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भारत में भी बसा है ‘पाकिस्तान’ जहां के सभी लोग हैं हिंदू

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पाकिस्तान का नाम सुनते ही जहां सिहर उठते हैं लोग गुस्से से लाल हो जाते हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में एक पाकिस्तान है। हालाँकि, इस पाकिस्तान में एक भी मुस्लिम नहीं बल्कि सभी हिंदू लोग रहते हैं। बिहार में पूर्णिया जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर, श्रीनगर ब्लॉक में सिंधिया पंचायत में एक गाँव है जिसे पाकिस्तान कहा जाता है।

इस गाँव की कुल आबादी 1200 है। गाँव में संथाल जनजातियों की आबादी है जो हिंदू धर्म का पालन करते हैं। यह क्षेत्र शहरी आबादी से दूर नहीं है। यहां के लोग हिंदी भाषा भी नहीं बोलते हैं। ये लोग अपने परिजनों के लिए काम करते हैं और अपने श्रम से जीते हैं।

इस क्षेत्र में सरकारी सुविधाओं का अभाव है।

यहां न तो कोई स्कूल है और न ही कोई अस्पताल। प्राथमिक उपचार केंद्र पाकिस्तान से लगभग 12 किमी दूर है जबकि स्कूल लगभग 2 किमी दूर है। इस गाँव का नाम पाकिस्तान में कैसे आया, इसका कोई निश्चित उत्तर नहीं है, लेकिन यहाँ कुछ लोगों ने कहा कि पहले इस गाँव में पाकिस्तानी लोग रहते थे।

आजादी के बाद उन्हें अन्य स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया और जो लोग यहां रहने के लिए आए थे उन्होंने इस गांव का नाम पाकिस्तान रखा।इस टोले का नाम पाकिस्तान कैसे पड़ा, इसका पुख्ता जवाब किसी के पास नहीं है,

लेकिन यहां के कुछ लोग बताते हैं कि इस टोले में पहले पाकिस्तानी लोग रहते थे। आजादी के बाद उन्हें दूसरी जगह भेजकर बसा दिया गया और जो लोग यहां रहने आए, उन्होंने इस टोले का नाम वही रहने दिया।

बढ़ सकती है दिक्कत, मोतियाबिंद ऑपरेशन के बारे में न पालें ये भ्रम

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आमतौर पर यह मिथ प्रचलित है कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने के लिए लोग जाड़े का इंतजार करते हैं। कभी-कभी दिक्कत ज्यादा होने पर भी लोग सिर्फ इसी भ्रांति में सर्जरी कराने से कतराते रहते हैं और तब तक दिक्कत और बढ़ जाती है। हिंदुस्तान के कई इलाके ऐसे हैं, जहां 12 महीने गर्मी पड़ती है। अब सोचिए, वहां तो जाड़ा पड़ता नहीं। यदि जाड़े का इंतजार करते रहे तो मोतियाबिंद का इलाज ही नहीं होगा।

जानिए इस बारे में क्या कह रहे हैं रानी लक्ष्मी बाई अस्पताल राजाजीपुरम के वरिष्ठ परामर्शदाता व नेत्र सर्जन डॉ. संजय कुमार विश्नोई। दरअसल पहले आंखों के ऑपरेशन के लिए सुविधाएं कम हुआ करती थीं। कैंप ही लगते थे और शिविरों में ही सर्जरी हुआ करती थी। जाहिर सी बात है कि कैंप सिर्फ जाड़ों में लगते थे, गर्मी या बरसात में शिविर लगाना असुविधाजनक होता था। बस लोगों ने मन में ये भ्रम पाल लिया कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन सर्दियों में कराना चाहिए। अब सुविधाएं बढ़ गई हैं, अब सर्जरी कहीं ज्यादा आसान हो गई है। जरूरत मरीजों की काउंसलिंग करने की है।

हमेशा अपनी आंखों की जांच खुद भी करते रहने चाहिए। एक आंख को बंद करें और देखें की खुली आंख से दिख रहा है या नहीं। इसी तरह दूसरी आंखों का भी परीक्षण करें। मोतियाबिंद आंखों का एक सामान्य रोग है। इस दौरान आंखों का लैंस समय के साथ अपनी पारदर्शिता खोने लगता है। जिस तरह से उम्र बढ़ने के साथ-साथ बाल सफेद होने लगते हैं ठीक उसी तरह आंखों के लैंस के साथ होती है। बढ़ती उम्र और सफेद होते बालों को रोका नहीं जा सकता, उसी तरह मोतियाबिंद होने से नहीं रोका जा सकता है।

हां, संतुलित आहार, व्यायाम से हम अपनी बढ़ती उम्र के नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकते हैं और ऐसा करने से मोतियाबिंद का असर भी कम होगा। कहते हैं कि जिस उम्र में बाल सफेद होते हैं, उसी उम्र में मोतियाबिंद हो जाता है। आंखों के लैंस प्रोटीन के बने होते हैं। डायबिटीज, उम्र के प्रभाव, स्मोकिंग, इंजरी और स्टेरॉयड लेने से लैंसों को नुकसान पहुंचता है। 

फैंसी दवाओं से बचें 
मोतियाबिंद का इलाज सर्जरी ही है। उम्र के साथ कमजोर होती नजर को ठीक करने के लिए तमाम तरह की फैंसी दवाएं बाजार में हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल घातक होगा। नेत्रों की ज्योति बढ़ाने की कोई भी दवा कारगर नहीं होती। महज यह झूठा प्रचार-प्रसार होता है। इसलिए समय के साथ-साथ चिकित्सक की सलाह लें और उसके कहे अनुसार ऑपरेशन कराएं। सर्जरी से घबराने की जरूरत नहीं क्योंकि अब तो मोतियाबिंद का ऑपरेशन एक ही दिन में हो जाता और अस्पताल से छुट्टी भी मिल जाती है।

जानें क्या है लक्षण, इन कारणों से बढ़ता है पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा

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हम सभी लोग ब्रेस्ट टिश्यू के साथ जन्म लेते हैं, जिसमें दूध की नलिकाएं मौजूद होती हैं। लेकिन बदलते समय के साथ-साथ यह अलग तरह से विकसित होते हैं। इस कारण पुरुष और महिलाओं दोनों को ही ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बना रहता है। लेकिन सबसे ज्यादा महिलाओं को यह खतरा ज्यादा रहता है। वैसे पुरुषों में स्तन कैंसर का मामला केवल एक प्रतिशत ही पाया गया है। स्तन कैंसर के दौरान आपकी छाती के आसपास लाल रंग का बढ़ना, धब्बे पड़ना जैसे लक्षण आपको दिख सकते हैं। इसलिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि पुरुषों में स्तन कैंसर किन कारणों से होता है।

जैसे-जैसे पुरुषों की उम्र बढ़ती जाती है, उनमें स्तन कैंसर के होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा जो पुरुष अधिकतर शराब का सेवन करते हैं, उनमें स्तन कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। शराब आपके लिवर को नुकसान पहुंचाता है, जो आपके हार्मोन लेवल को भी प्रभावित करता है। जैसे कि एस्ट्रोजन स्तर बढ़ सकता है, जिससे आपके स्तन कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।

अगर आपकी छाती का दूसरे तरह के कैंसर के विकिरण के साथ इलाज किया गया है तो आप में स्तन कैंसर के होने की संभवना अधिक होती है। अगर आप प्रोस्टेट कैंसर के लिए एस्ट्रोजेन लेते हैं या अंडकोष के टेस्टिकल जैसी किसी समस्या के लिए टेस्टिकल निकालने की सर्जरी हुई है तो भी आपकी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

अगर आपके भाई-बहन या परिवार के किसी सदस्य को कैंसर रहा है तो आपमें स्तन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। जो लड़के XY के बजाए XXY गुणसूत्र से पैदा होते हैं तो उनमें पुरुष स्तन कैंसर का खतरा 20 से 60 गुना बढ़ जाता है। इस स्थिति को क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम कहते हैं। कैंसर का पता लगाने के लिए मैमोग्राम या अल्ट्रासाउंड जैसे इमेजिंग टेस्ट भी किए जा सकते हैं। आपको बायोप्सी की भी जरूरत पड़ सकती है।

पुरुष स्तन कैंसर के लिए सर्जरी सबसे आम उपाय है। इसमें सामान्य तौर पर एक मास्टेक्टॉमी शामिल होती है, जो आपके स्तन के ऊतक और अरोला और किसी भी आसपास के लिम्फ नोड्स को निकाल देती है।, जहां कैंसर फैल गया हो।

त्वचा के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है ये एसेंशियल ऑयल

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बाजार में कई प्रकार के एसेंशियल ऑयल मिलते हैं जो चेहरे की सुन्दरता बढ़ाने के साथ ही हमारे स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होते हैं। Agarwood Essential Oil ऑयल पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण बालों के साथ-साथ त्वचा के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है।

इसका उपयोग एक्जिमा, एलर्जी, रोसैसिया, सनबर्न जैसी समस्याओं को दूर करने में किया जा सकता है। इस ऑयल की कुछ बूंदों को गर्म पानी में मिलकार स्नान करने से बॉडी रिलेक्स करने में सहायता मिलती है।

उपयोग: Agarwood Essential Oil ऑयल नींद को बढ़ावा देता है। वहीं जोड़ों के दर्द और त्वचा के लिए उपयोगी है। इसके उपयोग से एलर्जी जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

उपयोग के निर्देश: इस ऑयल का उपयोग किसी भी कॅरियर आयल के साथ मिलाकर किया जा सकता है। इसको त्वचा पर सीधे लगाने से बचे। बच्चों के पहुंच से दूर रखें। गर्भवती महिलाएं डॉक्टर की सलाह से इसका उपयोग करें।

यहां खरीदें: यदि आप Agarwood Essential Oil Identical (Aquilariaagollocha) खरीदना चाहते हैं तो आप Flora Fragrance वेबसाइट से इस ऑयल को खरीद सकते हैं। ऑयल को खरीदने के लिए आप http://www.florafragrance.com/natural-essential-oil/agarwood-essential-oil-identical-aquilariaagollocha.html पर जा सकते हैं।

कई बड़ी बीमारियों से छुटकारा दिलाने में मददगार हैं अमरूद और सेब

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किसी भी रोग या बीमारी से बचने के लिए स्वास्थ्य के बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी होता है। आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण लोग अपनी सेहत के ऊपर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। जिसके कारण वह बीमारियों से घिर जाते हैं। लेकिन अगर आप 2 फलों का सेवन नियमित रूप से करते है। तो आपका कई सारी बीमारियों से निजात पा सकते है। इतना ही नही आप इन फलों का सेवन करके कैंसर जैसी बड़ी बीमारियों से भी निजात पा सकते है। तो आइए आज हम आपको बताते हैं इन फलों से मिलने वाले बेहतरीन फायदों के बारे में।

आपको बता दें कि सेब और अमरूद को रोगियों का फल कहा जाता है। इन फलों के अंदर कई सारे ऐसे गुण पाए जाते है। जो रोगियों को ताकत देने का काम करते हैं।

अगर आप नियमित रूप से सेब का सेवन करते है। तो आप कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से भी छुटकारा पा सकते हैं। जनरल ऑफ फूड केमिस्ट्री की रिपोर्ट के मुताबिक, सेब के छिलकों के अंदर कैंसर जैसी बड़ी बीमारियों से निपटने के गुण पाए जाते है।

मोलेक्युलर न्युट्रिशन एंड फूड रिसर्च प्रकाशित एक सर्वे के मुताबिक, सेब की मदद से महिलाओं के स्तन कैंसर को काबू करने वाले परिणाम प्राप्त हुए है। जर्नल ऑफ कॉम्प्लेमेंट्री एंड इंटीग्रेटिव मेडिसिन में प्रकाशित एक रिपोर्ट में इस बात को बताया गया है कि अमरूद के साथ-साथ अमरूद की पत्तियां भी आपकी सेहत के लिए बेहद लाभकारी होती है।

कैंसर प्रिवेशन रिसर्च जनरल के मुताबिक, अमरूद कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने के लिए फायदेमंद होता है। इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमरूद ब्रेन ट्यूमर से भी आपको निजात दिलाता हैं।

जिन लोगों को मसूड़ों से खून आना या दांतों में पीलापन या दांतों में दर्द की शिकायत होती है।उनके लिए अमरूद का सेवन करना बेहद लाभदायक होता है। इतना ही नहीं वैज्ञानिकों ने भी अमरूद और सेब खाने की सलाह दी है।

Beauty Alert: स्किन को डैमेज कर देती हैं मेकअप की ये 5 गलतियां

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कुछ लड़कियां ऐसी होती है जिन्हें बिना मेकअप के बहार निकलना मंजूर नहीं होता। मगर आप मेकअप करते समय कुछ ऐसी गलतियां कर देती हैं, जिससे स्किन धीरे-धीरे डैमेज होने लगती है। जी हां, मेकअप द्वारा की गई कुछ गलतियां स्किन को खराब कर देती हैं। हैरानी की बात तो यह है कि यह गलतियां बेहद आम है।

चलिए आपको बताते हैं कि मेकअप करते समय आपकी कौन-सी गलतियां त्वचा को खराब कर सकती हैं।

फाउंडेशन या बी/बी क्रीम पर भरोसा

आजकल कई मेकअप प्रोडक्ट्स में सनस्क्रीन होती है। उनका दावा होता है कि उनके प्रोड्कट्स धूप की हानिकारक किरणों से बचाएंगे, जबकि यह गलत है।सनस्क्रीम का काम कोई और प्रोडक्ट नहीं कर सकता। जरूरी है कि आप मेकअप करने से पहले सनस्क्रीन क्रीम जरूर लगाएं।

मेकअप के लेबल नहीं पढ़ना

यह एक ऐसी आम गलती है जिसे हर लड़की करती है। कोई भी लड़की मेकअप प्रोडक्ट्स लेबल पढ़कर नहीं लेती है। अगर आपकी स्किन सेंसटिव है तो आपको कम से कम इंग्रीडिएंट्स वाले प्रोडक्ट्स खरीदने चाहिए। नॉन कॉमेडोजेनिक (Non-Comedogenic) प्रोडक्टस खरीदने चाहिए जो सेंसटिव स्किन को बचाकर रखें।

फाउंडेशन थोपना

हमें लगता है कि ज्यादा फाउंडेशन से दा-धब्बे छिप जाएंगे और रंग भी फेयर लगेगा, जोकि बिल्कुल गलत है। ज्यादा फाउंडेशन लगाने के दो नुकसान हैं। पहला इससे पोर्स ब्लॉक हो जाएं, नजीता दानें। दूसरी इससे स्किन ड्राई हो जाएगी और स्किन को सांस लेने का मौका नहीं। इससे स्किन धीरे-धीरे डल होने लगेगी।

खुशबू वाले मेकअप प्रोडक्ट्स खरीदना

कुछ मेकअप प्रोडक्ट्स में परफ्यूम होता है, ताकि उससे खुशबू आए लेकिन स्किन केयर के लिए इससे दूर रहना ही बेहतर है क्योंकि इससे स्किन एलर्जी की समस्या हो सकती है।

मेकअप वाइप्स का यूज

अक्सर लड़कियां मेकअप छुड़वाने के लिए सिर्फ वाइप्स का इस्तेमाल करती हैं। मगर मेकअप रिमूव करने के लिए सिर्फ मेकअप वाइप्स पर भरोसा करना गलत है। इससे स्किन सही तरीके साफ नहीं होती और डेड स्किन भी नहीं निकलती। उल्टा ऑयल और गंदगी पोर्स के अंदर जाकर त्वचा को नुकसान पहुंचाती है। इससे पिंपल्स और एक्ने होने लगते हैं। साथ ही इसमें कैमिक्ल का यूज भी किया जाता है, जो त्वचा पर रह जाते हैं। ऐसे में बेहतर यही होगा कि मेकअप रिमूव करने के बाद चेहरे को पानी से भी धोएं।

रात को अच्छी नींद लेने में भारतीय सबसे आगे : सर्वे

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दुनिया में रात को अच्छी नींद लेने के मामले में भारतीय सबसे आगे हैं। इसके बाद सऊदी अरब और चीन का स्थान है। भारत में बहुत से लोग सबसे अच्छी नींद लेते हैं। एक सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है।

फिलिप्स की ओर से ग्लोबल मार्केट रिसर्च फर्म केजेटी ग्रुप ने 12 देशों के 18 वर्ष और उससे ऊपर के 11,006 लोगों पर सर्वे किया। मोटे तौर पर सर्वे में पाया गया कि दुनिया भर के 62 प्रतिशत वयस्कों ने माना है कि रात को जब वे सोने जाते हैं तो उन्हें अच्छी नींद नहीं आती है।

अनिद्रा की आदत को लेकर सबसे सबसे बुरी हालत दक्षिण कोरिया की और उसके बाद जापान की है। 

विश्व के वयस्क हफ्ते में रात के दौरान औसतन 6.8 घंटे की नींद लेते हैं। वहीं वे छुट्टी के दिन रात को 7.8 घंटे की नींद लेते हैं। 

सर्वे में पता चला है कि प्रत्येक दिन आठ घंटे की नींद पूरी करने के लिए 10 में से छह वयस्क (63 प्रतिशत) सप्ताहांत में अधिक सोते हैं। 10 में से चार लोगों का कहना है कि पिछले पांच सालों में उनकी नींद में गड़बड़ी आई है। 

हलांकि, 26 प्रतिशत लोगों ने कहा है कि उनकी नींद अच्छी हुई है, जबकि 31 प्रतिशत ने कहा है कि उनकी नींद लेने की आदतों में कोई बदलाव नहीं आया है। 

फिलिप्स ग्लोबल स्लीप सर्वे 2019 के अनुसार, कनाडा (63 प्रतिशत) और सिंगापुर (61 प्रतिशत) में लोगों को सबसे ज्यादा नींद से जुड़ी समस्याएं हैं। 

नींद को प्रभावित करने में जीवनशैली का भी बहुत बड़ा हाथ है। दुनिया में नींद को प्रभावित करने के पांच मुख्य कारण है : चिंता/तनाव (54 प्रतिशत), पर्यावरण (40 प्रतिशत), कार्य व स्कूल का शेड्यूल (37 प्रतिशत), मनोरंजन (36 प्रतिशत) और स्वास्थ्य कारण (32 प्रतिशत)।

स्वस्थ रहने और हालचाल ठीक रखने में नींद एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। 

दातों के लिए बेहद फायदेमंद है ये 10 चीजें, सड़न और बदबू को जड़ से करता है खत्म

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दांतों के बिना चेहरे की खूबसूरती कुछ अधूरी सी लगती है. अगर आपके दांत अच्छे और मजबूत हैं. तो आप हर तरह के खाने का मजा ले सकते हैं. दांतों की सड़न और बदबू को दूर भगाने के लिए हम रोजाना ब्रश करते हैं. आमतौर पर हमें दिन में दो बार सुबह और रात में ब्रश करना चाहिए. लेकिन दांतों को मजबूत बनाने के लिए सिर्फ ब्रश करना ही काफी नहीं हैं. बल्कि आपको अपनी डाईट में कुछ खास तरह की खाद्य सामग्रियां भी शामिल कर लेनी चाहिए. यदि आप इन चीजों को रोजाना खाते हैं तो आपके दांत एवं मसूड़े जड़ से मजबूत बन जाएंगे. तो चलिए बिना किसी देरी के जान लेते हैं कि दांतों को मजबूत बनाने के लिए हमें क्या क्या खाना चाहिए.

चीज में केल्शिय की मात्रा ज्यादा होती हैं. इसका सेवन करने से हमारे दांत एवं मसूड़े मजबूत बनते हैं. चीज खाने से मुंह का एसिड लेवल भी कम होता हैं और सलीवा (लार) की मात्र बढ़ती हैं. ये सलीवा हमारे मुंह में मौजूद बैक्टीरिया का खात्मा करता हैं. इसलिए अपनी डाईट में इसे जरूर शामिल करे.

चीज की तरह ही दूध में भी कैल्शियम की मात्र ज्यादा होती हैं. दूध से हमें अन्य जरूरी न्यूट्रीशन भी मिलते हैं. दूध मुंह के एसिड लेवल को कम करता हैं और साथ ही दांतों को सड़ने से बचाता हैं.

ब्लैक और ग्रीन टी

काली या हरी चाय पीने से दांत सेहतमंद रहते हैं. हरी और काली चाय के अंदर Polyphenols ना का तत्वत मौजूद रहता हैं जो दांतों के बैक्टीरिया को ख़त्म करने का काम करता हैं. साथ ही में इसमें फ्लोराइड की अधिकता होती हैं जो दांतों को स्ट्रांग बनाता हैं. आपको ये चाय बिना शक्कर के पीने चाहिए.

ड्राई फ्रूट्स

ड्राई फ्रूट्स के अंदर कई सारे महत्वपूर्ण पोषक तत्व जैसे कैल्शियम और फॉस्फोरस पाए जाते हैं जो दांतों और मसूड़ों को मजबूत बनाते हैं. इसलिए यदि आप अपने दांत स्ट्रांग और सड़नरहित बनाना चाहते हैं तो काजू, बादाम और अखरोट को चबाए.

गम

खाने के बाद गम चबाना भी फायदेमंद होता हैं. ये आपके मुंह में लार की मात्रा बढ़ता हैं जो कि सड़न पैदा करने वाली बैक्टीरिया और खाने के कणों को साफ़ कर देता हैं.

गाजर

आप सभी ने खरगोश को गाज़र खाते देखा होगा, जिससे उसके दांत काफी मजबूत रहते हैं. दरअसल गज़र के अंदर कई तरह के विटामिन और मिनरल्स होते हैं जो हमारे दांतों को मजबूती प्रदान करते हैं.

ब्लैक कॉफ़ी

हाल ही में हुई एक रिसर्च का दावा हैं कि बिना शक्कर वाली ब्लैक कॉफ़ी पीने से दांतों में सड़न होने का ख़तरा कम हो जाता हैं.

प्याज

कच्चे प्याज के अंदर एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो कि दांतों और मसूडो में जमने वाली केविटी व कीटाणुओं को ख़त्म कर देते हैं.

किशमिश

किशमिश के अंदर phytochemicals जैसे oleanolic होते हैं जो कि बैक्टीरिया पैदा करने वाली कैविटी को नष्ट करते हैं. इसके अंदर एंटी-ऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं जो दांतों व मसूड़ों को हैल्दी रखते हैं.

दही

दही के अंदर मौजूद कैल्शियम और प्रो-बायोटिक्स आपके दांतों को कैविटी, कीटाणु, बिमारियों और बदबूदार साँसों से बचाते हैं

तिकूल मौसम की मार से हल्दी की पैदावार घटने की आशंका…

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महाराष्ट्र में जिस तरह हल्दी की बोई गयी फसल को नुकसान हुआ है अब जबकि तमिलनाडु के उत्पादक क्षेत्रों से भी नुकसान की खबरें मिलने लगी है। दूसरी ओर पुराने माल काफी कट चुके हैं, इसे देखते हुए वर्तमान के मंदे वाले भाव आगे चलकर ढूंढते रह जाओंगे।

हल्दी में वायदे का व्यापार पिछले कई सालों से अपनी भूमिका निभाते हुए कारोबारियों को भारी घाटे में धकेल चुका है, लेकिन इस बार बिजाई कम होने के साथ-साथ सांगली लाइन में हल्दी की बोई गयी फसल को कहीं जबर्दस्त बाढ़ एवं कहीं भीषण बरसात से भारी नुकसान हुआ है। अभी तक की चर्चा में वहां की 50 प्रतिशत फसल नष्ट हो चुकी है।

दूसरी ओर तमिलनाडु के इरोड, कड़प्पा, दुग्गीराला, वारंगल लाइन में भी कई दिनों की लगातार बरसात से फसल कमज़ोर पड़ने लगी है। हल्दी की नई फसल फरवरी माह में प्रारंभ होंगी । अभी बिजाई होकर कुछ दिन समय बीता है तथा वर्तमान की बाढ़ से बोई गयी जमीन डूब गयी है। पानी निकलने के बाद बापस बिजाई का समय बीत जाएगा, क्योंकि एक माह से पहले हल चलने लायक भूमि नहीं रहेगी। पुरानी हल्दी इस बार काफी कट चुकी है।

कई वर्षो के स्टॉक के माल भी औने-पौने भाव में स्टॉकिस्ट माल बेच चुके हैं। वायदे में भी डिलीवरी कम होने से चालू माह के भाव आज 114 रुपए उछलकर 6994 रुपए प्रति क्विंटल पर बंद हुए। यहां भी एजइटीज हल्दी जो 8100 रुपए बोल रहे थे, आज 8200 रुपए हो गयी तथा पुरानी हल्दी में भी 100 रुपए की तेजी दर्ज की गई।

उधर बढ़िया फली 9100/9200 रुपए बोलने लगे हैं। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हल्दी की कीमतों में 8/10 रुपए प्रति किलो की तेजी अगले एक से डेढ़ माह में देखने मिल सकती हैं।

डायबिटीज मरीजों के लिए अमृत है यह जामुनी आम, इससे पहले नहीं देखा होगा आपने

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हम सभी को पता है आम फलो का राजा है, और आम का सीजन आते ही हर किसी का मन आम खाने के लिए ललचाता है। लेकिन डायबिटीज वालों को डॉक्टर भी आम खाने से रोक देते हैं। लेकिन डायबिटीज वालों के लिए आम की एक ऐसी किस्म तैयार हो चुकी है। जिसको शुगर के मरीज भी जी भर के खा सकते हैं इससे शुगर लेवल बिल्कुल भी नहीं बढ़ेगा। आज हम आपको जामुनी आम के बारे में बताने जा रहे हैं। यह डायबिटीज के लिए अमृत बताया जा रहा है। तो आइए जानते हैं यह जामुनी आम के बारे में।

डायबिटीज मरीजों के लिए जामुनी आम को अमृत के समान माना जा रहा है। हालांकि खबरों के मुताबिक यह भी कहा जा रहा है। कि यह 10 वर्ष की कड़ी मेहनत के बाद आम और जामुन की पौध को मिलाकर जामुनी रंग का आम बनाया गया है। इसमें यह भी दावा किया गया है। कि उत्तर प्रदेश के बागों में यह आम पक कर तैयार हो रहा है।

इस जामुनी आम को इंटरनेट पर सर्च किया तो पता चला कि इसकी विदेशों में भी कई बाग हैं। भारत में पाई जाने वाली जामुनी आम की यह किस्में पामर आम की है। जो अमरीका के फ्लोरिडा में विकसित की गई थी। लेकिन अब यह ब्राजील में बहुतायत में उगाए जाते है।