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40 हजार पुलिसकर्मी ‘भक्तों के विघ्नहर्ता’ की सुरक्षा में तैनात होंगे…

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मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में गणपति बप्पा के आगमन को लेकर माहौल भक्तिमय है। बीएमसी जहां सड़कों पर बने गड्ढों को पाटकर गणपति आगमन को सुचारू बनाने में जुटी हुई है। वहीं, मुंबई पुलिस इस दौरान सुरक्षा के तमाम बंदोबस्त करने में जुट गई है। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद देश में बने हालात के मद्देनजर प्रशासन मुंबई में 2 सितंबर से होने वाले गणेशोत्सव को लेकर खास सतर्कता बरत रहा है।

मुंबई पुलिस से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इस बार मुंबई की सुरक्षा कई मायनों में अहम होगी। धारा 370 विवाद के चलते पाकिस्तान पोषित आंतकी संगठनों द्वारा दी जा रही धमकी और खुफिया अलर्ट के मद्देनजर मुंबई पुलिस गणेशोत्सव सुरक्षा इंतजाम को चुनौती के तौर पर ले रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस बार 40 हजार पुलिसकर्मियों को सुरक्षा बंदोबस्त में लगाने की योजना है। क्राइम ब्रांच की सभी यूनिट्स, आंतक निरोधक दस्ता, रैपिड ऐक्शन फोर्स, बम निरोधक दस्ता, श्वान दस्ता, खुफिया विभाग और सुरक्षा से संबंधित तमाम एजेंसियां मुंबई व महाराष्ट्र में व्यापक पैमाने पर आयोजित होने वाले गणपति उत्सव की निगरानी करेंगे।

इसके अलावा शहर में 5000 इंस्टाल सीसीटीवी से नजर रखी जाएगी। बड़े मंडलों को भी सीसीटीवी लगाने के लिए कहा गया है। मुंबई में इस बार 7703 सार्वजनिक,132452 घरगुती और 11667 गौरी गणेश की स्थापना हो रही है। मुंबई में 129 सार्वजनिक विसर्जन स्थल बनाए गए हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए मंडलो में विशेष पुलिस टीम तैनात रहेंगी। पूजा के दौरान 53 रास्ते बंद रहेंगे ,56 रास्तों को वनवे किया गया है। 18 रास्तों पर भारी वाहनों को बन्द किये गए हैं। RPF की तीन बटालियन, NDRF की दो यूनिट्स, BDDS की छह टीमें, SRPF की दो टुकड़िया, QRT और दंगा निरोधक दस्ता की अतिरिक्त दो टीमें तैनात की जाएंगी। इसके अलावा नजदीकी राज्यों से अतिरिक्त सुरक्षा भी मांगने पर विचार किया जा रहा है। सादी वर्दी में पुलिसकर्मी गणेशोत्सव पर भी नजर रखेंगे।

दो दिन में 25 लाख लोगों ने देखा निरहुआ की फिल्म ‘लल्लू की लैला’ का यह गाना…

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उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले दिनेशलाल यादव निरहुआ एक बार फिर अपनी भोजपुरी फिल्मों में अभिनय से धमाल मचा रहे हैं। निरहुआ के गाने या फिल्म के वीडियो यूट्यूब पर रिलीज होते ही वायरल हो जाते हैं। इसी क्रम में वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी ने दो दिन पहले भोजपुरी फिल्म ‘लल्लू की लैला’ का एक गाना ‘जवनिया भइल उड़नबाज’ यूट्यूब पर अपलोड किया था। इस गाने से इंटरनेट पर धमाल मचा रखा है। इस वीडियो को अब तक पच्चीस लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। इस गाने में निरहुआ यामिनी सिंह के साथ जबरदस्त ठुमके लगाते नजर आ रहे हैं।

ऐसी भी जानकारी मिली है कि निरहुआ अपनी आने वाली फिल्म ‘निरहुआ द लीडर’ में नेता की भूमिका में दिखेंगे। इस फिल्म में दिनेश के विपरीत अभिनेत्री आम्रपाली दुबे होंगी। फिल्म के निर्देशक वाई जितेंद्र ने बताया कि ओमांस फिल्म्स क्रिएशन के बैनर तले बनने वाली ‘निरहुआ द लीडर’ का म्यूजिकल मुहूर्त हाल ही में संपन्न हुआ है। हिंदी और तेलुगू फिल्मों का निर्देशन कर चुके वाई जितेंद्र ने कहा कि फिल्म की शूटिंग 26 अगस्त से आजमगढ़ और नेपाल में शुरू होगी, जबकि इसे दिसम्बर 2019 में रिलीज किए जाने की संभावना है।

गणेश पंडाल में छोटे कपड़े पहनकर जाने पर पाबंदी…

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2 सितंबर से देश भर में गणेश उत्सव की शुरुआत हो रही है तैयारियां लगभग अंतिम चरण में है। वहीं मुम्बई के सबसे चर्चित गणेश पंडालों में से एक अँधेरी का राजा ने अजीब फरमान निकाला है। फरमान है कि छोटे कपड़े यानी शार्ट स्कर्ट, शार्ट पेंट पहनकर आने वालों को बप्पा के दर्शन की अनुमति नही होगी।

अँधेरी का राजा मुम्बई में बेहद चर्चित गणपति पंडाल है जिसमें लाखों भक्तों के साथ साथ कई बड़े सेलेब्रिटी भी दर्शन करने आते हैं। मगर अब ये गणेश पंडाल अपने अजीब फरमान के लिए चर्चा में आया है। दरअसल इस पंडाल में पोस्टर लगाए गए हैं जिसमें लिखा गया है कि शॉर्ट स्कर्ट, शार्ट पेंट पहनकर आने वालों को गणपति बप्पा के दर्शन नही करने दिए जाएंगे। इसकी लिए मंडल भारतीय संस्कृति का हवाला दे रहा है।

वहीं इस विवाद पर अँधेरी का राजा पंडाल के प्रवक्ता उदय सालियान का कहना है की जो दूर दराज से भक्त आएंगे उन्हें खाली हाथ नही जाने देंगे और उनके लिए लुंगी की व्यवस्था की जाएगी। मगर स्थानीय भक्त छोटे कपड़ों पर परहेज करें। यह त्यौहार स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने 1894 में शुरू किया गया था। इस त्यौहार पर ड्रेस कोड निर्धारित करने वाला यह राज्य का पहला मंडल बन गया है। सलियान के मुताबिक, ’13 साल की उम्र से ऊपर के हर व्यक्ति को, चाहे पुरुष हो या महिला, इस नियम का पालन करना ही पड़ेगा। ऐसा न करने पर उन्हें पंडाल के अंदर नहीं आने दिया जाएगा।’ गौरतलब है कि अंधेरी मंडल में करीब 20 लाख श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए आते हैं, जिनमें अलग-अलग जगह के टॉप सिलेब्रिटीज भी शामिल होते हैं

कौन है पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार, क्या है थरूर की पत्नी सुनंदा की मौत से उनका कनेक्शन…

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सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर पर शिकंजा कसता जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि घर के नौकर ने बयान दिया है कि शशि थरूर और सुनंदा पुष्कर के बीच में अक्सर लड़ाई होती थी। इस मामले में शशि थरूर के खिलाफ सुनंदा को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज करना चाहती है। पुलिस का मानना कि पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार के साथ शशि थरूर के रिश्ते थे।

सुनंदा पुष्कर की मौत से पहले शशि थरूर और मेहर तरार के बीच की नजदीकियां सामने आईं थीं। मेहर तरार को सुनंदा ने पाकिस्तान की आईएसआई का एजेंट भी बताया था।
मेहर और सुनंदा के बीच हुए ट्वीट वॉर ने उस दौर में सोशल मीडिया पर सनसनी मचा दी थी।

सुनंदा ने मेहर तरार पर लगाए थे गंभीर आरोप : मेहर तरार पाकिस्तान की महिला पत्रकार हैं और लाहौर में रहती हैं। थरूर और तरार की मुलाकाल दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी।

सुनंदा ने तरार पर आरोप लगाया था कि जब वे (सुनंदा) इलाज के लिए गई थीं तब तरार ने उनके पति का ‘पीछा’ किया और उनकी शादी ‘तोड़ने’ की कोशिश की। उन्होंने कुछ समाचार पत्रों से कहा था कि वह थरूर के कथित विवाहेतर संबंधों को लेकर उनसे तलाक लेने के बारे में सोच रही हैं। पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार ने थरूर के साथ किसी भी तरह के संबंध होने के आरोपों को खारिज कर दिया।

सुनंदा की मौत पर मेहर ने किया था यह ट्वीट : सुनंदा की मौत पर सुनंदा की मौत के बाद तरार ने ट्वीट किया कि मैं अभी अभी सो कर उठी और यह पढ़ा। मैं स्तब्ध हूं। यह इतना भयावह है कि कुछ कहने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। बहुत ज्यादा त्रासद..मैं समझ नहीं पा रही कि क्या कहूं। सुनंदा पुष्कर की आत्मा को शांति मिले। एक अन्य ट्वीट में तरार ने कहा कि उफ्फ। सुनंदा, या अल्लाह।

सोशल मीडिया पर लगते रहे हैं यह कयास : वरिष्ठ कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर और पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार की शादी को लेकर अकसर सोशल मीडिया पर कयास लगाए जाते रहे हैं। हालांकि मेहर तरार ने इन खबरों को फर्जी बताती है।

उल्लेखनीय है कि शशि थरूर की पत्नी और मशहूर सोशलाइट सुनंदा पुष्कर 17 जनवरी 2014 को दिल्ली के एक होटल में रहस्यमयी हालात में मृत पाई गई थीं।

पति को फंसाने प्रेमी के साथ मिलकर पत्नी ने रची थी ये खौफनाक साजिश, खुद फंसी…

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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के राजनांदगांव (Rajnandgaon) में एक महिला अपनी ही साजिश का शिकार हो गई. प्रेमी के साथ मिलकर रची गई इस साजिश में वो खुद फंस गई. इस साजिश में महिला के प्रेमी (Lover) का एक दोस्त भी शामिल था. पुलिस (Police) ने तीनों को गिरफ्तार (Arrest) कर लिया है. आरोपी महिला ने प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही पति को नक्सली साबित करने की साजिश रच रखी थी, लेकिन वो अपने मंसूबे में कामयाब हो पाती, इससे पहले पुलिस ने उसके साथियों के साथ उसे गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म भी ​कबूल कर लिया है.

राजनांदगांव पुलिस (Rajnandgaon Police) से मिली जानकारी के मुताबिक मामला डोंगरगांव (Dongargaon) के कविराजटोला गांव का है. कविराजटोला निवासी पवन ज्ञानचंदानी का अपनी पत्नी निर्मला ज्ञानचंदानी से पिछले कई दिनों से ​विवाद चल रहा था. इसके चलते दोनों अलग अलग रहते हैं. महिला निर्मला अपने प्रेमी इमानवेल (30) के साथ पेंड्री स्थित अटल आवास में रहती थी. पति से बदला लेने के लिए उसने प्रेमी के साथ मिलकर साजिश रची.

एक ऐसा गणेश मंदिर जो बताता है आजादी के दीवानों की दास्तान…

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अंग्रेजी शासनकाल में संपूर्ण भारतवासियों को एकसूत्र में पिरोने और जन-जन में भक्ति-भावना जगाने के उद्देश्य से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाल गंगाधर तिलक ने ‘गणेश पर्व’ की शुरुआत की थी। उसी दौर में राजधानी की पुरानी बस्ती, टुरी हटरी के समीप गणेश मंदिर की स्थापना हुई थी।

देश को आजादी दिलाने के लिए जब भी छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजधानी में एकत्रित होते थे, और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए योजनाएं बनाते थे, योजनाओं को अमल में लाने से पूर्व वे टुरी हटरी के पास स्थित भगवान श्रीगणेश के दर्शन करके अपने-अपने मोर्चों पर रवाना होते थे। राजधानी में यह एक मात्र गणेश मंदिर है, जिसकी स्थापना हुए 100 साल से अधिक का समय बीत चुका है।

मंदिर निर्माण करने वाले शास्त्री परिवार के वंशज रविंद्र कुमार झा बताते हैं कि उनके नाना धर्मध्वज शास्त्री ने मंदिर का निर्माण करवाया था। उस समय मंदिर से थोड़ी ही दूर से घनघोर जंगल शुरू हो जाता था। पुरानी बस्ती के जैतूसाव मठ, दूधाधारी मठ, नागरीदास मठ जैसे प्रसिद्ध मंदिरों में भगवान श्रीराम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान विराजते थे।

तब भगवान श्रीगणेश का एक भी मंदिर नहीं था। उनकी मां ने उन्हें बताया था कि तब उनके नाना ने श्रीगणेश मंदिर बनाने का संकल्प लिया। चूंकि भगवान श्रीगणेश को प्रथम पूज्य देव माना जाता है, इसलिए सबसे पहले लोग अपने शुभ कार्यों की शुरुआत करने इसी मंदिर में आते थे।

बनारस से लाई गई थी गणेश की मूर्ति

100 साल पहले राजधानी से बनारस जाने के लिए ट्रेन सुविधा नहीं थी। उस समय बैलगाड़ी में महीनों का सफर करके भगवान श्रीगणेश की मूर्ति को लाकर प्रतिष्ठापित किया गया था। श्री झा बताते हैं कि उन्होंने पिताजी से सुना है कि जब गणेश पर्व की शुरुआत देश भर में हुई तब भक्ति का ऐसा माहौल था कि पचासों मील का सफर तय करके ग्रामीण रायपुर पहुंचते थे।

सालों से हर संडे भजन-कीर्तन

मंदिर में मैथिल ब्राह्मण समाज के लोग हर संडे को भजन-कीर्तन करते हैं। यह सिलसिला 100 साल से लगातार चल रहा है। चार-पांच पीढ़ी गुजर गई, लेकिन भजन-कीर्तन बंद नहीं हुआ।

दक्षिणमुखी मंदिर में मांगते हैं मन्नत

दक्षिण दिशा में भगवान गणेश की प्रतिमा होने से भक्तगण इसे विशेष फलदायी मानते हैं। कहा जाता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत भगवान गणेश अवश्य पूरी करते हैं। मंदिर का निर्माण करने वाले धर्मध्वज शास्त्री का पूरा परिवार आज भी कोई भी शुभ कार्य करने से पहले भगवान गणेश को निमंत्रण देते हैं।

बूढ़ा तालाब के सामने 40 साल पहले बना गणेश मंदिर

यूं तो गणेश पर्व पर राजधानी में 15 हजार से अधिक प्रतिमाओं की स्थापना घर-घर में और पंडालों में की जाती है लेकिन वास्तव में कुछ ही गणेश मंदिर हैं जहां प्रतिदिन भक्तों की भीड़ लगती है। ऐसा ही एक मंदिर ऐतिहासिक बूढ़ातालाब के ठीक सामने श्याम टाकीज के बगल में दक्षिणमुखी गणेश मंदिर है। इसकी स्थापना 1979-80 में हुई थी।

पनवाड़ी को स्वप्न में हुए थे दर्शन

पुजारी वीरेन्द्र शुक्ला बताते हैं कि सदर बाजार के एक पनवाड़ी को भगवान गणेश स्वप्न में दिखाई दिए थे। भगवान ने पनवाड़ी को आदेश दिया कि सरोवर के किनारे मंदिर बनवाओ। इसके बाद पनवाड़ी और अन्य भक्तों के प्रयास से मंदिर का निर्माण किया गया।

भाटापारा से लाई प्रतिमा

मंदिर में प्रतिष्ठापित एक ही पत्थर से निर्मित प्रतिमा को राजधानी से 50 किलोमीटर दूर भाटापारा से लाया गया।

एक वस्त्र एक बार

मंदिर की पूजन परंपरा के अनुसार गणेश प्रतिमा को एक वस्त्र एक ही बार पहनाया जाता है। दोबारा उस वस्त्र का इस्तेमाल नहीं किया जाता। प्रतिदिन भक्तगण ही वस्त्र सेवा पूजा करने का जिम्मा लेते हैं। कई-कई दिनों तक वस्त्र पूजा की बुकिंग हो जाती है।

15 हजार भक्तों के लिए भंडारा

मंदिर में जब वार्षिकोत्सव मनाया जाता है तब 15 हजार से अधिक भक्तों के लिए भंडारे की व्यवस्था की जाती है। सुबह से लेकर रात तक भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने तांता लगा रहता है।

मुंबई के सिद्धि विनायक समता कॉलोनी में विराजे

मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धि विनायक मंदिर के स्वरूप को समता कॉलोनी के निगम काम्पलेक्स के सामने मेन रोड पर विराजित किया गया है। यहां प्रतिदिन सुबह-शाम आरती में भक्त उमड़ते हैं।

पुजारी पं.मनोज उपाध्याय बताते हैं कि मात्र 15 साल पहले गणेश पर्व पर गणेश प्रतिमा बिठाने वाली समिति जय विजय गणेश उत्सव समिति के सदस्यों ने मंदिर का निर्माण करवाया। यहां पर दिशाओं में सर्वश्रेष्ठ मानी जाने वाली दिशा ईशान पूर्व में भगवान श्रीगणेश विराजे हैं। उनके माता पार्वती-शिव उत्तर दिशा में और हनुमानजी दक्षिण दिशा में विराजित हैं। कुछ ही सालों में मंदिर की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल चुकी है।

सीएम के प्रोटोकाल टीम से नदारत चिकित्सक को नोटिस…

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शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चरोदा के चिकित्सा अधिकारी डॉ.अंशुमन चौधरी को सीएमएचओ ने कारण बताओ नोटिस जारी कर जबाव मांगा है। जवाब संतोष जनक नहीं होना पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

सीएमएचओ डॉ.गंभीर सिंह ने बताया कि डॉ.अंशुमन चौधरी की ड्यूटी 31 अगस्त को मुख्यमंत्री के प्रोटोकॉल टीम के साथ लगाई गई थी। मुख्यमंत्री का कार्यक्रम धमधा ब्लाक के बीरेभाठ में था, लेकिन डॉ.अंशुमन चौधरी के अनुपस्थित रहने से अन्य चिकित्सक को भेजकर चिकित्सीय व्यवस्था करवानी पड़ी। इस दौरान उक्त चिकित्सक से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन चिकित्सक ने कॉल अटेंड नहीं किया। उक्त कृत्य को कर्तव्य के प्रति लापरवाही मानते हुए सीएमएचओ ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। मामले में उक्त चिकित्सक को अपना पक्ष रखने तीन दिन का समय दिया गया है। जवाब संतोष जनक नहीं पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

मनरेगा में एक करोड़ 86 लाख का भुगतान बकाया…

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मनरेगा में निर्माण सामग्री और मजदूरी को मिलाकर अभी भी एक करोड़ 86 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान बकाया है। इसमें से 40 लाख रुपये मजदूरी शामिल है। वहीं निर्माण सामग्रियों को भुगतान एक से डेढ़ साल तक बकाया होना बताया जा रहा है।

केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के तहत विभिन्ना निर्माण कार्य कराया जाता है। गर्मी के दिनों ने सड़क, डबरी, तालाब निर्माण सहित कई कार्य कराया जाता है।वहीं बारिश के दिनों में पौधारोपण कराया जा रहा है। राज्य सरकार की नरवा, गरवा, घुरुवा, बाड़ी योजना का काम भी मनरेगा के माध्यम से कराया जा रहा है। जिला पंचायत से प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2019-20 में वित्तीय वर्ष में 71 करोड़ 63 लाख 23 हजार रुपये का लक्ष्‌य रखा गया था। जिसमें वास्तविक व्यय 43 करोड़ 75 लाख पांच हजार रुपये दर्शाया गया है। मजदूरी पर व्यय 37 करोड़ 30 लाख 10 हजार रुपये और निर्माण सामग्री पर व्यय पांच करोड़ सात लाख 80 हजार रुपये किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी भी 40 लाख 75 हजार रुपये मजदूरी भुगतान बकाया बताया जा है। लंबित सामग्री भुगतान एक करोड़ 45 लाख 44 हजार रुपये है। सामग्री की बकाया राशि भुगतान को लेकर सरपंच पिछले कई महीने से जनपद व जिला पंचायत का चक्कर काट रहे हैं।

भुगतान नहीं मिलने से पंचायत परेशान

निर्माण सामग्रियों का भुगतान नहीं मिलने से पंचायत परेशान है। दुर्ग ब्लाक सरपंच संघ के अध्यक्ष रिवेंद्र यादव ने बताया कि निर्माण सामग्रियों के बकाया का भुगतान प्रायः सभी ग्राम पंचायतों में लंबित है। लेनदार सरपंचों को भुगतान के लिए परेशान भी करते हैं। कई पंचायतों में निर्माण सामग्री की राशि का भुगतान एक से डेढ़ साल में भी नहीं हो पाया है।

जल्द हो जाएगा भुगतान

एनआरएम के तहत मनरेगा में हुए कार्यों का भुगतान हो चुका है। अन्य बकाया भुगतान के लिए राशि जल्द मिल जाएगी। इसके बाद तत्काल भुगतान कर दिया जाएगा।

18 साल पहले भी एसटी कमीशन ने अजीत जोगी को माना था सतनामी…

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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने 18 साल पहले ही 2001 में भी पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को आदिवासी नहीं मानकर उनके जाति प्रमाण पत्र को फर्जी करार दिया था। आयोग ने अपने फैसले में जोगी को सतनामी बताकर उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के भी आदेश दिए थे, लेकिन जोगी इसके खिलाफ हाईकोर्ट से स्टे आर्डर ले आए थे।

गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री जोगी बतौर सांसद रायगढ़ से पहला चुनाव लड़ा था। साल 1998 में लोकसभा चुनाव में अजीत जोगी कांग्रेस की टिकट से सांसद बने तो चुनाव के दौरान ही उनके प्रतिद्वंदी रहे भाजपा के नंद कुमार साय की ओर से उनकी जाति को लेकर आपत्ति की गई थी। साय के निर्वाचन अभिकर्ता रहे सुगनचंद फरमानिया ने बताया कि पार्टी ने सभी रिकॉर्ड एकत्र कर रिटर्निंग अफसर के पास शिकायत की थी, लेकिन अंतिम समय बीत जाने के कारण उस पर कुछ नहीं हो सका। इसके बाद भाजपा नेता गिरधर गुप्ता ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका भी लगाई लेकिन हाईकोर्ट में लिस्टिंग के बाद नंबर आने से पहले ही केन्द्र सरकार गिर गई। ऐसे में कोर्ट ने पार्टी की इस याचिका को औचित्यहीन बताकर खारिज कर दिया था।

13 महीने की दिल्ली सरकार के इस कार्यकाल में सासंद बने जोगी इसके बाद रायगढ़ लोकसभा सीट छोड़कर शहडोल चले गए थे। वहीं जोगी के सीएम बनने के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग में भी संत कुमार नेताम ने शिकायत की थी। इस पर आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप सिंह भूरिया ने 16 अक्टूबर 2001 को आदेश पारित कर जोगी को सतनामी बताया था। इसके बाद आदिवासी प्रमाण पत्र को खारिज कर उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए थे।

अफसरों ने रोकी थी जांच

आयोग ने उस वक्त 26 बिंदुओं में दिए अपने फैसले में कई चौंकाने वाले खुलासे किए थे। आयोग ने साफ कहा था कि नोटिस देने के बाद भी राज्य सरकार के अफसरों ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया, लेकिन इसके बाद भी राजस्व के दस्तावेजों को एकत्र करने में आयोग कामयाब रहा। उस वक्त सीएम के कानूनी सलाहकार रहे आरएन शर्मा ने जोगी की ओर से जवाब पेश किया था। आयोग ने 1929 के मिशल, राजस्व रिकॉर्ड एवं आठ अप्रैल 1977 के अतिरिक्त तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के आधार पर जोगी को कंवर जाति का नहीं होना बताकर सतनामी बताया था।

ऐसे खारिज हुए थे जोगी के दावे

मप्र हाई कोर्ट में प्रकरण क्रमांक 1417-1988 में भी एक याचिकाकर्ता ने जोगी की जाति वाला मामला उठाया था, लेकिन तकनीकी कारणों से दूसरे पक्ष को नोटिस दिए बिना ही कोर्ट से यह खारिज हो गया था। इसी तरह प्रकरण क्रमांक 1039-2001 में भी दूसरे आवेदक ने जोगी की जाति को चैलेंज करने के बाद आश्चर्यजनक रूप से सुनवाई के दौरान ही याचिका वापस ले ली थी। जोगी ने इन दोनों को ही आधार बताकर अपना बचाव प्रस्तुत किया था, लेकिन आयोग ने दोनों प्रकरणों में जोगी को क्लीन चिट नहीं मिलने की बात कहकर सवाल उठाए थे।

कुपोषण की स्थिति में आया सुधार, घटकर 37.7 फीसद रह गई : कोशिशों का असर…

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छत्तीसगढ़ में कुपोषण के खिलाफ जंग में काफी हद तक सफलता मिली है। राज्य में कुपोषण की दर धीर-धीरे घट रही है। बीते 12-13 वर्षों में कुपोषण की दर में करीब 10 फीसद की कमी आई है। इसकी वजह से राज्य कुपोषित राज्यों की सूची में दूसरे से सातवें नंबर पर आ गया है।

छत्तीसगढ़ में वर्ष 2006 में यहां कुपोषण की दर 47 फीसद थी। 2018 में जारी रिपोर्ट के अनुसार अब यहां कुपोषण की दर 37.7 फीसद रह गई है। यह राष्ट्रीय स्तर के आंकडों से अधिक है। हालांकि 2017 के 38 फीसद की तुलना में यह महज 0.3 फीसद ही कम है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ देश के सर्वाधिक कुपोषित राज्यों की सूची में सातवें स्थान पर बना हुआ है। इस सूची में झारखंड पहले नंबर पर है। वहां कुपोषण की दर 47 फीसद है। बिहार 43, मध्यप्रदेश 42, उत्तर प्रदेश 39.5 और गुजरात में यह दर 39.3 है।

नक्सल हिंसा बनी बड़ी बाधा

महिला एवं बाल विकास विभाग के अफसरों के अनुसार राज्य के आदिवासी क्षेत्रों की तुलना में मैदानी क्षेत्रों की स्थिति बेहतर है। आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण की दर अधिक होने की सबसे बड़ी वजह नक्सल खतरा है। नक्सली आतंक की वजह से योजनाओं का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाता है। हालांकि राज्य निर्माण के बाद से कुपोषण की स्थिति में लगातार बदलाव आ रहा है। बीते कुछ वर्षों में नक्सलवाद में कमी आने से प्रशासन की पहुंच बढ़ी है। इससे अब वहां भी कुपोषण की दर में कमी आने की उम्मीद बढ़ी है।

विभिन्न राज्यों में कुपोषण की स्थिति

झारखंड 47.8 45.3

बिहार 43.9 48.3

मध्यप्रदेश 42.8 42.0

उत्तर प्रदेश 39.5 46.2

गुजरात 39.3 38.5

दादर-नगर हवेली 38.8 41.7

छत्तीसगढ़ 37.7 37.6

राजस्थान 36.7 39.1

महाराष्ट्र 36.0 34.4

कर्नाटक 35.2 36.2