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घरेलू हिंसा का शिकार हुई एक्ट्रेस श्वेता तिवारी ने पति कोहली को भेजा जेल, बेटी पलक के साथ भी की बदतमीजी

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सुपरहिट टीवी शो कसौटी जिंदगी की – सीजन 1 फेम श्वेता तिवारी टीवी जगत की जानी मानी अभिनेत्री है। श्वेता तिवारी भले ही इन दिनों लाइम लाइट से दूर हैं लेकिन अपनी पर्सनल बातों को लेकर एक वह फिर खबरों में छा गई हैं। खबरों की मानें तो एक्ट्रेस श्वेता तिवारी ने अपने पति अभिनव कोहली पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया है। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते अभिनव को गिरफ्तार कर लिया है। श्वेता की मुताबिक अभिनव ने उनकी बेटी पलक के साथ मारपीट भी की। इसी बीच दोनों मां-बेटी को पुलिस थाने के बाहर के बाहर देखा गया जहां वह दोनों जोर जोर से रोती नजर आई थीं।

स्पॉटबॉय.कॉम की एक रिपोर्ट की मानें तो 38 साल के अभिनव कोहली श्वेता और उनकी बेटी पलक के साथ अक्सर बद्तमीज़ी करते रहते हैं लेकिन अब जब उन्होंने बिना सोचे समझे पलक पर हाथ उठाया तो श्वेता ने मामला पुलिस तक ले जाना ही बेहतर समझा। एक और रिपोर्ट की मानें तो अभिनव पलक पर अभद्र टिप्पणियां करते थे और उनके फोन में भी इस तरह की चीज़ें दिख जाती थीं। दुखद है कि श्वेता तिवारी एक बार फिर से घरेलू हिंसा की शिकार हुई हैं। इससे पहले भी उनके पति राजा चौधरी ने उनके साथ शराब के नशे में मारपीट की थी। जिसके बाद श्वेता ने राजा से तलाक ले लिया था।

मीडिया रिपोर्ट मुताबिक अभिनव को दोपहर 1 बजे के आसपास पुलिस स्टेशन लाया गया और श्वेता-पलक की मौजूदगी में करीब 4 घंटे तक उनसे पूछताछ की गई। इसके बाद पुलिस ने श्वेता की शिकायत पर अभिनव के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। श्वेता के मुताबिक साल 2017 में अभिनव में उनकी बेटी पलक को अपने मोबाइल में एक मॉडल की अश्लील फोटो भी दिखाई थी। अब इस मामले में समता नगर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज हुआ जिसके बाद पुलिस ने अभिनव को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है।

श्वेता तिवारी ने अपने करियर की शुरुआत सीरियल कसौटी जिंदगी की से की थी। इसमें प्रेरणा का किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में पहचान बनाई। इसके अलावा श्वेता कई फिल्मों में भी नजर आ चुकी हैं। श्वेता ने बिग बॉस में भी हिस्सा लिया था।

झरने के नीचे नहाते समय टिक-टॉक पर वीडियो बना रहा किशोर बहा, चट्टानों में फंसा

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बारां (Baran) जिले में झरने के नीचे नहाने के दौरान एक किशोर को टिक-टॉक (tick-talk) पर वीडियो बनाना भारी पड़ गया. वीडियो (video)बनाते में मस्त किशोर का संतुलन बिगड़ गया और वह पानी के तेज बहाव में बह गया. गनीमत रही कि कुछ ही दूरी पर वह चट्टानों में जाकर फंस गया. बाद में वहां मौजूद लोगों ने किशोर को बड़ी मुश्किल से बचाया. उसे बारां में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. वहां अब उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है.

भड़का प्रपात पर हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार हादसा भंवरगढ़ थाना इलाके में भड़का प्रपात पर रविवार को हुआ. बारां निवासी 16 वर्षीय आशु अपने परिवार के साथ भड़का प्रपात पर पिकनिक मनाने गया था. आशु प्रपात में नहाते हुए टिक-टॉक एप पर वीडियो बना रहा था. इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह पानी के तेज बहाव में बह गया. बाद में कुछ दूर जाकर चट्टानों के बीच फंस गया. आशु के चिल्लाने पर पिकनिक मनाने आए दूसरे लोग वहां पहुंचे.

लोगों काफी मशशक्त कर आशु को चट्टानों के बीच से निकाला. बाहर निकालने के बाद लोगों ने उसे सीपीआर दी. बाद में उसे तुरंत किशनगंज अस्पताल ले जाया गया. वहां से उसे प्राथमिक उपचार के बाद बारां जिला चिकित्सालय रेफर किया गया. उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है.

उल्लेखनीय है कि हाड़ौती अंचल में पिछले दिनों लगातार हुई बारिश से नदी नाले उफान पर आ गए और कई झरने बह निकले हैं. इसके कारण पिकनिक स्थल काफी आबाद रहते हैं. रविवार को अवकाश होने के कारण भड़का प्रपात भी काफी सैलानी पहुंचे थे.

जब पत्नी को सच पता चला तो भिखारी संग कर ली शादी, पत्नी का बनाया खाना खिलाता था भिखारी को…

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यह दुनिया बहुत बड़ी है और जितनी बड़ी है उतनी ही अजीबोगरीब यहां की बातें हैं। आपने लव स्टोरी तो बहुत ही सुनी होगी लेकिन क्या ऐसी लव स्टोरी सुननी है जिसके चलते एक औरत ने एक भिखारी से ही शादी कर ली। जी हां एक पत्नी अपने पति को रोज टिफिन बना कर दिया करती थी और पति रोज ऑफिस ले जाया करता था। अचंभे की बात तो यह है कि पत्नी 3 महीने से लगातार पति को घीया की सब्जी ही बनाकर टिफिन में दिया करती थी और बिना कुछ कहे रोज पति टिफिन खाली लेकर घर पहुंचता था। इस बात से पत्नी बहुत अचंभे में थी कि पति बिना कुछ बोले रोज वही सब्जी खा लेता है और घर पर आकर एक शिकायत तक नहीं करता ऐसा कैसे हो सकता है। पत्नी को कुछ शक हुआ और एक दिन उसने अपने पति का पीछा किया तो उसने जो देखा उसे देखकर तो वह हैरान ही रह गई। पति की हरकत से पत्नी को जो हैरानी हुई उससे कहीं ज्यादा धक्का तो पति को लगा जब पत्नी ने उसकी हरकत का जवाब दिया। चलिए जानते हैं यह पूरी घटना-

एक पत्नी रोज अपने पति को घीया की सब्जी लगातार दो महीने से टिफिन में रखकर दे रही थी और 3 महीने से लगातार पति अपना टिफिन खाली करते हुए ही घर लेकर आता था। बिना किसी शिकायत के जब पत्नी को वह खाली टिफिन देता था तब पत्नी को शक हुआ और उसका पीछा किया एक दिन तब पता चला कि वह अपना टिफिन खुद नहीं खाता है वहां बैठे एक भिखारी को दे देता है।

पत्नी को यह बात पता चली और उसने पति को रंगे हाथों पकड़ा और उस दिन वह उस भिखारी से मिली। भिखारी से मिलने के बाद वह भिखारी उस लड़की को पहचान गया था और उसने बचपन की दो-तीन शायरियां कहीं जिसके बाद प्रकाश नाम के इस भिखारी को उस महिला ने भी पहचान लिया क्योंकि वह उसके बचपन का प्यार था जो उसकी शादी की वजह से उससे बिछड़ गया था।

बस फिर क्या था और कहते हैं जब बिछड़ा हुआ प्यार मिल जाए तो दुनिया की हर चीज भुलाई जा सकती है बस उस लड़की ने 2 दिन बाद अपने पति को तलाक दिया और उस भिखारी से शादी कर ली जो उसका बचपन का प्यार था। और दोनों मंदिर के बाहर बैठकर भीख मांगने लगे। क्या आपने ऐसा कभी प्यार का किस्सा सुना है जिसमें इतना बड़ा बलिदान देकर महलों में रहने वाली महिला एक मंदिर के बाहर अपने प्रेमी के साथ भीख मांगना शुरू कर देती है।

प्यार की वैसे तो आपने बहुत सी कहानियां सुनी होंगी लेकिन यह अनोखी प्रेम कहानी एकदम सच्ची है। यह पूरी घटना उड़ीसा के जबलपुर की है जहां पर उस लड़की के बिछड़े बचपन के प्यार को देखते ही वह रह नहीं पाया और अपने पति को तलाक देकर उससे शादी कर ली। ऐसा कहा जाता है कि प्यार में बहुत दम होता है वह हर चीज को भुला देता है लेकिन इस घटना को देखकर लगता है कि सच में प्यार में बहुत दम होता है जो हर चीज भुला देने और छोड़ देने की ताकत देता है।

अनुच्छेद 370 से बौखलाया पाक जंग को तैयार, लद्दाख के नजदीक तैनात किए लड़ाकू विमान..

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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के विवादित प्रावधानों को खत्म किए जाने से नाराज पाक अब जंग की तैयारी कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन न मिलने के बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और सेना जम्मू-कश्मीर में शांति भंग करने की कोशिशों में लग गए हैं। पाक ने गिलगित बलिस्तान में स्थित स्कर्दू हवाई अड्डे पर अपने जेएफ-17 युद्ध विमानों को तैनात कर दिया है। यह हवाई अड्डा लद्दाख के नजदीक स्थित है। भारतीय खुफिया एजेंसियां पाक सेना की इन गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।

सूत्रों के अनुसार, तनाव के बीच पाकिस्तानी सेना लद्दाख के नजदीक स्थित अपने अग्रिम चौकियों पर भारी हथियार और सैन्य साजो-सामान को एकत्रित कर रही है। शनिवार को पाकिस्तानी वायुसेना के तीन सी-130 हरक्यूलस परिवहन विमानों ने सैन्य साजो-सामान को लद्दाख के नजदीक गिलगित बलिस्तान में स्थित स्कर्दू हवाई अड्डे पर पहुंचाया।

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने अग्रिम मोर्चे पर जिन सैन्य साजो-सामानों को पहुंचाया है उसमें से अधिकतर का उपयोग युद्ध के दौरान लड़ाकू विमानों की सहायता के लिए किया जाता है।

भारतीय थलसेना और वायुसेना भी तैयार

पाकिस्तान द्वारा किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए भारतीय सेना और वायुसेना पूरी तरह से तैयार हैं। भारत की खुफिया एजेंसियां पाकिस्तान की हर हरकत पर नजदीक से नजर बनाए हुए हैं। सीमा पर सुरक्षा को भी बढ़ा दिया गया है। सेना, वायुसेना और नौसेना अपनी ताकत में लगातार इजाफा कर रही हैं। इस बाबत रक्षा खरीदारियों में भी तेजी देखी जा रही है।

हाल में ही सेना ने पाक के बैट(बार्डर एकशन टीम) के पांच से सात घुसपैठियों को ढेर कर दिया था। ये सभी भारत में किसी बड़े आतंकी हमले की फिराक में सीमा को पार करने की कोशिश कर रहे थे।

पाक ने तीन नौसैनिक बंदरगाहों को कराया खाली

सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि पाकिस्तान ने कराची, ओरमारा और ग्वादर नौसैनिक बंदरगाहों को खाली करवा दिया है। विशेषज्ञ इसे किसी गड़बड़ी से जोड़कर देख रहे हैं। सैटेलाइट तस्वीरें ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस से भेजी गई हैं। जिन्हें @detresfa नाम के यूजर ने अपने अकाउंट से साझा किया है।

तस्वीर के अनुसार ओरमारा बंदरगाह में मौजूद जिन्ना नेवी बेस और ग्वादर बंदरगाह पूरी तरह से खाली करवा दिए गए हैं। कराची के नौसेनिक डॉक पर केवल तीन जहाज खड़े हैं। जबकि अनुच्छेद 370 हटने से पहले की सैटेलाइट तस्वीरों में दिख रहा था कि यहां पर बड़ी संख्या में जहाज खड़े थे।

चार अगस्त की एक सैटेलाइट तस्वीर में रावलपिंडी के चकलाला का नूर खान वायुसेना बेस कैंप पूरी तरह से खाली दिख रहा है। वहीं 19 जून को ली गई यहां की तस्वीर में सबकुछ सामान्य दिखाई दे रहा है। पांच अगस्त के बाद से पाक अधिकृत कश्मीर में वीआईपी उड़ानों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। बीते पिछले चार दिनों में यहां चार फ्लाइट्स आ चुकी हैं। एक सैटेलाइट तस्वीर में एक वीवीआईपी गल्फस्ट्रीम विमान पीओके की तरफ नजर आ रहा है।

Reliance ऐसे बनी देश की सबसे बड़ी कंपनी, सिर्फ 1000 रुपए से शुरू हुई थी

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मुंबई में हुई रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries AGM) की एजीएम में मुकेश अंबानी ने कई बड़े ऐलान किए हैं. आइए आपको बताते हैं कैसे शुरू हुई थी रिलायंस और कैसे बन गई है ये 7 लाख करोड़ रुपये की कंपनी.

मुंबई में हुई रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries AGM) की एजीएम में मुकेश अंबानी ने कई बड़े ऐलान किए हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के पास 3 ग्रोथ इंजन है जिसमें से ऑयल (Oil), रिटेल (Retail) और जियो (Jio) रिलायंस के ग्रोथ इंजन है. इसके साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज ने न्यू कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े कई बड़े एलान किए हैं. इस एजीएम में मुकेश अंबानी ने कंपनी की आगे की योजनाओं की जानकारी दी है. रिलायंस की सफलता के बारे में मुकेश अंबानी हर बार अपने पिता को याद करते हुए ये कहते हैं कि ‘रिलायंस एक व्यक्ति के विज़न का नतीजा है- मेरे पिता और हमारे फाउंडर धीरूभाई अंबानी. पिछले 40 साल में हमने जितनी तरक्की की है वह उन्हीं की बदौलत है. रिलायंस उनके मजबूत कंधों पर खड़ा है.’

आइए आपको बताते हैं कैसे शुरू हुई थी रिलायंस और कैसे बन गई है लाख करोड़ की कंपनी.

रिलायंस के बारे में कहा जाता है कि ये कंपनी एक कर्मचारी से शुरू हुई थी. और आज इसी कंपनी में लगभग 2.5 लाख कर्मचारी काम करते हैं. रिलायंस का शुरूआती एक हजार का इन्वेस्टमेंट अब 7 लाख 36 हजार करोड़ रुपए हो गया है. इसके अलावा कंपनी का कारोबार एक शहर से बढ़कर 28 हजार शहरों, 4 लाख गांवों में पहुंच गया है.

28 दिसंबर 1932 में गुजरात के जूनागढ़ जिले के चोरवाड़ गांव में जन्मे धीरूभाई का सपना छोटा नहीं था. आर्थिक तंगी की वजह से उन्होंने हाईस्कूल की अपनी पढ़ाई छोड़ी और पकोड़े बेचने लगे. ये उनका पहला व्यवसाय बना.

रिलायंस की स्थापना
यमन के अदन शहर में उन्‍होंने 300 रुपये महीने पर A.Besse and Co. में गैस स्‍टेशन अटेंडेंट का काम करना शुरू किया. आठ साल वहां गुजारने के बाद 1958 में यमन से 500 रुपये की पूंजी के साथ लौटे और अपने कजिन चंपकलाल दमानी के साथ एक टेक्‍सटाइल ट्रेडिंग कंपनी मार्जिन की शुरुआत की. उसके बाद 1960 में उन्होंने रिलायंस की स्‍थापना की.

आज है देश की सबसे बड़ी कंपनी
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) आज देश की सबसे बड़ी कंपनी बन चुकी है. इसका मार्केट कैप यानी बाजार पूंजीकरण इस समय 736,602 लाख करोड़ रुपए है. इस मामले में यह देश की सबसे बड़ी कंपनी है. रिलायंस इंडस्ट्रीज हाइड्रोकार्बन एक्‍सप्‍लोरेशन एंड प्रोडक्‍शन, पेट्रोलियम रीफाइनिंग एंड मार्केटिंग, पेट्रोकेमिकल्‍स, रिटेल और हाई-स्‍पीड डिजिटल सर्विस बिजनेस की सबसे बड़ी प्‍लेयर बन चुकी है.

हाई कमिश्नर अजय बिसारिया ने पाकिस्तान छोड़ने से पहले किया ये आखिरी काम जनिए…

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भारत-पाकिस्तान के बीच पैदा हुए तनाव के बाद पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त अजय बिसारिया दिल्ली लौट आए हैं. लेकिन स्वदेश लौटने से पहले अजय बिसारिया एक बार फिर से पाकिस्तान को महात्मा गांधी की याद दिला गए. पाकिस्तान में भारत के हाई कमिश्नर के रूप में अजय बिसारिया ने दूतावास परिसर में 150 पौधे लगाए और हरे-भरे पर्यावरण का संदेश दिया.

बता दें कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 खत्म होने के बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. पाकिस्तान ने भारत से कूटनीतिक संबंध लगभग खत्म कर दिए हैं. पाकिस्तान ने पिछले बुधवार को ही अजय बिसारिया को इस्लामाबाद छोड़ने को कह दिया था.

इस्लामाबाद छोड़ने से पहले हाई कमिश्नर ने भारतीय दूतावास परिसर में एक अनोखा कार्यक्रम आयोजित किया. इस कार्यक्रम में भारतीय दूतावास के सारे स्टाफ शामिल हुए और पूरे 150 पौधे लगाए. 150वां पौधा हाई कमिश्नर अजय बिसारिया ने लगाया. बता दें कि भारत इस साल महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रहा है. इस मौके पर भारत के अलावा विदेश में भी कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं.

कार्यक्रम के बारे में भारतीय दूतावास ने ट्वीट कर कहा, “एक हरे-भरे भविष्य के लिए पौधरोपण, महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए हमने दूतावास और आवासीय परिसर में उनकी 150वीं जयंती पर 150 पौधे लगाए हैं. इस मौके पर 150वां पौधा हाई कमिश्नर अजय बिसारिया ने लगाया.”

सूत्रों का कहना है कि अजय बिसारिया रविवार को दिल्ली वापस आ गए हैं. इससे पहले पाकिस्तान यह स्पष्ट कर चुका है कि वह अपने नवनियुक्त उच्चायुक्त मोइन उल हक को नई दिल्ली नहीं भेजने जा रहा है. पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त सोहेल महमूद को विदेश सचिव बनाए जाने के तीन महीने बाद हक की नियुक्ति की गई थी.

Jio GigaFibre होगी 5 सितंबर से शुरू, हुआ ऐलान..

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जियो गीगाफाइबर (Jio GigaFibre) काफी दिनों से बात हो रही है. पिछले एक साल से इस बात की लगातार चर्चा हो रही थी. रिलायंस (Reliance) की आज 42वीं ऐनुअल जनरल मीटिंग (एजीएम) इवेंट में कंपनी इसके बारे में घोषणा करते हुए कहा गया कि गीगाफाइबर सर्विस को 5 तारीख से शुरू कर दिया जाएगा.

ऐलान के मुताबिक जियो फाइबर के प्लान 100 Mbps से शुरू होंगे. यह स्पीड बेसिक प्लान में होगी. प्लान के मुताबिक ये स्पीड 1 Gbps तक जाएगी. इन सभी प्लान में वॉयस कॉल हमेशा फ्री रहेंगी. जियो फाइबर प्लान 700 रुपए से शुरू होगा. अनलिमिटेड इंटरनेशनल कॉलिंग 500 रुपए से शुरू होगी

हालांकि, इस बात की भी उम्मीद इस बात की भी की जा रही है कि जियो गीगा फाइबर के साथ-साथ कंपनी अपना एंड्रॉयड बेस्ड फोन ‘जियो फोन 3’ भी लॉन्च कर सकती है. रिलायंस जियो गीगाफाइबर ब्रॉडबैंड की कीमत भी बाकी के दूसरे ब्रॉडबैंड सेवाओं की तरह ही होगी, लेकिन इसकी खासियत यह है कि इसमें ट्रिपल प्ले प्लान की सुविधा है जिसमें ब्रॉडबैंड, लैंडलाइन और टीवी सेवाएं शामिल हैं. सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट की अनुसार इस प्लान का बेस प्राइस 500 से 600 रुपये रहने की उम्मीद है.

खबरों के मुताबिक, जियो गीगाफाइबर के लिए रजिस्ट्रेशन पिछले साल से ही शुरू हो गए थे. पिछले कुछ महीनों से देश के चुनिंदा शहरों में इसकी टेस्टिंग चल रही है. मार्केट कैपिटलाइज़ेशन के हिसाब से रिलायंस इंडस्ट्रीज़ भारत की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है.

जियो गीगाफाइबर से बड़ी स्क्रीन पर भी अल्ट्रा हाई डेफिनीशन इंटरटेनमेंट, मल्टी पार्टी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, वॉइस एक्टिवेटेड वर्चुअल असिस्टेंस, वर्चुअल रियलिटी गेमिंग, डिजिटल शॉपिंग जैसे एक्पीरिएंस मिलेंगे. सब्सक्राइबर्स 4500 या 2500 रुपये की सिक्योरिटी डिपॉज़िट के बाद प्रिव्यू ऑफर की सुविधा भी ले सकते हैं. ट्रायल के दौरान ग्राहकों को 100 एमबीपीएस की स्पीड से डेटा दिया जा रहा है.

क्‍या है जियो गीगाफाइबर? यह एक हाईस्पीड इंटरनेट सेवा है जिसके जरिए इंटरनेट के अलावा आप कॉलिंग, टीवी, डीटीएच की सुविधा भी प्राप्त कर सकते हैं. जियो गीगाफाइबर के एक कनेक्शन पर एक साथ 40 डिवाइस कनेक्ट किए जा सकते हैं.

ये आरोपी प्रेमी जोड़ों को टारगेट करते थे, देते थे इस खौफनाक जुर्म को अंजाम..

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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बालोद जिले की डौंडीलोहारा पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी मिलने का दावा किया है. पुलिस का दावा है कि जिले के खरखरा जलाशय की तरफ घूमने आने वाले प्रेमी जोड़ों (Lovers) के साथ जुर्म की घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल दाखिल करा दिया है.

बालोद पुलिस (Balod Pulice) ने बीते 10 अगस्त को मामले में खुलासा किया. पुलिस के मुताबिक बालोद के खरखरा जलाश घूमने आने वाले प्रेमी जोड़ों को आरोपी टारगेट करते थे. आरोपी प्रेमी जोड़ों (Lovers) के साथ लूटपाट की घटना को अंजाम देते थे. साथ ही उनके साथ गलत काम करने की धमकी भी देते थे. पुलिस ने ऐसे ही छह आरोपियों को गिरफ्तार (Arrest) किया है. आरोपियों के पास से लूट की रकम और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं.

लगातार मिल रही थी शिकायत बालोद के डीएसपी (DSP) अनुराग झा ने बताया कि बालोद जिले के खरखरा जलाशय में अक्सर सैलानियों का आना जाना लगा रहता है. वहीं कई प्रेमी जोड़े भी इस ओर घूमने आते हैं, जहां प्रेमी जोड़ों को कुछ दिनों से आस पास के ही गांव के युवक लूटपाट कर उनके साथ मारपीट करने की की घटना को अंजाम देते थे. इसकी शिकायत लगातार पुलिस को मिल रही थी, लेकिन कोई भी पीड़ित खुलकर सामने नहीं आ रहा था.

डीएसपी झा के मुताबिक कुछ दिनों पहले खरखरा जलाशय घूमने आए डोंगरगढ़ के एक युवक के साथ भी लूट हुई, जिसके बाद युवक ने हिम्मत करके पुलिस में मामले की पूरी रिपोर्ट की जहां पुलिस ने मामले की जांच के बाद ग्राम संजारी के 6 युवको को गिरफ्तार किया और पूछताछ के दौरान पुलिस ने सभी युवको से लग अलग पूछताछ किये तो पता चला कि युवक सिर्फ प्रेमी जोड़ों को ही अपना शिकार बनाते थे. पुलिस की मानें तो इन आरोपियों ने अन्य कई लूट की घटनाओं को अंजाम देने की बात भी कबूल की है, मगर उन घटनाओं में कोई रिपोर्ट नहीं होने की वजह से पुलिस के हाथ खाली ही नजर आ रहे थे.

अब बच्चों को मिलावट से बचाने स्कूलों में बांटे जाएंगे सांची के पेड़े, स्कूल-कॉलेज के लिए मिलेगी 45 रुपए की छूट…

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ग्वालियर-चंबल संभाग में बड़े पैमाने पर मिलावटी दुग्ध उत्पाद बनाने वाली डेयरियां पकड़ी गई हैं। अंचल में मिलावट से स्कूली बच्चों को बचाने के लिए प्रशासनिक अधिकारी नई पहल कर रहे हैं। ग्वालियर आयुक्त ने पत्र लिखकर सभी जिलों के कलेक्टरों से अपील की है कि बच्चों को इस बार बाजार की खुली मिठाई की जगह सांची के पेड़े वितरित किए जाएं। इधर सांची दुग्ध संघ ने भी दो-दो पेड़ों के पाउच और पेड़ों की एमआरपी में स्कूल कॉलेजों को छूट दी है। साथ ही डिमांड के अनुसार पेड़ों को जिला मुख्यालय पर ही उपलब्ध करवाने की भी व्यवस्था की है।

दुग्ध और खाद्य सामग्री में मिलावट की सूचनाओं पर प्रदेश स्तर से भिंड और मुरैना जिले में मिलावटखोरों पर बड़ी कार्रवाई हुई है। इससे सबक लेते हुए ग्वालियर आयुक्त एसबी शर्मा ने ग्वालियर और चंबल संभाग के कलेक्टरों को पत्र लिखकर उपाय सुझाया है। उन्होंने कहा है कि आम तौर पर राष्ट्रीय पर्व पर मिलने वाली मिठाई बाजारों से खरीदी जाती है, जो खुली होती है और हाईजिनिक भी नहीं होती। ऐसे में कई बार बच्चे फूड प्वाइजनिंग का शिकार होते हैं। पत्र में कमिश्नर ग्वालियर श्री शर्मा ने कहा है कि सभी कलेक्टर इन चीजों से बचने के लिए सांची द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे पेड़ों का वितरण करवाएं।

5 टन पेड़े तैयार करेगा सांची

सांची के अधिकारियों के मुताबिक पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने ग्वालियर चंबल संभाग में साढ़े 3 टन पेड़े सप्लाई किए थे। इस बार प्रशासनिक सहयोग और मिलावट के प्रति लोगों में आई जागरूकता के चलते सांची 5 टन पेड़ों की सप्लाई का लक्ष्य मान रही है। हालांकि डिमांड अधिक होने पर यह लक्ष्य 7 टन भी पहुंच सकता है।

दरों में की है कटौती

सांची ने स्वतंत्रता दिवस पर स्कूल और कॉलेजों में सप्लाई होने वाले पेड़ों की दरों में भी कटौती की है। 15 रुपए के दो पेड़ों वाले पैकेटों को 13 रुपए में स्कूल व कॉलेजों को सप्लाई किया जाएगा। अगर थोक में पेड़े लिए जाते हैं तो सांची द्वारा 350 रुपए प्रति किलो की एमआरपी वाले पेड़े सिर्फ 305 रुपए प्रति किलो के हिसाब से स्कूल कॉलेजों को उपलब्ध कराए जाएंगे।

हर जिला मुख्यालय पर नोडल पॉइंट

वितरण के लिए डिमांड 12 तारीख तक नोट कराई जा सकती है। हम एमआरपी से कम पर यह पेड़े उपलब्ध कराएंगे। किसी को परेशानी न हो इसलिए हमने हर जिला मुख्यालय पर नोडल पॉइंट बनाया है। जहां से आर्डर वाले पेड़े संबंधित संस्थाएं उठा सकती हैं। हम स्वतंत्रता दिवस के लिए 5 टन पेड़ों की सप्लाई का लक्ष्य मान रहे हैं –

शिक्षा विभाग से डिमांड पता करेंगे

कमिश्नर ग्वालियर का पत्र मिला है। हम इस पत्र के आधार पर शिक्षा विभाग को डिमांड पता करने के लिए कह रहे हैं। जितना संभव होगा उतना सांची के पेड़े ही वितरित करवाए जाएंगे

अगर टिहरी बांध टूटा और हजारों मरे तो जिम्मेदारी मछलियों की होगी सरकार की नहीं..

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टाइटल अजीब लग रहा हो तो इस घटना पर गौर कीजिए- मुंबई से तकरीबन 250 किलोमीटर दूर रत्नागिरी जिले में तिवारे नाम का एक बांध था. 2004 में बना बांध 15 साल की सेवाओं के बाद टूट गया. कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश वह झेल नहीं पाया और ढह गया. बांध टूटने से आए जलजले में 18 लोग मर गए, 25 से ज्यादा अब भी लापता है और हजारों एकड़ की खड़ी फसल तबाह हुई उसका तो कहना ही क्या!

अब महाराष्ट्र के जल संवर्धन मंत्री तानाजी सावंत ने बयान दिया कि केकड़ों ने बांध में लीकेज ला दिया जिससे हादसा हुआ. यानी हजारों-लाखों केकड़ों ने मिलकर बांध को गिरा दिया. लेकिन तानाजी के बयान पर हंसने या गुस्सा करने से पहले एक वैधानिक और संवैधानिक तथ्य जान लीजिए. देश का बड़े से बड़ा बांध, यानी टिहरी, भांखड़ा नांगल, फरक्का, इंदिरा सागर, महाराणा प्रताप सागर आदि-इत्यादि, यदि हादसे का शिकार होता है और कितना भी जान-माल का नुकसान होता है तो जिम्मेदारी किसी की नहीं होगी.

‘किसी की नहीं’ का मतलब किसी की नहीं- केंद्र सरकार की जिम्मेदारी नहीं होगी, जिस राज्य में बांध है उसकी भी जिम्मेदारी नहीं होगी (भले ही पानी राज्य-सूची का विषय है), बांध बनाने वाले ठेकेदार या कंपनी की जबावदारी का कोई प्रावधान ही नहीं है, बांध संचालन कंपनी भी बांध टूटने पर जबावदार नहीं है और तो और पानी और नदी की सभी संस्थाओं को जोड़कर बनाए गए जलशक्ति मंत्रालय का भी बांध टूटने से कोई लेना देना नहीं है. संविधान में बांध तो छोड़िए नदी सरंक्षण का भी कोई प्रावधान नहीं है. (नीति निर्देशक तत्वों में कहा गया है कि लोग नदियों की रक्षा करें.)

तकरीबन चालीस साल पहले संसद में बांध सुरक्षा बिल लाया गया, जो आज तक यानी 2019 तक भी पास नहीं हो सका है. जिसमें प्रावधान है कि नदियों की छाती पर किए गए निर्माण की चौकसी, निरीक्षण, रखरखाव और परिचालन सही तरीके से हो और जिम्मेदारी तय की जा सके. ध्यान रहे ये प्रावधान पूरी तरह उस ढांचे की सुरक्षा के लिए है नाकि उसके दायरे में आने वाले समाज के लिए. लोगों की जान-माल और फसलों के नुकसान के मुआवजे पर कोई बात नहीं है.

बहरहाल बिल इस बार भी केंद्र और राज्य की लड़ाई में फंस कर उलझ गया. झगड़ा इस बात पर नहीं है कि बांध की सुरक्षा कौन करेगा. झगड़ा बजट और अधिकार के मुद्दे पर है. राज्यों का कहना है कि बांध उनके क्षेत्र में है इसलिए सुरक्षा बजट उन्हें दिया जाना चाहिए, यह भी आशंका है कि केंद्र बांधों पर नियंत्रण के जरिए राज्यों के अधिकारों पर कटौती करना चाहती है. बांधों की सुरक्षा के लिए जिस केंद्रीय समिति का प्रस्ताव है उसमें भी राज्यों की भूमिका ना के बराबर है. बजट और अधिकार की इस लड़ाई में नदी और नदी पथ का समाज पिस रहा है.

बजट का मुद्दा सिर्फ केंद्र और राज्यों के बीच नहीं है, यह कई राज्यों के बीच आपसी तनाव का मुद्दा भी है. क्योंकि हमारे देश में अब तक बने 10 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले 5344 बांधों में से 92 फीसद बांध अंतरराज्यीय सीमा पर बने हैं यानी बांध एक राज्य में है और नदी का निचला बहाव वाला हिस्सा दूसरे राज्य में बह रहा है. पानी पर अधिकार की यह लड़ाई सिर्फ कावेरी विवाद तक सीमित नहीं है. यह तकरीबन हर राज्य और हर नदी पर है. जल्दी ही नर्मदा के पानी को लेकर गुजरात और मध्यप्रदेश के बीच सिर फुटौव्वल की नौबत आ सकती है. नर्मदा विवाद अब तक इसलिए दबा हुआ था क्योंकि दोनों ही राज्यों में एक ही दल की सरकार थी.

विवाद वाली नदियों की एक लंबी सूची है. हर वह नदी जो दो या अधिक राज्यों में बहती है उस पर विवाद है. पानी पर अधिकार की यह लड़ाई धीरे-धीरे आलाकमान, विचारधारा और संविधान को दरकिनार कर रही है. पिछले साल दिवंगत मनोहर पर्रिकर ने आलाकमान के कहने पर घोषणा कर दी थी कि गोवा महादई नदी का पानी कर्नाटक के लिए छोड़ेगा. गोवा में विरोध हुआ और कर्नाटक में जश्न मना. पर्रिकर ने अपने कदम पीछे खींच लिए नतीजन गोवा और कर्नाटक दोनों जगह बीजेपी को चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा.

ऐसा नहीं है कि केंद्र की नीयत एकदम साफ है. पिछले साल प्रस्तावित रिवर बेसिन मैनेजमेंट बिल भी बांधों और नदियों पर केंद्रीय नियंत्रण की कोशिश का नमुना है. इस विधेयक के कानून रूप लेने के बाद जिन नदियों के लिए रिवर बेसिन अथॉरिटी का गठन किया जाना है. उनमें गंगा बेसिन,गोदावरी बेसिन, ब्रह्मपुत्र-बराक और पूर्वोत्तर की अन्य नदियों के बेसिन, महानदी बेसिन, माही बेसिन, नर्मदा बेसिन, पेन्नार बेसिन, स्वर्णरेखा बेसिन और तापी बेसिन शामिल है. बेसिन का मतलब है मुख्य धारा और उसकी सहायक नदियां और उनके किनारों पर मौजूद घाटियां, मैदान, जंगल और बसाहट. मुख्य धारा से तात्पर्य है, नदी जो समुद्र तक जाती है.

चिंता की बात यह है कि अथॉरिटी सिर्फ जल प्रबंधन और पानी के बंटवारे पर राज्यों के विवाद सुलझाने की दिशा में काम करेगी. इस बिल में नदी के पानी पर नदी के हिस्से की कोई बात नहीं है. एक तरह से यह नदी के सर्वोच्च दोहन की व्यवस्था भर प्रतीत हो रही है. दिल्ली सहित चार राज्यों में बहने वाली यमुना तकनीकी रूप से एक नदी भी नहीं रही क्योंकि उसके जल पर उसका कोई हिस्सा ही नहीं है, पूरा शत प्रतिशत जल विभिन्न सामाजिक जरूरतों के लिए राज्यों द्वारा आपस में बांट लिया गया है.

पूरे रिवर बेसिन मैनेजमेंट बिल में यह कहीं नहीं लिखा है कि नदी या बांध में हुए हादसे की वजह से प्रभावित नदी के पथ के लोगों का क्या होगा और फसल और जानवरों के डूब जाने पर मुआवजा क्या और किस दर पर दिया जाएगा.

पर्यावरणीय नुकसान के आकलन पर सरकार ने काफी पहले ही बात करना बंद कर दिया है. कई बांध अपनी उम्र सीमा पूरी कर चुके है. 293 बांधों की उम्र तो सौ साल पार हो चुकी है. इसलिए अपना इंतजाम करके रखिए ताकि कोई हादसा हो तो आप यह जानने लिए जीवित रहें कि किस मछली या केकड़े की वजह से बांध टूटा था.