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CPI, NCP और TMC खो सकती हैं राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा

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हालिया लोकसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन न होने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), तृणमूल कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) राष्ट्रीय दल का अपना दर्जा खो सकती हैं।

सूत्रों ने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा आगामी दिनों में इन राजनीतिक दलों को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किए जाने की संभावना है जिसमें पूछा जाएगा कि क्यों न उनका राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खत्म कर दिया जाए।

भाकपा, बसपा और राकांपा 2014 के लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद भी राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खोने के संकट का सामना कर रही थीं। हालांकि, उन्हें 2016 में तब राहत मिल गई जब निर्वाचन आयोग ने अपने नियमों में संशोधन करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय और राज्य स्तर के दर्जे की समीक्षा पांच साल की जगह हर 10 साल के अंतराल पर की जाएगी।

बसपा के पास वर्तमान में 10 लोकसभा सीट और कुछ विधानसभा सीट हैं, इसलिए अब उसके सामने राष्ट्रीय दल का दर्जा खोने का संकट नहीं है।

निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के तहत किसी राजनीतिक दल को तब राष्ट्रीय स्तर का दल माना जाता है जब उसके उम्मीदवार लोकसभा या विधानसभा चुनाव में चार या अधिक राज्यों में कम से कम छह प्रतिशत वोट हासिल करें। इसके अलावा लोकसभा में उसके कम से कम चार सांसद हों।

इसके पास कुल लोकसभा सीटों की कम से कम दो प्रतिशत सीट होनी चाहिए और इसके उम्मीदवार कम से कम तीन राज्यों से आने चाहिए।

रिषी कपूर ने यूं बयां की आपबीती, कैंसर की बीमारी से फ्री हुए

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काफी दिनों से कैंसर की बीमारी से लड़ रहे बॉलीवुड एक्टर रिषी कपूर अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं। बीते साल रिषी कपूर अपनी पत्नी नीतू सिंह के साथ न्यूयार्क गए तो उनके बीमार होने की खबरें चर्चा का केंद्र बन गई थी। अब अगर एक रिपोर्ट की माने तो वह कैंसर से मुक्त हो चुके हैं। हालांकि उनकी पोस्ट कैंसर केयर अभी जारी है। हाल ही में यह भी खबर आई थी कि वह इस साल अगस्त तक वापस आ जाएंगे।

हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि एक साल तक इस बीमारी से जूझने के लिए उन्होंने कितना संघर्ष किया है। शुरुआत में उनका वजन 26 किलो कम हो गया था, क्योंकि उन्हें भूख नहीं लगती थी और वह कुछ खा नहीं पाते थे। ऋषि ने इस बात की पुष्टि की कि यह दौर लगभग गुजर चुका है और उन्होंने ठीक होने के बाद 8 किलो वेट भी गेन कर लिया है।वह बताते हैं कि वह अब ठीक हैं और सब दुआओं का असर है।

उन्होंने बताया कि कैंसर के इलाज में दिक्कत नहीं बल्कि इसके रिऐक्शन टाइम में है। उन्होंने यह भी बताया कि वे न्यू यॉर्क में दिन गिन रहे हैं और घर की याद आ रही है। कैंसर को मात देने के लिए सोनाली बेंद्रे ने कटवाए बाल रिषी ने बताया कि यह कठिन समय रहा है लेकिन नीतू सिंह और उनके बच्चों ने बहुत साथ दिया। उन्होंने बताया कि कीमोथेरपी करानी होगी ताकि मर्ज वापस न आए और वह उम्मीद कर रहे हैं कि सितंबर में अपने बर्थडे से पहले वह वापस भारत आ जाएंगे।

300 हथियारबंद लोग 30 ट्रैक्‍टरों में भरकर आये, बिछा दिया लाशों का ढ़ेर

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उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के उभभा गांव में आज सुबह अचानक करीब 30 ट्रैक्‍टर- ट्राली घुस आई जिनमें 300 के आस-पास लोग सवार थे। और उन सभी के हाथ में डंडे, हंसिया, कट्टे और बंदूको जैसे हथियार थे। गांव मे मौजूद सभी व्यक्तियों को लगा कि ये सभी किसी कार्यक्रम के लिए इकट्ठा हुए हैं।

परन्तु कुछ ही देर बार वे सभी लोग सीधे गांव की एक 90 बीघा जमीन पर गए और तुरंत पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली। सके बाद जमीन के मालिक को पता लगने पर वह भी अपने अनेक समर्थकों के साथ मौके पर पहुंच गया।

जिसके बाद दोनोगुटों में जमकर बहस हुई और फिर यही बहस झगड़े में तब्दील हो गई।

एक समय पर झगड़ा इतना आगे पंहुच गया कि बंदूकों से ताबड़तोड़ फायरिंग होने लगी और कुछ ही देर में गांव में चारों तरफ लाशें इकठ्ठी गईं। यह देखकर वहां मौजूद सभी लोग अपनी जान की सलामती के लिए भागे और कुछ घरों में छिप गए।

आपको बता दें कि इस जमीनी विवाद के लिए हुए झगड़े में 9 लोगों की मौके पर मृत्यु हो गई है ईनमें 6 पुरुष और 3 महिलाएं शामिल हैं। वहीं अन्य कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इनमें से दो व्यक्तियों को वाराणसी अस्पताल में रेफर किया गया है।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो लोगों को हिरासत में ले लिया है। और अन्य आरोपीयों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन भी चलाया जा रहा है। इस मामले में दोनों ग्राम प्रधान के भतीजों को अरेस्ट किया गया है।

जानिए प्रधानमंत्री की गुफा का एक दिन का खर्च जान कर आप हो जाएंगे हैरान

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मंडल विकास निगम आपसे प्रतिदिन 990 रुपये किराया लेगा। इसके साथ ही यह भी बता दें कि कोई भी पर्यटक गुफा को 3 दिन से ज्यादा समय के लिए बुक नहीं करवा सकता।

इसके लिए आपको शारीरिक तौर पर पूरी तरह से स्वस्थ होना पड़ेगा। मेडिकल जांच के बाद ही आपको इस चट्टानी रूम में योग-ध्यान करने के लिए अनुमति मिलेगी। ध्यान चट्टानी रूम की बुकिंग कराने वालों के लिए गुप्तकाशी में मेडिकल कराने की सुविधा मुहैया कराई है। अगर आप इस चट्टानी रूम में योग-ध्यान करना चाहते हैं तो आपको ऑनलाइन बुकिंग के बाद यात्रा से दो दिन पहले ही गुप्तकाशी में मेडिकल जांच करानी होगी।

इस चट्टानी रूम का नाम रुद्र मेडिटेशन केव रखा गया है। इसे पहाड़ पर चट्टानें काटकर बनाया गया है। इस चट्टानी रूम के निर्माण में साढ़े 8 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। बता दें कि खास तौर पर प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री के आगमन के लिए यहां CCTV लगाया गया था। प्रधानमंत्री के आने से पहले चट्टानी रूम के बाहर कैंप लगाकर कई सुरक्षा गार्ड्स की व्यवस्था भी करवाई गई।

5 मीटर लंबी और 3 मीटर चौड़ी यह चट्टानी रूम 3583 मीटर यानि करीब 12 हजार फिट की ऊंचाई पर है। बता दें कि इस चट्टानी रूम को खास तौर पर पर्यटकों के लिए ही बनाया गया है। वैसे तो चट्टानी रूम पिछले साल ही बनकर तैयार हो गई थी, लेकिन इसे बुकिंग कम ही मिल रही थीं। अब उम्मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री के योग-साधना के बाद यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।

अगर जूझ रही है पीरियड की समस्या से तो बस करें इस पत्ती का सेवन.

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अशोक के वृक्ष से तो हम सभी परिचित हैं। अकसर इस वृक्ष को सजावट के लिए लगाया जाता है। 25 से 30 फुट ऊंचा यह वृक्ष आम के वृक्ष की तरह सदा हरा−भरा रहता है। संस्कृत में इसे हेमपुष्प ताम्र पल्लव आदि नामों से पुकारते हैं। यूं तो फारबीएसी जाति का यह वृक्ष देखने में सुदंर होता है साथ ही इसमें दिव्य औषधीय गुण भी होते हैं। अभी तक अशोक की दो किस्में ज्ञात हैं। पहले किस्म के अशोक की पत्तियां रामफल के वृक्ष जैसी तथा दूसरे किस्म के अशोक की पत्तियां आम की पत्तियों जैसी परन्तु किनारों पर लहरदार होती हैं। औषधीय प्रयोग के लिए ज्यादातर इसकी पहली किस्म का ही प्रयोग किया जाता है। दवा के रूप में अशोक की छाल, फूल तथा बीजों आदि का प्रयोग किया जाता है। चूंकि बगीचों में सजावट के लिए प्रयुक्त अशोक तथा असली अशोक के गुणों में बहुत अन्तर होता है इसलिए जरूरी है कि औषधि के रूप में असली अशोक का ही प्रयोग किया जाए।

असली अशोक की छाल स्वाद में कड़वी, बाहर से घूसर तथा भीतर से लाल रंग की होती है। छूने पर यह खुरदरी लगती है। आयुर्वेद के अनुसार अशोक का रस कसेला, कड़वा तथा ठंडी प्रकृति का होता है। यह रंग निखारने वाला, तृष्णा व ऊष्मा नाशक तथा सूजन दूर करने वाला होता है। यह रक्त विकार, पेट के रोग, सभी प्रकार के प्रदर, बुखार, जोड़ों के दर्द तथा गर्भाशय की शिथिलता भी दूर करता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, अशोक का मुख्य प्रभाव पेट के निचले हिस्सों पर पड़ता है। गर्भाशय के अलावा ओवरी पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। महिलाओं की प्रजनन शक्ति बढ़ाने में यह सहायक होता है। अशोक में कीटोस्टेरॉल पाया जाता है जिसकी क्रिया एस्ट्रोजन हारमोन जैसी होती है।

अनेक बीमारियों के निदान के लिए अशोक के विभिन्न भागों का प्रयोग किया जाता है। यदि कोई स्त्री स्नान के उपरांत स्वच्छ वस्त्र पहन कर अशोक की आठ नई कलियों का सेवन करे तो उसे मासिक धर्म संबंधी कष्ट कभी नहीं होता। साथ ही इससे बांझपन भी मिटता है। साथ ही अशोक के फूल दही के साथ नियमित रूप से सेवन करते रहने से भी गर्भ स्थापित होता है। अशोक की छाल में एस्ट्रिन्जेंट और गर्भाशय उत्तेजना नाशक संघटक विद्यमान हैं। यह औषधि गर्भाशय संबंधी रोगों में विशेष लाभ करती है। फायब्रायड ट्यूमर के कारण होने वाले अतिस्राव में यह विशेष रूप से लाभकारी है। अशोक की छाल के चूर्ण और मिश्री समान मात्रा में मिलाकर, गाय के दूध के साथ एक−एक चम्मच दिन में तीन बार कुछ हफ्तों तक लेने से श्वेत प्रदर में बहुत लाभ होता है।

रक्त प्रदर के लिए अशोक की छाल के काढ़े का प्रयोग किया जाता है इसे अशोक की छाल को सफेद जीरे, दालचीनी तथा इलायची के बीजों के साथ उबालकर बनाया जा सकता है। इसका सेवन भी दिन में तीन बार किया जाना चाहिए। होम्योपैथी के अनुसार, अशोक गर्भाशय संबंधी रोगों में विशेष रूप से लाभकारी है। गुर्दे का दर्द, मासिक धर्म के साथ पेट दर्द तथा मूत्र संबंधी रोगों में अशोक की छाल के मदर टिंक्चर का प्रयोग किया जाता है। अशोक के बीज पानी में पीसकर लगभग दो चम्मच मात्रा नियमित रूप से लेने पर मूत्र न आने की शिकायत दूर होती है। इससे पथरी के कष्ट में भी आराम मिलता है। अति रज स्राव की अवस्था में छाल का क्वाथ दिया जाता है। इसे बनाने के लिए अशोक की एक पाव छाल को लगभग चार लीटर पानी में उबालें। लगभग एक चौथाई पानी के शेष रहने पर उसमें लगभग एक किलो शक्कर डालकर उसे पकाएं। इस शरबत की लगभग दस ग्राम मात्रा को दिन में तीन−चार बार पानी के साथ लेने पर तुरन्त रक्त स्राव रुकता है।

रक्त स्राव यदि दर्द के साथ हो तो चौथे दिन से शुरू करके रज स्राव बंद न होने तक नियमित रूप से यह क्वाथ दिया जाना चाहिए। 45-50 वर्ष की आयु में स्त्रियों में जब रजोनिवृत्ति का संधिकाल आता है उस समय अशोक के संघटक हारमोन्स का संतुलन बिठाने का जटिल कार्य करते हैं। पान के साथ अशोक के बीजों का एक चम्मच चूर्ण चबाने से सांस फूलने की शिकायत नहीं रहती। अशोक की छाल के उबले ठंड़े काढे में बराबर मात्रा में सरसों का तेल मिलाकर मुहांसों तथा फोड़े−फुंसियों पर लगाने से ये शिकायत दूर हो जाती है। अशोक की छाल तथा ब्रह्मी के समभाग का एक चम्मच चूर्ण एक कप दूध के साथ नियमित रूप से लेने पर कुछ ही महीनों में बुद्धि की मंदता दूर हो जाती है।

खूनी बवासीर के निदान के लिए अशोक की छाल तथा उसके फूलों को समभाग मिलाकर एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह इस पानी को छानकर पी लें। इसी प्रकार सुबह भिगोए हुए मिश्रण को शाम को छानकर पी लें। इससे जल्दी ही लाभ मिलता है। अशोक की छाल में दो ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो अनैच्छिक मांस पेशियों को सिकोड़ता तथा ढीला करता है। इसके प्रयोग से गर्भाशय के संकुचन की दर बढ़ जाती है और यह सिकुड़न अन्य दवाइयों से हुए संकोचन के मुकाबले अधिक समय तक प्रभावी रहती है। साथ ही इसका कोई हानिकारक प्रभाव भी नहीं होता। नाड़ी संस्थान संबंधी सभी रोगों में इसका लेप तथा मुख मार्ग से इसका प्रयोग किया जाता है। साथ ही अतिसार तथा तेज ज्वर को दूर करने में भी इसका प्रयोग किया जाता है। यह एक अच्छा रक्त शोधक भी है। दवाई के रूप में प्रयोग करने के लिए अशोक की छाल को पौष या माघ महीने में इकट्ठा कर सूखी व ठंडी हवा में परिरक्षित रखा जाता है। जबकि इसके फूलों को वर्षा ऋतु में और कलियों को शरद ऋतु से पहले इकट्ठा करना चाहिए। इसके सूखे हुए भागों का चूर्ण छह माह से एक वर्ष तक प्रयोग किया जा सकता है।

जानिए क्यों भारत के इन राज्यों में अब नहीं मिलेगी शराब

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भारत में शराब से होने वाली मौतों के कारणवर्ष2011 से 2050 तकज़िंदगीके 25.8 करोड़वर्षका नुकसान हुआ है.साथ ही इससे हरवर्षजीडीपी को भी 1.45प्रतिशतका नुकसान हुआ है.

ये बात तीन डॉक्टरोंवदो पब्लिक रिसर्चर द्वारा किए गए अध्ययन में सामने आई है.जिसेअंतर्राष्ट्रीयजनरल ऑफ ड्रग पॉलिसी में प्रकाशित किया गया है.इस अध्ययन में शराब से होने वाली बीमारियों/घटनाओंवउनसे होने वाले नुकसान का विश्लेषण किया गया है.इन बीमारियों में लीवर की बीमारी, कैंसरवसड़कएक्सीडेंटके आंकड़ों का विश्लेषण किया गया.

इससे 2050 तक प्रतिआदमीज़िंदगीके 75 दिन कम हुए हैं.इस अध्ययन का शीर्षक है, ‘हेल्थ इम्पैक्ट एंड इकोनॉमिक बर्डन ऑफ अलकोहल कंसम्पशन इनइंडिया’.इससे पहले राष्ट्रीय सर्वे में पता चला था कि 5.7 करोड़हिंदुस्तानियोंको शराब के कारण होने वाले नुकसानों से तत्काल मदद कीआवश्यकताहै.राष्ट्रीय सर्वे रिपोर्ट को नेशनल ड्रग्स डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर ऑफ एम्स द्वारा तैयार किया जाता है. 

इसमेंबोलागया है कि शराब के सेवन सेज़िंदगीके 25.8 करोड़वर्षका नुकसान हुआ है.वहींहिंदुस्तानसे शराब के सेवन कोखत्मकरके 55.2 करोड़वर्षकीज़िंदगीगुणवत्ता प्राप्त हुई है.हिंदुस्तानमें शराब के उपयोग के दीर्घकालिकअसरपर अध्ययन में शराबबंदी की वकालत नहीं की गई है, बल्कि इसमें जागरुकता, बिक्रीवरोकथाम की रणनीतियों पर अधिक ध्यान दिया गया है. 

ये अध्ययन सरकारी आंकड़ों के स्त्रोत पर आधारित हैं.जैसे, नेशनल सैंपल सर्वेकार्यालय2015, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4, रिजर्व बैंक ऑफइंडिया, स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ेवदुनियास्वास्थ्य संगठन के आंकड़े.

मैसूर में खुदाई में निकली भगवान शिव के वाहन नंदी बैल की सदियों पुरानी प्रतिमाएं

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कर्नाटक में मैसूर के पास एक सूखी झील से सैकड़ों वर्ष पुरानी भगवान शिव की सवारी नंदी बैल की दो प्रतिमाएं खुदाई के दौरान सामने आई हैं। जानकारी के अनुसार, मैसूर से करीब 20 किमी दूर बसे अरासिनाकेरे की एक सूख चुकी झील में नंदी बैल की सदियों पुरानी प्रतिमाओं की यह जोड़ी खुदाई के दौरान मिली है।

बताया जा रहा है कि खुदाई करके मूर्तियों को बाहर निकालने का काम यहां के स्थानीय निवासियों ने ही किया है। सोशल मीडिया के अनुसार, अरासिनाकेरे के बुजुर्ग इस झील में नंदी की प्रतिमाएं होने की बात करते थे। जब कभी झील में पानी का स्तर कम होता था, तो कहा जाता था कि प्रतिमाओं का सिर नजर आता है। बताया जा रहा है कि इस वर्ष नदी के पूरे तौर पर सूख जाने बाद यहां के स्थानीय निवासियों ने इस जगह पर खुदाई कर सच को जानने का मन बनाया।

खबरों की मानें तो, स्थानीय लोगों ने झील की तीन से चार दिनों तक खुदाई की। इस दौरान उन्होंने खुदाई का काम अच्छी तरह से करने के लिए जेसीबी मशीन भी मंगवाई. वहीं, करीब चार दिनों तक चली खुदाई के बाद झील की जमीन के अंदर दबी नंदी बैल की प्रतिमाओं को बाहर निकाल लिया गया है। वहीं, इस बात की जानकारी लगने पर पुरातत्व विभाग के अधिकारियों की एक टीम भी वहां पहुंच चुकी है। दावा किया जा रहा है कि ये मूर्तियां विजयनगर काल के बाद की हैं. यह 16 वीं या 17 वीं शताब्दी की हो सकती हैं।

क्या आप जानते हैं कि वेटिंग लिस्ट और PNR का क्या मतलब होता है और ट्रेन टिकट के नंबर, अगर नहीं तो जानिए

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हमारे देश में सबसे ज्यादा लोग रेल से ही सफर करते हैं. इस बात का अंदाजा इसी बात से लगा लीजिए कि हमारे देश में हर रोज करीब 5 लाख रेल टिकट ऑनलाइन आईआरसीटीसी से बुक होते हैं. वहीं, विंडों से बुक होने वाले टिकटों की संख्या इससे कई गुनी ज्यादा है.

मालूम हो कि ट्रेन से कहीं भी जाने के लिए सीट/बर्थ की जरूरत पड़ती है. दरअसल बर्थ पाने के लिए रिजर्वेशन कराना पड़ता है. हम से सभी लोगों ने कभी न कभी स्लीपर, एसी, चेयर कार या सेकंड सीटिंग के लिए रिजर्वेशन कराया होगा, लेकिन क्या कभी आपने ये जानने की कोशिश की है कि आपके रेल टिकट में जो लिखा होता है वो क्या होता है.

दरअसल ये जानकारी आपके काम आ सकती है. बता दें कि आज रेलवे से जुड़ी इन्हीं जानकारी के साथ हम आपको रेल टिकट से संबंधित जानकारियां दे रहे हैं, जो आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं. चलिए जानते हैं इनके बारे में..

रिजर्वेशन के क्या हैं तरीके

बता दें कि कई लोगों को आज भी यही लगता है कि रिजर्वेशन सिर्फ टिकट की लाइन में लगकर ही कराया जा सकता है. आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि रिजर्वेशन कराने के 3 तरीके होते हैं:

1. टिकट विंडो पर जाकर

2. ऑनलाइन IRCTC की साइट से ई-रिजर्वेशन

3. आई रिजर्वेशन

ई-टिकट क्या होता है

बता दें कई बार लोगों को लगता है कि ई-रिजर्वेशन और आई-रिजर्वेशन एक ही हैं. कई को तो आई-रिजर्वेशन के बारे में पता ही नहीं होता. दरअसल बता दें कि ई और आई रिजर्वेशन दोनों ही ऑनलाइन बुक किए जाते हैं लेकिन, दोनों में थोड़ा अंतर होता है.

जी हां, दरअसल ई-टिकट लेकर यात्रा करते समय आपको आईडी प्रूफ लेकर चलना पड़ेगा. यह टिकट वेटिंग क्लियर नहीं होने पर कैंसिल हो जाता है. बता दें कि यह एक तरह से फेक टिकट होता है.

आई-टिकट क्या होता है

अगर आप भी उनमें से हैं जो फिजिकल टिकट तो चाहते हैं लेकिन टिकट विंडो पर जाने से भी बचना चाहते हैं तो आपको आई-टिकट लेना चाहिए. जी हां, दरअसल इस टिकट के साथ यात्रा करने पर आपको कोई आईडी प्रूफ दिखाने की जरूरत नहीं है. दरअसल आई-टिकट दिए गए पते पर पोस्ट से पहुंचता है.

मालूम हो कि आई-टिकट के लिए यात्रा से 3 दिन पहले बुकिंग करवानी पड़ेगी जबकि ई-टिकट यात्रा के कुछ घंटों पहले भी लिया जा सकता है. बता दें कि आई-टिकट के लिए आपको डाक खर्च भी भरना पड़ेगा जबकि ई-टिकट में आपका काम प्रिंटआउट या एसएमएस से भी चल सकता है.

PNR

अगर आपने कभी भी रेल में सफर किया है तो अपने पीएनआर नंबर के बारे में तो सुना ही होगा. दरअसल पीएनआर नंबर आपकी टिकट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. बता दें कि रिजर्वेशन टिकट के लेफ्ट साइड में ऊपर की ओर यह नंबर होता है.

दरअसल यह नंबर यूनीक होता है और इसे पैसेंजर नेम रेकॉर्ड नंबर कहा जाता है. दरअसल यह टिकट आपका ही है और इस पर आप ही सफर कर रहे हैं या नहीं, इस बात का पता इसी नंबर से लगाया जाता है.

ट्रेन नंबर

आपको बता दें टिकट में जो दूसरा सबसे जरूरी नंबर होता है वह है ट्रेन नंबर. दरअसल इस नंबर के पीछे एक गहरा राज छुपा होता है. जी हां, बता दें कि ट्रेन नंबर आपको ट्रेन रूट की जानकारी देता है. दरअसल अगर आपके रिजर्वेशन टिकट पर लिखे ट्रेन नंबर की पहली डिजिट 0 है तो आप समर स्पेशल, हॉलिडे स्पेशल या अन्य स्पेशल ट्रेन में सफर करने वाले हैं.

इसी प्रकार अगर पहली डिजिट 1 या 2 है तो लंबी दूरी की ट्रेन है जिसमें राजधानी और शताब्दी जैसी ट्रेनें भी शामिल हैं. वहीं 3 नंबर से शुरू होने वाले ट्रेन नंबर कोलकाता की लोकल ट्रेनों का होता है. इसी तरह 4 नंबर से शुरू होने वाला ट्रेन नंबर दिल्ली, चेन्नै, सिकंदराबाद जैसे मेट्रो शहरों की रेल सेवाओं का होता है.

इसके अलावा 5 नंबर परंपरागत तरीके की ट्रेनों का होता है. वहीं 6 नंबर से शुरू होने वाली ट्रेनें मेमू होती हैं और 7 नंबर से शुरू होने वाली डेमू. बता दें कि हाल ही में रिजर्व की गई ट्रेन का नंबर 8 होता है और 9 नंबर से शुरू होने वाली ट्रेन मुंबई लोकल की होती हैं.

वेटिंग लिस्ट भी अलग-अलग तरह की होती हैं जिनके बारे में जानना आवश्यक है. चलिए जानते हैं इनके बारे में:

RLWL

बता दें कि इसका फुल फॉर्म होता है रिमोट लोकेशन वेटिंग लिस्ट. दरअसल यह तब लिखा जाता है जब दो बड़े स्टेशनों के बीच का कोई ऐसा स्टेशन हो जहां से ज्यादा ट्रेनें मौजूद ना हों, ऐसी स्थिती में वहां के यात्री को किसी कैंसलेशन पर पहले सीट दी जाएगी.

CKWL

मालूम हो कि यह सबसे रोचक वेटिंग लिस्ट है. जी हां, दरअसल आपको CKWL में तब रखा जाता है जब आप तत्काल में टिकट लेते हैं. अगर तत्काल में आपको वेटिंग मिली है तो आप CKWL में है. बता दें कि आम तौर पर अगर यह वेटिंग लिस्ट 10 होने पर कंफर्म हो जाती है.

PQWL

आपको बता दें कि PQWL का मतलब होता है पूल्ड कोटा वेटिंग लिस्ट. दरअसल यह वेटिंग लिस्ट एक किसी बड़े क्षेत्र के कई छोटे-छोटे स्टेशनों के लिए होती है. बता दें कि इस वेटिंग लिस्ट को क्लियर होने के लिए अपने कोटे से किसी कैंसिलेशन की जरूरत होती है.

दरअसल इस हिसाब से अगर आप किसी छोटे स्टेशन से अपनी यात्रा शुरू कर रहे हैं और आपका टिकट पूल्ड वेटिंग लिस्ट में है तो आपके अपने एरिया (पूल कोड) के किसी व्यक्ति को अपनी टिकट कैंसिल करनी पड़ेगी.

RQWL

इसका मतलब है कि ये है सबसे अखिरी वेटिंग लिस्ट. जी हां, दरअसल इसका मतलब होता है रिक्वेस्ट वेटिंग लिस्ट. दरअसल अगर रूट में कोई पूल्ड कोटा नहीं है तो इस तरह की वेटिंग लिस्ट को बनाया जाता है.

सीएम अरविंद केजरीवाल ने इस वजह से BJP के प्रति अपनाया है नरम रुख

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हाल ही में आयोजित दिल्ली जल बोर्ड के एक कार्यक्रम में राजधानी के बदलते राजनीतिक परिदृश्य का नजारा देखने को मिला था. इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ मंच साझा किया था. पिछले कुछ वर्षों से दिल्ली की राजनीति को करीब से देखने वालों के लिए यह अपने आप में एक अलग नजारा था.

देश के सबसे बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के शिलान्यास के दौरान केजरीवाल ने केंद्र सरकार से मिले मदद के लिए धन्यवाद भी दिया.इतना ही नहीं, जब केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि इस योजना के लिए केंद्र से भी पैसे मिले हैं लेकिन होर्डिंग्स पर सिर्फ दिल्ली सरकार को ही जगह मिली है, इस पर केजरीवाल ने अपनी गलती स्वीकार की और कहा कि केंद्र को भी क्रेडिट दिया जाना चाहिए था.

सिग्नेचर ब्रिज के स्वागत के दौरान हुई थी तकरार दिल्ली जल बोर्ड के कार्यक्रम में हुई इन गतिविधियों में क्या खास था, इसे समझने के लिए आपको फ्लैशबैक में जाना होगा. पिछले साल 4 नवंबर को सिग्नेचर ब्रिज के उद्घाटन का कार्यक्रम दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी और आम आदमी पार्टी के विधायकों के बीच रण क्षेत्र बन गया था. इसका कारण सिर्फ इतना था कि तिवारी/बीजेपी को कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया था.

ये तो सिर्फ एक उदाहरण है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तो एक समय में बीजेपी के बड़े नेताओं पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने से भी नहीं चुकते थे. उन्होंने अरुण जेटली और नितिन गडकरी के खिलाफ आरोप लगाए. पीएम पर अपनी हत्या का साजिश रचने तक का आरोप लगा दिया. हालांकि जब गडकरी और जेटली मामले को लेकर कोर्ट पहुंचे तो केजरीवाल ने माफी मांगने में भी गुरेज नहीं की.

लोकसभा चुनाव के दौरान भी लगाए थे आरोप मई में खत्म हुए लोकसभा चुनाव के दौरान केजरीवाल के तेवर भगवा पार्टी के खिलाफ नरम नहीं पड़े थे. उन्होंने बीजेपी पर आम आदमी पार्टी को तोड़ने का आरोप लगाया. केजरीवाल की पार्टी ने पहली बार चुनाव लड़ने वाले गौतम गंभीर पर अतिशी मार्लेना को बदनाम करने के लिए कैंपेन चलाने का अति गंभीर आरोप भी लगाया.

आम चुनाव में आप रही तीसरे नंबर पर
बीजेपी नेताओं के खिलाफ इन तमाम आरोपों और पार्टी के प्रति नाराजगी का आलम अब थम गया है. लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों ने अरविंद केजरीवाल को बता दिया है कि सिर्फ विरोध की राजनीति से काम नहीं चलने वाला. आम चुनाव में आप कांग्रेस से भी पीछे चली गई और दिल्ली में तीसरे नंबर पर रही. वहीं केजरीवाल का हर मौकों पर साथ देने वाले चंद्रबाबू नायडू का सूफड़ा साफ हो चुका है. बंगाल की मुख्यमंत्री को भी बीजेपी कड़ी टक्कर दे रही है.

बीजेपी की दिल्ली में आक्रामक रणनीति
आम आदमी पार्टी से टूटकर बीजेपी में जा रहे विधायक और भगवा पार्टी की आक्रामक रणनीति ने अरविंद केजरीवाल को केंद्र में सत्ताधारी दल के प्रति नरम रुख रखने के लिए मजबूर कर दिया है. बीजेपी ने दिल्ली सरकार की सबसे चर्चित शिक्षा और स्वास्थ्य नीतियों पर घेरना भी शुरू कर दिया है. बीजेपी ने क्लास रूम बनाने में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. वहीं स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सीबीआई जांच भी चल रही है. ऐसे अब बदले हुए हालात में शायद केजरीवाल के लिए बीजेपी के प्रति दोस्ती ही बेहतर विकल्प हो.

भूलकर भी गलत टाइम पर न खायें ये 5 चीजें, वरना एक दिन डॉक्टर भी बोल देगा ‘आई एम सॉरी’

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स्वस्थ और लंबे जीवन के लिए बेहतर खानपान बहुत जरूरी है। लेकिन उससे कहीं ज्यादा खानेपीने का समय महत्वपूर्ण है। एक्सपर्ट मानते हैं कि सही समय पर खाई गई चीज आपको लंबे समय तक फायदा देती हैं। अगर आप एक अच्छी डाइट लेने के बावजूद थकान, कमजोरी, शरीर का विकास नहीं होना, खून की कमी और जल्दी-जल्दी बीमार होना जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आपके खानेपीने की टाइमिंग बहुत गड़बड़ है।

उदाहरण के लिए, गलत समय पर सेब और केले से जैसे फल भी आपको नुकसान देते हैं। ये चीजें वास्तव में आपके पाचन में सुधार के बजाय आंत्र की समस्या पैदा करती हैं। हम आपको कुछ ऐसी ही हेल्दी चीजों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें गलत समय पर खाने आप बीमारीयों से घिर सकते हैं।

केला 
अधिकतर लोग केला सुबह के समय खाना पसंद करते हैं। आपको बता दें कि खाली पेट केला खाने से आपका ऊर्जा का स्तर कम हो सकता है। बेशक केला खाने से आपको तुरंत ऊर्जा मिलती है लेकिन कुछ घंटों के बाद, आप फिर से थका हुआ और भूखा महसूस कर सकते हैं। इतना ही इस समय केला खाने से आईबीएस और डायरिया से पीड़ित लोगों को ज्यादा खतरा हो सकता है।

कॉफ़ी 
कुछ लोग सुबह उठते ही कॉफ़ी पीना पसंद करते हैं। आपकी यह आदत धीरे-धीरे आपको खतरे में डाल सकती है। कई रिसर्च में बताया गया है कि नाश्ते से पहले खाली पेट कॉफ़ी पीने से शरीर कैफीन का आदि हो जाता है। जागने के बाद पहले घंटे में, आपका शरीर कोर्टिसोल का उत्पादन करता है और कॉफ़ी पीने से इसकी प्रक्रिया बाधित होती है।

चावल 
लंच और डिनर में चावल खाना भला किसे पसंद नहीं है। चावल में कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट होते हैं जो पचने में लंबा समय लेते हैं। यह एक अच्छी बात है, क्योंकि यह आपको लंबे समय तक ऊर्जावान बनाए रखता है। लेकिन चावल में कैलोरी की मात्रा भी अधिक होती है जिससे वजन बढ़ने का भी सबसे ज्यादा खतरा होता है। खासकर रात में ज्यादा चावल खाने से मोटापे का अधिक खतरा बना रहता है।

दूध 
कुछ लोग अपने दिन की शुरुआत एक गिलास दूध पीकर करते हैं। लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि यह आदत बचपन के लिए तो सही है लेकिन जवानी में यह मुसीबत बन सकती है। दूध को पचाने में देरी लगती है और इस लिहाज से सुबह दूसरी चीजों के साथ दूध पीने से आपको हीटबर्न या पेटदर्द की समस्या हो सकती है। इसलिए आपको रात को सोने से पहले दूध पीना चाहिए।

मीट 
मांस प्रोटीन और बी विटामिन का एक बड़ा स्रोत है, लेकिन यह पाचन तंत्र पर अत्यधिक भार डाल सकता है। इसीलिए रात को मांस खाने से बचना चाहिए। सोने से कम से कम 3 घंटे पहले आप दुबला मांस खा सकते हैं। क्योंकि यह तृप्ति प्रदान करता है और इसमें अधिक मात्रा में कैलोरी नहीं होती है जिससे वजन बढ़ सके। प्रोटीन के लिए आपको दिन में मीट का सेवन करना चाहिए।