन 3 लाख रुपये प्रतिमाह से ज़्यादा है. सीएम की सैलरी के लिहाज़ से इन राज्यों को टॉप 7 कहा जा सकता है.

2 लाख रुपये से ज़्यादा और तीन लाख रुपये प्रतिमाह से कम सैलरी पाने वाले मुख्यमंत्रियों की लिस्ट में हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, गोवा, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और कर्नाटक राज्यों के सीएम शामिल हैं. सबसे कम सैलरी त्रिपुरा के सीएम को मिलती है, जो एक लाख पांच हज़ार पांच सौ रुपये प्रतिमाह है. सीएम की सैलरी जहां इससे ज़्यादा और दो लाख रुपये से कम है, उनमें ज़्यादातर उत्तर पूर्व के राज्य शामिल हैं. ओडिशा के सीएम का वेतन प्रधानमंत्री के वेतन के बराबर यानी 1.60 लाख रुपये है.

यह पूरी तरह से राज्य की व्यवस्था और राजस्व की स्थिति से जुड़ा मामला है. देश के संविधान के आर्टिकल 164 में यह विचार है कि मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है. राज्य की विधानसभा के निर्वाचित सदस्य विधायकों और विधायक दल के नेता के वेतन की राशि को लेकर निर्णय ले सकते हैं.

और क्या कहते हैं वेतन के ये आंकड़े
अव्वल तो ये कि उत्तर पूर्व के राज्यों की आमदनी या आर्थिक हालात कमज़ोर होने का इशारा मिलता है क्योंकि उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के वेतन की राशि सबसे कम है. दूसरी बात ये कि तेलंगाना, दिल्ली और उत्तर प्रदेश ऐसे राज्य हैं, जहां मुख्यमंत्रियों का वेतन राज्यपालों की तुलना में ज़्यादा है. यह इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि देश के प्रधानमंत्री की तुलना में राष्ट्रपति का वेतन ज़्यादा होता है. वर्तमान में देश के राष्ट्रपति का वेतन 5 लाख प्रतिमाह है और भत्ते अलग हैं.

मरीज को MRI मशीन में डालकर भूल गए डॉक्टर, बेल्ट तोड़कर बाहर आया पेशेंट

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 यहां के जनरल अस्पताल में लापरवाही से भरा हैरानीजनक मामला सामने आया है. मामला ये है कि सेक्टर 6 स्थित अस्पताल में एमआरआई एंड सिटी स्कैन सेंटर है. इस सेंटर में रविवार को 59 वर्षीय राम मेहर अपनी एमआरआई करवाने आए थे. राम मेहर ने बताया कि डॉक्टरों ने उसे एमआरआई मशीन में तो डाल दिया लेकिन बाहर निकालना भूल गए. बड़ी मुश्किल से बेल्ट तोड़कर वह बाहर आए. राम मेहर ने बताया कि अगर वह थोड़ी देर और मशीन में रहते तो उनकी जान जा सकती थी. 

सिटी स्कैन सेंटर के इंचार्ज ने बताया कि टेक्नीशियन ने बुजुर्ग को हिलने-डुलने से मना किया था. इसके साथ ही टेक्नीशियन दूसरे सिस्टम में नोट्स चढ़ा रहा था, जब 1 मिनट रह गया था तो टेक्नीशियन ने देखा मरीज खुद ही आधा बाहर आ गया. इसके बाद टेक्नीशियन ने ही मरीज को बाहर निकाला. इंचार्ज के मुताबिक स्कैनिंग 20 मिनट की थी लेकिन 15 मिनट के बाद ही मरीज को खुद ही घबराहट महसूस होने लगी थी. पीडि़त ने सरकारी कर्मचारियों की गंभीर लापरवाही की शिकायत हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, डीजी हेल्थ डॉ. सूरजभान कंबोज, सेक्टर-5 पुलिस थाने में दी है, जिसमें उसने यह भी लिखा कि यदि मैं 30 सेकंड और बाहर नहीं आता तो मेरी मौत निश्चित थी. 

कुएं में तैरती दिखीं पांच लाशें, चार बेट‍ियों के साथ मां की मौत

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महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के मालेगांव के पास एक कुएं में 5 लाशें तैरते हुए नजर आईं जिनमें मां और उसकी 4 बेटियां शाम‍िल हैं. द‍िल दहलाने वाली यह सनसनीखेज घटना सोमवार सुबह की है.

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची. इस मामले के सामने आने के बाद पूरे इलाके में खलबली मची हुई है. सभी मृतक कल घर से खेत में जाने के लिए गए थे जो शाम होने पर भी वापस नहीं लौटे थे.

पुल‍िस ने मामला दर्ज कर लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. पोस्टमार्टम के बाद पता चलेगा कि यह हत्या है या सामूहिक आत्महत्या.

उल्लेखनीय है कि बेटियों के पिता ने भी 1 महीने पहले ही आत्महत्या की है लेकिन आत्महत्या क्यों की यह स्पष्ट नहीं हो सका. गांव वालों से बातचीत में सामने आ रहा है क‍ि गरीबी के चलते पूरे पर‍िवार ने यह कदम उठाया है.

मरने वालों में मां उज्वला ढोके (35 वर्ष) और उनकी चार बेट‍ियां वैष्णवी ढोके (9 वर्ष), दुर्गा ढोके (7 वर्ष), आरुषी ढोके (4 वर्ष) और पल्लवी ढोके (1 वर्ष) हैं.

हनी ट्रैप के जाल में फंसे अफसरों ने करोड़ों के दिलाए ठेके, भोपाल के रसूखदार से लेकर होटल संचालक भी शामिल

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हनी ट्रैप केस की जांच व्यापक स्तर पर जारी है। जिसमें घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। हनी ट्रैप गैंग के तार उज्जैन से भी बड़े स्तर पर जुड़े रहे हैं। सोमवार को तीन-तीन जिलों में इस केस की आरोपी महिला अनीता दयाल व युवती मोनिका यादव का इंतजार रहा। क्योंकि इसकी जानकारी दोपहर होने तक लीक हो गई थी। देर शाम इंदौर पुलिस टीम मोनिका को लेकर भोपाल आ गई है। पुलिस टीम छतरपुर नहीं, लेकिन आरती के घर की निगरानी लगातार की जा रही है। इधर, इंदौर वाली टीम भोपाल से राजगढ़ चली गई। जांच में सामने आया कि हनी ट्रैप गैंग की युवतियां उज्जैन के इंदौर रोड स्थित एक अलीशान होटल में अपने शिकार को लेकर जाती थीं। सूत्रों का कहना है कि इंदौर में पकड़ी गईं युवतियों के ताल्लुकात उज्जैन में रह एक पूर्व अफसर से रहे हैं। जिसने बाद इन युवतियों ने वल्लभ भवन तक अपनी पहुंच बनाई। उज्जैन लोकायुक्त में पदस्थ रहे एक बड़े अधिकारी को भी हनी ट्रैप में फांसे जाने की बात सामने आ रही है। यहीं नहीं इन लोगों के लिए उज्जैन का यह आलीशान होटल बेहद सुरक्षित माना जाता रहा है। हनी ट्रैप की इस गैंग ने एक बार नहीं बल्कि कई बार इस होटल के शानदार कमरों का उपयोग किया है। गैंग के इस जाल में फंसे बड़े अधिकिारयों और नेताओं के माध्यम से सिंहस्थ में दिए जाने वाले करोड़ों के ठेके में भी अपने चहेतों को दिलाए गए। कहा जा रहा है कि भोपाल के रसूखदार अधिकारियों ने फंसने के बाद हनी ट्रेप गैंग से अपना पीछा छुड़ाने की कोशिश में ठेकेदारों को करोड़ों रुपए के ठेके दिलवाए।

भोपाल के रसूखदार भी शामिल :

बताया तो यह भी जा रहा है कि भोपाल के कुछ रसूखदार भी इस गैंग के जाल में फंसकर होटल के बगीचे तक और फिर कमरों तक पहुंचे हैं। इस पूरे मामले की जांच में जुटी भोपाल व इंदौर पुलिस इस महत्वपूर्ण तथ्य को जानबूझकर दरकिनार कर रही है। सूत्र बताते हैं कि एक सुंदरी तो तत्कालीन मंत्री से मिलने के लिए उज्जैन के सर्किट हाऊस तक भी पहुंच गई थी। कहा जाता है कि नेता ने अपने सहूलियत के लिए सर्किट हाऊस पर कभी भी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगने दिए। ताकि उनसे मिलने आने वाले लोगों के बारे में कोई भी जानकारी रिकार्ड के रूप में उपलब्ध न हो सके।

होटल संचालक भी शामिल :

उज्जैन इंदौर रोड स्थित होटल संचालक इस गंदे धंधे में पहले भी शामिल रह चुका है। हांलाकि, कई सारे बिंदुओं के सामने आने के बाद भी इंदौर पुलिस होटल संचालक के बारे ज्यादा जानकारी नहीं दे रही है। सत्रों का कहना है कि धार्मिक नगरी के रूप में वख्यिात उज्जैन पर इस पूरे मामले का कोई प्रभाव न पड़े इसलिए पुलिस पक्के सबूत के बाद ही कुछ खुलासा करेगी। बहरहाल गैंग से पूछताछ के बाद होटल में गतिविधियां नहीं हो रही है। होटल पर पुलिस नजर बनाए हुए है।

श्वेता मंत्रियों से काम कराने का लेने लगी ठेका

इंदौर जेल में बंद सागर की श्वेता जैन, जो भोपाल में रह रही थी, की हकीकत मंत्रियों व अधिकारियों को फांसने की रही है। श्वेता ने कम समय में ही अपने रसूख और प्रभाव से सागर में अपनी अलग पहचान बना ली और भाजपा पार्टी के कई कार्यक्रमों में यह तत्कालीन नेत्री सबसे आगे रहती थी। मंच पर मंत्रियों के साथ बैठना उठना पार्टी की बैठकों मेंं जाना, मीडिया की सुर्खियों में रहने वाली श्वेता ने प्रशासनिक अधिकारियों को भी अपने पाले में फांसने के प्रयास करना शुरू कर दिए और इसके लिए श्वेता ने विभागीय अधिकारियों के माध्यम से अपने काम निकालना शुरू किया।

सागर कलेक्टर के बंगले पर जाना आम बात

मंत्री एवं विधायकों से जुड़े होने के कारण प्रशासन में भी श्रवेता की अच्छी पकड़ होने लगी थी। कलेक्टर, कमश्निर, एसपी, आईजी, जैसे अधिकारी भी श्वेता जैन द्वारा बताए गए काम के लिए न नहीं कर पाते थे। सागर में पदस्थ कलेक्टर और श्वेता की मेल मुलाकात इतनी बढ़ गई कि कलेक्टर के बंगले पर श्वेता का आना-जाना आम बात थी। गेट पर न कोई रोक सकता था और न कोई सवाल कर सकता था। कलेक्टर के खाने-पीने के शौक से लेकर घूमने, घर की सजावट, कलेक्टर ऑफिस का डेकोरेशन जैसे मामले भी श्वेता जैन ही तय करती थी।

कलेक्टर की पत्नी ने पकड़ा फिर कराए कई बड़े काम…

सागर में एक दिन कलेक्टर बंगले पर ही साहब और श्वेता जैन की नजदीकियों को कलेक्टर की पत्नी ने पकड़ लिया तो दोनों के बीच विवाद हुआ। यहां तक कि कलेक्टर की पत्नी ने घर छोड़ देने की धमकी दी। श्वेता को यह सब नागवार गुजरा और यहां से श्वेता ने तत्कालीन कलेक्टर के ऊपर दबाव डालकर न केवल अपने एनजीओ के लिए कई काम स्वीकृत करा लिए बल्कि प्रशासनिक स्तर पर कुछ कर्मचारियों के ट्रांसफर भी कराए और अपने एनजीओ के लिए कलेक्टर से मोटा फंड भी हासिल किया।

सावधान ! यदि एक से अधिक बैंक में है एकाउंट तो आ गई है बुरी खबर,देना होगा एक्स्ट्रा शुल्क

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आज के समय में कई लोगों के एक से अधिक बैंकों में एकाउंट होता है.इसके कई कारण है जैसे की एक शहर से दूसरे शहर में नौकरी या व्यवसाय की आवश्यकता में बदलाव के कारण दो या अधिक बैंक खाते खुले जाते है.जिसके कारण कई लोगों में एक से अधिक बैंक खाते में पैसा लगाना अधिक सुविधाजनक होता है.यह एटीएम लेन-देन के लिए आसान हो जाता है.इस वजह से लोगों का मानना है,की एक से अधिक बैंक खाते होना फायदेमंद है.लेकिन अब यह चीज आपको काफी ज्यादा मुश्किल में डाल सकती है.
हालांकि कोई भी बैंक दिवालिया होने पर आपके जमा राशि 1 लाख रूपये तक की गारंटी देता है.इस मामले में लोग अधिकांश बचत खातों में एक छोटी जमा राशि रखना पसंद करते है.लेकिन बहुत कम लोग को पता है की कई बैंक न्यूनतम राशि रखने पर मासिक रूप से चार्ज लगाते है जिसके कारण हर महीने बैंक में जमा बैलेंस से कुछ राशि काट ली जाती है. इसे बैंक शुल्क के रूप में वसूल करता है,क्योंकि उसके नियम अनुसार बैलेंस खाते में नहीं है.दरअसल यह सभी नियम केवल सेविंग या बचत खाते पर लागू होता है,लेकिन जिन खातों का ग्राहक इस्तेमाल नहीं करता उसमें न्यूनतम राशि नहीं रखता.जिसके लिए उसे शुल्क देना पड़ता है और काफी समय तक ऐसा होने से बड़ा नुकसान झेलना पड़ता है.
एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ समय बाद सभी प्राइवेट और सरकारी बैंक अपने उन सभी खातों पर जारी शुल्क को बढ़ा सकते है,जिसका ग्राहक इस्तेमाल नहीं करता.इस लिए यदि आप ने भी कई बैंकों में खाता खोल रखा है तो उसके नियम अनुसार उसमें न्यूनतम राशि जमा रखिए या फिर उसे बंद कर दें अन्यथा उसका बुरा परिणाम भुगतना पड़ सकता है.

थॉमस कुक हुई दिवालिया, दुनियाभर में 6 लाख पर्यटक फंसे

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यात्रा सेवायें उपलब्ध कराने वाली ब्रिटेन की पुरानी कंपनी थॉमसकुक सोमवार को कर्ज बोझ सहते सहते आखिर दिवालिया हो गई। इसके साथ ही उसकी बुकिंग वाले छह लाख के करीब पर्यटक दुनियाभर में जहां तहां फंस गये। स्थिति की गंभीरता को देखते हुये ब्रिटेन सरकार ने पर्यटकों को वापस लाने का बड़ा अभियान शुरू किया है। ब्रिटेन का दूसरे विश्व युद्ध के बाद इस तरह का यह सबसे बड़ा स्वदेश वापसी अभियान होगा। ब्रिटेन की 178 साल पुरानी यह कंपनी पिछले कुछ सालों से कर्ज बोझ तले दबने लगी थी। कंपनी ने ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने को लेकर जारी कश्मकश को इस स्थिति के लिये जिम्मेदार बताया। उसकी बुकिंग कम होने लगी थी और यही वजह है कि उसे निजी निवेशकों से 20 करोड़ पाउंड जुटाने में भी असफलता हाथ लगी।

कंपनी का 2007 का विलय सौदा उसके लिये घातक रहा, इसके बाद से ही वह लगातार वित्तीय संकट से जूझती रही और आखिरकार सोमवार को उसने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया। इसके बाद कंपनी के छह लाख के करीब पर्यटक दुनियाभर में जहां तहां फंस गये और उसके 22 हजार कर्मचारी अपनी आजीविका खो बैठे।

ब्रिटेन सरकार ने छुट्टियां बिताने बाहर गये डेढ लाख नागरिकों को स्वदेश लाने के लिये आपात योजना पर काम शुरू किया है। उसने बुल्गारिया, क्यूबा, तुर्की और अमेरिका गये लोगों को वापस लाने के लिये विमानों की व्यवस्था की है। ब्रिटेन के परिवहन मंत्री ग्रांट शाप्स ने कहा कि सरकार ने और ब्रिटेन के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने थॉमस कुक के ग्राहकों को स्वदेश लाने के लिये कई विमानों को किराये पर लिया है। उन्होंने कहा, ”जो भी लागे बाहर हैं और अगले दो सप्ताह के भीतर उन्हें लौटना है, उन्हें पूरी कोशिश रहेगी की वापस आने की बुकिंग तिथि के आसपास ही स्वदेश लाने की व्यवस्था की जायेगी।”

थॉमसकुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीटर फेंकहौउजर ने कहा, ”यह मेरे और कंपनी बोर्ड के बाकी सदस्यों के लिये गहरे खेद का विषय है कि हम सफल नहीं हो पाये। यह कंपनी के लिये बहुत बुरा दिन है।” कंपनी यात्रा संचालक होने के साथ ही एयरलाइन भी चलाती है। दिवालिया होने के साथ ही उसके विमान खड़े हो गये और ट्रैवल एजेंसी बंद हो गई। उसके दुनियाभर में फैले 22,000 कर्मचारी नौकरी गंवा बैठे। इनमें से 9,000 कम्रचारी अकेले ब्रिटेन में हैं।

भारत में गोवा की ट्रैवल एण्ड टूरिज्म एसोसियेसन ने पीटीआई-भाषा को बताया कि थॉमस कुक के दिवालिया होने से गोवा में ब्रिटेन से आने वाले पर्यटकों की भारी कमी हो सकती है। एसोसियेसन के अध्यक्ष साविओ मेसिह ने कहा, ”पिछले पर्यटन सत्र के दौरान ब्रिटेन से 30,000 पर्यटक गोवा आये थे। इनमें ज्यादातर थॉमस कुक की बुकिंग के जरिये ही गोवा पहुंचे। कंपनी सप्ताह में सातों दिन उड़ाने संचालित करती थी जिसमें प्रत्येक विमान में 300 यात्री होते हैं।”

उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के पर्यटक लंबे समय तक गोवा में रुकते हैं। ये पर्यटक औसतन 14 रातें गोवा में बिताते हैं। थॉमक कुक के दिवालिया होने के बाद ब्रिटेन के पर्यटकों की संख्या में 50 प्रतिशत तक कमी आ सकती है क्योंकि दूसरी एयरलाइनों में इतने यात्रियों को जगह मिलनी मुश्किल है।

MP हनी ट्रैप के लपेटे में कई BJP नेता, हाईकमान ने मांगी रिपोर्ट

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मध्य प्रदेश के बहुचर्चित ‘हनी ट्रैप’ मामले ने सूबे की सियासत को हिलाकर रख दिया है. इस मामले में बीजेपी और आरएसएस से जुड़े कई नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं. ऐसे में बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हनी ट्रैप मामले में अपने नेताओं की कथित संलिप्तता पर मध्य प्रदेश पार्टी इकाई से रिपोर्ट मांगी है.

बीजेपी सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने इस मामले को संजीदगी से लेते हुए अपने नेताओं की संलिप्तता पर प्रदेश यूनिट से रिपोर्ट मांगी है. बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने मीडिया में आई रिपोर्ट पर संज्ञान लिया है, जिसमें बीजेपी और आरएसएस नेताओं को हनी ट्रैप के जरिए ब्लैक मेल करने का मामला सामने आया है. इस मामले में मध्य प्रदेश पुलिस ने 18 सितंबर को हनी ट्रैप मामले में शामिल लोगों की गिरफ्तार किया है.

मध्य प्रदेश के राजगढ़, छतरपुर और भोपाल की पांच महिलाओं ने मिलकर हनी ट्रैप का संगठित रैकेट तैयार किया था. इस रैकेट के जरिए वो राजनेताओं और सीनियर अफसरों को हनी ट्रैप में फंसाने का काम करती थीं. आरोपियों ने कई राजनेताओं और अफसरों की सीडी बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया और करोड़ों रुपए ऐंठ लिए.

एमपी पुलिस के एटीएस और इंदौर सिटी क्राइम ब्रांच ने 18 और 19 सितंबर की रात को एक संयुक्त ऑपरेशन के जरिए हनी ट्रैप में शामिल पांच महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया था, जिनके पास से कई वीडियो बरामद हुए हैं, जिनमें कई घंटों की वीडियो रिकॉर्ड हैं. साथ ही उनके पास से 14 लाख नकद और स्पाई कैमरे भी मिले हैं.

सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी दल बीजेपी दोनों एक-दूसरे पर हनी ट्रैप गैंग द्वारा उनके नेताओं की रिकर्डिंग के आरोप लगा रहे हैं. ऐसे में मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने इंदौर में दर्ज किए गए हनी ट्रैप (मोहपाश) मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन 23 सितंबर को कर दिया है.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हनी ट्रैप में शामिल पांच महिलाओं से जो वीडियो राज्य पुलिस ने हासिल किए हैं, उसमें बीजेपी और आरएसएस नेताओं के कथित वीडियो हैं. यही वजह है कि बीजेपी नेतृत्व ने इस मामले को गंभीरता से लिया है.

एसआईटी को अब यह पता लगाने का काम सौंपा गया है कि हनी ट्रैप के जरिए कितने नेता ब्लैकमेल किए गए हैं. इस मामले में लड़कियां शामिल हैं और कितना नकद भुगतान नेताओं के द्वारा किया गया है. यह गिरोह नेताओं के वीडियो बनाकर उनसे करोड़ रुपए की मांग करते थे. ऐसे में कई लोगों को ब्लैकमेल किया गया और कई गिरोह ने काफी पैसे वसूल किए हैं. इस जांच में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने इंडिया टुडे को बताया कि एसआईटी यह भी पता करेगी कि पैसे का भुगतान कैसे किए गया. नकद में किया गया है तो पैसे के स्रोत पर जांच की जाएगी.

एसआईटी सबसे पहले बीजेपी के पूर्व सांसद के मामले में जांच कर रही है, जिनसे हनी ट्रैप गिरोह ने कथित रूप से ब्लैकमेल के जरिए एक करोड़ रुपये लिए हैं. एसआईटी जल्द ही पूर्व बीजेपी सांसद से पूछताछ कर सकती है. जांच में जुटे एक सूत्र ने बताया कि हनी ट्रैप गिरोह के सदस्यों से पूछताछ में पुलिस ने पाया कि भोपाल के एक पत्रकार के माध्यम से पैसे का भुगतान किया गया था.

कैश निकालने के लिए SBI Cards की है लिमिट, भूल गए तो देना होगा चार्ज

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 देश के सबसे बड़े बैंक यानी भारतीय स्टेट बैंक (SBI) अपने अलग-अगल डेबिट कार्ड होल्डर्स के लिए ATM से कैश निकालने की सीमा तय करता है. पिछले साल नवंबर माह में ही इस बैंक ने क्लासिक और मैस्ट्रो कार्डहोल्डर्स के लिए इस लिमिट को घटाकर आधा कर दिया था. SBI Cards के वैरिएंट के आधार पर कैश निकालने की लिमिट तय है. SB I अपने ग्राहकों के लिए एक माह में 8 से 10 बार फ्री ट्रांजैक्शन करने का मौका देता है. इससे अधिक ट्रांजैक्शन पर बैंक अपने ग्राहकों से एक तय चार्ज वसूलता है. बैंक ने जानकारी दी है कि 1 अक्टूबर के बाद कम बैलेंस की वजह से ट्रांजैक्शन फेल होने पर और एटीएम से कार्डलेस कैश निकालने पर भी फीस वसूलेगा.

अभी SBI के खाताधारकों को मेट्रो सिटी में 8 फ्री एटीएम ट्रांजैक्शन की सुविधा हर महीने मिलती है. इस में 5 ट्रांजैक्शन एसबीआई एटीएम और 3 ट्रांजैक्शन दूसरे बैंकों के एटीएम से कर सकते हैं. वहीं नॉन-मेट्रो सिटी के खाताधारक के लिए यह लिमिट 10 फ्री ट्रांजैक्शन प्रति महीने है. इस लिमिट के पार होने पर 5 रुपए (GST प्लस) से लेकर 20 रुपए (GST प्लस) का चार्ज देना पड़ता है.

25,000 रुपये का मंथली एवरेज बैलेंस बरकरार रखने वाले एसबीआई खाताधाकरों को स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया ग्रुप के किसी भी एटीएम से प्रति महीने 10 फ्री ट्रांजैक्‍शंस की सुविधा मिलती है.

SBI क्लासिक और मैस्ट्रो डेबिट कार्ड: एसबीआई के कार्ड्स में से यह सबसे पॉपलुर कार्ड्स हैं. इस कार्ड से ​न्यूनतम एटीएम निकासी की सीमा 100 रुपये और अधिकतम निकासी की सीमा 20,000 रुपये है.

SBI ग्लोबल इंटरनेशनल डेबिट कार्ड: एसबीआई के इस गलोबल इंटरनेशनल डेबिट कार्ड की मदद से आप दुनिया में कहीं भी अपना अकाउंट एक्सेस कर सकते हैं. इस कार्ड से ​न्यूनतम एटीएम निकासी की सीमा 100 रुपये और अधिकतम निकासी की सीमा 40,000 रुपये है.

SBI गोल्ड इंटरनेशनल डेबिट कार्ड: एसबीआई के गोल्ड एंड इंटरनेशनल डेबिट कार्ड का इस्तेमाल सामान खरीदने और ऑनलाइन पेमेंट के ​लिए इस्तेमाल किया जाता है. इससे भी आप दुनियाभर में कहीं से नकदी की निकासी कर सकते हैं. इस कार्ड से ​न्यूनतम एटीएम निकासी की सीमा 100 रुपये और अधिकतम निकासी की सीमा 50,000 रुपये है.

SBI प्लेटिनम इंटरनेशनल कार्ड: इस कार्ड की मदद से आप ऑनलाइन पेमेंट के साथ—साथ नकदी निकासी भी कर सकते हैं. इस कार्ड से ​न्यूनतम एटीएम निकासी की सीमा 100 रुपये और अधिकतम निकासी की सीमा 1,00,000 रुपये है.

दुनिया के 5 सबसे कम जनसंख्या वाले देश, एक देश में रहते हैं सिर्फ 27 लोग

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5. Saint Kitts and Nevis

यह देश कैरीबियन आईलैंड समूह का हिस्सा है। 52 हजार की जनसंख्या वाला यह छोटा सा देश बहुत पिछड़ा हुआ है। यहां की गवर्नमेंट के पास धन जुटाने का कोई तरीका नहीं है। इसलिए यह देश पैसों के बदले नागरिकता देता है।

4. मोनाको

मोनाको एक अति विकसित देश है। यहां रहना बहुत महंगा पड़ता है इसलिए यहां पर सिर्फ करोड़पति लोग ही अपना घर बनाते हैं।

3. पलाउ

यहां द्वितीय विश्व युद्ध का भयानक युद्ध लड़ा गया था। यह देश अनगिनत छोटे-छोटे द्वीपों को मिलाकर बना है यहां के ज्यादातर द्वीप विरान है और यहां की जनसंख्या सिर्फ 21000 है।

2. नाउरू

यह देश इतना पिछड़ा हुआ है कि यहां सड़के भी नहीं है। इस देश के ज्यादातर लोग भयंकर मोटापे के शिकार हैं। यहां की जनसंख्या 9500 है।

1. वेटिकन सिटी

ईसाइयों की धार्मिक नगरी के रूप में मशहूर वेटिकन सिटी सिर्फ 1000 लोगों का घर है। यहां पर अपराध ना के बराबर होते हैं।

दुनिया में कुछ ऐसे देश भी हैं जिन्हें बाकी दुनिया से मान्यता नहीं मिल पाई है। परंतु यह अपने आप को एक पृथक देश मानते हैं। इनमें सबसे मशहूर और कम जनसंख्या वाले देश का नाम The Principality ofSealand है। यह एक पुराना ऑयल रिग है जहां से पहले कच्चा तेल निकाला जाता है। बाद में ब्रिटेन की सरकार ने इस जगह को एक अमीर व्यक्ति को बेच दिया। इस जगह को खरीदने के बाद इस अमीर व्यक्ति ने इस जगह को एक अलग देश घोषित कर दिया। हालांकि दुनिया ने इसे अभी तक मान्यता नहीं दी है। आप इसकी वेबसाइट पर जाकर नागरिकता खरीद सकते हैं। फिलहाल कुल 27 लोगों ने इस देश की नागरिकता खरीदी है।