आज तक आपने सुना होगा कि दोस्ती केवल इंसानों में ही होती है. लेकिन आज हम आपको एक ऐसी इंटरेस्टिंग खबर बताने जा रहे हैं, जिसे सुनकर आप भी विश्वास नहीं कर पाओगे. जी हां, आयरलैंड के एक खूबसूरत द्वीप की एक फैमिली के लोग अपने डॉगी की वजह से परेशान थे. ये डॉगी रोज-रोज घर से घंटों गायब रहता और काफी देर बाद घर लौटता. डॉगी के मालिक ने जब पूरी बात पता लगाने के लिए एक दिन इस कुते का पीछा किया. हकीकत जानकार मालिक खुद अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पा रहा था. दरअसल कुत्ता रोज अपनी एक डॉल्फिन मछली दोस्त से मिलने जाता था.
जाता था दोस्त से मिलने
टोरी आईलैंड में स्थित एक गांव में रहने वाला परिवार अपने लैब्राडोर प्रजाति के डॉगी की वजह से परेशान था. बेन नाम का यह डॉगी रोज रोज घंटों तक घर से गायब रहता था. पर बेन के गायब रहने की हकीकत जब सामने आई तो ये रातों रात स्टार बन गया. दरसअल इस फैमिली ऑनर ने 1 दिन जब कुत्ते का पीछा किया तो पता चला कि यह पास ही के बंदरगाह पर जाकर गुम हो जाता है. यहां पर यह कुत्ता घंटों पानी में तैरता. इतना ही नहीं कभी-कभी वो तैरने से पहले पानी के बाहर खड़ा किसी का इंतजार भी करता और उसके बाद पानी में तैरने लगता.
बेन का ओनर इस मामले को समझ नहीं पा रहा था, लेकिन जल्द ही यह सच्चाई सामने आ गई. दरअसल बेन यहां अपनी एक खास दोस्त से मिलने आता था. यह दोस्त पानी में रहने वाली एक डॉल्फिन मछली थी. आसपास के लोगों ने कई बार देखा था कि बेन और डॉल्फिन साथ में तैरते रहते थे. यहां किस्तान के लोग इन दोनों की दोस्ती को देखकर आंखों पर विश्वास नहीं कर पाते थे. पर यह बात सभी के समझ से परे है कि एक कुत्ते और डॉल्फिन की दोस्ती कैसे हुई.
पिछले कई सालों से अमेरिका का एक परिवार एक अजीब समस्या को झेल रहा था. इस परिवार के लोग आए दिन मधुमक्खीयो के काटने का शिकार होते थे. पर उन्हें यह बात समझ नहीं आ रही थी कि यह मधुमक्खियां कहां से आ रही है. घर को पूरी तरह साफ करने के बाद भी कहीं मधुमक्खी का छत्ता नजर नहीं आया. ऐसे में इस परिवार ने एक प्रोफेशनल को बुलाया. इस व्यक्ति ने मधुमक्खियों के छत्ते की जांच पड़ताल के लिए थर्मल इमेज ली तो इसे दीवार में कुछ अजीब नजर आया. पता लगाने के लिए जब दीवार की दो ईंटे हटाई गई तो सामने का नजारा देख पूरा परिवार हैरान रह गया..
दीवार के अंदर मिला मुधमक्खी का छत्ता
टेनेसी स्टेट के जर्मनटाउन मैं रहने वाला परिवार पिछले दो-तीन सालों से एक अजीब समस्या झेल रहा था. इस परिवार पर आए दिन मधुमक्खीया हमला कर देती थी, लेकिन ये कहां से आती और कहां जाती इस बात का परिवार को पता भी नहीं था. इस परिवार ने मधुमक्खियों का छत्ता ढूंढने के लिए हर जगह पता लगाया, लेकिन असफल रहे.
कोई पेस्ट कंट्रोल स्प्रे भी काम नहीं कर रहा था ऐसे में हारकर इन्होंने एक प्रोफेशनल को बुलाया. घरों से मधुमक्खियों के छत्ते निकालने का काम करने वाले एक्सपर्ट डेविड ग्लोबल ने थर्मल इमेजिंग के जरिए घर की तस्वीरें लेना शुरू कर दिया. इन्ही तस्वीरों में डेविड को दीवार में एक लाल और पीले रंग का धब्बा दिखाई दिया. डेविड को दीवार में कुछ होने का शक हुआ, तो उन्होंने दीवार की एक ईंट निकली. ईंट निकालने पर देखा की इस दिवार में मधुमक्खियों का एक बड़ा सा छत्ता था.
ईंट निकाल कर भगाई मधुमखियां
डेविड ने बताया कि अक्सर मधुमक्खियों के छत्ते बिल्डिंग और पेड़ों पर होते हैं , जहां से उन्हें आसानी से भगाया जा सकता है. पर दीवार में छत्ता बहुत कम बनता है और दीवार में से मधुमक्खियों को भगाना उन्हें अच्छा भी नहीं लगता. हालाँकि उन्होंने दीवार की एक-एक ईंट निकाल कर मधुमक्खियों को भगाया.
दीवार तोड़ने के बाद आखरी बार छत्ते को देखने पर वो बड़ा सुन्दर दिख रहा था. इस काम के बाद मकान मालिक बहुत खुश हुए, क्योंकि दो-तीन सालों से चली आ रही समस्या अब समाप्त हो चुकी थी. इस काम की तस्वीरें डेविड ने शोसल मीडिया पर शेयर की जो अभी काफी वायरल हो रही है.
आज भी भारत में कोई रहस्यमय महल है। जब रहस्यों की बात आती है, तो राजस्थान के भानगढ़ के किले का नाम सभी के दिमाग में आता है। इन किलों के किले को केवल ऐसे किलों में गिना जाता है। इस किले को देश का सबसे रहस्यमयी किला कहा जाता है।
गढ़चंदर का किला उत्तर प्रदेश के झाँसी शहर से 70 किमी दूर स्थित है। इस किले का निर्माण 11 वीं शताब्दी में हुआ था। किला पाँच मंजिला का है। जमीन के ऊपर तीन मंजिल और जमीन के नीचे दो मंजिल। हम नहीं जानते कि यह किला कब बना था।
लेकिन इतिहास में यह माना जाता है कि यह किला लगभग 1500 से 2000 साल पहले बनाया गया था। किला इस तरह से बनाया गया है कि यह चार से पांच किलोमीटर दूर से साफ दिखता है।
लेकिन किले में ठहराव आ रहा है। यदि आप किले को देखने वाले मार्ग का अनुसरण करते हैं, तो आप भटक जाएंगे।
जबकि वास्तव में किले को प्राप्त करने का एक और तरीका है। इस किले को देश के सबसे रहस्यमयी किलों में गिना जाता है। स्थानीय लोगों द्वारा यह दिखाया गया कि गाँव में एक जीवन था।
जान के लोग किले में घूमने गए। अधिकांश लोग किले के नीचे चले गए। जिसके बाद वे गायब हो गए।
आज तक, जो लोग मर चुके हैं और गायब हो गए हैं, वे ज्ञात नहीं हैं। कहा जाता है कि यहां 50 से 60 लोग थे। उसके बाद भी, कुछ घटनाएं हुईं, जहां किले के नीचे जाने वाले लोगों के लिए दरवाजा बंद कर दिया गया था। इस किले में प्रवेश करने वाले लोग हमेशा भटकते रहते हैं।
दुनिया के किसी भी देश में सुरक्षा के दो स्तर हैं। पहली पुलिस और दूसरी सेना। जबकि पुलिस की जिम्मेदारी देश के भीतर ही रहती है। जबकि सेना की जिम्मेदारी बाहर, यानी सीमा सुरक्षा की सुरक्षा करना है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में कई ऐसे देश हैं,
जिनकी अपनी कोई सेना नहीं है। इसलिए, बड़े देश उनमें से कई की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाते हैं। जो दुनिया का सबसे छोटा देश है। उसकी अपनी कोई सेना नहीं है। जब एक व्यापक नोबेल गार्ड था। लेकिन वर्ष 1970 में संगठन को ध्वस्त कर दिया गया।
इस देश की सुरक्षा के लिए इतालवी सेना जिम्मेदार है।
मॉरीशस एक बहुसांस्कृतिक देश है। 1968 से इस देश में किसी भी तरह की कोई सेना नहीं है। जबकि यहां 10,000 पुलिस कर्मी ड्यूटी पर हैं।
जो देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा दोनों के लिए जिम्मेदार है। यूरोप का दूसरा सबसे बड़ा द्वीप, 1869 के बाद, कोई सेना नहीं है। यह देश नाटो का सदस्य है और अमेरिका की सुरक्षा की जिम्मेदारी है।
पर है मोनाको एक छोटा सा देश है। जहां 17 वीं सदी से कोई सेना नहीं है।
हालांकि, यहां दो छोटे फजी टुकड़े हैं। जिसमें एक टुकड़ी राजकुमार की रक्षा करती है। जबकि एक नागरिकों की सुरक्षा करता है। फ्रांसीसी सेना इस देश को सुरक्षा प्रदान करती है।
मध्य अमेरिका कैरिबियन में एक देश है,
1948 के बाद से कोई सेना नहीं है। 1948 में यहां एक भयानक गृह युद्ध छिड़ गया, जिसके बाद इस देश ने अपनी सेना को समाप्त कर दिया। यह देश सैन्य अभियानों के बिना सबसे बड़ा देश है। हालांकि, आंतरिक मामलों को सुलझाने के लिए पुलिस मौजूद है।
यदि कोई व्यक्ति आपका नाम गलत तरीके से लेता है तो आप निश्चित रूप से नाराज हो जाएंगे। कई को अक्सर यह अनुभव होता है। टाइप करते समय कभी-कभी नाम गलत हो जाता है। इसलिए, कई लोगों का पारा भी चढ़ता है। रॉबर्ट विल्सन बार्न्स की पत्नी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
बार्न्स रेस्तरां के पार्सल नाम से बहुत प्रभावित थे। उन्होंने रेस्तरां के कर्मचारियों से इस बारे में पूछा, और फिर एक अलग मामला सामने आया। उन्होंने इस पूरे अनुभव को फेसबुक पर साझा किया। साउथ कैरोलिना के रहने वाले रॉबर्ट ने जिमी जॉन्स रेस्तरां में काउंटर के जरिए ड्राइव से पार्सल लिया। उसकी पत्नी ने एक सैंडविच ऑर्डर किया।
लेकिन रेस्तरां छोड़ने के बाद, रॉबर्ट की पत्नी ने कागज पर लिपटे सैंडविच पर पाठ पढ़ा और हैरान रह गई। कागज पर लिखा था ‘बीच’। यह देख रॉबर्ट हैरान रह गया। उन्होंने कार को पलटा और रेस्तरां पहुंच गए।
रॉबर्ट ने कर्मचारियों को सैंडविच में लिपटे हुए रेस्तरां को दिखाने के लिए कहा। गुस्से में रॉबर्ट को देखकर स्टाफ भी चौंक गया।
रॉबर्ट ने कागज का पाठ दिखाया और स्पष्टीकरण के लिए कहा। रेस्तरां के प्रबंधक ने इस पर बहुत ही सरल खुलासा किया। जब आप पनीर के साथ बीएलटी का आदेश देते हैं, तो हमने BITCH को कागज पर एक शॉर्टकट के रूप में लिखा, प्रबंधक ने कहा।
बेकन, लेट्यूस, टमाटर का उपयोग करके बनाए गए सैंडविच को बीएलटी सैंडविच कहा जाता है। रॉबर्ट और उनकी पत्नी ने पनीर के साथ बीएलटी सैंडविच का आदेश दिया। इसलिए, सैंडविच में लपेटे गए कागज पर बीएलटी और सीएच लिखा गया था।
हमेशा अपने लुक और हॉट ड्रेसिंग स्टाइल को लेकर दिशा पटानी सुर्खियों में होती हैं। इन्होंने बॉलीवुड फिल्मों में शानदार एक्टिंग से सबक मन मोह लिया है। बता दें दिशा अपनी फिटनेस और स्टंट के लिए खूब पहचानी जाती हैं। और अपनी हॉट तस्वीरों के वजह से इन्हें बहुत ज्यादा ट्रोलर्स का गम भी झेलना पड़ा है।
इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप खूब वायरल हो रही हैं जिनमें दिशा जिम में वर्कआउट करते दिख रही हैं। इस वीडियो में दिशा भारी भरकम बजन उठाती नजर आ रही हैं। आपको बता दें कि दिशा पटानी ने इस वीडियो को अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया था और अब यह देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
मीडिया सूत्रों की मानें तो वीडियो में दिशा ने कम से कम 60 किलो तक भार उठाया होगा जो कि किसी लड़की के लिए बहुत गर्व की बात है। दिशा जितनी अपने लुक्स को लेकर जागरूक हैं उतनी हो वो अपनी फिटनेस को लेकर भी जागरूक हैं। आपको दिशा के हॉट तस्वीरें कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताएं।
आंध्र प्रदेश के पीपुली मंडल के वेंगलमपल्ली गांव का है जहांपिछले कुछ दिनों से बच्चों के साथ एक लंगूर पढ़ाई करने आ रहा है।
बताया जाता है कि जैसे ही क्लास में बच्चे अपने पढ़ाई का बैग लेकर कक्षा में बैठने के लिए जाते हैं, तो उन्हे क्लास में जाता देख लंगूर भी अंदर आकर बैठ जाता है। ये लंगूर बदमाशियां करने के बजाय टकटकी लगाकर गुरुजी की हर बात सुनता है।
हालांकि, शुरुआत में लंगूर के क्लास के अंदर आने से बच्चों के साथ शिक्षक भी घबरा जाते थे और क्लासरूम का दरवाजा बंद करके पढ़ाते थे। लेकिन इसके बावजूद भी लंगूर दरवाजे या खिड़की के पास बैठकर क्लास में हो रही पढ़ाई को ध्यान से सुनने लगता था।
वहां के शिक्षक और स्टूडेंट्स ने इस लंगूर का नाम लक्ष्मी रख दिया हैं। अब वह भी धीरे धीरे अपना नाम पहचानने लगी है। वो पहले दिन से ही क्लास में बहुत ही अच्छे से पेश आने लगी थी।
वहां के विद्यार्थी जिस तरह से क्लास में स्कूल के नियम-कानून का पालन करते हैं लक्ष्मी भी वैसे ही पालन करती है।
बताया जाता है कि लंगूर सुबह होने वाली प्रार्थना के दौरान भी छात्रों के बीच ही रहती है। जब सभी बच्चे क्लास की ओर जाते हैं लक्ष्मी भी उनके साथ हो लेती है। लक्ष्मी दोपहर का भोजन भी बच्चों के साथ ही करती है। यहां तक कि क्लास ख़त्म होने के बाद वह उन्हीं बच्चों के साथ खेलने लगती है।
अब वहा के टीचर्स का मानना है कि जबसे लक्ष्मी क्लास में आने लगी है तब से स्कूल में छात्रो की संख्या में भी बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। छात्रों को लक्ष्मी के साथ पढ़ना और खेलना अच्छा लगता है।
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के छुरा ब्लॉक में एक अनूठी कबड्डी स्पर्धा का आयोजन 15 सितंबर को हुआ।
इस स्पर्धा के पोस्टर पंपलेट जारी होने के बाद से इसकी काफी चर्चा हो रही है। इस स्पर्धा के लिए आयोजन समिति ने 151 रुपये प्रति टीम एंट्री फीस तय की है और करीब 150 टीमें स्पर्धा में भाग ली है।
खास बात यह है कि स्पर्धा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली टीम को कमेटी की ओर से ईनाम स्वरूप बकरा, उप विजेता वे स्पर्धा में अच्छा प्रदर्शन करने वाली अन्य दो टीमों को क्रमशः मुर्गा, मछली और अंडा ईनाम के रूप में मिले।
पहले इस पंपलेट के प्रसारित होने के बाद लोगों ने इसे मजाक में लिया, लेकिन जब पता चला कि यह वास्तविक है तो अब लोगों को महसूस हुआ कि यह अपने आप में अनूठी स्पर्धा है।
तमिलनाडु के पेन्नागराम के एरियुर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसको शेयर कर लोग ये दावा कर रहे हैं कि एरियुर में एक सब इंस्पेक्टर ने साइकिल वालों का भी चालान काटा है। इस वीडियो को लोग ट्विटर और फेसबुक पर शेयर कर लिख रहे हैं कि नये मोटर संशोधन विधेयक-2019 लागू होने के बाद से पुलिस वाले साइकिल वालों को भी नहीं छोड़ रहे हैं। इस वीडियो को शेयर कर एक यूजर ने लिखा- जो सबसे ज्यादा चालान कटेगा उसे प्रोमोशन मिलेगा।
वेबसाइट द हिन्दू के मुताबिक, सब -इंस्पेक्टर ने साइकिल वाले को इसलिए पकड़ा था क्योंकि वह दोनों हाथ छोड़कर साइकिल चला रहा था। वीडियो को देख कर लग रहा है कि वीडियो को किसी ने अपने छत या ऊपर माले की घर से रिकॉर्ड किया है। वीडियो में दिखने वाले सब इंस्पेक्टर का नाम एस. सुब्रामणी है।
वीडियो में दिख रहा है कि एस. सुब्रामणी ने एक साइकिल चला रहे शख्स को रोका और साइड में ले जाकर बात कर रहे हैं। पुलिस के मुताबिक साइकिल को जब्त कर लिया गया है। एस. सुब्रामणी का कहना है कि शख्स से किसी बात का कोई चालान नहीं काटा गया है। उन्हें बस दोनों हाथ छोड़कर साइकिल ना चलाने की हिदायत दी गई है। हालांकि पुलिस द्वारा पूछे जाने पर साइकिल वाले ने बताया कि उसने कुछ देरों के साइकिल के हैंडल से हाथ इसलिए हटाया था क्यों उसे अपने शर्ट का बटन बंद करना था।
बजरंग बली से जुड़ी कहानियों और किस्सों को जानने में लोगों की दिलचस्पी हमेशा बनी रहती है। इसके प्रमाण मिलने से लोगों की गहरी आस्था जुड़ जाती है। हनुमान जी और पाताललोक से जुड़ें ऐसे ही कुछ साक्ष्य हमें इंडिया से 1000किमी दूर मध्य अमेरिका के देश होंडुरस में मिले हैं। कहा जाता है कि रामायण में रावण के भाई अहिरावण को मारने के लिए बजरंगबली एक गुफा से होते हुए इसी देश में गए थे और ये गुफा मप्र के पातालकोट में है।वो दुनिया जो जमीन के नीचे है। जहां इंसानों का पहुंचना तक संभव नहीं। वहां पवनपुत्र पहुंचे थे। पौराणिक कथाओं में पाताल लोक का जिक्र बार-बार मिलता है, लेकिन सवाल ये है कि क्या पाताल लोक काल्पनिक है या इसका वजूद भी है? रामायण की कथा के मुताबिक पवनपुत्र हनुमान पाताल लोक तक पहुंचे थे। वे भगवान राम के सबसे बड़े भक्त थे। रामायण की कथा के मुताबिक रामभक्त हनुमान अपने ईष्ट देव को अहिरावण के चंगुल से बचाने के लिए एक सुरंग से पाताल लोक पहुंचे थे।इस कथा के मुताबिक पाताल लोक ठीक धरती के नीचे है। वहां तक पहुंचने के लिए 70 हजार योजन की गहराई पर जाना पड़ता है। अगर आज के वक्त में हम अपने देश में कहीं सुरंग खोदना चाहें तो ये सुरंग अमेरिका महाद्वीप के मैक्सिको, ब्राजील और होंडुरास जैसे देशों तक पहुंचेगी। हाल ही में वैज्ञानिकों ने मध्य अमेरिका महाद्वीप के होंडुरास में सियूदाद ब्लांका नाम के एक गुम प्राचीन शहर की खोज की है। वैज्ञानिकों ने इस शहर को आधुनिक लाइडर तकनीक से खोज निकाला है।
मध्य प्रदेश के पातालकोट की गुफा पातालकोट में एक गुफा है। जिसे राजाखोह भी कहा जाता है। इसे लेकर कई कहानियां हैं। माना जाता है कि कटोरानुमा चट्टान के नीचे स्थित यह गुफा भारत से हजारों किमी दूर मध्य अमेरिका के होंडूरस देश में निकलती है। रामायण में अहिरावण की जो गुफा बताई गई है, वह होंडूरस में है। होंडूरस में ही एक सिटी ऑफ मंकी गॉड के नाम से एक जगह भी मिली है। जहां वानर देवताओं की मूर्ति है। यहां हजारों साल पुरानी मूर्तियां मिली हैं, जो यह बताती हैं कि वहां के लोग वानर देवताओं की पूजा करते थे। मंकी गॉड की यह मूर्ति बिल्कुल बजरंग बली की तरह दिखती है। हालांकि पातालकोट स्थित उस गुफा के अंदर आज तक कोई गया नहीं है। कहा जाता है कि मध्य अमेरिका और होंडूरस धरती पर बिल्कुल भारत के नीचे हैं।
पातालकोट मप्र के छिंदवाड़ा जिले में है। यहां कुछ गांव धरती से 1700 फीट नीचे हैं। इन गांवों के पास ही वह गुफा है। पातालकोट के इन गांवों में भारिया और गोंड आदिवासी रहते हैं। पौराणिक कथा यह भी है कि रावण के बेटा मेघनाद भगवान शिव की पूजा कर यहीं से पाताललोक गया था। इसलिए इसका नाम पातालकोट पड़ा।
ये है पाताल लोक इस शहर को बहुत से जानकार पाताल लोक मान रहे हैं जहां राम भक्त हनुमान पहुंचे थे। दरअसल, इस विश्वास की कई पुख्ता वजह है। संभव है कि भारत या श्रीलंका से कोई सुरंग खोदी जाएगी तो वो सीधे यहीं निकलेगी। दूसरी वजह ये है कि हजारों साल पुरानी परतों में दफन सियुदाद ब्लांका में ठीक राम भक्त हनुमान के जैसे वानर देवता की मूर्तियां मिली हैं।
इतिहासकारों का कहना है कि प्राचीन शहर सियुदाद ब्लांका के लोग एक विशालकाय वानर देवता की मूर्ति की पूजा करते थे। लिहाजा, ये भी कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं हजारों साल प्राचीन सियूदाद ब्लांका ही तो रामायण में जिक्र पाताल पुरी तो नहीं है।
होंडुरास के घने जंगलों में मिले साक्ष्य यहां के घने जंगलों के बीच मस्कीटिया नाम के इलाके में हजारों साल पहले एक गुप्त शहर सियूदाद ब्लांका था। कहा जाता है कि हजारों साल पहले इस प्राचीन शहर में एक फलती-फूलती सभ्यता सांस लेती थी, जो अचानक ही वक्त की गहराइयों में गुम हो गई।यहां ऐसे कई अवशेष मिले हैं जो इशारा करते हैं कि सियूदाद के निवासी वानर देवता की पूजा करते थे। यहां वानर देवता की घुटनों के बल बैठे मूर्ति को देखते ही राम भक्त हनुमान की याद आ जाती है।
राम और लक्ष्मण का अपहरण दरअसल, मध्य अमेरिका के एक मुल्क में प्राचीन शहर की खोज के साथ सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि रामायण की कथा में ऐसे सूत्र बिखरे पड़े हैं जो कहते हैं कि भारत-श्रीलंका की जमीन के ठीक नीचे वो लोक हैं जिसे पाताल पुरी कहा जाता था। पाताल पुरी का जिक्र रामायण के उस अध्याय में आता है, जब मायावी अहिरावण राम और लक्ष्मण का हरण कर उन्हें अपने माया लोक पाताल पुरी ले जाता है।
मकरध्वजा था ब्रह्मचारी हनुमान के ही पुत्र रामायण की कथा के अनुसार हनुमान जी को अहिरावण तक पहुंचने के लिए पातालपुरी के रक्षक मकरध्वजा को परास्त करना पड़ा था जो ब्रह्मचारी हनुमान का ही पुत्र था। दरअसल, मकरध्वजा एक मत्स्यकन्या से उत्पन्न हुए थे, जो लंकादहन के बाद समुद्र में आग बुझाते हनुमान जी के पसीना गिर जाने से गर्भवती हुई थी। रामकथा के मुताबिक अहिरावण वध के बाद भगवान राम ने वानर रूप वाले मकरध्वजा को ही पातालपुरी का राजा बना दिया था, जिसे पाताल पुरी के लोग पूजने लगे थे।
अमेरिकी वैज्ञानिकों की टीम ने खोज निकाला घने जंगलों में, जमीन में दफन एक प्राचीन शहर अपने इतिहास के साथ सांस ले रहा है ये शायद दुनिया कभी नहीं जान पाती, अगर अमेरिकी वैज्ञानिकों की टीम ने उसे तलाशने के लिए क्रांतिकारी तकनीक का इस्तेमाल नहीं की होती। लाइडर के नाम से जानी जाने वाली तकनीक ने जमीन के नीचे की 3-D मैपिंग से कैसे प्राचीन शहर को खोज निकाला।मध्य अमेरिकी देश होंडुरास में वानर देवता वाले प्राचीन शहर की खोज बरसों पुरानी है। होंडूरास में उस प्राचीन शहर की किवदंती सदियों से सुनाई जाती हैं जहां बजरंग बली जैसे वानर देवता की पूजा की जाती थी। ये कहानियां होंडूरास पर राज करने वाले पश्चिमी लोगों तक भी पहुंची।
प्रथम विश्वयुद्ध के बाद एक अमेरिकी पायलट ने होंडूरास के जंगलों में कुछ अवशेष देखने की बात की, लेकिन इसके बारे में पहली पुख्ता जानकारी अमेरिकी खोजकर्ता थियोडोर मोर्डे ने1940 में दी। एक अमेरिकी मैगजीन में उसने लिखा कि उस प्राचीन शहर में वानर देवता की पूजा होती थी, लेकिन उसने शहर की जगह का खुलासा नहीं किया। बाद में रहस्यमय हालात में थियोडोर की मौत हो जाने से प्राचीन शहर की खोज अधूरी रह गई।
इसके करीब 70 साल बाद अब होंडूरास के घने जंगलों के बीच मस्कीटिया नाम के इलाके में प्राचीन शहर के निशान मिलने शुरू हुए हैं जो संभव हुआ लाइडार तकनीक से। अमेरिका के ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी और नेशनल सेंटर फॉर एयरबोर्न लेजर मैपिंग ने होंडूरास के जंगलों के ऊपर आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से प्राचीन शहर के निशान को खोज निकाला है।दरअसल, पर्यावरण के प्रति सजग होंडूरास जंगलों के बीच खुदाई की इजाजत नहीं देता है, ऐसे में सिर्फ ये अनुमान ही लगाया जा सकता है कि जंगलों में एक प्राचीन शहर दफन है, इस इलाके में बजरंगबली जैसी वानर देवता की कुछ मूर्तियां जरूर मिली हैं, जिससे ये कयास लगाए जाने लगे हैं कि कहीं किवदंतियों का ये शहर रामायण में जिक्र पाताल लोक ही तो नहीं है।