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रविदास मंदिर: दलित प्रदर्शन की ये तस्वीरें कितनी सच्ची हैं? – फ़ैक्ट चेक

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दिल्ली के तुग़लक़ाबाद इलाक़े में गुरु रविदास मंदिर गिराये जाने के ख़िलाफ़ कई दलित संगठनों ने नई दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल प्रदर्शन किया था.

ये प्रदर्शन बीते बुधवार को हुआ था. इस प्रदर्शन से जुड़ी तमाम तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किये जा रहे हैं, लेकिन बीबीसी ने अपनी पड़ताल में पाया है कि इनमें से कुछ बुधवार को हुए प्रदर्शन के नहीं हैं.

10 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गुरु रविदास मंदिर को गिरा दिया गया था जिससे दलित समुदाय काफ़ी नाराज़ है.

उनका मानना है कि यह सब दिल्ली विकास प्राधिकरण की वजह से हुआ है जो केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय के अधीन काम करता है.

यही वजह रही कि दिल्ली के इस प्रदर्शन में हरियाणा, पंजाब, यूपी और देश के अन्य हिस्सों से आये संत रविदास के अनुयायियों के बीच ‘मोदी सरकार मुर्दाबाद’ का शोर उठता दिखाई दिया.

लेकिन सोशल मीडिया पर जो लोग इस प्रदर्शन को प्रमोट कर रहे थे, हमने पाया कि उनमें के कुछ लोगों ने पुरानी तस्वीरें और वीडियो भ्रामक दावों के साथ शेयर किये हैं.

पुराने प्रदर्शन का वीडियो

‘जय भीम-जय भीम’ के नारे लगाती भीड़ का एक वीडियो जिसे एक बिल्डिंग की छत से शूट किया गया, सोशल मीडिया पर पाँच लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है.

30 सेकेंड के इस वीडियो में लोकेशन के तौर पर दिल्ली लिखा हुआ है और भीड़ के हाथों में नीले झंडे हैं.

ट्विटर पर ‘यूथ कांग्रेस के नेशनल कैंपेन इंचार्ज’ के तौर पर अपना परिचय देने वाले श्रीवत्स ने भी इस वीडियो को ट्वीट किया है जिसे सैकड़ों लोग शेयर कर चुके हैं.

इस वीडियो के साथ उन्होंने लिखा है, “दलितों के मुद्दे को मीडिया इसलिए नहीं उठाएगा क्योंकि ये हिंदुत्व प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ है. आरएसएस के लिए 1509 में बना संत रविदास का मंदिर महत्व नहीं रखता. मोदी और आरएसएस को सिर्फ़ दलितों के वोट चाहिए. वरना किसी प्रभावी समुदाय द्वारा की गई इतनी बड़ी रैली को क्या यूं ही नज़रअंदाज़ किया जाता?”

बीबीसी ने अपनी पड़ताल में पाया है कि ये वीडियो नई दिल्ली के प्रदर्शन का नहीं, बल्कि साल 2016 में हुए महाराष्ट्र के एक आंदोलन का है.

महाराष्ट्र का वीडियो

इस वायरल वीडियो को रिवर्स सर्च करने पर हमें मार्च 2018 में पोस्ट किये गए कुछ यू-ट्यूब वीडियो मिले जिनकी लंबाई फ़िलहाल वायरल हो रहे वीडियो की तुलना में थोड़ी ज़्यादा थी.

इनकी क्वालिटी अच्छी थी जिस वजह से हमें वीडियो से संबंधित तीन अहम सुराग़ मिले.

– पहला, वीडियो में दिखने वाले पोस्टर.

– दूसरा, एक दुकान जिसके बाहर लिखा है ‘व्यंकटेश कृषि भांडार’.

– तीसरा, वीडियो में दिख रहे बड़े पाइपनुमा ढांचे.

इनके आधार पर हमने जाँच को आगे बढ़ाया तो पता चला कि ‘व्यंकटेश कृषि भांडार’ पूर्वी महाराष्ट्र के नांदेड शहर की वीआईपी रोड पर स्थित है.

इसके बाद गूगल मैप्स की मदद से इस बात की पुष्टि की गई कि वीडियो में दिखने वाले ‘बड़े पाइपनुमा ढांचे’ इस कृषि भंडार से दक्षिण-पूर्व में स्थित बड़े गोदाम हैं जो वायरल वीडियो में साफ़ दिखाई देते हैं.गूगल मैप्स की मदद से की गई जगह की पहचान

नांदेड शहर में बीते कुछ वर्षों में हुए दलित प्रदर्शन के बारे में जब हमने इंटरनेट पर सर्च किया तो पता चला कि 16 अक्टूबर 2016 को ‘निर्धार महामोर्चा’ नाम के बैनर तले लाखों लोग शहर के कृषि उत्पन्न बाज़ार समिति मैदान में एकत्र हुए थे.

पुरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह एक बड़ा प्रदर्शन था और एससी, एसटी समेत ओबीसी वर्ग के दस लाख से ज़्यादा लोग इसमें शामिल हुए थे जिनकी माँग थी कि दलित उत्पीड़न रोकथाम क़ानून में कोई बदलाव ना किया जाये.

बीबीसी ने पाया कि यह वीडियो दिल्ली के प्रोटेस्ट का बताये जाने से पहले साल 2018 में प्रकाश आंबेडकर के ‘एल्गार मोर्चा’ के बैनर तले मुंबई के सीएसएमटी इलाक़े में जमा हुए प्रदर्शनकारियों का बताकर वायरल हो चुका है.

साथ ही बिहार, जोधपुर और इंदौर में हुए दलित प्रदर्शनों के तौर पर भी सोशल मीडिया पर इसे शेयर किया गया है.

नीले झंडे और लोगों का सैलाब

जनसैलाब की यह तस्वीर भी सोशल मीडिया पर दिल्ली में हुए दलित प्रोटेस्ट की बताकर शेयर की जा रही है.

काफ़ी ऊंचाई से खींची गई इस तस्वीर में भारी भीड़ दिखाई देती है और झंडों के रंग को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि लोगों ने ‘भीम आर्मी’ के झंडे ले रखे हैं.

लेकिन यह एक फ़र्ज़ी तस्वीर है और फ़ोटो एडिटिंग के ‘कमाल’ से इसे तैयार किया गया है.

असल में यह तस्वीर साल 2016 के ‘मराठा क्रांति मूक मोर्चा’ की है और भीड़ के हाथों में केसरिया (भगवा) रंग के झंडे थे, जिन्हें फ़ोटो एडिटिंग की मदद से बदलकर नीला कर दिया गया है.

रिवर्स इमेज सर्च के नतीजे बताते हैं कि इस फ़र्ज़ी तस्वीर को साल 2016 से ही देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए दलित प्रदर्शनों के दौरान शेयर किया जाता रहा है.

लेकिन इस जगह की पहचान तस्वीर में दिख रही ‘सम्भाजी पुलिस चौकी’ और ‘सम्भाजी मित्र मंडल’ नाम की दुकान से हुई जो महाराष्ट्र के पुणे शहर में स्थित है.

फ़ोटो की पड़ताल

साल 2016 में पुणे शहर में हुए बड़े प्रदर्शनों के बारे में सर्च करने पर पता चला कि 25 सितंबर 2016 को ‘मराठा क्रांति मूक मोर्चा’ के बैनर तले 16 मराठा संगठनों ने यह प्रदर्शन आयोजित किया था जिसमें पंद्रह लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया गया था.

पुणे में मराठाओं के प्रदर्शन का जो फ़ोटो सोशल मीडिया पर दिल्ली के दलित प्रोटेस्ट का बताकर शेयर हो रहा है, वो दरअसल मराठा क्रांति मोर्चा की आधिकारिक वेबसाइट पर छपी एक फ़ोटो गैलरी से लिया गया है.

हमने पाया कि अक्तूबर 2016 में कई ट्विटर यूज़र्स ने #marathakrantimorch के साथ इस तस्वीर को शेयर किया था.

पुणे शहर में हुआ यह प्रदर्शन मराठा समुदाय के कई महीनों तक चले प्रदर्शनों की एक सिरीज़ का हिस्सा था.

इस दौरान महाराष्ट्र के छोटे शहरों-क़स्बों, ज़िलों और तालुका मुख्यालयों के बाहर भी मराठा समुदाय ने प्रदर्शन किये थे.

इन प्रदर्शनों के पीछे इस समुदाय की आरक्षण और किसानों को पेंशन जैसी कुछ मांगें थीं. इनमें से एक प्रमुख माँग ये भी थी कि दलित उत्पीड़न रोकथाम क़ानून में बदलाव किया जाये.

मराठा समुदाय के लोगों का यह आरोप था कि ‘इस क़ानून का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है. ये केंद्र का क़ानून है, इसलिए इसमें संशोधन केंद्र सरकार ही कर सकती है’.

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने अपने पद से अचानक दिया इस्तीफ़ा

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केशव प्रसाद मौर्य भारत के उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री हैं। वे सोलहवीं लोकसभा के सांसद थे। 2014 के चुनावों में वे उत्तर प्रदेश की फूलपुर सीट से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर निर्वाचित हुए। 19 मार्च 2017 को इन्होंने उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने इस्तीफ़ा दे दिया है। मौर्या ने निर्माण निगम अध्यक्ष पद से अचानक इस्तीफ़ा दे दिया है। बता दें, मौर्या अब सचिव निर्माण निगम के अध्यक्ष होंगे।
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 मौर्या ने अचानक अपना पद क्यों छोड़ा, इसकी जानकारी अभी नहीं है लेकिन यह बात हर कोई पूछ रहा है कि उन्होंने अपना पद क्यों छोड़ा। मौर्या के इस्तीफ़ा देने के बाद नितिन रमेश गोकरण नए अध्यक्ष होंगे।
कौन हैं केशव प्रसाद मौर्या?
केशव प्रसाद मौर्य यूपी में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष का पद संभाल चुके हैं|
मौर्य सोलहवीं लोकसभा के सांसद थे।
2014 के चुनावों में वे उत्तर प्रदेश की फूलपुर सीट से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर निर्वाचित हुए।
19 मार्च 2017 को इन्होंने उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली
केशव प्रसाद मौर्य उत्तर प्रदेश के ओबीसी समुदाय पर मजबूत पकड़ रखते हैं।
मौर्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्पर्क में आने के बाद विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल और भाजपा में करीब 18 साल तक प्रचारक रहे हैं।
केशव प्रसाद मौर्य ने श्रीराम जन्म भूमि और गोरक्षा व हिन्दू हित के लिए अनेकों आन्दोलन किये और इसके लिए जेल भी गये।
फूलपुर से भाजपा प्रत्याषी के रूप में तीन लाख आठ हजार तीन सौ आठ (308308) वोटो से ऐतिहासिक जीत हासिल की। इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी के रूप में जो उपहार मिला, उसमें भी इन्होने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
मौर्य पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
लोकसभा चुनाव के समय चुनाव आयोग को दिए हलफनामे के अनुसार इन पर दस गंभीर आरोपों में मामले दर्ज हैं।
केशव प्रसाद मौर्या ने कृषि कार्यों के साथ-साथ चाय की दुकान भी चलायी और अख़बार का विक्रय तक किया।

छत्तीसगढ़ के ब्रिगेडियर सुधीर ने फ्रांस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का किया स्वागत

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शुक्रवार को जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश यात्रा में पेरिस पहुंचे तो विमानतल पर छत्तीसगढ़ के ब्रिगेडियर सुधीर मिश्रा ने उनकी अगुवानी की। ब्रिगेडियर सुधीर फ्रांस में भारतीय दूतावास में पदस्थ हैं। गर्म जोशी से स्वागत को देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे हिंदी में बात की। पूछा आप कहां से हैं। ब्रिगेडियर ने बताया- छत्तीसगढ़ राज्य के दुर्ग जिले के पाटन से हैं। प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई दी।

सुधीर ने कहा कि ऐसा अवसर कम ही आता है, जब अपने देश के प्रधानमंत्री की अगुवानी करने को मौका मिले। पहला मौका था जब अपने देश के प्रधानमंत्री का स्वागत करने का अवसर मिला। यह मेरे लिए गर्व की बात है। 

शुरू से पढ़ाई में होनहार 

पाटन के ग्राम धुमा के रहने वाले सुधीर मिश्रा का जन्म सितंबर 1968 में हुआ। उनके पिता अश्वनी मिश्रा मर्रा स्कूल में शिक्षक थे। इसलिए उनकी प्राथमिक शिक्षा कक्षा पहली से लेकर तीसरी तक प्राथमिक शाला मर्रा में हुई और फिर चौथी, पांचवीं और छटवीं उन्होंने पाटन से पढ़ाई की। कक्षा छठवीं में 1979 में सुधीर का चयन सैनिक स्कूल रीवा में हो गया।

12वीं उत्तीर्ण करते ही उनका चयन 17 साल की उम्र में नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) के लिए हुआ। तीन साल तक एनडीए में रहे। इसके बाद मद्रास सैनिक विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। पढ़ाई पूरी होने के बाद आर्मी में सेकंड लेफ्टिनेंट की परीक्षा दी, जिसमें सफल हो गए और वे जम्मू में पदस्थ हुए। मेजर, कर्नल के बाद ब्रिगेडियर के रूप में वे गत एक वर्ष से फ्रांस स्थित भारतीय दूतावास में तीन वर्ष के लिए पदस्थ हैं। 

स्वीमिंग थी पसंद 

सुधीर के चचेरे भाई शैलेष मिश्रा ने बताया कि सुधीर को किताबें पढ़ने के साथ स्वीमिंग का शौक था। स्कूल की पढ़ाई के दौरान जब वे अपने गांव धुमा आते थे तब तालाब में तैरा करते थे। पलक झपकते ही वे तालाब पार कर जाते। 

पिता चाहते थे बेटा करे देश सेवा

सुधीर सामान्य परिवार से हैं। उनके पिता शिक्षक अश्वनी मिश्रा का सपना था कि उनका बेटा सेना में रहकर देश सेवा करें। सुधीर की एक बहन भी है। पिता के सपने को सुधीर ने पूरा कर दिखाया। सुधीर की दो बेटियां हैं, जो उनके साथ रह कर उच्च शिक्षा की पढ़ाई कर रही हैं।

सख्ती : अगले साल से एसी 24 डिग्री पर ही चलेंगे

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अगले साल जब आप गर्मी से निजात पाने के लिए नया एयरकंडीशनर खरीदेंगे तो वह 24 डिग्री सेल्सियस तापमान पर शुरू होगा। केंद्र सरकार एक साल बाद एसी का शुरुआती तापमान 24 डिग्री तय करने की तैयारियों में जुटी है।

विद्युत मंत्रालय का मानना है कि इससे बिजली की बचत होगी। ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में कहा कि एसी के तापमान को 24 डिग्री करने के बारे में अभी एडवायजरी जारी की है। लोगों का जागरूक कर रहे हैं, ताकि एक साल बाद इसे अनिवार्य किया जा सके।

तापमान 24 डिग्री करने से बिजली की बचत होगी। ऐसा नहीं है कि तापमान 24 डिग्री पर करने के बाद इससे कम तापमान पर एसी नहीं चलेगा। इसे कम तापमान पर भी चलाया जा सकेगा पर जब एसी चालू करेंगे यह 24 डिग्री पर ही शुरू होगा।

27 की उम्र में पति बना 4 फुट का छोटू, 3 दिन पहले अपने जैसे कद की लड़की से रचाया निकाह

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कहते हैं कि कम हाइट वाले लोग सामान्य लोगों से ज्यादा बुद्धिमान होते हैं और इस कहावत का जीता जागता उदाहरण यूट्यूब के लिए एक्टिंग करने वाला छोटू है। कम हाइट वाले लोगों का हमारा समाज हमेशा से ही मजाक उड़ाता आया है। छोटू दादा उर्फ शफीक नात्या की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। कम हाइट होने की वजह से वह पहले लोगों के लिए मजाक के अलावा कुछ नहीं थे और अब भी हैं, लेकिन अब लोग उनका मजाक उड़ाने के साथ-साथ उनकी बहुत इज्जत भी करने लगे हैं। कुछ साल पहले यूट्यूब पर फनी वीडियोज से एक्टिंग की शुरुआत करने वाला छोटू आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है।

छोटू दादा की लोकप्रियता इस समय चरम सीमा पर है। लोग उनकी वीडियोज को काफी पसंद करते हैं। अच्छी बात यह है कि इंटरनेट की दुनिया पर छाया हुआ छोटू बहुत जल्द बॉलीवुड फिल्मों में एक्टिंग करता दिखेगा। जानकारी के मुताबिक, इंटरनेट पर पापुलैरिटी प्राप्त करने के बाद छोटू को कई हिंदी फिल्मों में काम करने का मौका मिला है। बहुत जल्द छोटू के चाहने वाले उसे बड़े पर्दे पर देख आनंद लें सकेंगे।

काम की बात को छोड़कर अगर छोटू की निजी लाइफ को लेकर बात करें तो 4 फुट का छोटू एक्टर होने के साथ पति भी बन चुका है। इस मशहूर एक्टर का 3 दिन पहले ही धूमधाम से निकाह हुआ है। उनकी शादी उनके कुछ करीबी रिश्तेदारों और दोस्तों की उपस्थिति में हुई। छोटू दादा को अपने जैसी कद काठी वाली लड़की बीवी के रूप में मिली है। उनकी बीवी देखने में काफी खूबसूरत है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि छोटू दादा 27 साल की उम्र में पति बने हैं। उनको देखकर कहीं से भी नहीं लगता कि वह 27 साल के हैं, लेकिन असलियत में उनकी यही उम्र है। भले ही छोटू की लंबाई न बढ़ी हो लेकिन दिमाग कूट-कूट कर भरा है।

40 साल तक इस एक्टर ने स्क्रीन पर किया राज, आखिरी दिनों में भुखमरी और तंगहाली का हुआ था शिकार

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‘इतना सन्नाटा क्यों है भाई ? फिल्म ‘शोले’ में एके हंगल का ये डायलॉग इतना चर्चित रहा था कि ये उनकी पहचान ही बन गया। एके हंगल फिल्मों में नहीं आना चाहते थे या यूं कह सकते हैं कि एक्टिंग उनका शगल नहीं रही। 26 अगस्त 2016 को उनका निधन हो गया था। उनकी पुण्यतिथि पर जानते हैं कुछ अनसुनी बातें…

एके हंगल एक स्वतंत्रता सेनानी थे, लेकिन किस्मत का कुछ ऐसा साथ मिला कि वो फिल्मों में आ गए। उन्होंने फिल्मों में कई यादगार किरदार निभाए जिनके लिए हंगल साहब को हमेशा याद किया जाएगा। 40 साल के करियर में एके हंगल ने करीब 225 फिल्मों में काम किया। उनकी एक फिल्म ऐसी नहीं है जिसमें हंगल ने अपनी छाप ना छोड़ी हो।

हिंदी सिनेमा के इतिहास में एके हंगल और उनका योगदान आज भी दर्ज है, लेकिन एक वक्त था जब उसी इंडस्ट्री ने हंगल साहब का साथ छोड़ दिया जब वो आर्थिक रूप से कमजोर हो गए। ग्लैमर इंडस्ट्री का यही काला सच है। यहां लोग तभी तक आपको सिर-आंखों पर बिठाते हैं जब तक आप सूरज बनकर चमकते हैं, लेकिन जैसे ही ये सूरज चमकना बंद होता है तो उसे अर्श से फर्श पर फेंकने में भी देर नहीं लगाते। एके हंगल भी कुछ इसी तरह की पीड़ा का शिकार हुए थे।

जिस एके हंगल ने हिंदी सिनेमा में इतिहास के नए पन्ने जोड़े उसी को एक ऐसा दौर देखना पड़ा जो किसी की भी रूह कंपा दे। पद्म भूषण से सम्मानित एक्टर एके हंगल को अपने अंतिम दिनों में एक छोटे से कमरे में अपनी जिंदगी गुजारनी पड़ी। आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन वो 95 साल की उम्र में अपने बेटे के साथ खंडहर जैसे घर में रह रहे थे।

एक वक्त पर हंगल साहब की हालत इतनी खराब हो गई थी कि उनके पास दवाईयों और मेडिकल बिल भरने तक के पैसे नहीं थे। हालांकि फिल्म इंडस्ट्री से अमिताभ बच्चन और करण जौहर जैसी कई हस्तियों ने एके हंगल की आर्थिक रूप से मदद की, लेकिन तब जब उन्हें हंगल की हालत के बारे में पता चला यानि उससे पहले किसी ने भी उनके बारे में सोचने की कोशिश भी नहीं की।

एके हंगल एक बार अपने घर में ही बाथरूम में फिसलकर गिर गए जिसके बाद उनकी जांघ की हड्डी टूट गई और पीठ में भी चोट आई। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया सर्जरी के लिए लेकिन छाती और सांस लेने में तकलीफ के चलते सर्जरी नहीं की जा सकी। हालत और बदतर होती चली गई और फिर हंगल साहब को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रख दिया गया। धीरे-धीरे उनके फेंफड़ों ने भी काम करना बंद कर दिया और फिर एक दिन वो इस दुनिया से चल बसे।

जानिये आयुर्वेद के अनुसार भोजन करने का सबसे अच्छा समय क्या है

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ऐसा कोइ भी पदार्थ जो शर्करा (कार्बोहाइड्रेट), वसा, जल तथा/अथवा प्रोटीन से बना हो और जीव जगत द्वारा ग्रहण किया जा सके, उसे भोजन कहते हैं। जीव न केवल जीवित रहने के लिए बल्कि स्वस्थ और सक्रिय जीवन बिताने के लिए भोजन करते हैं। भोजन में अनेक पोषक तत्व होते हैं जो शरीर का विकास करते हैं, उसे स्वस्थ रखते हैं और शक्ति प्रदान करते हैं।
सुबह खाना पेट भर कर खा लेना चाहिए। फिर दोपहर को सुबह से थोड़ा कम भोजन करना चाहिए। फिर शाम को दोपहर से भी कम भोजन करना चाहिए।
आयुर्वेद के अनुसार हमें भोजन उस समय करना चाहिए जब हमारे पेट में जठर की अग्नि सबसे अधिक तेज होती है। जब सूर्योदय होता है, तो उसके 2:30 घंटे तक जठर की अग्नि सबसे तेज होती है। जैसे अगर सूर्य 7:00am पर उदय हो रहा है, तो 9:30am तक जठर की अग्नि सबसे अधिक तेज होती है। इस समय में हमें पेट भर कर भोजन कर लेना चाहिए। आपको जो कुछ भी खाने में सबसे अधिक पसंद है, वह सुबह-सुबह खा लेना चाहिए।
आयुर्वेद के अनुसार अगर हम सुबह और शाम को ही भोजन करें तो सबसे अच्छा है। फिर भी यदि आप दोपहर को भोजन करते हैं, तो उसकी मात्रा सुबह के भोजन से कम होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त दोपहर के भोजन का समय भी निश्चित होना चाहिए। आप सुबह के भोजन के 4:30 घंटे के बाद कोई भी समय दोपहर के भोजन के लिए निश्चित कर सकते हैं।
आयुर्वेद में शाम के भोजन का समय सूर्यास्त से 40 मिनट पहले का बताया गया है। इस समय भी हमारे पेट में जठर की अग्नि बहुत तेज होती है। सूर्यास्त के बाद खाना खाने को आयुर्वेद में निषेध बताया गया है। आयुर्वेद में साफ तौर पर कहा गया है कि धरती का कोई भी प्राणी सूर्यास्त के बाद खाना नहीं खाता। इसीलिए वे सभी स्वस्थ रहते हैं। रात को सूर्यास्त के बाद दूध ले सकते हैं। रात को हमारे शरीर में कुछ खास तरह के एंजाइम बनते हैं, जो दूध को पचाने में सहायक होते हैं।

अगर चाहते हैं गैस और एसिडिटी की समस्या से छुटकारा, तो कभी न करें यह गलती

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आधुनिक विज्ञान के अनुसार आमाशय में पाचन क्रिया के लिए हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा पेप्सिन का स्रवण होता है। सामान्य तौर पर यह अम्ल तथा पेप्सिन आमाशय में ही रहता है तथा भोजन नली के सम्पर्क में नहीं आता है। आमाशय तथा भोजन नली के जोड पर विशेष प्रकार की मांसपेशियां होती है जो अपनी संकुचनशीलता से आमाशय एवं आहार नली का रास्ता बंद रखती है तथा कुछ खाते-पीते ही खुलती है। जब इनमें कोई विकृति आ जाती है तो कई बार अपने आप खुल जाती है और एसिड तथा पेप्सिन भोजन नली में आ जाता है। जब ऐसा बार-बार होता है तो आहार नली में सूजन तथा घाव हो जाते हैं।
खाना हमेशा ऐसे बर्तन में ही बनाना चाहिए जो पूरी तरह से बंद न हो। उसमें से हवा आसानी से गुजरनी चाहिए। मतलब चाहे बर्तन थोड़ा सा ही खुला हो, पर खुला जरूर होना चाहिए।
जब हम बंद बर्तन में खाना पकाते हैं, तो खाना गर्मी के दवाब की वजह से जल्दी पक जाता है। इस तरह जल्दी पका खाना जब हमारे शरीर के अंदर जाता है, तो धीरे-धीरे करके हमारे पेट में बहुत सी समस्याएं पैदा करता है। इनमें पेट में गैस होने की समस्या सबसे आम समस्या है।
इसलिए हमें पूरी तरह से बंद बर्तन का प्रयोग खाना पकाने के लिए नहीं करना चाहिए। प्रेशर कुकर हमारी रसोई में सबसे कॉमन बंद बर्तन है, जो दाल बनाने के प्रयोग में लाया जाता है। हम इस कुकर की जगह खुली हांडी का प्रयोग कर सकते हैं।
पुराने समय में हमारे बुजुर्ग इसी हांडी का प्रयोग करके दाल बनाया करते थे और आप जानते होंगे कि उन्हें पेट की गैस की समस्या बहुत कम होती थी। इसके अतिरक्त जब हम सब्जी वगैरा भी पकाते हैं, तो बर्तन को पूरा बंद करने के स्थान पर थोड़ा सा खुला रखना चाहिए। ताकि उस सब्जी को हवा का स्पर्श मिल सके। इस तरह पकी दाल और सब्जी आसानी से पच जाती है।

अपने जीवन में इन 4 चीजों को देखना किस्मत वालों को ही नसीब होता है

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दीमक छोटे कीट हैं। जो लकडी और लकडी की बनी चीज़ेँ जैसे फर्निचर आदि कुतरकर खा जाते हैँ। दीमक ईसाइजल कीड़े हैं जिन्हें इन्फ्रास्ट्रक्चर आइसोपेटरा के टैक्सोनॉमिक रैंक में वर्गीकृत किया गया है, या तिलचट्टा के क्रम में ब्लैकोडेडा के एपिफैमिली टर्मिटॉइड के रूप में वर्गीकृत किया गया है। दीमक को एक बार अलग-अलग तिलचट्टे से वर्गीकृत किया गया था, लेकिन हाल के फिलाजेनेटिक अध्ययनों से संकेत मिलता है
तो आपको ये जरूर मिल जाएंगी. चलिए आपको इन चारों चीजों के बारे में विस्तार से बताते हैं।
1. सी रोबिन
यह बेहद दुर्लभ मछली है जो प्रशांत महासागर में पाई जाती है यह मछली समुद्र तल पर अपने पंखों की मदद से चलती है और शायद ही कभी समुद्र की सतह से ऊपर छलांग लगाकर उड़ने की कोशिश भी करती है इसके पंख तितली की तरह बहुत ही खूबसूरत होते हैं.इस मछली को बहुत ही कम लोग देख पाए हैं।
2. दीमक की बांबी
दीमक की बांबी कोई दुर्लभ चीज़ नहीं है लेकिन यदि वह 30 फुट ऊंची और 2000 साल पुरानी हो तो आप उसे दुर्लभ मान सकते हैं जी हां ऐसी दिमक की बांबी ऑस्ट्रेलिया में पाए जाते हैं इनमें से कुछ की ऊंचाई 30 फुट तक है और ये कई हजार साल पुरानी है।
3. सफेद मोर
मोर दुनिया का सबसे खूबसूरत के साथ हमारा रास्ट्रीय पक्षी भी है. इसके पंखों में कई रंग होते हैं लेकिन सफेद मोर की बात अलग है सफेद मोर का जन्म जेनेटिक म्युटेशन के कारण होता है. यह बहुत ही दुर्लभ अवस्था है और बहुत ही कम देखने को मिलती है दुनिया में बहुत ही कम सफेद मोर मौजूद हैं।
4. स्केट
यह एक तरह की मछली है जो बहुत ही दुर्लभ है इसका आकार भी सबसे अलग होता है. यदि आपको यह मछली कहीं पर दिख जाए तो आप शायद इसे दूसरे ग्रह का जीव समझ लेंगे. यह मछली समुद्र की गहराइयों में रहती है।

दुनिया के 4 मांसाहारी फूड्स जिन्हें आप शाकाहारी समझकर खाते हैं, सभी नाम हैरान करने वाली है

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मांसाहारी गण (Carnivora) मांसाहारी स्तनियों का गण है। इसके अंतर्गत सिंह, बाघ, चीता, पालतू कुत्ते एवं बिल्लियाँ, सील, लोमड़ी लकड़बग्घा, रीछ आदि जीव आते हैं। इस गण के लगभग 260 वंश वर्तमान है और वर्तमान वंश के बराबर वंश विलुप्त हो गए हैं। तृतीयक (Tertiary) युग के आरंभ में इस गण के जीवों की उत्पत्ति हुई, तब से अब तक ये अपना अस्तित्व बनाए रखने में पर्याप्त सफल रहे हैं।
तो चलिए जानते है वो क्या हैं।
4. नान
नान खाने में बहुत ही स्वादिष्ट और तीखा लगता है, लेकिन आपको जानकारी दें कि नान को नरम और लचीला बनाने के लिए उसमें अंडा मिलाया जाता है।
3. चीज
आपको मालूम होगा ही कि इसको किस चीज से बनाया जाता है लेकिन बता दे चीज बनाने के लिए दूध के साथ एक प्रकार का एंजाइम्स उपयोग किया जाता है, जिसे पशुओं के आंतों से प्राप्त किया जाता है। 2. कुकिंग ऑइल
अब खाने के लिए दुकान में मिलने वाली जिस तेल का उपयोग करते हैं, असल में वे नॉनवेज है. टीवी में बताया जाता है कि कुकिंग ऑयल में ओमेगा-3 और विटामिन डी मौजूद होता है, जो आंखों और दिल के लिए फायदेमंद माना जाता है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि ओमेगा 3 मछली और विटामिन डी भेड़ की हड्डी से प्राप्त किया जाता है और उसे तेल में मिलाया जाता है।
1. मंचऑव सूप
जो लोग चाइनीस खाना ज्यादा पसंद करते हैं वे लोग मंचऑव सूप का ऑर्डर जरूर देते होंगे. जानकारी के लिए बता दें इस सूप को बनाने के लिए फिश सॉस का उपयोग किया जाता है।