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बॉलीवुड अभिनेत्री रेखा के पति कौन हैं

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दोस्तों जैसे की हम सब जानते है की विनोद मेहरा, मुकेश अग्रवाल इनसे तो रेखा ने शादियां की थी पर अब तो दोनों की मृत्यु हो चुकी है परंतु फिर भी अभी भी रेखा फुल मेकअप में मोटी सी बिंदी लगाकर सिंदूर लगाकर रहती हैं, ऐसा क्यों है, आज हम आपको इसी के बारे में बताने वाले है.

वैसे आपको बतादें की इन दोनों के अलावा और भी इस लाइन में थे जैसे अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार… आदि वैसे मैंने कहीं सुना है कि एक बार रेखा को एयरपोर्ट पर अपना फॉर्म फिल करना था जिसमें चार ऑप्शन थे -मैरिड, अनमैरिड, डाइवोर्सड एंड विडो तो इन सभी में रेखा ने चारों ऑप्शंस को टिक कर दिया.

वैसे आपको बतादें की साल 1990 में दिल्ली के कारोबारी मुकेश अग्रवाल से रेखा ने शादी कर ली थी, पर बाद में किसी कारण वश उनकी मौत हो गयी तब उसके बाद से रेखा अकेली ही रहती है.

एक और अफवाह के बारे में आपको बताये तो उन्होंने साल 1973 में अभिनेता विनोद मेहरा से शादी की लेकिन 2004 में सिमी ग्रेवाल के टीवी इंटरव्यू में मुकेश के साथ उनकी शादी का खंडन किया और उन्हें अपना वेलविशर बताया, वे अभी मुंबई के बांद्रा इलाके में रहती हैं.

तो आज तक किसी को भी इस बात का पता नहीं चल पाया है की रेखा शादीशुदा है की नहीं.

राजीव गांधी की हत्‍या की दोषी नलिनी को राहत, पैराल अवधि 3 हफ्ते और बढ़ी

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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्‍या के 7 दोषियों में से एक नलिनी को मद्रास हाईकोर्ट ने राहत दी है। मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को एस. नलिनी के पैरोल को तीन हफ्तों के लिए बढ़ा दिया है। उन्होंने अदालत में एक माह का विस्तार देने के लिए याचिका दाखिल किया था, ताकि वह अपनी बेटी की शादी की तैयारियों को कर सके।

नलिनी ने कहा कि वह शादी का इंतजाम अभी तक नहीं कर पाई है, क्योंकि उनकी बेटी लंदन में रहती है और अगले महीने भारत आने वाली है। नलिनी को 25 जुलाई को एक महीने के पैरोल पर रिहा किया गया था। मद्रास हाईकोर्ट ने 5 जुलाई को नलिनी को एक महीने के लिए पैरोल पर रिहा होने की अनुमति दी थी, जबकि नलिनी ने अपनी बेटी की शादी की तैयारियों के लिए छह महीने के पैरोल की याचिका दाखिल की थी।

नलिनी ने अपने मामले की जिरह खुद की थी। अदालत ने नलिनी से कहा कि वह पैरोल की अवधि में नेताओं और मीडिया से नहीं मिलेंगी। अपनी याचिका में नलिनी ने कहा था कि आजीवन कारावास की सजा प्राप्त हर कैदी को दो साल जेल में बिताने के बाद एक महीने की साधारण छुट्टी पाने का नियम है और उन्होंने पिछले 27 साल जेल में बिताए हैं और एक बार भी छुट्टी नहीं ली है।

नलिनी के अलावा इस मामले के दोषियों में उसके पति वी. श्रीहरण उर्फ मुरुगन, ए. जी. पेरारीवलन, टी. सुथेंद्रराजा उर्फ संथन, जयकुमार, रॉबर्ट पायास और रविचंद्रन शामिल हैं। सभी सातो दोषी साल 1991 से ही जेल में हैं, जब एक महिला तमिल टाइगर आत्मघाती हमलावर ने चेन्नई के नजदीक एक चुनावी रैली में राजीव गांधी से मिलते हुए खुद को बम से उड़ा लिया था।

त्रिफला चूर्ण कब खाना चाहिए और क्या है इसके बड़े फायदे – जानकर खाना शुरू कर देंगे

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त्रिफला चूर्ण कब खाना चाहिए और क्या है इसके बड़े फायदे – जानकर खाना शुरू कर देंगे :- आज यदि आप इसके फायदे जान जाएंगे तो कल से ही इसका सेवन करना शुरू कर देंगे इसलिए अंत तक जरूर पढ़ें ।

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त्रिफला चूर्ण क्यों खाना चाहिए

त्रिफला चूर्ण का सेवन करना चाहिए क्योंकि हर बीमारी पेट से शुरू होती है और जिस व्यक्ति का पेट सही है उसे कोई बीमारी नहीं हो सकती और यदि आप रात में सोने से पहले त्रिफला चूर्ण का सेवन करते हैं तो आपका पेट कभी खराब नहीं होता क्योंकि यह आपकी आंतों को साफ कर देता है और आपके पेट को स्वस्थ रखता है जिसके कारण आप हजारों बीमारियों से दूर रहते हैं ।

त्रिफला चूर्ण को खाने के 5 बड़े फायदे

1) पहला फायदा – जो व्यक्ति त्रिफला चूर्ण खाता है उस व्यक्ति का पेट या पाचन तंत्र कभी खराब नहीं हो सकता और यदि पेट कभी खराब नहीं होगा तो शरीर भी कभी खराब नहीं होगा ।

2) दूसरा फायदा – त्रिफला चूर्ण के सेवन से आपका मोटापा नहीं बढ़ता और अतिरिक्त चर्बी भी कम हो जाती है यदि आप मोटे हैं तो आपको आज से ही त्रिफला चूर्ण का सेवन शुरू कर देना चाहिए ।

3) तीसरा फायदा – यदि आप त्रिफला चूर्ण का सेवन करते हैं तो आपको यह कई बीमारियों से बचाता है जैसे की कब्ज़, एसिडिटी, कमजोरी हड्डियों का दर्द, बालों का झड़ना, कमजोर आंखे, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर इत्यादि |

त्रिफला चूर्ण कब खाना चाहिए

त्रिफला चूर्ण को खाने का सबसे सही समय रात को सोने से पहले होता है जब आप रात में इसे पानी के साथ या फिर दूध के साथ खाते हैं तो यह आपकी आंतों को रात भर में साफ कर देता है और सुबह आपका पेट पूरी तरह से साफ हो जाता है और आपके पेट और आंतों का सारा कचरा बाहर हो जाता है जिसके कारण आपका पाचन तंत्र जिंदगी भर स्वस्थ रहता है और आपको पेट से संबंधित कोई बीमारी नहीं होती और यदि पेट ठीक तो आपका शरीर स्वस्थ ।

खूनी बवासीर, डायबिटीज जैसी इन 10 बीमारियों का इलाज है ये पौधा, हड्डियों को भी बनाता है मजबूत

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सोआ एक प्रकार की जड़ी बूटी होती है। जिसे वैज्ञानिक रूप में एनाथुन के नाम से जाना जाता है। आपको बता दें इस जड़ी बूटी का इस्तेमाल काफी लंबे समय से औषधि के रूप में किया जा रहा है। यह पौधा आपके शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर बनाता है।

इतना ही नहीं इसका नियमित रूप से इस्तेमाल करने से आपको पाचन आंतों की गैस जिगर की समस्या और पित्ताशय की थैली बाबासीर जैसी गंभीर समस्याओं से भी निजात मिलती है। 100 ग्राम सोआ में लगभग 43 ग्राम कैलोरी3.5 ग्राम प्रोटीन 7 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और लगभग 2 ग्राम फाइबर पाया जाता है। ।आइये आपको बताते है इसके बेहतरीन फायदों के बारे में।

सोआ डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए फायदेमंद होता है। आपको बता दें कि इसमें कई सारे ऐसे गुण होते है। जो आपके इंसुलिन लेवल में उतार-चढ़ाव को कम करने में मदद करते है। इतना ही नहीं आपके शरीर में ब्लड शुगर लेवल को भी प्रभावी रूप से नियंत्रित रखते हैं।

इसके पोषक तत्व शरीर में इम्यून सिस्टम को भी मजबूत रखने का काम करते है। यदि आप बार-बार संक्रमण का शिकार हो रहे है तो इसका मतलब है कि आपका प्रतिरक्षा तंत्र काफी ज्यादा मात्रा में कमजोर है।

इस औषधीय पौधे के अंदर एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते है। यह आंतरिक अंगों के साथ-साथ बाहरी चोट घाव कट लगना आदि में संक्रमण होने से बचाता है।

आपको बता दें कि इस पौधे के अंदर उच्च मात्रा में फाइबर मौजूद होती है । इसके अंदर कुछ ऐसे गुण भी पाए जाते है। जो जीवाणु नाशक के रूप में जाने जाते है। इसके अलावा इसके अंदर मैग्नीशियम जैसे खनिज पदार्थों का भी बेहतरीन स्रोत होता है। यदि आप कोई भी पेट से संबंधित बीमारी है तो आप इसकी मदद से उस से निजात पा सकते है।

हे पौधा कैल्शियम के लिए वरदान माना जाता है और कैल्शियम को तो हड्डियों के लिए फायदेमंद माना ही जाता है। आपको बता दें कि इसके अंदर कुछ मात्रा में कैल्शियम होता है। जो हड्डियों के विकास के लिए भी काफी ज्यादा फायदेमंद है। अगर आप नियमित रूप से इसका सेवन करते हैं तो यह आपकी हड्डियों को भी मजबूत बनाता है।

मुस्लिम राष्ट्र यमन अरब रिपब्लिक भी हुआ ‘मुरीद’, विदेशी डाक टिकटों में भी छाए हैं कन्हैया

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भगवान श्रीकृष्ण भक्तों के दिलों में नहीं बल्कि विदेशों द्वारा जारी की गई डाक टिकटों में भी छाए हुए हैं। देशी विदेशी भक्तों के साथ ही उनकी सरकारें भी श्रीकृष्ण के प्रति आस्था रखती हैं। यह आस्था इस्लामी व ईसाई राष्ट्रों द्वारा जारी की गई डाक टिकटों में नजर आती है। ब्रज साहित्य को सहेजने में लगे हुए वृंदावन शोध संस्थान में इन दिनों भगवान श्रीकृष्ण आधारित प्रदर्शनी लगाई गई है। प्रदर्शनी में भगवान श्रीकृष्ण व उनकी लीलाओं से जुड़ी हुई डाक टिकटें भी प्रस्तुत की गईं हैं।

यहां श्रीकृष्ण आधिरित कुल नौ डाक टिकटें व दो पोस्टल कवर प्रदर्शित किये गए हैं। चार डाक टिकटें विदेशी हैं व पांच भारत सरकार द्वारा जारी की गई हैं।

नेपाल द्वारा 1966 में कृष्णाष्टमी नाम से एक डाक टिकट व एक पोस्टल कवर जारी किया गया था। दक्षिण अमेरिका गुयाना द्वारा 1969 में राधा-कृ ष्ण की होली आधारित दो डाक टिकट निकाली गई थीं। 

मुस्लिम राष्ट्र यमन अरब रिपब्लिक ने भी भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी आस्था दिखाते हुए 1968 में उनकी डाक टिकट जारी की थी। वृंदावन शोध संस्थान में लगी प्रदर्शनी के संयोजक डा. राजेश शर्मा ने बताया कि इन डाक टिकटों को संस्थान द्वारा डिजिटली संरक्षित किया गया है।

किन्नरों को पैसा देते समय बोले सिर्फ ये दो शब्द, किस्मत चमक जाएगी

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हमारा देश ऐसा देश है जहा पर सभी धर्म के लोग निवास करते है इसीलिए हमारे यहाँ पर सभी तौहारो को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. हमारे भारत में ऐसा रिवाज है की जब हम कोई तौहार मनाते है तो कच लोग ख़ुशी से हमारे यहाँ पर पैसे मांगने के लिए आते है.

पर इनमे से कुछ लोग ऐसे भी होते है जिसका हर दिन तौहार होता है और वो हर वक्त सबके पास पैसे मांगने के लिए आते है, आप एकदम सही समज रहे है हम किन्नर की बात कर रहे है क्यूंकि इनके तौहारो का कोई दिन फिक्स नहीं होता.

जब भी हमारे घर में कोई शादी या फंक्शन हो रहा होता है तो वहा पर किन्नर लोग बधाई देने के लिए पहुच गये होते है, ऐसा माना जाता है की किन्नरों की दुवाओ में बहुत ही असर होता है और आप जब किन्नर को मुंह मांगी चीज देते है तो वह खुश हो कर अच्छी-अच्छी दुआ देते है.

ऐसे में वो आपकी सोई हुई किस्मत चमका सकते है, इसीलिए जब भी आपके घर पर किन्नर पैसा मांगने आये तो आप पैसे देते समय सिर्फ ऐसा बोलिए की “और आईगा” ऐसा किन्नरों को धन देते समय बोलने से हमारे यहाँ धन की वृद्धि होती है और कभी भी धन की कमी नहीं होती.

गाय का बाघ ने किया शिकार, राहगीरों ने बनाया वीडियो

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 मंगलवार की दोपहर पन्ना-मझगवां मुख्य मार्ग पर जरूआपुर के आगे दरेरा मडैययन के पास सड़क किनारे पन्ना टाइगर रिजर्व के एक बाघ ने सड़क से निकल रही एक गाय को दोपहर 12 बजे के लगभग अपना शिकार बनाया। जिसे वह घसीटते हुए जंगल की ओर ले जाने लगा। यह दृश्य वहां से निकल रहे दर्जनों राहगीरों ने अपनी आंखों से देखा।

बाघ को शिकार करते देख निकलने वाले राहगीर सहम गये और इस नजारे को टकटकी लगाकर देखते रहे। इसी बीच किसी राहगीर ने बाघ को शिकार करते व शिकार को घसीटकर जंगल की ओर ले जाते हुए बाघ का वीडियो बनाकर वायरल कर दिया जो चर्चा का विषय बना हुआ है। घटना की जानकारी लगते ही पन्ना टाइगर रिजर्व का रेसक्यू दल मौके पर पहुंचा और बाघ की तलाश शुरू कर दी गई।

अक्सर दिखने लगे हैं मुख्य मार्गों पर बाघ

पन्ना-मझगवां सड़क हो या पन्ना-अमानगंज सहित पन्ना-छतरपुर सड़क पर अक्सर बाघ मुख्य मार्गों पर चहलकदमी करते नजर आने लगे हैं। अभी हाल ही में अमानगंज रोड पर जिला मुख्यालय से मात्र दस किमी दूर अकोला के पास एक बाघ द्वारा सड़क किनारे शिकार कर उसे खाने के बाद लगभग चार घंटे वहीं पडा रहा। जिसे पन्ना टाइगर रिजर्व के रेसक्यू दल द्वारा हाथियों की मदद से खदेड़ा गया।

पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या आधा सैकड़ा से अधिक हो जाने के कारण बाघ अब यहां-वहां विचरण करते नजर आते हैं इसके अलावा यहां भ्रमण करने आये पर्यटकों को भी कोर जोन में अधिकांशत बाघ के दीदार हो जाते हैं।

इन रहस्यों को सुलझाने में वैज्ञानिक जोड़ लेते हैं हाथ, पढ़कर खुद कहेंगे सहीं कहा आपने

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लेपाक्षि (अनंतपुर) में भारत के आन्ध्र प्रदेश राज्य के अन्तर्गत के अनंतपुर जिले का एक गाँव है। यह हिन्दुपुर से 15 किमी पूर्व में तथा बंगलुरु से 120 किमी उत्तर में स्थित है। यह स्थान सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहाँ विजयनगर साम्राज्य के काल (1336-1646) में निर्मित शिव, विष्णु एवं वीरभद्र के कई मन्दिर हैं।
आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही पहेलियों के बारे में जो आज भी सभी के लिए अबूझ बनी हुई हैं। जिन्हें सुलाझने की वैज्ञानिकों ने बहुत कोशिश की लेकिन सुलझा नहीं सका है।
1.लटकते खम्भे का रहस्य – वीरभद्र मंदिर (आंध्र प्रदेश)
वीरभद्र मंदिर वास्तुशिल्प शैली का एक शानदार नमुना है। यहां पर विशाल नंदी मूर्ति, फ्रेस्को पेंटिंग्स और नक्काशी जैसे आकर्षक फीचर्स के अलावा, इसके लटकते खंभे जिज्ञासा उत्पन्न करते हैं। कुल मिलाकर, मंदिर में 70 खंभे हैं। हालांकि, दूसरों के विपरीत, उनमें से एक जमीन के संपर्क में नहीं आता है। ऐसा माना जाता है कि खंभे के आशीर्वाद के लिए नीचे कुछ स्लाइड करके आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।
2. महाबलीपुरम की बेलेंसिंग चट्टान (तमिलनाडु)
यहां खड़ा ये पत्थर भगवान कृष्ण का मक्खन का मटका था जो आसमान से गिरा है। अब यह महाबलीपुरम में एक विशाल चट्टान के रूप में ऐसी ढलान पर रखा है जिसे देखकर लोग चौंक जाते हैं। देखने पर लगता है कि यह पत्थर कभी भी लुढ़क सकता है। ये चट्टान लगभग 20 फीट ऊंची होने का अनुमान है। इसे देखने पर्यटक दूर-दूर से आते हैं। आगंतुक यह देखकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं कि इतनी विशाल चट्टान आखिर किस तरह ढलान पर स्थिर रह सकती है। आपको बता दे कि 1908 में अंग्रेज हुकूमत ने डर के मारे इस चट्टान को यहां से हटाने का प्रयास किया था कि लेकिन प्रयास व्यर्थ हो गया। यह चट्टान आज भी ऐसे ही रखी है।
3.निराश पक्षियों का रहस्य (असम)
पूर्वोत्तर में असम के जातींगा गांव में मानसून बीत जाने के बाद एक ऐसा आवरण बनता है की स्थिति धुंध पड़ने के समान हो जाती है। कहते हैं यहां के स्थानीय और प्रवासी पक्षियों में एक अजीब व्यवहार परिवर्तन देखने को मिलता है। घाटी के सारे परिंदे इस समय विचलित हो जाते हैं और रोशनी की ओर खींचे जाते हैं। लेकिन ये परिंदे इस घाटी से बाहर निकल ही नहीं पाते। थक-हारकर फिर ये जमीन पर उतर जाते हैं।

बहुत दूर दूर से लोग आते है देखने, इस गाय की कीमत है 22 करोड

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भारत में गाय को माँ का दर्जा दिया जाता है, लेकिन दुनिया के एक हिस्से में ऐसी गाय है,जो सबसे अनोखी है। कनाडा की इस गाय को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। इस गाय का नाम सुनकर आप हैरान रह जाएंगे।

गाय के मालिक ने इसका नाम लेविसडेल गोल्ड मिस्सी रखा है। गाय का नाम सुनकर आपको लग रहा होगा कि इसके नाम में ही सोना है, मगर इसकी कीमत भी सोने से कम नहीं है।

इस गाय की शुरुआती बोली 22 करोड रुपए रख दी गई और इतनी कीमत सुनकर ही आम लोग इसके बारे में सोच भी नहीं सकते है। यह ऐसी गाय है जो साल में 9700 किलो दूध देती है इसकी यह खास बात को सुनकर लगता है कि एक गाय के लिए इतनी कीमत होना तो ये कीमत काफी होगी। खबरों की माने तो इस गाय की कीमत दुनिया में सबसे ज्यादा है।

कौन है रैपर पर दिखाई जाने वाली लड़की, मंदी के दौर से गुजर रही पारले कंपनी, कैसे इसका नाम पड़ा ‘पारले’

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दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्कुट ‘PARLE-G’ एक बार फिर चर्चा में है। इस समय कंपनी सबसे ज्यादा मंदी के दौर से गुजर रही है। स्वदेशी कंपनी के 10 हजार लोगों की नौकरी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

क्या कहते हैं पारले-जी के कैटेगरी हेड 
कंपनी के कैटेगरी हेड मयंक शाह का कहना है उन्हें कंपनी में काम करने वाले 8 से 10 हजार लोगों की छंटनी कर पड़ सकती है। कंपनी ने केन्द्र सरकार से ‘100 रुपये प्रति किलो या उससे कम कीमत वाले बिस्कुट पर जीएसटी को कम करने के लिए कहा है। पारले प्रोडक्ट्स के बिस्कुट सामान्यतः 5 रुपये या उससे भी कम के पैक में बिकते हैं।

पारले प्रोडक्ट्स पारले-जी के अलावा अन्य बिस्किट्स जैसे मोनैको और मेरीगोल्ड बिस्कुट भी बनाती है। कंपनी की बिक्री 10,000 करोड़ रुपये से अधिक होती है। पूरे देश में कंपनी के 10 प्लांट हैं। कंपनी के व्यापार का आधे से ज्यादा हिस्सा ग्रामीण बाजार से आता है। जब दो साल पहले जीएसटी लागू किया तो सभी प्रकार के बिस्कुट को 18 प्रतिशत वाले टैक्स स्लैब में डाल दिया। इस से कंपनी को दाम बढ़ाना पड़ा और बिक्री पर इसका असर देखने को मिला।

पारले-जी का रोचक इतिहास

मुंबई के विले पार्ले (पूर्व) में रहने वाले चौहान परिवार ने1929 में एक छोटे से कारखाने से पारले एग्रो उत्पादन की शुरुआत की थी। शुरुआत में कंपनी टॉफी बनाती थी इनमे पार्ले टॉफी, मैंगो बाइट आदि शामिल थी। 1939 में कंपनी ने बिस्कुट का उत्पादन शुरू किया था। कंपनी का नाम मुंबई के उपनगर विले पार्ले से लिया गया है। विले पार्ले रेलवे स्टेशन का नाम भी पार्ले नामक गाँव पर आधारित है।

कौन है पारले-जी के रैपर पर छपी तस्वीर वाली लड़की ?

पारले-जी बिस्कुट के रैपर पर एक अत्यंत सुंदर और प्यारी सी बच्ची की तस्वीर छपी दिखाई देती है। ये बच्ची कौन है और अब कहाँ है? चर्चा शुरू होने पर कई महिलाओं के नाम सामने आये और तरह-तरह की अटकलबाजियाँ शुरू हुईं। तब कंपनी ने खुद इस बात का उल्लेख किया कि पारले-जी के पैकेट और रैपर पर दिखने वाली बच्ची की तस्वीर का वास्ता किसी भी महिला से नहीं है और यह एक काल्पनिक प्रतिकृति है।