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राखी सावंत की ननद ने रेस्टोरेंट में दीपक कलाल को गिरा-गिराकर मारा, दोस्त ने बनाया वीडियो

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राखी सावंत की ननद ने उनके पूर्व ब्वॉयफ्रेंड रहे दीपक कलाल को रेस्टोरेंट में जमकर पीट दिया। खुद राखी ने ये वीडियो शेयर किया है, जिसमें एक लड़की दीपक को लात-घूंसे मार रही है। इस पर राखी ने लिखा कि मेरे पति रितेश की बहन ने दीपक की आज जमकर धुलाई कर दी। इंस्टा पर शेयर ये वीडियो बाद में उन्होंने हटा दिया। हालांकि राखी के दावे में कितनी सच्चाई है और ये वीडियो कितना सही है, ये सिर्फ राखी ही जानती हैं।रितेश को गाली देने से नाराज 
रितेश को गाली देने से थी नाराज

हाल ही में राखी ने जब अपनी शादी हो जाने की बात सोशल मीडिया पर लिखी थी तो दीपक कलाल ने उनको भला बुरा कहा था। एक वीडियो में कलाल ने रितेश को भी अपशब्द कहे थे। इसी से रितेश की बहन गुस्सा थीं और एक रेस्टोरेंट में दीपक को बैठा देख उसके साथ मारपीट की। उसके एक दोस्त ने इसकी वाडियो भी बना ली। जिसके बाद इसे इंस्टा पर पोस्ट कर दिया। वीडियो में दिख रही लड़की दीपक को मारते हुए कह रही है कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई राखी और रितेश को गाली देने की, दोनों से माफी मांगो। इस पर दीपक हाथ जोड़कर माफी मांगते दिखते हैं।

राखी ने दीपक से भी शादी का किया था ऐलान 
राखी ने दीपक से शादी का किया था ऐलान

राखी सावंत ने कुछ समय पहले बाकयदा मीडिया के सामने आकर अपने और दीपक के बीच रिश्ता होने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि दोनों जल्दी ही शादी करने वाले हैं। इसके कुछ दिन बाद हाल में उन्होंने ऐलान किया कि वो रितेश नाम के शख्स से शादी कर चुकी हैं। जसके बाद कलाल ने राखी के पति के लिए अपशब्द कहे थे। इसके बाद राखी ने भी खराब भाषा का इस्तेमाल किया था।

सोशल मीडिया पर लोगों ने लिए मजे

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर यूजर्स ने एक तरफ दीपक कलाल के मजे लिए तो वहीं राखी को लेकर भी सवाल उठा दिए। यूजर्स ने कहा कि झूठ फैलाने का जैसा रिकॉर्ड राखी आपका है, उसको देखते हुए कुछ नहीं पता कि कौन पीट रहा है कौन पिट रहा है और इसमें सच्चाई कितनी है। एक यूजर ने लिखा, दीपक और राखी दोस्त हैं। वो ये सब जानबूझ कर पब्लिसिटी के लिए ये सब कर रहे हैं।

इस तरह करें घर की सफ़ाई की तैयारी, नहीं होंगे बोर…जानिए

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आजकल की भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में हम सब के पास पैसा तो काफ़ी है, लेकिन सबसे ज़्यादा कमी किसी चीज़ की है तो वो है वक्त की और ऐसे में अगर कोई आप से कह दे कि उस कीमती वक्त में से थोड़ा समय आपको घर की सफाई के लिए भी निकलना होगा, तो नानी याद आना तो तय है. अब ऐसी परिस्थिति में अगर मजबूरन आपके पास कोई विकल्प न बचे और आपको घर साफ करना ही पड़े, तो आप इस काम को कैसे बिना बोझ समझे, मज़े से कर सकते हैं वो हम आपको बताते हैं.

टिप नंबर 1- सबसे पहले तो अगर आपको घर की सफाई करनी है तो ऐसे आरामदायक कपड़े पहनें, जिनके गंदे होने का आपको डर न हो, क्योंकि सफाई में कपड़ों का गन्दा होना तो तय है.

टिप नंबर 2- अगर आपको संगीत में रुचि है, तो अपनी मनपसंद प्लेलिस्ट लगा लें, इससे आप गाने सुनते-सुनते आराम से सफ़ाई कर सकेंगे और सफ़ाई करते-करते बोरियत भी नहीं होगी.

टिप नंबर 3- उन सामानों की लिस्ट बना लें जो आपको सफाई के लिए चाहिए जैसे- झाड़ू, पोंछा, ब्रश, डस्टिंग के लिए कपड़ा, साबुन, सर्फ़, आदि और इन सबको इकट्ठा कर लें.

टिप नंबर 4- अगर आप पूरा घर एक साथ साफ़ करना चाहेंगे, तो थोड़ी देर में ही थक कर हार मान जाएंगे और आपको समझ नहीं आएगा की अब कहां से सफ़ाई का काम आगे बढ़ायें, इसलिए तय करें की आपको पहले कहां की सफ़ाई करनी है और बाद में कहां की.

टिप नंबर 5- कोशिश करें कि सबसे पहले किसी छोटे रूम या हिस्से से सफाई शुरू करें, इससे आपको कम वक्त में अपनी मेहनत का फल नज़र आने लगेगा और बाकी के काम के लिए आपको प्रोत्साहन भी मिलेगा.

टिप नंबर 6 –कोशिश करें एक दिन में सारा घर साफ़ करने का टारगेट न ही रखें, क्योंकि अगर आप सारा घर बहुत गहराई से एक ही दिन में साफ करने की कोशिश करेंगे तो हो सकता है कि थक कर चूर हो जाऐं, इसीलिए निश्चित अंतराल में जब भी थोड़ा वक्त मिले, साफ़ सफाई का ध्यान रखें.

टिप नंबर 7- घर की सफाई करते वक्त बाज़ार के उत्पादों की जगह घरेलू नुस्खों का ज़्यादा इस्तेमाल करें, जैसे नीबू और नमक, सिरका आदि। इसके नकारात्मक प्रभाव नहीं होते और पैसों की बर्बादी से भी बचते हैं.

बीजेपी नेताओं के निधन पर प्रज्ञा ठाकुर का विवादित बयान, बोलीं- विपक्ष कर रहा ‘मारक शक्ति’ का प्रयोग

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 भोपाल से बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा ने बीजेपी नेताओं की मौत पर विवादित बयान दे दिया है। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली और पूर्व मुख्यमंत्री बाबुलाल गौर की श्रद्धांजलि सभा में बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने विपक्ष द्वारा भाजपा के नेताओं पर मारक शक्ति के प्रयोग की आशंका जताई। उन्‍होंने कहा कि मैं जब चुनाव लड़ रही थी तब एक महाराज जी आए थे उन्होंने कहा था ये बहुत बुरा समय चल रहा है। विपक्ष एक मारक शक्ति का प्रयोग आपकी पार्टी और उसके नेताओ के लिए कर रहा है। ऐसे में आप सावधान रहें।

साध्वी ने आगे कहा, ‘तब मैं महाराजजी की बात को भूल गई थी। अब मैं उन बातों पर ध्यान देती हूं और दूसरी तरफ देखती हूं कि बीजेपी के कई शीर्ष नेता पीड़ा सहते-सहते हमारे बीच से जा रहे हैं तो फिर मुझे लगता है कि कहीं वह (साधु महाराज) सही तो नहीं थे। क्योंकि यह सच है कि हमारा नेतृत्व निरंतर जा रहा है और असमय जा रहा है।’ ठाकुर के इस बयान से एक बार फिर सियासी घमासान मचना तय है। आपको बता दें कि यह कोई पहला मामला नहीं है जब साध्‍वी प्रज्ञा ठाकुर ने इस तरह का कोई बयान दिया हो।

इससे पहले लोकसभा चुनाव के दौरान जब बीजेपी ने इन्हें भोपाल से उम्मीदवार बनाया था। तब भी वह कुछ इसी तरह की बात की थीं। उन्होंने उस वक्त कहा था कि मुंबई एटीएस के चीफ रहे हेमंत करकरे की मौत श्राप की वजह से हुई है। वो श्राप मैंने ही दिया था। जबकि मुंबई हमले के दौरान आतंकियों से लड़ते हुए हेमंत करकरे शहीद हुए थे। इसके अलावा नाथूराम गोडसे पर बयान देकर साध्वी प्रज्ञा ने बखेड़ा खड़ा कर दिया था। तब प्रज्ञा ठाकुर ने गोडसे को देशभक्त करार दिया था। हालांकि बाद में उन्होंने इस पर माफी मांग ली थी और कहा था कि उनके बयान को तोड़- मरोड़कर पेश किया गया है।

क्या होती है SPG, Z+, Z, Y और X कैटेगरी सिक्योरिटी, जानिए सबकुछ

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देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की एसपीजी सुरक्षा हटाई जाएगी और अब उनके पास सिर्फ जेडप्लस की सुरक्षा का कवर रहेगा। गृह मंत्रालय ने अब उन्हें केंद्रीय सुरक्षा बल का सुरक्षा कवर देने का फैसला किया है। देश में बड़े नेताओं और अधिकारियों को सुरक्षा प्रदान की जाती है, समीक्षा करने के बाद सरकार जेड प्लस, जेड, वाई या एक्स कैटगरी की सुरक्षा देने का फैसला करती है। भारत में सुरक्षा व्यवस्था को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है।

सुरक्षा व्यवस्था को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है

जेड प्लस (Z+) (उच्चतम स्तर), जेड (Z), वाई (Y) और एक्स (X) श्रेणी की सुरक्षा भारत में प्रदान की जाती है। भारत सरकार इस बात का फैसला ले सकती है कि इन चार श्रेणियों में किसे कौन से स्तर की सुरक्षा देनी है। सरकार खतरे के आधार पर यह वीआईपी सुरक्षा प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद, नौकरशाह, पूर्व नौकरशाह, जज, पूर्व जज, बिजनेसमैन, क्रिकेटर, फिल्मी कलाकार, साधु-संत या आम नागरिक किसी को भी दे सकती है। समय-समय पर इसकी समीक्षा भी की जाती है।

एसपीजी

एसपीजी सबसे उच्च स्तर की सुरक्षा है जो वर्तमान प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवार के सदस्यों को दी जाती है। SPG देश के सबसे जांबाज जवान कहे जाते हैं। विशेष सुरक्षा दल (Special Protection Group- SPG) 2 जून, 1988 में भारत की संसद के एक अधिनियम द्वारा बनाया गया था, जिसका हेडक्वार्टर दिल्ली में है। एसपीजी विशेष सुरक्षाबलों में से एक है। इन जवानों का चयन पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स से किया जाता है और ये गृह मंत्रालय के अधीन हैं। एसपीजी देश की सबसे पेशेवर एवं आधुनिक हथियारों से लैस सुरक्षाबलों में से एक है। मनमोहन सिंह को मिले एसपीजी कवर को अब हटा लिया गया है। उन्हें जेड प्लस सुरक्षा कवर दिया गया है।

क्या है जेड प्लस सुरक्षा

जेड प्लस कैटेगरी सुरक्षा देश की स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप के बाद दूसरे नंबर की सबसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है। इस सुरक्षा व्यवस्था में 55 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। 55 सुरक्षाकर्मियों में 10 से अधिक एनएसजी कमांडो होते हैं। इसके अलावा पुलिस अफसर होते हैं। इस सुरक्षा में पहले घेरे की जिम्मेदारी एनएसजी की होती है जबकि दूसरी लाइन कमांडों की होती है। इसके अलावा आईटीबीपी और सीआरपीएफ के जवान भी जेड प्लस सुरक्षा कैटैगरी में शामिल होते हैं। साथ ही जेड प्लस में एस्कॉर्ट्स और पायलट वाहन भी दिए जाते हैं। मनमोहन सिंह को फिलहाल, यही सुरक्षा प्रदान की गई है।

जेड श्रेणी

जेड श्रेणी की सुरक्षा में चार से पांच एनएसजी कमांडो सहित 22 सुरक्षागार्ड तैनात रहते हैं। इसमें दिल्ली पुलिस, आईटीबीपी या सीआरपीए के कमांडो और स्थानीय पुलिसकर्मी भी शामिल होते हैं। सरकार ने पिछले दिनों सुरक्षा की समीक्षा के बाद कई वीआईपी लोगों को विभिन्न श्रेणियों में दिए जाने वाले प्रोटेक्शन में बदलाव किया है।

वाई श्रेणी

ये सुरक्षा का तीसरा स्तर होता है। कम खतरे वाले लोगों को ये सुरक्षा दी जाती है। इसमें कुल 11 सुरक्षाकर्मी शामिल होते हैं। इनके साथ 2 कमांडो तैनात होते हैं। गृह मंत्रालय समय-समय पर वीवीआईपी के खतरे का आकलन करता है और उसी मुताबिक किसी की सुरक्षा बढ़ाई या घटाई जाती है।

एक्स कैटेगरी

सबसे आखिर में आती है एक्स कैटेगरी की सुरक्षा, जिसमें दो सुरक्षा गार्ड होते हैं। इनमें एक पीएसओ शामिल होता है। देश में कई लोगों को ये सुरक्षा प्राप्त है। इस सुरक्षा में कोई कमांडो शामिल नहीं होता है। हाल ही में गृह मंत्रालय ने लालू प्रसाद यादव समेत कई बड़े नेताओं की सुरक्षा कवर की समीक्षा कर सुरक्षा घटाई थी, इसके अलावा बीएसपी सांसद सतीश चंद्र मिश्रा, यूपी बीजेपी के नेता संगीत सोम, बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रुड़ी की सुरक्षा भी घटाई गई थी।

केस में ऐसे फंसते चले गए चिदंबरम, सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, अब CBI कोर्ट पर आस…

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पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम (Chidambaram) आईएनएक्स मीडिया केस (INX Media Case) में सीबीआई की हिरासत में हैं. इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय भी उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश में जुटी है. सोमवार को उन्हें सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से भी तगड़ा लगा है. चिदंबरम ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत रद्द करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसपर दखल देने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ चिदंबरम की याचिका का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि वह पहले से ही सीबीआई की हिरासत में हैं. जस्टिस आर. भानुमति और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने कहा कि चिदंबरम को कानून के तहत इसका उपाय ढूंढने की छूट है.

बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम की सीबीआई हिरासत की अवधि आज समाप्त हो रही है. उन्हें सीबीआई कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां एजेंसी उनकी हिरासत अवधि बढ़ाने की मांग कर सकती है.

वैसे देखा जाय तो पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया केस में धीरे-धीरे फंसते चले गए. इस पूरे केस में आईएनएक्स मीडिया की प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी के सरकारी गवाह बनने के बाद से चिदंबरम की मुश्किलें ऐसी बढ़ी कि अब वह सीबीआई की हिरासत में हैं.

क्या है INX मीडिया केस?
साल 2007 में इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी ने आईएनएक्स मीडिया नाम से कंपनी बनाई. फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (FIPB) ने आईएनएक्स मीडिया को 4.62 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश की परमिशन दी थी, मगर आईएनएक्स मीडिया ने 305.36 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश हासिल किए. इस रकम में से आईएनएक्स मीडिया ने गलत तरीके से 26% हिस्सा आईएनएक्स न्यूज में लगा दिया. इसके लिए FIPB की परमिशन नहीं ली गई. सीबीआई से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, वित्त मंत्रालय की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट ने पाया कि आईएनएक्स मीडिया के पास मॉरिशस स्थित तीन कंपनियों से गलत तरीके पैसे आ रहे हैं.

इसके बाद 15 मई 2017 को केंद्रीय जांच ब्यूरो ने फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (FIPB) की अनियमितता के आरोप में एफआईआर दर्ज की. आरोप था कि FIPB ने आईएनएक्स मीडिया को 2007 में वित्त मंत्री के तौर पर पी चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान विदेश से 305 करोड़ रुपये फंड देने के लिए क्लियरेंस देने में अनियमितता बरती थी. इस तरह पहली बार इस केस में पी. चिदंबरम का नाम आया.


3 फरवरी को कानून मंत्रालय ने दिए CBI जांच के आदेश

इसके बाद चिदंबरम के खिलाफ जांच चलती रही. समय-समय पर छापे भी मारे गए, लेकिन पुख्ता सबूत नहीं मिल पा रहा था. इसी साल 3 फरवरी को कानून मंत्रालय ने सीबीआई के चिदंबरम के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए. ईडी ने पहले कार्ति चिदंबरम के ठिकानों पर छापेमारी की और 54 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की. सूत्रों के मुताबिक, इसी दौरान ईडी को जांच में पता चला है कि FIPB से मंजूरी के लिए आईएनएक्स मीडिया के डायरेक्टरों पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी ने किसी सीनियर कांग्रेस नेता से मुलाकात की थी. सीबीआई के मुताबिक इंद्राणी का कहना है कि ये सीनियर कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ही थे.

इंद्राणी मुखर्जी के बयान के बाद गिरफ्तार हुए चिदंबरम
इंद्राणी ने अपने बयान में कहा, ‘पीटर ने चिदंबरम के साथ बातचीत शुरू की और INX मीडिया की अर्जी एफडीआई के लिए है और पीटर ने अर्जी की प्रति भी उन्हें सौंपी. FIPB की मंजूरी के बदले चिदंबरम ने पीटर से कहा कि उनके बेटे कार्ति के बिजनस में मदद करनी होगी.’ इस बयान को ईडी ने चार्जशीट में दर्ज किया और कोर्ट में भी इसे सबूत के तौर पर पेश किया गया.

देश-विदेश में खरीदीं 54 करोड़ की संपत्तियां
ईडी का आरोप है कि चिंदबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम (Karti Chidambaram) ने स्पेन में टेनिस क्लब, यूके में कॉटेज के साथ-साथ देश-विदेश में कुल 54 करोड़ की संपत्तियां खरीदी हैं. ईडी जानना चाहती है कि कार्ति के पास ये संपत्तियां खरीदने के पैसे कहां से आए. ईडी ने अक्टूबर 2018 में एक अटैचमेंट ऑर्डर पास किया था. इसके मुताबिक ये सारी संपत्तियां आईएनएक्स मीडिया केस में मिली रिश्वत की रकम से खरीदी गई हैं.

बता दें पी चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया घोटाला और एयरसेल-मैक्सिस 2जी स्कैम में अपने बेटे कार्ति के साथ सह-अभियुक्त हैं. दोनों से सीबीआई और ईडी पहले पूछताछ कर चुकी हैं.

बिलासपुर के बिजली विभाग में 35 करोड़ का बिल पेंडिंग, ये है बड़े बकाएदारों का लिस्ट

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लोकतंत्र में सभी के लिए एक समान नियम कानून (Rules) होने की बात कही जाती है पर बिलासपुर (Bilaspur) संभाग के विद्युत विभाग (Electricity Department) में सभी के लिए नियम और कानून एक जैसा नहीं. विद्युत विभाग सामान्य नागरिकों (Common Man) का हजार रुपए का बिजली बिल बकाया होने पर घर की बिजली लाइन काट देता है. लेकिन दूसरी तरफ शासकीय विभागों का करोड़ों रुपए बकाया होने पर भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है. बता दें कि बिलासपुर के बिजली विभाग पर 35 करोड़ रुपए का बिल (Bill) बकाया है. जहां आम नागरिक इसे विद्युत विभाग की मनमानी और टारगेट पूरा करना बता रहे है. वहीं विद्युत विभाग के आला अधिकारी अपनी मजबूरी गिनाते हुए कार्रवाई करने की बात कर रहे है.

ये है बिजली विभाग के बड़े बकाएदारों की लिस्ट:

बता दें कि ग्रामीण संभाग विद्युत विभाग में 35 करोड़ रुपए बिजली बिल का बकाया है, जिसमें से 17 करोड़ 63 लाख रुपए शासकीय विभाग का बकाया है. वहीं शिक्षा विभाग पर 125.65,स्वास्थ्य विभाग 28.94, राजस्व विभाग 22.39, महिला एंव बाल कल्याण विभाग 14.54, हाऊसिंग बोर्ड 13.33, नगर पंचायत जल प्रदाय 116.96, जल संसाधन कार्यालय और नलकूप 9.27, पुलिस विभाग 7.28, वन विभाग 11.75, लोकनिर्माण विभाग 18.71 सहित विभिन्न विभाग के बकाया राशि जिसे वसूलने विभाग के पसीने छूट जा रहे है. विभाग इस बड़ी राशि की वसूली के लिए रिमाइंडर पर रिमाइंडर विभागों को भेज रहा है. पर अब भी कही से कुछ भी राशि जमा नहीं हो पा रही. वहीं विद्युत विभाग इन शासकीय विभागों के सामने बेबस होकर बैठी नजर आ रही है. आम नागरिक इसे दोहरी नीति बताते विभाग पर कमजोरों पर मनमानी और तानाशाह रवैया अपनाने का आरोप लगा रहे है.

इस पूरे मामले पर विद्युत विभाग के आला अधिकारी अपनी मजबूरी का हवाला दे रहे है. विभाग के कार्यपालन यंत्री सुरेश कुमार जांगड़े के मुताबिक विभागों में लगातार भुगतान के लिए रिमाइंडर भेजे जा रहे है. जल्द सभी से विभाग राशि की वसूली कर लेगा. हालांकि अधिकारी की माने तो शासकीय विभाग बकाया बिल को जमा करने रुचि नहीं ले रहे. वहीं निजी उपभोक्ताओं से बिल जमा कराने विभाग रिचेकिंग कर गैरक़ानूनी ढंग से विद्युत का उपयोग करने पर सख्त कार्रवाई कर रही है. अभी तक 188 विद्युत उपभोक्ताओं पर कार्रवाई की जा चुकी है.

दुनिया के एकमात्र ऐसा क्रिकेटर जिसकी तस्वीर नोट पर छापी गयी। जानिए कौन है वो

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वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम, जिसे बोलचाल में और जून 2017 से आधिकारिक रूप में विंडीज बोला जाता है। यह कॅरीबियाई क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली एक बहुराष्ट्रीय क्रिकेट टीम है जिसे क्रिकेट वेस्ट इंडीज़ प्रशासित करता है। यह एक समग्र टीम है जिसमें खिलाड़ियों का चयन 15, मुख्य रूप से अंग्रेजी भाषी कैरेबियाई क्षेत्रों की एक श्रृंखला से किया जाता है, जिसमें कई स्वतंत्र देश और अधीन क्षेत्र शामिल हैं। 7 अगस्त 2017 तक वेस्ट इंडीज की क्रिकेट टीम आईसीसी द्वारा जारी रैंकिग में टेस्ट मैचों में दुनिया में आठवाँ, एकदिवसीय में नौवां और ट्वेंटी-20 अंतरराष्ट्रीय में चौथा स्थान रखती है।
फ्रैंक वॉरेल दुनिया के एकमात्र क्रिकेटर हैं जिनकी तस्वीर नोट पर छापी गई 

दोस्तों क्रिकेट के मैदान में, हर दशक, प्रत्येक देश में कई उस्ताद खिलाड़ी पैदा होते ही हैं.बल्लेबाजी और गेंदबाजी में बहुत सारे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने शानदार किताब जीते हैं. खुद के खेल (क्रिकेट) के साथ ही अपने देश में खेल के मूल्यों को लगातार ऊंचा रखकर बहुत कम लोग सफलता हासिल करते है. क्रिकेट का नाम लेते ही मन में दर्शकों से भरा स्टेडियम और रनों के साथ जमकर लगने वाले चौको, छक्कों की छवि निर्माण होने लगती है. फ्रैंक वॉरेल वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान थे, जिनकी तस्वीर वहां के 5 डॉलर के नोट पर छपी है. उनके अमूल्य योगदान के कारण उनकी तस्वीर नोट पर छापी गई थी.
दोस्तों व्यक्तिगत खेल जीवन से रिटायर होने के बाद हमारे देश में कई क्रिकेटर राजनीति, फिल्म और समाज सेवा में अपना बहुमूल्य योगदान देते है. लेकिन वेस्ट इंडीज के इतिहास में फ्रैंक वॉरेल एक महत्वपुर्ण व्यक्तितत्व हे, जो वेस्ट इंडीज के मशहूर क्रिकेटर रह चुके है. उनका वेस्टइंडीज की टीम पर भारी प्रभाव पड़ा था. उन्होंने 40 साल वेस्ट इंडीज के लिए क्रिकेट खेला है.वह क्रिकेट में महानतम योगदानों की वजह से जाने जाते है. फ्रैंक मोर्टिमर मैग्लिन वॉरेल का जन्म 1 अगस्त 1924 को सेंट माइकल, बारबाडोस में हुआ था.
साल 1960 से पहले वेस्टइंडीज में अंग्रेजो का वर्चस्व हुआ करता था. अश्वेतों को हीन भावना से देखा जाता था और उन्हें किसी भी काबिल नहीं समझा जाता था. उसी दौरान स्थानीय अख़बारों ने वॉरेल की बल्लेबाज़ी और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए टीम की कप्तानी सौंपने के लिए एक कैंपेन चलाया था, जिसमे लोगो ने उन्हें बेहद पसंद किया. और अख़बारों की मेहनत सफल हुई.
वॉरेल को टीम का कप्तान बना दिया गया. 1960 और 1961 के दौर में उन्होंने अपनी टीम का सफल नेतृत्व किया और टीम को एक नए आयाम पर भी पहुंचाया. उनकी खासियतों की वजह से साथी खिलाड़ियों के साथ साथ विरोधी खेमे के खिलाड़ी भी उनकी तारीफ किया करते थे. वॉरेल की योग्यता को देखते हुए उन्हें जमैका में सीनेटर चुना गया. इसके अलावा उन्होंने द्वीपों के खिलाड़ियों को एकजुट करके वेस्टइंडीज टीम बनाने में भी अहम रोल निभाया.
वो वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के पहले अश्वेत कप्तान थे.
वॉरेल न केवल क्रिकेट बल्कि बाहर की दुनिया में भी एक प्रतिष्ठित व्यक्ति बन गए थे. वेस्टइंडीज विश्वविद्यालय में वह वार्डन के रूप में काम कर रहे थे. कुछ समय के लिए, वह डीन भी थे और खेल का कामकाज और नियोजन भी देखते थे. उन्होंने वहां ऐसी छाप छोड़ी थी कि, बारबाडोस के कैंप का क्रिकेट ग्राउंड को 3W’s के नाम से संभोधित किया जाता था, जो की फ्रैंक वॉरेल, क्लाइड वालकॉट और एवर्टन वीक्स परिचय था.
वॉरेल का टेस्ट करियर 1963 में इंग्लैंड में समाप्त हुआ. खेल छोड़ने के तुरंत बाद एक खिलाड़ी को प्रबंधन की नौकरी नहीं सौंप जाती लेकिन वॉरेल के शारीरिक फिटनेस और खेल की समझ से वो सही उम्मीदवार थे. इसलिए उन्हें टीम मैनेजर बना दिया गया था. वॉरेल ने 1963-64 में खेलना छोड़ दिया और जल्द ही उन्हें वेस्टइंडीज टीम का मैनेजर नियुक्त किया गया. सोबर्स को कप्तान बनाया गया था और वॉरेल टीम के लिए एक मार्गदर्शक बने रहे. 1967 में ल्यूकेमिया के कारण सर फ्रेंक वॉरेल का 42 वर्ष की आयु में निधन हो गया.

स्विस बैंक ने काला धन रखने वाले 15 भारतीयों के नाम किए जारी,देखें पूरी लिस्ट

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यूबीएस (पूरा नाम, UBS AG) विश्व की एक प्रमुख वितीय कम्पनी है जो भारत में “स्विस बैंक” के नाम से विख्यात है। इसका मुख्यालय स्विट्जरलैण्ड के जूरिक और बसेल में है। यह संसार की व्यक्तिगत सम्पदा के प्रबन्धन की सबसे बड़ी कम्पनी है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि विश्व के बड़े-बड़े भ्रष्ट राजनेता और टैक्स-चोर इस बैंक में अपना धन जमा करते हैं। यूबीएस “यूनिअन बैंक ऑफ स्विट्जरलैण्ड” का संक्षिप्त रूप है जो कि इसकी पूर्व-संस्था का नाम है। सन् 1998 में इसका विलय स्विस बैंक कारपोरेशन में हो जाने के बाद अब यह नाम सार्थक नहीं रहा।
स्विट्ज़र‌लैंड‌ ने स्विस बैंक में काला धन रखने वाले भारतीय खातेधारकों के खिलाफ करवाई करते हुए सूचनाएं सांझा करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी सिलसिले में स्विट्ज़र‌लैंड‌ सरकार ने पोतलूरी राजा मोहन राव का नाम जारी किया है।
इससे पहले स्विट्ज़र‌लैंड‌ सरकार ने पिछले महीने 14 काला धन रखने वाले भारतियों के नाम की लिस्ट जारी की थी। नियम के तहत इस तरह का नोटिस उन्हें उनके खाते के बारे में सरकार को जानकारी देने के खिलाफ अपील करने का एक अंतिम मौका देने के लिए जारी किये जाते हैं।
स्विट्ज़र‌लैंड‌ के अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में इस तरह के और नोटिस जारी किए जा सकते हैं। भारत की नरेंद्र मोदी सरकार ने स्विस बैंकों में संदिग्ध काला धन रखने वाले भारतीयों की जानकारी स्विट्ज़र‌लैंड‌ सरकार से मांगी है। ‘पोतलूरी राजा मोहन राव’ को यह नोटिस 28 मई को जारी किया था और अपील करने का समय 10 दिन दिया गया। आपको बता दें, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का नाम भी इस लिस्ट आ चूका है।
स्विट्ज़र‌लैंड‌ के संघीय टैक्स विभाग के नोटिस में राव के बारे में जानकारी जन्म दिन 15 जुलाई 1951 और नाम पता के अलावा अन्य जानकारी नही दी है।हालांकि अधिकारियों के अनुसार राव दक्षिण भारत में कई तरह के कारोबार में शामिल स्विट्ज़र‌लैंड‌ उसके बैंकों के खातेधारकों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए जाना जाता है। लेकिन टैक्स चोरी के मामले में अब विश्व स्तरीय समझौते के बाद अब ऐसा नही है।
खातेधारकों की सूचनाओं को साझा करने के लिए स्विट्ज़र‌लैंड‌ सरकार का भारत सरकार के साथ समझौता हुआ है। राव से पहले जिन 14 भारतियों के नाम स्विट्ज़र‌लैंड‌ सरकार ने नोटिस जारी किया था उनमें से दो का पूरा नाम बताया था। जोकि 1949 में पैदा हुए कृष्ण भगवान रामचंद और सितम्बर 1972 में पैदा हुए कल्पेश हर्षद किनारीवाला शामिल हैं। हालांकि इनके बारे में अन्य जानकारियों का खुलासा नही किया गया है।
अन्य नामों के बारे में सिर्फ नाम के पहले अक्षर और जन्म की तारीख का खुलासा किया गया है। जोकि इस प्रकार है। एएसबीके, नौ जुलाई 1944 को पैदा हुए एबीकेआई, दो नवंबर 1983 को पैदा हुई श्रीमती पीएएस, 22 नवंबर 1973 को पैदा हुई श्रीमती आरएएस, 27 नवंबर 1944 को पैदा हुए एपीएस, 14 अगस्त 1949 को पैदा हुई श्रीमती एडीएस, 20 मई 1935 को पैदा हुए एमएलए, 21 फरवरी 1968 को पैदा हुए एनएमए और 27 जून 1973 को पैदा हुए एमएमए शामिल हैं।

यहां कैंची नहीं, कुल्हाड़ी से काटे जाते हैं बाल, VIDEO देख घूम जाएगा दिमाग

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क्या आपने कभी कैंची से नहीं कुल्हाड़ी से अपने बाल कटवाएं हैं। आप जरूर इसे मजाक समझकर भूल जाएं, लेकिन एक हेयर ड्रेसर ऐसे भी हैं, जो बाल काटने के लिए कैंची का नहीं कुल्हाड़ी का इस्तेमाल करते हैं। हाल ही में डेनियल के इसी अंदाज का एक वीडियो यू-ट्यूब पर अपलोड किया गया है।

अपलोड किए गए इस वीडियो को अब तक तकरीबन 148K बार देखा जा चुका है। इसे देखने वाले कई दर्शक जहां इसे कूल बता रहे हैं, वहीं कुछ को यह रोंगटे खड़े करने वाला लगा। कुछ लोगों को तो यह जानकर हैरानी भी हुई कि लोग इस रिस्की काम के लिए हेयर ड्रेसर को सर्विस के लिए पैसा दे रहे हैं।

जी हां, रशियन हेयर ड्रेसर डेनियल इस्टोमिन अपने सैलून पर आने वाले ग्राहकों के बाद कैंची से नहीं कुल्हाड़ी से काटते हैं। भले आपको यह बात सुनकर हैरानी और ड़र लग रहा हो, लेकिन डेनियल के ग्राहकों को उनपर पूरा भरोसा है।

भाजपा नेताओं की मौत तांत्रिक टोटके के कारण हो रही है: सांसद प्रज्ञा ठाकुर

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भोपाल। अपने श्राप को एटीएस चीफ की मौत का कारण बताने वाली भोपाल सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने अब भाजपा नेताओं की मौत के पीछे ‘जादू-टोना’ को जिम्मेदार बताया है। प्रज्ञा ठाकुर का आरोप है कि विपक्षी पार्टियां भाजपा नेताओं पर ‘मारक शक्ति’ का इस्‍तेमाल कर रहीं हैं। यही कारण है कि मनोहर पर्रिकर, सुषमा स्वराज, बाबूलाल गौर और अरुण जेटली की मौत हुई।

भोपाल में बीजेपी ऑफिस में बाबूलाल गौर और अरुण जेटली को श्रद्धांजलि देने के लिए सभा का आयोजन किया गया था। इसमें पार्टी सांसद प्रज्ञा ठाकुर भी मौजूद थीं। भरी सभा में उन्होंने अपनी बात एक किस्सा सुनाते हुए कही। प्रज्ञा ठाकुर ने कहा, ‘मैं जब चुनाव लड़ रही थी, तब एक महाराज जी आए थे। उन्होंने कहा था कि यह बहुत बुरा समय चल रहा है। विपक्ष एक मारक शक्ति का प्रयोग आपकी पार्टी (बीजेपी) और उसके नेताओं के लिए कर रहा है।’ हालांकि, उन्‍होंने ‘महाराज जी’ के बारे में कुछ नहीं बताया।

सावधान रहने की कही थी बात

बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर यहीं नहीं रुकीं। उन्‍होंने आगे कहा, ‘मैं यह बात भूल गई थीं, लेकिन अब जब मैं यह देखती हूं कि हमारी पार्टी के नेता एक के बाद एक जा रहे हैं (निधन) तो मुझे उन महाराज जी की बात याद आ रही है। भले आप विश्‍वास करें या ना करें लेकिन यही सत्य है और यह हो रहा है। साध्‍वी प्रज्ञा ठाकुर ने हाल ही में दिवंगत हुए सभी नेताओं के नाम लिए। उन्‍होंने मनोहर पर्रिकर, सुषमा स्वराज, बाबूलाल गौर और अब अरुण जेटली के निधन को महाराज की बात से जोड़ दिया।