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मोदीराज मे अब बर्बादी की कगार पर पुहंचा NHAI, चल रहा है देश का सबसे बड़ा घोटाला

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भारत सरकार का एक उपक्रम है भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI , जो मोदीराज मे अब बर्बादी की कगार पर पुहंच गया है निर्माण परियोजनाओं की बढ़ती लागत और कर्ज का बोझ एनएचएआई के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है

हालात इस कदर काबू के बाहर हो गए हैं कि 17 अगस्त को PMO से नृपेंद्र मिश्रा ने एक पत्र में NHAI को लिखा है…. ‘राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण सड़कों के अनियोजित और अत्यधिक विस्तार के कारण पूरी तरह से ठप्प पड़ गया है। NHAI ज़मीन की लागत का कई गुना भुगतान के लिए बाध्य हुआ; इसकी निर्माण लागत काफ़ी बढ़ गई। सड़क का बुनियादी ढाँचा आर्थिक रूप से अलाभकारी हो गया है।’

एनएचएआई पर कर्ज का बोझ खासा बढ़ गया है और चालू वित्त वर्ष के अंत तक कुल कर्ज बढ़कर 2.5 लाख करोड़ रुपये हो जाने की उम्मीद है। NHAI के पूर्व चेयरमैन बृजेश्वर सिंह ने टेलीविजन पर एक साक्षात्कार में कहा कि वास्तविक अनुमानित देनदारी पांच गुना अधिक होकर 3 लाख करोड़ रुपये तक भी हो सकती है।

इस स्थिति से CAG भी चिंतित है सीएजी ने इसके लिए वित्त मंत्रालय को आगाह करते हुए कहा है कि NHAI द्वारा लिया गया ऋण सरकार के लिए भी ऋण है, और उसी के मुताबिक इसका हिसाब होना चाहिए.

PMO अब चाहता है कि हाइवे निर्माण के लिए पुरानी व्यवस्था अपनाई जाए जहाँ NHAI डेवलपर्स के लिए परियोजनाओं की नीलामी करे ओर डेवलपर्स सड़कों का निर्माण करें, टोल टैक्स वसूलें और फिर एक तय समय के बाद सड़क को एनएचएआई को वापस सौंप दें

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर NHAI इस स्थिति तक कैसे पुहंच गया क्या कोई बड़ा घोटाला पूरे देश भर में चल रहे हाईवे निर्माण में चल रहा है, ….पांच साल पहले तक NHAI हर साल 3-4 हजार करोड़ रुपये जुटाता था ओर उसी पैसे से रोड बनाई जाती थी लेकिन इन पांच सालों में यह रकम 17-18 गुना तक बढ़ गई … वित्त वर्ष 2014-15 में NHAI ने बाजार से करीब 3,340 करोड़ रुपये ही जुटाए थे। लेकिन 2017-18 में उसने करीब 50 हजार करोड़ रुपये तथा 2018-19 में 62 हजार करोड़ रुपये का कर्ज बाजार से जुटाए…

दरअसल हाइवे विस्तार में NHAI को भूमि अधिग्रहण करना पड़ता है देश के राजमार्ग खेती कर रहे किसान की जमीन से गुजरते हैं, बताया जा रहा है कि NHAI हाइवे निर्माण के लिए बाजार दर से अधिक भाव में जमीन का अधिग्रहण कर रही है जिससे हाईवे निर्माण की लागत पिछले तीन साल में करीब 4 गुना तक बढ़ गई है। भूमि अधिग्रहण में NHAI आवंटित निधि से ज्यादा खर्च कर रही है..

NHAI ने 2017 के आखिर में लार्सन एंड टूब्रो, एचसीसी और एस्सेल इंफ्रा जैसी बड़ी कंपनियों को अटकी हुई परियोजनाओं के लिए बोली लगाने से प्रतिबंधित कर दिया था…लेकिन इस मंत्रालय के गडकरी जी ने इस काली सूची संबंधी आदेश पर अस्थायी रोक लगाते हुए 2018 की पहली छमाही में बैंकरों, कंपनियों और अन्य पक्षों के साथ मैराथन बैठकें कर इस सूची को लगभग निरस्त करवा दिया ओर बड़ी सड़क निर्माण परियोजनाओ को पुनः शुरू करवा दिया गया जिसके ठेकों में लाखो करोड़ की रकम इन्वॉल्व थी

NHAI के पास आय के दो ही स्रोत हैं।…पहला रोड सेस से मिलने वाली हिस्सेदारी और दूसरा राजमार्गों पर एकत्र किया जाने वाला टोल टैक्स। हालांकि पिछले पांच वर्षों में दोनो में खासी बढ़ोतरी हुई है। लेकिन कर्ज में बढ़ोतरी के मुकाबले ये काफी कम है..यह आमदनी अठन्नी ओर खर्चा रुपय्या वाली कहावत पर चलने की बात है

भूमि अधिग्रहण पर एनएचएआई की लागत हर साल बढ़ती ही जा रही है यह वित्त वर्ष 2016-17 में 17,824 करोड़ रुपये थी, जो 2017-18 में दोगुनी होकर 32,143 हो गई. माना जा रहा है कि भूमि अधिग्रहण के लिए NHAI मार्केट से सवा लाख करोड़ रुपए लोन उठा चुकी है, जिसका सालाना ब्याज ही 9 हजार करोड़ रुपए है। ऐसे में NHAI ब्याज के बोझ से दबती जा रही है।

2018 में NHAI ने भारतीय स्टेट बैंक SBI से 25,000 करोड़ रुपए का दीर्घकालीन कर्ज लिया है यह एसबीआई द्वारा किसी भी कंपनी को दिया जाने वाला बिना गारंटी वाला (असुरक्षित) सबसे बड़ा कर्ज है

लेकिन इस लोन से भी अब NHAI का कामकाज चलने वाला नही है इसलिए अब उस उसने भविष्य की राजमार्ग परियोजनाओं जैसे भारतमाला परियोजना के लिए जीवन बीमा निगम LIC से 1 लाख 25 हजार करोड़ रुपये की ऋण सुविधा लेने का फैसला किया है….जबकि पहले ही पिछले पाँच साल में एनएचएआई पर क़र्ज़ सात गुना बढ़ चुका है

यानी सब ले देकर LIC पर ही छप्पर धरने की तैयारी कर रहे हैं अगर यही हालात रहे तो 2024 तक LIC को डूबने से कोई ताकत बचा नही पायेगी…..

मोदी के मंत्री गिरिराज सिंह बोले- देश में लगाएंगे गाय की फैक्ट्री, अब सिर्फ बछिया होंगी पैदा…

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अपने बयानों से अक्सर सुर्खियों में रहने वाले केंद्रीय पशुपालन मंत्री गिरिराज सिंह ने महाराष्ट्र के नागपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कई विवादस्पद बयान दिए हैं। मदर डेयरी के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि अब तकनीक के जरिए देश में सिर्फ बछिया (गायें) पैदा होंगी। उन्होंने इसे मॉब लिन्चिंग को भी जोड़ दिया। गिरिराज सिंह ने कहा कि आनेवाले समय में तकनीक के इस्तेमाल से देश में मादा गायों का ही जन्म होगा। इसके बाद न ही आवारा पशु सड़कों पर होंगे और ना मॉब लिंचिंग होगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “2020 तक देश में 2 करोड़ बछिया होंगी, जिससे 2 साल के अंदर विदर्भ के युवा किसान गाय रखेंगे। हम गायों की फैक्ट्री लगा देंगे, इससे जो गाय दूध देने लायक नहीं रहेगी वह भी तकनीक से दूध देगी।”

उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “विदर्भ में बहुत छोटी-छोटी गाएं होती हैं। जो एक लीटर, दो लीटर दूध देती हैं। मैं तीन साल के अंदर दिखा दूंगा कि कोई भी विदर्भ का नौजवान सौ छोटी वाली गाय रख लें, जो धूध नहीं देने वाली हैं। हम ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करेंगे की जो गाएं दूध नहीं दे रही हैं, वो भी दूध देना शुरू कर देगीं।”

इससे पहले भी गिरिराज सिंह कई विवादस्पद बयान दे चुके हैं। हाल ही में उन्होंने अपने एक बयान में जनसंख्या को धर्म से जोड़ते हुए कहा था कि जनसंख्या नियंत्रण पर धार्मिक व्यवधान भी एक वजह है। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत सन सैंतालीस की तर्ज पर सांस्कृतिक विभाजन की ओर बढ़ रहा है।

सब्जियों ने भी तोड़ी कमर , प्याज की कीमत ने निकाले लोगों के आंसू…

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देश भर में प्याज की सबसे अधिक पैदावार करने वाली मंडी नासिक (महाराष्ट्र) तथा कर्नाटक में भारी बारिश से प्याज की फसल तैयार होने से पहले ही बर्बाद हो गई है।

खाद्य पदार्थों पर पहले से महंगाई की मार झेल रहे लोगों के आंसू अब प्याज निकाल रहा है। एक माह के भीतर ही दामों में दोगुणा इजाफा हो गया है। हालांकि, इसके लिए कर्नाटक व महाराष्ट्र में तेज बारिश के चलते तबाह हुई फसल को प्रमुख कारण माना जा रहा है। लिहाजा, सब्जी मंडी में प्याज ही नहीं। वहीं, अन्य सब्जियों ने भी कमर तोड़कर रख दी है। आलम यह है कि समान्य दिनों में एक किलो सब्जी खरीदने वाले लोग अब आधा किलो ही खरीद रहे हैं। दरअसल, देश भर में प्याज की सबसे अधिक पैदावार करने वाली मंडी नासिक (महाराष्ट्र) तथा कर्नाटक में भारी बारिश से प्याज की फसल तैयार होने से पहले ही बर्बाद हो गई है। इसके चलते स्टॉकिस्ट को नई फसल आने की संभावना नहीं रही है। यहीं कारण है कि माह भर पूर्व 20 रुपये प्रति किलो बिक रहे प्याज के दाम बढ़ाकर 40 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुके हैं। 

– सब्जियों के दाम भी बढ़े 
प्याज ही नहीं, सब्जी मंडी में सब्जियों ने भी आंखें तरेर ली हैं। सबसे अधिक महंगा मटर बिक रहा है। इसके रिटेल में दाम 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुके हैं। यही स्थिति 50 रुपये प्रति किलो बिक रही पालक, 40 रुपये बिक रही गोभी व करेला की भी है। इनके दाम बढ़ने के पीछे भी बारिश के चलते फसल तबाह होने को बताया जा रहा है।

-अभी 20 दिनों तक झेलनी होगी महंगाई 

थोक व रिटेल सब्जी के कारोबारी विशाल कुमार बताते हैं कि बीस दिनों के बाद लोकल सब्जी आने की संभावना है। इसके साथ ही राजस्थान के अलवर से प्याज की आमद हो सकती है। लिहाजा, आगामी बीस दिनों तक लोगों को सब्जी पर महंगाई की मार झेलनी पड़ सकती है। 

– किलो वाले ग्राहक खरीद रहे आधा किलो 
सब्जी के रिटेल कारोबारी जगदीश ढल्ल बताते हैं कि समान्य दिनों में एक किलो सब्जी व पांच किलो प्याज खरीदने वाले ग्राहक आधा किलो सब्जी व दो किलो प्याज की खरीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रिटेल कारोबारियों का भी सब्जी की खरीद पर निवेश बढ़ गया है। इस कारणवह भी खरीद कम कर रहे हैं। 

सब्जी पहले अब 
प्याज 20 रुपये 40 रुपये 
टिंडा 20 रुपये 30 रुपये 
मटर 60 रुपये 100 रुपये 
टमाटर 20 रुपये 30 रुपये 
अरबी 20 रुपये 30 रुपये 
करेला 20 रुपये 40 रुपये 
पालक 25 रुपये 50 रुपये 
गोभी 40 रुपये 50 रुपये 
गाजर 20 रुपये 3 5 रुपये 
नींबू 40 रुपये 50 रुपये 
मिर्च 40 रुपये 50 रुपये 

गैस की समस्या से पीड़ित हैं तो अपने भोजन से इन 3 चीजों को हटा दें, तीसरी चीज है यह…

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पेट में गैस की समस्या होना आजकल अधिकतर लोगों के लिए आम बात हो गई है। और आजकल बहुत से लोग पेट में गैस बनने की समस्या से परेशान रहते हैं। पेट में गैस बनने से पाचन तंत्र को नुकसान होता है। और शरीर की कार्यप्रणाली भी खराब हो जाती है। कई बार पेट में गैस बनने से भयंकर दर्द भी होने लगता है। जिसकी वजह से कोई भी काम करने में मन नहीं लगता है। पेट में गैस की समस्या से पीड़ित लोगों के लिए आज हम ऐसी तीन चीजों के बारे में बताएंगे जिनके सेवन से पेट में गैस की समस्या बढ़ जाती है। इसलिए इन 3 चीजों का सेवन करना बंद कर दे। आइए जानते हैं। पेट में गैस की समस्या से पीड़ित है तो अपने भोजन से इन 3 चीजों को हटा दें, क्लिक करके जानें।

1. आलू और प्याज

आलू और प्याज का सेवन अधिकतर लोग करते हैं। और आलू और प्याज का इस्तेमाल सब्जी बनाने में भी किया जाता है। लेकिन आलू और प्याज का सेवन ज्यादा खाने से पेट में गैस की समस्या पैदा हो जाती है। और आलू और प्याज की सब्जी खाने से पेट में भयंकर गैस बनकर दर्द होने लगता है। इसलिए आलू और प्याज का सेवन कम से कम करें।

2. फास्ट फूड

आजकल अधिकतर लोग घर का शुद्ध खाना खाने की बजाय बाहर का फास्ट फूड खाना पसंद करते हैं। जो खाने में स्वादिष्ट होता है। लेकिन इसमें अधिक तेल मसालें और मिलावटी चीजें इस्तेमाल की जाती है। जो पाचन तंत्र को खराब कर देती है। और इससे पेट में गैस की भयंकर समस्या बन जाती है। इसलिए फास्ट फूड का सेवन बिलकुल नहीं करें।

3. दूध

दूध का नाम सुनकर आप चौंक गए होंगे। लेकिन दूध पीने से भी पेट में गैस बनती है। इसलिए रात को सोते समय कभी दूध नहीं पीना चाहिए। वरना पेट में भयंकर गैस बनने लगती है। दूध का सेवन रोज सुबह करना चाहिए।

भिलाई-3 के लिए भी की गई चर्चा, अहिवारा को लेकर उठी ऐसी मांग…

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अहिवारा को तहसील बनाने के लिए अहिवारा के नागरिकों ने राज्यमंत्री जयसिंह अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि पूर्व सरकार में अहिवारा तहसील घोषित हुआ था, और भवन भी निर्माण हो गया है। उसके बाद वर्तमान सरकार द्वारा इसे खारिज कर भिलाई तीन को एक विधानसभा में एक तहसील का निर्माण हो इस उद्देश्य से वहां तहसील की घोषणा कर दी गई है। इससे अहिवारा के लोगों में रोष है।

अहिवारा एवं आसपास के ग्रामीणों वरिष्ठ जनों के द्वारा बताया गया कि अहिवारा मुख्यालय में 1983 से उप तहसील के रूप में संचालित हो रहा है तथा अहिवारा में नया भवन तहसील भी बनाया गया है। 1.50 कराोड रुपए की लागत से रेस्ट हाउस का भी निर्माण किया गया है।

भोगोलिक दृष्टिकोण से भी अहिवारा उपयुक्त जगह है और आने जाने वाले ग्रामीणों को भी दिक्कत नहीं होती है, परंतु अहिवारा को भी तहसील का दर्जा दिया जाए, और भिलाई-3 में तहसील बनाया गया है उसका भी स्वागत करते हैं। राज्यमंत्री जय सिंह अग्रवाल को अहिवारा एवं आसपास क्षेत्र के नागरिकों ने ज्ञापन सौंपा है।

इस अवसर पर ईश्वर शर्मा, विद्यानंद कुशवाहा, नटवर ताम्रकार, वकील टांडी, सतीश साहू, भूपेंद्र सिंह, उमेश पासवान, विनोद गंधर्व, गोपाल सिंह ठाकुर, लक्ष्मण क्षत्री, पवन जैन, प्रकाश राठौर, अश्वनी टंडन, सौरभ सिंह जागृत, ज्ञानदत्त शुक्ला, नंदकुमार देवांगन, राजकुमार ताम्रकार, राजाराम साहू आदि उपस्थित थे।

पूर्व में की गई है प्रकिया

छत्तीसगढ़ सरकार ने नए ब्लॉक बनाने के लिए पूर्व मुख्य सचिव सुयोग्य कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में ब्लाक पुनर्गठन आयोग बनाया था। आयोग ने जिले व तहसील से प्रस्ताव मांगे थे इसके बाद 27 जिलों में से 97 ब्लाक व तहसील की अनुशंसा की गई। राज्य सरकार ने इसे केंद्र सरकार को भेजा था क्योंकि इसके लिए दिल्ली से अनुमति जरूरी थी। 27 नए ब्लाक व तहसील की अनुशंसा में अहिवारा भी नए ब्लाक व तहसील के लिए स्वीकृत हुआ है।

लालू प्रसाद यादव की किडनी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुई है, महज 37 फीसद ही कर रही है काम…

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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू यादव की किडनी को गंभीर क्षति हुई है। यह जानकारी उनका इलाज कर रहे डॉक्टर पीके झा ने दी। बताते चलें कि लालू प्रसाद यादव रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस अस्पताल में भर्ती हैं। वह करोड़ों रुपए के चारा घोटाला मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद जेल की सजा काट रहे हैं।

राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में लालू यादव का इलाज कर रहे डॉक्टर पीके झा ने कहा ने कहा कि लालू यादव की किडनी महज 37 प्रतिशत काम कर रही है। उनकी 63 प्रतिशत किडनी क्षतिग्रस्त हो गई है। उनकी स्थिति पिछले एक सप्ताह से अस्थिर है।

उन्होंने यह भी बताया कि लालू प्रसाद यादव के खून में संक्रमण हो गया है। लालू यादव को एक छोटा फोड़ा हो गया था, जो बाद में बड़ा हो गया था और उसका ऑपरेशन कर दिया गया है। फोड़े के उपचार के दौरान ही खून में संक्रमण होने का पता चला। यादव को एंटीबायोटिक दवा दी जा रही है, जिसकी वजह से किडनी अब 50 फीसद की जगह महज 37 फीसद ही काम कर रही है।

लालू यादव डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, किडनी और अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं। वह चार चारा घोटाला मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद 14 साल की जेल की सजा काट रहे हैं। वह पिछले एक साल से रिम्स में उपचार करवा रहे हैं।

अगर तीज के त्यौहार में लगाने वाली हैं मेहंदी तो जरूर पढ़ें ये रिपोर्ट…

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सुंदर दिखने के लिए प्रयोग की जा रही केमिकल युक्त हेयर डाई, मेंहदी, बिंदी और सिंदूर त्वचा का रोग दे रहे हैं। इससे सावधान रहने की जरूरत है। इनके प्रयोग से डर्मेटाटिस का खतरा है। इसे एक्जिमा कहा जाता है। यह त्वचा से जुड़ी गंभीर बीमारी है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की शोध में यह बात सामने आई है।

इसकी रिपोर्ट शनिवार को सार्वजनिक की गई। शोध करने वाली डॉक्टर रीति भाटिया ने बताया कि 106 मरीजों पर जनवरी 2015 से अक्तूबर 2017 के बीच शोध किया गया। इसमें 77 महिलाएं और 29 पुरुष शामिल थे। बतादें कि रीति भाटिया वर्तमान में एम्स ऋषिकेश में कार्यरत हैं।

हेयर डाई का प्रयोग अधिक : शोध में 21 तरह के सौंदर्य प्रसाधन के प्रयोग की बात सामने आई थी। एक्जिमा की बीमारी के लिए सबसे ज्यादा हेयर डाई को कारण माना गया है। हर्बल मेहंदी, साबुन, लिपिस्टिक, नेल पॉलिश, शैंपू, सनसक्रीन, बिंदी, सिंदूर, स्कीन लाइटिंग क्रीम भी एक्जिमा का कारण बन रहे हैं। शोध के दौरान 35 फीसदी लोगों में केमिकल वाले हेयर डाई और फेयरनेस क्रीम से बीमारी होने की समस्या आम दिखी है। एक्जिमा की जगह त्वचा के रंग में बदलाव भी देखा गया।

कोई नियमावली नहीं 
एम्स चर्म रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने बताया कि हेयर डाई और हर्बल मेहंदी में पीपीडी मिला होता है, जिससे एक्जिमा होता है। इसके अलावा सिंदूर और बिंदी में भी गैलेट मिलाया जाता है, जिससे यह बीमारी होती है। इन चीजों का निर्माण का असंगठित क्षेत्र के लोगों द्वारा होता है, जिसे लेकर कोई नियमावली नहीं है। इसपर दिशा-निर्देश लाए जाने की आवश्यकता है।

आईआईटी रुड़की के साथ मिलकर जांच 
हर्बल डाई में किस तरह के केमिकल मिले होते है, उसे लेकर एम्स ऋषिकेश और आईआईटी रूड़की के साथ मिलकर जांच की जा रही है। कुछ अंतराष्ट्रीय शोध में भी इस बात की पुष्टि हुई है कि इससे एक्जिमा हो रहा है।

मसाज से त्वचा ढीली 
एम्स के चिकित्सकों ने कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया कि जरूरत से ज्यादा मसाज कराने से त्वचा ढीली हो जाती है। इससे भी एलर्जी होने की संभावना बढ़ जाती है।

लेजर थेरेपी से इलाज 
हेयर डाई लगाने के दौरान जब सिर धोया जाता है तो चेहरे पर डाई का पानी आता है। इससे चेहरे पर उसका असर देखने को मिलता है। अगर ऐसे सौंदर्य प्रसाधनों के प्रयोग से शरीर पर कुछ असर होता है, तो तुरंत उपयोग बंद करें। इस बीमारी का इलाज लेजर थेरेपी की मदद से 70 फीसदी तक संभव है।

गणेश चतुर्थी के विज्ञापन पर भड़के सोशल मीडिया यूजर, किया रेड लेबल का बॉयकट, देखिए वीडियो…

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देश की प्रमुख चाय विक्रेता कंपनियों में शामिल रेड लेबल (Red Label Tea) का अब सोशल मीडिया (Social Media) पर बहिष्कार करना शुरू हो गया है। गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) को लेकर जारी विज्ञापन पर विवाद हो रहा है। विज्ञापन में हिंदू-मुस्लिम सद्भाव कायम करने की कोशिश एक तबके को पसंद नहीं आयी।

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जिसके बाद फेसबुक से लेकर टि्वटर पर हैशटेग #BoycottRedLabel ट्रेंड कर रहा है। सोशल मीडिया पर यूजर्स की तरफ से धर्म विशेष की छवि खराब करने के आरोप कंपनी पर लगाए जा रहे हैं। जबकि दूसरे समुदायक की छवि को चमकाने की कोशिश किए जाने की बात कही जा रही है।

आखिर विज्ञापन में क्या है

रेड लेबल कंपनी ((Red Label Tea Advertisement)की तरफ से 13 सितंबर 2018 को विज्ञापन बनाया गया था। जिसमें गणेश चतुर्थी से पहले ग्राहक भगवान गणेश की मूर्ति लेने पहुंचता है। मूर्तिकार जब गणेश की मूर्ति दिखाता है तो ग्राहक कहता है ये चार भुजाओं वाली तस्वीर। तब मूर्तिकार कहता है कि ये अभय मुद्रा मूर्ति है।

तभी मूर्तिकार छोटे बच्चे को चाय लाने को बोलता है। इस दौरान ग्राहक मूषक के साथ बप्पा की मूर्ति मांगता है। जब बप्पा की मूर्ति दिखाता है तो ग्राहक कहता है कि हां है तो बप्पा अपने वाहन के साथ। तब मूर्तिकार कहता है कि आप जानते हैं मूषक कौन हैं। मूषक बप्पा का वाहन बनने से पहले एक असुर था।

तभी अजान की आवाज सुनाई देती है। मूर्तिकार जेब से टोपी निकालकर पहन लेता है। इसके बाद ग्राहक वहां से बिना मूर्ति खरीदे कल आने की बात कहकर जाने लगता है। तब तक चाय आ जाती है तो मूर्तिकार कहता है कि भाईजान कम से कम चाय पीते जाइये।

नमाज अदा करने वाले हाथ बप्पा को सजाएंगे तो हैरानी तो होगी ही। तब ग्राहक पूछता है कि ये ही काम क्यों तो मूर्तिकार कहता है ये भी तो एक इबादत है। कल मिलेंगे आएंगे न। उसके बाद ग्राहक कहता है न, बप्पा की मूर्ति बुक कर दीजिए। मूर्तिकार पूछता है कौनसी वो चार हाथ वाली। नहीं अभय मुद्रा वाली।

इन कंपनियों का भी हुआ है बहिष्कार

इससे पहले जोमेटो (zomato) और ऊबर (Uber) का भी जमकर बहिष्कार किया जा चुका है। जोमेटो से खाना आर्डर करने के बाद ग्राहक को पता चला कि डिलीवरी करने वाला धर्म विशेष से है तो उसने आर्डर कैंसल कर दिया। जिसको लेकर जोमेटो की तरफ से टि्वट आने के बाद विवाद हुआ था। इसी तरह ऊबर से कैब बुक करने के बाद गाड़ी में मूर्ति लगे होने पर महिला ग्राहक ने बैठने से इंकार कर राइड निरस्त कर दी थी। इससे पहले साबुन निर्माता कंपनी रिन डिटर्जेंट (Rin Detergent Powder) के दिवाली पर आए विज्ञापन पर काफी बवाल हुआ था।

कोलकाता के पूर्व मेयर का दो हफ्ते में ही भाजपा से मोहभंग, पार्टी छोड़ने की तैयारी…

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कोलकाता (Kolkata) के पूर्व महापौर (Former Mayor) सोवन चटर्जी ने “लगातार अपमान” से तंग आकर भाजपा (BJP) छोड़ने का मन बना लिया है. वो इस महीने की शुरुआत में ही बीजेपी में शामिल हुए थे. सोवन की करीबी सहयोगी बैशाखी बनर्जी ने शनिवार को यह दावा किया. चार बार तृणमूल कांग्रेस से विधायक रहे सोवन 14 अगस्त को नई दिल्ली में बैशाखी के साथ भाजपा में शामिल हुए थे.

बैसाखी ने यहां पत्रकारों से कहा, “भाजपा में शामिल होने के बाद से ही, हमें लगातार बिना किसी कारण अपमानित किया गया. सोवन चटर्जी ने सक्रिय राजनीति से फिलहाल विश्राम लिया था. मैंने ही उन्हें वापस लाने और भाजपा में शामिल कराने में मुख्य भूमिका निभाई थी.” बैशाखी ने कहा, “लिहाजा, हमने पार्टी छोड़ने की इच्छा प्रकट की है. अगर जरूरत हुई तो हम भाजपा नेतृत्व को अपने इस्तीफे भेज देंगे.”

भाजपा का मामले पर टिप्पणी करने से इनकार 

हालांकि उन्होंने स्पष्ट रूप से नहीं बताया कि उन्हें भाजपा से नाता तोड़ने पर विचार क्यों करना पड़ा. नई दिल्ली में जब वह भाजपा में शामिल हुए थे तो उस समय भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भी वहां मौजूद थे. एक समय तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विश्वासपात्र रहीं बैशाखी को इसकी सार्वजनिक घोषणा करनी बाकी है. भाजपा की राज्य इकाई के नेतृत्व ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि वह दोनों नेताओं से बातचीत करेंगे. 

पहले सर्जरी हुई हो तब भी कर सकते हैं नेत्र दान, जानिए कॉर्निया से जुड़े तथ्य

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कई लोगों को यह भ्रम होता है कि हमारे रिश्तेदार ने तो पहले से ही आंखों का ऑपरेशन करवा रखा था तो अब उनकी आंखें दान में नहीं दी जा सकेंगी। हमारे देश में लाखों लोग दान में मिलने वाली नेत्रज्योति की राह तकते रह जाते हैं और परिजनों की वजह से मृतक के शरीर से नेत्र (कॉर्निया) प्राप्त करना असंभव हो जाता है। याद रखें कि आंखों के ऑपरेशन हो चुकने के बाद भी नेत्रदान कराया जा सकता है।

हमारे देश में कई युवा ऐसे हैं जो कॉर्निया में किसी खराबी के कारण अंधत्व भुगत रहे हैं और उनकी नेत्रज्योति दान में प्राप्त कॉर्निया के प्रत्यारोपण से लौटाई जा सकती है। कई बार आंखों में किसी वजह से चोट लगने के कारण अथवा संक्रमण के कारण कॉर्निया खराब हो जाता है। इसके अलावा कुपोषण के चलते विटामिन ए की कमी अथवा विरासत में प्राप्त बीमारियों की वजह से भी कॉर्निया खराब हो जाता है और मरीज की देखने की शक्ति खत्म हो जाती है। कई बार गांवों में प्राथमिक उपचार के तौर पर दिए गए ड्राप्स का गलत इस्तेमाल भी मुश्किल खड़ी कर सकता है।

क्या होता है कॉर्निया

कॉर्निया आंखों का सबसे आगे वाला हिस्सा होता है जो एकदम स्वच्छ और निर्मल होता है। किसी भी वस्तु को देखने के लिए इसी के माध्यम से फोकस किया जाता है। यह कॉर्निया प्रकृति की ओर से बनाया जाता है। किसी बीमारी, संक्रमण अथवा किसी अन्य कारण से जब कॉर्निया धुंधला हो जाता है तो मरीज को दिखना बंद हो जाता है। इसका इलाज केवल कॉर्निया प्रत्यारोपण से ही हो सकता है। संक्रमण के कारण कॉर्निया गल जाता है और आंख फूटने तक का खतरा रहता है।

नेत्रदान करने वालों की भारी कमी है

देश में यद्यपि नेत्रदान के प्रति लोगों में जागरूकता आई है लेकिन अभी भी दान में मिलने वाले कॉर्निया की भारी कमी है। लोग अक्सर इसे लेकर आगे नहीं आते। नेत्रदान में कॉर्निया तथा उसके आसपास का हिस्सा जिसे स्क्लेरा कहा जाता है वह प्राप्त किया जाता है।

मृत देह के प्रति मोह

समाज में नेत्रदान के प्रति अब भी भ्रांतियां एवं गलत मान्यताएं व्याप्त हैं। मान्यता यह भी है कि मृतक की देह से कोई हिस्सा लिया गया या कॉर्निया लिया गया तो अगले जन्म में वह बिना आंख के पैदा होगा। ये सब झूठी मान्यताएं हैं जिनकी वजह से पर्याप्त संख्या में नेत्र दान में कॉर्निया प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं।

इतनी बड़ी है संख्या

कॉर्निया की वजह से अंधत्व का अभिशाप झेल रहे करीब 8.4 मिलियन भारतीय कॉर्निया प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण के मुताबिक हर साल लगभग 30 हजार नेत्र प्रत्यारोपण होते हैं। यह संख्या बहुत ही कम है। अंधत्व की समस्या के निवारण के लिए कम से कम हर साल 1 लाख से अधिक लोगों को कॉर्निया ट्रांसप्लांट किए जाने चाहिए। देश में इसके लिए पर्याप्त संख्या में संसाधन एवं तकनीकी क्षमता मौजूद है। मुख्य समस्या केवल दान में हासिल होने वाले कॉर्निया की कम संख्या ही है।

एलर्जी के कारण खराब होने वाला कॉर्निया

बच्चों में खासकर 18 साल की उम्र से पहले आंखों में एलर्जी की वजह से खुजली होने के कारण चश्मे का नंबर आ जाता है। कई केसेस में सिलेंड्रिकल नंबर आ जाते हैं। ज्यादा खुजली करने की वजह से कॉर्निया पतला और बेलनाकार होने लगता है। इस बीमारी को केरेटोकोनस कहते हैं। इसको और बढ़ने से रोकने के लिए ऑपरेशन द्वारा कॉर्निया को कड़क किया जा सकता है।

अगर आकार काफी खराब हो जाए तो कॉर्निया बदला जा सकता है। इस प्रक्रिया को लेगलर केरेटोप्लास्टी कहा जाता है। इसमें मरीज के कॉर्निया के अंदरूनी हिस्से को बचाते हुए बाहरी पतले और खराब हिस्से को बदल दिया जाता है

कब हासिल करें मृत देह से कॉर्निया

मृतक की देह से मृत्यु के कम से कम छह घंटों के अंदर कॉर्निया प्राप्त कर लेना चाहिए। मृतक की पलकों को इस

अवधि में बंद ही रखना चाहिए। इसी के साथ एक गीला कपड़ा आंखों पर डाल देना चाहिए। परिजनों द्वारा नेत्रदान की सहमति देने पर सबसे नजदीकी आई बैंक को बुला लेना चाहिए। आई बैंक से आने वाली टीम चंद मिनटों में नेत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया संपन्न कर लेती है। याद रखें की मोतियाबिंद ज्यादा पक जाने या कड़क हो जाने के बाद

सर्जरी की जटिलता बढ़ जाती है। साथ ही सक्रिय सेल्स की संख्या भी कम हो जाती है। इन कारणों की वजह से कॉर्निया में सूजन आ जाती है और उसकी पारदर्शिता कम हो जाती है।

इससे निपटने के लिए कॉर्निया एवं उसके साथ के हिस्से के सेल्स को अति सूक्ष्म तरीके से मरीज की आंखों में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस प्रक्रिया को एंडोथीलियल कैराटोप्लास्टी कहा जाता है।

कृत्रिम कॉर्निया पर हो रहा है काम

देश के अग्रणी हॉस्पिटल एम्स में बीते 2 सालों में 10 मरीजों पर कृत्रिम कॉर्निया का सफलता पूर्वक प्रत्यारोपण किया गया है। ये कॉर्निया बायो इंजीनियर्ड कोलाजेन से निर्मित किए गए हैं। शोध कर्ताओं का मानना है कि कृत्रिम कॉर्निया का प्रत्यारोपण आसान है।

समाज आगे आए

नेत्रदान के प्रति समाज में जो भी कुरीतियां और भ्रांतियां फैली हुई हैं उनका निवारण हर स्तर पर किया जाना चाहिए। हर उम्र के लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करना चाहिए।

एलर्जी के कारण खराब होने वाला कॉर्निया

बच्चों में खासकर 18 साल की उम्र से पहले आंखों में एलर्जी की वजह से खुजली होने के कारण चश्मे का नंबर आ जाता है। कई केसेस में सिलेंड्रिकल नंबर आ जाते हैं। ज्यादा खुजली करने की वजह से कॉर्निया पतला और बेलनाकार होने लगता है। इस बीमारी को केरेटोकोनस कहते हैं। इसको और बढ़ने से रोकने के लिए ऑपरेशन

द्वारा कॉर्निया को कड़क किया जा सकता है।

अगर आकार काफी खराब हो जाए तो कॉर्निया बदला जा सकता है। इस प्रक्रिया को लेगलर केरेटोप्लास्टी कहा जाता है। इसमें मरीज के कॉर्निया के अंदरूनी हिस्से को बचाते हुए बाहरी पतले और खराब हिस्से को बदल दिया जाता है।