Home Blog Page 282

जिस इजराइल दौरे पर हैं पीएम मोदी, वहां से कितना होता है भारत का व्यापार…

0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय दौरे पर इजराइल में हैं. वह बुधवार को वहां पहुंचे जहां प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने उनका स्वागत किया. उसके बाद पीएम मोदी ने इजराइल की संसद में भी अपना संबोधन दिया.

इजराइल के साथ भारत के रिश्ते बेहतर स्थिति में हैं. दोनों देशों के बीच ट्रेड भी काफी अच्छा-खासा होता है. आइए हम आपको बताते हैं कि पीएम मोदी जिस देश के दौरे पर हैं. वहां से भारत के व्यापारिक रिश्ते कैसे हैं?

सितंबर 2025 में भारत और इजराइल के बीच व्यापार में भारत को फायदा हुआ. उस महीने भारत ने इजराइल को 178 मिलियन डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि वहां से 121 मिलियन डॉलर का आयात किया. यानी भारत का व्यापार संतुलन 56.8 मिलियन डॉलर के फायदे में रहा. अगर सितंबर 2024 से तुलना करें तो सितंबर 2025 में इजराइल को होने वाला भारत का निर्यात करीब 5.19% घट गया. यह 188 मिलियन डॉलर से घटकर 178 मिलियन डॉलर रह गया, यानी लगभग 9.74 मिलियन डॉलर की कमी आई.

वहीं आयात में और ज्यादा गिरावट देखने को मिली. इजराइल से भारत का आयात करीब 20% घटकर 152 मिलियन डॉलर से 121 मिलियन डॉलर पर आ गया. यानी आयात में करीब 31.1 मिलियन डॉलर की कमी दर्ज हुई.

इन चीजों का होता है ट्रेड

इजराइल और भारत के बीच 2024 में व्यापार में थोड़ी कमी जरूर आई, लेकिन प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से दोनों देशों के बीच कारोबार बढ़ने की उम्मीद है. फिलहाल भारत इजराइल को मुख्य रूप से सेमी-कीमती पत्थर (48.7 मिलियन डॉलर), उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स (10.4 मिलियन डॉलर) और इंजीनियरिंग से जुड़ा सामान (8.06 मिलियन डॉलर) निर्यात करता है. इसके अलावा मोती, कीमती पत्थर, मोटर वाहन डीजल, मशीनरी, वस्त्र, रेडीमेड कपड़े और कृषि उत्पाद भी बड़े पैमाने पर भेजे जाते हैं.

वहीं भारत इजराइल से मुख्य तौर पर निर्मित उर्वरक (16.7 मिलियन डॉलर) और इलेक्ट्रॉनिक घटक (9.65 मिलियन डॉलर) आयात करता है. माना जा रहा है कि अगर फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू होता है तो भारतीय उत्पादों की इजराइली बाजार में पहुंच आसान होगी, जिससे भारतीय उद्योग और किसानों को सीधा फायदा मिल सकता है.

Holi 2026: होली की सुबह करें ये छोटा सा उपाय, पूरे साल घर में बनी रहेगी सुख-समृद्धि!

0

हिंदू धर्म में होली का त्योहार न केवल रंगों और खुशियों का प्रतीक है, बल्कि यह नकारात्मकता को मिटाकर जीवन में सकारात्मकता लाने का भी एक विशेष अवसर होता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होली के दिन किए गए कुछ खास उपाय व्यक्ति की सोई हुई किस्मत को चमका सकते हैं.

इस साल होलिका दहन 3 मार्च को है और रंगों वाली होली 4 मार्च 2026 को खेली जाएगी. दिवाली की तरह ही होली की सुबह भी मां लक्ष्मी और सुख-समृद्धि को आकर्षित करने के लिए बेहद शुभ मानी जाती है. आइए जानते हैं उन अचूक उपायों के बारे में जिन्हें

होली की सुबह करने से आपके घर में पूरे साल धन-धान्य की कमी नहीं होगी.

सूर्योदय से पहले स्नान कर करें पूजा

होली की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें. स्नान के पानी में थोड़ा सा गंगाजल या हल्दी मिला लें. इसके बाद घर के मंदिर में दीपक जलाकर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और अपने इष्टदेव का पूजन करें. मान्यता है कि ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और पूरे साल घर में खुशहाली बनी रहती है.

पीपल या तुलसी में जल अर्पित करें

होली की सुबह स्नान के बाद पीपल या तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं. जल में थोड़ा सा दूध और अक्षत (चावल) मिला सकते हैं. तुलसी माता को भगवान विष्णु की प्रिय माना गया है, इसलिए यह उपाय आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक माना जाता है.

घर के मुख्य द्वार पर लगाएं गुलाल का तिलक

होली के दिन सुबह घर के मुख्य दरवाजे पर हल्दी या गुलाल से स्वस्तिक बनाएं. साथ ही घर के सदस्यों के माथे पर चंदन या गुलाल का तिलक लगाएं. ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और आपसी प्रेम बढ़ता है.

धन वृद्धि के लिए करें ये सरल उपाय

एक लाल कपड़े में थोड़ी सी हल्दी, 5 कौड़ियां और चांदी का सिक्का बांधकर घर की तिजोरी या धन रखने की जगह पर रख दें. ज्योतिष मान्यता के अनुसार, यह उपाय आर्थिक संकट दूर करने और धन वृद्धि के लिए लाभकारी माना जाता है.

होलिका दहन की राख का करें प्रयोग

3 मार्च को होने वाले होलिका दहन के बाद उसकी थोड़ी सी राख घर लाकर सुरक्षित रखें. होली की सुबह उस राख का तिलक लगाने से बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है. यह उपाय विशेष रूप से परिवार की सुरक्षा और उन्नति के लिए शुभ माना गया है.

जरूरतमंदों को रंग और मिठाई दान करें

होली के दिन सुबह किसी जरूरतमंद को रंग, मिठाई या वस्त्र दान करें. दान-पुण्य करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और सौभाग्य में वृद्धि होती है.

इजराइल के दुश्मन ईरान ने PM मोदी से की ये अपील, भारत को बताया अच्छा दोस्त…

0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजराइल के दौरे पर हैं. उनकी इस यात्रा के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने उनसे फिलिस्तीन का मुद्दा उठाने की अपील की है. अराघची ने एक इंटरव्यू में कहा कि मुझे उम्मीद है कि पीएम मोदी इजराइल में रहते हुए फिलिस्तीनियों और उनके अधिकार के सवाल पर भी बात करेंगे.

अराघची ने भारत को अच्छा दोस्त बताया और कहा कि तेहरान और नई दिल्ली के बीच रिश्ते हमेशा से अच्छे रहे हैं.

अब्बास अराघची ने गाजा में इजराइल की मिलिट्री कार्रवाई की आलोचना की और भारत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे के दौरान फिलिस्तीनी अधिकारों का मुद्दा उठाने की अपील की. ​​PM मोदी इजराइल के दो दिन के ऑफिशियल दौरे पर हैं. अराघची ने आरोप लगाया कि गाजा में इजराइल की कार्रवाई नरसंहार के बराबर है और कहा कि तेहरान ऐसे शासन के साथ जुड़ना सही नहीं समझता.

‘इजराइल ने गाजा को तबाह कर दिया’

अराघची ने उम्मीद जताई कि इजराइल में रहते हुए PM मोदी फिलिस्तीनियों और उनके अधिकार के सवाल पर भी बात करेंगे. इंटरव्यू में, अराघची ने कहा, दुर्भाग्य से इजराइल ने ही पूरे गाजा को तबाह कर दिया है. 75 हजार लोग मारे गए हैं और यह कोई दावा नहीं है यह एक सच्चाई है, जिसे लगभग सभी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने कन्फर्म किया है. तो जाहिर है, हमें नरसंहार करने वाली सरकार से निपटना सही नहीं लगता.

ईरान के विदेश मंत्री ने आगे कहा कि यह भारत में हमारे दोस्तों पर है कि वे खुद फैसला करें, लेकिन मुझे उम्मीद है कि जब प्रधानमंत्री मोदी वहां होंगे, तो वे फिलिस्तीनियों और उनके अधिकार के सवाल पर भी बात कर सकते हैं.

ईरान और भारत के बीच मजबूत रिश्ते

अराघची ने भारत के साथ ईरान के मजबूत और ऐतिहासिक रिश्तों को फिर से दोहराया और नई दिल्ली को अपना दोस्त बताया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में आपसी रिश्ते हैं और भरोसा जताया कि यह पार्टनरशिप बढ़ती रहेगी.

उन्होंने कहा, भारत के साथ हमारे हमेशा बहुत अच्छे रिश्ते रहे हैं. भारत ईरान का दोस्त है और हमारा रिश्ता ऐतिहासिक है. हम चाहते हैं कि यह ऐसे ही जारी रहे. विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ मेरे अच्छे कॉन्टैक्ट हैं और हम हमेशा अपने विचार शेयर करते हैं. हमारे पर्सनल रिश्ते बहुत अच्छे हैं.

उन्होंने कहा, मुझे भरोसा है कि ईरान और भारत अपने अच्छे, दोस्ताना रिश्ते जारी रख सकते हैं. मुझे उम्मीद है कि भारत हमारे इलाके में शांति और स्टेबिलिटी बनाने और इजरायलियों द्वारा फिलिस्तीनियों के खिलाफ और क्राइम और हत्याओं को रोकने के लिए अपनी पॉजिटिव और कंस्ट्रक्टिव भूमिका निभाएगा.

गाजा पर क्या बोले पीएम मोदी?

पीएम मोदी ने बुधवार को इजराइल की संसद नेसेट को संबोधित किया. उन्होंने गाजा शांति पहल को पूरे क्षेत्र के लिए न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का मार्ग बताया, साथ ही उन्होंने इजराइल के प्रति एकजुटता का सशक्त संदेश देते हुए कहा कि आतंकवाद चाहे कहीं हो, यह हर जगह की शांति के लिए खतरा है.

पीएम मोदी ने कहा कि इजराइल की तरह भारत भी आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की एक सुसंगत और अडिग नीति अपनाता है और इसमें कोई दोहरा मापदंड नहीं है. उन्होंने इस खतरे का मुकाबला करने के लिए निरंतर और समन्वित वैश्विक प्रयासों का आह्वान भी किया.

पीएम मोदी ने कहा, मैं सात अक्टूबर (2023) को हमास द्वारा किए गए बर्बर आतंकवादी हमले में जान गंवाने वाले हर व्यक्ति और उस परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं जिसकी दुनिया इस हमले में बिखर गई.

Chandra Grahan 2026: ग्रहण काल क्यों माना जाता है संवेदनशील? शास्त्रों में क्या है नियम…

0

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा यानी 3 मार्च को लगने जा रहा है. हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण की घटना को केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और ऊर्जा के नजरिए से बहुत महत्वपूर्ण माना गया है.

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या ग्रहण के दौरान यात्रा करनी चाहिए? क्या घर से बाहर निकलना सुरक्षित है? आइए जानते हैं शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के दौरान यात्रा से जुड़े नियम और सावधानियां.

हिंदू परंपरा में सूर्य और चंद्र ग्रहण को सामान्य खगोलीय घटना भर नहीं माना जाता, बल्कि इसे आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण समय समझा जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब राहु-केतु सूर्य या चंद्रमा को ग्रसित करते हैं, तब वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है. इसी कारण ग्रहण के समय विशेष सावधानी बरतने, जप-तप करने और अनावश्यक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है.

सूतक काल क्या होता है?

ग्रहण से कुछ समय पहले सूतक काल शुरू हो जाता है.

चंद्र ग्रहण के लिए सूतक काल लगभग 9 घंटे पहले माना जाता है.

इस दौरान मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं.

शुभ कार्य, यात्रा, विवाह, खरीदारी या नए काम की शुरुआत वर्जित मानी जाती है.

सूतक काल को शास्त्रों में संयम और साधना का समय बताया गया है.

क्या ग्रहण के दौरान यात्रा करनी चाहिए?

शास्त्रों और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है. इसके पीछे कई कारण बताए गए हैं.

नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव मान्यता है कि ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक कंपन बढ़ जाते हैं, जो मानसिक शांति को प्रभावित कर सकते हैं.

बाधाओं की आशंका: कहा जाता है कि इस समय शुरू की गई यात्रा में रुकावटें आ सकती हैं.

शुभ कार्य वर्जित: यात्रा को भी एक प्रकार का शुभ आरंभ माना जाता है, इसलिए इसे टालना बेहतर समझा जाता है.

विशेषकर लंबी दूरी की यात्रा, नया व्यवसायिक सफर या महत्वपूर्ण मीटिंग के लिए निकलने से बचना चाहिए.

अगर यात्रा जरूरी हो तो क्या करें?

कई बार परिस्थितियां ऐसी होती हैं कि यात्रा टालना संभव नहीं होता. ऐसे में शास्त्र कुछ उपाय भी बताते हैं जैसे, घर से निकलने से पहले भगवान का स्मरण करें.यात्रा से लौटने के बाद स्नान अवश्य करें फिर साफ वस्त्र धारण कर पूजा-पाठ करें. माना जाता है इससे इससे नकारात्मक प्रभाव कम होने की मान्यता है.

ग्रहण काल में क्या करें?

भगवान का नाम जपें और ध्यान करें.

जरूरतमंदों को दान करें.

ग्रहण समाप्त होने के बाद घर की साफ-सफाई करें.

स्नान कर पवित्रता बनाए रखें.

GDP Data: 10 साल पुराना नियम खत्म! कल से बदल जाएगा देश की कमाई का पूरा हिसाब…

0

भारत सरकार देश की आर्थिक तरक्की को मापने का पूरा तरीका बदलने जा रही है. आगामी 27 फरवरी को सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के नए आंकड़े जारी होंगे. इसमें सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब जीडीपी की गणना के लिए आधार वर्ष 2011-12 की जगह 2022-23 होगा.

यह बदलाव हमारी अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर पेश करने के लिए किया जा रहा है. इस नए तरीके से आम आदमी के जीवन और देश की विकास दर का अधिक सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा. पुराने फॉर्मूले में महामारी के बाद आए बदलावों और तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजार की सही झलक नहीं मिल रही थी. हाल ही में खुदरा महंगाई (CPI) का आधार वर्ष भी बदलकर 2024 किया गया है. अब इसी तर्ज पर जीडीपी के आंकड़े अपडेट हो रहे हैं.

क्यों बदलना पड़ा जीडीपी मापने का पैमाना?

सांख्यिकी मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग के मुताबिक, जीएसटी लागू होने और कोविड महामारी के कारण इस संशोधन में देरी हुई. इसके अलावा, नवंबर 2025 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत के राष्ट्रीय खाता आंकड़ों की कार्यप्रणाली में कमियां निकालते हुए इसे ‘C’ रेटिंग दी थी. इन सब कारणों ने सरकार को डेटा प्रणाली में सुधार करने के लिए प्रेरित किया है.

अब सरकार का लक्ष्य हर पांच साल में इस आधार वर्ष को अपडेट करना है. अर्थव्यवस्था में डिजिटल सेवाओं, रिन्यूएबल एनर्जी और नए तरह के निवेश का दायरा काफी बढ़ गया है. नई प्रणाली में घरेलू खपत सर्वेक्षण, श्रम बल सर्वेक्षण और जीएसटी जैसे आधुनिक प्रशासनिक डेटा का इस्तेमाल होगा. इससे अनौपचारिक क्षेत्र और गिग इकॉनमी से जुड़े कामगारों की मेहनत भी जीडीपी में साफ नजर आएगी.

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को कैसे मिलेगा नया रूप?

इस बदलाव का सबसे अहम हिस्साडबल डिफ्लेशनतकनीक को अपनाना है. इसके जरिए निर्माण क्षेत्र में कच्चे माल और तैयार उत्पाद की कीमतों के बीच के अंतर को ज्यादा बारीकी से मापा जाएगा. पुराने सिस्टम में इन दोनों के बीच के उतारचढ़ाव से आंकड़ों में जो विसंगति आती थी, वह अब दूर हो जाएगी. इससे विनिर्माण क्षेत्र की वास्तविक वृद्धि का सही पता चलेगा.

इसके साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले गिग वर्कर्स का योगदान भी अब अर्थव्यवस्था में प्रमुखता से दर्ज होगा. असंगठित क्षेत्र को मापने के लिए वाहन पंजीकरण, ईंधन खपत और जीएसटी के उच्चआवृत्ति वाले डेटा का सहारा लिया जा रहा है. इसके अलावा तिमाही आंकड़ों को वार्षिक आंकड़ों से मिलाने के लिएप्रोपोर्शनल डेंटननामक एक नया तरीका भी अपनाया जाएगा.

आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बदलाव के बाद भारत की विकास दर पहले से अधिक तेज दिख सकती है. ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव के अनुसार, नई प्रणाली में सेवा क्षेत्र का वजन बढ़ेगा. चूंकि कृषि के मुकाबले सेवा क्षेत्र तेजी से बढ़ता है, इसलिए बुनियादी अर्थव्यवस्था समान रहने पर भी औसत वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर ऊंची नजर सकती है.

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है कि नए जीडीपी डेटा से अर्थव्यवस्था के आकार और पिछली तिमाहियों की विकास दर का दोबारा आकलन होगा. यह आंकड़े रिजर्व बैंक के लिए बहुत महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि इन्हीं के आधार पर ब्याज दरों और महंगाई से जुड़ी भविष्य की मौद्रिक नीतियां तय की जाएंगी. इससे देश की आर्थिक नीतियों और ऋण दरों पर सीधा असर पड़ेगा.

IDFC के बाद Yes Bank को लगा चूना, रातों-रात लोगों के खातों से उड़ गए करोड़ों रुपये!

0

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ रुपये के घोटाले की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि यस बैंक के ग्राहकों को एक बड़ा झटका लगा है. आईडीएफसी मामले में जांच एजेंसियों ने पाया था कि हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के खातों से एक निजी कंपनी को करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए थे.

अब ठीक उसी तरह की एक गंभीर साइबर सेंधमारी यस बैंक के मल्टी-करेंसी प्रीपेड फॉरेक्स कार्ड सिस्टम में देखने को मिली है, जिसने बैंकिंग सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

कैसे रातों-रात विदेशी खाते में उड़े लाखों डॉलर?

बुकमायफॉरेक्स के साथ साझेदारी में जारी किए गए यस बैंक के फॉरेक्स कार्ड पर यह साइबर हमला 24 फरवरी, 2026 की अलसुबह हुआ. भारतीय समयानुसार तड़के 3:30 बजे से 8:30 बजे के बीच एक लैटिन अमेरिकी देश के 15 मर्चेंट खातों पर अवैध लेनदेन किए गए. बैंक की आंतरिक जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि इस सुनियोजित घटना में करीब 5,000 ग्राहकों के खातों से लगभग 0.28 मिलियन अमेरिकी डॉलर(2.54 करोड़ रुपये) धोखाधड़ी से निकाल लिए गए. ग्राहकों को भनक लगने से पहले ही पैसा जा चुका था.

सुरक्षा खामी का जालसाजों ने उठाया फायदा

इस पूरे गोरखधंधे को अंजाम देने के लिए हैकर्स ने बैंक आइडेंटिफिकेशन नंबर (BIN) की कमजोरी का सटीक फायदा उठाया. जिस देश (कथित तौर पर ब्राज़ील) से ये लेनदेन हुए, वहां ई-कॉमर्स खरीदारी के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) या ओटीपी अनिवार्य नहीं है. इसी भौगोलिक सुरक्षा खामी का लाभ उठाकर साइबर अपराधियों ने बिना किसी रोक-टोक के लगातार कई ट्रांजैक्शन अप्रूव करवा लिए, जिससे आम ग्राहकों की गाढ़ी कमाई अचानक खतरे में आ गई और सुरक्षा तंत्र को मात खानी पड़ी.

बैंक की सतर्कता से कम हुआ नुकसान

गनीमत यह रही कि यस बैंक के फ्रॉड मॉनिटरिंग सिस्टम ने मल्टी-करेंसी प्रीपेड फॉरेक्स कार्ड के लेनदेन में आई इस असामान्य गिरावट और गतिविधि को तुरंत भांप लिया. बैंक के नियंत्रण तंत्र ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 688 अनधिकृत संदिग्ध लेनदेन को सफलतापूर्वक ब्लॉक कर दिया. इससे ग्राहकों के करीब 0.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर सुरक्षित बच गए.

ग्राहकों के पैसों की वापसी के लिए क्या हैं उपाय?

यस बैंक ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित ग्राहकों को वित्तीय नुकसान से बचाने के लिए वे कार्ड नेटवर्क के साथ मिलकर ‘चार्ज-बैक’ की प्रक्रिया तेजी से पूरी कर रहे हैं. सुरक्षा के कड़े एहतियात के तौर पर उस लैटिन अमेरिकी देश से होने वाले सभी ई-कॉमर्स लेनदेन को बैंक ने तत्काल प्रभाव से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है. बैंक लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम कर रहा है.

दुश्मनों को देश की ताकत का एहसास कराएगा वायुशक्ति 26 अभ्यास, IAF ने पूरी की तैयारी, पहली बार एक्शन में दिखा S-400…

0

भारतीय वायुसेना (IAF) लगातार अपनी ताकत बढ़ा रहा है और पूरी दुनिया को अपनी क्षमता का एहसास भी करा रहा है. भारतीय वायुसेना की ताकत की गूंज अब राजस्थान के पोखरण से भी पड़ोसियों को सुनाई देगी.

वायुसेना कल शुक्रवार (27 फरवरी) को होने वाले वायुशक्ति 26 (Vayu Shakti 26) आयोजन के जरिए अपनी मारक क्षमता का जोरदार अंदाज में प्रदर्शन करेगी, जिसके जरिए दुश्मनों को साफ संदेश दिया जाएगा कि भारत पूरी तरह तैयार है.

वायुशक्ति 26 के आयोजन से पहले भारतीय वायुसेना की ओर से जारी किए गए 49 सेकंड के इस वीडियो में पहली बार S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को एक्शन में दिखाया गया है. लंबी दूरी की मिसाइल ने अपने लक्ष्य को सटीकता से भेदा. साथ ही रडार इंटरसेप्ट, मिसाइल लॉन्च और आसमान में धमाकों की तस्वीरें वायुसेना की ऑपरेशनल तैयारी का सबूत है.

राष्ट्रपति मुर्मू होंगी शामिल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पोखरण में वायुशक्ति अभ्यास के दौरान वहां मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी. राष्ट्रपति की मौजूदगी को देखते हुए बड़े स्तर पर तैयारी की जा रही है. इस भव्य आयोजन के दौरान, भारतीय वायुसेना दुश्मन को तेजी से दंडित करने की अपनी क्षमता और ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी आदि को रेखांकित करेगी.

पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में इसकी शानदार तैयारी चल रही है. फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान भी सभी टारगेट सफलतापूर्वक नष्ट किए गए. सभी ऑपरेशनल पैरामीटर्स को वैलिडेट कर लिया गया है.

IAF का सबसे बड़ा फायरपावर शो

साल 1985 से शुरू हुआ भारतीय वायुसेना का यह सबसे बड़ा फायरपावर शो है. पिछले साल पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद इस बार 100 से ज्यादा लड़ाकू और अन्य विमान इसमें हिस्सा ले रहे हैं. जबकि 2026 के वैरिएंट में एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम, मल्टी-डोमेन ऑपरेशन और मानवरहित हथियार प्रणालियों पर खास जोर दिया गया है.

पोखरण में कल 27 फरवरी को होने वाले इस ड्रिल को लेकर वायुसेना पूरी तरह तैयार है. इसके पीछे का मकसद साफ है कि भारत की हवाई सुरक्षा बेहद मजबूत है और वायुसेना हवाई सुरक्षा को लेकर सतर्क भी है और हर चुनौती का जवाब देने के लिए तैयार है.

मुफ्त में बंट रहे टमाटर. बोरियां भर-भरकर ले गए लोग, हैरान कर देगी वजह…

0

टमाटर की गिरती कीमतों ने किसानों को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है. जहां खुदरा बाजार में टमाटर 15 से 20 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, वहीं मंडियों में किसानों को 2 रुपये प्रति किलो का भाव भी नसीब नहीं हो रहा.

इस बेबसी और आर्थिक तंगी से परेशान होकर तेलंगाना के जंगांव और महबूबबाद जिलों के किसानों ने अपनी पूरी फसल मुफ्त में बांटकर अनोखा विरोध प्रदर्शन शुरू किया है.

आमतौर पर टमाटर के दाम 100 रुपये पार होने पर चर्चा होती है, लेकिन आज स्थिति इसके उलट है. महबूबबाद के साप्ताहिक बाजार में तीन किसान, सरय्या, मोहन और सुरेंद्रअपनी ट्रॉली भरकर टमाटर लाए थे. जब उन्हें पता चला कि 20 किलो टमाटर के बदले उन्हें 40 रुपये भी नहीं मिल रहे, तो उन्होंने हार मानकर फसल मुफ्त में बांटने का फैसला किया.

यही हाल जंगांव जिले के तारिगोप्पुला मंडल में दिखा, जहां किसान सदाय्या ने अपनी ट्रॉली खाली करने के लिए ग्राहकों को मुफ्त में टमाटर ले जाने को कह दिया.

क्यों बेबस है किसान?

किसानों की इस दयनीय स्थिति के पीछे कई प्रमुख कारण हैं. किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है. व्यापारी किसानों से 2 रुपये में खरीदकर उपभोक्ताओं को 20 रुपये तक बेच रहे हैं. सही भाव न मिलने के कारण फसल खेतों में सड़ रही है, जिससे परिवहन का खर्च भी नहीं निकल पा रहा.

किसानों की आंखों में आंसू

जैसे ही किसानों ने मुफ्त में टमाटर बांटने का ऐलान किया, बाजार में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. लोग बोरियों और टोकरियों में भरकर टमाटर ले गए. एक तरफ जहां उपभोक्ता मुफ्त फसल पाकर खुश थे, वहीं दूसरी तरफ अपनी मेहनत की बर्बादी देखकर किसानों की आंखों में आंसू थे.

किसानों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ही न्यूनतम लाभकारी मूल्य सुनिश्चित नहीं किया, तो वे पूरी तरह कर्ज के बोझ तले दब जाएंगे. ये आंदोलन केवल मुफ्त वितरण नहीं, बल्कि सिस्टम के खिलाफ एक हताश किसान की चीख है.

छत्तीसगढ़ का बजट राज्य के सर्वांगीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम…

0

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 का बजट राज्य के सर्वांगीण और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी पहल के रूप में देखा जा रहा है।

प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने विधानसभा में संकल्प-आधारित यह बजट प्रस्तुत करते हुए सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

नीति, न्याय, निवेश, निर्माण और नवाचार के पंचतत्त्वों पर आधारित यह बजट विकसित छत्तीसगढ़ के विजन डॉक्यूमेंट ‘छत्तीसगढ़ अंजोर-2047’ के लक्ष्यों को साकार करने की दिशा में ठोस एवं परिणाममुखी कदम माना जा रहा है। इस बजट में जशपुर जिले को भी विशेष प्राथमिकता प्रदान की गई है, जिससे जिले के सर्वांगीण विकास को नई गति मिलने की अपेक्षा है।

जिले में आधारभूत संरचना, कृषि, सिंचाई, खेल, शिक्षा एवं धार्मिक पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए प्रावधान किए गए हैं। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के संतुलित विकास को भी बल मिलेगा। सड़क एवं पुल निर्माण कार्यों को गति देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिससे दूरस्थ अंचलों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और आवागमन सुगम बनेगा।

कुनकुरी निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट श्री बिनीत जिंदल ने राज्य सरकार के बजट 2026-27 की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच के अनुरूप जिले में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए नए स्टेडियम निर्माण का प्रस्ताव युवाओं के लिए प्रेरणादायक कदम है।

इसके साथ ही पंपशाला एनिकट में किसानों के हित में लिफ्ट इरिगेशन योजना से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, जिससे कृषकों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी।

उन्होंने कहा कि जिले में विभिन्न सड़कों एवं पुलों के निर्माण से दूरी कम होगी, संपर्क बढ़ेगा और व्यापारिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। धार्मिक पर्यटन, शिक्षा तथा माटी शिल्प कला के संवर्धन हेतु विशेष प्रावधान जिले की सांस्कृतिक एवं आर्थिक उन्नति में सहायक सिद्ध होंगे।

इसी क्रम में युवा श्री राजकुमार ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट गरीब, किसान, युवा और महिलाओं के सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन से जशपुर जिला ही नहीं, बल्कि पूरा प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

ग्राम बोगी निवासी व्यवसायी श्री घनश्याम यादव ने भी बजट का स्वागत करते हुए कहा कि वे पिछले 10-15 वर्षों से स्थानीय स्तर पर व्यापार कर रहे हैं। इस बजट में आजीविका और निवेश को विशेष प्राथमिकता दिए जाने से छोटे व्यवसायियों को संबल मिलेगा। स्थानीय उद्योग-व्यवसाय को बढ़ावा मिलने से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026-27 का यह बजट विकास, विश्वास और अवसरों का संतुलित दस्तावेज है, जो ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक व्यापक परिवर्तन की आधारशिला रखता है। जशपुर जिले के लिए किए गए प्रावधान आने वाले समय में शिक्षा, खेल, कृषि, पर्यटन एवं लघु उद्योग के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव का मार्ग प्रशस्त करेंगे। प्रदेश सरकार द्वारा जनभावनाओं के अनुरूप तैयार यह बजट छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

CG: इस बार प्राकृतिक रंगों से रंगीन होगी होली, स्व सहायता समूह की महिलाएं कर रही है प्राकृतिक गुलाल का निर्माण…

0

रायपुर: रंगों के त्योहार होली को स्वसहायता समूह की महिलाएं इस बार और खास बना रही है। होली के त्योहार को प्राकृतिक रंगों से मनाने के लिए महिलाएं हर्बल गुलाल बना रही है।

गरियाबंद जिले के ग्राम सढ़ौली की राखी महिला ग्राम संगठन की 10 सक्रिय महिलाएँ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के तहत हर्बल गुलाल का निर्माण कर आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की मिसाल पेश कर रही हैं।

समूह की महिलाएं पलाश से पीला, चुंकदर से लाल और पालक के पत्तों से हरा रंग निकालकर मक्के की सूखी डंठल से प्राप्त अरारोट पाउडर में मिलाकर प्राकृतिक गुलाल का निर्माण कर रही है। इसमें हानिकारक रसायनिक तत्वों का बिल्कुल भी उपयोग नहीं किया जाता।

जिससे हर्बल गुलाल त्वचा एवं सेहत के लिए सुरक्षित रहता है। राखी महिला ग्राम संगठन की ये महिलाएँ न केवल होली के त्योहार को प्राकृतिक और सुरक्षित बना रही हैं, बल्कि अपनी आजीविका को भी मजबूत कर रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाएँ आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की नई कहानी लिख रही हैं। यह पहल प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रही है।

कलेक्टर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने इन महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज महिलाएं स्वरोजगार सृजित कर आत्मनिर्भर बन रही है और समाज में अपनी अलग पहचान बना रही है।

पीआरपी मीना साहू ने बताया कि पिछले वर्ष भी बिहान समुह के दीदियों द्वारा कुल 30 हजार रूपये से अधिक की बिक्री कर लगभग 10 हजार रूपये से अधिक की शुद्ध मुनाफा अर्जित की थी।

समूह की महिलाओं से चर्चा के फलस्वरूप पारंपरिक तरीकों से बनाए गए प्राकृतिक गुलाल से न केवल सेहत स्वस्थ रहेगा, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल रहेगा।

साथ ही महिलाओं के लिए आमदनी का नया स्रोत भी बन रहा है। पिछले वर्ष हर्बल गुलाल की मांग अधिक रही, जिसे देखते हुए इस बार महिलाओं ने रंग बनाना शुरू कर दिया है।

महिलाओं ने बताया कि गुलाल बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक है। इसे तैयार करने में फूलों और पत्तियों का उपयोग किया जाता है, जिससे यह त्वचा के लिए सुरक्षित होता है।

विभिन्न रंग बनाने के लिए प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग किया जाता है गुलाबी रंग के लिए चुकंदर और गुलाब की पंखुड़ियां, पीला रंग के लिए हल्दी और गेंदे के फूल, हरा रंग के लिए पालक व मेंहदी के पत्ते, नीला रंग के लिए अपराजिता के फूल और लाल रंग के लिए टेसू के फूलों का इस्तेमाल कर रही है।