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अफ्रीका के सीमॉन और कैथ को पसंद आया छत्तीसगढ़ का मुनगा

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राजधानी रायपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में देश और विदेश के लोग छत्तीगढ़ पहुंचे। यहां की उन्हें आबोहवा खूब पसंद आई। आने वाले सभी मेहमानों का छत्तीसगढ़ की परंपरा के अनुसार स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि हमारी स्मृति में यह स्वागत हमेशा रहेगा। वहीं यहां के खानपान ने उन्हें काफी प्रभावित किया। इसमें घाना अफ्रीका से आए सीमॉन बोके और कैथ कोलिंग वूड विलियम का कहना है कि वे पहली बार छत्तीसगढ़ आए हैं। उन्हें यहां के लोगों की आत्मीयता व स्वागत से बहुत खुशी हुई। वहीं यहां का मुनगा काफी भाया। उनका कहना है कि इस तरह के आयोजन से कृषि उत्पादों को देखने समझने और उसे अपनाने का अवसर मिलता है। यहा मोरिंगा (मुनगा) की कई प्रजातियां देखने को मिलीं। मुनगा में औषधीय गुण औश्र आयरन की मात्रा अधिक है। इसकी अलग-अलग किस्मों का अपने देश में उत्पादन कर पाउडर, बिस्किट,चॉकलेट के रूप में तथा अन्य खाद्य पदार्थों के साथ मिश्रण कर जनसामान्य को उपलब्ध कराने की दिशा में हम योजना बना रहे हैं। यहां के भूरे चावल में भी पौष्टिकता है। छत्तीसगढ़ के अन्य कृषि उत्पादों को भी हमने ध्यान में रखा है। अपने देश जाकर वहां की टीम के साथ चर्चा करने के बाद यहां के उत्पादों को क्रय करने की दिशा में कदम उठाएंगे।

सीएम भूपेश बघेल ने रमन सिंह को बताया घोटालों का स्क्रिप्ट राइटर

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को घोटालों का स्क्रिप्ट राइटर बताया। राजधानी के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 15 साल में जितने घोटाले हुए हैं, सभी की स्क्रिप्ट डॉ. रमन सिंह ने लिखी है, जो अब सामने आ रहा है। नान मामले ने नेता प्रतिपक्ष कोर्ट में पीआइएल लगा देते हैं। हम गंभीर मामलों में जांच आगे बढ़ाते हैं तो कोर्ट चले जाते हैं। ये सब जांच को रोकने की मांग कर रहे है।

डॉ. रमन के बदलापुर के आरोपों पर सीएम भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए कहा कि मैं रमन सिंह को चुनौती देता हूं, वो साबित कर दें कि मैं बदलापुर की राजनीति कर रहा हूं। जिस मामले में उन्हें लगता है कि उनके कुनबे पर कार्रवाई हो सकती है, उसे वो बदलापुर कहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतागढ़ व नान घोटाले की जांच बढ़ने के बाद उनके मन में डर बैठा हुआ है। रमन व उनके लोगों पर जिन मामलों में जांच चल रही है, वह उन्हीं के कार्यकाल की है।

मोटर व्हीकल एक्ट केंद्र का तुगलकी फैसला

मोटर व्हीकल एक्ट केंद्र सरकार का तुगलकी फैसला है। सड़क पर चालान जमा होगा तो राज्य के खाते में जाएगा, कोर्ट में जमा होगा तो केंद्र के खाते में जाएगा। यह कैसा निर्णय है। इस पर पूरे देश में चर्चा होनी चाहिए।

पहली बार किसी राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बनाया

कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के सवाल पर बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़, झारखंड व उत्तराखंड राज्यों को अस्तित्व में लाने से पहले मध्यप्रदेश, बिहार एवं उत्तरप्रदेश से अलग राज्य के गठन के लिए विधेयक पारित हुआ था। कश्मीर में ऐसा कोई विधेयक पारित नहीं करवाया गया। पहली बार ऐसा हुआ कि किसी राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। कश्मीर में इस समय लोग बंधक बने हुए हैं। जो भी फैसले हो रहे हैं, एकतरफा हो रहे हैं।

छत्तीसगढ़ : ‘एकलव्य’ के वंशजों का नहीं बन रहा जाति प्रमाण पत्र

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मरवाही ब्लाक में बड़ी संख्या में पंडो जनजाति के लोग शासन की योजनाओं से वंचित हो रहे हैं। मिसल नहीं होने से उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। लापरवाही का आलम यह है कि जानकारी के बाद भी अधिकारी सुध नहीं ले रहे है। मरवाही के वनांचल व दूरस्थ ग्राम पंचायत सेमरदरी में एक टोला है, बगैह टोला जहां पंडो समुदाय रहता है। इनका कहना है, यह कई पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं। सरकार द्वारा इनके लिए स्कूल, पानी व आंगनबाडी जैसी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना व शौचालय भी देखने को मिल जाता है। घरों में आज भी धनुष बाण रखे जाते हैं,यहां भी कहते हैं,हम धनुष बाण में कभी अपने अंगूठे का प्रयोग नहीं करते हम एकलव्य के वंशज हैं, और एकलव्य ने गुरु द्रोण को अपना अंगूठा गुरु दक्षिणा में दिया था। यह लोग शिक्षित हो रहे हैं,पुरातन से आधुनिकता की ओर बढ़ने की हर एक कोशिश कर रहे हैं।

यहां रहने वाले पंडो समुदाय की एक विकट समस्या यह है, कि उनके पास मिसल नहीं होने के कारण जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा, जो कुछ दूर बाद इनके बढ़ते कदम रोक देता है। इन्हें अब उम्मीद है, कि जाति प्रमाण पत्र सरलीकरण होने के बाद इनके प्रमाण पत्र बनाने का मामला प्रशासन गंभीरता से लेगा। क्योंकि धनुष से शुरू हुई सफर कलम तक पहुंचने को तैयार है।

सरकारी योजनाओं से वंचित

बगैहा के धनी पंडो का कहना जाति प्रमाण पत्र के लिए पहले हम प्रयास कर चुके हैं, पर जमा होने के बाद नहीं बना। हमारे पास मिशल भी नहीं है। तीन बार प्रयास किए। मंगलसिंह एवं घासीराम ने कहा कि हमारे पास मिसल नहीं इसलिए जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है।

कौन है पंडो जनजाति

छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजातियों का एक विशेष जाति समुदाय पंडो जिसे राज्य शासन द्वारा वर्ष 2000-03 में विशेष पिछड़ी जनजातियों के तुल्य मानते हुए,सूरजपुर जिले में पृथक अभिकरण गठित किया गया। इनका विस्तार सूरजपुर सरगुजा बलरामपुर में है, जो इनका मूल निवास है।

इनके अनुसार वर्षों पहले घुमंतू व खानाबदोश होना, इन्हें जगह जगह स्थापित करने की एक बड़ी वजह है। अपने मूल स्थान को छोड़ अन्य जगहों पर रुकने से तब कोई समस्या तो नहीं आई। पर अब कुछ समस्याओं से इन्हें रूबरू होना पड़ रहा। पूर्व में शिकार व जंगलों पर निर्भर यह जाति समुदाय, शिक्षा व आधुनिकता की ओर अग्रसर है। जहां कुछ समस्याएं इन्हें आगे बढ़ने से रोक रही।

पंडो जनजाति के लोग पहले इतना पढ़े-लिखे नहीं थे, अब पढ़ लिख रहे हैं, अब जाति प्रमाण पत्र न होने की वजह से सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं से वंचित हो जाते हैं। – प्रताप सिंह भानू ,सेमरी सरपंच

इस विशेष पिछड़ी जनजाति का जाति प्रमाण पत्र ग्राम सभा के माध्यम से बन जाता है। तहसीलदार को कहकर मामले में संज्ञान लेंगे। – डिकेश पटेल, एसडीएम

रेलवे भी हुआ ईको-फ्रेंडली, यहां पत्तों के दोने में मिल रहा खाने-पीने का सामान

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मध्य प्रदेश के रतलाम मंडल में रेलवे ने पर्यावरण को बढ़ावा देने, प्लास्टिक के उपयोग को रोकने और यात्रियों के स्वास्थ्य को लेकर स्टेशन की खानपान यूनिटों पर कागज या सिंथेटिक बाउल के बजाय पत्तों से बने दोने का उपयोग शुरू किया है। स्टेशनों के स्टॉल, ट्रॉली या अन्य यूनिट पर अब खाद्य सामग्रियां पत्तों से बने दोने में दी जाएगी। रविवार से मंडल स्तर पर शुरुआत कर इसका उपयोग अनिवार्य भी कर दिया गया है।

अधिकारियों का दावा है कि भारतीय रेलवे और पश्चिम रेलवे जोन स्तर पर इस तरह का यह पहला प्रयोग है। इसका डीआरएम ने ट्वीट भी किया तो दर्जनों कमेंट भी आए।

मंडल के रेलवे स्टेशनों पर स्टॉलों से खानपान सामग्री का उपयोग होने के बाद कचरे में बड़ी मात्रा में पॉलीथिन भी दिखाई देने लगी है। पिछले दिनों ए-1 व ए श्रेणी के स्टेशनों को छोड़कर प्रमुख स्टेशनों पर सफाई कराई गई, तब 3 हजार किलो कचरा और 50 किलो प्लास्टिक निकाला गया। इसके चलते अब पत्तों से बने दोने का उपयोग शुरू कर दिया गया है।

रतलाम, इंदौर, उज्जैन, देवास, चित्तौड़गढ़, दाहोद सहित अन्य कई स्टेशनों पर स्टॉलों पर इसके बारे में पूर्व सूचना देकर रविवार को इस आदेश को लागू कर दिया गया है। स्टेशनों पर कार्यरत सीएमआई को निर्देश देकर स्टॉलों की जांच कर फोटो भी लिए गए हैं।

एक घंटे में दर्जनों ट्वीट

रेलवे द्वारा नए प्रयोग का डीआरएम की आईडी से ट्वीट भी किया गया, तब फॉलोअर के दर्जनों ट्वीट आ गए। इसमें कमेंट कर यात्रियों ने पत्तों के दोने के उपयोग को पर्यावरण हितैषी तथा बेहतर माना। दूसरी ओर माना जा रहा है कि इस प्रयोग से दोनों का उपयोग शुरू होने से इससे जुड़े लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

रेल मंडल में नवाचार के तहत खानपान यूनिट पर खाद्य सामग्री देने में अब केवल पत्तों से बने दोनों का ही उपयोग किया जाएगा। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा। कागज व पॉलीथिन का उपयोग नहीं होने से पर्यावरण सुरक्षा के साथ यात्रियों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर नहीं पड़ेगा।

– आरएन सुनकर, डीआरएम रेल मंडल रतलाम

कभी बैकग्राउंड डांसर हुआ करते थे बॉलीवुड के ये दिग्गज, आज इंडस्ट्री पर करते हैं राज

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बॉलीवुड के ऐसे कई कलाकार है ​जिन्होंने कड़ी मेहनत करने के बाद इस इंडस्ट्री में एक सर्वश्रेष्ठ मुकाम हासिल किया है। आज हम आपको ऐसे ही बॉलीवुड सुपरस्टार्स से मिलवाने जा रहे है जिन्होंने अपने करियर की शुरूआत बतौर बैकग्राउंड डांसर की है। इस लिस्ट में ऐसे स्टार्स के नाम शामिल हैं जिस पर आप खुद यकीन नहीं कर पाएंगे।

शाहीद कपूर
ये तो आपको जानते होंगे कि शाहिद कपूर फिल्मी बैकग्राउंड से आते हैं उनके पिता खुद बॉलीवुड के शानदार अ​भिनेता है, गहर वो चाहते तो शाहिद को बड़ी फिल्मों से लॉन्च कर सकते हैं। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। फिल्म इश्क विश्क से डेब्यू करने से पहले शाहिद ने कई गानों में एक बैकग्राउंड डांसर रह चुके है। फिल्म ताल के गाने ‘कहीं आग लगे लग जाए…’ और फिल्म दिल तो पागल है के ‘मुझको हुई ना खबर’ जैसे गानो में नजर आ चुके है।

रेमो डिसूजा
इसमे कोई दो राय नहीं है कि रेमो डिसूजा आज बॉलीवुड के मशहूर कोरियोग्राफर हैं। लेकिन वो इससे पहले एक ब्रैकग्रॉउंड डांसर रह चुके है। रेमो ने अक्षय कुमार की फिल्म अफलातून और फिल्म परदेस के मेहबूबा जैसे कई गानो में काम किया है।

सुशांत सिंह राजपूत
सुशांत ने भी अपने करियर की शुरूआत बतौर बैकग्राउंड डांसर से की थी। सुशांत ने ऋतिक रोशन की फिल्म धूम 2 के ट्राइटल ट्रैक में नजर आए थे। इसके बाद उन्होनें फिल्म काय पो चे से अपने करियर की शुरूआत की।

सरोज खान
सरोज खान ने कई बॉलीवुड सुपरस्टार्स को अपने इशारों पर नचाया है। जिसमे माधुरी, ऐश्वर्या जैसे बड़े नाम है। लेकिन एक मशहूर कोरियोग्राफर बनने वाले से पहले सरोज खान ने कई फिल्मों में बैकग्राउंड डांसर के रूप में काम किया है। सरोज को अशोक कुमार और मधुबाला की फिल्म हावड़ा बिज के गाने आइए मेहरबान में देखा गया है।

फराह खान
फराह आज बॉलीवुड की एक टॉप कोरिओग्राफर और डायरेक्टर है। लेकिन उन्होंने अपने करियर के शुरूआती दौर में ब्रैकग्रॉउंड डांसर के रूप में काम किया था। उन्होंने इस दौरान कई गाने में डांस किया था जिसमे गोविंदा के साथ 1986 में रिलीज हुई फिल्म सुदा सुहागन के गीत हम हैं नौजवान में देखा गया था।

अनुराग बासु
अनुराग ने बैकग्राउंड डांसर बनने के लिए अपनी पढ़ाई तक छोड़ दी थी। उनका मानना था कि एक जूनियर आर्टिस्ट से ज्यादा पैसे एक ब्रैकग्रॉउंड डांसर को दिए जाते है।

काजल अग्रवाल
साउथ सुपरस्टार काजल ने अपने करियर की शुरूआत बैकग्राउंड डांसर के तौर पर की थी। काजल ने फिल्म ‘क्यों हो गया ना’ में ऐश्वर्या राय के साथ उलझने गाने में बैकग्रॉउंड डांसर से शुरुआत की थी। यह फिल्म वर्ष 2004 में रिलीज हुई थी।

अरशद वारसी
अरशद वारसी ने एक ब्रैकग्रॉउंड डांसर के रूप में बॉलीवुड में प्रवेश किया था फिर वह फिल्म जगत के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक बन गए। वह फिल्म ‘आग से खेलेंगे’ के हेल्प मी गाने में जीतेन्द्र और किमी कटकार के साथ दिखाई दिए।

वो 10वीं मंजिल पर बैठ बना रहा ‘TikTok’, नीचे पुलिस-दमकल हलकान

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 अहमदाबाद से बीवी के साथ ठीक-ठाक हंसता बोलता हुआ दिल्ली पहुंचा एक शख्स पुलिस और दिल्ली दमकल सेवा के लिए बबाल-ए-जान बना हुआ है। सिरफिरे शख्स का नाम संदीप उर्फ अरमान बताया जा रहा है।

सैकड़ों पुलिसकर्मी-दमकल कर्मचारी होटल की 10वीं मंजिल पर चढ़े बैठे संदीप को सकुशल नीचे उतारने की कोशिशों में रविवार शाम से ही हलकान हुए पड़े हैं। जबकि सिरदर्द बना शख्स नीचे उतरने के बजाये ऊपर से कूदकर जान देने पर उतारू है। इतना ही नहीं अजीब-ओ-गरीब हरकतें कर रहा यह शख्स अपने ‘टिकटॉक’ वीडियो बनाकर भी अपलोड किए जा रहा है। इसकी जिद है कि पत्नी द्वारा उस पर नौकरानी से लगवाए गए आरोप तुरंत वापिस लिए जाएं।

घटनास्थल दिल्ली के पश्चिमी जिले के हरि नगर थाना क्षेत्र में स्थित होटल सिग्नेचर की है। दरअसल संदीप अहमदाबाद से पत्नी के साथ होटल सिग्नेचर में आकर ठहरा था। अचानक मियां-बीवी के बीच न मालूम ऐसी कौन सी बात हुई जिसके चलते संदीप अचानक होटल में 10वीं मंजिल की छत पर जा चढ़ा और ऊपर से कूदकर जान देने की धमकियां देने लगा।

मौके पर मौजूद दिल्ली दमकल सेवा के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, “संदीप रविवार शाम से छत पर चढ़ा हुआ है। पूरी रात उसे समझाकर नीचे उतारने की कोशिशों में दमकल विभाग और दिल्ली पुलिस विभाग जुटा रहा। संदीप जिद कर रहा है कि उसकी पत्नी और सालियों ने नौकरानी से उसके ऊपर जो झूठा मुकदमा दर्ज कराया है, उसे जब तक वापिस नहीं लिया जाएगा, वो नीचे नहीं उतरेगा।”

हैरत की बात यह है कि जिसे 10वीं मंजिल से नीचे उतारने के लिए पूरी रात से (रविवार-सोमवार की रात) सैकड़ों दमकल और दिल्ली पुलिसकर्मी सकुशल बचाने के लिए सड़क पर रात भर जागकर हलकान हुए हैं, वो शख्स आराम से सबको धमका रहा है और इत्मीनान से अपने मोबाइल से टिकटॉक वीडियो अपलोड करके अपनी बातें/शर्तें/मांगें सब कुछ बता रहा है। उसकी जिद ने मगर दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग को पसीना ला दिया है।

‘बेरोजगारी, नौकरियों पर संकट, मॉब लिंचिंग, कश्मीर में तालाबंदी को छोड़कर भारत में सब अच्छा है’

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आईएनएक्स मीडिया केस में गिरफ्तार पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने हाउडी मोदी के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से तिहाड़ जेल में मुलाकात के बाद पी चिदंबरम ने ट्वीट कर लिखा कि बेरोजगारी, नौकरियों पर संकट, मॉब लिंचिंग, कश्मीर में तालाबंदी, विपक्षी नेताओं को जेल में डालना और कम वेतन छोड़कर भारत में सब अच्छा है।

विदेशी मीडिया में भी छाया हाउडी मोदी, मोजी- ट्रंप की जुगलबंदी को बताया ऐतिहासिक

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ह्यूस्टन में हाउडी मोदी कार्यक्रम में 50,000 लोगों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर संबोधित किया है। इस कार्यक्रम की छाप विदेशी मीडिया पर दिखाई दे रही है। अमेरिका और यूरोप की मीडिया ने मोदी-ट्रंप की इस जुगलबंदी को ऐतिहासिक बताया है। मीडिया ने ट्रंप के 50 हजार अमेरिकी भारतीयों को ह्यूस्टन में संबोधित करना दुनिया के दो बड़े लोकतंत्र के बीच बढ़ रहे द्विपक्षीय संबंधों को रेखांकित करना बताया है।

ये मोदी-ट्रंप का ब्रोमांस है

अमेरिका के लोगों ने पहली बार किसी रैली में इतने लोगों को एकसाथ देखा है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एकसाथ आए तो अमेरिका में रहने वाले भारतीय मोदी-मोदी के नारे लगाने लगे। जहां ट्रंप ने मोदी को वैश्विक स्तर का नेता बताया तो वहीं मोदी ने ट्रंप को अपना दोस्त कहा। इस मंच पर दोनों नेताओं ने ब्रोमांस (दो भाईयो का आपसी प्यार) दिखाया है। (यूएसए टुडे)

ये भारत-अमेरिका का त्योहार था

अखबार ने दोनों नेताओं के ह्यूस्टन में ऐतिहासिक संबोधन के घंटों बाद कहा, ‘संयुक्त रूप से साथ आना भारत-अमेरिका के बीच बढ़ रहे रणनीतिक महत्व को रेखांकित करता है। दो बड़े लोकतांत्रिक देश एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के प्रभुत्व की महत्वाकांक्षा पर लगाम लगाने के लिए अहम है।’ ट्रंप की नजर इस समुदाय के बढ़ रहे मतदाताओं पर है और वह 2016 के मुकाबले 2020 में इस समुदाय का ज्यादा से ज्यादा वोट चाहते हैं। ट्रंप भारतीय अमेरिकी लोगों से जुड़ने से मिलने वाले लाभ को समझते हैं क्योंकि इस समुदाय का योगदान 21वीं सदी में दोनों देशों की समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। (वॉल स्ट्रीट जर्नल)

ट्रंप ने ईगो छोड़कर किया मंच साझा

अमेरिका में देश की विदेश नीति को लेकर तनाव जारी है। जिसका कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईगो (घमंड) है। मगर इस बार ट्रंप ने ईगो को छोड़कर प्रधानमंत्री मोदी के साथ मंच साझा किया। दोनों के एकदूसरे की खूब तारीफ की। मोदी ने मंच से यह भी कहा- अबकी बार ट्रंप सरकार। (वाशिंगटन पोस्ट)

ट्रंप ने मोदी की रैली को बताया ऐतिहासिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली को ऐतिहासिक बताया। हाउडी मोदी किसी विदेशी नेता का अमेरिका के इतिहास में सबसे बड़ा कार्यक्रम था। 90 मिनट के कार्यक्रम में 400 परफॉर्मर्स थे। जब मोदी ने ट्रंप को गले लगाया तो पूरा स्टेडियम तालियों से गूंज उठा। इस रैली से दोनों देशों को अपने-अपने देशों में बड़ा लाभ मिलेगा।

 हजारों भारतीय अमेरिकियों ने मोदी-ट्रंप की रैली में की शिरकत तेजी से बजते संगीत के बीच प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप हाथों में हाथ डाले एनआरजी स्टेडियम में एकसाथ आए। उसी समय पूरी दुनिया को यह संदेश चला गया कि यह दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र की दोस्ती है। इस दौरान कोई ट्रेड वॉर नजर नहीं आई। लगभग 50 हजार भारतीय अमेरिकियों ने रैली में हिस्सा लिया। जैसे ही मंच से मोदी ने ट्रंप को अपना दोस्त, भारत का दोस्त और महान अमेरिकी राष्ट्रपति बताया भीड़ ने मोदी-मोदी के नारे लगाने शुरू कर दिए। (द गार्जियन) 

ट्रंप के लिए भारतीय अमेरिकी समुदाय से वोट पाना होगा मुश्किल यह रैली एक तरह से मोदी-ट्रंप को साथ लाई है। दोनों ही दक्षिण पंथी लोकवाद को गले लगाकर सत्ता में आए हैं और दोनों ने खुद को स्थापित सत्ता के खिलाफ लड़ रहे लोगों का चैंपियन दिखाया। दोनों ही मतदाताओं के बीच इस दृष्टिकोण के साथ गए कि वह अपने देश को ‘दोबारा महान’ बनाएंगे। भले ही मोदी ट्रंप के साथ हों लेकिन ट्रंप के लिए भारतीय अमेरिकी समुदाय का वोट पाना आसान नहीं होगा क्योंकि भारतीय अमेरिकी जनता डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों के लिए मतदान करते हैँ। (द गार्जियन) 

ट्रंप के लिए भारतीय अमेरिकी समुदाय से वोट पाना होगा मुश्किल यह रैली एक तरह से मोदी-ट्रंप को साथ लाई है। दोनों ही दक्षिण पंथी लोकवाद को गले लगाकर सत्ता में आए हैं और दोनों ने खुद को स्थापित सत्ता के खिलाफ लड़ रहे लोगों का चैंपियन दिखाया। दोनों ही मतदाताओं के बीच इस दृष्टिकोण के साथ गए कि वह अपने देश को ‘दोबारा महान’ बनाएंगे। भले ही मोदी ट्रंप के साथ हों लेकिन ट्रंप के लिए भारतीय अमेरिकी समुदाय का वोट पाना आसान नहीं होगा क्योंकि भारतीय अमेरिकी जनता डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों के लिए मतदान करते हैँ।

इंजीनियर ने पहले की पत्नी की हत्या, फिर 12 टुकड़ों में काटकर सेप्टिक टैंक में डाला

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देश की राजधानी नई दिल्ली में दिल को दहला देने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां एक युवक ने अपनी पत्नी की निर्मम तरीक से हत्या कर दी. युवक ने हत्या करने के बाद उसके शव को 12 टुकड़ों में काट दिया. इसके बाद उन टकड़ों को सेप्टिक टैंक में डाल कर खुद थाने पहुंच गया. उसने पुलिस के सामने अपना जुर्म भी कबुल कर लिया है. वहीं, इस घटना से आसपास के इलाके में सनसनी फैल गई है.

जानकारी के मुताबिक, वारदात आउटर दिल्ली के प्रेम नगर इलाके की है. मृतका की पहचान 30 वर्षीय सीमा के रूप में हुई है. कहा जा रहा है कि सीमा के पति 33 वर्षीय आशु हार्डवेयर इंजीनियर है. उसको अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था. उसे लगता था कि उसकी पत्नी का किसी गैर पुरुष से अवैध सम्बंध है. यही वजह है कि उसने उसकी हत्या कर दी. हत्या के बाद उसने सबसे पहले संगम विहार में अपनी सास को फोन किया. उन्होंने पहले मजाक समझा, लेकिन जब बेटी का फोन नहीं लगा तो शक हुआ. जब तक वे लोग मौके पर पहुंचे आशु थाने जा चुका था.

, थाने पहंच कर आशु ने बताया कि शनिवार रात को उसकी पत्नी से बहस हुई थी. फिर उसने गला घोंटकर सीमा की हत्या कर दी. इसके बाद चापड़ से शव के 10-12 टुकड़े कर उन्हें सेप्टिक टैंक में डाल दिया और रविवार सुबह खुद थाने पहुंच गया. थाने में पहुंचने पर पुलिस ने समझा कि कोई नशेड़ी है, लेकिन जब युवक अपनी बात पर अड़ा रहा तो पुलिस उसके घर गई. शव के टुकड़ों को बरामद करने के लिए पुलिस को घंटों मशक्कत करनी पड़ी.

10 साल से ‘मशीनी दिल’ के साथ जिन्दा है ये शख्स.

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आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताएंगे जो कि मशीनी दिल के साथ जिंदा है और वो पिछले दस सालों से । जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि ये शख्स पश्चिम बंगाल में रहता है और इसका नाम सुरेश दुगर है । सुरेश दुगर एक उद्योगपति हैं, जो कुछ समय पहले तक दिल की बीमारी से ग्रसित थे । सुरेश को बचाने के लिए कई तरह की दवाई दी गई, लेकिन कुछ नहीं । आखिरकार उनका ऑपरेशन भी किया गया, किन्तु उससे भी ज्यादा फायदा नहीं हुआ । जो भी थोड़ा बहुत सुरेश का दिल काम कर रहा था, उससे उनके जिन्दा रहने की उम्मीद अधिक नहीं थी क्योंकि ऑपरेशन के बाद भी उनका दिल जितना काम करना चाहिए उतना काम नहीं कर रहा था ।

जिसके बाद सुरेश के शरीर में एक आर्टिफीशियल हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया, क्योंकि इसके अतिरिक्त और कोई रास्ता नहीं था और उसके बाद उनको ये हार्ट लगा दिया गया और आज सुरेश बिल्कुल सही है । इसके साथ ही आपको बता दें कि, इस दिल की कीमत करीब 60 लाख रूपए हैं ।