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आज राजधानी में होगी भारत और साउथ अफ्रीका की भिड़ंत…

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साउथ अफ्रीका के साथ ODI सीरीज का दूसरा मुकाबला रायपुर के शहीद वीर नारायण क्रिकेट स्टेडियम में आज यानी बुधवार को खेला जाएगा।

रायपुर: रांची में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज़ के पहले वनडे में धमाकेदार शतक लगाने के बाद, विराट कोहली दूसरे वनडे के लिए टीम इंडिया के साथ रायपुर पहुँचे। साउथ अफ्रीका के साथ ODI सीरीज का दूसरा मुकाबला रायपुर के शहीद वीर नारायण क्रिकेट स्टेडियम में आज यानी बुधवार को खेला जाएगा। करीब तीन सालों के लम्बे इंतज़ार के बाद यहां कोई इंटरनेशनल मुकाबला आयोजित हो रहा है। इससे पहले जनवरी 2023 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच एक ODI रायपुर में खेला गया था। ऐसे में अब रायपुर के साथ छत्तीसगढ़ के फैन कल होने वाले मुकाबले का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे है।

साय कैबिनेट की अहम बैठक आज, अलग-अलग विभागों के प्रस्ताव पर होगी चर्चा…

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आज साय कैबिनेट की अहम बैठक होने जा रही है। साय कैबिनेट की अहम बैठक सीएम विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में होगी।

रायपुर: छत्तीसगढ़ के लिए आज का दिन काफी ज्यादा अहम है। ऐसा इसलिए क्योंकि, आज साय कैबिनेट की अहम बैठक होने जा रही है। साय कैबिनेट की अहम बैठक सीएम विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में होगी। इस बैठक में सभी मंत्री उपस्थित रहेंगे। सीएम साय की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट की बैठक महानदी भवन मंत्रालय में सुबह 11 बजे से शुरू होगी। आज यानी बुधवार को होने वाली साय कैबिनेट की इस बैठक में कई विभागों के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इतना ही नहीं साय कैबिनेट की बैठक में विधानसभा के शीतकालीन सत्र, धान खरीदी समेत अन्य कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

नवा रायपुर में डेढ़ एकड़ के कैंपस में होगा इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला का निर्माण…

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मुख्य बजट 2025-26 की एक और बड़ी घोषणा पूर्ण, 46.49 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति…

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुसार नवा रायपुर में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला सह एफडीए भवन के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने 46 करोड़ 49 लाख 45 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। मुख्य बजट 2025-26 के प्रावधान के अनुरूप इस महत्वपूर्ण परियोजना से प्रदेश में खाद्य एवं औषधि परीक्षण क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

नवीन इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला तथा नवीन एफ.डी.ए. भवन का रायपुर में स्थापना करने हेतु शासन द्वारा नया रायपुर में 1.5 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है। रायपुर स्थित वर्तमान प्रयोगशाला लगभग 5 हजार वर्ग फीट (भूतल, प्रथम एवं द्वितीय तल) में संचालित है। प्रस्तावित नवीन प्रयोगशाला अत्याधुनिक उपकरणों (ड्रग एवं इनफोर्समेंट) से सुसज्जित होगा तथा 30 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में (भूतल, प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय तल) में निर्मित होगा। इसके निर्माण से रासायनिक परीक्षणों की जांच क्षमता 500–800 नमूने प्रतिवर्ष से 7000–8000 नमूने प्रतिवर्ष हो जाएंगी। माइक्रोबायोलॉजिकल परीक्षण (इंजेक्शन, आई ड्रॉप आदि) 2000 नमूने प्रतिवर्ष होंगे, मेडिकल डिवाइसेस (हाथ के दस्ताने, कैथेटर आदि) जिनका वर्तमान में परीक्षण नहीं किया जा रहा है उनका भी 500 नमूने प्रतिवर्ष लिए जाएंगे। इसके साथ ही  फार्मास्यूटिकल्स नमूनों की जांच 50 से बढ़कर 1000 नमूने प्रतिवर्ष हो जाएंगे।

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रयोगशाला राज्य में खाद्य सुरक्षा के ढांचे को और मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि इससे जांच प्रक्रिया अधिक आसान, पारदर्शी और प्रभावी होगी। सरकार जनता को शुद्ध, प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद एवं दवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि नवा रायपुर में बनने वाली यह आधुनिक प्रयोगशाला राज्य के लिए एक आदर्श प्रयोगशाला के रूप में विकसित होगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

आदिवासी समाज के उत्थान और कल्याण के लिए छत्तीसगढ़ सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय…

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हर बेटीबेटा को शिक्षित करना ही समाज को देगा मजबूती, सामुदायिक भवन के प्रथम तल का किया लोकार्पण, सांस्कृतिक भवन सहित विभिन्न विकास कार्यों की घोषणा, कंवर समाज के वार्षिक सम्मेलन में शामिल हुए मुख्यमंत्री…

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज रायगढ़ के बोईरदादर में आयोजित अखिल भारतीय कंवर समाज के वार्षिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने समाज की मांग पर 30 लाख रुपए की लागत से निर्मित सामुदायिक भवन के प्रथम तल का लोकार्पण किया। समाज के वरिष्ठजनों ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कंवर समाज के पुरोधाओं को नमन करते हुए कहा कि समाज का विकास शिक्षा से ही संभव है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल नौकरी ही नहीं, बल्कि विभिन क्षेत्रों में सफल बनने का माध्यम भी है। हर बेटा-बेटी को शिक्षित करना ही समाज को मजबूती देगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी समाज के उत्थान और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। आदिवासियों एवं क्षेत्रों के विकास के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही है जिसका लाभ लोगों को मिल रहा है। उन्होंने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आव्हान भी किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने जनजातीय समाज के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को याद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस घोषित कर जनजातीय समुदाय के सम्मान को नई ऊंचाई दी है। उन्होंने बताया कि आदिवासी समाज को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने धरती आबा ग्राम उत्कर्ष और पीएम जनमन कार्यक्रम की शुरूआत की है। यह आदिवासी कल्याण के क्षेत्र में आजादी के बाद सबसे बड़ा अभियान है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं जनजातीय परिवारों को उपलब्ध करायी जा रही है। इन योजनाओं से जनजातीय क्षेत्रों में तेज गति से विकास हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ की रजत जयंती समारोह के अवसर पर रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक सह संग्रहालय का लोकार्पण किया है। संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के वीर सेनानियों का देश के लिए योगदान जीवंत रूप में प्रदर्शित हो रहा है। यह आने वाली पीढ़ियों को हमारे वीर नायकों के शौर्य और बलिदान से परिचित कराता रहेगा। यह हमारे आदिवासी समाज के लिए भी गौरव की बात है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे होने पर राज्य के विकास-पीडीएस प्रणाली, सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य के व्यापक विस्तार का उल्लेख करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के बाद गांव-गांव तक पहुंच मार्ग और विकास की रोशनी पहुँची है। राज्य में नक्सलवाद विकास में सबसे बड़ी बाधा रहा है, लेकिन सरकार के प्रयासों से यह अंतिम सांस ले रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य तय किया है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश की नई औद्योगिक नीति के बारे में उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक निवेश का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। हम उद्योग धंधों के माध्यम से युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास कर रहे है। इसके साथ ही हमारी सरकार प्रदेश के सभी समाज को मजबूती के साथ आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है, इसका लाभ अवश्य उठाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं, जिनमें कंवर समाज के लिए बोईरदादर रायगढ़ मे एक और सांस्कृतिक भवन के साथ मुख्य मार्ग तक सीसी रोड का निर्माण, लैलूंगा के टुरटूरा में नए समाजिक भवन, लैलूंगा और घरघोड़ा में निर्मित सामाजिक भवन के विस्तार की घोषणा की।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, लोकसभा सांसद श्री राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह, महापौर श्री जीवर्धन चौहान, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री दीपक सिदार, श्री भरत साय, श्री सत्यानंद राठिया, श्री अनंतराम पैंकरा सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

‘पाञ्चजन्य कॉनक्लेव – दंतेश्वरी डायलॉग’ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने साझा किए सुशासन के दो वर्षों के अनुभव…

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रायपुर: राजधानी नया रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिसॉर्ट में आयोजित पाञ्चजन्य कॉनक्लेव ‘दंतेश्वरी डायलॉग’ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राज्य सरकार के दो वर्ष के कार्यकाल, बस्तर एवं सरगुजा क्षेत्रों में विकास, नक्सल उन्मूलन, औद्योगिक निवेश, महिला सशक्तिकरण तथा नई टेक्नोलॉजी आधारित विकास मॉडल सहित अनेक विषयों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विभिन्न सवालों के सरल और स्पष्ट उत्तर देकर सरकार की योजनाओं और आगामी रोडमैप की जानकारी दी।

महिला सशक्तिकरण सबसे बड़ी उपलब्धि

मुख्यमंत्री ने कहा कि दो वर्षों में महतारी वंदन योजना महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम बनी है।70 लाख महिलाओं को हर महीने 1000 रुपए की सम्मान राशि दी जा रही है, जिससे परिवारों में पोषण, बच्चों की शिक्षा और घरेलू जरूरतों में सकारात्मक बदलाव आया है।

टेकड्रिवन छत्तीसगढ़नई औद्योगिक नीति में विशेष प्रावधान

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में नई उद्योग नीति लागू की गई है, जिसमे रोजगार को विशेष महत्व दिया गया है। साथ ही नई औद्योगिक नीति में निवेश को आकर्षित करने के लिए आकर्षक अनुदान,सिंगल विंडो सिस्टम,250 से अधिक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार को भी शामिल किया गया है। इसी का परिणाम है कि अभी तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। नई औद्योगिक नीति में आईटी, एआई, ग्रीन टेक व सेमीकंडक्टर जैसी नई पीढ़ी की इंडस्ट्री को प्रोत्साहन दिया गया है।नवा रायपुर को आईटी हब, सेमीकंडक्टर प्लांट, और एआई डेटा सेंटर पार्क के रूप में विकसित करने का काम जारी है।

बस्तर का विकासस्थानीय पहचान और आधुनिक अवसरों का संतुलित मॉडल

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर का विकास स्थानीय संस्कृति के संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं के संतुलन के आधार पर होगा। कृषि, सिंचाई, जैविक खेती, वनोपज प्रसंस्करण, पर्यटन और स्थानीय रोजगार पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

वनोपज संग्राहकों के लिए बेहतर सुविधा

प्रधानमंत्री वनधन योजना और वनोपज आधारित प्रसंस्करण के विस्तार से संग्राहकों की आय में वृद्धि हो रही है।

नक्सलवाद के विरुद्धसामाजिक मनोवैज्ञानिक मोड़

मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली जाकर नक्सल पीड़ितों द्वारा अपनी बात रखना ऐतिहासिक कदम है। इससे बस्तर के लोगों में बड़ा आत्मविश्वास आया और देश के सामने माओवादी हिंसा का वास्तविक चेहरा उजागर हुआ।

मतांतरण पर सख्त कार्रवाई और सांस्कृतिक सुरक्षा पर जोर

उन्होंने कहा कि प्रलोभन या दबाव से होने वाले मतांतरण रोकने के लिए लगातार कड़ी कार्रवाई हो रही है।इसके लिए विधानसभा में विधेयक लाने की भी तैयारी की जा रही है।

जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य डिजिटल कनेक्टिविटी में तेजी से सुधार

मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर और सरगुजा में मोबाइल टावरों की स्थापना, स्कूलों का पुनः संचालन और युक्तियुक्तकरण के माध्यम से शिक्षा गुणवत्ता में तेजी से वृद्धि हुई है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और सुविधाओं का विस्तार

नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, KCC कार्ड, बिजली, पानी, सड़क और अन्य सुविधाएँ तेजी से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

दो वर्षों में गारंटियों का सफल क्रियान्वयन

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित अधिकांश गारंटियाँ पूरी की जा चुकी हैं। इनमें 18 लाख आवास स्वीकृत,किसानों को बेहतर समर्थन मूल्य,महतारी वंदन योजना,तेंदूपत्ता संग्राहकों की बढ़ी हुई राशि,भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता आदि शामिल है। इसके अलावा प्रदेश में माओवाद पर निर्णायक प्रहार किया गया है।

 Bhagwat ने Modi को बताया Global Leader, कहा- जब PM बोलते हैं तो पूरी दुनिया उन्हें सुनती है”

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पुणे से लेकर अयोध्या तक हाल के दिनों में जो दृश्य सामने आए हैं उन्होंने आरएसएस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिश्तों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है। एक ओर, आरएसएस के शताब्दी कार्यक्रमों की श्रृंखला में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने खुले तौर पर प्रधानमंत्री की वैश्विक छवि की तारीफ की तो वहीं अयोध्या में राम मंदिर में ध्वजारोहण समारोह के दौरान मोदी ने भागवत को सम्मान देते हुए पीछे हटकर उन्हें आगे बढ़ने दिया।

हम आपको बता दें कि पुणे में सोमवार को आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि “जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोलते हैं, तो दुनिया के नेता ध्यान से सुनते हैं।” उन्होंने कहा कि यह बदलाव इसलिए संभव हुआ है क्योंकि भारत की ताकत “उन जगहों पर प्रकट होने लगी है जहां उसे उचित रूप से प्रकट होना चाहिए।” भागवत के भाषण में भारत की वैश्विक भूमिका पर विशेष जोर था। उनका कहना था कि जब भारत आगे बढ़ता है, तो दुनिया में संघर्ष कम होते हैं और शांति स्थापित होती है। देखा जाये तो यह कथन केवल सांस्कृतिक आत्मविश्वास नहीं, बल्कि मोदी युग की विदेश नीति के प्रति संघ की स्वीकृति का संकेत भी माना जा रहा है.

हम आपको यह भी बता दें कि पिछले सप्ताह अयोध्या में राम मंदिर में ध्वज-वंदन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक ऐसा व्यवहार प्रदर्शित किया, जो उनके सामान्य राजनीतिक व्यक्तित्व से अलग था। जब मोदी और भागवत मंदिर में प्रवेश कर रहे थे, तब प्रधानमंत्री ने एक कदम पीछे होकर भागवत को आगे बढ़ने दिया था। यह दृश्य इसलिए भी उल्लेखनीय था क्योंकि मोदी की छवि प्रायः ‘मुख्य चेहरा’ और ‘प्रमुख केंद्र’ के रूप में देखी जाती है।

धर्म ध्वज के आरोहण के समय भी मोदी ने भागवत को अपने साथ खड़ा किया और ध्वज उठाने वाले लीवर को दोनों ने एक साथ घुमाया था। यह “संघ प्रमुख को उचित सम्मान” देने का प्रयास था, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे भाजपा-संघ संबंधों में जमी धूल झाड़ने की कोशिश के रूप में देखा गया था। दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में कई मुद्दों पर भाजपा नेतृत्व और संघ के बीच असहमति की खबरें आती रही हैं- विशेषकर पार्टी अध्यक्ष के चुनाव में हो रही देरी को अक्सर इस टकराव का सूचक माना गया। पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि मोदी के इस सम्मान-संकेत को संघ नेतृत्व ने सकारात्मक रूप में लिया है और अब भाजपा में नए अध्यक्ष की नियुक्ति जल्द तय हो सकती है।

भाजपा और संघ की सार्वजनिक निकटता ऐसे समय में सामने आई है, जब संगठनात्मक और राजनीतिक स्तर पर भाजपा के लिए नए संतुलन और नए नेतृत्व-निर्णयों की जरूरत बढ़ रही है। शताब्दी वर्ष में संघ भी अपने मूल उद्देश्यों- संगठन, संवाद और राष्ट्र-निर्माण पर पुनः फोकस कर रहा है। ऐसे में मोदी और भागवत की एक ही फ्रेम में बढ़ती उपस्थिति केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाले समय के राजनीतिक समीकरणों का संकेत हो सकती है।

देखा जाये तो आरएसएस और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बढ़ती सार्वजनिक निकटता एक राजनीतिक संदेश भी है। भागवत का मोदी की वैश्विक प्रतिष्ठा का सम्मान करना और मोदी का अयोध्या में उन्हें आगे रखना और उनके प्रति विनम्रता दिखाना, दोनों संस्थाओं के लिए परस्पर निर्भरता की व्यावहारिक स्वीकृति भी है। परंतु सवाल यह है कि यह “सम्मान-डिप्लोमैसी” महज़ प्रतीक है या किसी गहरे पुनर्संतुलन का संकेत है।

पुणे के कार्यक्रम में भागवत के संबोधन की अन्य बड़ी बातों का जिक्र करें तो आपको बता दें कि भागवत ने कहा कि किसी को जयंती या शताब्दी समारोह जैसे महत्वपूर्ण अवसरों का जश्न मनाने के बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि दिए गए कार्य को निर्धारित समय के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखना चाहिए। आरएसएस प्रमुख ने कहा, “संघ यही करता आया है। संघ ने चुनौतियों का सामना करते हुए और कई तूफानों से जूझते हुए भले ही 100 साल पूरे कर लिए हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि हम आत्मचिंतन करें कि पूरे समाज को एकजुट करने के काम में इतना समय क्यों लगा।”

आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के बलिदानों पर प्रकाश डालते हुए भागवत ने कहा कि संघ के स्वयंसेवकों ने उन्हें दिए गए मिशन को पूरा करने की अपनी यात्रा कई बाधाओं और चुनौतियों के बीच शुरू की थी। उन्होंने संघ के शुरुआती महीनों और वर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि इस बात की कोई गारंटी नहीं थी कि उनके काम से सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। भागवत ने कहा, “उन्होंने (संघ के स्वयंसेवकों ने) सफलता के बीज बोए और अपना जीवन समर्पित करके परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया। हमें उनका आभारी होना चाहिए।”

सभा को एक किस्सा सुनाते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि एक बार उनसे कहा गया था कि संघ 30 साल देरी से आया है। भागवत ने कहा, “मैंने जवाब दिया कि हम देरी से नहीं आए। बल्कि, आपने हमें देरी से सुनना शुरू किया।” उन्होंने कहा कि जब संघ संवाद और सामूहिक कार्य की ताकत की बात करता है, तो इसका तात्पर्य पूरे समाज से होता है। भागवत ने कहा, “हमारी नींव विविधता में एकता में निहित है। हमें साथ मिलकर चलना होगा और इसके लिए धर्म आवश्यक है।” उन्होंने कहा, “भारत में सभी दर्शन एक ही स्रोत से उत्पन्न हुए हैं। चूंकि, सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है, इसलिए हमें सद्भाव के साथ आगे बढ़ना होगा।”

“लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ेगा विपक्ष, खड़गे का बड़ा ऐलान, मतदाता सूची मुद्दे पर गरमाई सियासत”

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संसद के बाहर संयुक्त विपक्ष द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन के दौरानराज्यसभा में विपक्ष के नेतासांसद मल्लिकार्जुनखड़गे ने कहाहम लोकतंत्र को बचाने और अन्याय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसदों ने मंगलवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, क्योंकि संसद शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन की तैयारी कर रही है।आज की संसद की कार्यवाही से पहले, इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने संसद के मकर द्वार के बाहर अपना विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

शीतकालीन सत्र के पहले दिन भी विपक्षी सदस्यों द्वारा 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही एसआईआर प्रक्रिया पर चर्चा की मांग के कारण लोकसभा की कार्यवाही कई बार दोपहर 12 बजे, दोपहर 2 बजे और बाद में स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस सांसद मणिकमटैगोर ने कहाकि इंडिया ब्लॉक ने कल सुबह फैसला किया कि हम एसआईआर और चुनाव सुधार से संबंधित मुद्दों पर चर्चा पर ज़ोर देंगे। आज सुबह 10:30 बजे, हम इसी मांग को लेकर मकर द्वार के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं। सभी सांसद संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे। टैगोर ने आगे कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर बहस चाहता है, क्योंकि यह नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़ा है।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि मैंने एजेंडा प्रस्ताव भी दिए थे, और हमें उम्मीद है कि वे स्वीकार किए जाएँगे। हम इस विषय पर बहस चाहते हैं। सरकार को इस महत्वपूर्ण मुद्दे से नहीं भागना चाहिए, क्योंकि मतदान का अधिकार दांव पर है। बिहार में 62 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। अब इसे 12 राज्यों में लागू किया गया है। बहुत से बीएलओ आत्महत्या कर रहे हैं। हम भारत के लोकतंत्र की रक्षा करना चाहते हैं। और इसके लिए हमें संसद में बहस की ज़रूरत है।

“कर्नाटक में सीएम की कुर्सी पर सस्पेंस खत्म? सिद्धारमैया ने कहा- ‘जब आलाकमान कहेगा, डीके सीएम बनेंगे'”

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कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ दूसरी नाश्ते की बैठक के बाद, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंगलवार को दोहराया कि कांग्रेस नेता एकजुट हैं और मिलकर कांग्रेस सरकार चलाएँगे।

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान के बीच, डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बारे में पूछे जाने पर, सिद्धारमैया ने कहा, “जब आलाकमान कहेगा।” मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इससे पहले उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से उनके आवास पर मुलाकात की थी, जहाँ दोनों के बीच दूसरी नाश्ते की बैठक हुई थी। अपनी पहली मुलाकात में इडली-सांभर और उपमा के बाद, डीके शिवकुमार ने पारंपरिक नाटी चिकन और इडली की गरमागरम प्लेटों के साथ सिद्धारमैया की मेज़बानी की।

सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि कोई मतभेद नहीं हैं। डीके शिवकुमार और मैं एकजुट हैं। हम सरकार चला रहे हैं। भविष्य में भी हम एकजुट होकर सरकार चलाएंगे। उन्होंने कहा कि आज डीके शिवकुमार ने मुझे नाश्ते पर बुलाया। मैं आने के लिए तैयार हो गया। आज हम दोनों ने नाश्ता किया और डीके सुरेश भी मौजूद थे… नाश्ते के बाद, हमने विधानसभा सत्र पर चर्चा की। तय हुआ कि 8 दिसंबर को सांसदों की एक बैठक बुलाई जाए। हम किसानों के मुद्दों और राज्य के अन्य मुद्दों पर चर्चा करेंगे। हम दोनों आलाकमान, खासकर राहुल, सोनिया, प्रियंका और मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा उठाए गए कदमों को स्वीकार करेंगे। अगर वे (पार्टी आलाकमान) हमें (दिल्ली) बुलाते हैं, तो हम ज़रूर जाएँगे। कल मैं केसी वेणुगोपाल से एक समारोह में मिलूँगा जहाँ हम दोनों को आमंत्रित किया गया है।

नेतृत्व संघर्ष की अटकलों को कमज़ोर करते हुए, सिद्धारमैया ने कहा कि वे हमेशा एकजुट रहे हैं। यह एकता आज कोई नई बात नहीं है; हम हमेशा से एकजुट रहे हैं। राहुल गांधी जो भी फ़ैसला लेंगे, हम उसके अनुसार काम करेंगे; यही मैंने कहा है। मुख्यमंत्री ने एमएसपी का मुद्दा उठाया और मक्का और गन्ना किसानों के लिए सरकार के समर्थन की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि मैं उनके (उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार) आवास पर नाश्ते के लिए आया हूँ। डीके शिवकुमार मेरे घर नाश्ते के लिए आए थे, और उन्होंने मुझे अपने घर नाश्ते या दोपहर के भोजन के लिए आमंत्रित किया था। इसलिए मैं आज आया, और हमने नाश्ता किया।

उन्होंने कहा कि हमने पार्टी से जुड़े मामलों पर चर्चा की। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि अगले सोमवार से विधानसभा सत्र शुरू हो रहा है। उन्होंने कहा कि वे अविश्वास प्रस्ताव लाएँगे। भाजपा और जद(एस) हमारे किसी भी फ़ैसले का विरोध करने की योजना बना रहे हैं। हमारी सरकार किसान-समर्थक है। हमने मक्का और गन्ने से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। मैंने किसानों से बात की है, और सरकार ने क़ीमत तय कर दी है। मैंने किसानों, मुर्गीपालकों और मत्स्यपालकों से भी बात की है। डी.के. शिवकुमार ने राज्य में विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की।

“पुतिन-मोदी मुलाकात में बड़ा हथियार सौदा तय? एजेंडे में Su-57 लड़ाकू जेट और S-400 सिस्टम”

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इस सप्ताह नई दिल्ली में होने वाली भारत-रूस बैठक वैश्विक स्तर पर सुर्खियों में है, क्योंकि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली वार्ता में कई अहम रक्षा सौदे शामिल होंगे.

रूस ने संकेत दिया है कि उन्नत सुखोई Su-57 फाइटर जेट और अतिरिक्त S-400 एयर डिफेंस सिस्टम पर गहन चर्चा की जाएगी. दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को और मजबूत करने के लिए रूस भारत को अत्याधुनिक तकनीक साझा करने और संयुक्त उत्पादन बढ़ाने की तैयारी में है.

सुखोई Su-57 पर फिर से तेज हुई चर्चा

रूस के क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट किया कि Su-57 फिफ्थ-जनरेशन लड़ाकू विमान भारत-रूस वार्ता का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा. उन्होंने इसे दुनिया का ‘सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमान’ बताया. पेस्कोव ने कहा कि यह मुद्दा पुतिन की भारत यात्रा के दौरान चर्चा में रहेगा, लेकिन प्रतिस्पर्धियों के कारण ज्यादा विवरण साझा नहीं किए जाएंगे. भारत लंबे समय से Su-57 जैसे अत्याधुनिक स्टील्थ जेट में दिलचस्पी दिखाता आया है.

S-400 के अतिरिक्त सिस्टमों पर भी नजर

भारत ने पहले ही रूस से पांच S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने का समझौता किया है, जिनमें से कई की आपूर्ति हो चुकी है. पुतिन-मोदी मुलाकात के दौरान अतिरिक्त सिस्टमों, अपग्रेड पैकेज और लॉजिस्टिक सपोर्ट पर चर्चा होने की संभावना है. भारत की रक्षा तैयारी में S-400 की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है, इसलिए यह सौदा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत कर सकता है.

भारत को तकनीक ट्रांसफर पर रूस का भरोसा

क्रेमलिन प्रवक्ता ने कहा कि रूस भारत को वह हर तकनीक साझा करने को तैयार है, जिसे साझा किया जा सकता है. उनके अनुसार, कई रक्षा उपकरणों का ‘संयुक्त उत्पादन’ जल्द शुरू किया जाएगा. यह संकेत भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों के अनुरूप है. इससे भारत को न केवल उन्नत सैन्य तकनीक मिलेगी, बल्कि भविष्य के प्रोजेक्ट्स में भी बड़ी बढ़त हासिल होगी.

संयुक्त उत्पादन से बढ़ेगी रणनीतिक साझेदारी

भारत और रूस पहले ही ब्रह्मोस मिसाइल जैसे सफल संयुक्त प्रोजेक्ट कर चुके हैं. दोनों देश अब फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर और अन्य रक्षा प्रणालियों के निर्माण में भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. संयुक्त उत्पादन भारत को लागत के साथ-साथ समय की भी बड़ी बचत देगा. रूस भी एशियाई बाजार में भारत की बढ़ती क्षमता का लाभ उठा सकेगा.

भारत-रूस रिश्तों की मजबूती का बड़ा संकेत

पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीति तेजी से बदल रही है. भारत और रूस दशकों से रक्षा साझेदार रहे हैं और यह बैठक उस भरोसे को और गहरा करने का संकेत देती है. Su-57 और S-400 जैसे सौदों पर आगे बढ़ने से दोनों देशों के रणनीतिक, तकनीकी और आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलेगी.

“NASA Photo: क्या रात में ‘सोने’ की तरह चमकती है हमारी पृथ्वी? अंतरिक्ष से ली गई इस अद्भुत तस्वीर ने किया हैरान”

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बचपन से हम किताबों में पढ़ते आए हैं कि अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी ‘नीली’ दिखाई देती है। लेकिन नासा (NASA) के एस्ट्रोनॉट द्वारा शेयर की गई एक ताजा तस्वीर ने इस नजरिए को बदल दिया है।

इस फोटो में हमारी धरती किसी नीले गोले जैसी नहीं, बल्कि एक सुनहरे और हरे रंग के चमकदार लिफाफे में लिपटी हुई दिख रही है। पहली नजर में यह किसी ‘फोटोशॉप’ या ‘इंस्टाग्राम फिल्टर’ का कमाल लगता है, लेकिन यह 100% असली विज्ञान है।

यह रोशनी क्या है?

इस घटना को विज्ञान की भाषा में एयरग्लो कहा जाता है। इसे समझना बहुत आसान है। क्या आपको बचपन के वो ‘रेडियम’ वाले स्टिकर्स याद हैं? जो दिन भर सूरज की रौशनी सोखते थे और रात होते ही हरे रंग में चमकने लगते थे? पृथ्वी का वायुमंडल भी ठीक ऐसा ही करता है।

दिन में सूरज की तेज अल्ट्रावॉयलेट किरणें वायुमंडल के अणुओं (Atoms) से टकराती हैं और उन्हें ऊर्जा से भर देती हैं। जब सूरज ढल जाता है, तो ये अणु उस जमा हुई ऊर्जा को ‘प्रकाश’ के रूप में धीरे-धीरे छोड़ते हैं। इसी वजह से पृथ्वी के ऊपर यह पतली सी चमकदार परत दिखाई देती है।

हरा और लाल रंग ही क्यों?

तस्वीर में दिख रहे रंग कोई जादू नहीं, बल्कि अलग-अलग कैमिकल की मौजूदगी बताते हैं। दरअसल, हरा रंग ऑक्सीजन के अणुओं के कारण है। यह परत सबसे ज्यादा चमकदार होती है। जबकि नारंगी/पीला रंग सोडियम (Sodium) की परत होती है, जो उल्कापिंडों (Meteors) के जलने से वायुमंडल में आती है। वहीं लाल रंग वायुमंडल की सबसे ऊपरी परत है, जो सूरज की गतिविधि से प्रभावित होती है।

ऑरोरा और एयरग्लो में फर्क

बहुत से लोग इसे ‘नॉर्दन लाइट्स’ समझने की गलती कर रहे हैं। यहां फर्क समझिए- ऑरोरा, असल में तब बनता है जब सूरज से आने वाले तूफानी कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं। यह सिर्फ उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों (Poles) पर दिखता है और बहुत तेज नाचता हुआ लगता है। जबकि एयरग्लो, शांत होता है और पूरी पृथ्वी पर हर वक्त मौजूद रहता है, लेकिन इतना हल्का होता है कि इसे सिर्फ अंतरिक्ष से ही साफ देखा जा सकता है।

तस्वीर किसने ली? यह तस्वीर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर मौजूद नासा के एस्ट्रोनॉट डॉन पेटिट (Don Pettit) ने ली है। डॉन अपनी बेहतरीन ‘एस्ट्रो-फोटोग्राफी’ के लिए मशहूर हैं। उन्होंने शटर स्पीड को धीमा रखकर इस रोशनी को कैमरे में कैद किया, जिसे हमारी नंगी आंखें शायद इतनी स्पष्टता से न देख पाएं।

यह तस्वीर हमें याद दिलाती है कि हमारी पृथ्वी सिर्फ एक पत्थर का टुकड़ा नहीं है। यह एक जीवित ग्रह है जिसका अपना एक ‘सुरक्षा कवच’ है। अगली बार जब आप रात में आसमान की तरफ देखें, तो याद रखिएगा… भले ही आपको न दिखे, लेकिन आपके ठीक ऊपर वायुमंडल धीरे-धीरे चमक रहा है।