अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में चल रही गिरावट का असर घरेलू बाजार में देखा जा रहा है। लगातार दो दिन गिरावट के बाद पेट्रोल के दाम मंगलवार को नहीं बढ़े लेकिन डीजल 7 पैसा सस्ता हुआ है। हालांकि यूपी में वैट बढ़ने की वजह से लोगों को अधिक कीमत चुकानी होगी। यूपी के नोएडा में आज से पेट्रोल 73.79 रुपये और डीजल 65.40 रुपये प्रति लीटर के रेट पर मिलेगा।
देश की राजधानी में लगातार दो दिन गिरावट के बाद पेट्रोल का भाव स्थिर रहा। डीजल की कीमत लगातार चौथे दिन कम हुई है। जहां पेट्रोल अपने पुराने स्तर 71.84 रुपये प्रति लीटर पर ही कायम रहा वहीं डीजल 7 पैसा गिरकर 65.11 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
देश के अन्य महानगरों में पेट्रोल-डीजल का भाव
देश के इन तीन महानगरों कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 74.54 रुपये, 77.50 रुपये और 74.63 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर कायम है। डीजल में लगातार चौथे दिन गिरावट आने की वजह से कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में क्रमश:- 67.49 रुपये, 68.26 रुपये और 68.80 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर उपलब्ध है।
यूपी में वैट बढ़ने से पेट्रोल-डीजल के भाव बढ़े
यूपी में बीती रात से आम जनता पर महंगाई की बड़ी मार पड़ी है। यूपी सरकार ने अपना राजस्व बढ़ाने के लिए पेट्रोल और डीजल पर वैट बढ़ा दिया है। इसी से यूपी में मंगलवार से पेट्रोल-डीजल की कीमत में 2.33 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 98 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि हो गई।
अब वैट के लिए बनाया गया नया फार्मूला
अभी तक पेट्रोल पर 14.70 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 7.68 रुपये प्रति लीटर की दर से वैट लगता था लेकिन अब कीमतें तय करने के लिए सरकार ने नया फार्मूला बनाया है। वाणिज्य कर विभाग के अनुसार पेट्रोल पर 26.80 फीसदी वैट या फिर 16.74 रुपये प्रति लीटर जो अधिक होगा वो लागू होगा। डीजल पर 17.48 फीसदी वैट या 9.41 रुपये प्रति लीटर जो भी अधिक होगा अब वो लागू होगा।
हैदराबाद में यदि श्रद्धालु गणेश चतुर्थी उत्सव के मौके पर पटाखे जलाते हैं या जबरदस्ती धार्मिक कार्यक्रमों के लिए फंड इकट्ठा करते हैं तो उनके लिए परेशानी खड़ी हो सकती है। राज्य में दो सितंबर से 12 सितंबर तक गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी। हैदराबाद पुलिस का कहना है कि इस समयावधि के दौरान असमाजिक तत्वों द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे जलाना और जबरन चंदा इकट्ठा करने की सख्त मनाही होगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि त्योहार शांतिपूर्ण और ठीक तरीके से गुजर जाए।
हैदराबाद के पुलिस अधीक्षक अंजनी कुमार ने कहा, ‘सार्वजनिक सड़कों और स्थानों पर आतिशबाजी पर दो सितंबर 2019 की सुबह 6 बजे से 12 सितंबर 2019 तक सख्त मनाही है।’ उन्होंने कहा कि कुछ लोग त्योहार के बहाने जबरन लोगों से धार्मिक कार्यक्रमों के नाम पर फंड इकट्ठा करते हैं जिसकी इजाजत नहीं दी जा सकती है।
कुमार ने कहा, ‘जबरन फंड इकट्ठा करने से धार्मिक दुश्मनी हो सकती है और विभिन्न समुदायों के बीच नफरत फैल सकती है। इससे शहर की शांति में दखल पड़ सकता है। हम धर्म के नाम पर होने वाले जबरन फंड कलेक्शन पर रोक लगाते हैं।’ हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आदेश त्योहार के दौरान स्वेच्छा से पैसे देने वालों पर लागू नहीं होता है।
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में जैन समुदाय की शिकायत के बाद कथित तौर पर कुछ कन्नड समर्थकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। इन लोगों पर जैन समुदाय के प्रार्थना कक्ष में हंगामा करने का आरोप है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बीते शुक्रवार को शाम को कुछ लोगों ने जबरदस्ती जैन समुदाय के प्रार्थना कक्ष में घुसकर पोस्टर फाड़े। ये पोस्टर जैन समुदाय के प्रार्थना कक्ष के एंट्रेस में लगे हुए थे और हिंदी में थे।
जैन समुदाय के लोगों ने यह भी दावा किया है कि इन लोगों ने उनके धार्मिक गुरु की तस्वीर को भी नुकसान पहुंचाया। जैन समुदाय के द्वारा ये मामला पुलिस की जानकारी में आया और बेंगलुरु के कर्मिशयल स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करी गई। डीसीपी बेंगलुरू ने कहा कि ये घटना कल रात हमारे संज्ञान में आई। शुक्रवार को लगभग पांच से छह लोगों ने जैन मंदिर के बाहर रखे फ्लेक्स को नुकसान पहुंचाया। इन फ्लेक्स में अगले चार महीनों के कार्यक्रमों के बारे में हिंदी में जानकारी दी गई थी। इस मामले में केस दर्ज किया गया है। जैन समुदाय ने घटना का वीडियो डाउनलोड करके पुलिस को सबूत के तौर पर सौंप दिया है। जैन समुदाय के एक व्यक्ति ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि उपद्रवियों ने तस्वीरों को नुकसान पहुंचाकर हमारे धर्मगुरु का अपमान किया है। उन्होंने हमारी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। इस मामले की जांच चल रही है।
बेंगलुरू के बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ट्वीट किया कि कुछ उपद्रवी तत्वों द्वारा एक मंदिर के बैनर( हिंदी) में होने पर बेंगलुरु में हमारे जैन भाइयों पर हमले से गहरा दुख हुआ। हालांकि, उपद्रवियों ने कभी भी बेंगलुरु में عربى अरबी के उपयोग पर सवाल नहीं उठाया। कर्नाटक में योगदान करने वाले शांतिपूर्ण जैनों पर हमला करना वास्तविक कन्नड़ प्रेमियों और कार्यकर्ताओं के लिए बदनाम करना है। उन्होंने आगे कहा कि पंपा, पोन्ना और रन्ना जैसे कई महान कवि, जिन्हें रत्नत्रय के रूप में जाना जाता है या कन्नड़ साहित्य के तीन रत्न जैन थे। कन्नड़ साहित्य की शुरुआत जैन युग है। इसलिए, मैं कर्नाटक के आज के युवा जैनों से आग्रह करता हूं कि वे इस इतिहास को जानें और अपने संचार में कन्नड़ का भी उपयोग करें।
आज हम जानेगे की अगर हम पंखे को नंबर 1 पर चलते है तो क्या इससे बिजली कम खर्च होती है और साथ ही हम यह भी बताएंगे की ज्यादा बिजली की बचत के लिए आपको पंखे में कौन सा रेगुलेटर लगाना चाहिए। अगर आप रेगुलेटर नहीं जानते तो हम आपको बताना चाहते है की जिससे आप पंखे की स्पीड कम करते है उसी को रेगुलेटर कहते है।
पुराने रेगुलेटर
अगर आपके घर में पुरानी तरह के फैन रेगुलेटर लगे हुए है तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की आप पंखे को किस नंबर पर चला रहे हो। क्योकि यह बस करंट को अपने पास रोककर पंखे तक कम पॉवर जाने देता है जिससे पंखा धीमी स्पीड में चलता है। लेकिन पॉवर उतना ही खर्च होता है। इनको इलेक्ट्रिक रेगुलेटर कहते है।
हां अब जो नए रेगुलेटर आ रहे है उनमे जरूर लाइट की बचत की जा सकती है चलिए जानते है लाइट की बचत के लिए सबसे बढ़िया रेगुलेटर कौन सा होता है। और इनसे कितनी बचत की जा सकती है।
नए इलेक्ट्रॉनिक रेगुलेटर
नए इलेक्ट्रॉनिक रेगुलेटर वोल्टेज को कम करने के लिए प्रतिरोध की जगह कपैसिटर का उपयोग करते है। यह ज्यादा गर्म भी नहीं होते है और धीमी स्पीड में पंखा चलाने पर बिजली की बचत भी करते है। इलेक्ट्रॉनिक रेगुलेटर, इलेक्ट्रिक रेगुलेटर की तुलना में 1 नंबर की स्पीड पर 40% और 2 नंबर की स्पीड पर लगभग 30% बिजली की बचत करते है।
इलेक्ट्रॉनिक रेगुलेटर की कीमत
वैसे तो हर पंखे के साथ एक रेगुलेटर मिलता है। लेकिन आप इस रेगुलेटर को वापिस करके इलेक्ट्रॉनिक रेगुलेटर ले सकते है। इनकी कीमत मार्किट में 100 रूपए से लेकर 200 रूपए रहती है और हां आपको एक अच्छी ब्रांड का रेगुलेटर लेना चाहिए। ताकि यह लाइट की ज्यादा बचत कर सके।
हाल ही में टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो ने अपने डीटीएच सर्विस जियो फाइबर को लॉन्च किया है. जिसे 5 सितम्बर को मार्केट में उपलब्ध कराया जाएगा. इससे पहले ही मार्केट में बिना छतरी वाले एक सेट टॉप बॉक्स ने धूम मचाई हुई है. जिसमें जिंदगी भर के लिए 134 चैनल्स मुफ्त मिलेंगे. चलिए आपको इसके अन्य फीचर्स और कीमत के बारे में विस्तार से बताते देते हैं.
जिंदगी भर 134 चैनल्स मुफ्त
इस सेट टॉप बॉक्स की खास बात कि, इसमें जिंदगी भर के लिए 134 चैनल्स मुफ्त दिखाए जाएंगे. हालांकि, यह सभी चैनल्स फ्री-टू-एयर होंगे. लेकिन इसके लिए ग्राहकों कोई मासिक किराया नहीं देना पड़ेगा और वे जिंदगी भर मुफ्त चैनल्स का आनंद उठा पाएंगे.
साइज भी है छोटा
इस सेट टॉप बॉक्स में यह सबसे खास बात है कि, इसे कॉमपैक्ट साइज में उपलब्ध कराया गया है. जिसे आप आसानी से अपनी पॉकेट में कैरी कर सकते हैं. और आप ऑन द गो भी डीटीएच का मजा उठा सकते हैं. इसके साथ ही यह सेट टॉप बॉक्स इंटरनेट कनेक्शन के साथ आता है. जिसमें इंटरनेट कनेक्ट कर 1000 से अधिक चैनल्स देख सकते हैं.
कीमत
इस सेट टॉप बॉक्स में सभी तरह के टीवी से कनेक्ट होने की फैसिलिटी दी गई है. जिसके लिए HDMI पोर्ट, RC केबल पोर्ट, एंटीना IN पोर्ट दिया गया है. जबकि इंटरनेट के लिए USB पोर्ट और LAN व वाई-फाई की फैसिलिटी दी गई है. इस सेट टॉप बॉक्स की मार्केट में कीमत 1,500 रुपये रखी गई है.
KBC 11: TV का सबसे पॉपुलर शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) सोमवार रात (19 अगस्त) से शुरू होने जा रहा है. सोमवार से शुक्रवार को रात 9 बजे सोनी टीवी पर दिखाया जाने वाला यह शो पिछले 19 सालों से लोगों के बीच पापुलर हो चुका है. साल 2000 में इस शो ने न केवल अमिताभ बच्चन की माली हालत को सुधारा बल्कि कई लोगों की किस्मत भी संवारी. आइए आज जानते हैं कि अब तक के इस शो के विजेताओं (Winners of KBC) ने अपने जीते हुए रुपयों का क्या किया और अब वो क्या कर रहे हैं..
सबसे पहले बात करते हैं केबीसी KBC 10 की विनर बिनीता जैन के बारे में. असम के गुवाहाटी की रहने वाली बिनीता ने शो पर 1 करोड़ रुपये जीते थे. 7 करोड़ के जैकपोट सवाल का जवाब सही पता होते हुए भी बिनीता ने रिस्क ना लेते हुए शो को छोड़ने का फैसला किया था. बिनीता अभी क्या कर रही हैं, उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है.
केबीसी KBC सीजन 9 में जमशेदपुर की अनामिका मजूमदार इस सीजन की पहली करोड़पति बनीं. KBC 9 में अनामिका ने 1 करोड़ रुपये जीती थीं. बता दें कि वह 7 करोड़ के जैकपॉट सवाल पर आकर अटक गई थीं, लेकिन शो के क्विट करने के बाद जो उन्होंने उत्तर दिया था वह सही निकला. इस जीती हुई बड़ी रकम से दो बच्चों की मां अनामिका फेथ इन इंडिया नामक एनजीओ चलाती हैं.
केबीसी KBC सीजन 8 में अचिन और सार्थक नरूला विनर रहे. दिल्ली के रहने वाले दोनों भाइयों ने केबीसी KBC में आने के लिए कड़ी मशक्कत की थी. इन्होंने शो में 7 करोड़ रुपये जीते थे, जिससे उन्होंने अपनी मां के कैंसर का ट्रीटमेंट करवाया था. आज दोनों इस जीती हुई रकम को इनवेस्ट कर बिजनेस चला रहे हैं.
केबीसी KBC के सीजन 7 में राजस्थान के रहने वाले पेशे से टीचर ताज मोहम्मद रंगरेज ने 5 करोड़ रुपये के सवाल पर अटकर खेल से क्विट कर दिया. हालांकि उन्होंने एक करोड़ रुपये की बड़ी रकम जीती थी. इस रकम से उन्होंने अपनी बेटी की आंखों का इलाज करवाया साथ ही गांव में दो अनाथ लड़कियों की शादी भी करवाई और एक घर भी खरीदा. फिलहाल वह क्या कर रहे हैं इसकी कोई जानकारी नहीं है.
सीजन 6 में बड़ी कंटेस्टेंट सुनमीत कौर ने जीत के पैसों से अपना सपना पूरा किया. उन्होंने केबीसी KBC में जो कहानी सुनाई उसके मुताबिक उनके ससुराल वाले उन्हें फैशन डिजाइनिंग आगे करियर के लिए मदद नहीं कर रहे थे. लेकिन अपने ज्ञान की बदौलत उन्होंने अपना करियर बनाया.
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी के रहने वाले सुशील अब तक के सभी सीजन के सबसे चर्चित विजेता रहे. KBC 5 में सुशील कुमार ने 5 करोड़ के सवाल का न केवल सही जवाब दिया बल्कि अमिताभ को भी दांतों तले उंगलियां दबानी पड़ी थी. सुशील मनरेगा में 6 हजार रुपये की नौकरी पर काम करते थे. ईनामी राशि से सुशील ने अपने पुश्तैनी घर की मरम्मत करवाई और भाईयों का बिजनेस शुरू करवाया. फिलहाल सुशील संगीत की ट्रेनिंग ले रहे हैं और साथ ही ऊर्दू भी सीख रहे हैं.
KBC 4 की राहत तस्लीम विनर रहीं. वह झारखंड से आईं राहत बेहद गरीब परिवार से थीं उन्होंने बताया कि जब वह अपने मेडिकल एंट्रेंस की तैयारी कर रही थीं तो उनकी शादी कर दी गई. लेकिन उन्होंने केबीसी KBC में जाने का मन बनाया और शो को जीतकर आईं. फिलहाल राहत गार्मेंट का काम करती हैं.
तीसरे सीजन को शाहरुख खान ने होस्ट किया था. इस शो में कोई भी कंटेस्टेंट विनिंग अमाउंट तक नहीं पहुंच पाया और शो को गिरती टीआरपी के चलते बीच में ही बंद करना पड़ा.
KBC सीजन 2 में अमिताभ बच्चन केबीसी KBC जूनियर को होस्ट कर रहे थे. यह सीजन साल 2001 में लॉन्च किया गया था. रवि मोहन सैनी ने हॉट सीट पर बैठ बाजी मारी थी. रवि की उम्र उस वक्त 14 साल के थी इसके बाद रवि ने कड़ी मेहनत कर आईपीएस ऑफिसर बन गए .
साल 2000 में शुरू हुए कौन बनेगा करोड़पति के पहले सीजन में हर्षवर्धन नवाठे ने बारी मारी थी. वह एक मिडिल क्लास फैमिली से थे. उस दौरान हर्षवर्धन सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे थे और 27 साल के थे. आज हर्षवर्धन शादीशुदा हैं और उनके दो बच्चे हैं. उन्होंने सिविल सर्विसेज की तैयारी छोड़ यूके यूनिवर्सिटी से एमबीए किया और प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे हैं.
छत्तीसगढ़ के रायपुर में सोमवार को बिजनेस मैन गुरुमुख सिंह होरा के भाई हरमिंदर सिंह उर्फ पप्पू सिंह होरा ने अपने लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर ली है.पुलिस जांच में पता चला कि उनका शव उनकी बीएमडब्ल्यू कार में मिला और गले के पास एक गोली का निशान भी है. घटना के बाद घटनास्थल पर बैलेस्टिक एक्सपर्ट्स ने पहुंचकर जांच शुरू कर दी है.
पप्पू सिंह होरा ने की खुदकुशी
लोगों के मुताबिक हरमिंदर सिंह काफी समय से कैंसर तथा लिवर की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे. पुलिस जांच के बाद आशंका जता रही है कि उन्होंने बीमारी के कारण खुदकुशी की है. बता दें कि सरदार हरमिंदर सिंह पूर्व विधायक गुरमुख सिंह होरा और बीजेपी नेता दिलीप सिंह होरा के छोटे भाई थे. पप्पू होरा ट्रांसपोर्ट संचालन के साथ छत्तीसगढ़ के एक निजी चैनल के सीएमडी भी थे.
जानकारी के मुताबिक हरमिंदर सिंह 4 दिन पहले ही कैंसर का इलाज करवाकर सिंगापुर से लौटे थे. घटना राजधानी के यूनियन क्लब पार्किंग की है, जहां कार में बैठे पप्पू होरा ने खुद की कनपटी में गोली मार ली, जिसके बाद वो लहूलुहान होकर मौके पर ही गिर पड़े थे और उनकी मौत हो गई थी.
घटना के बाद लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस और परिजनों को दी, जिसके बाद परिजन और शहर के कई कारोबारी मौके पर पहुंचे. वहीं घटनास्थल पर पहुंचे बैलेस्टिक एक्सपर्ट ने कार की जांच की, जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए अंबेडकर अस्पताल भिजवा दिया.
काफी समय से बीमार चल रहे थे पप्पू सिंह होरा
पुलिस अफसरों के मुताबिक पप्पू होरा ने डेढ़ साल पहले लिवर ट्रांसप्लांट भी करवाया था. बता दें कि पिछले एक साल से उन्होंने अपना कारोबार रिश्तेदारों को सौंप दिया और आराम कर रहे थे. फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है.
पूर्व मुख्यमंत्री और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे (JCCJ) के सुप्रीमो अजीत जोगी (Ajit Jogi) अपनी जाति (Cast) मामले में मंगलवार को एसटीसी कमेटी (STC Committee) के सामने पेश होने पहुंचे. इन्द्रावती भवन नवा रायपुर (Nava Raipur) में कमेटी ने उन्हें तलब किया था. कमेटी के सामने पेश होने से पहले पूर्व सीएम अजीत जोगी ने सीएम भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) पर निशाना साधा. अजीत जोगी की जाति की जांच के लिए एसटीसी कमेटी सरकार ने बनाई है. इसी कमेटी के सामने वे पेश होने पहुंचे. पूर्व सीएम अजीत जोगी (Former CM Ajit Jogi) ने कहा- मुख्यमंत्री जी ने तो तय ही कर रखा है कि क्या करना है. राजनीतिक द्वेषवश (Spitefully) यह सब किया जा रहा है. अजीत जोगी (Ajit Jogi) ने कहा कि हमारी जाति तो जनता ने कई बार तय कर दी है. कमेटी के सामने हम अपने तथ्य रखेंगे. तथ्य पहले भी रखे जा चुके हैं. बता दें कि इंद्रावती भवन में उन्हें कमेटी के सामने सुबह 11 बजे अपना पक्ष रखने बुलाया गया था. जाति की जांच को लेकर बनी इस कमेटी की पिछले दिनों बैठक हुई थी. हालांकि इसमें कुछ खास नहीं हो सका.
IAS अफसर की अध्यक्षता में बनी कमेटी बता दें कि यह कमेटी राज्य सरकार ने आईएएस (IAS) अधिकारी रीना बाबा साहब कंगाले की अध्यक्षता में कोर्ट के निर्देश पर बनाई है. इसके पहले भी सरकार ने कंगाले की ही अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई थी. यह कमेटी सरकार और कोर्ट में लंबित फर्जी जाति के अन्य मामलों की भी सुनवाई कर स्टे वेकेंट कराने अपनी सिफारिश करेगी. गौरतलब है कि विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम सीएम भूपेश बघेल ने कहा था कि फर्जी जाति मामले में एक महीने में कार्रवाई करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं. सीएम बघेल ने कहा था कि अब फर्जी प्रमाण पत्र वाले न तो नौकरी कर सकेंगे और न ही राजनीति कर सकेंगे.
दुर्ग जिले से एक बच्चे का अपहरण कर लिया गया है. कहा जा रहा है कि बदमाशों ने स्कूल वैन(School Van) से ही बच्चे का किडनैप कर लिया. जानकारी के मुताबिक मंगलवार(Tuesday) सुबह रोज की तरह बच्चा स्कूल(School) के लिए निकला. रास्ते में ही दो बाइक सवार लोगों ने स्कूल वैन को रुकवाया और बच्चे को अपने साथ ले गए. बताया जा रहा है कि बदमाश बच्चों को लेकर दुर्ग(Durg) के महाराजा चौक की तरफ ही भागे है. घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में हड़कंप(Stir) मच गया है. पुलिस के आला अधिकारी (Police officials) भी मौके पर पहुंच गए है और आस-पास के लोगों से पूछताछ(Inquiry) की जा रही है.
मिली जानकारी के मुताबिक धनोरा (Dhanora) में रहने वाले मौलिक साहू नामक के बच्चे का अपहरण कर लिया गया है. कहा जा रहा है कि 5 साल का मौलिक बोरसी कॉलोनी (Borsi Colony) के द रियल किड्स स्कूल में पढ़ता है. मंगलवार सुबह मौलिक धनोसा से अपने स्कूल के लिए वैन से निकला. लेकिन बीच रास्ते में बाइक सवार लोगों ने गाड़ी का रास्ता रोका और जबरदस्ती बच्चे को अपने साथ ले गए. ड्राइवर ने बच्चे के पिता चंद्रशेखर साहू को घटना की जानकारी दी. घबराए पिता (Father) ने फौरन पुलिस (Polcie) को इत्तला दी. पुलिस भी फौरन मौके पर पहुंची गई और आस-पास के लोगों से पूछताछ करने लगी. वहीं आधा अधिकारी सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) भी खंगाल रहे है ताकि किडनैपर्स(Kidnappers) की कुछ जानकारी मिल सके. फिलहाल पुलिस बच्चे की तलाश में जुट गई है. शहर के कई इलाकों में नाकाबंदी (Blockade)भी कर दी गई है.
डायबिटीजज़िंदगीभर चलने वाली बीमारी है.अगर यह एक बार हो जाए तो इसे केवल कंट्रोल कर सकते हैं, पूरी तरह सेसमाप्तनहीं कर सकते.
डायबिटीज को कंट्रोल करने में शुगर लेवल को मेनटेन करनाबहुत ज्यादाअहम होता है.शुगर लेवल को मेनटेन करने में यह बात बहुतअर्थरखती है कि आप खाते क्या हैंवकितना खाते हैं.
डायबिटीज मैनेजमेंट का मतलब यह नहीं है कि किसी फूड को पूरी तरह से बंद करना है.बस इस बात का ध्यान रखना होगा कि अगर आप ज्यादा शुगर या ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले फूड को खाना चाहते हैं तो साथ में फाइबर्स की मात्रा बढ़ा दें.ब्लड लेवल में शुगर की तेजी से बढ़ोतरी को फाइबर्स बैलेंस करने काकार्यकरते हैं.उदाहरण के लिए अगर आप आलू खाना चाहते हैं तो साथ ही ढेर सारा सलाद भी जरूर खाएं.सलाद में फाइबर होते हैं जो ब्लड में शुगर लेवल मेंआकस्मितबढ़ोतरी को रोकते हैं. अक्सर एक सवालवपूछा जाता है कि डायबिटीज के मरीज फल खा सकते हैं तो क्या फलों का जूस भी पी सकते हैं? इसका जवाब है- नहीं.फलों के जूस में केवलवकेवल शुगर होती है.शुगर को बैलेंस करने वाले फाइबर इसमें बिल्कुल नहीं होते.इसलिए फलों के जूस की थोड़ी-सी भी मात्रा डायबिटीज के मरीज के लिएखतरनाकहो सकती है.अत: फलों का जूस पूरी तरह अवॉइड करें.
जीआईवजीएल कौन-सा फूड डायबिटीज के मरीज के लिए अच्छावकौन-सा खराब, इसके निर्धारण में ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई)वग्लाइसेमिक लोड (जीएल)जरूरीकिरदारनिभाते हैं.ग्लाइसेमिक इंडेक्स बताता है कि अमुक फूड मेंउपस्थितकार्बोहाइड्रेट्स शरीर के ब्लड शुगर लेवल को कितनी तेजी से प्रभावित करता है.ग्लाइसेमिक इंडेक्स को 1 से 100 की रैंकिंग पर मापा जाता है.जिस फूड का ग्लाइसेमिक इंडेक्स जितना कम होगा, डायबिटीज के मरीज के लिए वह उतना ही अच्छा होगा.55 या उससे कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड को ही डायबिटीज के मरीज के लिए अच्छा माना जाता है.
डाइबिटीज के मरीज कोपहलू पर ध्यान देना चाहिएववह है ग्लाइसेमिक लोड.किसी फूड का ग्लाइसेमिक लोड यह बताता है कि अमुक फूड की कितनी मात्रा से ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ जाएगा.जिन फूड का ग्लाइसेमिक लोड 20 से कम होता है, उन्हें डायबिटीज के मरीज के लिए सुरक्षित माना जाता है.ग्लाइसेमिक लोड का संबंध अमूमन किसी फूड विशेष में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा से होता है.