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इस भारतीय लड़की से शादी रचाएंगे ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल

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पाकिस्तान के तेज गेंदबाज हसन अली के बाद एक और विदेशी क्रिकेटर भारतीय मूल की महिला से शादी रचाने की तैयारी में है। हसन अली ने दुबई में भारत की सामिया आरजू से निकाह रचाया। सामिया हरियाणा की रहने वाली हैं और वो पिछले तीन सालों से एयर अमीरात में काम कर रही हैं। खबरों कि माने तो ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर जल्द ही भारतीय महिला के साथ शादी के बंधन में बंध सकते हैं।

ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल भारतीय सेलिब्रिटी विनी रमन के साथ अक्सर नजर आते हैं। सूत्रों कि मानें तो दोनों ही एक दूसरे को लंबे समय से डेट कर रहे हैं। हालांकि दोनों शादी कब करेंगे इस बात का अभी खुलासा नहीं हुआ है।

विनी रमन सोशल मीडिया पर खूब सक्रिय रहती हैं। ग्लेन मैक्सवेल और विनी रमन काफी समय से रिलेशनशिप में हैं। ग्लेन मैक्सवेल और विनी रमन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर अक्सर देखी जाती हैं। खुद मैक्सवेल और विनी एक दूसरे की फोटो शेयर करते हैं।

हसन अली के बाद ग्लेन मैक्सवेल भी जल्द ही भारतीय लड़की के साथ शादी रचा सकते हैं। इससे पहले ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज शॉन टैट भारतीय मूल की महिला के साथ शादी के बंधन में बंध चुके हैं। ग्लेन मैक्सवेल और विनी रमन पर लोगों की निगाहें जमी हैं कि आखिर कब दोनों एक दूसरे का हमसफर बनने का फैसला करेंगे।

सायरा बानो दिलीप कुमार से पहले इस एक्टर से प्यार करती थीं , जानें उनकी जिंदगी से जुड़े दिलचस्प किस्से

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सायरा बानो इन दिनों अपना पूरा समय पति दिलीप कुमार की सेवा में बिताती हैं। अपने समय की सबसे खूबसूरत हीरोइन कही जाने वाली सायरा बानो अब लाइम लाइट से पूरी तरह से दूर हैं। 23 अगस्त को सायरा का जन्मदिन है। इस मौके पर हम आपको उनकी जिंदगी से जुड़े अनसुने किस्से बताते हैं।

सायरा ने महज 17 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत की थी । सायरा की पहली फिल्म 1961 में आई। फिल्म का नाम था ‘जंगली’ और उनके साथ थे शम्मी कपूर। यह फिल्म जबरदस्त हिट रही। इस फ़िल्म के लिए सायरा को बेस्ट एक्ट्रेस के फिल्म फेयर अवार्ड के लिए भी नामांकित किया गया था।

इसके बाद साल 1968 में आई फिल्म ‘पड़ोसन’ ने उन्हें दर्शकों के बीच बेहद पॉपुलर बना दिया। 60 और 70 के दशक में सायरा बानो एक सफल अभिनेत्री के रूप में बॉलीवुड में जगह बना चुकी थीं। फिल्मों से ज्यादा सायरा दिलीप कुमार के साथ रिलेशन को लेकर सुर्खियां बटोरती रहीं ।

सायरा जब छोटी थीं तो अपनी अम्मी की तरह एक्ट्रेस बनना चाहती थीं। 12 साल की उम्र से ही सायरा, दिलीप कुमार को बेहद पसंद करती थीं । जब ये चाहत दिलीप कुमार के सामने आई तब उनकी उम्र 44 साल थी और सायरा उस वक्त सिर्फ 22 साल की थी। दो बार प्यार में नाकामयाब रहे दिलीप सायरा में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे।

उम्र के फर्क के चलते भी दिलीप इस रिश्ते से कतरा रहे थे लेकिन वह ये बात जान चुके थे कि सायरा उनसे बेइंतेहा मोहब्बत करती हैं। 1966 में दिलीप कुमार और सायरा बानो ने अपनी मोहब्बत का एलान कर दिया और शादी कर ली । दिलीप कुमार पर वैसे तो देश-विदेश की कई लड़कियां जान छिड़कती थीं, लेकिन उन्हें सायरा बानो पसंद आईं।

दिलीप कुमार से पहले सायरा का दिल राजेन्द्र कुमार पर आया था। राजेन्द्र शादीशुदा और तीन बच्चों के पिता थे। सायरा की मां नसीम को जब यह भनक लगी, तो उन्हें अपनी बेटी की नादानी पर बेहद गुस्सा आया। नसीम ने अपने पड़ोसी दिलीप कुमार से कहा कि वो सायरा को समझाएं।

दिलीप कुमार ने बड़े ही बेमन से यह काम किया क्योंकि वे सायरा के बारे में ज्यादा जानते भी नहीं थे । बाद में सायरा दिलीप कुमार को ही अपनी दिल दे बैठीं। अल्जाइमर से पीड़ित दिलीप साहब का सायरा पूरा ख्याल रखती हैं। कहीं जाना होता है तो दोनों साथ ही जाते हैं और आज तक जिंदगी के हर मोड़ पर दोनों एक-दूसरे के साथ खड़े दिखते हैं ।

करिश्मा कपूर ने इस गाने में बदली थी 30 बार ड्रेस, फिल्म का नाम जानकर रह जाएंगे हैरान…

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बॉलीवुड एक्ट्रेस करिश्मा कपूर ने भले ही अब फिल्मों से दूरी बना ली हो लेकिन दर्शकों के दिल में आज भी उनकी यादे हैं। करिश्मा ने राजा हिन्दुस्तानी, जानवर, दिल तो पागल है, अनाड़ी, राज बाबू, हां मैंने भी प्यार किया है जैसी तमाम फिल्मों में अपने अभिनय से लोगों का दिल जीता। हाल में करिश्मा कपूर ने अपनी फिल्म कृष्णा के गाने ‘झांझरिया’ को लेकर एक बहुत बड़े राज से पर्दा उठाया।

साल 1996 में करिश्मा कपूर और सुनील शेट्टी की फिल्म कृष्णा का गाना ‘झांझरिया’ 23 साल बाद भी लोगों के पसंद बना हुआ है। इस गाने में दोनों एक्टर्स ने शानदार परफॉर्मेंस दी थी। एक टीवी शो की शूटिंग के दौरान करिश्मा ने बताया कि उन्होंने इस गाने की शूटिंग के दौरान 30 बार ड्रेस बदली थी।

करिश्मा कपूर ने बताया कि हर आउटफिट के साथ अलग लुक और अलग मेकअप भी करना पड़ा था। गाने के स्टेप्स भी काफी कठिन थे। ये गाना मेरे करियर में अबतक का सबसे यादगार गाना है।

करिश्मा ने कहा कि गाने के 2 वर्जन थे, मेल और फीमेल..मेल वर्जन रेगिस्तान में 50 डिग्री सेंटीग्रेट की गर्मी में शूट किया गया था और फीमेल वर्जन को तीन दिन तक मुंबई में शूट किया गया था।’

करिश्मा ने कहा कि रेगिस्तान में शूटिंग करते समय कलाकारों को रेत पर डांस करना पड़ता था। उस समय रेत हमारी आंखों में उड़ती रही, जिससे गाने को शूट करना और भी ज्यादा मुश्किल था।

दमदार नुस्खा – गंदगी से जाम हो चुकीं नसों को 10 मिनट में खोल देगा ये , खून भी होगा साफ..

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शरीर के बेहतर कामकाज और ब्लड सर्कुलेशन को सही रखने के लिए धमनियों का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। इसके बंद होने पर ब्लड सर्कुलेशन का कार्य बुरी तरह से प्रभावित होता है, जिससे शरीर को कई बीमारियां घेर लेती है। इस स्थिति में मरीजों की नसें निष्क्रिय हो जाती हैं। कई बार मरीजों को इस बात का पता तक नहीं चल पाता। शरीर में दर्द रहना, अंगों का फड़कना, हाथ-पैर का संवेदनहीन होना आदि इसके लक्षण हैं

लंबे समय तक एक ही दिशा में काम करने वाले कामकाजी युवाओं में यह समस्या अधिक देखी जा रही है। कुछ खराब आदतों की वजह से जैसे, देर तक बैठे रहना या स्‍मोकिंग, मसालेदार खाना और एक्सरसाइज नहीं करने की वजह से भी नसों के ब्‍लॉक होने का खतरा होता है।

नसों के ब्लॉक होने पर आपको प्रभावित हिस्से में गांठ, जलन हो सकती है। इसके अलावा आप छाती में दर्द, सांस की कमी, दिल की घबराहट, कमजोरी या चक्कर आना, जी मिचलाना और पसीना आना जैसे लक्षण भी महसूस कर सकते हैं। कई मामलों में किसी बड़ी घटना जैसे कि दिल का दौरा, लकवा या स्ट्रोक होने तक का खतरा हो सकता है।

एक्सपर्ट मानते हैं कि नसों के जाम होने के कई कारण हैं जिनमें मुख्यतः शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ना, अधिक मात्रा में स्मोकिंग करना, डायबिटीज के मरीज को ब्लड सुगर लेवल बढ़ना, जेनेटिक कारण, खराब जीवनशैली, स्ट्रेस और मोटापा शामिल हैं।

ब्लॉक नसों को खोलने का दमदार उपाय
इसके लिए आपको कुछ चीजें चाहिए जिसमें 1 ग्राम दाल चीनी, 10 ग्राम साबुत काली मिर्च, 10 ग्राम तेज पत्ता, 10 ग्राम मगज, 10 ग्राम मिश्री डला, 10 ग्राम अखरोट गिरी, 10 ग्राम अलसी शामिल हों।

इन चीजों को मिक्सी में पीस लें और 6-6 ग्राम की पुड़िया बना लें। रोजाना सुबह खाली पेट एक पुड़िया को गुनगुनें पानी से सेवन करें और उसके एक घंटे तक कुछ भी न खाएं। चूंकि यह सभी चीजें सेहत के लिए बेहतर हैं, तो इस उपाय का कोई दुष्प्रभाव नहीं है।

राज्यपाल : श्री रावतपुरा सरकार से सौजन्य मुलाकात की…

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राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने आज धनेली स्थित रावतपुरा आश्रम पहुंचकर संत श्री रावतपुरा सरकार से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ की खुशहाली एवं समृद्धि की कामना की।

मुख्यमंत्री : 24 अगस्त को करेंगे गोंदवारा रेलवे ओव्हरब्रिज गुढ़ियारी का लोकार्पण…

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल राजधानी रायपुर में सुगम आवागमन के लिए 24 अगस्त को गुढ़ियारी-गोंदवारा मार्ग पर नवनिर्मित रेलवे ओव्हरब्रिज का लोकार्पण करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोक निर्माण मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू करेंगे। इसका लोकार्पण कार्यक्रम 24 अगस्त को पूर्वान्ह 11 बजे गोंदवारा रेलवे ओव्हरब्रिज, गुढ़ियारी, रायपुर में आयोजित होगा। यह रेलवे ओव्हरब्रिज उरकुरा-सरोना बायपास में गुढ़ियारी-गोंदवारा मार्ग पर निर्मित है।

     कार्यक्रम में कृषि एवं जल संसाधन मंत्री श्री रविन्द्र चौबे, सांसद लोकसभा क्षेत्र रायपुर श्री सुनील सोनी, सांसद राज्यसभा श्रीमती छाया वर्मा, विधायक श्री सत्यनारायण शर्मा, विधायक श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री कुलदीप सिंह जुनेजा, विधायक श्री विकास उपाध्याय और महापौर नगर पालिक निगम रायपुर श्री प्रमोद दुबे विशिष्ट अतिथि होंगे। साथ ही रायपुर नगर निगम के पार्षदगण सर्वश्री कुमार मेनन, डॉ. अन्नूराम साहू, श्रीमती रेखा मोहित घृतलहरे, कृष्णा साहू, रामदास कुर्रे, संदीप साहू, श्रीमती वंदना इंगोले, श्रीमती तरूण प्रीति श्रीवास, श्रीमती हेमलता भागवत साहू की उपस्थिति में संपन्न होगा।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने दी जन्माष्टमी की शुभकामनाएं..

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को जन्माष्टमी के पावन पर्व पर बधाई और शुभकामनाएं दी है। उन्होंने अपने बधाई संदेश में कहा है कि भगवान श्रीकृष्ण का पूरा जीवन दर्शन हमारे लिए प्रेरणादायी है। उनके उपदेश हमें जीवन जीने का सही रास्ता दिखाते हैं। श्री बघेल ने कहा कि श्री कृष्ण ने हमें परिणाम की चिंता किये बगैर कर्म करने की शिक्षा दी है। भगवान श्रीकृष्ण हमें सदा सत्य के मार्ग पर चलने और अन्याय के विरूद्ध खड़े होने के लिए प्रेरित करते हैं।   

मुख्यमंत्री के जन्म दिवस पर विशेष : पुरखों के सपने होंगे साकार, लोगों की बढ़ी क्रय शक्ति और बढ़ा मान-सम्मान..

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में पुरखों के सपनों को साकार करने के लिए तेजी से फैसले लिए जा रहे हैं। जनता की नब्ज को पहचानते हुए मुख्यमंत्री ने हाल के 6-7 माह में प्रदेश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए कई निर्णय लिए हैं। औद्योगिक वातावरण को बदलने के लिए खनिज आधारित उद्योगों के स्थान पर कृषि आधारित नए उद्योगों की स्थापना के लिए पहल की जा रही है, इससे जहां स्थानीय स्तर पर नए रोजगार के अवसरों का सृजन होगा वहीं किसानों और वनाचलों में वनोपज का संग्रहण करने वाले परिवारों की आमदनी में वृद्धि होगी।  नई सरकार के गठन और उनके द्वारा लिए जा रहे नए फैसलों और कदमों से नई उम्मीदें जागी है। किसान हितैषी फैसलों से प्रदेश में विकास, विश्वास और उत्साह का नया वातावरण बना है। लोगों की क्रय शक्ति बढ़ने के साथ ही उनका मान-सम्मान भी बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री के किसान पुत्र होने और अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में मिले प्रशासनिक अनुभव का लाभ प्रदेश में विभिन्न विभागों के संचालन और नीति निर्धारण में मिल रहा है। छत्तीसगढ़ी भाषा में लोगों को सम्बोधित करना उनकी खासियत है। उनकी भाषा में छत्तीसगढ़ की मिठास और अपनी माटी की सौंधी महक मिलती है। विपक्ष में रहते हुए उन्होंने किसानों के मुद्दों पर हमेशा पैनी नजर रखी। अपने कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ के पुरखों को आदर और सम्मान देना नहीं भूलते। आधुनिक ज्ञान विज्ञान में उनकी गहरी रूचि है। वे नदी-नालों के पुनर्जीवन के लिए आधुनिक तकनीक पर विशेष बल देते हैं। श्री बघेल विद्यार्थियों को हमेशा वैज्ञानिक सोच और आधुनिक तकनीकों के उपोग के प्रति सजग रहने की समझाईश देते हैं । उनका मानना है कि हमारे देश ने आचार्य चरक, सुश्रुत, आर्यभट्ट और नागार्जुन जैसे महान वैज्ञानिक दिए लेकिन उन्नीसवीं सदी तक हम ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में पिछड़ गए। इसका मुख्य कारण हमने सवाल पूछना बंद कर दिया है। उनका मानना है कि आज की ज्वलंत समस्याओं के समाधान के लिए हमें शोध पर ध्यान देना होगा।

       मुख्यमंत्री श्री बघेल नें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ग्राम और ग्रामीणों के विकास की अवधारणा के अनुरूप ग्रामीण जनजीवन को खुशहाल बनाने के लिए छत्तीसगढ़ की चार चिन्हारी नरवा, गरवा घुरवा बाड़ी को आधार बनाकर सुराजी गांव योजना शुरू की है। छत्तीसगढ़ की सतरंगी संस्कृति पर आम जनता को स्वाभिमान और गर्व की अनुभूति जगाने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा हरेली, तीज , छठ, मां कर्मा जयंती और विश्व आदिवासी दिवस पर सामान्य अवकाश की घोषणा से लोगों में उत्साह का वातावरण है। ग्रामीण जनजीवन पर इसका खासा असर दिख रहा है। हाल में ही एक अगस्त को नए स्वरूप में हरेली तिहार मनाया गया। जिसमें छत्तीसगढ़ की संस्कृति की बानगी देखते बनती थी। लोगों में ऐसा स्वस्फूर्त उत्साह पहली बार दिखा। इस उत्साह मेें मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के सभी मंत्री शामिल हुए।
       गांवों के लोगों को रोजगार और उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ के गांवों में पौनी पसारी योजना से गांवों में परम्परागत रूप से लोहार, धोबी, और नाई आदि का काम करने वाले लोगों के लिए नगरीय क्षेत्रों में बाजार का निर्माण करने से इन परम्परागत रूप से काम करने वालों को सीधा फायदा होगा। जन चौपाल-भेंट मुलाकात के जरिए आम जनता से नजदीकी बनाए रखने की कोशिश की जा रही है इन मुलाकातों में लोगों से फीड बेक लेने के साथ ही उनकी समस्याओं और तकलीफें भी सुनी जा रही हैं।

       प्रदेश की अर्थ व्यवस्था को गति देने के लिए किसानों को धान का प्रति क्विंटल ढाई हजार रूपए और अल्प कालीन कृषि ऋण मुक्ति का ऐतिहासिक फैसला लिया है, इससे जहां उद्योग और व्यापार जगत में तेजी आयी है। आटोमोबाइल सेक्टर में जहां मंदी का माहौल है वहीं छत्तीसगढ़ में 26 प्रतिशत की उछाल देखा गया है। मध्यम और कमजोर वर्ग को राहत देने के लिए भूमि की गाइड लाइन दरों में 30 प्रतिशत की कमी की गई है। साथ ही 5 डिस्मिल से छोटे भू-खंडों की रजिस्ट्री पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया है। शासन से अुनमोदित रियल ईस्टेट के प्रोजेक्ट पर मकान की रजिस्ट्री दर 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। नामांतरण और डायवर्सन प्रकरणें को लोक सेवा गारंटी योजना में शामिल कर समय सीमा में निराकरण करने से शहरों में मकान और भूखंड खरीदना आसान हो गया है। अब किसी भी आवासीय प्रोजेक्ट के लिए जरुरी सभी तरह की एनओसी लेने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने का फैसला लिया गया है।

       मुख्यमंत्री का मानना है कि किसानों की उन्नति के लिए खनिज आधारित उद्योगों के स्थान पर हमें कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना करनी चाहिए जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकें, जिससे यहां उत्पादित कृषि उपज और वनोपज का बेहतर मूल्य यहां के निवासियों को मिल सके। उन्होंने नई उद्योग नीति में कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना को विशेष प्राथमिकता देने की भी घोषणा की है। वनांचल में रहने वाले लोगों की दिक्कत को समझते हुए उन्होंने वन अधिकार कानून के तहत प्राप्त आवेदनों की पुनः समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। इसी प्रकार वन क्षेत्रों में चिकित्सा और कुपोषण संबंधी दिक्कतों को दूर करने के लिए वनांचल के हाट बाजारों में चलित चिकित्सा इकाईयों के द्वारा इलाज की सुविधा प्रदान की जा रही है। वहीं आंगनबाड़ी केन्द्रों में गर्भवती और शिशुवती माताओं और बच्चों को सुपोषण अभियान के तहत पका हुआ गरमा-गरम भोजन देने की योजना भी प्रारंभ की गई है।

       मुख्यमंत्री श्री बघेल नें ग्रामीण जनजीवन को खुशहाल बनाने के लिए सुराजी गांव योजना में किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गांवों में नदी नालों के पुनर्जीवन के लिए छोटे-छोटे जल संचयन के संरचनाएं बनाने पर जोर दिया है। योजना के प्रथम चरण में लगभग दो हजार गांवों में माडल गौठानों का निर्माण किया जा रहा है। इन गौठानों में पशुओें के लिए डे-केयर की व्यवस्था होगी। यहां पशुओं के लिए चारागाह विकसित किए जा रहे हैं। यहां बायोगैस संयंत्र और दुग्ध उत्पादन तथा पशु नस्ल सुधार जैसे कार्य किए जाएंगे। किसानों के घरों में घुरवा को स्मार्ट घुरवा बनाने के लिए भी कार्य प्रारंभ किया गया है, इससे जैविक खाद का उत्पादन वहीं जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। जैविक खाद से जहां खेती में रसायनिक खाद की कमी आएगी। वहीं कृषि लागत से कमी आएगी। किसानों की बाड़ी में जैविक सब्जी को प्रोत्साहन देने से ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण स्तर बढ़ेगा।
    मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा  लगातार जनता की बेहतरी के लिए निर्णय लिए जा रहे हैं। स्कूल, कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती, बस्तर के लोहाण्डीगुड़ा में उद्योग के लिए अधिगृहित भूमि किसानों को वापस करने, तेंदूपत्ता संग्रहण की दर बढ़ाकर चार हजार करने, 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ करने, दिव्यांगजनों के विवाह हेतु दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर एक लाख रूपए करने, एनएमडीसी के नगरनार प्लांट में ग्रुप डी और सी की भर्ती परीक्षा दंतेवाड़ा में कराने के ऐतिहासिक फैसले लिए गए। मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक विकेन्द्रीयकरण की दृष्टि से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के नाम से नये जिले तथा 25 नई तहसीलों के गठन की घोषणा की है। इसी तरह अनुसूचित जातियों का आरक्षण 13 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 27 प्रतिशत करने की घोषणा की है। बस्तर और सरगुजा विकास प्राधिकरण के साथ मध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण के गठन की घोषणा के साथ ही इन प्राधिकरणों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष स्थानीय विधायकों को बनाया गया है। जाति प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया का सरलीकरण करते हुए पिता के जाति प्रमाण पत्र के आधार पर बच्चे के जन्म के साथ ही बच्चे को जाति प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने अपने फैसलों से ’गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ाये हैं। पुरखों के सपनों के अनुरूप एक ऐसे छत्तीसगढ़ के निर्माण का सपना साकार होगा, जहां समाज के सभी वर्ग सशक्त और खुशहाल होंगे और हमारी कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।   

7वां वेतन आयोग: लाखों कर्मचारियों को जल्द मिल सकती है ये 2 बड़ी खुशखबरी, जानिए क्या हैं ये

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बहुत जल्द त्योहार वाला सीजन शुरू होने वाला है ऐसे में सभी को यही आशा रहती है कि त्‍योहार शुरू होने से पहले कुछ तोहफा मिल जाए. बता दें कि त्योहार प्रारंभ होने से पूर्व लाखों सरकारी कर्मचारियों को 2 बड़ी सौगात मिल सकती है.

जी हां,दरअसल इसमें सबसे पहली सौगात महंगाई भत्‍ता यानी कि DA में 5 % बढ़ोतरी के रूप में मिल सकती है. वहीं दूसरी खबर न्‍यूनतम बेसिक पे को 18000 रुपए से बढ़ाकर 26000 रुपए हो सकती है. बता दें कि जानकारों का कहना है कि महंगाई भत्‍ते में 5 % की बढ़ोतरी तय है, जो अब तक का सबसे अधिक इजाफा होगा.

FM कर सकती हैं ऐलान

आपको बता दें कि DA की गणना करने वाले एजी ऑफिस, ब्रदरहुड के पूर्व महामंत्री एचएस तिवारी ने कहा कि महंगाई भत्‍ते में 5 % बढ़ोतरी होगी. हालांकि न्‍यूनतम बेसिक पे को लेकर सरकार क्‍या फैसला लेगी, यह कहना अभी जल्‍दबाजी होगा.

लेकिन मीडिया रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया है कि फाइनेंस मिनिस्‍टर निर्मला सीतारमण केंद्रीय कर्मचारियों की इस डिमांड पर विचार कर रही हैं और इस संबंध में कोई फैसला ले सकती हैं.

बता दें कि पूर्व वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने साल 2016 में संसद में कहा था कि उनकी सरकार केंद्रीय कर्मचारियों की डिमांड को लेकर सीरियस है. हालांकि अब तक इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है.

निचले कर्मचारियों की सैलरी में नहीं हुई ज्यादा बढ़ोतरी

आपको बता दें कि मीडिया रिपोर्ट में यह कहा गया है कि वित्‍त मंत्री इस संबंध में सीनियर अफसरों के साथ मीटिंग रख सकती हैं. दरअसल कर्मचारी यह डिमांड इसलिए कर रहे हैं क्‍योंकि 7वां वेतन आयोग लागू होने के बाद निचले स्‍तर के कर्मचारियों की सैलरी में ज्‍यादा बढ़ोतरी नहीं हुई थी. बता दें कि ऐसे कर्मचारियों की संख्‍या मिडल लेवल से कहां ज्‍यादा है.

3 साल में सबसे ज्‍यादा DA

आपको बता दें कि कर्मचारियों का DA बढ़कर 17 % हो जाने पर साल 2016 में 7वां वेतनमान लागू होने के बाद DA में यह अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी होगी. यानि इसका मतलब यह है कि केंद्रीय कर्मचारियों को 3 साल में सबसे ज्‍यादा फायदा होगा.

बता दें कि राज्‍य कर्मचारी संयुक्‍त परिषद, यूपी के संयोजक आरके वर्मा ने भी कहा कि इस बार DA में ज्‍यादा बढ़ोतरी होने की उम्‍मीद है. दरअसल ऐसा इसलिए क्‍योंकि कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स यानी कि CPIमें जनवरी से जून 2019 के आंकड़ों में महंगाई में बढ़ोतरी हुई है.

बकरी के दूध के ये 6 फायदे नहीं जानते होंगे आप, RMIT के रिसर्च में बच्चों के लिए लाभ गिनाए

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अब तक कहा जाता रहा है कि गाय का दूध में वही गुण होते हैं जो नवजात शिशुओं को मां के दूध में मिलते हैं। इसलिए इसे शिशुओं के लिए इसे अच्छा माना जाता रहा है। मगर रॉयल मेलबर्न इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (RMIT) के एक अध्ययन में बकरी के दूध को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य पेश किए गए हैं।

ब्रिटिश जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में छपे RIMT के शोध में कहा गया है कि बकरी का दूध प्रीबायोटिक और एंटी इनफेक्शन गुणों से लैस होता है। यह नवजात शिशुओं में होने वाले गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल इनफेक्शन से रक्षा करता है। रिसर्च में कहा गया है कि बकरी के दूध में oligosaccharides नाम का एक तरह का प्रीबायोटिक होता है, जो आंतों में गुड बैक्टीरिया को बढ़ने में मदद करता है। इसके साथ ही यह खतरनाक बैक्टीरिया से बचाने में अहम रोल अदा करता है। शोध के मुताबिक बकरी के दूध में प्राकृतिक रूप से 14 प्रीबायोटिक oligosaccharides होते हैं। इनमें से 5 मां के दूध में भी होते हैं। आइए जानते हैं बकरी के दूध के बच्चों के लिए फायदों के बारे में :

– बकरी के दूध में एग्लूटिनिन नाम का कंपाउंड नहीं होता है। यह दूध में मौजूद वसा को एकत्र नहीं होने देता है। गाय के दूध में यह तत्व मौजूद होता है।

– livestrong.com की एक रिपोर्ट के मुताबिक बकरी के दूध में छोटे फैट पार्टिकल होते हैं। साथ ही इसमें उपलब्ध प्रोटीन छोटे बच्चों में होने वाली दूध उलटने की समस्या को कम करने में मदद करता है।

– गाय के दूध के मुकाबले बकरी के दूध में सेलेनियम, नियासिन और विटामिन ए की मात्रा अधिक होती है।

– अध्ययनों में यह भी पता चला है कि गाय के दूध की अपेक्षा बकरी के दूध में एलर्जी बढ़ाने वाले तत्व नहीं होते हैं। साथ ही इसमें लैक्टोज की मात्रा भी गाय के दूध के मुकाबले काफी कम होती है।

– अध्ययनों यह भी दावा किया जाता है कि बकरी के दूध में दिमाग की क्षमता बढ़ाने वाले सन्युग्म लिनोलिक ऐसिड भी होता है।

– शोध में कहा गया है कि बकरी का दूध आयरन के बेहतर इस्तेमाल में मदद करता है। इससे आयरन और कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स के साथ परस्पर क्रिया की संभावना कम हो जाती है।

ये भी हैं फायदे
ब्‍लड प्रेशर होता है कम

बकरी के दूध पीने वाले व्यक्ति का ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है क्योंकि बकरी के दूध में पोटेशियम का स्तर काफी ज्यादा होता है जो ब्लड प्रेशर को कम या ज्यादा होने से रोकती है। इसके अलावा बकरी के दूध में सेलेनियम नामक एक मिनरल पाया जाता है।

इम्‍यून सिस्‍टम बढ़ता है
जो बॉडी के प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने में मददगार होता है। कई डॉक्टर बच्चों को इसके सेवन का सुझाव देते है। इसके दूध में भारी मात्रा में कैल्शियम होता है जिससे हड्डियां मजबूत होती है और बच्चा जल्द चलने लगता है। इसके अलावा बकरी के दूध में 35 प्रतिशत तक फैटी एसिड मौजूद होता है जो शरीर के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है।

हडि्डयां होती है मजबूत
कैल्शियम की कमी के कारण हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। बकरी का दूध पीने से कैल्शियम की कमी पूरी होती है, और इससे हड्डियां मजबूत होती हैं।