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कथनी और करनी में दिख रहा जमीन-आसमान का अंतर, अडानी के लिए लाल किले से फिर झूठ बोल गए PM मोदी..

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क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ वाह वाही लूटने के लिए कुछ भी बोल जाते हैं. क्या प्रधानमंत्री के कथनी और करनी में फर्क है?

इधर देश स्वतंत्रता दिवस की खुशियां मना रहा है प्रधानमंत्री लाल किले से पर्यावरण के सरंक्षण बड़ी बड़ी बातें कर रहे हैं और उधर छत्तीसगढ़ में हसदेव अरण्य परसा कोल ब्लॉक के वन क्षेत्र में लगभग एक लाख पेड़ काटने का ऑर्डर दिया जा चुका है

हसदेव अरण्य का यह वन क्षेत्र सेंट्रल इंडिया के सबसे बड़े ओर सबसे पुराने फॉरेस्ट इलाके में से एक हैं, ये जंगल में रहने वाले गोंड आदिवासी समुदाय का घर है.12 जुलाई को दिए गए आदेश, जो कुछ दिन पहले ही विभाग की वेबसाइट पर अपलोड हुए हैं उसमे पता चला है कि परसा कोल ब्लॉक मे अडानी को ओपन कास्ट माइनिंग के लिए पर्यावरण विभाग से मंजूरी मिल गयी हैं सबसे बड़ी बात तो यह है कि केन्द्रीय वन पर्यावरण एवं क्लाइमेट चेंज मंत्रालय की पर्यावरणीय प्रभाव आंकलन समिति की बैठक में भूपेश बघेल की सरकार ने कोई आपत्ति नहीं जताई है

ओपन कास्ट माइनिंग में क्षेत्र से मिट्टी और वनस्पतियों को हटाने के बाद कोयले के लिए खुदाई होती है. इसमे पर्यावरण को अकल्पनीय नुकसान पुहंचेगा क्योकि अडानी की कंपनी ओपनकास्ट माइनिंग के जरिये ही कोयला निकालेगी

मंत्रालय ने 2100 एकड़ के परसा ओपनकास्ट माईन का स्टेज वन का फारेस्ट क्लीयरेंस 15 जनवरी 2019 को दिया है, जो भूपेश बघेल सरकार की अनुमति का इंतजार कर रहा था अब यह अनुमति भी उसे मिल गयी है

अडानी की कंपनी कुछ दूसरी कंपनियों के साथ मिल कर इन कोयला खदानो में एमडीओ यानी माइन डेवलपर कम ऑपरेटर के तौर पर कोयला खनन का काम करने जा रही है जबकि यही कांग्रेस अभी तक एमडीओ के तौर पर कोयला खनन का विरोध करती आई थी बतौर पीसीसी चीफ रहते हुए भूपेश बघेल द्वारा पूर्व रमन सरकार की सूरजपुर व सरगुजा में हसदेव परसा केते कोल ब्लॉक के पर्यावरण मंजूरी का विरोध किया था। यह वही इलाका है, जिसे यूपीए सरकार के कार्यकाल में वन्यजीवों और श्रेष्ठतम पर्यावरणीय पारिस्थितकी के कारण ‘नो गो एरिया’ घोषित करते हुए यहां कोयला उत्खनन पर रोक लगा दिया गया था. लेकिन बाद में यह रोक हटा ली गई और अब एमडीओ के सहारे फिर से खनन का रास्ता साफ़ हो गया है.

जो भूपेश बघेल 1 साल पहले अपने ट्वीट में कह रहे है थे ‘अडानी को पिछले दरवाज़े से कोयला ख़दानें देने के लिए मोदी सरकार ने MDO का रास्ता निकाला है’ वही अब सत्ता पाकर अडानी का वेलकम कर रहे हैं

यह पूरा ब्लाक अब अडानी को आवंटित कर दिया गया है। केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने यह काम स्थानीय लोगों की आपत्तियों को दरकिनार कर किया है।जन संगठनों का आरोप है कि इन खदानों में कोयला उत्खनन का सिलसिला शुरू होने से हसदेव अरण्य के लगभग पौने दो लाख हेक्टेयर में फैले घने जंगलों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा. यह कितना बड़ा जंगल है यह इससे समझा जा सकता है कि मुम्बई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों को मिलाकर भी इसके क्षेत्रफल की बराबरी नही की जा सकती ….इस विशालकाय जंगल मे पूंजीपतियों को पर्यावरण की कीमत पर संसाधनों की लूट की छूट देना यह बताता है कि दोनों दल की नीतियों में कोई खास फर्क नही है…

थोथी आदर्शवादी बाते लाल किले से करने कुछ नही होता प्रधानमंत्री जी, इस जंगल की रक्षा करना आपका पहला दायित्व होना चाहिए ..याद रखिए आप पेड़ लगा सकते है लेकिन जंगल नही……

सीएम फडणवीस की ‘महा जनादेश यात्रा’ को टक्कर देगी कांग्रेस की ‘पोल खोल यात्रा’

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 महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की महा जनादेश यात्रा से मुकाबला करने के लिए कांग्रेस ने अपनी कमर कस ली है। पोल खोल नाम से कांग्रेस ने राज्य में अपने दौरे की योजना बनाई है। प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर दोनों पार्टियां भाजपा और कांग्रेस ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। कांग्रेस के इस दौरे को भाजपा को मुंहतोड़ जवाब देने का प्रतीक माना जा रहा है।

फडणवीस की यात्रा के दूसरे चरण से एक दिन पहले 20 अगस्त से कांग्रेस की यात्रा शुरू होगी। पूर्व सांसद और विधानसभा चुनावों के लिए राज्य कांग्रेस की अभियान समिति के प्रमुख नाना पटोले ने इस संदर्भ में घोषणा की है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती पर विदर्भ के मोजरी से इस यात्रा की नींव रखी जाएगी।

1 अगस्त से शुरू हुए फडणवीस की महा जनादेश यात्रा में फडणवीस ने राज्य सरकार के कार्यकाल की प्रशंसा की है। उन्होंने दावा किया है कि उनकी सरकार ने राज्य में पहले की कांग्रेस सरकारों की तुलना में दोगुना विकास कार्य किया है। पटोले ने पांच सालों में महाराष्ट्र के विकास पर खुली बहस के लिए फडणवीस को चुनैती दी है। पटोले की अपील के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि वह कांग्रेस नेता को गंभीरता से नहीं लेते हैं।

पटोले ने इस यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि वह अपने-अपने क्षेत्रों के वरिष्ठ नेताओं के साथ पूरे राज्य का दौरा करेंगे। महा जनादेश यात्रा को फॉलो करते हुए कांग्रेस उन्हीं जगहों का दौरा करेगी जिन क्षेत्रों का रूख मुख्यमंत्री के काफिले ने किया है। कांग्रेस अपनी इस पोल खोल यात्रा का समापन 20 सितंबर को करेगी। पटोले का कहना है कि इस पोल खोल यात्रा में राज्य सरकार के बहीखाता को जनता के सामने पेश किया जाएगा और सच्चाई से पर्दा उठाया जाएगा।

फिल्मी है इस एक्ट्रेस की लाइफ, पहले बनीं संजय दत्त की हीरोइन, फिर बनी मां..

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मासूम सा चेहरा और स्माइल ऐसी कि सभी का दिल जीत ले… वो एक्ट्रेस आते ही लाखों-करोड़ों दिलों पर छा गई थी. हर कोई बस यही कर रहा था…’एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’.. अगर आप अब तक नहीं समझे तो बता दें कि हम बात कर रहे हैं अभिनेत्री मनीषा कोइराला (Manisha Koirala) की. मनीषा कोइराला आज 49 साल की हो गई हैं. इन सालों में नेपाल की ये खूबसूरता बाला एक एक्ट्रेस से लेकर एक मोटिवेशनल स्पीकर बनने तक सफर तय कर चुकी हैं. उनकी फिल्में तो आपने भी देखी होंगी लेकिन शायद उतार-चढ़ाव भरी उनकी फिल्मी जिंदगी के बारे में कम ही लोग जानते होंगे. नेपाल से आकर बॉलीवुड में जगह बनाना, दो साल में शादी टूट जाना, कैंसर से सामना होना और फिर उससे लड़ना … इन सालों में इस तरह के कई मोड़ मनीषा की जिंदगी में आए, मगर वो डटी रहीं. उनकी जिंदादिली और हुनर की मिसाल ही दी जानी चाहिए कि करियर में भी उन्होंने संजय दत्त की हीरोइन से लेकर मां तक का रोल कर दिया, और हर बार वो खरी उतरीं.

1992 में फिरोज खान की फिल्म ‘यलगार’ में पहली बार संजय दत्त और मनीषा कोइराला एक साथ सिल्वर स्क्रीन पर नजर आए थे. इसके बाद दोनों कारतूस, खौफ और बागी जैसी कई फिल्मों में साथ दिखे. लेकिन साल 2018 तक आते-आते काफी कुछ बदल गया. न सिर्फ मनीषा कोइराला की जिंदगी में बल्कि उनके करियर में भी ऐसा टर्निंग प्वॉइंट आया कि संजय की हीरोइन बनते-बनते मनीषा संजय दत्त की मां बन गईं. वो फिल्म ‘संजू’ में संजय दत्त मां यानी अभिनेत्री नरगिस के किरदार में दिखाई दीं.

उनकी जिंदगी में सबसे बुरा दौर तब था जब वो कैंसर से जूझ रही थीं. साल 2012 में सामने आया कि मनीषा को ओवेरियन कैंसर है. इसके बाद धीरे-धीरे वो फिल्मों और ग्लैमर की दुनिया से दूर होती चली गईं. उन्होंने इस बीमारी से लड़ने और जीतने के लिए खुद को बिल्कुल बदल लिया. आखिरकार उन्हें जीत मिली और तीन साल बाद वो पूरी तरह ठीक होकर फिर लौटीं. फिल्म ‘संजू’ उनकी धमाकेदार कमबैक रही.

खुद मनीषा ने पहले अपने कई इंटरव्यूज में ये कुबूल किया है कि उन्हें एक समय संजय दत्त पर काफी क्रश था. फिल्मों में सक्रिय होने के अलावा मनीषा कैंसर से लड़ाई के बाद दुनिया भर में मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर भी नजर आईं. वैसे मनीषा कोइराला नेपाल के राजनीतिक परिवार से जुड़ी हैं. वो बचपन में डॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन मॉडलिंग की दुनिया में दाखिल होने के बाद उन्हें एक्टिंग से प्यार हो गया.

अफगानिस्तान में महसूस किए गए भूकंप के झटके, तीव्रता 5.1

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अफगानिस्तान में शुक्रवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए. सुबह 7 बजकर 39 मिनट पर यह झटका महसूस किया गया. भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.1 रही और इसका केंद्र अफगानिस्तान का हिंदू कुश क्षेत्र रहा. हालांकि, इस दौरान किसी जान माल के नुकसान की खबर नहीं है. इस क्षेत्र में कई बार भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं.

इससे पहले भी हिन्दूकुश रीजन में 8 अगस्त की सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. इस रीजन में अफगानिस्तान और पाकिस्तान का क्षेत्र आता है. हालांकि, भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में काबूल से 243 किलोमीटर उत्तर में रहा था. भूकंप की वजह से किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ था.

इससे पहले 5 अगस्त को ईरान के कोहगिलुये और बोयर-अहमद प्रांत के चोरम क्षेत्र में रिक्टर पैमाने पर 5.2 तीव्रता वाले भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं. ईरान के भूकंप केंद्र ने यह जानकारी दी. भूकंप का केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई पर 50.790 डिग्री पूर्वी देशांतर और 30.594 डिग्री उत्तरी अक्षांश पर था.

भूकंप के झटके ईरान के खुजेस्तान प्रांत के उत्तरी शहरों में महसूस किए गए थे. भूकंप की तीव्रता ज्यादा होने की वजह से पांच लोग घायल हुए थे. ग्रामीण क्षेत्रों में घरों को नुकसान पहुंचा था. ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने भूकंप से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए टीमों को इस क्षेत्र में भेजा था.

अगर तृतीय विश्व युद्ध हुआ तो ये 3 देश होंगे सबसे ज्यादा सुरक्षित जानिए…

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पहला विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक मुख्य तौर पर यूरोप में व्याप्त महायुद्ध को कहते हैं। यह महायुद्ध यूरोप, एशिया व अफ़्रीका तीन महाद्वीपों और समुंदर, धरती और आकाश में लड़ा गया। इसमें भाग लेने वाले देशों की संख्या, इसका क्षेत्र (जिसमें यह लड़ा गया) तथा इससे हुई क्षति के अभूतपूर्व आंकड़ों के कारण ही इसे विश्व युद्ध कहते हैं।

पहला विश्व युद्ध लगभग 52 माह तक चला और उस समय की पीढ़ी के लिए यह जीवन की दृष्टि बदल देने वाला अनुभव था। क़रीब आधी दुनिया हिंसा की चपेट में चली गई और इस दौरान अंदाज़न एक करोड़ लोगों की जान गई और इससे दोगुने घायल हो गए। इसके अलावा बीमारियों और कुपोषण जैसी घटनाओं से भी लाखों लोग मरे। विश्वयुद्ध तृतीय के बाद कौन से ऐसे तीन देश हैं जिन पर इसका बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ेगा|

1 डेनमार्क
डेनमार्क बहुत ही खूबसूरत और आकर्षक देश है जहां पर लोग हर साल भारी मात्रा में यहां घूमने आते हैं| विश्व में अगर तीसरा विश्व युद्ध होता है तो डेनमार्क एक ऐसा देश होगा जहां पर इसका प्रभाव बिल्कुल ना के बराबर देखा जाएगा| इस देश की कम आबादी और बेहतरीन अर्थव्यवस्था की वजह से इस देश पर तृतीय विश्व युद्ध का खतरा बहुत कम रहेगा|

2 फीजी
इस दुनिया का इकलौता ऐसा देश है जहां की जनसंख्या सबसे कम है और इस देश की खूबसूरती की वजह से यहां की हड़ताल पर ट्रकों की भारी मात्रा पहुंचती है यह बहुत ही छोटा क्षेत्रफल वाला देश है जहां पर तृतीय विश्वयुद्ध के प्रभाव बहुत कम देखने को मिल सकते हैं|

3 आइसलैंड
आइसलैंड छोटे से खेत्रपाल वाला दुनिया का देहाती सुरक्षित और मजबूत अर्थव्यवस्था वाला देश कहा जाता है क्योंकि अगर भविष्य में कभी भी तृतीय विश्वयुद्ध होता है तो आयरलैंड पहला ऐसा देश होगा जहां पर इस विश्व युद्ध का प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा|

फिल्मी है इस एक्ट्रेस की लाइफपहले बनीं संजय दत्त की हीरोइन फिर बनी मां…

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मासूम सा चेहरा और स्माइल ऐसी कि सभी का दिल जीत ले… वो एक्ट्रेस आते ही लाखों-करोड़ों दिलों पर छा गई थी. हर कोई बस यही कर रहा था…’एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’.. अगर आप अब तक नहीं समझे तो बता दें कि हम बात कर रहे हैं अभिनेत्री मनीषा कोइराला (Manisha Koirala) की. मनीषा कोइराला आज 49 साल की हो गई हैं. इन सालों में नेपाल की ये खूबसूरता बाला एक एक्ट्रेस से लेकर एक मोटिवेशनल स्पीकर बनने तक सफर तय कर चुकी हैं. उनकी फिल्में तो आपने भी देखी होंगी लेकिन शायद उतार-चढ़ाव भरी उनकी फिल्मी जिंदगी के बारे में कम ही लोग जानते होंगे. नेपाल से आकर बॉलीवुड में जगह बनाना, दो साल में शादी टूट जाना, कैंसर से सामना होना और फिर उससे लड़ना … इन सालों में इस तरह के कई मोड़ मनीषा की जिंदगी में आए, मगर वो डटी रहीं. उनकी जिंदादिली और हुनर की मिसाल ही दी जानी चाहिए कि करियर में भी उन्होंने संजय दत्त की हीरोइन से लेकर मां तक का रोल कर दिया, और हर बार वो खरी उतरीं.

1992 में फिरोज खान की फिल्म ‘यलगार’ में पहली बार संजय दत्त और मनीषा कोइराला एक साथ सिल्वर स्क्रीन पर नजर आए थे. इसके बाद दोनों कारतूस, खौफ और बागी जैसी कई फिल्मों में साथ दिखे. लेकिन साल 2018 तक आते-आते काफी कुछ बदल गया. न सिर्फ मनीषा कोइराला की जिंदगी में बल्कि उनके करियर में भी ऐसा टर्निंग प्वॉइंट आया कि संजय की हीरोइन बनते-बनते मनीषा संजय दत्त की मां बन गईं. वो फिल्म ‘संजू’ में संजय दत्त मां यानी अभिनेत्री नरगिस के किरदार में दिखाई दीं.

उनकी जिंदगी में सबसे बुरा दौर तब था जब वो कैंसर से जूझ रही थीं. साल 2012 में सामने आया कि मनीषा को ओवेरियन कैंसर है. इसके बाद धीरे-धीरे वो फिल्मों और ग्लैमर की दुनिया से दूर होती चली गईं. उन्होंने इस बीमारी से लड़ने और जीतने के लिए खुद को बिल्कुल बदल लिया. आखिरकार उन्हें जीत मिली और तीन साल बाद वो पूरी तरह ठीक होकर फिर लौटीं. फिल्म ‘संजू’ उनकी धमाकेदार कमबैक रही.

खुद मनीषा ने पहले अपने कई इंटरव्यूज में ये कुबूल किया है कि उन्हें एक समय संजय दत्त पर काफी क्रश था. फिल्मों में सक्रिय होने के अलावा मनीषा कैंसर से लड़ाई के बाद दुनिया भर में मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर भी नजर आईं. वैसे मनीषा कोइराला नेपाल के राजनीतिक परिवार से जुड़ी हैं. वो बचपन में डॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन मॉडलिंग की दुनिया में दाखिल होने के बाद उन्हें एक्टिंग से प्यार हो गया.

ICU में भर्ती बाबूलाल गौर की आंखों से छलके आंसू जब कमलनाथ ने कहा फिर जापान चलेंगे..

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बाबूलाल गौर (Babulal Gaur) का हाल जानने के दौरान उस वक्त आईसीयू में भावुक स्थिति बन गई जब सीएम कमलनाथ (CM Kamal Nath) ने उनसे कहा, ‘आप ठीक हो जाइए, एक बार फिर हम जापान यात्रा पर चलेंगे. इसके बाद गौर साहब रोने लगे.

‘खराब स्वास्थ्य के चलते आईसीयू में भर्ती मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर (Former Chief Minister Babulal Gaur) का हाल जानने मौजूदा सीएम कमलनाथ (CM Kamal Nath) गुरुवार शाम अस्पताल पहुंचे. सीएम के साथ मध्य प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा भी मौजूद थे. कमलनाथ ने बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर की मौजूदगी में आईसीयू में जाकर उनका का हाल जाना.जबकि सीएम ने डॉक्टर्स से भी गौर साहब के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली.

…जब सीएम की बात पर रोने लगे बाबूलाल गौर

बहरहाल, बाबूलाल गौर का हाल जानने के दौरान उस वक्त आईसीयू में भावुक स्थिति बन गई जब सीएम कमलनाथ ने उनसे कहा, ‘आप ठीक हो जाइए एक बार फिर हम जापान यात्रा पर चलेंगे. ये सुनते ही बाबूलाल गौर के लगभग बेजान शरीर में हरकत भी हुई. हालांकि वो कुछ बोलना चाहते थे, लेकिन बोल नहीं सके.’

सीएम कमलनाथ के साथ आईसीयू में मौजूद रहे जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने बताया कि जिस वक्त सीएम ने बाबूलाल गौर से बात कर रहे थे उस वक्त गौर साहब की आंखों से आंसू छलक आए. बाद में मीडिया से बात करते हुए कमलनाथ ने कहा कि वो बाबूलाल गौर को काफी पहले से जानते हैं और उम्मीद करते हैं कि वे जल्द स्वस्थ होकर घर वापस लौटेंगे. 

आपको बता दें कि बाबूलाल गौर जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब कमलनाथ केंद्र में मंत्री हुआ करते थे. दोनों नेताओं ने डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के सिलसिले में साथ में विदेश यात्राएं की थीं. यकीनन जब कमलनाथ बीमार गौर का हाल जानने के लिए अस्‍पताल पहुंचे तो पुरानी यादें ताज़ा हो गईं और स्थिति भावुक बन गई.

तलाक के बाद अमृता ने मांगे थे इतने करोड़ रुपए सैफ अली खान से, किस्तों में चुकाया…

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बॉलीवुड के नवाब यानी सैफ अली खान (Saif Ali Khan) आज अपना 49वां जन्मदिन मना रहे हैं. सैफ अली खान जितना अपनी फिल्मों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं, उससे ज्यादा चर्चा में रही है उनकी पर्सनल लाइफ. सैफ अली खान की पहली शादी जब टूटी तब कई तरह की खबरें सामने आई थीं. सैफ अली खान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें तलाक के बाद कितनी रकम चुकानी पड़ी थी. उन्होंने खुलासा किया था कि उस वक्त उनके पास इतने पैसे नहीं थे, जिसके चलते उन्होंने अमृता सिंह (Amrita Singh) को ये रकम किश्तों में अदा की थी. दोनों की शादी 13 सालों तक चली थी, लेकिन जब टूटी तो वाकई हर कोई हैरान रह गया.

सैफ ने 1991 में खुद से 12 साल बड़ी बॉलीवुड एक्ट्रेस अमृता सिंह से शादी की थी. दोनों की पहली मुलाकात साल 1992 में हुई थी. उस समय अमृता बॉलीवुड में अपनी अच्छी-खासी पहचान बना चुकी थीं और सैफ ‘बेखुदी’ फिल्म से डेब्यू करने जा रहे थे. कहा जाता है कि पहली नजर में ही ये दोनों एक-दूसरे के प्यार में पड़ गए थे. अमृता और सैफ की पहली डेट अमृता के घर पर हुई थी. जब सैफ, अमृता के घर पहुंचे तो अमृता ने मेकअप नहीं किया था. अमृता की सादगी पर सैफ तो जैसे फिदा ही हो गए थे.

दोनों में इस कदर प्यार था कि उम्र के फासले की परवाह किए बिना दोनों ने शादी कर ली. दोनों के दो प्यारे बच्चे भी हुए, सारा अली खान और इब्राहिम. बताया जाता है कि एक विदेश ट्रिप के दौरान सैफ की जिंदगी में इटैलियन मॉडल रोजा आ गई थीं और यही दोनों तलाक का कारण बनीं. 2004 में दोनों का तलाक हो गया. वहीं तलाक के बाद एक इंटरव्यू में सैफ ने बताया कि ‘अमृता ने मुझसे 5 करोड़ रुपए देने को कहा था, लेकिन उस वक्त मेरी स्थिति ऐसी नहीं थी कि पूरे पैसे दे पाऊं. मैंने ये रकम किश्तों में चुकाई. इसके अलावा मैंने ये भी वादा किया था कि मैं इब्राहिम के बड़े होने तक हर महीने 1 लाख रुपए भी दूंगा’.

बहरहाल, तलाक के बाद 2012 में सैफ ने करीना कपूर से शादी कर ली. करीना, सैफ से 10 साल छोटी हैं. सारा भी तब तक बड़ी हो चुकी थीं. अब देखें तो इस नवाबी फैमिली में सभी रिश्ते अपनी जगह काफी खूबसूरत हैं. सैफ-अमृता की बेटी सारा, करीना कपूर के काफी करीब हैं. यहां तक कि इन दोनों की शादी में भी सभी खुशी-खुशी शामिल हुए थे.

भाजपा के वरिष्‍ठ नेता अरुण जेटली की हालत गंभीर, राष्‍ट्रपति देखने पहुंचेंगे एम्‍स…

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पिछले दिनों से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान यानी एम्‍स में भर्ती पूर्व वित्‍त मंत्री एवं भाजपा के वरिष्‍ठ नेता अरुण जेटली की हालत गंभीर बतायी जा रही है. 9 अगस्‍त को उन्‍हें एम्‍स में भर्ती कराया गया था जब उन्होंने घबराहट और कमजोरी की शिकायत की थी. राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद उन्‍हें देखने के लिए सुबह 11 बजे एम्‍स पहुंचेंगे.


पिछले सात दिनों से जेटली एम्स के आईसीयू में भर्ती हैं. गौर हो कि नौ अगस्त को एम्स ने उनकी सेहत को लेकर एक बयान जारी किया था. इसके बाद से अभी तक एम्स प्रशासन की ओर से कोई और बयान जेटली की हालत को लेकर नहीं आया है. सूत्रों की मानें तो उनकी स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है, वो अभी भी आईसीयू में हैं और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा जा रहा है. उल्लेखनीय है कि जेटली पहले से डायबिटीज के मरीज हैं और उनका किडनी ट्रांसप्लांट हो चुका है. कुछ दिनों पहले ही उन्हें सॉफ्ट टिशू कैंसर की भी बीमारी के बारे में पता चला. जेटली ने मोटापे से छुटकारा पाने के लिए बैरिएट्रिक सर्जरी भी करवाई थी.

एयरटेल का 4G नेटवर्क भारत में समुद्री किनारों के स्वर्ग लक्षद्वीप तक पहुंचा..

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आज की कनेक्टेड दुनिया में मोबाइल इंटरनेट एक अहम ज़रूरत बन गया है। ऐसे में भारत का अग्रणी टेलिकॉम सर्वि प्रोवाइडर भारती एयरटेल, देश के हर कोने में 4G सेवाएं पहुंचा कर डिजिटल इंडिया का सपना साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी कड़ी के अंतर्गत हाल ही में एयरटेल ने खूबसूरत द्वीपों के समूह लक्षद्वीप में अपनी 4G सेवाओं की शुरुआत कर दी है।

इस बारे में भारती एयरटेल के एमडी और सीईओ (भारत एवं दक्षिण एशिया) गोपाल मित्तल ने कहा, “लक्षद्वीप के पहले 4G सेवा प्रदाता बनकर हम बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं। इसके साथ ही हम भारत के आखिरी छोर पर बसे इस सुदूर क्षेत्र को भी डिजिटल सुपरहाइवे पर ले आए हैं।” अपने बयान में उन्होंने अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने में मोबाइल की भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “एयरटेल 4G लक्षद्वीप में ग्राहकों को आपस में जोड़कर क्षेत्र के विकास और व्यवसायों को भी गति प्रदान करेगा।”

एयरटेल 4G से अब यहां के निवासियों को मोबाइल फोन पर वीडियो स्ट्रीमिंग, तेज़ स्पीड डाउनलोड और अपलोड के साथ हाई-स्पीड में इंटरनेट जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी। तो अब एक बात पक्की है कि अगर आप लक्षद्वीप पर छुट्टियां मनाने जा रहे हैं, तो वहां भी अपनी पसंदीदा टीवी सीरीज़ देख पाएंगे। इसी तरह स्थानीय लोग अब कहीं से भी सुपरफास्ट इंटरनेट चला सकेंगे और अपने पसंदीदा म्यूज़िक या शो का आनंद ले सकेंगे।

लक्षद्वीप पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है, ऐसे में 4G की उपलब्धता से यहां के स्थानीय व्यवसायों और पर्यटन उद्योग को काफी मदद मिलेगी। एक तरफ पर्यटक यहां के मुख्य आकर्षण, होटल और खाने-पीने की जगहों जैसी चीज़ों के बारे में ऑनलाइन सर्च कर सकेंगे, तो वहीं दूसरी तरफ होटल और लॉज के मालिक अपने व्यवसाय का ऑनलाइन प्रचार कर सकेंगे। 4G आने से पहले तक लक्षद्वीप में होटल तलाशने के लिए स्थानीय लोगों और ट्रैवल एजेंट पर निर्भर रहने की मजबूरी थी। लेकिन अब आप फोन पर ही अपने लिए बेहतर विकल्प तलाश सकते हैं। इसके अलावा डिजिटल वॉलेट्स और यूपीआई ने लोगों के बीच लेन-देन को आसान बनाकर छोटे-बड़े विभिन्न व्यवसायों के लिए समान रूप से अवसरों के द्वार खोल दिए हैं।

वर्तमान में यहां के अगत्ती, बंगाराम और कावारत्ती क्षेत्रों में एयरटेल 4G सेवाएं उपलब्ध हैं। धीरे-धीरे पूरे द्वीप समूह में विस्तार किया जाएगा। इस क्षेत्र में एयरटेल के मौजूदा ग्राहक बिना किसी अतिरिक्त खर्च के अपने सिम को 4G में अपग्रेड कर सकते हैं। इसके अलावा, कई आकर्षक एवं किफ़ायती प्रीपेड और पोस्ट पेड प्लान भी चुन सकते हैं। लक्षद्वीप में एयरटेल 4G ग्राहकों को उनके डेटा प्लान के साथ नेटफ्लिक्स, अमेज़ोन, ज़ी5 जैसे प्रीमियम कॉन्टेंट के साथ-साथ एयरटेल टीवी और विंक म्यूज़िक सब्सक्रिप्शन जैसे फायदे भी मिलेंगे।

इस संबंध में टेलिकॉम सचिव अरुणा सुंदरराजन ने कहा, “मैं लक्षद्वीप में 4G सेवाओं की शुरुआत करने के लिए भारती एयरटेल को बधाई देती हूं। यह कदम हर भारतीय को डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल में सक्षम बनाएगा और एक डिजिटल इंडिया के निर्माण की दिशा में मील का पत्थर बनेगा। सरकार इस प्रयास में टेलीकॉम उद्योग की मदद के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”

गौरतलब है कि एयरटेल एक दशक से भी अधिक समय पहले लक्षद्वीप में मोबाइल सेवाएं शुरू करने वाली पहली निजी कंपनी बनी था। इस क्षेत्र में 4G नेटवर्क उपलब्ध करवाना एयरटेल के देशव्यापी नेटवर्क ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसे प्रोजेक्ट लीप भी कहा जाता है।

इस शुरुआत के साथ ही एयरटेल ने लेह-लद्दाख से लेकर कन्याकुमारी, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप तक, देश के हर कोने को विश्वस्तरीय मोबाइल ब्रॉडबैंड सेवाओं से सफलतापूर्वक कनेक्ट कर दिया है। इससे पहले एयरटेल उत्तर-पूर्व भारत के सुदूर इलाकों तक हाई-स्पीड 4G नेटवर्क पहुंचाने वाली प्रथम निजी टेलीकॉम कंपनी भी बन चुकी है।