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दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित के निधन पर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने शोक व्यक्त किया

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित के निधन पर शोक व्यक्त किया है। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री स्व. शीला दीक्षित का आज एस्कॉर्ट हॉस्पिटल में 81 वर्ष की उम्र मंे इलाज के दौरान निधन हो गया। वे 1998 से 2013 तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। मुख्यमंत्री ने शीला दीक्षित के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की है कि उनके परिजनों को दुख की घड़ी में शोक सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ज्ञातव्य है कि स्व. शीला दीक्षित का जन्म 31 मार्च 1938 को पंजाब प्रांत के कपूरथला में हुआ था। वे 1984 से 1989 तक उत्तरप्रदेश के कन्नौज संसदीय क्षेत्र से सांसद थीं। 

इंदौर में मिले लाल रंग के ‘दुर्लभ’ सांप का सच

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शहर के देवास नाका क्षेत्र में उस समय लोगों के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा, जब उन्होंने यहां सिंगापुर टाउनशिप के पीछे नाले के पास लाल रंग के एक सांप को रेंगते हुए देखा। लोगों को अचरज इसलिए भी हुआ क्योंकि आमतौर पर इस रंग का सांप देखने में नहीं आता। 

इस ‘दुर्लभ’ सांप को देखने के बाद किसी व्यक्ति ने इंदौर के प्राणी संग्रहालय में फोन कर दिया। वहां से लोग आए और उस सांप को पकड़कर ले गए। यह दुर्लभ सांप लोगों में कौतूहल का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर भी इस रंगीन सांप के चर्चे शुरू हो गए। इतना ही नहीं यह अफवाह भी शुरू हो गई कि इस तरह के सांप के दर्शन करने और छूने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

इस तरह आई हकीकत सामने : जब प्राणी संग्रहालय के लोगों ने इस सांप की जांच की तो पता चला है कि यह रसेल बाइपर प्रजाति का सांप है। दरअसल, किसी असामाजिक तत्व ने इस सांप पर लाल रंग डाल दिया था या फिर यह सांप किसी रंग के डिब्बे में गिर गया होगा।

इस बात को इससे भी बल मिलता है कि देवास नाका क्षेत्र में कई गोडाउन हैं, जहां आइल पेंट और अन्य तरह के रंग रखे जाते हैं। हालांकि जब इस सांप की हकीकत सामने आई तो लोगों को बचपन में पढ़ी ‘रंगा सियार’ की कहानी याद आ गई।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ : प्राणी संग्रहालय के डॉक्टर उत्तम यादव ने लाल रंग का सांप मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि यह किसी असामाजिक तत्व की हरकत हो सकती है, जिससे यह रसेल बाइपर लाल रंग का हो गया। उन्होंने इस बात को भी सिरे से नकार दिया कि इसके छूने अथवा देखने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें अंधविश्वास से ज्यादा कुछ भी नहीं हैं।

यादव ने कहा कि रसेल बाइपर की पहचान उसकी स्किन से आसानी से हो जाती है। अभी यह सांप सामान्य स्थिति में है। जब यह केंचुली छोड़ेगा तो अपने असली रूप में आ जाएगा।

बीजेपी के तीसरे सबसे ताक़तवर शख़्स बीएल संतोष कौन हैं?

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अपने कॉलेज के दिनों में वीर सावरकर को आदर्श मानने वाले बीएल संतोष अब भारतीय जनता पार्टी में तीसरे सबसे कद्दावर शख़्सियत हैं.

कहा जाता है कि उन्होंने हाल के लोक सभा चुनावों में पार्टी को मज़बूत करने के लिए पन्ना प्रमुखों और बूथ प्रमुखों की सेना तैयार की, जिसके लिए उन्हें यह इनाम दिया गया है.

राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के तौर पर उनकी नियुक्ति वैसे शख़्स की कहानी है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक साधारण प्रचारक से पार्टी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री अमित शाह और हाल में कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए गए जे पी नड्डा के बाद तीसरे सबसे बड़े पद पर पहुंच गए हैं.

कर्नाटक में बीजेपी के विधायक विश्वेश्वर हेगड़े ने बीबीसी हिंदी को बताया, “आरएसएस के ज़मीनी स्तर के कार्यकर्ताओं पर उनकी मज़बूत पकड़ की वजह से बूथ-स्तर के कार्यकर्ताओं और पन्ना प्रमुखों की फौज तैयार करने की नीति को लागू करने में मदद मिली.उन्होंने इसे पहले कर्नाटक में लागू किया और फिर राष्ट्रीय संयुक्त सचिव (संगठन) के तौर इस कॉन्सेप्ट को पूरे देश में फैलाया.”

नाम छिपाने की शर्त पर एक अन्य पार्टी नेता ने बताया, “पहले 2013 के कर्नाटक विधान सभा के चुनाव में उन्होंने बूथ-स्तर के कार्यकर्ताओं को सफलतापूर्वक तैयार किया. इसके ठीक बाद 2014 के चुनाव में भी उन्होंने ऐसा ही किया.”

बल्कि बीबीसी की एक दूसरी रिपोर्ट में संस्था के एक अधिकारी ने बताया था कि “2014 के लोक सभा चुनाव से 2019 के लोक सभा चुनाव तक बीजेपी के बूथ-स्तर के कार्यकर्ताओं की संख्या दो करोड़ से 11 करोड़ तक जा पहुंची.”

ज़मीनी स्तर पर पकड़

नाम ना छापने की शर्त पर पार्टी के एक सदस्य ने बताया, “जब भी वो राष्ट्रीय संयुक्त सचिव (संगठन) के तौर पर कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश जैसे दक्षिणी राज्यों में जाते हैं तो कभी भी दूसरे नेताओं की तरह किसी होटल या गेस्ट हाउस में नहीं रुकते. वो हमेशा संघ या पार्टी के किसी आम कार्यकर्ता के साथ रहते हैं.”

एक दूसरे बीजेपी कार्यकर्ता ने बताया, “उनकी याददाश्त बहुत अच्छी है. वो लोगों के नाम और गांवो के नाम याद रखते हैं. कर्नाटक के कई सुदूर गावों के नाम भी उन्हें पता हैं. वो खुद उनमें से कईयों में रहे भी हैं. उन्होंने संघ की विचारधारा को दूर तक पहुंचाया है और सभी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया है.”

संतोष ने कर्नाटक में दावणगेरे के बीडीटी इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है.

आरएसएस में फुल टाइम प्रचारक बनने से पहले उन्होंने पब्लिक सेक्टर की एक टेलीकम्यूनिकेशन कंपनी में करीब दो या तीन साल काम किया था.

संघ की विचारधारा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सबसे पहले कॉलेज के दिनों में नोटिस किया गया.

शायद उनका टेकनिकल बेक्रग्राउंड ही था, जिसकी मदद से वो पार्टी के लिए कर्नाटक और फिर पूरे देश में इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी आर्किटेक्चर स्थापित कर पाए.

वीर सावरकर के प्रशंसक

इंजीनियरिंग कॉलेज में उनसे एक साल सीनियर निकुंज शाह कहते हैं, “वो एक होशियार छात्र थे लेकिन वो संघ की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध भी थे. हम मॉक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने की प्रतियोगिता करते थे, जिसमें वो वीर सावरकर बना करते थे.”

विश्वेश्वर हेगड़े कहते हैं, “चीन और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर उनकी पकड़ अच्छी है. बल्कि उन्हें तो इस मसलों का विशेषज्ञ माना जाता है.”

क्या है पसंद और नापसंद

बेंगलुरु सिटी के एक पार्टी कार्यकर्ता ने कहा, “वे पार्टी के ऐसे आदमी हैं जो कट्टर संघ कार्यकर्ता और बाहर से आए कार्यकर्ता के बीच सेतु का काम करते हैं.” वैसे तो बीएल संतोष की संगठनात्मक काबिलियतों के लिए आरएसएस में उन्हें सम्मान की नजरों से देखा जाता लेकिन एक कार्यकर्ता ने बताया, “वे कठोर इंसान हैं, वे सबको विश्वास में लेने में यक़ीन नहीं करते. वे अपने फ़ैसलों को सख़्ती से लागू करने में यक़ीन रखते हैं. वे वास्तविक मायनों में टीम लीडर नहीं हैं.”

बीजेपी एक कार्यकर्ता ने पहचान छिपाने की शर्त के साथ कहा, “संतोष जिन्हें पसंद करते हैं केवल उन्हीं को बढ़ाते हैं. वे काफी सेलेक्टिव हैं. ऐसा नहीं होता तो वे बहुत पहले ही बीएस येदियुरप्पा से आगे निकल गए थे.”

संतोष का प्रभाव कर्नाटक से बाहर तब बढ़ा जब बीजेपी की यहां 2008 में सरकार बनी. उससे दो साल पहले उन्हें राज्य के संगठनात्मक सचिव बनाए गए. जल्द ही लोगों को मालूम हो गया था कि राज्य में पार्टी के तीन धड़े हैं- एक येदियुरप्पा का धड़ा था, तो दूसरा एचएन अनंत कुमार का धड़ा था और तीसरा धड़ा संतोष का था.

इसका अंदाज़ा उस वक्त भी लगा जब पार्टीन ने बेंगलुरू साउथ से अनंत कुमार की पत्नी और सामाजिक कार्यकर्ता तेजस्विनी को अंतिम समय में टिकट नहीं दिया और तेजस्वी सूर्या को उम्मीदवार बनाया गया.

येदियुरप्पा के एक समर्थक कहते हैं, “उन्हें पार्टी ने टिकट देने को भरोसा दिया था लेकिन अंतिम समय में उन्हें नामांकन दाखिल करने नहीं दिया गया.”

भविष्य की योजना

बीजेपी के अंदर यह बात मानी जाती है कि दक्षिण भारत में पार्टी को बढ़ाने वाले बीएल संतोष ही हैं. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता बताते हैं, “बीएल संतोष की मदद से पार्टी दक्षिण भारत में अपना विस्तार करना चाहती है और नड्डा जी को उत्तर भारत में लगाना चाहती है. पार्टी की कोशिश यह है कि 2019 में जहां पार्टी को जहां फायदा नहीं हुआ है वहां पार्टी को फायदा हुआ. 2024 के चुनाव में उनका इम्तिहान होगा.”

हालांकि यह माना जा रहा है कि संतोष के आने से राज्य और ज़िला स्तर तक में पुराने लोगों की जगह नए लोगों को मौका मिलेगा. एक नेता ने बताया, “फ़ैसले लेने के लिए एक नई टीम तैयार हो रही है, यह तो तय है.

धर्म के नाम पर यौन दासता का चलन

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अंजलि जब कभी दक्षिण भारत के एक शहर की गलियों में घूमती है तो वह ऐसा कोई जवाब ढूंढने अथवा बदला लेने के लिए नहीं करती है। किसी समय उसे यहां पर वेश्यावृत्ति में धकेला गया था। इस बुराई से बच कर निकली 39 वर्षीय यह महिला रायचूर में गैर कानूनी देवदासी प्रथा (जिसमें लड़कियां मंदिरों के प्रति समर्पित होती हैं और उन्हें सैक्स स्लेव बनाकर रखा जाता है) की अन्य पीड़ितों की तलाश में रहती है ताकि उन्हें सरकार की पुनर्वास योजनाओं से लाभान्वित किया जा सके। अंजलि कर्नाटक सरकार के उस पहल का हिस्सा है जिसमें मानव तस्करी की शिकार महिलाओं के लिए कार्य किया जाता है और उनकी सहायता की जाती है। अंजलि का कहना है कि देवदासी प्रथा गैर कानूनी है, इसके बावजूद यह चोरी-छिपे जारी है। अंजलि ने अपना वास्तविक नाम नहीं बताया क्योंकि उसके बच्चों को यह पता नहीं है कि एक किशोरी के तौर पर उसकी मानव तस्करी की गई थी।

एक समुदाय नेता और तारस की सदस्य (महिलाओं का संगठन जो 12 राज्यों में काम करता है) ने बताया कि इस प्रथा के गैर कानूनी होने के कारण इसकी शिकार महिलाएं सामने आने से डरती हैं। उन्हें यह डर होता है कि उन्हें पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।देशभर में कई राज्य सरकारें सर्वाइवर नैटवर्क तथा सामुदायिक समूहों की मदद से ऐसी महिलाओं की पहचान करने और उनकी सहायता के लिए कार्य कर रही हैं। इस तरह के मामलों में बच निकली महिलाओं को न केवल यह पता होता है कि पीड़ित महिलाएं कहां मिल सकती हैं बल्कि वे इस समस्या और शर्म से बाहर आने में अधिकारियों की काफी मदद कर सकती हैं। इस प्रथा से पीड़ित महिलाओं और राज्य सरकारों के बीच विश्वास बहाल करने के लिए समुदाय आधारित बचाव प्रयासों तथा मोबाइल एप्स का सहारा लिया जा रहा है।

2016 में मानव तस्करी से देशभर में 23,100 लोगों जिनमें 60 प्रतिशत बच्चे हैं, को बचाया गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले साल के मुकाबले यह आंकड़ा काफी अधिक है। मानव तस्करी के मामलों को देखने वाली चैरिटी संस्थाओं का मानना है कि वास्तविक संख्या काफी अधिक हो सकती है तथा प्रदेश सरकारें और अधिक पीड़ितों का पता लगाने का प्रयास कर रही हैं। भारत सरकार की ओर से मानव तस्करी से बचाए गए लोगों के लिए कई प्रकार की पुनर्वास योजनाएं शुरू की गई हैं जिसके तहत उनकी काऊंसलिंग करने के अलावा उन्हें भूमि देने तथा बुनाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बावजूद कम ही लोगों को इसका लाभ मिल पाता है। अधिकतर सर्वाइवर्स को अधिकारों के बारे में जानकारी नहीं होती है तथा वे किसी चैरिटी या वकील के बिना सहायता का लाभ नहीं उठा पाते हैं।

राज्य सरकारों की ओर से समय-समय पर सर्वाइवर्स की पहचान की जाती है और इनकी संख्या कागजों में दर्ज की जाती है लेकिन कई बार जब वे वापस अपने गांव लौट जाती हैं तो उनका पता लगाना मुश्किल होता है। कर्नाटक जैसे राज्य में अंजलि जैसे लोग पीड़ितों के पुनर्वास की देखरेख करने में सरकार की सहायता कर रहे हैं। कर्नाटक राज्य महिला विकास निगम की प्रबंध निदेशक वसुंधरा देवी का कहना है कि पीड़ितों के बचाव का यह सिस्टम काफी अच्छा है।

इसी प्रकार पड़ोसी राज्य तेलंगाना में राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी मानव तस्करी से बचाई गई महिलाओं के स्वास्थ्य पर नजर रखती है। जन सेवक अन्ना प्रसन्ना कुमारी का कहना है कि इस तरह के मामलों में पीड़ित महिलाएं सरकार को कुछ जानकारी देने में कतराती हैं लेकिन अपनी पुरानी साथियों को जानकारी दे देती हैं। कुमारी ने बताया कि दक्षिणी तेलंगाना के पांच जिलों में ट्रायल के आधार पर एक मोबाइल एप्प शुरू की गई है जिसकी सहायता से देवदासियों के स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है। बंगाल में उत्थान नामक मोबाइल एप्प के जरिए मानव तस्करी की शिकार महिलाओं का पुनर्वास किया जा रहा है। इस एप्प के जरिए यह देखा जाता है कि सरकारी अधिकारी इन मामलों में कितने संवेदनशील और कुशल हैं।

2018 में शुरू हुई इस योजना के तहत मिलने वाली फीडबैक को वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा जाता है। इस एप्प का इस्तेमाल करने वाली सर्वाइवर्स का कहना है कि इसके जरिए उन्हें तेजी से सहायता उपलब्ध हुई है। मानव तस्करी विरोधी चैरिटी संजोग की मनोवैज्ञानिक पॉम्पी बनर्जी का कहना है कि इस एप्प की सहायता से नीति निर्माताओं, सर्वाइवर और अधिकारियों के बीच संवाद कायम करने में सहायता मिलती है। मानव तस्करी विरोधी चैरिटीज के अनुसार सर्वाइवर नैटवर्क विभिन्न राज्यों में फैला हुआ है। रिलीज्ड बोंडिड लेबरर्स एसोसिएशन अन्य लोगों को दासता से मुक्त करवाने, बंधुआ मजदूरी में फंसे पीड़ितों की पहचान करने, पुलिस को इस बारे में बताने तथा बचाव अभियान में भाग लेने का काम करती है। सरकारी अधिकारियों ने अब इस तरह के नैटवक्र्स के महत्व को समझना शुरू कर दिया है।

अंजलि के लिए देवदासी प्रथा में झोंकी गई महिलाओं का पता लगाना आसान है हालांकि मानव तस्कर अपने तौर-तरीके बदलते रहते हैं। उन्होंने बताया, ”लोग लड़कियों को छुपा कर रखते हैं और उनके गले में माला नहीं डालते हैं जिससे यह पता चलता है कि वे समॢपत हैं।” पारम्परिक तौर पर ऐसी पीड़ित महिलाओं को नैकलेस पहनाया जाता है। ”लेकिन मैं जानती हूं क्योंकि मैं कुछ ऐसे संकेतों को पहचान सकती हूं जिन्हें सरकारी अधिकारी नहीं पहचान सकते। मैं चुपके से उनका दरवाजा खटखटाती हूं और सच्चाई धीरे-धीरे बाहर आ जाती है। इसके बाद मैं उन्हें बताती हूं कि उन्हें कैसे और कहां से सहायता मिल सकती है।

PM मोदी के नए प्राइवेट सेक्रेटरी बनें विवेक कुमार , जानें उनके बारे में सब कुछ

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भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी विवेक कुमार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निजी सचिव नियुक्त किया गया है। शुक्रवार को इस मामले में आदेश जारी किया गया हैं। विवेक कुमार अभी भी प्रधानमंत्री कार्यालय में ही बतौर कार्यरत हैं। विवेक कुमार 2004 बैच के आईएफएस ऑफिसर हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में निदेशक थे। साल 2014 में बतौर डिप्टी सेक्रेटरी उनकी नियुक्ति पीएमओ में हुई थी।

शुक्रवार को प्रधानमंत्री की अगुवाई वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने विवेक कुमार की नियुक्ति को मंजूरी दी थी। विवेक कुमार का बतौर पीएम मोदी निजी सचिव के तौर पर नाम सामने आने के बाद लोगों की दिलचस्पी उनके बारे में जानने की बढ़ गई है। आईए हम आपको बताते हैं कि कौन है विवेक कुमार? आईएफएस बनने से पहले विवेक कुमार ने आईआईटी बॉम्बे से साल 1998- 2002 में केमिकल इंजीनियनिंग की पढ़ाई की थी।

रूस और ऑस्ट्रेलिया में दे चुके हैं अपनी सेवाएं

इसके बाद उन्होंने सिविल सर्विसेज का एग्जाम पास किया और भारत सरकार की विदेश सेवा में आ गए। महज 38 साल की उम्र में एक अफसर विवेक रूस और ऑस्ट्रेलिया में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। विवेक कुमार के लिंक्डइन और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनका जन्म सितंबर 1981 में हुआ था। बीटेक के बाद विवेक बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर के तौर पर एक टेलीकॉम सॉफ्टवेयर स्टार्टअप में काम कर चुके हैं।

उनकी छवि एक बेहतरीन अफसर की मानी जाती है

पीएम मोदी के निजी सचिव बनने से पहले विवेक कुमार बीते करीब पांच साल दिसंबर 2014 से वो पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) में डायरेक्टर के पद पर थे। उन्होंने विदेश मंत्रालय में डिप्टी चीफ ऑफ प्रोटोकॉल के तौर पर जुलाई 2013 से दिसंबर 2016 तक काम किया है। मोदी सरकार में उनकी छवि एक बेहतरीन अफसर की मानी जाती है।

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का 81 वर्ष की उम्र में निधन

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राजधानी दिल्ली से एक बड़ी खबर है। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस की दिग्गज नेता शीला दीक्षित का निधन हो गया है। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि उन्हें शुक्रवार सुबह सीने में जकड़न की शिकायत के बाद एस्कार्ट्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शीला दीक्षित 81 साल की थीं। वो 1998 से लेकर 2013 तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं।

शीला दीक्षित की तबियत कुछ वक्त से ठीक नहीं थी। उन्होंने दिल्ली के एस्कार्ट अस्पताल में दोपहर 3 बजकर 55 मिनट पर अंतिम सांस ली। मौजूदा वक्त में उनके पास कांग्रेस के दिल्ली अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी थी। हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में वो उत्तर पूर्वी दिल्ली से चुनाव भी लड़ीं थी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

कांग्रेस की कद्दावर नेता थीं शीला दीक्षित

शीला दीक्षित का नाम कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शामिल था। वो 15 सालों तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। शीला दीक्षित की सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे लेकिन उनके विरोधी भी वर्तमान दिल्ली के निर्माण में उनकी भूमिका को सराहते हैं। शीला दीक्षित के निधन पर पूरे देश के नेता उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

दिन में दो बार दो चम्मच खाएं दही, जानिए इसके चौका देने वाले फायदे.

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आप जानते हैं कि एक कटोरी ताजा दही आपकी आधी बीमारियों को दूर कर देती है। दही खाने के कई फायदे हैं। दही एक तरह की प्रोबायोटिक है जो पेट और पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं में काफी फायदेमंद होती है। दही खाने से गैस नहीं बनती.

दही एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जिसे आप स्नैक की तरह भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं. इसमें चिया सीड्स, सूरजमुखी के बीज और कद्दू के बीज मिलाकर शाम के समय ले सकते हैं. लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं केवल दो चम्मच दही के चौकाने वाले फायदे. इसे अगर आप दिन में दो बार लेंगे तो सेहत के लिए काफी फायदेमंद रहेगी. कब्ज और पेट में गर्मी रहने की समस्या भी इसके सेवन से खत्म होगी. आइए जानते हैं कैसे.

हफ्ते में अगर आप दो बार अपनी डाइट में दही को शामिल कर रहे हैं तो इससे ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है और हीट स्ट्रोक और दिल से संबंधित बीमारियों के होने का खतरा भी कम होता है. अमेरिकन जरनल ऑफ हाइपरटेंशन में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक व्यक्ति के कार्डियोवसकुलर हेल्थ के लिए दही एक अच्छा खाद्य पदार्थ साबित है. हेल्थ के लिए फर्मेंटेड डेरी प्रोडक्ट्स काफी अच्छे माने गए हैं. अगर आप दही का सेवन करते हैं तो इसे खाने से महिलाओं में करीब 30 प्रतिशत और पुरुषों में करीब 19 प्रतिशत तक हार्ट अटैक का खतरा कम होता है.

जो लोग हाइपरटेंशन की समस्या से जूझ रहे हैं वे अगर रोज अपनी डाइट में दो बार दही शामिल करते हैं तो उनमें कार्डियोवसकुलर बीमारी होने का खतरा कम होता है. तो इन गर्मियों खुद को हेल्दी रखना चाहते हैं तो अपनी डाइट में दही शामिल करना न भूलें. आप इसे स्मूदी के रूप में भी ले सकते हैं. फलों के साथ दही का कॉम्बिनेशन काफी अच्छा विकल्प है, गर्मियों में.

सफेद बालों को जड़ से काला करने व झड़ने से रोकने के लिए बेमिसाल है लौकी का रस.

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लौकी स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। इसका दूसरा नाम कद्दू व काशीफल भी है। इसका इस्तेमाल अक्सर सब्जी, बर्फी व रायता बनाने के लिए किया जाता है। आयुर्वेद के जानकारों के मुताबिक लौकी में बहुत सारे लाभकारी तत्व मौजूद होते हैं। इसलिए इसे ज्यादा पकाने से बचना चाहिये क्योंकि ये तत्व पूरी तरह खत्म हो जाते हैं। लौकी के सेवन की सलाह कई तरह की बीमारियों में दी जाती है। लौकी खाने के फायदे ऐसे हैं कि आप भी खाने लगेंगे।

सुबह एक ग्लास लौकी का जूस पीना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इससे बालों का असमय सफेद होने की दिक्कत से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। भागदौड़ भरी जिदंगी में काम के तनाव से बच पाना बहुत मुश्किल है। साथ ही खराब खानपान इसे विल्कुल दोगुना कर देती है। लौकी में मौजूद पानी की मात्रा शरीर को तरोताजा रखने का काम करती है, जिससे तनाव में बहुत राहत मिलती है, कई सारे न्यूट्रियेंट्स शरीर को अंदरूनी रूप से बहुत ताकत देते हैं, जिससे तनाव और चिंता जैसी परेशानियों से बहुत राहत मिलती है।

कब्ज जैसी समस्या से जूझ रहे मरीजों के लिए लौकी खाना बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होता है, क्योंकि इसमे मौजूद फाइबर पेट की अंदरूनी सफाई करता है। साथ ही एसिडिटी की प्राब्लम होने पर लौकी का जूस पीना बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होता है। लौकी खा कर शरीर को ठंडा रखा जा सकता है। साथ ही इसका जूस पेशाब करते समय हो रहे जलन की समस्या को भी बहुत दूर करता है। लौकी का जूस पेट की अंदरूनी सफाई करता हैं, जिससे चेहरे पर धूप, धूल और पोल्यूशन से होने वेल कील-मुहांसे से बहुत जल्द छुटकारा मिलता है। साथ ही त्वचा खूबसूरत और कोमल भी बनी रहती है।

क्‍या आप जानते हैं कि गर्भनिरोधक का काम करती है ये पत्ती.

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भारतीय उपमहाद्वीप के शुष्क व अर्द्ध शुष्क जलवायु क्षेत्रों में होने वाला नीम का वृक्ष अनेक औषधीय गुणों की खान है। विज्ञान की भाषा में एजाडिरेक्टा इंडिका नाम से जाना जाने वाला यह वृक्ष मैलिएसी जाति का है तथा भारत के अतिरिक्त यह दक्षिण−पूर्व एशिया, मध्य अमेरिका, अफ्रीका, फिजी, मारीशस, अरब, फिलीपीन्स तथा कई अन्य देशों में भी पाया जाता है। नीम के सभी अंग अर्थात् पत्ते, फूल, फल, छाल, शाखाएं आदि औषधि के रूप में प्रयोग किए जाते हैं। नीम के फल से बीज निकलता है जिससे तेल मिलता है। नीम के तने से गोंद मिलता है। ये भी दवा के रूप में प्रयोग किए जाते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार नीम हल्का, कटु−तिक्त, कषाय शीतल होता है जो तीन प्रकार के दोषों अर्थात पात, पित्त और कफ संबंधी विकारों का नाश करता है। यह कब्ज मलेरिया, पीलिया, कुष्ठ प्रदर, सिर दर्द, दांत संबंधी रोगों और त्वचा रोगों में गुणकारी होता है। यह बहुत ही अच्छा रक्तशोधक तथा कीटाणुनाशक होता है। यूनानी चिकित्सा पद्धति के अनुसार नीम की तासीर बहुत गर्म तथा खुश्क होती है। उपदंश और कुष्ठ के उपचार के लिए इसे सर्वोत्तम औषधि माना गया है। होम्योपैथी के अनुसार पुराने जीर्ण रोगों के लिए सबसे अच्छी दवा नीम है। नीम का तेल जोकि गंध व स्वाद में कड़वा होता है प्रथम श्रेणी की कीटाणुनाशक होता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार यह दुर्गन्धनाशक, वातहर तथा शीतपित्त, कुष्ठ तथा पायरिया जैसे रोगों में बहुत लाभकारी होता है। नीम एक अच्छा गर्भनिरोधक भी माना जाता है। बवासीर जैसे कष्टकारी रोग के इलाज के लिए नीम तथा कनेर के पत्ते बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण को प्रभावित भाग पर लगाने से कष्ट कम होता है। नीम के पत्तों तथा मूंग दाल को मिलाकर पीस कर बिना मसाले डाले तलकर खाने से भी इस रोग में आराम मिलता है। इस दौरान रोगी के भोजन में छाछ व चावल का समावेश भी करें। मसालों का प्रयोग बहुत कम यदि सम्भव हो तो बिल्कुल न करें। रोज सुबह निबोरियों का सेवन करने से भी आराम मिलता है।

प्रभावित अंग पर नीम का तेल भी लगाया जा सकता है। बुखार या मलेरिया होने पर नीम का काढ़ा दिया जा सकता है। इस काढ़े को बनाने के लिए एक गिलास पानी में नीम के पत्ते, निम्बोली, काली मिर्च, तुलसी, सोंठ, चिरायता बराबर मात्रा में डालकर उबालें। इस मिश्रण को इतनी देर उबालें जिससे कि आधा पानी वाष्प बनकर उड़ जाए। बाद में इस मिश्रण को छानकर रोगी को दिन में तीन बार एक−दो चम्मच पिलाएं। नीम के पत्तों और उसकी अंतर छाल का चूर्ण भी विषम ज्वर में फायदा पहुंचाता है। मलेरिया में नीम की पत्तियों को फिटकरी तथा पानी के साथ मिलाकर गोली के रूप में बुखार के एक घंटा पहले तथा एक घंटा बाद में दें।

इससे भी मलेरिया ठीक हो जाता है। दांतों तथा मसूढ़ों के रोगों के उपचार में नीम से बनी दातुन का कोई सानी नहीं है। नीम की पत्तियों को उबाल कर ठंडा करके चबाने से पायरिया में आराम मिलता है। नीम के फूल के काढ़े से गरारे करने और नीम की दातुन का प्रयोग करने से हम दांत और मसूढ़ों से संबंधित रोगों से बच सकते हैं। पथरी की समस्या से निपटने के लिए लगभग 150 ग्राम नीम की पत्तियों को 21 लीटर पानी में पीसकर उबालें और पी लें इससे पथरी निकल सकती है। पथरी यदि गुर्दे में है तो नीम के पत्तों की राख की लगभग 2 ग्राम मात्रा प्रतिदिन पानी के साथ लेने से लाभ मिलता है।

नीम की पत्तियों को सरसों के तेल में जलाने के बाद हल्दी डालकर दुबारा जलाएं बाद में इसे छानकर शहद मिलाकर रख लें। रात को सोते समय इस मिश्रण की एक−दो बूंद लेने से कान का बहना रुकता है। गुनगुने नीम के तेल की दो−तीन बूंदें कान में टपकाने से कान के दर्द में राहत मिलती है। पेट संबंधी अनेक समस्याओं से निजात पाने में भी नीम सहायक होता है। नीम के फूलों को गर्म पानी में मसलकर व छानकर सोते समय पीने से कब्ज दूर होती है। नीम की पत्तियों को सुखाकर शक्कर मिलाकर खाने से दस्त में आराम मिलता है। पेट के कीड़ों को नष्ट करने के लिए नीम के पत्तों के रस में शहद और काली मिर्च मिलाकर दिया जाना चाहिए।

पेचिस होने की स्थिति में नीम की भुनी हुई अतर छाल का चूर्ण दही में मिलाकर लेना चाहिए। जुकाम होने पर नीम की पत्तियां काली मिर्च के साथ पीसकर गोलियां बना लें। गर्म पानी के साथ ये तीन−चार गोलियां खाने से जुकाम ठीक हो जाता है। नीम के पत्ते, छाल और निम्बोली को बराबर मात्रा में मिलाकर पीसने से बने लेप से त्वचा पर होने वाले फोड़े−फुसियां तथा घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं। इस लेप को दिन में कम से कम तीन बार प्रभावित हिस्से पर लगाना चाहिए। नीम के पत्तों को दही में पीसकर लगाने से दाद ठीक हो जाते हैं। बेवची एक अन्य त्वचा रोग है जो घुटनों व टखनों के बीच पैर पर होता है। एग्जीमा की तरह इसमें जलन और खुजली होती है।

इसमें नीम का रस या नीम की पत्तियों की राख लगाने से राहत मिलती है। रक्त को शुद्ध करने के लिए नीम के फूलों का चूर्ण आधा−आधा चम्मच सुबह शाम लेना चाहिए। दोपहर में लगभग दो चम्मच नीम के पत्तों का रस भी लें। त्वचा संबंधी रोगों में इससे आश्चर्यजनक लाभ मिलता है। कुष्ठ जैसे कष्टकारी रोगों की चिकित्सा भी नीम द्वारा संभव हैं इसके लिए नीम के सूखे पत्तों तथा हरड़ को बराबर मात्रा में मिलाकर व पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की एक चम्मच मात्रा सुबह शाम चार−छह हफ्ते तक लेने से लाभ होता है।

नीम की कोपलों के रस में मिश्री मिलाकर सुबह−शाम पीने से गर्मी में राहत मिलती है। नीम की पत्तियों का तेल हथेलियों और तलवों पर लगाने से उनकी जलन दूर होती है। गर्मी के प्रभाव के कारण अमाशय में विकृति आने पर पानी में नीम का रस मिलाकर पीना चाहिए। पित्ताशय से आंत में पहुंचने वाले पित्त में रुकावट आने से पीलिया होता है। ऐसे में रोगी को नीम के पत्तों के रस में सोंठ का चूर्ण मिलाकर देना चाहिए। इस दौरान रोगी को मात्र दही चावल ही खाने दें। कई दिनों तक बुखार रहने या भारी भोजन करने से प्लीहा यकृत के बढ़ने की शिकायत हो सकती है।

ऐसे में नीम के पत्तों का चूर्ण पानी के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है। नीम के तेल को गर्म करके मालिश करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। वे लोग जो गठिया रोग से पीड़ित हैं उनके लिए भी यह लाभदायक होता है। नीम के उपयोगों की फेहरिस्त बहुत ही लंबी है। जिसका पूर्ण वर्णन शायद संभव ही नहीं है। हालांकि नीम के अनेक फायदे हैं परन्तु रूक्ष प्रकृति वाले व्यक्ति तथा वे व्यक्ति जिनकी कामशक्ति निर्बल हो, को नीम के अधिक सेवन से बचना चाहिए क्योंकि यह उनके लिए हानिकारक हो सकता है।

यूपी-बिहार समेत 6 राज्‍यों को मिले नए राज्‍यपाल, यहां जानिये किसे मिली जिम्‍मेदारी

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राष्‍ट्रपति के प्रेस सेक्रेटरी अशोक मलिक की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक आनंदीबेन पटेल को उत्‍तर प्रदेश का नया राज्‍यपाल नियुक्‍त किया गया है.

राज्‍यपालों की नियुक्ति को लेकर शनिवार को बड़ा फैसला लिया गया है. राष्‍ट्रपति के प्रेस सेक्रेटरी अशोक मलिक की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक आनंदीबेन पटेल को उत्‍तर प्रदेश का नया राज्‍यपाल नियुक्‍त किया गया है. वह अब तक मध्‍य प्रदेश की राज्‍यपाल थीं. इसके अलावा बिहार के मौजूदा राज्‍यपाल लालजी टंडन को मध्‍य प्रदेश का नया राज्‍यपाल बनाया गया है.

राष्‍ट्रपति भवन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक जगदीप धानकड़ को पश्चिम बंगाल का नया राज्‍यपाल बनाया गया है. रमेश बैस को त्रिपुरा के राज्‍यपाल की जिम्‍मेदारी दी गई है. फागू चौहान को बिहार का नया राज्‍यपाल बनाया गया है. वहीं आरएन रवि को नगालैंड का राज्‍यपाल नियुक्‍त किया गया है. राष्‍ट्रपति भवन की ओर से कहा गया है कि इन सभी राज्‍यपालों की नियुक्ति उसी दिन से मान्‍य हो जाएगी, जिस दिन वे अपने ऑफिस का कार्यभार संभाल लेंगे.

बता दें कि इसी महीने 15 जुलाई को मोदी सरकार में मंत्री रहे कलराज मिश्र को राष्‍ट्रपति ने हिमाचल प्रदेश का राज्‍यपाल नियुक्‍त किया था. वहीं दूसरी तरफ हिमाचल प्रदेश के गवर्नर आचार्य देवव्रत का स्‍थानांतरण कर गुजरात का राज्‍यपाल बनाया गया है. 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार के लगातार दूसरी बार सत्‍ता में आने के बाद राज्‍यपाल के पद पर इस तरह की यह पहली बड़ी नियुक्ति थी.