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मसाज पार्लर का भंडाफोड़ करने वाली DCW चीफ स्वाति मालीवाल को मिलती है कितनी सैलरी

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मसाज पार्लर का भंडाफोड़ करने वाली DCW चीफ स्वाति मालीवाल को मिलती है इतनी सैलरी…

नई दिल्ली। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल इन दिनों मीडिया और सोशल मीडिया दोनों पर छाई हुई हैं। देश की राजधानी में चल रहे स्पा सेंटर यानी मसाज पार्लर पर स्वाति मालीवाल ने अपनी टीम के साथ छापेमारी की, तो बेहद चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। कई स्पा सेंटर में अंदर बने कमरों के भीतर लड़कियों के साथ नग्न हालत में लोग मिले तो कुछ कमरों से आपत्तिजनक सामान भी बरामद हुआ। स्वाति मालीवाल ने छापेमारी के ये वीडियो अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किए हैं। स्वाति मालीवाल इससे पहले भी कई बार इसी तरह की छापेमारी कर कई लड़कियों को देह व्यापार और तस्करों के चंगुल से निकाल चुकी हैं। आइए जानते हैं कि दिल्ली महिला आयोग के पद पर उन्हें कितनी सैलरी मिलती है।

इतनी है स्वाति मालीवाल की सैलरी

स्वाति मालीवाल जुलाई 2015 में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष बनाई गईं थी। इसके बाद 2018 में उनका कार्यकाल अगले तीन साल के लिए बढ़ा दिया गया। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में स्वाति मालीवाल को प्रति माह 30 हजार रुपए सैलरी और अन्य भत्ते मिलते हैं। अपनी सैलरी की जानकारी अगस्त 2018 में खुद स्वाति मालीवाल ने ही अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर की थी। दरअसल पिछले साल केरल में आई बाढ़ के समय स्वाति मालीवाल ने अपनी एक महीने की सैलरी केरल के मुख्यमंत्री राहत कोष में दान दी थी और इसकी जानकारी अपने ट्विटर हैंडल पर डाली थी।

मुख्यमंत्री जन शिकायत प्रकोष्ठ की प्रमुख रह चुकी हैं स्वाति

आपको बता दें कि दिल्‍ली महिला आयोग की अध्‍यक्ष बनने से पहले स्वाति मालीवाल दिल्ली सरकार में मुख्यमंत्री जन शिकायत प्रकोष्ठ की प्रमुख थीं। मुख्यमंत्री के जनता संवाद में आने वाले लोगों की समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी उन्हीं की थी। पिछली विधानसभा में स्वाति मालीवाल आम आदमी पार्टी के 27 विधायकों के MLA फंड के कामकाज की मॉनिटरिंग भी कर चुकी हैं। जन लोकपाल आंदोलन के लिए बनी इंडिया एगेंस्ट करप्शन की कोर कमेटी जिसमें अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण, किरण बेदी आदि सदस्य थे, उसमें स्वाति मालीवाल सबसे कम उम्र की सदस्य थीं।

समाजसेवा को करियर के तौर पर चुना

15 अक्टूबर 1984 को दिल्ली से सटे गाजियाबाद में जन्मीं स्वाति मालीवाल के पिता अशोक मालीवाल एयर फोर्स में रहे हैं जबकि मां संगीता मालीवाल वाइस प्रिंसिपल। स्वाति मालीवाल की शुरुआती शिक्षा अलग अलग शहरों में हुई। 2002 में उन्होंने एमीटी स्कूल, नोएडा से इंटरमीडिएट किया। इसके बाद 2006 में दिल्ली की आईपी यूनिवर्सिटी से इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में इंजिनियरिंग की डिग्री हासिल की। स्वाति के नजदीकी सूत्रों के मुताबिक इंजिनियरिंग के आखिरी दिनों में ही वो केजरीवाल से मिलीं और इसके बाद उन्होंने समाजसेवा को करियर के तौर पर चुनने का फैसला किया।

नवीन जयहिंद से हुई है स्वाति मालीवाल की शादी

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद स्वाति मालीवाल ने अरविंद केजरीवाल के एनजीओ ‘परिवर्तन’ से लेकर पर्यावरण के लिए काम करने वाले अंतराष्ट्रीय एनजीओ ‘ग्रीनपीस’ तक के लिए काम किया। अरविंद केजरीवाल के साथ जन वितरण प्रणाली में सुधार लाने और सूचना के अधिकार के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए स्वाति ने काफी काम किया। आंदोलन के दौरान ही स्वाति नवीन जयहिंद ले मिलीं और दोनों ने शादी कर ली। नवीन जयहिंद भी लोकपाल आंदोलन के काफी पहले से केजरीवाल के साथ जुड़े रहे हैं।

‘मसाज के नाम पर दिल्ली में जिस्म का धंधा’

गौरतलब है कि स्वाति मालीवाल दिल्ली में चल रहे स्पा सेंटर्स पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। बीते मंगलवार को स्वाति मालीवाल ने छापेमारी के वीडियो अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर करते हुए लिखा था, ‘मसाज के नाम पर दिल्ली में जिस्म का धंधा चला रखा है! हम नवादा के जैज्मिन स्पा और जन्नत स्पा पहुंचे तो हैरान रह गए! हर कमरे में लड़की के साथ नंगे आदमी मिले। भारी मात्रा में कंडोम बरामद हुए। मैनेजर और लड़कियों ने कबूला कि स्पा में सेक्स रैकट चल रहा है। तुरंत FIR हो! नवादा के जैज्मिन स्पा में स्कूल की छात्रा के साथ कमरे में दो आदमी नंगे पाए गए। पूछने पर कबूला कि सेक्स रैकट चल रहा है। कितने घटिया आदमी हैं जो दूसरों की बहनों को खुशी से रौंदते हैं! पुलिस और एमसीडी की नाक के नीचे गोरखधंधा कैसे फलफूल रहा है? कौन जिम्मेदार है? बंद क्यों नहीं करते?’

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की मां का निधन, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जताया शोक

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 मध्य प्रदेश के मुरैना संसदीय क्षेत्र से सांसद और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की मां शारदा देवी का सोमवार को दिल्ली में निधन हो गया। 92 वर्षीय शारदा देवी के निधन पर मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शोक जताया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सूत्रों के अनुसार, मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की मां का सोमवार को दिल्ली में निधन हो गया। तोमर की मां के निधन पर राज्य के कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। उनकी मां का अंतिम संस्कार ग्वालियर में होगा।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने केन्द्रीय मंत्री तोमर की मां शारदा देवी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि शारदा देवी सरल स्वभाव, आध्यात्मिक विचारों और संस्कारों वाली महिला थीं।

मुख्यमंत्री ने शोकाकुल परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति देने और दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने भी केंद्रीय मंत्री तोमर की मां के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “तोमर जी की माताजी शारदा देवी के निधन का दुखद समाचार मिला। मैं प्रार्थना करता हूं कि ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और परिजनों को यह वज्रपात सहन करने की शक्ति दे।”

नीलगाय को जेसीबी से जिंदा दबाने पर भड़कीं रवीना और ईशा, वीडियो शेयर कही ये बातें

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 बिहार के वैशाली में एक घायल नीलगाय को दफनाने के मामले पर अभिनेत्री रवीना टंडन और ईशा गुप्ता ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। दोनों अभिनेत्रियनों ने इसे एक शर्मसार करने वाली घटना बताया है। हाल ही में सोशल मीडिया पर ये वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक नीलगाय को पहले गोली मारी गई और फिर घायल अवस्था में उसे जिंदा ही मिट्टी में दबा दिया गया।

अभिनेत्री रवीना टंडन ने इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा, जिसने भी ऐसा करने का फैसला किया हो लेकिन इसे सही नहीं कहा जा सकता। यह अमानवीय है, उम्मीद करती हूं कि उस शख्स को अपने कर्मों का फल जरूर भोगने को मिलेगा।

अभिनेत्री ईशा गुप्ता ने इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, मुझसे ये देखा नहीं जा रहा। मैं यह बिल्कुल देखना नहीं चाहती लेकिन हम पशुओं पर क्रूरता के खिलाफ आंखें नहीं मूंद सकते हैं। कई दूसरे सितारों ने भी इस वीडियो को लेकर सवाल उठाए हैं।

बिहार के वैशाली में नीलगाय को गोली मारकर जिंदा दफनाने का यह मामला 1 सितंबर का बताया जा रहा है, मामले में प्रशासन जांच भी कर कर रहा है। वीडियो में दिखाया गया है कि एक घायल नीलगाय को जेसीबी से गड्ढे में गिराया गया और उस पर मिट्टी डालकर दबा दिया गया।

https://twitter.com/GitaSKapoor/status/1170286113455398913

जानकारी के मुताबिक, फसलों को लगातार हो रहे नुकसान को देखते हुए राज्‍य सरकार ने नीलगायों को मारने का आदेश दिया है। इस पर वैशाली में शूटर बुलाकर नीलगायों को मारा गया था। और मिट्टी में दफनाया जा रहा था। इसी में एक जिंदा नीलगाय को भी दफना दिया गया। जिसका वीडियो सामने आया है।

चेकिंग के दौरान मोबाइल फोन से बना सकते हैं वीडियो, ट्रैफिक पुलिस को रोकने का अधिकार नहीं

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1 सितंबर से संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद चालान की राशि में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। देश की तमाम जगहों से नियम तोड़ने पर जुर्माने की खबरें आ रही है। कई जगह 50 हजार रुपये तक का चालान भी काटा गया है। इस बीच कुछ जगहों पर लोगों के साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार की खबरें भी सामने आ रही हैं। ऐसे में वाहन मालिकों के भी कुछ अधिकार है। एक आरटीआई से इसके संबंध में बड़ी जानकारी सामने आई है।

मोबाइल फोन का कर सकते हैं इस्तेमाल

सड़क पर कोई भी वाहन चालक चैकिंग के दौरान पुलिसकर्मी के साथ बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग कर सकता है। इस दौरान मोबाइल कैमरे का इस्तेमाल भी कर सकता है। पुलिसकर्मी को उस वाहन चालक का फोन और कैमरा आदि छीनने और तोड़ने का अधिकार नहीं है। एक आरटीआई के जवाब में हरियाणा पुलिस ने ये जानकारी दी है। दरअसल
फरीदाबाद निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट अनुभव सुखीजा ने वाहन चालकों के अधिकार को लेकर हरियाणा पुलिस में एक आरटीआई दाखिल की।

आरटीआई के जवाब में पुलिस ने क्या कहा?

पुलिस ने बताया कि वाहन चलाते समय अगर किसी चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट आदि नहीं है तो वाहन चालक मोबाइल पर पुलिसकर्मी को कागजात दिखा सकता है। वाहन चलाते समय गाड़ी में हॉकी, क्रिकेट बैट, विकेट आदि सामान रखने पर कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन अवैध हथियार रखना दंडनीय अपराध है। पुलिस ने आगे बताया है कि वाहन चलाते समय चालक व चालक के साथ बराबर में बैठे व्यक्ति के लिए सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य है। लेकिन अगर कोई महिला गर्भवती है या चोट आदि है तो मानवता के आधार पर उन्हें सीट बेल्ट से छूट मिल सकती है।

‘मारपीट का अधिकार नहीं’

पुलिसकर्मी किसी भी वाहन को इशारा करके रोक सकता है, चैकिंग कर सकता है। अगर कोई वाहन चालक पुलिसकर्मी द्वारा रुकने के इशारे देने के बावजूद अपना वाहन नहीं रोकता है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई का अधिकार है। लेकिन पुलिसकर्मी किसी व्यक्ति को न तो गाली दे सकता है और न मारपीट कर सकता है। इसके अलावा पुलिसकर्मी को वाहन के प्रदूषण स्तर का सर्टिफिकेट चेक करने का अधिकार है।

‘बिल चेक करने का हक’

अगर कोई वाहन चालक अपने निजी वाहन में कमर्शियल उद्देश्य के लिए कोई सामान ले जाता है तो पुलिसकर्मी को उसका बिल चेक करने का अधिकार है। अगर किसी वाहन चालक को गाड़ी के कागजात चेक करने के लिए वो रुकवाता है तो चालक कागजात पुलिसकर्मी को दिखाने का जिम्मेदार होगा।

छत्तीसगढ़ : सीखने की ललक ऐसी, बालोद में 30 महिलाओं को बना दिया डिजिटल साक्षर

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कुछ सीखने के लिए उम्र बाधा नहीं होती। जज्बा हो तो कभी भी सफलता हासिल की जा सकती है। खुद के आत्मविश्वास पर कायम रहें तो मंजिल की चुनौती भी आसान हो जाती है। ऐसी ही कुछ कहानी है बालोद जिले की महिलाओं की। दुरपा साहू, निर्मला पटेल, पुनिया बाई साहू और अनिशा बेगम की। चारों महिलाओं में पढ़ने और तकनीक सीखने की इत कदर इच्छा शक्ति थी कि उन्होंने उम्र के बंधन को 60 की उम्र में कम्प्यूटर की शिक्षा हासिल की।

खास बात है कि चारों महिलाएं निरक्षर थीं। अक्षरों का ज्ञान न होने की मिथ्या को तोड़ कर महिलाओं ने डिजिटल शिक्षा को अपेक्षा ज्ञान को विस्तार दिया। खुद तो डिजिटल साक्षर हुईं ही, साथ ही 30 अन्य महिलाओं को भी जोड़कर डिजिटल साक्षर किया।

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर राज्य सरकार और राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के तत्वावधान में पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के नए सभागार में स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने सभी नव डिजिटल साक्षर और ई-एजुकेटर्स को पुरस्कार दिया।

ऑनलाइन चीजों की जानकारी के लिए सीखा कंप्यूटर

महिलाओं ने नईदुनिया से बातचीत में बताया कि ऑनलाइन चीजों और महिलाओं को डिजिटल शिक्षा देने के लिए डिजिटल साक्षर अभियान से जुड़ीं। अब कंप्यूटर में एमएस ऑफिस, पावर पाइंट, एक्सल, पेंट ब्रस और अन्य चीजों को आसानी से चला लेती हैं। साथ ही हिंदी में टाइप कर गूगल में कई चीजों की जानकारी ले लेती हैं। वहीं ईपेमेंट करना भी सीख लिया है।

प्रदेश की हर महिला बनेगी डिजीटल साक्षर- प्रेमसाय

आयोजन में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय ने कहा कि मुख्यमंत्री शहरी कार्यक्रम के अंतर्गत डिजिटल साक्षरता का कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। उनकी बेहतर सोच को साकार करने के लिए प्रदेश की हर महिला को डिजिटल साक्षर बनाया जाएगा, ताकि हम डिजिटल क्रांति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

ई-एजुकेटर्स व डिजिटल नवसाक्षरों का किया गया सम्मान

आयोजन में बतौर अतिथि रायपुर दक्षिण के विधायक बृजमोहन अग्रवाल, उत्तर विधायक कुलदीप जुनेजा, पश्चिम विधायक विकास उपाध्याय, ग्रामीण विधायक सत्यनारायण शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष शारदा वर्मा, रायपुर महापौर प्रमोद दुबे, स्कूल शिक्षा सचिव गौरव द्विवेदी, कलेक्टर एस. भारतीदासन, विशेष सचिव सौरभ कुमार और अन्य अधिकारी मौजूद थे। मौके पर 68 संस्थाओं और नव साक्षरों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

नवजीवन : आत्महत्या के विचार को मात देने की एक सार्थक पहल

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 मीडिया में रोज आत्महत्या की खबरें आती थीं। एक संवेदनशील अफसर को इससे तकलीफ हुई। उनके जेहन में एक सवाल आया-जीवन प्रकृति की अनुपम देन है। इसे खत्म करने का अधिकार न तो कानून देता है और न ही प्रकृति। फिर भी न जाने लोग क्यों खुद को खत्म कर लेते हैं? कारण जानने और इसे रोकने की ठानी। फिर शुरू हुआ नवजीवन कार्यक्रम।

आत्महत्या के बढ़ते आंकड़ों को रोकने और जनजागरूकता से नवजीवन का संकल्प कराने की ठानी है महासमुंद जिले के कलेक्टर सुनील कुमार जैन ने। उन्हें जब पता चला कि भारत में आत्महत्या के मामले में छत्तीसगढ़ चौथे नंबर पर है और छत्तीसगढ़ के 28 जिलों में खुदकुशी के मामले में महासमुंद जिला अव्वल है। तब उन्होंने एक नई शुरूआत करने की ठानी। महासमुंद जिले में आत्महत्या की रोकथाम के लिए नवपहल करते हुए नवजीवन कार्यक्रम का जून-2019 में आगाज हुआ। इससे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को जोड़कर जनजागरूकता से आत्मघाती कदम को रोकने हर संभव प्रयास किया जा रहा है।

ढाई साल में सात सौ ने दी जान

2017 से लेकर मई 2019 तक ढाई साल में करीब सात सौ आत्महत्याएं अकेले महासमुंद जिले में हुई है। आंकड़ा चौकाने वाला था। इनमें मरने वाले सर्वाधिक सवा दो सौ लोग तो 21 से 30 साल के युवा थे। तब तय किया गया कि युवाओं की जान बचाने और मानसिक परेशानी, अवसाद को दूर करने अभियान चलाया जाए। बीते तीन महीने में ढाई हजार से अधिक कार्यशाला और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा चुका है। इसमें तनाव प्रबंधन के गुर सीखाना, ग्राम पंचायत स्तर पर नवजीवन केंद्र की स्थापना कर वहां मनोरंजन के पर्याप्त साधन और खेल सामग्री की व्यवस्था, विशेषज्ञ चिकित्सों द्वारा निःशुल्क परामर्श से निराशा के भाव को खत्म करने और गांव स्तर पर सखा-सखी, नवजीवन प्रेरक को चिन्हांकित करके उनके माध्यम से लोगों को हर परिस्थिति में जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

570 नवजीवन केंद्रों की स्थापना

महासमुंद जिले में जनसामान्य को अवसाद से बचाने और मनोरंजन के माध्यम से आत्मघाती कदमों को रोकने के लिए 569 नवजीवन केंद्र अब तक स्थापित किए जा चुके हैं। इन केंद्रों में आउटडोर और इनडोर खेल सामग्री के अलावा प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही है। जिससे कि हर गांव-शहर स्तर पर कोई भी अवसादग्रस्त न होकर स्वस्थ मनोरंजन कर सकें।

अब हर मौत की होती है गहन जांच

जहर पीने, फांसी लगाने, आग लगाकर जीवनलीला समाप्त करने जैसे आत्मघाती कदमों की महासमुंद जिले में विशेष जांच की जा रही है। पुलिस की रूटीन जांच के अतिरिक्त तहसीलदार और डाक्टरों की टीम संबंधित व्यक्ति के घर पहुंचकर यह पड़ताल करती है कि आखिर मरने वाले ने आत्मघाती कदम क्यों उठाया? इस तरह खुदकुशी के मामलों को रोकने के लिए महासमुंद जिले में किया जा रहा यह प्रयोग अब पूरे प्रदेश के लिए माडल बन गया है। इसका अनुशरण अन्य जिलों में होने लगा है।

आखिर लोग क्यों करते हैं आत्महत्या ?

अब तक के अध्ययन में तनाव और अवसाद ही आत्महत्या के प्रमुख कारणों में चिन्हांकित किया गया है। छोटी-बड़ी समस्याएं सभी के जीवन में है। इन समस्याओं का समाधान नहीं ढूंढ पाने की वजह से लोग जान दे देते हैं। आत्महत्या को रोकने की दिशा में नवजीवन सखा-सखी और प्रेरक तनावग्रस्त लोगों को चिन्हांकित करने और उन्हें समुचित उपचार के लिए प्रेरित कर रहे हैं। एकाकीपन, आत्महत्या के बारे में अक्सर बातचीत करना, नकारात्मक दृष्टिकोंण, चिड़चिड़ापन और आक्रामकता, खुद से नफरत करना, भविष्य के लिए कोई उम्मीद नहीं होना, गुमशुम रहना, घातक वस्तुओं की तलाश करना, आत्महत्या करने के तरीके ढूंढना, आत्मविनाशकारी व्यवहार, मरने के पूर्व परिजनों के लिए व्यवस्था करना, अप्रत्याशित रूप से अलविदा कहना आदि लक्षण दिखने पर सखी-सखा ऐसे लोगों को चिन्हांकित कर जिला अस्पताल तक उपचार के लिए पहुंचाने का प्रबंध कर रहे हैं। जिससे कि आत्महत्या के दर में कमी आ सके।

मंतूराम का आरोप, डॉ रमन ने इस्तेमाल करके दिया धोखा

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 अंतागढ़ कांड में सुर्खियों में आए मंतूराम पवार ने एक बार फिर भाजपा नेताओं पर सवालों की बौछार की है। मंतूराम ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह पर आरोप लगाया कि उपचुनाव से नाम वापस लेने के बाद उनका सिर्फ इस्तेमाल किया गया। भाजपा ने न तो कोई पद दिया, न ही उनको कोई पैसा मिला। मंतूराम ने कहा कि डॉ रमन सिंह उपचुनाव के बाद भी चार साल सरकार में थे, लेकिन उन्होंने निगम-मंडल से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में कोई जिम्मेदारी नहीं दी। मैं विधानसभा चुनाव में विजेता उम्मीदवार था, लेकिन पार्टी ने टिकट तक देना उचित नहीं समझा। जब मैं पार्टी में शामिल हुआ था, तो बड़े-बड़े वादे किए गए थे। चुनाव में मेरा इस्तेमाल करके मुझे किनारे कर दिया गया। मंतूराम ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से मांग की कि वे पूरे मामले की जांच करें। क्या अंतागढ़ कांड के कारण ही पार्टी को 90 फीसदी सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इसके लिए कौन-कौन से नेता जिम्मेदार हैं, इसकी भी समीक्षा करनी चाहिए।

मंतूराम ने कांग्रेस छोड़ने के सवाल पर कहा कि वे भाजपा के कार्यकर्ता हैं। पार्टी कोई जवाबदेही देती है, तो उसे निभाएंगे। उनका कांग्रेस से कोई संपर्क नहीं है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से भी कोई मुलाकात नहीं हुई है, न की कांग्रेस प्रवेश को लेकर किसी ने संपर्क किया है। मंतूराम ने एक बार फिर दोहराया कि अगर अंतागढ़ कांड में साढ़े सात करोड़ की डील हुई है, तो उसकी भी जांच होनी चाहिए। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है। सरकार को उन नौ सदस्यों से भी पूछताछ करनी चाहिए, जिन लोगों ने नामांकन वापस लिया। उस समय कांकेर के एसपी रहे आरएन दास से भी पूछताछ होनी चाहिए कि उन्होंने किसके इशारे पर मुझे धमकाया। एसपी को कौन निर्देश दे रहा था कि वो बोलें कि नामांकन वापस नहीं लेने पर झीरम जैसी घटना हो सकती है।

चारों तरफ से घिरते जा रहे हैं डॉ रमन

मंतूराम ने कहा कि डॉ रमन सिंह चारों तरफ से घिरते जा रहे हैं। उनके बेटे और दामाद पर अलग से मामला चल रहा है। नान घोटाले में भी उनकी भूमिका नजर आ रही है। इस पर केंद्रीय नेतृत्व को देखना चाहिए और विचार करना चाहिए। मंतूराम ने कहा कि अंतागढ़ उपचुनाव के बाद की परिस्थितियों की भी केंद्रीय संगठन को समीक्षा करनी चाहिए।

21 वर्ष में कांग्रेस ने पांच बार दिया टिकट, एक बार बने विधायक

1987 में शिक्षक के रुप में कैरियर की शुरुआत करने वाले मंगतूराम ने 1993 में कांग्रेस की सदस्यता ली थी। 2014 में भाजपा प्रवेश करने से पहले तक कांग्रेस ने 21 वर्षों में उन्हें पांच बार विधानसभा का टिकट दिया। इसमें से एक बार जीते और तीन बार हारे। पांचवीं बार उन्होंने मैदान ही छोड़ दिया। भाजपा प्रदेवश किए उन्हें करीब पांच वर्ष हो गए हैं, लेकिन पार्टी में अब भी केवल प्राथमिक सदस्य हैं।

कांग्रेस ने उनके पार्टी में आने के पांच वर्ष बाद 1998 में हुए विधानसभा चुनाव में नारायणपुर सीट से टिकट दिया। मंगतूराम यह चुनाव जीत गए। 2003 में फिर कांग्रेस ने उन्हें नारायणपुर सीट से ही प्रत्याशी बनाया, लेकिन भाजपा के विक्रम उसेंडी से हार गए। 2008 के विधानसभा चुनाव से अंतागढ़ सीट अस्तित्व में आई। कांग्रेस ने फिर टिकट दिया, इस बार भी वे हार गए। 2013 के चुनाव में फिर पार्टी ने अंतागढ़ सीट से ही मंगतूराम पर दांव खेला लेकिन फिर वे इस बार भी हार गए। इसके बावजूद 2014 के उपचुनाव में कांग्रेस ने मंगतूराम पर भरोसा जताया। इस बार वे मैदान ही छोड़कर बाहर हो गए।

छत्तीसगढ़ : बाढ़ में खुद ही बूरे फंस गए लोगों को बचाने गए नेता जी, रेस्क्यू टीम ने ऐसे बचाई जान

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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में पिछले तीन दिनों से अलग अलग इलाकों में तेज बारिश (Rain) हो रही है. लगातार बारिश से कई जिलों में बाढ़ से हालात हो गए हैं. मुंगेली (Mungeli) जिले के कई इलाकों में बाढ़ (Flood) के हालात हैं. मुंगेली के सुरीघाट में बाढ़ में फंसे कुछ लोगों को बचाने के लिए पहुंचे एक नेता जी भी बाढ़ में बूरे फंस गए. रेस्क्यू टीम ने मुश्किल से उनकी जान बचाई. नेता जी पूर्व विधायक भी हैं. बाढ़ में फंसे नेता को बचाने प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया. मुंगेली (Mungeli) के सुरीघाट में बीते रविवार की शाम को कुछ लोगों के बाढ़ (Flood) में फंसे होने की सूचना पूर्व विधायक (Ex-MLA) और कांग्रेस (Congress) नेता चुरावन मंगेशकर को मिली. इसके बाद चुरावन अपने कुछ साथियों के साथ घटना स्थल पर पहुंचे. वहां कुछ देर देखने के बाद वे खुद ही पानी में उतर गए. कुछ आगे बढ़ने पर पानी का बहाव तेज मिला तो पूर्व विधायक खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे. इसके बाद रेस्क्यू टीम ने उन्हें काफी मशक्कत के बाद रस्सियों के सहारे बाहर निकाला.

छत्तीसगढ़ के कवर्धा के ग्राम डोमसरा में बाढ़ में फंसे करीब 20 लोगों को रेस्क्यू करके बाहर निकाला गया. गांव से होकर बहने वाली हाफनदी का जलस्तर बढ़ने से ये सभी फंस गए थे. गांव के बाहर नदी किनारे तीन-चार परिवार रहते थे. रविवार की सुबह नदी का पानी अचानक बढ़ गया. जब तक कुछ समझ पाते उससे पहले बाढ़ के पानी से चारो तरफ से घिर गए. मामले में प्रशासन के अलर्ट की पोल खोल कर रख दी है. सुबह आठ-नौ बजे से फंसे लोगों को शाम चार बजे बचाया गया. नगर सेना की रेस्क्यू टीम समय रहते यहां नहीं पहुंच सकी. पहुंची भी तो उनकी नाव का मशीन चालू ही नहीं हुई. बांस से नाव की तरह बतवार के सहारे दूसरे किनारे पर पहुंचे. मौके पर जरूर एसडीएम पंडरिया व तहसीलदार,पुलिस की टीम पहुंच गई थी, लेकिन बचाने के उपाय करने के बजाय पानी कम होने का इंतजार करते रहे.

पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह के आरोपी दामाद पुनीत गुप्ता पर शिकंजा कसने की तैयारी

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 छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) सुप्रीमो और पूर्व सीएम अजीत जोगी (Ajit Jogi) के बेटे अमित जोगी (Amit Jogi) के खिलाफ एफआईआर (FIR) के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह (Dr. Raman Singh) के दामाद पर शिकंजा कसने लगा है. डॉ. पुनीत गुप्ता (Dr. Punit Gupta) के कार्यकाल में डीकेएस (DKS) सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में हुई अनियमितता के लिए जांच कमेटी का गठन राज्य सरकार ने कर दिया है. इससे अमित जोगी के बाद अब रमन सिंह के दामाद पुनीत गुप्ता पर खतरे की तलवार लटक रही है.

राजधानी रायपुर (Raipur) के डीकेएस हॉस्पिटल में अनियमितता के मामला में सीएम भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) ने जांच के निर्देश दिये हैं, जिसमें मुख्य सचिव की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम का गठन किया गया है. हॉस्पिटल के निर्माण में शासकीय धन के अविवेकपूर्ण ढंग से व्यय की जांच के लिए मुख्य सचिव वित्त, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री और सचिव स्वास्थ्य सदस्य बनाए गये हैं. ये समिति विभिन्न बिन्दुओं पर जांच करके एक माह के भीतर अपना प्रतिवेदन सौंपेंगी. इसके अलावा मुख्यमंत्री ने सुपर स्पेश्यिलिटी अस्पताल के निर्माण पर हुए संपूर्ण व्यय का 2 माह में सीएजी से आडिट कराने के निर्देश भी सरकार की ओर से दिए गए हैं. साथ ही इसके निर्माण में छत्तीसगढ़ मेडिकल कार्पोरेशन की भी भूमिका रही है. इसलिए उसका भी आडिट साथ-साथ कराने को कहा गया है.

मामले को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर का कहना है पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और इसकी जांच होनी भी जरूरी है. इधर जांच को लेकर बीजेपी प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास का कहना है कि कांग्रेस सरकार लगातार बीजेपी नेताओं और उनसे जुड़े लोगों को टारगेट कर जांच करा रही है, लेकिन उनकी बनायी पिछली जांच कमेटियों में कुछ भी नहीं निकला. इससे साफ है कि सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए ऐसा किया जा रहा है.

PUBG खेलने से किया मना, बेटे ने मां को कमरे में किया बंद, फिर बाप की काट दी गर्दन

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कर्नाटक से एक बहुत ही दुर्दान्त खबर सामने आ रही है. यहां एक पिता ने अपने बेटे को PUBG खेलने से मना किया तो बेटे ने बाप की हत्या कर दी. मामला कर्नाटक के बेलगाम शहर की है. यहां एक 21 साल का कलयुगी बेटा अपने पिता का हत्यारा बन गया. रविवार रात बेटे ने अपने पिता की गर्दन रेतकर उनकी हत्या कर दी.

खबर के अनुसार, आरोपी के पिता को उसका हर समय मोबाइल पर पबजी गेम खेलना पसंद नहीं था. वह हर समय PUBG खेलता रहता है. इस कारण उसके पिता उससे गुस्सा होते रहते थे. आरोपी रघुवीर कुंभार रविवार की रात भी फोन पर पबजी खेल रहा था. जब उसके पिता शंकरप्पा ने यह देखा तो वह गुस्सा हो गए थे.

शंकरप्पा कई बार अपने बेटे को इस बात के लिए डांट लगा चुके थे. गेम खेलने को लेकर कई बार पिता और पुत्र में लड़ाई भी होती थी. रविवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ. इसके बाद रघुवीर ने अपना आपा खो दिया. पहले रघुवीर ने पहले अपनी मां को कमरे में बंद कर दिया. इसके बाद एक धारदार हथियार से पिता की गर्दन रेत दी. वह यहीं नहीं रुका. वह इतने क्रोध में था कि उसने पिता के हाथ-पैर भी उस हथियार से काट दिए.

क्या है PUBG?

PUBG एक ऑनलाइन गेम है. इसमें 100 खिलाड़ी एक विमान से उतरकर एक बड़े टापू पर जाते हैं. इसके बाद सब के सब हथियार ढूंढकर एक-दूसरे को मारना शुरू कर देते हैं. इसमें खिलाड़ी 4 लोगों का समूह भी बना सकते हैं. इसमें हर खिलाड़ी का अंतिम लक्ष्य जिंदा बचे रहना होता है.

बच्चो को इस गेम की लत तब तक नहीं लगती जब तक वे इसे केवल मनोरंजन के लिए खेलते हैं. बच्चे जब इसे पद (level) RP (गेम का एक भाग) के लिए खेलना शुरू करते हैं तो उन्हें इसकी लत लग जाती है. इसमें उन्हें चिंता रहती है कि कहीं उनका level न घट जाए. इस कारण वह इसे पूरे दिन खेलने लगते हैं.