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बरगद के पेड़ पर बने कमरे में रहना हो, तो जाइए उत्तराखंड की खास जगह पर

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कुठाल गेट के पास आनन कानन एजुकेशनल एम्यूजमेंट पार्क की सैर की है।

डॉ. योगी एरन की ओर से विकसित किए गए इस पार्क को उन्होंने प्रकृति को संरक्षित करने का बेहतर प्रयास बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पार्क में प्रकृति से जुड़ कर जिस प्रकार तालाबों, गुफाओं व म्यूजियम के साथ ही बड़ी संख्या में बरगद के पेड़ो को संजोकर उन्हें आकर्षक स्वरूप प्रदान करने का कार्य भी निश्चित से सराहनीय है। पार्क में बरगद के पेड़ पर कमरो के निर्माण को भी उन्होंने नया प्रयोग बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पार्क विद्यार्थियों को प्रकृति व पर्यावरण को संरक्षित करने की प्रेरणा प्रदान करने के साथ ही प्रकृति विज्ञान से भी उन्हें परिचित कराने में मदद करेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने ऐसे प्रयासों को समाज के लिए भी हितकर बताया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने पार्क को देखने आये स्कूली छात्रों से भी बातचीत की।

डॉ. योगी ऐरन ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि 5 एकड़ में निर्मित यह पार्क स्कूली छात्रों के आकर्षण का केन्द्र बना है। इस पार्क में शारारिक व मानसिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ा यह पार्क छात्रों को प्रकृति से जोड़ने तथा पर्यावरण के प्रति जागरूक करने में भी मदद करता है।

BSP ने विदेशों पर खत्म की निर्भरता, पनडुब्बी-रॉकेट लांचर का बना रहा प्लेट..

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रॉकेट लांचर और पनडुब्बियों के लिए भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) स्पेशल ग्रेड का स्टील बना रहा है। विदेशी स्टील पर निर्भरता को खत्म करने की मुहिम देश में चल रही है। इसका श्रेय बीएसपी को जाता है। जमीन से आसमान तक देश की तरक्की के लिए भिलाई में स्टील की प्लेट बनाई जा रही है। इसी प्लेट से रॉकेट लांच का कैप और इसको का लांचिंग पैड तक बनाया जाएगा।

स्र्स की मदद से बना बीएसपी मेक इन इंडिया में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहा है। भारत की जरूरतों को रूस, कनाडा, ब्रिटेन, चीन आदि देश ही पूरा कर रहे थे। विक्रम साराभाई स्पेश रिसर्च सेंटर और मिश्र धातु निगम लिमिटेड-मिधानी ने शोध के आधार पर विदेशी तकनीकी को देश में ही विकसित किया है।

रॉकेट लांचर से निकलती लौ को सहन करने वाली क्षमता बीएसपी के स्टील में पाई गई। इसलिए इसे यह जिम्मा दिया गया है। रॉकेट लांचर के इंजन के लिए प्लेट सबसे अधिक उच्च ताप की होती है।

यह दुनिया में बहुत कम देश में ही बनती है। अब देश में भिलाई इसमें शामिल हो गया है। उच्च ग्रेड का प्लेट बनाने के लिए बीएसपी ने सबका विश्वास जीता है। प्लेट के उत्पादन यानी रोलिंग के समय रिसर्च सेंटर और मिधानी के एक्सपर्ट खुद मौजूद रहते हैं।

कई दशकों की मेहनत रंग लाई

सामान्य स्टील में ऐसे धातु मिश्रित करते हैं, जो इसकी शक्ति को कई गुना बढ़ा देता है। बदलते हुए तापमान और वातावरण को झेलने की क्षमता पैदा करता है। यह स्टील आसानी से नहीं बनती। इसलिए दुनिया के चंद देशों के पास ही इसकी तकनीक है। स्टील में मिश्रित किए जाने वाले धातु पृथ्वी पर कम मात्रा पर पाए जाते हैं।

इसलिए इसका महत्व बहुत अधिक है। अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान इस क्षेत्र में शक्तिशाली माना जाता है। कई दशक से चले शोध के बाद अब भारत भी इन्हें टक्कर देने को तैयार हो गया है। इसकी गवाही भिलाई इस्पात संयंत्र में निर्मित स्टील दे रहा है।

बीएसपी के लिए गर्व की बात

बीएसपी ने विशिष्ट इस्पात बनाने की क्षमताओं के परिणाम स्वरूप घरेलू उद्योग में जगह बनाने की कोशिश की है। रक्षा के साथ-साथ अंतरिक्ष में भी महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों के लिए भी इस्पात का निर्माण कर रहा है। इससे देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। यह हम सबके लिए गर्व की बात है।

बेहद फायदेमंद होता है एप्पल साइडर विनेगर, इन फायदों को जानकर रह जाओगे दंग

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अगर आप अपने बालों के साथ-साथ अपनी स्किन को चमकाना चाहते है। तो आपके लिए एप्पल साइडर विनेगर किसी वरदान से कम नहीं है। जी हां एप्पल साइडर विनेगर जो हर भारतीय घर में आसानी से मिल जाता है और काफी ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। आपको बता दें कि यह न सिर्फ आपकी खूबसूरती को बढ़ाता है। बल्कि आपकी सेहत को भी कई तरह के फायदे पहुंचाता है। इसके अलावा भी एप्पल साइडर विनेगर के बहुत सारे फायदे होते है। तो आइए जानते है।

स्किन का पीएच लेवल खराब होने से कई तरह की स्किन से संबंधित समस्याएं होती है। जिन से छुटकारा पाने के लिए एप्पल साइडर विनेगर का इस्तेमाल किया जाता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए एक चम्मच विनेगर में दो चम्मच पानी मिलाकर इस टोनर का इस्तेमाल करें।

गर्मियों की सबसे बड़ी प्रॉब्लम सूरज की हानिकारक किरणे होती है। जिनसे हम सभी को टैनिंग की समस्या होती है। आप इनसे छुटकारा पाने के लिए एप्पल साइडर विनेगर की मदद ले सकते है। जी हां एक कटोरी में बराबर मात्रा में ठंडा पानी डालें और इसको प्रभावित स्थान पर लगाएं।

चेहरे पर जिद्दी मुंहासे हो गए है और हर कोशिश करने के बाद भी यह आपकी स्किन से जाने का नाम नहीं ले रहे है। तो आप यहां पर एप्पल साइडर विनेगर का इस्तेमाल करें ठंडे पानी में से मिलाकर रखने पर लगाएं और कुछ देर तक रखें और फिर अपने चेहरे को साफ पानी से धो लें।

गर्मियों के दिनों में बंद जूतों के अंदर अक्सर पैरों में बदबू हो जाती है। अगर आप इससे छुटकारा पाना चाहते हैं तो आपको बता दें कि एक बाल्टी ठंडे पानी में दो से तीन चम्मच एप्पल साइडर विनेगर डालकर 10 मिनट तक उसके अंदर अपने पैरों को रखें। ऐसा करने से आपको जल्दी ही उस बदबू की समस्या से निजात मिलेगा।

स्कैल्प की त्वचा को डिटॉक्स करने और बालों को सॉफ्ट करने शाइनी बनाने के लिए शैंपू का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में एप्पल साइडर विनेगर करें और शैंपू के बाद से बालों पर लगाएं।

अलसी खाने से होते है अनोखें लाभ, यहां जाने

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  • फाइबर का बहुत अच्छा स्रोत होता है: अलसी के सबसे असाधारण लाभों में से एक यह है कि, इसमे उच्च स्तर में म्यूसीजियम गम सामग्री हैं। म्यूसीज एक जेल बनाने वाला फाइबर है जो पानी में घुलनशील है और आंत्र पथ पर इसका अविश्वसनीय प्रभाव है। म्यूसीज पेट में भोजन को छोटी आंत में बहुत जल्दी से खाली करने से बचा सकता है जो पोषक तत्व अवशोषण को बढ़ा सकता है।
  • वजन कम करने के लिए: चूंकि अलसी स्वस्थ वसा और फाइबर से भरे हुए हैं, इससे आपको बहुत अधिक संतुष्ट महसूस करने में मदद मिलेगी ताकि आप कुल मिलाकर कम कैलोरी खा सकें, जिससे वजन कम हो सकता है। ए.एल.ए वसा भी सूजन को कम करने में मदद कर सकता है।
  • कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बनाए रखने के लिए: अलसी बीज की घुलनशील फाइबर सामग्री पाचन तंत्र में वसा और कोलेस्ट्रॉल को जाल में डालती है ताकि इसे अवशोषित नहीं किया जा सके। घुलनशील फाइबर पित्त को भी फंसाता है, जो पित्ताशय की थैली में कोलेस्ट्रॉल से बना होता है।
  • कैंसर के लिए: अलसी में एंटीऑक्सीडेंट कैंसर से सुरक्षा प्रदान करते हैं। हाल के अध्ययनों से यह निष्कर्ष निकाला गया है कि अलसी स्तन, प्रोस्टेट और पेट के कैंसर के विकास के जोखिम को कम कर सकते हैं। अलसी में उपस्थित लिग्नांस में प्रतिजन गुण होते हैं और ट्यूमर द्वारा नए रक्त कोशिकाओं के निर्माण को रोकते हैं।
  • त्वचा के लिए: अलसी और इसके तेल में कई त्वचा के अनुकूल पोषक तत्व होते हैं जो त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद कर सकते हैं। लिग्नान और ओमेगा 3 फैटी एसिड के उच्च स्तर, स्वस्थ मल त्याग को बढ़ावा देते हैं और त्वचा रोगों को रोकते हैं। ओमेगा 3 फैटी एसिड त्वचा कोशिकाओं के स्वस्थ विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। अलसी में उपस्थित लिग्नांस शरीर में मौजूद डी.एन.एच.टी के स्तर को कम करके त्वचा की उपस्थिति में सुधार करने के लिए सहायता करते हैं।
  • बालों के लिए: अलसी में मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड की उच्च मात्रा बालों के लोच में वृद्धि करता है और उन्के टूटने की संभावना कम करता है। अलसी के विरोधी भड़काऊ गुण रूसी, एक्जिमा और अन्य स्कैल्प स्थितियों की संभावना को कम करते है। अलसी खोपड़ी में सीबम के उत्पादन को प्रोत्साहित करते हैं, इस प्रकार फलक और रूसी को रोकते हैं।

ब्‍यूटी से लेकर स्किन प्रॉब्लम्स तक त्वचा के लिए वरदान है एवोकाडो, जानें इस्तेमाल के 3 तरीके

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एवोकाडो वजन घटाने के लिए सुपर फूड है, यह तो आपने सुना ही होगा लेकिन इसके अलावा, एवोकैडो त्वचा के लिए भी बहुत अच्छा है। एवोकाडो के आपकी त्‍वचा के लिए एक नहीं, बल्कि कई फायदे हैं। यदि आप अपने दैनिक आहार के सापथ एवोकैडो का इस्‍तेमाल त्‍वचा पर मसाज या फेस मास्क के तौर पर करते हैं, तो यह आपको मुलायम असैा चमकदार त्‍वचा देने में मदद करता है।

एवोकाडो एक सुपरफूड है, यह एक स्वास्थ्यप्रद खाद्य पदार्थों में से एक है, जो कि आपके वजन को कम करने के साथ दिल के लिए अच्छा माना जाता है। एवोकाडो पाया जाने वाला फट आपकी त्‍वचा के लिए काफी फायदेमंद होता है। एवोकाडो का तेल और इससे बना फेस मास्‍क दोनों ही आपको बेदाग, मुलायत और खूबसूरत त्‍वचा प्रदान करने में मदद करते हैं। आजकल खराब जीवनशैली और प्रदूषण के चलते त्‍वचा को कई समस्‍याओं से गुजरना पड़ता है, जिसमें यदि त्‍वचा की नियमित और सही देखभाल न की जाए, तो यह खराब हो सकती है। स्किन केयर की जहां बात आती है, तो आप सबके मन में सबसे पहले फैंसी और ट्रेंडी स्किन केयर व ब्‍यूटी प्रॉडक्‍ट्स ही आते हैं लेकिन इनका इस्‍तेमाल किये बिना आप स्‍वस्‍थ त्‍वचा पाने के लिए एवोकाडो का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आपनी डाइट प्‍लान में एवोकैडो को शामिल करें और यहां हम आपको बता रहे हैं, कि कैसे त्वचा और ब्‍यूटी रेजीम के लिए एवोकाडो का इस्‍तेमाल करें।

एवोकाडो ऑयल मसाज

एवोकैडो का तेल प्रोटीन से भरपूर होता है, जो आपकी त्‍वचा को पोषण देता है। इसके लिए आप एवोकाडो ऑयल या फिर छिले हुए एवोकाडो को काटें और उससे निकले ऑयल को कॉटन की मदद से चेहरे पर लगाएं और मसाज करें। ऐसा करने से यह आपके चेहरे से डेड स्किन को हटाने में मदद करेगा और आंखो की सूजन, फाइन लाइन्‍स और झाईयों को दूर करने में भी मदद करेगा।

इसे भी पढें: चमकती त्‍वचा पाने के लिए जानें स्किन टाइप के अनुसार सीरम का सही इस्‍तेमाल और फायदे

जंवा व दमकती त्‍वचा के लिए एवोकाडो फेस मास्‍क

एवोकाडो फेस मास्‍क आपकी त्‍वचा को मॉश्‍चराइज रखने के साथ आपकी त्‍वचा को ग्‍लोइंग बनाने में मदद करेगा। क्‍योंकि एवोकैडो में त्‍वचा के लिए जरूरी एंटीऑक्सिडेंट और विटामिन्‍स मौजूद होते हैं, जो आपकी त्वचा को पोषण देने, हाइड्रेट रखने और नेचुरल ग्‍लो लाने में मदद करते हैं। इसके अलावा, एवोकाडो में विटामिन सी और विटामिन ई पाया जाता है, ये दोनों ही विटामिन स्वस्थ त्वचा के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह त्वचा आपकी त्‍वचा पर उम्र बढ़ने के संकेतों को जैसी ढीली त्‍वचा, झुर्रिंयों को कम करता है। इसमें ल्यूटिन और ज़ेक्सैन्थिन जैसे एंटीऑक्सिडेंट भी होते हैं, जो फ्री रेडिकल्‍स से लड़ने में मददगार हैं और त्‍वचा को जंवा बनाए रखने में मदद करते हैं।

फेस मास्‍क बनाने की विधि

  • एवोकाडो फेस पैक बनाने के लिए आप सबसे पहले एवोकाडो को छोटे-छोटे टुकड़ो में काट लें।
  • अब आप कटे हुए एवोकाडो को ग्राइंडर में डालें।
  • इसके बाद, इसमें 1 चम्‍मच नमक, 1-2 चम्‍मच चीनी, 2 चम्‍मच शहद और 1 अंडा डालें और ग्राइंड कर लें।
  • अच्‍छी तरह गाढ़ा पेस्‍ट बन जाने के बाद आप इस फेस पैक को अपने पूरे चेहरे पर अप्‍लाई करें।
  • 15-20 मिनट तक रखने के बाद आप अपना चेहरा धो लें।

इसे भी पढें: ग्‍लोइंग स्किन पाने के लिए अपने स्किन टाइप के अनुसार बनाएं स्‍ट्रॉबेरी फेस पैक

एवोकाडो स्‍क्रब

एवोकाडो में मौजूद एंटी इंफ्लामेटरी और एंटी माइक्रोबियल गुण होने की वजह से यह आपके चेहरे से कील-मुहासों को दूर करने में भी मदद करता है। पिंपल्‍स के पीछे की असल वजह चेहरे में जमा गंदगी और धूल मिट्टी होती है इसलिए आप एवोकाडो स्‍क्रब के रोजाना इस्‍तेमाल से पिंपल्‍स की जड़ को ही मिटा सकते हैं, यह स्‍क्रब चेहरे की डेड स्किन को साफ करेगा और चेहरे की रोजाना सही से सफाई करेगा व पिंपल्‍स की समस्‍या को कम करेगा। यह दाग-धब्‍बों को मिटाने के लिये तथा क्‍लीनिंग के लिये भी बहुत ही अच्‍छा है।

  • स्‍क्रब बनाने का तरीका
  • इसे बनाने के लिए आप सबसे पहले 1-2 एवोकैडो लें और उन्‍हें उबाल लें।
  • अब आप इस उबले एवोकाडो को एक बाउल में डालें और इसमें 1 चम्‍मच नमक या ब्राउन शुगर मिलाकर मैश करे।
  • अब इससे अपने चेहरे को 3 से 4 मिनट के लिए स्‍क्रब करें।

राजधानी में सोना 40 हजार पार…

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अंतरराष्ट्रीय मार्केट के प्रभाव के चलते बीते कई दिनों से कयास लगाए जा रहे थे कि सोना 40 हजारी हो सकता है। ये कयास सही साबित हो गए। सोना प्रति 10 ग्राम (स्टैंडर्ड) 40,150 रुपये पहुंच गया। शनिवार की तुलना में इसकी कीमत में 1,100 रुपये की तेजी आई है। इसके साथ ही चांदी भी 44,800 रुपये प्रति किलो हो गई। सराफा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में इन दोनों धातुओं की कीमतों में और तेजी आ सकती है।

अब डीजल पावर कार से नहीं, इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पावर से चलेंगे ट्रेन के एसी-पंखे…

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अब वह दिन दूर नहीं, जब ट्रेन के कोचों में एसी-पंखे चलाने के लिए पावर कार के बदले हेड ऑन जनरेशन सिस्टम चलाए जाएंगे, जिसे हेड ऑन जनरेशन सिस्टम कहा जाता है। अभी तक डीजल से एक ट्रेन में दो डीजल पावर कार लगे हैं। इससे ही कोचों में बिजली की आपूर्ति की जाती थी। पुरानी पावर कार से शोर अधिक होता था। अब हेड ऑन जनरेशन सिस्टम से यानी जिससे ट्रेन का इंजन चलता है, उसी के जरिए ही सीधे बिजली की आपूर्ति कोच में की जाएगी। अभी तक प्रारंभिक तौर पर छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति, हमसफर, दुर्ग-जम्मूतवी व अंत्योदय एक्सप्रेस के एलएचबी कोच में लगा दिए हैं। इससे सिर्फ इन्हीं ट्रेनों में नए सिस्टम लगाने से करीब डेढ़ लाख लीटर डीजल की खपत कम हो जाएगी। इससे मंडल को करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की बचत होगी। इसके साथ ही वायु प्रदूषण भी कम होगा।

अभी तक ये थे बिजली सप्लाई के सिस्टम

1-अभी तक डीजल से ही एक ट्रेन में दो पावर कार बॉक्स होते थे

2-इस सिस्टम से ट्रेन के खड़े होने पर अधिक शोर मचता है

3-डीजल की खपत और खर्च भी अधिक आता है

इस प्रणाली से ये मिलेगा लाभ

1- साढ़े चार करोड़ रुपये के डीजल की बचत होगी

2-वायु प्रदूषण कम करने के लिए विद्युत परिवहन व्यवस्था की ओर अग्रसर

3-ट्रेनों में उच्च क्षमता वाले डीजल जनरेटर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण कम होगा

4-रेलवे ने छोटे इंजन वाले नए प्रकार की पावर कारों का निर्माण शुरू कर दिया है

5-डीजल जनरेटर से तेल और जनरेटर के अन्य खतरनाक ज्वलनशील उपकरणों को पृथक होने से आग के खतरों में कमी

मंत्री हो या अफसर, आम हो या खास सबकी यही सोच- कम प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग लगें…

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सतत विकास लक्ष्यों को पाने के लिए उद्योग व व्यावसायिक संगठनों के संवेदीकरण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला में खाद्य, संस्कृति मंत्री एवं राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष अमरजीत भगत ने कहा कि प्रदेश में कम प्रदूषण फैलाने वाले और आधुनिक तकनीक वाले उद्योग लगाने की आज सख्त जरूरत है। विकास आवश्यक है, किंतु विनाश की शर्त पर मंजूर नहीं। उद्योगों का विकास हो, क्योंकि इसमें हर वर्ग के लोगों को रोजगार मिलता है, बेरोजगारी दूर होती है। उद्योगपतियों को परंपरागत उद्योगों के क्षेत्र से हटकर नए क्षेत्रों में कम प्रदूषण, आधुनिक तकनीक वाले उद्योग लगाने के बारे में सोचना चाहिए।

कार्यशाला में भगत ने कृषि उत्पादों पर आधारित कारखाना खोलने की जरूरत पर बल दिया। राज्य के कृषकों को धान के अलावा दलहनी-तिलहनी लाभदायक फसल के लिए प्रयास करने को कहा है।उन्होंने जोर देकर कहा कि सरल, सुलभ एवं तर्क संगत उद्योग लगाने की योजना पर कार्य करना जरूरी है। कार्यशाला को प्रधानमंत्री किसान योजना और मौसम कार्यकारी निदेशक डॉ. ज्योति पारिख, राज्य योजना आयोग के सदस्य डॉ. के. सुब्रमणियम, मुख्यमंत्री के सलाहकार राजेश तिवारी, प्रदीप शर्मा तथा राज्य कार्य योजना के निर्देशक मुदित कुमार सिंह ने भी संबोधित किया।

उद्योग मंत्री बोले- उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि हमारी सरकार उद्योग को बढ़ावा देकर राज्य के बेरोजगार युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार दिलाना चाहती है। इसलिए प्रदेश की सभी तहसीलों में छोटे-छोटे उद्योग स्थापित करने के लिए जमीन का चिन्हित की जा रही है। ब्लाक स्तर पर प्रदूषण रहित नवीन तकनीक पर आधारित छोटा उद्योग स्थापित होंगे।

वन मंत्री ने कहा- वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि प्रदेश में वनोपज संबंधी प्रसंस्करण उद्योगों के स्थापना की अपार संभावना है। ये उद्योग पर्यावरण अनुकूल होंगे और इनमें प्रदेश के युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लक्ष्यों की भावना के अनुरूप प्रदेश के किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए राज्य सरकार द्वारा किसानों की कर्जमाफी की गई। 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की गई।

छत्तीसगढ़ में निगम-मंडल में अभी नहीं होगी नियुक्ति, ये है कारण जानिए…

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छत्तीसगढ़ में निगम-मंडल, प्राधिकरण और आयोगों में नियुक्ति का दरवाजा अभी बंद हो गया है। नगरीय निकाय चुनाव के बाद ही नियुक्तियों का दरवाजा खुलेगा। सरकार ने अब तक बस्तर विकास प्राधिकरण, सरगुजा विकास प्राधिकरण, मध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष, दो-दो उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। अभी सवा सौ निगम-मंडल, प्राधिकरण और आयोगों की कुर्सियां खाली पड़ी हैं।

निगम-मंडल, प्राधिकरण और आयोगों की कुर्सी के दावेदारों को अभी और इंतजार करना होगा। इसका कारण यह है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल या उनकी सरकार ने बचे हुए निगम-मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्ति के लिए चल रही एक्सरसाइज को पूरी तरह से बंद कर दिया है।

अब मुख्यमंत्री और उनकी सरकार का पूरा फोकस दंतेवाड़ा विधानसभा उपचुनाव रहेगा। जब तक दंतेवाड़ा उपचुनाव का नतीजा आएगा, तब तक नगरीय निकाय चुनाव सिर पर आ चुका होगा। दंतेवाड़ा उपचुनाव की मतगणना 27 सितंबर होगी। 20 अक्टूबर के बाद नगरीय निकाय चुनाव के लिए आचार संहिता लग सकती है।

इसके पहले सरकार नगरीय निकायों में पेंडिंग कामों को पूरा कराने, लोकार्पण और भूमिपूजन करने में व्यस्त हो जाएगी। बहुत ज्यादा हुआ, तो केवल दो-तीन ऐसे निगम-मंडल में नियुक्ति हो सकती है, जिसे लेकर खींचतान नहीं है। बाकी की सूची नगरीय निकाय चुनाव के बाद ही आएगी।

माहौल बिगाड़ना नहीं चाहेगी पार्टी

प्रदेश में 15 वर्षों के बाद कांग्रेस सत्ता में आई है, इसलिए पार्टी के न केवल वरिष्ठ नेता, बल्कि सक्रिय जमीनी कार्यकर्ता भी निगम-मंडल की कुर्सी मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। कार्यकर्ताओं की उम्मीद को पार्टी के प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने यह कहकर और बल दे दिया है कि निगम-मंडल की कुर्सी विधायकों को नहीं मिलेगी।

विधानसभा और लोकसभा चुनाव में सक्रियता से काम करने वाले कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की जाएगी। निगम-मंडलों की कुर्सी के लिए भारी खींचतान मची है, इसलिए सरकार और संगठन नहीं चाहेंगे कि नगरीय निकाय चुनाव के पहले माहौल बिगड़े।

जोगी बोले – मेरी जाति पर समिति का निर्णय मैं नहीं मानता, सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती…

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 पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की जाति के मामले की जांच कर रही डीडी सिंह की अध्यक्षता वाली हाईपावर कमेटी ने जोगी को आदिवासी नहीं माना है। समिति ने छानबीन का हवाला देते हुए कहा कि जोगी आदिवासी जनजाति से संबंधित नहीं हैं।

कमेटी के इस फैसले को अब अजीत जोगी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। मंगलवार को इस संबंध में एक प्रेसवार्ता में जोगी ने कहा कि उनकी जाति पर सवाल उठाने वाली कमेटी निष्पक्षता से परे होकर एक तरफा फैसला ले रही है। इसमें जो सीएम भूपेश चाहते हैं, वहीं निर्णय लिया जा रहा है।

उन्होंने इस कमेटी को ‘भूपेश उच्च स्तरीय छानबीन कमेटी की संज्ञा दी।’ जोगी ने कहा कि इस तरह की कोई कमेटी उनकी जाति पर फैसला नहीं ले सकती। उन्होंने इस छानबीन समिति की कार्रवाई को हाईपावर ड्रामा करार दिया।

जोगी ने बताया कि उन्होंने साल 1986 में आईएएस अफसर की नौकरी छोड़कर राजनीति में प्रवेश किया था। उनकी पूरी सरकारी सेवा के दौरान उनकी जाति पर कभी कोई सवाल खड़े नहीं हुए, लेकिन राजनीति में आने के बाद विपक्ष के लोगों ने उनके खिलाफ साजिश रचते हुए उनकी जाति को लेकर सवाल उठाए।

जोगी ने कहा कि उनकी जाति को अब तक छह बार देश की उच्च और सर्वोच्च अदालतों में चुनौती दी गई है, लेकिन हर बार अदालत की ओर से उनके ही पक्ष में फैसला रहा। उन्होंने अब भी भरोसा है कि देश की सर्वोच्च अदालत उनके पक्ष में ही न्याय करेगी। जोगी ने बताया कि इस संबंध में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी के माध्यम से उन्होंने एक याचिका लगाई है।

जोगी ने बताया कि सर्वप्रथम साल 1987 में इंदौर हाई कोर्ट में मनोहर दलाल ने उनकी जाति को लेकर सवाल उठाए थे। इस कानूनी लड़ाई में जोगी के पक्ष में फैसला सुनाया गया था। उन्होंने कहा कि पिछले 43 वर्षों के दौरान छह बार उनकी जाति को चुनौती दी गई है, लेकिन अदालत ने उनके पक्ष में ही फैसला सुनाया।

मैं नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत पर भरोसा करता हूं और उसके अनुसार किसी व्यक्ति पर किसी तरह का फैसला लेने के साथ ही उसे यह बताया जाता है कि आपके खिलाफ यह फैसला लिया जा रहा है। यह देश के हर एक नागरिक को किसी फैसले के समक्ष प्रति परीक्षण का मौलिक अधिकार है, लेकिन उन्होंने सुनियोजित तरीके से फैसला लिया।

मुझे किसी प्रकार के दस्तावेज की कॉपी भी नहीं दी गई। किसी तरह का अवसर प्रदान नहीं किया गया मुझे मेरा पक्ष रखने का। मुझे समिति के समक्ष फिर से बुलाए जाने की बात कही गई थी, लेकिन उन्होंने मेरा पक्ष रखने से पहले ही एकतरफा फैसला ले लिया।