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गेंहू, चावल के आटे व बेसन से इस रह से बने टेस्टी डोसा, चाटते रह जाएँगे उंगलियाँ

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डोसा वैसे तो एक साउथ भारतीय डिश है लेकिन ये पसंद ज्यादातर लोगों को होती है। अगर आपको भी डोसा पसंद है लेकिन आप बाहर का डोसा नहीं खाना चाहते व घर पर बनाने की टाइन नहीं है तो परेशान न हों हम आपको घर पर ही डोसा बनाना सिखात हैं वो भी झटपट। आज हम आपको गेंहू, चावल के आटे व बेसन का डोसा बनाना सिखाएंगे।



रवा डोसा के लिए सामग्री:
सूजी (रवा) – 1/2 कप
चावल का आटा – 1/2 कप

मैदा – 2 टेबल स्पून मैदा
ऑयल – 3-4 टेबल स्पून
हरा धनिया – 2-3 टेबल स्पून

अदरक पेस्ट – 1 /2 छोटी चम्मच
हींग – पिंच
जीरा – 1/2 छोटी चम्मच
कुटी हुई काली मिर्च – 1/4 छोटी चम्मच 
हरी मिर्च – 2 बारीक कटी हुई 
नमक – स्वादानुसार 

Rawa Dosa रेसिपी: 

रवा डोसा बनाने के लिए सबसे पहले एक गहरे तले के बर्तन में सूजी (रवा), मैदा व चावल का आटा डालकर मिक्स करिए व ऊपर से एक कप पानी डालकर तब तक घोलिये जब तक कि इसमें गुठलियां समाप्त होकर यह एकसार न हो जाए। अब इसमें अंदाज से थोड़ा पानी व मिलाइए व डोसे के घोल जितना पतला तैयार कीजिए। 

इसे भी 

अब इस बैटर में कटी हरी मिर्च, अदरक, धनिया, नमक, जीरा, हींग व दरदरी पीसी काली मिर्च डालकर मिक्स कर लीजिए। डोसे के इस बैटर को 15 से 20 मिनट तक के लिए रखा रहने दीजिए। 

अब गैस पर नॉन-स्टिक तवा चढ़ाइए, जब यह हल्का गर्म हो जाए तो तवे पर ब्रश की सहायता से ऑयल फैलाएं, अब 1 छोटी कटोरी में डोसे का घोल लेकर तवे पर थोड़ा पतला फैलाएं।आंच तेज कीजिए व डोसे को हल्का सुनहरा होने तक सिंकने दीजिए। यही प्रक्रिया डोसे की दूसरी तरफ भी दोहराएं। लेकिन ध्यान रहे कि दूसरी तरफ बस हल्का सा सेंकना है। अब इस डोसे को एक प्लेट में निकाल लें। बाकी के बचे बैटर से भी इसी तरह डोसे बना लें। 

इसे भी 

लीजिए तैयार है आपका सूजी का कुरकुरा व स्वादिष्ट डोसा। इसे आप नारियल की चटनी, टमाटर रसम व साम्भर के साथ खा सकते हैं।

आइए जानते हैं केला व नारियल का हलवा बनाने की विधि

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आज तक आपने बहुत सारे हलवे खाए व बनाए होंगे, लेकिन आज जिस रेसिपी के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं इसके बारे में आपने पहले कभी शायद ही सुना होगा. ये खास हलवा बनाने में बहुत सरल है व साथ में खाने में भी बहुत ही स्वादिष्ट होता है.

सामग्री
6-7 पके केले
नारियल (कद्दूकस किया हुआ)
100 ग्राम शक्कर
दो चम्मच घी
100 ग्राम काजू
3 बादाम
3-4 इलायची
केसर

ऐसे बनाएं
6-7 पके हुए केले को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें. कड़ाही में दो बड़े चम्मच घी गरम करके केले को डालें फिर 2 मिनट बाद शक्कर मिलाकर थोड़ी देर चलाएं. फिर इसमें कद्दूकस किया हुआ नारियल मिलाकर दो मिनट तक चलाएं. इसमें बाद काजू-बादाम को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर मिलाएं, फिर केसर से सजाएं. यह हलवा व्रतधारियों के लिए अच्छा व्यंजन होने कि सम्भावना है. इसे प्रातः काल के नाश्ते में भी लिया जा सकता है.

बनना चाहते हैं ‘क्रिएटिव’ तो ध्यान को बनाएं जीवन का अहम हिस्सा: स्टडी

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जब हमारी इंद्रियां अक्सर सुस्त हो जाती हैं, तब ध्यान तनावपूर्ण दुनिया में विश्राम और जागरूकता के लिए समय प्रदान करता है। जानकार बताते हैं कि ध्यान करने से अस्थायी तनाव से राहत की अधिक संभावना होती है। ध्यान करने की विविधता से पता चलता है कि व्यक्तित्व या जीवन शैली के आधार पर हर व्यक्ति के लिए ध्यान की अलग-अलग शैली है। जो व्यक्ति ध्यान करता है, उसका अभ्यास करने से शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, साथ ही भावनात्मक स्वास्थ्य भी सुधर जाता है।

हाल में हुई एक शोध में ये बात सामने आई है कि कुछ खास तरह के ध्यान (मेडिटेशन) तकनीक से रचनात्मक सोच बढ़ती है। यह शोध ‘माइंडफुलनेस’ नाम के जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोध में कहा गया है कि इंसानों पर ध्यान का प्रभाव लंबे समय तक रहता है। ये इंसानों के सोचने के तरीकों को भी प्रभावित करता है, जिससे नए विचार आते हैं।

शोध में यह भी बताया गया है कि सभी प्रकार के ध्यान तकनीक का रचनात्मकता पर एक जैसा प्रभाव नहीं पड़ता है। जिन लोगों ने ओपन मॉनिटरिंग मेडिटेशन किया उन लोगों के पास एक ही समस्या के कई समाधान थे। वहीं, जिन लोगों ने फोकस्ड अटेंशन मेडिटेशन था, उन पर कोई प्रभाव देखने को नहीं मिला।

इसके अंतर्गत सभी लोगों को सोचने का काम दिया गया था, जिसे करने से पहले 25 मिनट तक ध्यान किया गया। इन लोगों में कुछ अनुभवी और कुछ नए लोग शामिल थे। शोध में रचनात्मकता की दो मुख्य सामग्री पर मेडिटेशन के अलग-अलग तकनीकों के प्रभावों की जांच की गई है।

कुछ ऐसा दिखेगा JioFiber Hybrid सेट-टॉप-बॉक्स, लीक हुई फोटो

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रिलायंस अपनी जियो गीगा फाइबर सर्विस 5 सितंबर को लॉन्च करने वाला है. जियो गीगाफाइबर के ऐलान के दौरान कंपनी ने आने वाले गीगा टीवी सेट-टॉप बॉक्स के बारे में पूरी जानकारी दी थी जो कि कस्टमर्स को ओटीटी, लाइव टीवी, वीडियो कॉलिंग और गेमिंग की सुविधा देगी. हालांकि, कंपनी ने ये नहीं बताया है कि सेट-टॉप बॉक्स किस तरह से दिखेगा.

अब हमारे पास जियो फाइबर हाइब्रिड सेट-टॉप बॉक्स का पहला ऑफिशियल लुक है. इस प्रोडक्ट की फोटोज़ को DreamDTH पर शेयर किया गया है जिसमें हाइब्रिड सेट-टॉप बॉक्स डार्क ब्लू फिनिश के साथ दिखता है और इस पर जियो का लोगो है. इसमें को-ऐक्सियल कनेक्शन सहित तमाम पोर्ट्स जैसे- HDMI पोर्ट, ईथरनेट RJ45 पोर्ट, यूएसबी 2.0 और यूएसबी 3.0 पोर्ट दिखते हैं.

घोषणा के दौरान कंपनी ने बताया कि सेट-टॉप बॉक्स में 4K रिज़ोल्यूशन के साथ ज्यादातर भारतीय भाषाओं में वॉइस कमांड होगा. इसके अलावा सेट-टॉप बॉक्स में मल्टी पार्टी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की भी सुविधा होगी. इसके अलावा रिलायंस जियो ग्राहकों की पसंद पर 600 से ज्यादा टीवी चैनल, एक हज़ार से ज्यादा मूवी और लाखों से ज्यादा गाने उपलब्ध कराएगा.

लॉन्च के दौरान रिलायंस जियो के डायरेक्टर्स आकाश अंबानी और ईशा अंबानी ने दिखाया कि किस तरह से जियो सेट-टॉप बॉक्स का यूज़ करके गेम खेला जा सकता है. उस दौरान बताया गया कि यह सभी गेमिंग कंट्रोलर्स को सपोर्ट करता है और साथ ही आपका स्मार्टफोन भी वर्चुअल कंट्रोलर की तरह यूज़ किया जा सकता है.

लखनऊ की सड़कों पर फटे कुर्ते में घूमता दिखा यह सुपरस्टार, पता चलने पर लोग हो गए हैरान

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उत्तर प्रदेश, में जन्मे अमिताभ बच्चन के पिता, डॉ॰ हरिवंश राय बच्चन प्रसिद्ध हिन्दी कवि थे, जबकि उनकी माँ तेजी बच्चन कराची से संबंध रखती थीं। आरंभ में बच्चन का नाम इंकलाब रखा गया था जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान प्रयोग में किए गए प्रेरित वाक्यांश इंकलाब जिंदाबाद से लिया गया था। लेकिन बाद में इनका फिर से अमिताभ नाम रख दिया गया जिसका अर्थ है, “ऐसा प्रकाश जो कभी नहीं बुझेगा”। यद्यपि इनका अंतिम नाम श्रीवास्तव था फिर भी इनके पिता ने इस उपनाम को अपने कृतियों को प्रकाशित करने वाले बच्चन नाम से उद्धृत किया। यह उनका अंतिम नाम ही है जिसके साथ उन्होंने फ़िल्मों में एवं सभी सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए उपयोग किया। 

बॉलीवुड : लखनऊ की सड़कों पर फटे-पुराने कुर्ते और पायजामे में घूमते हुए एक बूढ़े आदमी को शायद ही किसी ने नोटिस किया हो लेकिन जब लोगों को असलियत का पता चलता है तो वे हैरान हो जाते हैं और फिर उस बूढ़े आदमी की एक झलक पाने के लिए दौड़ते हैं।
कुछ ऐसा ही नजारा दिखा, जब बॉलीवुड के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन लखनऊ के भीड़-भाड़ वाले बाजार में इस हालत में नजर आए। दरअसल, बिग बी इन दिनों लखनऊ में अपनी फिल्म ‘गुलाबो-सिताबो’ की शूटिंग कर रहे हैं और यह सब फिल्म की शूटिंग का ही एक हिस्सा था। इस फिल्म में वे मिर्जा के किरदार में नजर आने वाले हैं।
इस दौरान अमिताभ बूढ़े के गेटअप में तांगे की सवारी करके इमामबाडा पहुंचते हैं। इसके बाद तांगे वाले को किराया देकर सड़क पर लगे ठेलों की तरफ चल पड़ते हैं। बाद में उनकी कई जगह से जुड़ी चप्पल टूट जाती है और फिर वे उसे सही करवाने के लिए दुकान पर जाते हैं। लेकिन इस दौरान मौजूद लोगों में से उन्हें कोई भी पहचान नहीं पाता है
बता दें कि लखनऊ में इस फिल्म की शूटिंग लगभग दो महीनों में पूरी होगी। इस दौरान लखनऊ के लोगों को अमिताभ बच्चन का और भी दीदार करने का मौका मिलेगा।
अमिताभ बच्चन के अलावा इस फिल्म में आयुष्मान खुराना भी नजर आने वाले हैं। वहीं, फिल्म का निर्देशन ‘पीकू’ और ‘विकी डोनर’ जैसी सुपरहिट फिल्में बनाने वाले शूजित सरकार कर रहे हैं, जो अगले साल 24 को रिलीज होगी।

प्लास्टिक से बने ये 6 आइटम्स होंगे बैन, 2 अक्टूबर को मोदी लॉन्च कर सकते हैं कैंपेन

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भारत ने 2 अक्टूबर (October 2) से देशभर में प्लास्टिक (Plastic) से बने बैग (Bags), कप (Cups) और स्ट्रॉ (Straws) पर पाबंदी लगाने की तैयारी की है. शहरों और गांवों में सिंगल यूज प्लास्टिक (Single-use plastics) की वजह से भारत दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में शुमार है. 2022 तक देश में ऐसे प्लास्टिक को पूरी तरह से खत्म करने का लक्ष्य लेकर चलने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) गांधी जयंती (Gandhi Jayanti) पर प्लास्टिक से बने 6 आइटम्स पर बैन के लिए कैंपेन लॉन्च कर सकते हैं.

 इन आइटम्स पर लग सकता है बैन
मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, नाम न बताने के शर्त पर दो अधिकारियों ने बताया कि सरकार प्लास्टिक बैग, कप, प्लेट, छोटी बोतलें, स्ट्रॉ और कुछ चुनिंदा प्रकार के सैशे बंद किया जा सकता है. एक अधिकार ने कहा कि बैन सिर्फ इस्तेमाल में होने वाली चीजें ही नहीं बल्कि ऐसी चीजों की मन्युफैक्चरिंग और इंपोर्ट भी बंद किया जाएगा.

अधिकारियों के मुताबिक, इन छह आइटम पर प्रतिबंध लगाने के बाद भारत के सालाना प्लास्टिक खपत में 5-10 फीसदी की कमी आएगा. यानी लगभग 14 मिलियन टन प्लास्टिक की खपत कम होगी. अधिकारियों ने कहा कि प्रतिबंध के उल्लंघन के लिए जुर्माना संभवत: छह महीने की शुरुआती अवधि के बाद प्रभावी होगा. देश कुछ राज्यों ने पहले से ही पॉलिथीन बैग पर पाबंदी लगा रखी है. 

बता दें कि 73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करने की बड़ी घोषणा की थी. उन्होंने देश की जनता और खासतौर पर दुकानदारों-व्यापारियों से इस दिशा में योगदान देने की अपील की थी. प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश को प्लास्टिक कचरे से मुक्त करने के अभियान की शुरूआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती (02 अक्टूबर) से एक साथ पूरे देश में शुरू किया जाएगा. पीएम मोदी ने इस बार अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में भी लोगों और सरकारी एजेंसियों से 2 अक्टूबर को सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन के लिए पहला बड़ा कदम उठाने को कहा था. 

एयर इंडिया में यूज नहीं होगी प्‍लास्टिक
देश को प्लास्टिक मुक्त बनाने के मकसद से एयर इंडिया ने प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने का ऐलान किया है. एयर इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अश्विनी लोहानी ने गुरुवार को कहा कि हम 2 अक्टूबर से एयरलाइन में प्लास्टिक के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने जा रहे हैं. उन्होंने बताया पहले चरण में प्लास्टिक पर प्रतिबंध एयर एक्सप्रेस की सभी फ्लाइट और सहयोगी फ्लाइट में लगाया जाएगा. दूसरे चरण में एयर इंडिया की सभी फ्लाइट में प्लास्टिक पर प्रतिबंध को लागू किया जाएगा.

रेलवे में 2 अक्टूबर तक लगे प्लास्टिक से बने सामानों पर रोक
रेल मंत्रालय (Railway Ministry) ने रेलवे में प्लास्टिक (Plastic) और पॉलिथिन बैग (Polythene Bag) के इस्तेमाल पर फौरन हर संभव रोक लगाने के निर्देश दिए हैं.रेलवे बोर्ड के आदेश के मुताबिक रेलवे में सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर तुरंत प्रभाव से पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है. इसमें रेलवे के सभी वेंडर्स को प्लास्टिक के कैरी बैग का इस्तेमाल बंद करने लिए जागरुक करने को कहा गया है. रेलवे के सभी स्टाफ को प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने के लिए जागरुक करने के कहा गया है. इसके लिए दोबारा इस्तेमाल में आने वाला पर्यावरण के अनुकूल बैग (Eco-friendly Bag) का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है.

रेल यात्रा के दौरान यात्रियों की प्यास बुझानें वाली रेल नीर के बनने की कहानी

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भारतीय रेल में यात्रा के दौरान और रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को सस्ता स्वच्छ पानी मुहैया कराने के लिए शुरुआत की गई। बोतलबंद पानी रेल नीर की यात्रा साल 2003 में की गई थी करीब 70 हजार बोतलो के उत्पादन के साथ शुरु हुई ये कहानी आज देशभर के अलग अलग हिस्सों में फैला 10 यूनिट के साथ रोजना 10.92 लाख लीटर तक पहुंच गई है। वहीं, अगर देशभर के स्टेशनों और ट्रेनो में खपत की मांग की बात करे तो 18 से 20 लाख बोतल रोजाना की हैं।

मौजूदा समय में रेलवे 45 से 50 फीसदी जरुरत को ही पुरा करती हैं बीते 2018-19 में रेलनीर के प्लॉंट में कुल 21.5 करोड़ वॉटर बोतल का उत्पादन किया। न्यूज24 संवाददाता कुन्दन सिंह ने हॉपुड़ स्थित रेलनीर प्लॉट का जायजा लिया।मौजूदा समय में दिल्ली के नांगलोई, पटना के पास दानापुर में चेन्नई के पास पालुर में, मुबंई के पास अंबरनाथ में, यूपी में अमेठी और हापुड़, त्रिवेंद्रम के पास परासाला, छतीसगढ के विलासपुर में अहमदाबाद के सानंद में भोपाल के पास मंडीदीप में चल रहा है।

वहीं, आने वाले समय में नागपुर, हावड़ा, भुसावल, गोहाटी हिमांचल के उना के साथ ही जबलपुर में 6 नये प्लॉट कमीशन होने है जिसके साथ ही रेलनीर की उत्पादन क्षमता करीब 8 से 9 लाख लीटर रोजाना की और बढ़ जायेगी जिसके बाद रेलनीर रोजाना की जरुरतों को पुरा कर पायेगी।

7 सीटर कार Renault Triber आज हुई लॉन्च, कीमत 5 लाख रुपये से भी कम

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रेनो (Renault) की अपकमिंग एमपीवी (MPV) कार ‘ट्राइबर’ (Triber) लॉन्च हो गई है। ऐसा माना जा रहा था कि ये 7 सीटर वाली सबसे सस्ती कार होगी। इसकी कीमत पर कंपनी ने खासा ध्यान दिया भी है। ट्राइबर की कीमत 5 लाख रुपये से कम है।कंपनी का दावा है कि यहा रेनो क्विड और डस्टर के बीच का गैप भरेगी।

क्या है कीमत 
ट्राइबर कार की कीमत की शुरुआत 4.95 लाख रुपये (RXE वर्जन) से हो रही है। इसके अलावा यह कार अन्यक तीन वर्जन में उपलब्धक होगी। ये तीन वर्जन- RXL, RXT और RXZ हैं जिनकी कीमत क्रमश: 5.49 लाख, 5.99 लाख और 6.49 लाख रुपये है

बुकिंग 
इसकी बुकिंग पहले ही 17 अगस्त से शुरू हो चुकी है। इसे 11,000 रुपये के साथ ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से ग्राहकों ने बुक करवाया है।

फीचर्स 
Cardekho.com के मुताबिक रेनो ट्राइबर में कई ऐसे फीचर्स दिए गए हैं जिन्हें सेगमेंट में पहली बार पेश किया गया है। इनमें 8-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम (एप्पल कारप्ले और एंड्रॉइड ऑटो कनेक्टिविटी के साथ), सेंटर कूल्ड बॉक्स (रेफ्रीजिरेटर), रिमूवेबल थर्ड रो सीटें और तीनों रो हेतु एसी वेंट जैसे फीचर्स शामिल हैं। इसके अलावा ट्राइबर की खासियत इसका मॉड्यूलर सीटिंग लेआउट है, जिसके चलते ट्राइबर को 2 सीटिंग से लेकर 7-सीटर कार में बदला जा सकता है। ट्राइबर की थर्ड रो की सीटों को निकाल देने पर इसमें 625 लीटर तक का बूट स्पेस मिलता है।

इंजन 
रेनो ट्राइबर में 1.0-लीटर, 3-सिलेंडर पेट्रोल इंजन मिलेगा। यह इंजन 72पीएस की पावर और 96एनएम का टॉर्क जनरेट करने में सक्षम है। सेगमेंट की अन्य कारों की तरह ट्राइबर भी 5-स्पीड मैनुअल और ऑटोमैटिक (एएमटी) दोनों गियरबॉक्स विकल्पों में आएगी। इन गियरबॉक्स विकल्पों के साथ यह क्रमशः 20 किमी/लीटर और 20.5 किमी/लीटर का माइलेज देगी। हमने रेनो ट्राइबर के स्पेसिफ़िकेशन की तुलना मिड-साइज हैचबैक कारों से की है। हाल ही में रेनो ट्राइबर के साथ मिलने वाली एक्सेसरीज की जानकारी सामने आई है। इनमें क्रोम गार्निश, डिकल्स, मैटिंग, लगेज रैक सहित अन्य एक्सेसरीज शामिल हैं।

कभी अखबार बेचकर चलाते थे घर! आज दान किए 36 करोड़ रुपये

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दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी एप्पल (Apple) के CEO टिम कुक ने 23,700 शेयर दान (Share Donation) कर दिए हैं. कंपनी ने इसकी जानकारी रेग्युलेटरी फाइलिंग में दी है. दान किए शेयरों की वैल्यू 36 करोड़ रुपये (5 मिलियन डॉलर) है. हालांकि टिम कुक (Tim Cook) ने जिस चैरिटी को दान दिया, उसका नाम नहीं बताया है. पिछले साल अगस्त में कुक ने एक अज्ञात चैरिटी को इतनी ही कीमत के शेयर दान कर दिए थे. Apple के मुताबिक, कुक के पास 854,849 (8 लाख 54 हजार 849) शेयर हैं. जिनकी कीमत 17.6 करोड़ डॉलर यानी 1,267 करोड़ रुपये हैं. आज टिम कुक के पास इतने पैसे हैं की वो दान कर सकें लेकिन आपको बता दें कि अपनी टीनऐज में पेपर बेचकर घर का खर्च चलाते थे. उन्होंने अपने होम स्टेट अलाबामा के पब्लिकेशन ‘द प्रेस रजिस्टर’ के पेपर बेचे. इसके अलावा, उन्होंने अपनी मां के साथ फॉर्मेसी में काम किया, लेकिन उनकी चाहत ऊपर उठने और बड़ा बनने की थी. अपनी इसी सोच के साथ कड़ी मेहनत कर और आज वो दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी एप्पल के सीईओ हैं. आइए आपको बताते हैं उनके बारे में सबकुछ और कहां दान करने की योजना कर रहे हैं कुक.

पढ़ाई करते हुए किया पार्ट टाइम काम
कुक Auburn University में पढ़ने के दौरान Reynolds Aluminum कंपनी में पार्ट टाइम काम करते थे. यह काम उनकी पढ़ाई का हिस्सा भी था. कंपनी का स्टाफ धीरे-धीरे कंपनी छोड़कर चला गया. इस घटना के बाद टिम ने कंपनी के प्रेसिडेंट की मदद की और उनके साथ मिलकर कंपनी को आगे बढ़ाया. वे इंजीनियर बनना चाहते थे. इसी के चलते उन्होंने इंडस्ट्रीयल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की.

कुक रॉबर्ट एफ केनेडी सेंटर फॉर जस्टिस एंड ह्यूमन राइट्स संस्था और ह्यूमन राइट्स अभियानों के लिए दान देते रहे हैं. कुक ने अपने बयान में कहा है कि वो अपनी पूरी संपत्ति को एक चैरिटी को दान करने की योजना बना रहे हैं. इसके साथ ही हाल ही में कुक ने ट्वीट कर ये जानकारी दी थी कि उनकी योजना Amazon के जंगलों के संरक्षण के लिए दान देने की भी है.

बड़ा आदमी बनने की पहले दिन से थी चाहत
टिम कुक ने जब पहली कंपनी ज्वाइन की तो पहले दिन से ही सोच लिया था कि वे सबसे टॉप पर जाएंगे. उन्होंने ऑफिस में अपने लिए एक छोटा कॉर्नर बनवाया. पहले तो लोगों को यह अजीब लगा, लेकिन बाद में उन्हें अहसास हुआ कि ऊपर तक पहुंचने के लिए छोटे से ही ऊपर उठा जाता है. वे खुद को “Attila the Hun of inventory” कहते थे. उन्हें कई साल तक दूसरी बिग टेक कंपनी (Dell and Motorola) का सीईओ बनने के ऑफर आए, लेकिन उन्होंने किसी को भी स्वीकार नहीं किया.

फेल होने का डर नहीं
टिम को कभी भी फेल होने का डर नहीं सताया. उन्होंने एक बार एक इंटरव्यू में कहा था, यदि मैं अपने काम में फेल होता हूं तो मैं अपने काम की शुरुआत एक बार फिर नए सिरे से करूंगा. वे बहुत ही छोटे परिवार से थे. उनके पिता शिपयार्ड में काम करते थे और मां घर पर रहकर परिवार की देखभाल करती थीं. इनका जन्म एक छोटे से गांव Robertsdale में हुआ था, जो Alabama में है.

यूरिक एसिड से परेशान लोग जान लें इसे कंट्रोल में रखने का फार्मूला

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अगर आज आप हैल्थ प्रॉब्लम की बात करेंगे तो आपको तीन-चार बीमारियां तो आम ही सुनने को मिल जाएंगी जिसके 5 में से 3 लोग शिकार होंगे। यूरिक एसिड भी उन्हीं में से एक है। आज लोग इस रोग से इस कदर परेशान है कि इसके लिए तरह तरह के देसी उपाय ढूंढते हैं खासकर महिलाएं।

यूरिक एसिड क्यों तेजी से बढ़ रहा है तो आपको बता दें कि इसका कारण हमारा खराब लाइफस्टाइल ही है। काम के प्रैशर के चलते तनाव में रहना, समय पर ना खाना, वहीं पोष्टिक चीजें ना खाना, प्रोटीन की ज्यादा मात्रा खाना और एक्सरसाइज फिजिकल एक्टिविटी बिलकुल ना करना आदि इस रोग को बढ़ावा दे रहे हैं।

यूरिक एसिड की समस्या को समय रहते कंट्रोल ना किया जाए तो यह जोड़ों में असहनीय दर्द, गठिया, किडनी स्टोन, डायबिटीज और रक्त विकार जैसी कई परेशानियों को आगे जन्म देता है इसलिए जरूरी है इसे समय रहते कंट्रोल में करना।

चलिए बताते हैं कि शरीर में इसकी सही मात्रा होनी कितनी चाहिए और जब यह बढ़ता है तो कैसे नुकसान पहुंचाता है। 

स्वस्थ महिला के शरीर में यूरिक एसिड का नॉर्मल लेवल 2.4-6.0 mg/dl और पुरुषों में 3.4 – 7.0 mg/dl होना जरूरी है। अगर यूरिक एसिड का लेवल इससे अधिक हो तो आपको असहनीय जोड़ों में दर्द, सूजन, अनकंट्रोल शुगर लेवल, चलने फिरने में समस्या जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल जब यूरिन के रास्ते यूरिक एसिड बाहर नहीं निकलता तो हड्डियों में जमा होना शुरु हो जाता है जिससे जोड़ों में असहनीय दर्द होता है।

अगर आप सोचते हैं कि यूरिक एसिड आप सिर्फ दवाइयां खाकर कंट्रोल में कर सकते हैं तो आप गलत है। आपको अपना लाइफस्टाइल हैल्दी करना होगा इसके लिए आपको खाने-पीने का खास ध्यान रखना होगा।

यूरिक एसिड को कंट्रोल कैसे कर सकते हैं…

भरपूर पानी पीएं

सबसे पहले याद रखें आपको भरपूर पानी पानी हैं क्योंकि इससे यह यूरिन के रास्ते बाहर निकलता रहेगा। थोड़ी-थोड़ी देर पानी पीते रहें। दिन में 10-12 गिलास पानी जरूर पीएं।

हर रंग की सब्जियां

सिर्फ हरी नहीं बल्कि अपनी डाइट में हर रंग की सब्जी को शामिल करें। इससे शरीर में यूरिक एसिड के स्तर को सामान्य रहता है और जोड़ों में दर्द भी नहीं होता।

सिट्रक फलों का सेवन

डाइट में सिट्रस यानि विटामिन सी से भरपूर खट्टे फल खाएं। यह यूरिक एसिड को जमने नहीं देते।

सेब का सिरका

इसमें सेब का सिरका भी फायदेमंद होता है। 1 गिलास पानी में 1 ढक्कन सिरका डाल कर पीएं। कुछ हि दिनों में फर्क दिखाई देने लगेगा। छोटी इलायची खाएं। इससे यूरिक एसिड भी कम होगा और कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कंट्रोल में रहेगा। हाई फाइबर फूड जैसे ओटमील, दलिया, बींस, ब्राउन राइस खाएं।

मेथी के दानें

1 चम्मच मेथी दानें को रातभर पानी में भिगोकर रख दें। सुबह इसका पानी पी लें और मेथी दानें को खा लें। इससे आपको कुछ दिन में ही फर्क दिखने लगेगा।

रामबाण है हल्दी

1 गिलास गर्म पानी में 1 टीस्पून हल्दी मिक्स करके रोजाना सुबह खाली पेट पीएं। आप दूध में भी हल्दी डालकर पी सकते हैं लेकिन दूध लो फैट हो।

अब जानिए कुछ जरूरी परहेज

रात को सोते समय दूध या दाल का सेवन भी नहीं करना चाहिए। अगर फिर भी दाल खाने का मन करता है तो छिलके वाली दालें ना खाएं।

-डेयरी व बेक्ररी प्रॉडक्ट्स, तली मसालेदार चीजें, चावल, फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, पैकड फूड्स ना खाएं कम खाएं। रात के समय तो बिलकुल नहीं।
-मीट, अंडा, मछली का सेवन तुरंत बंद करें।

यूरिक एसिड को कंट्रोल में रखने के लिए सबसे जरूरी है परहेज। अगर आप भी यूरिक एसिड की समस्या से जूझ रहे हैं तो अपनी डाइट में कुछ बदलाव करें। इससे आप सिर्फ यूरिक एसिड ही नहीं बल्कि शुगर, मोटापे व गठिए से भी बच्चे रहेंगे।