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दुबई का ये धनकुबेर भारत में करना चाहता है 35 हजार करोड़ का निवेश, कभी घर-घर जाकर बेचता था दवा…

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कहते हैं कि अगर व्यक्ति के हौसले बुलंद हों तो जिंदगी में कुछ भी हासिल किया जा सकता है और फिर चाहें कितनी भी विपरीत परिस्थितियां आपके रास्ता रोक रही हों आप अपनी मंजिल पा ही लेते हैं और समाज में एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में अपनी अलग पहचान बना लेते हैं.

ऐसा ही कुछ कर्नाटक के बीआर शेट्टी ने कर दिखाया है. जी हां, बता दें कि भारत से दुबई सिर्फ नौकरी करने गए बीआर शेट्टी की गिनती आज दुबई के टॉप अमीरों में होती है. दरअसल UAE के एनआरआई यानी कि Non Resident Indian अरबपति बीआर शेट्टी भारत के हेल्थकेयर सेक्टर में अरबों डॉलर रुपए इन्वेस्ट करना चाहते हैं.

मालूम हो कि वो 5 बिलियन डॉलर यानी कि करीब 35,500 करोड़ रुपये इन्वेस्ट कर हाई-क्वालिटी की हेल्थकेयर फैसिलिटी डेवलप करना चाहते हैं. बता दें कि बीआर शेट्टी शुरुआती जनसंघ और फिर इससे निकली भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा रह चुके हैं.

भारत में करेंगे बड़ा निवेश

मालूम हो कि बीआर शेट्टी ने पिछले साल Finablr नामक नई कंपनी बनाई है. ऐसा नहीं है कि ये शेट्टी की पहली कंपनी है. वह कई अन्‍य बड़ी फार्मा और फाइनेंशियल सर्विस कंपनियों के भी फाउंडर हैं.

दरअसल बिजनेस टुडे से बातचीत में शेट्टी ने कहा कि उन्होंने भारत में 5 बिलियन डॉलर के फंड का प्रस्ताव रखा है और उन्हें राज्य सरकारों, नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशंस और धार्मिक संगठनों से अच्छे ऑफर्स मिल रहे हैं. बता दें कि वो इससे भारत में हाई-क्वालिटी और अफोर्डेबल हेल्थकेयर फैसिलिटी डेवलप करना चाहते हैं.

दरअसल अब उनका वेंचर कैपिटल फंड BRS Ventures भारत में हेल्थकेयर सेक्टर को डेवलप करने की दिशा में योजना बना रहा है. बता दें कि उनका यह कहना है कि इस इन्वेस्टमेंट से भारत में हेल्थकेयर फैसिलिटी का चेन बनेगा और अगले पांच साल में डिस्ट्रिक्ट और जनरल हॉस्पिटल बनाए जाएंगे.

मालूम हो कि उन्होंने इस संबंध में बताया कि इसके लिए दिल्ली, वाराणसी, हरिद्वार और बिहार में हॉस्पिटल बनाने के लिए बातचीत चल रही है. इसके लिए जमीन या तो खरीदी जाएगी या फिर सरकार या दूसरे पार्टनर्स की ओर से दी जाएगी.

यही नहीं, उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने 70 बेड वाले इस अस्पताल को 200 बेड वाले फुली एयर-कंडीशंड मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल में बदल दिया है. इसके अलावा यहां ट्रीटमेंट पूरी तरह फ्री है.

जानिए कौन है BR Shetty

जानकारी के लिए बता दें कि बीआर शेट्टी कर्नाटक के उडुपी में साल 1942 में पैदा हुए और वहीं उनकी शुरुआती पढ़ाई हुई. इसके बाद अपनी जेब में कुछ पैसे लेकर वो साल 1973 में अपनी किस्मत आजमाने दुबई पहुंचे. आपको बता दें कि शेट्टी दुबई नौकरी के जुगाड़ में गए थे लेकिन उन्‍हें वहां काफी दिनों तक बेरोजगार रहना पड़ा.

कभी घर-घर जाकर बेचते थे दवाएं

मालूम हो कि नौकरी न मिलने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. जी हां, दरअसल काफी मेहनत के बाद उन्‍हें सेल्‍समैन की नौकरी मिली. बता दें कि एक इंटरव्‍यू में शेट्टी ने इस बात को स्वयं स्‍वीकार किया था कि शुरुआती दिनों में उन्होंने सेल्समैन की नौकरी की थी. इस दौरान घर-घर जाकर दवा भी बेची. दरअसल शेट्टी ने बताया था कि दवा बेचने के दौरान उन्‍हें संयुक्त अरब अमीरात में कई बड़े डॉक्‍टर्स के साथ दोस्‍ती हो गई.

आपको बता दें कि शेट्टी पहले UAE में सबसे बड़ी प्राइवेट हेल्थकेयर कंपनी NMC Healthcare की स्थापना कर चुके हैं. जी हां, दरअसल पिछले 46 सालों में इस कंपनी ने 200 हेल्थकेयर फैसिलिटीज तक अपना फैलाव किया है, जिसमें 17 देशों में हॉस्पिटल, मेडिकल सेंटर्स, लॉन्ग टर्म केयर फैसिलिटीज, डे सर्जरी सेंटर्स, फर्टिलिटी क्लिनिक्स और होम हेल्थ सर्विस शामिल हैं.

1980 में बनाई UAE एक्सचेंज

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शेट्टी को महसूस हुआ कि भारतीयों को अपने परिवार वालों को पैसे भेजने में दिक्‍कत होती है. इसी कारणवश उन्होंने 1980 में यूएई एक्सचेंज की स्थापना की. आपको बता दें कि अब यह यूएई की एक बड़ी कंपनी बन गई है. इसके अलावा उन्होंने 2014 में विदेशी मुद्रा कंपनी “ट्रैवेक्स” को खरीद लिया जिसकी 27 देशों में ब्रांचेज हैं.

दरअसल यूएई में हिंदू धर्म के लिए कर रहे काम शेट्टी यूएई में हिंदू धर्म के लिए भी लगातार काम कर रहे हैं. बता दें कि शेट्टी उस समिति के अध्यक्ष भी हैं जो अबू धाबी में पहले हिन्दू मंदिर का निर्माण करने जा रही है. आपको याद हो तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2015 में अमीरात का दौरा किया था.

मालूम हो कि उस समय मंदिर के लिए अबू धाबी सरकार ने जमीन देने का ऐलान किया था. दरअसल मंदिर निर्माण कार्य की जि‍म्मेदारी शेट्टी के कन्धों पर ही है. यही नहीं, बीते साल हजारों प्रवासी भारतीयों ने अमीरात में मोदी का स्वागत किया था. मालूम हो कि स्वागत के इस कार्यक्रम को अंजाम देने वाले कोई और नहीं डॉक्टर शेट्टी ही थे.

सेना और सरकार के खिलाफ फर्जी खबर फैलाने के आरोप में शेहला रशीद के खिलाफ आपराधिक शिकायत दायर

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जेएनयू की छात्रनेता शेहला रशीद के खिलाफ दिल्ली में एक आपराधिक शिकायत दायर की गई है। जिसमें कथित तौर पर भारतीय सेना और भारत सरकार के खिलाफ फर्जी खबर फैलाने के आरोप में उनकी गिरफ्तारी की मांग की गई है। यह शिकायत सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने दर्ज करवाई है।

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वहीं शेहला रशीद के ट्वीट पर भारतीय सेना ने जवाब दिया है। शेहला रशीद ने रविवार को कश्मीर के हालात को लेकर 10 ट्वीट किए थे जिसमें उन्होंने दावा किया कि कश्मीर में हालात बेहद खराब है। भारतीय सेना ने ट्वीट कर उनके दावों को बेबुनियाद बताया है।भारतीय सेना ने ट्वीट किया, ‘शेहला रशीद द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद और खारिज हैं। ऐसी असत्यापित और फर्जी खबरें असामाजिक तत्वों और संगठनों द्वारा अनसुनी आबादी को भड़काने के लिए फैलाई जाती हैं।’

रविवार को शेहला रशीद ने कश्मीर के मौजूदा हालात को लेकर 10 ट्वीट किए। इन ट्वीट्स में दावा किया कि वहां हालात बेहद खराब है।

देश में ‘भयंकर मंदी’ लेकिन सरकार के लोग खामोश हैं : प्रियंका गांधी

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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने अर्थव्यवस्था में सुस्ती को लेकर शनिवार को सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि इस ”भयंकर मंदी” पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और सरकार में बैठे लोगों का मुंह नहीं खुल रहा है।

प्रियंका ने ट्वीट कर कहा, ”देश का आम नागरिक भाजपा सरकार के शीर्ष नेताओं से, वित्त मंत्री से इस भयंकर मंदी पर भी कुछ सुनना चाहता है। ” उन्होंने सवाल किया, ”फैक्ट्रियाँ बंद हो रही हैं, नौकरियाँ खत्म हो रही हैं, लेकिन सरकार के लोगों का मुँह नहीं खुल रहा। क्यों?”

प्रियंका ने एक खबर भी शेयर की जिसके मुताबिक वाहनों की बिक्री में पिछले 19 वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और ऑटो क्षेत्र में 10 लाख से अधिक लोगों की नौकरी जाने का खतरा है। कांग्रेस महासचिव ने उन्नाव बलात्कार मामले के आरोपी विधायक की तस्वीर वाला एक विज्ञापन अखबार में छपने को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। इस विज्ञापन में स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी गई है।

उन्होंने दावा किया, “सीबीआई ने रिपोर्ट दे दी। उच्चतम न्यायालय ने फटकार लगा दी, लेकिन भाजपा वालों के दिल में अब भी बलात्कार के आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर का वास है। भाजपा के बड़े नेताओं का फोटो भी उनके साथ है, क्या उनसे कोई टिप्पणी आएगी?”

वो पुल जिसके टूटने से हिल गया था इटली

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मोरांडी पुल की टूटने के तुरंत बाद की तस्वीर

कभी हज़ारों की संख्या में गाड़ियां रोज़ाना इटली में जेनोवा के पुल पर एक तरफ़ से दूसरी तरफ जाती थीं. लेकिन आज इस पुल को टूटे एक साल से ज़्यादा वक्त बीत चुका है.

हादसे के वक़्त कई गाड़ियां 45 मीटर ऊंचे इस पुल से सीछे नीचे गिर गईं. इस हादसे में 43 लोगों की मौत हुई थी.

पढ़िए हादसे से जुड़े सात लोगों की कहानियां, जिनकी ज़िंदगी पर इसका गहरा असर पड़ा-

हादसे के दिन यानी 13 अगस्त 2018 को इमैनुएल डियाज़ अपने भाई हेनरी के साथ मोरांडी पुल से गुज़र रहे थे. इमैनुएल साइकोलॉजी की पढ़ाई करने के लिए कोलंबिया जाने वाले थे और हेनरी उन्हें एयरपोर्ट तक छोड़ने जा रहे थे.

इमैनुएल बताते हैं, “हम एक दूसरे से दूर जाने वाले थे. मैंने हेनरी को गले लगाया और उससे कहा कि मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं. मुझे बेचैनी-सी हो रही थी क्योंकि उसे छोड़ कर जाना नहीं चाहता था. जो आख़िरी शब्द उसने मुझसे कहे वो थे ‘इमैनुएल अब मुझे जाना होगा.’ “

“अब मुझे लगता है कि शायद हमारा नसीब कुछ ऐसा ही लिखा था कि ज़िंदगी ने हमें एक दूसरे को अलविदा कहने का मौक़ा दिया. मैं उसे हमेशा गले लगाए रहना चाहता था.”

अगली सुबह इमैनुएल बोगॉटा में अपनी कनेक्टिंग फ्लाइट का इंतज़ार कर रहे थे. वहां उन्होंने ख़बरों में पढ़ा कि जेनोवा का ब्रिज गिर गया है.इमैनुएल डियाज़

“मुझे लगा कि कुछ ग़लत हुआ है. हम दोनों भाइयों के बीच ख़ास नाता था. मैं अपने भाई की तस्वीर देखता हूं तो सोचता हूं कि वो मुझसे बहुत दूर हो गया है.”

“जब मैं मैडलिन पहुंचा तो मैंने उससे, अपने दोस्तों और इटली में मौजूद हमारी मां से संपर्क करने की कोशिश की. लेकिन निराश हुआ. मैं घर से 14 हज़ार किलोमीटर दूर था. मैंने ऑनलाइन ख़बरें खोजनी शुरू कीं. हमारे पास एक पीली रंग की कार थी जो दूर से पहचानी जा सकती थी.”

“मैंने फ़ेसबुक के एक पन्ने पर लाइवस्ट्रीम वीडियो देखा कि मलबे से पीले रंग की एक कार को बाहर निकाला जा रहा था. मैं समझ गया कि मेरा भाई अब दुनिया में नहीं है. कार का हाल देख कर साफ़ कहा जा सकता था कि किसी के बचने की कोई गुंजाइश नहीं थी. मुझे लगा कि मेरे घुटनों में अब ताक़त नहीं बची है. मैं ज़मीन पर गिर गया.”

डेप्युटी अभियोजक पाओलो डीओवितियो गर्मी की छुट्टियां बिता कर लौटे थे. अपना फ़ोन वो घर पर ही भूल गए थे और यही बताने के लिए उन्होंने अपनी पत्नी को फ़ोन किया.

उनकी पत्नी ने उन्हें टीवी पर समाचार देखने के लिए कहा और बताया कि मोरांडी पुल टूट गया है.

वो कहते हैं, “मैं तुरंत घर गया, अपना फ़ोन लिया और पुलिस के पास पहुंचा. घटना के एक घंटे के भीतर हम लोग घटनास्थल पर पहुंचे. वहां अग्नमिशमन कर्मचारी, पुलिस, डॉक्टर और पत्रकार पहले ही मौजूद थे.”

“लगातार बारिश हो रही थी. मैं हताश था. वो नज़ारा आज भी आंखों के आगे घूम जाता है. लोग चिल्ला रहे थे. रो रहे थे, खोजी कुत्तों को मलबे में ज़िंदा लोगों और शवों की तलाश के काम में लगाया गया था. साथ ही नीचे पुल और सड़क के बड़े-बड़े टुकड़े पड़े थे. पुल से एक गाड़ी लटक रही थी जिसमें एक ड्राइवर फंसा हुआ था.”

“हमारे सामने स्पष्ट था कि पहला काम जीवित बचे लोगों को बचाना है और फिर हमें वहीं से इस मामले की जांच शुरू करनी थी.”

पुल टूटने के पहले प्रत्यक्षदर्शी थे डेविड कापेलो. हादसे के वक़्त वो पुल के ऊपर अपनी फॉक्सवैगन टिगुआन में थे. वो पुल पर चढ़े ही थे जब उन्हें किसी धातु के गिरने की तेज़ आवाज़ आई.

“ये किसी तरह की धमाके की आवाज़ थी. ऐसा लगा कि धातु की कोई बड़ी चीज़ गिर गई है. फिर पुल बीच से एक जगह चिटक गया. कुछ घड़ी तक मुझे समझ ही नहीं आया कि क्या हुआ और कहां से आवाज़ आई. मैंने देखा कि मेरे सामने पुल टूट रहा है. मरे सामने खड़ी कारें सड़क से नीचे गिर रही थीं.”डेविड कापेलो

“मैंने तुरंत ब्रेक लगाया और कार रोकने की कोशिश की लेकिन जल्द मुझे पता चला कि सामने सड़क थी ही नहीं. मेरी कार अब हवा में थी और मैं नीचे जा रहा था. मैंने कार के स्टियरिंग व्हील से हाथ हटा लिए थे और मैं चिल्ला रहा था कि मैं मर रहा हूं. ये सब कुछ बस कुछ सेकंड में ही हो गया. मुझे तो डरने तक का समय नहीं मिला. मुझे लगा कि इंसान कितना बेबस है. सब कुछ ख़त्म हो रहा था.”

“लेकिन मेरा नसीब अच्छा था कि मैं मलबे के ऊपर गिरा. मेरी कार का पिछला हिस्सा पहले ज़मीन से टकराया. ऐसा लग रहा था कि कोई मिसाइल आकर पुल से टकराई है. मैं मरा नहीं था. यही समझने में मुझे वक़्त लगा. मैं बीस मिनट तक कार से बाहर नहीं निकल पाया. मेरे चारों तरफ़ टूटी-फूटी कारें थीं और कारों के भीतर लोग दिख रहे थे. नज़ारा ऐसा था जैसे वहां युद्ध हुआ था.”

मिम्मा सर्टो हादसे के वक़्त पुल के ठीक नीचे बने अपने फ्लैट में थीं. उन्होंने भी एक तेज़ धमाके जैसी आवाज़ सुनी.सर्टो की बहन के घर के सामने वाली सड़क से पुल कुछ ऐसा दिखता था

“मैं नहा रही थी. मुझे लगा कि ये बादल के गरजने की आवाज़ है, लेकिन ये आवाज़ थम नहीं रही थी. ऐसा लग रहा था कि लोहे की चट्टानें एक दूसरे से टकरा रही हैं. मुझे ऐसा नहीं लगा कि गाड़ियां नीचे गिर रही हैं. लेकिन फिर गली से चिल्लाने की आवाज़ें आने लगीं.”

“मैंने खिड़की खोली और देखा कि नदी में कारें एक दूसरे के ऊपर गिरी थीं और कारों की हेडलाइटें जल रही थीं. मैंने देखा कि पुल ग़ायब है और मेरा शरीर जैसे वहीं जम गया. अपना बैग और जूते पकड़े और तुरंत घर से बाहर निकली. मैंने अपनी बहन को फ़ोन और हादसे की एक तस्वीर भी ली क्योंकि कोई भी यक़ीन नहीं करेगा कि मोरांडी पुल टूट गया है.”

मिम्मा की बहन ऐना रीटा सर्टो काम के लिए घर से बाहर थीं. दोनों बहनों की उम्र 60 के आसपास है और दोनों 1960 के दशक में अपनी आंखों के सामने पुल को बनते हुए देखा है.

“ये मेरे बचपन का हिस्सा था. हम इसके नीचे खेले हैं. जब राष्ट्रपति इसके उद्घाटन के लिए आए थे तो हमें लगा कि हम वास्तुकला की एक अद्भुत मिसाल के नीचे रहते हैं. ये पुल इटली के विकास का प्रतीक था.”मिम्मा सर्टो और ऐना रीटा सर्टो

“जब मैंने हादसे की तस्वीर देखी तो मुझे लगा कि मेरे साथ किसी ने मज़ाक किया है. मैं बचपन से इस पुल को देखती आई थी. मुझे लगा कि मेरा सबसे अच्छा दोस्त किसी की मौत की वजह कैसे हो सकता है.”

संरचना अभियंता (स्ट्रक्चरल इंजीनियर) प्रोफ़ेसर कार्मेलो जेन्टाइल इटली से क़रीब एक हज़ार मील दूर यूनान में छुट्टियां बिता रहे थे. उन्हें अपने भाई से हादसे का मेसेज मिला.

वो कहते हैं, “मेसेज पढ़ने के बाद मैं सन्न हो गया, 20 मिनट तक पता ही नहीं चला कि क्या हो रहा है. मेरे दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया था.”प्रोफ़ेसर कार्मेलो जेन्टाइल

साल भर पहले ही मिलान पोलिटेक्निक में अपनी टीम के साथ मिल कर वो इस पुल के पुनरुद्धार की योजना बना रहे थे. ये काम सितंबर में शुरू होने वाला था, यानी पुल टूटने के एक महीने बाद.

“हमने पुल की मज़बूती मापने के लिए सेन्सर्स का इस्तेमाल किया. पुल का जो हिस्सा टूटा उसमें गंभीर समस्याएं थीं.”

“एक इंजीनियर के तौर पर जब हम कोई ऐसी बात देखते हैं जो सामान्य नहीं है या फिर तय सीमा से अधिक या उलट है जो इसकी पुष्टि करने के लिए हमें और परीक्षण करने होते हैं. और जितनी जल्दी हो सके इस काम को अंजाम दे दिया जाना चाहिए.”मोरांडी पुल के टूटने से पहले की तस्वीर

पुल की देख-रेख करने वाली निजी कंपनी ऑटोस्ट्रेड का कहना है कि पुल की अवस्था पर लगातार नज़र रखी जा रही थी और बीच-बीच में जांच भी चल रही थी. लेकिन किसी तरह की तुरंत जांच में ये बात सामने नहीं आई कि पुल पर “तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है.”

जेन्टाइल ने अपनी रिपोर्ट एसपीइए इंजीनियरिंग को सौंप दी जोऑटोस्ट्रेड की ही सब्सीडियरी है और कंपनी के काम पूरे करती है.

“अगर उन्होंने मुझसे अधिक जांच के लिए कहा होता तो मैं शायद समस्या की जड़ तक पहुंच पाता. हो सकता है कि जांच शुरू करते ही मुझे इसका पता चल जाता और मैं पूरे तथ्यों के साथ इस बारे में जज को लिखता और सुरक्षा कारणों से पुल पर आवाजाही रोकने की गुज़ारिश कर सकता था.”

डेप्युटी अभियोजक पाओलो डीओवितियो और उनकी टीम ने हादसे से जुड़े सबूत इकट्ठा किए. इन्हों वो जज के सामने पेश करने वाले हैं. इस संबंध में वो, आला अधिकारियों से लेकर इंजीनियरों और तकनीशियनों तक- क़रीब 80 लोगों की भूमिका के बारे में जांच कर रहे हैं.

डी’ओवितियो ये तो नहीं कहते कि ऑटोस्ट्रेड को पता था कि पुल किसी भी वक़्त टूट सकता है, लेकिन वो मानते हैं कि पुल के जोखिम का सही मूल्यांकन नहीं किया गया था जो कि गुनाह है.

वो कहते हैं कि सबूत के तौर पर उन्होंने मलबे के नमूनों और कई दस्तावेज़ ज़ब्त किए हैं.डिप्टी अभियोजक पाओलो डी’ओवितियो

ऑटोस्ट्रेड का कहना है कि पुल का रखरखाव लगातार चल रहा था और इसी कारण पुल टूटने से पहले इसे दुरुस्त करने में बीते तीन सालों में 90 लाख यूरो का खर्च आया था.

लेकिन पाओलो डी’ओवितियो जानना चाहते हैं कि अगर कंपनी पुल के रखरखाव को लेकर संजीदा थी को पुल के उस टूटे खंभे को फिर से खड़ा करने में देरी क्यों की. जब ये कंपनी इटली सरकार के स्वामित्व में थी उस वक़्त 1990 के दशक में दो खभों की पूरी मरम्मत की गई थी. उस वक्त प्रोफ़ेसर कार्मेलो जेन्टाइल इस परियोजना में काम कर रहे थे.

उनका कहना है कि उस दौरान उनकी नज़र में कई बातें आई थीं जो चिंताजनक थीं.

“जब एक बार वो पुल की जांच की जा रही थी तो एक जगह पर सीमेन्ट की हिस्सा निकल आया और एक गड्ढा बन गया. आप देख सकते थे कि भीतर स्टील के टुकड़े हो चुके थे. सच कहूं तो हमें एक जगह ऐसी भी दिखी जहं कॉन्क्रीट था ही नहीं. अगर पानी इन जगहों से पुल के भीतर जाएगा तो पूरी संभावना थी कि भीतर के धातु को पूरी तरह बर्बाद कर देगा.”

“पुल के डिज़ाइन रिकार्डो मोरंडी को कॉन्क्रीट में भी संगीत सुनाई देता था. वो एक ऐसा पुल बनाना चाहते थे जहां आप सिर्फ कॉन्क्रीट देख सकें, धातु नहीं. इस डिज़ाइन में कई तकनीकी खामियां थीं. सही तरीक़े से काम होता तो पुल के भीतर लगे स्टील को ख़राब होने से बचाया जा सकता था. लेकिन पुल के लिए सामान बनाने की प्रक्रिया परफेक्ट नहीं थी. स्टील कॉन्क्रीट के भीतर छिपा था और आप स्टील की जांच नहीं कर सकते थे. तो आपको नहीं दिख सकता था कि पुल कितना मज़बूत रह गया है. और उस वक्त निर्माण तकनीक भी ऐसी नहीं थी कि आप कहें कि पुल में ऐयर पॉकेट नहीं छूटे होंगे.”

पाओलो डी’ओवितियो कहते हैं कि मलबे की जांच से पता चला है कि कॉन्क्रीट के भीतर का स्टील बुरी तरह गल चुका था.

“पुल खस्ताहाल था. ये आश्चर्य की बात है कि पुल इतने सालों तक आख़िर कैसे खड़ा रहा. ये हादसा दो, तीन साल या फिर दस साल पहले तक भी हो सकता था.”

ऑटोस्ट्रेड कंपनी से जुड़े जांचकर्ता इन दावों से इनकार करते हैं. वो कहते हैं कि ना तो पुल के खस्ताहाल होने के कोई सबूत हैं, ना ही पुल के भीतर का धातु इतना ख़राब हुआ था कि वो अब खड़ा नहीं हो सकता था.

पाओलो डी’ओवितियो कहते हैं “किस पर दोष लगाएं? ये उनकी ग़लती है जिन्हें पुल पर काम करना चाहिए था लेकिन जिन्होंने नहीं किया, जिन्हें खर्च करना था लेकिन नहीं किया और वो जिन्हें जांच करनी थी लेकिन जिन्होंने नहीं की.”

इस मामले में अभियोजक संदिग्धों पर हत्या का आरोप लगने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट का फ़ैसला आने में लंबा वक़्त लग सकता है.

इमैनुएल डियाज़ कोलंबिया में अपनी पढ़ाई छोड़ कर वापिस आ गए हैं ताकि वो अपने भाई हेनरी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ सकें.जून 2019 में पुल के बाकी बचे हिस्से को विस्फोटक लगा कर गिराया गया

इमैनुएल कहते हैं, “अब यही मेरा काम है और यही मेरी ज़िंदगी है. ईश्वर का शुक्र है कि उसमें हम दोनों भाइयों में से एक को न्याय की लड़ाई लड़ने और मां का ध्यान रखने के लिए ज़िंदा रखा है.”

“हेनरी और मैं उस कोलंबिया में पले-बढ़े जहां क़दम-क़दम पर हिंसा है. मेरे पिता नशीले पदार्थों के तस्करों के साथ थे और उनकी हत्या कर दी गई थी. हम इटली आए और हमने अपने परिवार का नाम रोशन करने की भरपूर कोशिश की.”

“मेरा भाई इंजीनियरिंग की पढ़ाई ख़त्म करने वाला था. वो कोलंबिया में रहने वाले बच्चों के लिए आर्थिक मदद जुटाने की कोशिश करता था. वो हमेशा हंसता था और जीवन से भरपूर था. वो कहता था कि ये दुनिया इंसान को मिला शानदार तोहफ़ा है.”

“मैं जानता हूं कि दोषी यहीं दुनिया में हैं और उन्हें सज़ा मिलनी चाहिए. मुझे भरोसा है कि मेरे भाई को न्याय मिलेगा क्योंकि पूरे इटली की यही ख्वाहिश है.”

अगर सुकून भरी नींद चाहिए तो अपने बेडरूम में जरूर रखें यह पौधा…

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सेहत खराब होने के पीछे सिर्फ हमारा गलत खानपान ही नहीं बल्कि हमारी नींद भी है। अगर आप पर्याप्त मात्रा में नींद नहीं लेते है। तो इससे आपकी सेहत भी खराब हो सकती है। हालांकि नींद ना लेने के पीछे कई सारे कारण होते है। जिसमें से सबसे प्रमुख कारण होता है रात के समय पर सही तरीके से ऑक्सीजन नहीं मिलना। अगर आपका कमरा छोटा है तो आप एक पौधा लगाकर अपनी समस्या को दूर कर सकते है। जी हां आपको बता दें कि उस पौधे का नाम स्नेक प्लांट है।

रात को ऑक्सीजन प्रदान करता है यह पौधा

आपको बता दें कि इस पौधे की सबसे अच्छी खासियत यह होती है। कि यह रात को भी ऑक्सीजन देता है। अगर आप इसे अपने बेडरूम में रखते हैं तो बेडरूम की हवा ना सिर्फ शुद्ध होती है। बल्कि आपकी सेहत भी सही रहती है । इस पौधे को स्नेक प्लांट के नाम से जाना जाता है। आइए जानते हैं इस के महत्वपूर्ण फायदों के बारे में।

कई लोगों को महसूस नहीं होता कि उन्हें स्किन संबंधी बीमारियां घर के अशुद्ध हवा के कारण होती है। जिसमें एलर्जी स्किन इचिंग। ऐसे में अगर आप इन सब बीमारियों से निजात पाना चाहते है तो आप अपने कमरे में स्नेक प्लांट को जरूर लगाएं। इतना ही नहीं इसकी पत्तियों को जैतून के तेल के साथ मिलाकर पीसने से सिर दर्द की समस्या में भी आराम मिलता है।

एलोवेरा भी है फायदेमंद

वायु को शुद्ध करने के लिए सबसे बेहतर पौधों की लिस्ट में एलोवेरा का नाम भी शामिल होता है।

कनेर का पौधा

सर्वे के मुताबिक यह पौधा वायु को 90% तक शुद्ध करने में मदद करता है। जिन लोगों को अस्थमा या सांस से संबंधित कोई भी बीमारी है। तो आप अपने घर में कनेर का पौधा जरूर लगाएं।

रजनीगंधा का पौधा

वैसे ज्यादातर इस पौधे का इस्तेमाल परफ्यूम या इत्र बनाने के लिए किया जाता है। इतना ही नहीं इस तेल की सिर पर मालिश करने से दिमाग की नसों में भी आराम मिलता है।

चमेली का पौधा

चमेली का पौधा आपके तनाव और बेचैनी को भी कम करने में मदद करता है। इसे घर में लगाने से ताजगी सी महसूस होती है और यह आपको रात को अच्छी नींद भी प्रदान करता है।

VIDEO : गुजरात में ऑटो वाले ने किया तीखा कमेंट तो युवतियों ने सरेराह जूतियों से ​पीटा

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गुजरात में सूरत के वेसु रोड पर एक ऑटो रिक्शा वाले को युवतियों से अभद्र बातें करना महंगा पड़ गया। दो युवतियों ने ऑटो रुकवाकर सरेआम जूतों से उसकी पिटाई कर डाली। इस दौरान मौके पर भीड़ आ जुटी। लोगों ने वीडियो भी बना लिए। ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे युवतियों ने ऑटो चालक को सबक सिखाया।

संवाददाता के अनुसार, ऑटो चालक ने ऑटो में बैठने वाली युवतियों से हंसी-ठट्ठा शुरू कर दिया था। खुद शादीशुदा होने के बावजूद वह युवतियों से शादी करने की बात कहने लगा। फिर अश्लील बातें भी बोलने लगा। इस पर युवतियों का सब्र टूट गया। उन्होंने ऑटो रुकवाकर अपनी-अपनी जूतियां उतारीं। ​दोनों ने सरेआम उसकी पिटाई करनी शुरू कर दी। देखते ही देखते राह चलते लोग भी ऑटो रिक्शा वाले पर अपना हाथ साफ करने लगे।

बताया जाता है कि भीड़ ने ऑटो चालक को पुलिस को नहीं सौंपा, बल्कि वे उसे युवतियों से ही पिटवाते रहे। भीड़ ने भी ऑटो रिक्शा वाले की बहुत पिटाई की। वहीं, युवतियों की तारीफ की जाने लगी।

पहाड़ों पर बादल फटने से होती है बड़ी तबाही, जानें क्यों होता है ये

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उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में कई जगहों पर बादल फटने और भारी बारिश से कोहराम मचा हुआ है. कई जगहों पर भूस्खलन से पहाड़ टूट कर सड़कों पर आ गिरे हैं. उत्तरकाशी, लामबगड़, बागेश्वर, चमोली और टिहरी में तो हालात बहुत बुरे हैं. स्कूल-कॉलेज बंद हैं. मौसम विभाग ने आज यानी सोमवार को भी बारिश का अलर्ट जारी किया है. कई स्थानों पर बादल फटने से लोगों के मलबे में दबे होने की खबर है. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम को मौके पर रवाना कर दिया गया है. क्या आप जानते हैं कि बादल फटना किसे कहते हैं? बादल क्यों फटता है? इससे क्या होता है?

बादल फटने का मतलब ये नहीं होता कि बादल के टुकड़े हो गए हों. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जब एक जगह पर अचानक एकसाथ भारी बारिश हो जाए तो उसे बादल फटना कहते हैं. आप इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर पानी से भरे किसी गुब्बारे को फोड़ दिया जाए तो सारा पानी एक ही जगह तेज़ी से नीचे गिरने लगता है. ठीक वैसे ही बादल फटने से पानी से भरे बादल की बूंदें तेजी से अचानक जमीन पर गिरती है. इसे फ्लैश फ्लड या क्लाउड बर्स्ट भी कहते हैं. अचानक तेजी से फटकर बारिश करने वाले बादलों को प्रेगनेंट क्लाउड भी कहते हैं.

क्यों अचानक से फट जाता है बादल?

कहीं भी बादल फटने की घटना तब होती है जब काफी ज्यादा नमी वाले बादल एक जगह पर रुक जाते हैं. वहां मौजूद पानी की बूंदें आपस में मिल जाती हैं. बूंदों के भार से बादल का घनत्व बढ़ जाता है. फिर अचानक भारी बारिश शुरू हो जाती है. बादल फटने पर 100 मिमी प्रति घंटे की रफ्तार से बारिश हो सकती है.

क्यों ज्यादातर बादल पहाड़ों पर ही फटते हैं?

पानी से भरे बादल पहाड़ी इलाकों फंस जाते हैं. पहाड़ों की ऊंचाई की वजह से बादल आगे नहीं बढ़ पाते. फिर अचानक एक ही स्थान पर तेज़ बारिश होने लगती है. चंद सेकेंड में 2 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश हो जाती है. पहाड़ों पर अमूमन 15 किमी की ऊंचाई पर बादल फटते हैं. हालांकि, बादल फटने का दायरा ज्यादातर एक वर्ग किमी से ज्यादा कभी भी रिकॉर्ड नहीं किया गया है. पहाड़ों पर बादल फटने से इतनी तेज बारिश होती है जो सैलाब बन जाती है. पहाड़ों पर पानी रूकता नहीं इसलिए तेजी से पानी नीचे आता है. नीचे आने वाला पानी अपने साथ मिट्टी, कीचड़ और पत्थरों के टुकड़े ले आता है. इसकी गति इतनी तेज होती है कि इसके सामने पड़ने वाली हर चीज बर्बाद हो जाती है.

सिर्फ पहाड़ों पर ही नहीं फटते बादल, मैदानी इलाकों में भी फटते हैं

पहले धारणा थी कि बादल फटने की घटना सिर्फ पहाड़ों पर ही होती है. लेकिन मुंबई में 26 जुलाई 2005 को बादल फटने की एक घटना के बाद यह धारणा बदल गई है. अब यह माना जाता है कि बादल कुछ खास स्थितियों में फटता है. वे स्थितियां जहां भी बन जाएं बादल फट सकता है. कई बार बादल के मार्ग में अचानक से गर्म हवा का झोंका आ जाए तो भी बादल फट जाते हैं. मुंबई की घटना इसी वजह से हुई थी.

बादल फटने की भयावह घटनाएं

  • 14 अगस्त 2017- पिथौरागढ़ जिले के मांगती नाला के पास बादल फटने से 4 की मौत. कई लापता.
  • 11 मई 2016 में शिमला के पास सुन्नी में बादल फटा, भारी तबाही.
  • 16-17 जून 2013 – केदारनाथ में बादल फटे. 10 से 15 मिनट तक तेज बारिश और भूस्खलन से करीब 5 हजार लोग मारे गए.
  • 6 अगस्त 2010 – लेह में बादल फटा. एक मिनट में 1.9 इंच बारिश. भारी तबाही.
  • 26 नवंबर 1970 – हिमाचल प्रदेश में बादल फटने से एक मिनट में 1.5 इंच बारिश हुई थी.
  • 7 जुलाई 1947 – रोमानिया के कर्टी-दे-आर्गस में बादल फटा. 20 मिनट में 8.1 इंच बारिश हुई थी.
  • 12 मई 1916 – जमैका के प्लम्ब प्वाइंट में बादल फटा. 15 मिनट में 7.8 इंच बारिश हुई थी.
  • 29 नवंबर 1911 – पनामा के पोर्ट वेल्स में बादल फटने से 5 मिनट में 2.43 इंच बारिश हुई थी.
  • 24 अगस्त 1906 – अमेरिका के वर्जीनिया स्टेट के गिनी में बादल फटने से सबसे अधिक 40 मिनट बारिश हुई. करीब 9.25 इंच बारिश हुई. इससे भारी तबाही हुई है.

चीन कैसे कुचलेगा हांगकांग का विद्रोह, 17 लाख लोग सड़कों पर उतरे

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हांगकांग में चीन के खिलाफ लगातार गुस्सा फूट रहा है और बीते रविवार को हुए ताज़ा विरोध प्रदर्शन (Protest Movement) में करीब 17 लाख लोग सड़कों पर उतरे. हांगकांग के विरोध का यह लगातार 11वां हफ्ता है और अब प्रदर्शनकारियों की मांगें पांच सूत्रीय हो चुकी हैं. पहले भी लाखों लोग हांगकांग में सड़कों पर उतकर प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन इस बार का आंकड़ा इसलिए हैरतअंगेज़ है कि पिछले सबसे बड़े प्रदर्शन के मुकाबले डेढ़ गुने लोग सड़कों पर थे, जिन्हें खदेड़ने और काबू करने में प्रशासन के पसीने छूट गए. जानिए कि चीनी नीतियों (Chinese Policies) का समर्थन करने वाले एक कानून (Extradition Act) को लोकतंत्र (Democracy) के लिए खतरा बताते हुए ये प्रदर्शन किस स्तर तक पहुंच चुके हैं और चीन की तरफ से अब किस कार्रवाई के संकेत हैं.

हांगकांग की कुल आबादी 74 लाख से कुछ ज़्यादा है. साल 1997 में हांगकांग को चीन के सुपुर्द कर दिया गया था. इसके बाद से बीते रविवार को हुआ ये प्रदर्शन सबसे बड़ा रहा. मानवाधिकार फ्रंट (Human Rights Front) की मानें तो ताज़ा प्रदर्शन में करीब 17 लाख लोग सड़कों पर उतरे और उन्होंने नए प्रत्यर्पण कानून का विरोध किया. उधर, चीन ने हांगकांग बॉर्डर पर भारी सैन्य बल (Armed Troops) तैनात किया है, जिसे लेकर दुनिया भर में चिंता का माहौल है और अमेरिका ने चीन को तियानमेन स्क्वायर (Tiananmen Square) जैसी दमनकारी नीति न अपनाने की चेतावनी तक दी है.

इससे पहले भी हांगकांग में बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं. इनमें से एक 2014 में हुआ अंब्रेला आंदोलन था जिसमें भी लाखों लोग सड़कों पर उतरे थे, लेकिन खबरों की मानें तो इस प्रदर्शन से बहुत बड़ी संख्या में नागरिक हालिया प्रदर्शन में शामिल हुए. इसकी एक वजह तो ये है कि अंब्रेला प्रदर्शन में मुख्यत: छात्र वर्ग शामिल था जबकि ताज़ा प्रदर्शन में कारोबारी लोग, मध्यम वर्ग, मध्यम आयु वर्ग और पहली बार प्रदर्शन में शामिल हो रहे लोग यानी बहुत बड़ी आबादी शामिल रही. 

नागरिक मानवाधिकार फ्रंट के हवाले से खबरों में कहा जा रहा है कि हांगकांग में चीन के खिलाफ जो प्रदर्शन पिछले 11 हफ्तों से जारी है, अब वह पांच मांगों को लेकर हो रहा है. पहली मांग तो वही है कि प्रत्यर्पण संबंधी कानून को बगैर शर्त पूरी तरह वापस लिया जाए और विरोध प्रदर्शनों को दंगा माने जाने की व्यवस्था भी वापस ली जाए. प्रदर्शनकारियों ने जून से अब तक गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा करने, जून से अब तक की घटनाओं की जांच के लिए एक स्वतंत्र आयोग बनाने और वैश्विक मताधिकार देने जैसी मांगें रखी हैं.

हांगकांग में जिस कानून के विरोध के लिए घंटों तक ये प्रदर्शन हुआ, उसके मुताबिक चीन को ये अधिकार ​होगा कि वह हांगकांग के किसी भी पलायक नागरिक यानी किसी और देश के नागरिक का प्रत्यर्पण कर सके. इस कानून को मानव अधिकारों और लोकतंत्र के लिए खतरा माना जा रहा है क्योंकि ताइवान समेत यूएन, अमेरिका और कई नामचीन संस्थाएं इस कानून के बारे में चीन को पहले ही चेता चुकी थीं.

इस विशाल विरोध प्रदर्शन के बाद नीति निर्माताओं ने कहा है कि अभी ये कानून लागू नहीं किया गया है और इसके दूसरे ड्राफ्ट की तैयारी चल रही है. दूसरे ड्राफ्ट के बाद इस पर बहस करवाई जाएगी और लोगों के हित में कानून बनने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा. लेकिन, विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून के बाद नागरिकों की सुरक्षा और उनकी सुनवाई की गारंटी नहीं होगी और चीन अपनी मनमानी करते हुए प्रत्यर्पण करने का अधिकार हथिया लेगा.

पहले भी हांगकांग में हुए हैं ऐतिहासिक प्रदर्शन
साल 2003 में दंगा संबंधी कानून के विरोध में यहां एक बड़ा प्रदर्शन हुआ था. दंगा संबंधी कानून के तहत प्रावधान था कि चीन के खिलाफ किसी भी किस्म का दंगा भड़काने, साज़िश करने या द्रोह करने पर दोषी को उम्र कैद तक हो सकती थी. इस कानून के विरोध में करीब 5 लाख लोग सड़कों पर उतरे थे और इसका असर ये हुआ था कि इस कानून को रद्द करना पड़ा था.

इसके बाद 2014 के अंब्रेला आंदोलन में कुछ हज़ार लोग सड़कों पर उतरे थे लेकिन आखिरकार ये आंदोलन नाकाम हो गया था क्योंकि इसे नागरिकों के बड़े वर्ग का समर्थन नहीं मिला था. हालांकि ये आंदोलन भी लोकतंत्र के बचाव के नाम पर था. इस बार प्रत्यर्पण कानून मसौदे के खिलाफ हुए आंदोलन को भी ‘प्रो डेमोक्रेसी’ कहा गया. इस बार दस लाख से ज़्यादा लोगों के समर्थन का दावा किया जा रहा है.

गौरतलब है कि 4 जून को टायनैनमेन स्क्वायर नरसंहार की 30वीं बरसी मनाने के लिए भी हांगकांग के विक्टोरिया पार्क में लाखों लोग जमा हुए थे. लोकतंत्र के लिए लड़ने वाले सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को 1989 में बीजिंग स्थित टायनैनमेन स्क्वायर पर मौत के घाट उतार दिया गया था. उस नरसंहार की याद में हर साल मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाती है. हांगकांग में बीते 4 जून को कैंडल लाइट सभा के लिए पार्क में 1 लाख 80 हज़ार लोग जमा हुए. 2014 के अंब्रेला मूवमेंट के बाद ये मौका था, जब इतनी बड़ी संख्या में लोग जुटे और इसके बाद 9 जून को प्रत्यर्पण कानून के विरोध में ऐतिहासिक प्रदर्शन हुआ.

चीन हो सकता है आक्रामक
जून से हांगकांग में चीन की नीतियों और कानून के खिलाफ प्रो डेमोक्रेसी नाम से चल रहे इस आंदोलन को लगातार जारी और बढ़ते देखकर चीन आक्रामक कदम उठाने के मूड में आ सकता है. जून और जुलाई में खबरें थीं कि प्रदर्शनों को देखकर चीन ने कानून के मसौदे पर कुछ बदलाव करने का मन बनाया था लेकिन इन संशोधनों पर हांगकांग के आंदोलनकारियों ने संतोष ज़ाहिर नहीं किया और प्रत्यर्पण कानून को पूरी तरह वापस लेने की मांग पर अड़े रहे. अब हांगकांग बॉर्डर पर चीन सेना भेजने की कवायद कर चुका है. माना जा रहा है कि चीन उसी तरह की नरसंहार जैसी दमनकारी नीति अपना सकता है जो उसने 30 साल पहले बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर आंदोलन को कुचलने के लिए अपनाई थी.

जम्‍मू : नदी में फंसे लोगों को रेस्क्यू करने पहुंचे हेलीकाप्टर की रस्सी टूटी, एक बहा

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श्रीनगर। जम्‍मू के तवी नदी में अचानक जलस्‍तर बढ़ने से वहां दो लोग फंस गए हैं। वो मछली पकड़ने के लिए आए थे और पानी का बहाव अचानक तेज होने पर वापस नहीं जा सके। दोनों लोगों को बचाने के लिए वायुसेना का हेलीकॉप्‍टर मौके पर पहुंच गया है। वहीं रेस्‍क्‍यू के दौरान हेलीकॉप्‍टर की सीढ़ी की रस्‍सी टूट गई जिससे एक शख्‍स नीचे गिर गया और बह गया। आपको बता दें कि नदी में 5 लोग फंसे थे जिनमें से दो को बचा लिया गया है जबकि तीसरा नीचे गया। दो लोग अभी भी फंसे हुए है जिन्‍हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

कोका-कोला फिर कर रही है CCD में हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी

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बेवरेज कंपनी कोका-कोला द्वारा भारत की सबसे बड़ी कॉफी चेन कैफे कॉफी डे (सीसीडी) में हिस्सेदारी खरीदने की बातचीत दोबारा शुरू होने की तैयारी चल रही है। मामले से जुड़े सूत्रों ने कहा कि एक और कंपनी सिकल लॉजिस्टिक्स भी विनिवेश की योजना पर काम कर रही है। कोका-कोला देश में कैफे बिजनस में पांव जमाना चाहती है क्योंकि कार्बोनेटेड ड्रिंक के उसके मुख्य बिजनस में सुस्ती बनी हुई है। इससे पहले जून में भी खबर आई थी कि कोका-कोला कैफे कॉफी डे में हिस्सेदारी खरीद सकती है। इस संदर्भ में दो अधिकारियों ने कहा था कि कोका-कोला कैफे सेगमेंट में अपनी जगह और मजबूत बनाना चाहती है। मामला अटलांटा में कोका-कोला के मुख्यालय से देखा जा रहा है। तब कहा गया था कि कोका-कोला की ग्लोबल टीम के अधिकारी सीसीडी के मैनेजमेंट से बातचीत कर रहे हैं। 

स्टारबक्स से है सीधा मुकाबला

बता दें कि सीसीडी पर कॉफी डे ग्लोबल का मालिकाना हक है और इसे वी जी सिद्धार्थ ने शुरू किया था। कॉफी डे ग्लोबल कॉफी डे एंटरप्राइजेज की सब्सिडियरी है। मौजूदा समय में इसके पास 1,750 कैफे हैं। सीसीडी का सीधा मुकाबला टाटा ग्रुप की स्टारबक्स से है, जिसके भारत में 146 स्टोर हैं। इसके अलावा छोटी कैफे चेंस बरिस्ता और कोस्टा कॉफी से भी सीसीडा का मुकाबला है। हालांकि, पिछले दो वर्षों में सीसीडी के विस्तार की रफ्तार घटी है।