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राजस्थान में राज्यसभा चुनाव की तैयारियां तेज, भाजपा और कांग्रेस में होड़…

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राजस्थान में राज्यसभा चुनाव की गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। तीन सीटों पर चुनाव होना है, जिन पर मौजूदा सांसदों का कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त होगा। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अपने उम्मीदवारों का चयन करने में जुटे हुए हैं।

विधानसभा के वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, भाजपा को दो सीटों पर जीत हासिल करने की संभावना है, जबकि कांग्रेस को एक सीट मिलने की उम्मीद है।

रिटायर होने वाले सांसद

तीन सीटों पर रिटायर होने वाले सांसदों में भाजपा के रवनीत सिंह बिट्टू, राजेंद्र गहलोत और कांग्रेस के नीरज डांगी शामिल हैं। बिट्टू केंद्रीय मंत्री हैं और उपचुनाव के माध्यम से राज्यसभा में पहुंचे थे, उनका कार्यकाल भी जून 2026 तक है। राजेंद्र गहलोत को मारवाड़ क्षेत्र का एक प्रमुख नेता माना जाता है, जबकि नीरज डांगी को कांग्रेस का दलित चेहरा माना जाता है।

राजनीतिक समीकरण

इन नामों को लेकर दिल्ली से लेकर जयपुर तक चर्चा का माहौल है। राज्य की विधानसभा सीटों के हिसाब से कुल 200 सीटें हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 51 प्राथमिकता वाले वोटों की आवश्यकता होती है। भाजपा के पास 118 विधायक हैं, जिससे पार्टी को दो सीटों पर जीत हासिल करने में आसानी होगी। वहीं, कांग्रेस के पास 67 विधायक हैं, जिससे एक सीट पर जीत की संभावना है, लेकिन दूसरी सीट के लिए निर्दलीय समर्थन जुटाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

उम्मीदवारों की चर्चा

भाजपा दो सीटों पर जातीय संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। रवनीत सिंह बिट्टू एक सक्रिय नेता हैं और उन्हें दोबारा मौका मिलने की संभावना है। दूसरी सीट के लिए कई प्रमुख नाम सामने आ रहे हैं, जिनमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का नाम सबसे ऊपर है। इसके अलावा, सतीश पूनिया को भी एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

उन्होंने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष का पद संभाला है और युवाओं तथा जाट समुदाय में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। इन दो नामों के अलावा अशोक परनामी का नाम भी चर्चा में है। भाजपा इन नामों के माध्यम से आगामी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि उम्मीदवारों का चयन हाईकमान द्वारा किया जाएगा। राज्य में होने वाले चुनाव में एनडीए की ताकत बढ़ सकती है।

ईरान ने नया सुप्रीम लीडर चुना: मुस्तबा खामेनई का नेतृत्व शुरू…

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ईरान ने अपने नए सुप्रीम लीडर का चयन कर लिया है। अली खामिनई के निधन के बाद, उनके बेटे अयातुल्लाह सैयद मुस्तबा खामेनई को इस पद पर नियुक्त किया गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने भी मुस्तबा खामेनई के चयन का समर्थन किया।

सरकारी मीडिया प्रेस टीवी के अनुसार, 8 मार्च की रात को 88 सदस्यों वाली एक्सपर्ट असेंबली ने मतदान के बाद मुस्तबा के नाम पर मुहर लगाई। असेंबली ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि उन्होंने अयातुल्लाह सैयद मुस्तबा हुसैनी खामेनई को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का तीसरा नेता नियुक्त किया है।

खामेनई परिवार का पुनः नेतृत्व

इस घोषणा के साथ, ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व की बागडोर फिर से खामेनई परिवार के हाथों में आ गई है। अयातुल्लाह अली खामेनई इस पद पर देश के दूसरे नेता थे, जबकि पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला रूहल्ला खुमैनी थे, जिन्होंने 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद इस पद की स्थापना की थी। खुमैनी के बाद, अली खामेनई ने लंबे समय तक ईरान का नेतृत्व किया और अब उनके बेटे मुस्तबा तीसरे सुप्रीम लीडर के रूप में उभरे हैं। मुस्तबा के सुप्रीम लीडर बनने की खबर के साथ ही ईरान के विभिन्न शहरों में जश्न मनाया गया। लोग सड़कों पर निकल आए और नए नेतृत्व का स्वागत किया। अली खामेनई के एक्स अकाउंट से एक रीपोस्ट किया गया, जिसमें बताया गया कि ईरान के संविधान के आर्टिकल 108 के तहत मुस्तबा को नया सुप्रीम लीडर चुना गया है।

नए युग की शुरुआत

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पिजिशकीय ने मुस्तबा खामेनई को बधाई देते हुए कहा कि उनका नेतृत्व ईरान के सम्मान और शक्ति के लिए एक नए युग की शुरुआत करता है। ईरानी सेना ने भी नए सुप्रीम लीडर के प्रति अपनी वफादारी व्यक्त की है। ईरान आर्म्ड फोर्सेस के जनरल स्टाफ ने एक बयान जारी कर मुस्तबा खामेनई के प्रति अपनी पूरी वफादारी की कसम खाई है। बयान में अली खामेनई के निधन पर शोक भी व्यक्त किया गया है। भारत में ईरान एंबेसी ने कहा कि देश की मौजूदा गंभीर परिस्थितियों में यह विकल्प निश्चित रूप से हमारे राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता की गारंटी देगा।

खामेनई की मौत और उसके बाद की स्थिति

आपको बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त सैन्य हमले में अली खामेनई की मौत हो गई थी। इसके बाद से सुप्रीम लीडर का पद खाली था, और देश का शासन तीन सदस्यीय टेम्पररी लीडरशिप काउंसिल के हाथों में था। अब मुस्तबा खामेनई के चुनाव के साथ ईरान को नया नेतृत्व मिल गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम लीडर चुने जाने के बाद टाइम्स ऑफ इजराइल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की। ट्रंप ने कहा कि देखते हैं क्या होता है। युद्ध की समाप्ति इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नितिन याहू के साथ आपसी निर्णय से होगी। आपको याद दिला दें कि ट्रंप ने कहा था कि ईरान उनके बिना नया सुप्रीम लीडर नहीं चुनेगा। दूसरी ओर, इजराइल ने धमकी दी थी कि वह खामेनई के उत्तराधिकारी को मार देंगे।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है प्रभाव;राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे…

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राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को एशिया के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र में तेजी से बदल रही भू-राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह हालात केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है।

इसका प्रभाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। साथ ही भारत की वैश्विक छवि और सामर्थ्य पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 55 प्रतिशत जरूरतें पश्चिम एशिया से होने वाले आयात से पूरी करता है। यदि उस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है तो उसका सीधा असर हमारे देश की आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है।

खड़गे ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से कहा, “मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे यह मुद्दा उठाने का अवसर दिया।” खड़गे ने कहा कि वह नियम 176 के तहत तहत उभरती चुनौतियों के संदर्भ में भारत की ऊर्जा सुरक्षा के विषय पर अल्पकालिक चर्चा की अनुमति का अनुरोध करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि एशिया के उस क्षेत्र में लाखों भारतीय काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा और आजीविका वहां की स्थिरता पर निर्भर करती है। हाल की घटनाओं में कुछ भारतीय नागरिकों के मारे जाने या लापता होने की खबरें भी सामने आई हैं।

उन्होंने कहा कि रसोई गैस सिलेंडर के दाम में लगभग 60 रुपये की बढ़ोतरी भी आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है। भारत हर साल लगभग 51 बिलियन अमेरिकी डॉलर का तेल आयात करता है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था और परिवारों के जीवन से सीधे जुड़ा हुआ विषय है। इसलिए इन अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। इस बीच बाद सभापति द्वारा नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को बैठ जाने के लिए कहा गया।

सभापति ने खड़गे को बाद में बोलने का अवसर देने की बात कही और कहा कि फिलहाल विदेश मंत्री एस जयशंकर सदन में अपनी बात रखने जा रहे हैं। इस बार विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया। हंगामे के बीच एस जयशंकर ने अपनी बात रखी। लेकिन विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे इसके उपरांत विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया।

दरअसल, नेता प्रतिपक्ष और विपक्षी सांसद इस मुद्दे पर सदन में अपनी बात रखना चाहते थे। सभापति ने मल्लिकार्जुन खड़गे को शुरुआत में बोलने का अवसर दिया और इसके बाद उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री द्वारा इस संदर्भ में आधिकारिक जानकारी दे रहे हैं। विदेश मंत्री द्वारा जानकारी दिए जाने के बाद वह खड़गे को बोलने का अवसर देंगे। लेकिन विपक्ष इसके लिए राजी नहीं हुआ और सदन में विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे।

युवाओं की विकसित होती सोच देश की सबसे बड़ी ताकत…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट के बाद आयोजित वेबिनार श्रृंखला के चौथे वेबिनार को संबोधित किया, जिसका विषय था “सबका साथ सबका विकास – जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति।” पीएम ने बजट घोषणाओं के प्रभावी कार्यान्वयन पर विचार-विमर्श करने के लिए विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं का स्वागत किया।

पीएम ने कहा, “जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति मात्र एक विषय नहीं है। यह इस बजट का मूल उद्देश्य और इस सरकार का संकल्प है।”

पीएम मोदी ने विशेष रूप से उभरती ‘देखभाल अर्थव्यवस्था’ और वैश्विक स्तर पर देखभालकर्ताओं की बढ़ती मांग की ओर ध्यान आकर्षित किया और विशेषज्ञों से युवाओं को सशक्त बनाने के लिए नए प्रशिक्षण मॉडल विकसित करने का आग्रह किया। पीएम मोदी ने कहा, “मैं इस वेबिनार में उपस्थित स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों से नए प्रशिक्षण मॉडल और साझेदारियों को विकसित करने के लिए सुझाव देने का आग्रह करूंगा ताकि देश में प्रशिक्षण व्यवस्था और भी मजबूत हो सके।”

प्रधानमंत्री ने दूरस्थ क्षेत्रों तक टेलीमेडिसिन की पहुंच की सफलता का उल्लेख किया। इसकी बढ़ती लोकप्रियता को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने उपयोगकर्ता अनुभव को और सरल बनाने तथा जन जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। पीएम मोदी ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि टेलीमेडिसिन के बारे में जागरूकता और इसके उपयोग में आसानी बढ़ाने की अभी भी आवश्यकता है।”

प्रधानमंत्री ने भारत के युवाओं की विकसित होती सोच को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया और इस भावना के अनुरूप शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि नई शिक्षा नीति एक ऐसे पाठ्यक्रम की नींव रखती है जो बाजार की मांगों और वास्तविक अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों के अनुरूप होना चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा, “हमें अपनी शिक्षा प्रणाली को वास्तविक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया को तेज करना होगा।” शिक्षा, रोजगार और उद्यम के बीच संबंधों पर चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने ए.वी.जी.सी. (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) क्षेत्र को बढ़ावा देने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने शैक्षणिक संस्थानों से अपने परिसरों को उद्योग सहयोग और अनुसंधान-आधारित शिक्षा के केंद्रों में बदलने का आह्वान किया ताकि छात्रों को आवश्यक वास्तविक दुनिया का अनुभव मिल सके।

मोदी ने कहा, “मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि इस वेबिनार में, अपने परिसरों को उद्योग सहयोग और अनुसंधान-आधारित शिक्षा के केंद्रों के रूप में विकसित करने पर विचार-विमर्श अवश्य करें।”

प्रधानमंत्री ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती संख्या पर गर्व व्यक्त किया और भविष्य की प्रौद्योगिकियों में बेटियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। युवा शोधकर्ताओं को बिना किसी बाधा के नवाचार और प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने वाले एक सशक्त अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र का आह्वान करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “हमें ऐसा अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र बनाना होगा जहां युवा शोधकर्ताओं को नए विचारों पर प्रयोग करने और काम करने का पूरा अवसर मिले।”

रोजगार सृजन में पर्यटन और संस्कृति की क्षमता पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पारंपरिक स्थलों से परे नए पर्यटन स्थलों का विकास किसी शहर की ब्रांडिंग और समग्र विकास को बढ़ावा देता है। अब हम देश में पर्यटन स्थलों को नए सिरे से विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। प्रशिक्षित गाइड, आतिथ्य कौशल, डिजिटल संपर्क और सामुदायिक भागीदारी हमारे पर्यटन क्षेत्र के स्तंभ बन रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि इसके साथ ही स्वच्छता और सतत प्रथाएं भी आवश्यक हैं। भारत को एक वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में मजबूत करने के लिए हम मिलकर काम कर रहे हैं, ऐसे में पर्यटन और संबंधित क्षेत्रों पर आपके सुझाव अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।”

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय प्रगति को गति देने के लिए संस्थानों, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच तालमेल के महत्व पर प्रकाश डाला और विश्वास व्यक्त किया कि ये चर्चाएं भविष्य के लिए एक ठोस रूपरेखा प्रदान करेंगी और एक विकसित भारत की नींव को मजबूत करेंगी। प्रधानमंत्री ने कहा, “ऐसे प्रयासों से एक विकसित भारत की नींव और मजबूत होगी।”

लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर सियासत तेज, भाजपा व सहयोगी दलों ने किया विरोध…

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने की मांग वाले प्रस्ताव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष की ओर से लाए गए इस प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष के कई नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया है।

भाजपा व उसके सहयोगी दलों के सांसदों ने साफ कहा है कि उन्हें लोकसभा अध्यक्ष पर पूरा विश्वास है और यह प्रस्ताव सदन में टिक नहीं पाएगा।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कुछ लोग संसद को चलने नहीं देना चाहते और इस तरह का प्रस्ताव लाना पूरी तरह अनुचित है।” उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाता है तो यह “बेवकूफी की हद पार करने” जैसा कदम होगा।

वहीं, भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष ने अब तक यह स्पष्ट ही नहीं किया है कि आखिर किस कारण से वे लोकसभा अध्यक्ष को हटाना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाया गया यह अविश्वास प्रस्ताव सदन में बुरी तरह से हार जाएगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल ने कई बार सदन में लोकसभा अध्यक्ष के पद का अपमान किया है, जो संसद की गरिमा के खिलाफ है। राहुल गांधी अपने नेतृत्व में अब तक 95 चुनाव हार चुके हैं और आने वाले चुनावों में भी उन्हें हार का सामना करना पड़ेगा।”

भाजपा सांसद अरुण गोविल ने भी लोकसभा अध्यक्ष के प्रति अपनी पार्टी का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि भाजपा और उसके सभी सांसदों का विश्वास ओम बिरला में है और विपक्ष को जो कहना है, वह कहता रहे। भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा, “उन्हें गर्व है कि उन्होंने ओम बिरला के साथ भारतीय जनता पार्टी की युवा इकाई में काम किया है। ओम बिरला ऐसे नेता हैं जो संसदीय परंपराओं का सम्मान करते हैं और उनका पूरी तरह पालन करते हैं।”

इस मुद्दे पर भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 94 सदस्यों को स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाने का अधिकार देता है, लेकिन सवाल यह है कि विपक्ष ऐसा क्यों कर रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह आरोप लगा रहा है कि उन्हें सदन में बोलने का मौका नहीं दिया जाता जबकि समय का निर्धारण संसदीय नियमों के तहत होता है।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने कहा कि इस मुद्दे पर सदन में विस्तृत बहस होगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष जो आरोप लगा रहा है, उसमें कोई सच्चाई नहीं है। जब उन्हें बोलने का मौका मिलेगा तो सबूतों के साथ अपनी बात रखनी होगी। सरकार इस पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है और बहस के बाद सच्चाई सबके सामने आ जाएगी।

टी20 विश्व कप: टीम इंडिया के चैंपियन बनने के सफर में ‘टर्निंग प्वाइंट’ साबित हुआ ये मैच…

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भारतीय क्रिकेट टीम ने टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीत लिया है। टीम इंडिया ने लगातार दूसरी बार और कुल तीसरी बार खिताब जीतकर इतिहास रचा है। भारतीय टीम के लिए विश्व चैंपियन बनने का सफर आसान नहीं रहा, लेकिन पहले मैच से लेकर फाइनल के बीच में एक ऐसा मैच आया जिसने टीम इंडिया को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर किया।

बदली रणनीति के साथ टीम और मजबूत और चैंपियन बनकर उभरी।

भारतीय टीम ग्रुप स्टेज में यूएसए, पाकिस्तान, नामीबिया और नीदरलैंड के खिलाफ जीती और ग्रुप में पहले स्थान पर रहते हुए सुपर-8 के लिए क्वालीफाई किया। टीम इंडिया सुपर-8 में आ तो गई थी, लेकिन टीम में कई कमियां थीं, जिसपर प्रबंधन का ध्यान नहीं जा रहा था। प्लेइंग इलेवन में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की अधिकता, अभिषेक का शीर्ष में फ्लॉप रहना। मीडिल ऑर्डर में सूर्या और तिलक का धीमा खेलना, निचले क्रम में रिंकू की लगातार असफलता भारतीय टीम की बड़ी कमी के रूप में उभरी थी। अक्षर पटेल पर वाशिंगटन सुंदर को प्राथमिकता देना भी एक गलत निर्णय साबित हो रहा था।

इन कमियों के साथ ही सुपर-8 के पहले मैच में भारतीय टीम दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उतरी थी। दक्षिण अफ्रीका शानदार फॉर्म में थी, और भारत को 76 रन से हार का सामना करना पड़ा। इस हार ने टीम इंडिया को अपनी कमियों को दूर करने की रणनीति बनाने के लिए मजबूर किया। भारतीय टीम ने रणनीति बनाई और प्लेइंग इलेवन में बदलाव किया। टीम में संजू सैमसन की वापसी हुई और वह अभिषेक शर्मा के साथ पारी की शुरुआत करने लगे। इससे दाएं और बाएं हाथ का मजबूत कंबिनेशन बना। तीसरे नंबर पर ईशान किशन आने लगे। रिंकू सिंह को बाहर कर तिलक वर्मा को नीचे भेजा गया। सुंदर की जगह अक्षर लौट आए।

सैमसन की वापसी ओपनिंग मजबूत हुई। सैमसन 321 रन बनाकर प्लेयर ऑफ द सीरीज रहे। तिलक नीचे बल्लेबाजी करते हुए तेज खेलने लगे। अक्षर ने सेमीफाइनल और फाइनल में अपनी गेंदबाजी और फील्डिंग से कमाल किया। बदली रणनीति के साथ उतरी भारतीय टीम पहले ज्यादा मजबूत नजर आई और फिर दक्षिण अफ्रीका वाले मैच के बाद बिना कोई मैच गंवाए विश्व कप जीत लिया।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव इस बार कई चरणों के बजाय केवल एक चरण में आयोजित किए जाएं…

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माकपा की पश्चिम बंगाल इकाई के तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार सुबह चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य और राज्य सचिव मोहम्मद सलीम कर रहे थे। यह बैठक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में हुई, जो पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त पश्चिम बंगाल में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के रूप में पहचाने गए मतदाताओं के दस्तावेजों से जुड़े मामलों की न्यायिक प्रक्रिया की समीक्षा करने और विधानसभा चुनावों की तैयारियों का जायजा लेने आए हैं। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि उनकी पार्टी ने इस बार एक चरण में मतदान कराने की मांग की है या अधिकतम दो चरणों में लेकिन इससे अधिक चरणों में मतदान नहीं कराया जाए।

उन्होंने कहा, “हमने आयोग से पूछा कि उसने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) इतने अव्यवस्थित तरीके से करके आम मतदाताओं को अपना दुश्मन क्यों बना लिया। इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के जरिए आयोग ने आम लोगों के खिलाफ जैसे युद्ध छेड़ दिया हो। चुनाव आयोग ‘टॉर्चर कमीशन’ क्यों बन गया है? एक संवैधानिक संस्था के रूप में ईसीआई को अपनी गरिमा बनाए रखनी चाहिए।”

सोमवार सुबह कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने भी चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की।

बैठक के बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी ने चुनाव कितने चरणों में होंगे, इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है लेकिन आयोग से स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की मांग की है।

उन्होंने कहा, “चुनाव एक चरण, दो चरण या तीन चरण में हो, यह हमारा मुद्दा नहीं है। हमने आयोग से कहा है कि इस बार चुनाव पूरी तरह सुरक्षा व्यवस्था के तहत कराए जाएं, ताकि हिंसा, धांधली और मतदाताओं तथा विपक्षी दलों के एजेंटों को डराने-धमकाने की पुरानी घटनाएं दोहराई न जाएं। उन्होंने कहा कि अगर मतदान एक ही चरण में हो तो हमें खुशी होगी लेकिन हमारी प्राथमिकता सुरक्षा है और हमने यह बात चुनाव आयोग को स्पष्ट कर दी है।”

पीएम मोदी की पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर करीब से नजर, भारतीयों की सुरक्षा मुख्य चिंता…

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गल्फ देशों में भारी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं। ताजा हालात को देखते हुए भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत लाने का ऑपरेशन तेजी से जारी है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं, इसलिए यह लड़ाई भारत के लिए खास चिंता की बात है।

राज्यसभा में सत्र शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के दौरान भारतीय नागरिकों की मौत के मुद्दे को उठाने की कोशिश की, जिस पर विरोध शुरू हो गया। इसके बाद अध्यक्ष सी.पी. राधाकृष्णन ने खड़गे से अपने हस्तक्षेप को समाप्त करने का आग्रह किया और विदेश मंत्री को सदन में अपना बयान देने के लिए आमंत्रित किया। सदन में जोरदार नारेबाजी के बीच विदेश मंत्री जयशंकर ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुआ, जिसके परिणामस्वरूप व्यापक विनाश और इस्लामी शासन के कई वरिष्ठ नेताओं की मौत हुई और तब से हालात और खराब हो गए हैं।

उन्होंने बताया कि यह तनाव कई देशों में फैल गया है। सरकार ने 28 फरवरी को एक बयान जारी कर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ने से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था। हमारा मानना ​​था और तनाव कम करने और अंदरूनी मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी अपनाई जानी चाहिए। यह भी जरूरी है कि इस क्षेत्र के सभी देशों की संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता का सम्मान किया जाए।

डॉ. जयशंकर ने बताया, “हालात की गंभीरता को देखते हुए 1 मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट सुरक्षा समिति (सीसीएस) की मीटिंग हुई। इसमें ईरान में हुए एयरस्ट्राइक और उसके बाद कई खाड़ी देशों में हुए हमलों के बारे में जानकारी दी गई। सीसीएस इस इलाके में भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंतित थी। इसने इलाके की सुरक्षा और आर्थिक और कमर्शियल गतिविधियों पर पड़ने वाले असर पर भी ध्यान दिया।”

उन्होंने कहा कि कमेटी को इस इलाके में आने-जाने वाले भारतीय यात्रियों और इन देशों में तय परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों को होने वाली मुश्किलों के बारे में बताया गया। इसने सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों को इन समस्याओं से निपटने के लिए सही कदम उठाने का निर्देश दिया। प्रधानमंत्री नए डेवलपमेंट पर करीब से नजर रख रहे हैं और संबंधित मंत्रालय असरदार जवाब देने के लिए सहयोग कर रहे हैं।

भारत के विदेश मंत्री ने कहा, “लड़ाई लगातार बढ़ रही है और इलाके में सुरक्षा की हालत काफी खराब हो गई है। हमने देखा है कि असल में, लड़ाई दूसरे देशों में भी फैल गई है और तबाही और मौतें बढ़ रही हैं। पूरे इलाके में सामान्य जीवन और आर्थिक गतिविधियों पर साफ असर पड़ा है और कुछ मामलों में तो रुक भी गई हैं।

इसलिए, हमने 3 मार्च को बातचीत और डिप्लोमेसी की अपनी अपील दोहराई और लड़ाई को जल्द खत्म करने की बात कही। मुझे यकीन है कि पूरा सदन भी जानमाल के नुकसान पर दुख जताने में मेरे साथ है।”

भारतीय टीम की T20 वर्ल्ड कप जीत के बाद पीएम मोदी का मोटिवेशनल संदेश वायरल, जानें कौन सा है वो सफलता का मंत्र…

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भारत ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। अहमदाबाद में T20 क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल में भारत ने न्यूज़ीलैंड को हराकर तीसरी बार T20 वर्ल्ड कप जीत लिया। PM नरेंद्र मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक मोटिवेशनल कोट पोस्ट किया, जो वायरल हो रहा है।

अभिप्साम स्वात्मानो रक्षऽविरतं सुस्थिरं तया।
यत्नामातिष्ठ धैर्येन ततः सिद्धिर्भवेद ध्रुवम्।

इसका मतलब है: इंसान को अपने जीवन और आत्मा की रक्षा की इच्छा रखते हुए लगातार और पक्के इरादे से कोशिश करनी चाहिए। अगर वह सब्र के साथ लगातार कोशिश करता है, तो उसे सफलता ज़रूर मिलेगी। PM ने लिखा कि यह जीत हमें यह भी सिखाती है कि सही दिशा में कड़ी मेहनत से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

कड़ी मेहनत से सफलता मिलती है

यह श्लोक हमें कभी हार न मानने की प्रेरणा देता है, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों। अक्सर, मैच के शुरुआती ओवर खराब जाते हैं, विकेट जल्दी गिर जाते हैं, या दूसरी टीम मज़बूत स्थिति में आ जाती है, लेकिन जो खिलाड़ी सब्र रखते हैं और अपनी कोशिशों में लगे रहते हैं, वही मैच का रुख बदल देते हैं। ज़िंदगी में कोई भी बड़ी कामयाबी अचानक नहीं मिलती; यह लगातार मेहनत, सब्र और पक्के इरादे की ताकत है। मुश्किलें हर रास्ते में आती हैं, लेकिन जो लोग हिम्मत नहीं हारते, वही आखिर में कामयाबी की ऊंचाइयों तक पहुंचते हैं। सफलता का रास्ता सब्र, अनुशासन और लगातार कोशिश से बनता है। अगर कोई इंसान हार मानने के बजाय शांत मन से लगे रहे, तो नामुमकिन लगने वाले लक्ष्य भी मुमकिन हो जाते हैं। ज़िंदगी में लक्ष्य तय करें, सब्र रखें और कोशिश करते रहें – क्योंकि सच्ची कामयाबी उन्हीं को मिलती है जो कभी हार नहीं मानते।

उद्यम पोर्टल पर फरवरी 2026 तक पंजीकृत हुए 3.07 करोड़ से अधिक महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्योग…

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उद्यम पोर्टल पर फरवरी 2026 तक 3.07 करोड़ से अधिक महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्योग पंजीकृत हैं। यह जानकारी सरकार की ओर से सोमवार को संसद में दी गई।

राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न का उत्तर देते हुए, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि सरकार महिला उद्यमियों को समर्थन देने और लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए कई योजनाएं लागू कर रही है।

करंदलाजे ने कहा, “उद्यम पंजीकरण पोर्टल (यूआरपी) और उद्यम सहायता प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी, 2026 तक पंजीकृत महिला नेतृत्व वाले उद्यमों की कुल संख्या 3,07,42,621 है।” प्रमुख पहलों में से एक सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी योजना है, जिसे सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी ट्रस्ट के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत, बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा दिए गए ऋणों की गारंटी बिना कुछ गिरवी रखे या तृतीय-पक्ष गारंटी के दी जा सकती है।

महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को अन्य उद्यमों के 75 प्रतिशत की तुलना में 90 प्रतिशत तक की बढ़ी हुई ऋण गारंटी कवरेज प्राप्त होती है। उन्हें गारंटी शुल्क में 10 प्रतिशत की छूट भी मिलती है। सरकार प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के माध्यम से कौशल और उद्यमिता सहायता भी प्रदान कर रही है। यह कार्यक्रम कारीगरों और शिल्पकारों को छात्रवृत्ति सहायता के साथ-साथ बुनियादी और उन्नत कौशल प्रशिक्षण प्रदान करता है। प्रशिक्षण में उद्यमिता, वित्तीय साक्षरता और डिजिटल साक्षरता पर पाठ शामिल हैं।

लाभार्थियों को उनके व्यवसाय से संबंधित आधुनिक उपकरणों और औजारों के उपयोग के बारे में भी मार्गदर्शन दिया जाता है। यह योजना कारीगरों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अपने उत्पादों को सूचीबद्ध करने और ब्रांडिंग एवं प्रचार में सुधार करने में सहायता करके विपणन को भी बढ़ावा देती है। पारंपरिक उद्योगों के पुनरुद्धार हेतु निधि योजना (एसएफयूआरटीआई) के तहत क्षमता निर्माण और डिजिटल मार्केटिंग प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है। यह क्लस्टर-आधारित कार्यक्रम मूल्य श्रृंखला में कौशल विकास, जागरूकता सत्र और तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करता है। यह उत्पाद डिजाइन एवं विकास, एक्सपोजर विजिट, सेमिनार और कार्यशालाओं में भागीदारी तथा प्रौद्योगिकी उन्नयन जैसी गतिविधियों को भी समर्थन देता है।