माकपा की पश्चिम बंगाल इकाई के तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार सुबह चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य और राज्य सचिव मोहम्मद सलीम कर रहे थे। यह बैठक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में हुई, जो पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त पश्चिम बंगाल में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के रूप में पहचाने गए मतदाताओं के दस्तावेजों से जुड़े मामलों की न्यायिक प्रक्रिया की समीक्षा करने और विधानसभा चुनावों की तैयारियों का जायजा लेने आए हैं। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि उनकी पार्टी ने इस बार एक चरण में मतदान कराने की मांग की है या अधिकतम दो चरणों में लेकिन इससे अधिक चरणों में मतदान नहीं कराया जाए।
उन्होंने कहा, “हमने आयोग से पूछा कि उसने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) इतने अव्यवस्थित तरीके से करके आम मतदाताओं को अपना दुश्मन क्यों बना लिया। इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के जरिए आयोग ने आम लोगों के खिलाफ जैसे युद्ध छेड़ दिया हो। चुनाव आयोग ‘टॉर्चर कमीशन’ क्यों बन गया है? एक संवैधानिक संस्था के रूप में ईसीआई को अपनी गरिमा बनाए रखनी चाहिए।”
सोमवार सुबह कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने भी चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की।
बैठक के बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी ने चुनाव कितने चरणों में होंगे, इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है लेकिन आयोग से स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की मांग की है।
उन्होंने कहा, “चुनाव एक चरण, दो चरण या तीन चरण में हो, यह हमारा मुद्दा नहीं है। हमने आयोग से कहा है कि इस बार चुनाव पूरी तरह सुरक्षा व्यवस्था के तहत कराए जाएं, ताकि हिंसा, धांधली और मतदाताओं तथा विपक्षी दलों के एजेंटों को डराने-धमकाने की पुरानी घटनाएं दोहराई न जाएं। उन्होंने कहा कि अगर मतदान एक ही चरण में हो तो हमें खुशी होगी लेकिन हमारी प्राथमिकता सुरक्षा है और हमने यह बात चुनाव आयोग को स्पष्ट कर दी है।”



