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पुरानी गाड़ियों को फास्टैग के लिए 4 महीने का समय, नई गाड़ियों में फास्टैग जरूरी

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सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि अब से नए वाहनों पर फास्टैग स्टिकर लगाना अनिवार्य होगा. उन्‍होंने बताया कि पुराने वाहन मालिकों को भी अगले चार महीने के अंदर अपने वाहनों पर इस स्टिकर को लगाना होगा. दरअसल, मंगलवार को नितिन गडकरी लोकसभा में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे थे. इसी दौरान उन्‍होंने ये बात कही.

इसके साथ ही नितिन गडकरी ने बताया कि 22 ग्रीन एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर काम हो रहा है. इसके लिए भूमि अधिग्रहण का काम हो चुका है. इन परियोजाओं में से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे एक है. गडकरी के मुताबिक अगले ढाई साल में इस एक्‍सप्रेसवे के जरिए दिल्ली से मुंबई की यात्रा 12 घंटे में पूरी की जा सकेगी. यह एक्‍सप्रेसवे अलवर, सवाई माधोपुर, रतलाम, झाबुआ होते हुए जाएगा. उन्होंने सदन को यह भी बताया कि डासना को कानपुर हाईवे और उसके बाद कानपुर को लखनऊ से जोड़ने की योजना पर काम हो रहा है.

नितिन गडकरी ने जोर देकर कहा कि बेहतर सड़क और सुखद सफर के लिए, हमें टोल का भुगतान करना होगा. मंत्रालय विभिन्न राजस्व मॉडल पर काम कर रहा है, इसके लिए फंड की जरूरत है. फंड जुटाने के लिए टोल एक महत्वपूर्ण जरिया है, लेकिन हम टोल में ठहराव के समय को कम करने के लिए काम कर रहे हैं.

नितिन गडकरी ने कहा कि हमने देश भर में 786 ब्लैक स्पॉट की पहचान की है. जिसमे 350 से अधिक स्पॉट पर कई समस्‍याएं हैं. उन्होंने इसके साथ ही यह भी बताया कि देश 25 लाख योग्य ड्राइवरों की कमी का सामना कर रहा है.

गडकरी ने सांसदों से अपने निर्वाचन क्षेत्रों में कम से कम एक प्रशिक्षण केंद्र खोलने के लिए कहा. इसके जरिए हर संसदीय क्षेत्रों में रोज़गार पैदा हो सकेगा. मोटर वाहन संशोधन विधेयक को पारित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए गडकरी ने कहा कि हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में डेढ़ लाख लोग मारे जाते हैं. ऐसे में इस बिल को जल्द से जल्द मंजूरी दी जानी चाहिए.

लगेगा 10 हजार रुपये का जुर्माना अगर यह गलती की तो, आधार कार्ड वाले ध्यान दे

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हाल ही में केंद्र सरकार ने एक नियम बनाया है जिसमे आप पैसों के लेंन देन में पैन कार्ड की जगह आधार कार्ड नम्बर का इस्तेमाल कर सकते है। आपको बता दे कि आधार के जरिये पौसो के लेन देन में आपको काफी सतर्कता बरतनी पड़ेगी। क्योंकि अगर अपने गलती से भी अपना गलत आधार नम्बर दिया तो आपको 10 हजार रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह नियम सितम्बर 2019 तक लागू होने की उम्मीद है। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि दस्तवेजों में आधार नंबर सही नहीं होने पर इसे प्रमाणित करने वाले को भी दस हजार रुपए का जुर्माना देना होगा। हालांकि इसमें एक प्रावधान यह भी होगा कि जुर्माने की रकम अदा करने से पहले संबंधित व्यक्ति की दलील भी सुनी जाएगी।

बता दें कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा था कि 1.2 अरब से अधिक भारतीयों के पास आधार कार्ड हैं। इसकी तुलना में केवल 22 करोड़ पैन कार्ड हैं। करदाता पैन नंबर ना होने पर आधार कार्ड नंबर से आयकर रिटर्न भर सकते हैं। बैंक खाता खोलने, क्रेडिट या डेबिट कार्ड के लिए आवेदन करने, होटल व रेस्तरां बिलों का भुगतान करने के लिए आधार नंबर इस्तेमाल कर सकते हैं।

इस राज्य ने किया कुंवारी लड़कियों का मोबाइल फोन बैन, कांग्रेस की महिला विधायक ने भी किया समर्थन

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गुजरात के बनासकांठा जिले के 12 गांवों में क्षत्रिय ठाकोर समुदाय ने कुंवारी लड़कियों को मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करने देने का सामुदायिक नियम बनाया है जिसे कांग्रेस की स्थानीय महिला विधायक गनीबेन ठाकोर ने अपना समर्थन भी दिया है।

18 साल तक मोबाइल फोन से रहें दूर 
ठाकोर जो वाव क्षेत्र की विधायक हैं ने आज पत्रकारों से कहा कि दांतीवाड़ा के 12 गावों में समुदाय ने जो नियम बनाये हैं उनमें से कई का वह समर्थन करती हैं। उन्होंने कहा, ‘टेक्नोलॉजी के इस जमाने में जब तक लड़कियों की शादी नहीं होती तब तक या 18 साल की उम्र तक उन्हें मोबाइल फोन से दूर रह कर पढ़ाई लिखाई करनी चाहिए और इसमें कुछ गलत भी नहीं है। मैं तो इस मामले में सरकार से भी सहयोग की अपेक्षा रखती हूं।

गरीब समाज के लिए बजटमें 1900 करोड़ का प्रावधान
गरीब समाज के बच्चे बच्चियों के लिए 1900 करोड़ रूपये का बजटीय प्रावधान है और ऐसे में हम उन्हें मोबाइल से दूर नहीं रखेंगे तो क्या होगा।’ उन्होंने कहा कि अंतरजातीय विवाह को संवैधानिक रूप से प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता।

ज्ञातव्य है कि दांतीवाड़ा के जेगोल गांव में गत रविवार को क्षत्रिय ठाकोर जाति की बैठक में कई नियम बनाये गये थे जिसमें सभी प्रकार के समारोहों में डीजे और पटाखे के उपयोग पर प्रतिबंध, कुंवारी लड़कियों को मोबाइल नहीं देने और उनके पास से इसके पकड़े जाने पर माता पिता को जिम्मेदार ठहराने, घर से भागने पर लड़की के पिता पर डेढ़ लाख और लड़के के पिता पर दो लाख रूपये का दंड लगाने जैसी बाते शामिल थीं।

केंद्र ने राज्यों को दिए सख्त निर्देश, अरहर दाल और प्याज की कीमतें बढ़ते ही फुल एक्शन में आई मोदी सरकार

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अरहर दाल और प्याज के दाम बढ़ते ही केंद्र की मोदी सरकार फुल एक्शन में आ गई है. सरकार ने दालों और सब्जियों के दामों को लेकर राज्यों को सचेत रहने के निर्देश दिए है. साथ ही, सरकार ने राज्यों के खाद्य सचिवों को अरहर दाल और प्याज की राज्यावार मांग केंद्र सरकार को देने के लिए कहा है. इस फैसले के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्यों को पर्याप्त मात्रा में अरहर दाल और प्याज उपलब्ध कराना है. आपको बता दें कि बारिश की वजह से कई राज्यों में आवक घट गई है. इसीलिए प्याज और टमाटर की कीमतों में जोरदार तेजी आई है. दिल्ली में अरहर दाल के दाम फिर से 100 रुपये प्रति किलोग्राम है. वही, प्याज अब 40-45 रुपये प्रति किलो बिक रही है.

केंद्र ने राज्यों को दी चेतावनी

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 अरहर और प्याज का दाम को लेकर चिंतित सरकार ने सख्त निर्देश जारी किए है.
>> राज्यों को दोनो कमोडिटी के दामों की समीक्षा करनी होगी. >> राज्य की हर महीने अपनी खपत का ब्यौरा केंद्र सरकार को जारी करना होगा.
>> केंद्र सरकार राज्यों को बफर स्टॉक से प्याज और अरहर दाल मुहैया कराएगी

>> केंद्र ने प्याज का 52 हजार मेट्रिक टन बफर स्टॉक बनाया है.
>> साथ ही अरहर दाल का 6 लाख मेट्रिक टन बफर स्टॉक बनाया गया है.
>> केंद्र सरकार ने महंगाई को लेकर कमर कसी है.
>> केंद्र सरकार अपने रिटेल ऑउटलेट का दायरा भी बढ़ाने की तैयारी में है.
>> केन्द्रीय भंडार, सफल, मदर डेयरी के जरिए जरुरी वस्तुएं बेची जाएंगी.

अरहर दाल क्यों रही हैं महंगी-एक्सपर्ट्स का कहना है कि मांग बढ़ने से घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अरहर दाल के दाम बढ़े हैं. साथ ही, दुनिया के बड़े अरहर दाल उत्पादक कई देशों में भी उत्पादन घटने के बाद कीमतों में तेजी आई है.

भारत म्यांमार से अरहर की दाल खरीदता है. इससे पहले साल 2015 में पहली बार भाव 200 रुपये किलग्राम के पार पहुंच गया था. भारत के अलावा म्यांमार और कुछ अफ्रीकी देशों में ही अरहर दाल पैदा होती है.

एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री के आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल देश में अरहर की दाल का 40 लाख टन से ज्यादा उत्पादन हुआ था. वहीं, इस साल ये 35 लाख टन के करीब है.

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पिछले खरीफ सीजन में अरहर दाल की बुआई कम हुई थी. इसके अलावा सरकार ने दालों के आयात पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं. इस साल मानसून कमजोर रहने की संभावना से भाव चढ़े हैं.

ऐसे यहां होता है ये अजीबोगरीब चमत्कार किन्नर भी आकर हो जाती है गर्भवती

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ये तो सभी जानते हैं कि एक महिला ही बच्चे को जन्म दे सकती है। ये कह सकते हैं कि ये वरदान सिर्फ एक महिला को ही मिला है और इनके अलावा कोई ऐसा नहीं जो बच्चे को जन्म दे सके। किन्नर का नाम लेते ही हमारे मस्तिष्क में उनके लिए एक अलग ही छवी आती है।

किन्नर ना तो पुरुष समझा जाता है न ही महिला में समझा जाता है। ऐसे में किन्नर भी उन्ही में शामिल होते हैं जो बच्चे को जन्म नहीं दे सकते। लेकिन ये जानकर आप हैरान रह जायेंगे कि एक मंदिर ऐसा है जहां से आशीर्वाद लेते है किन्नर भी बच्चे को जन्म दे पाते हैं। हैं राजस्थान के अजमेर जिले में बनी मोहम्मद शरीफ की दरगाह की जहां आते है कई चमत्कार होते हैं जिनके बारे में कुछ तो जानते बही होंगे।

वैसे तो यहां हज़ारों लोग आते हैं अपनी मन्नतों को लेकर जो पूरी भी होती हैं। उन लोगों की आस्था इस दरगाह से जुड़ी होती है। लेकिन किन्नरों की बात करें तो उनकी भी इस दरगाह में गहरी आस्था होती है जिसके चलते वो यहां आते हैं। अजमेर की ये दरगाह में किन्नर अधिक आते हैं और आपको बता दें, इस जगह एक मीरां सैयद हुसैन खिंहगसवार की एक दरगाह है। कहा जाता है यहां पर एक करिश्माई लाल बूंदी का पेड़ है जिससे चमत्कार होते हैं। जो भी इस पेड़ के फल को खाता है उसे संतान जरूर होती है।

ऐसे ही एक किन्नर ने इस फल को खाया था जिसके बाद उसने एक लड़के को जन्म भी दिया। इस दरगाह की ऐसी मान्यता है कि जो लोग ख्वाजा मोईनुद्दीन चिस्ती की दरगाह पर जाते हैं, वह तारागढ़ पहाड़ पर मौजूद इस दरगाह में आकर जरूर सिर झुकाते हैं। अगर आपको भी संतान नहीं हो रही है तो आप भी यहां जा सकते हैं।

इन मंदिरों में गैर हिन्दुओ को नही मिलती घुसने की इजाजत, इंदिरा गाँधी को भी नही जाने दिया

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गुरुवायुर मंदिर

अभी हाल ही में गुरुवायुर मंदिर में पीएम मोदी गये थे और वहाँ पर पूजा की थी. इस मंदिर में भगवान् कृष्ण की पूजा होती है और आपको बता दे कि ये मंदिर केरल में ही स्थित है.

पद्मनाभ मंदिर

पद्मनाभ मंदिर में अभी हाल ही में खजाना मिला था. इस मंदिर को दूर दूर से देखने के लिए विदेशी लोग भी आते है लेकिन इस मंदिर में गैर हिन्दुओ का जाना वर्जित है.

जगन्नाथ पूरी

जगन्नाथ पुरी के मंदिर में सिर्फ गैर हिन्दुओ को ही नही बल्कि उन हिन्दुओ को भी अन्दर जाने की अनुमति नही है जिनके गैर हिन्दुओ से सम्बन्ध हो उन्हें भी इस मंदिर में जाने की अनुमति नही मिलती है.

लिंगराज मंदिर

भुवनेश्वर में स्थित भगवान् शिव शंकर के मंदिर में भी सिर्फ और सिर्फ हिन्दुओ को ही प्रवेश मिलता है. यहाँ कई सारे पर्यटक आते रहते है लेकिन कभी भी किसी भी गैर हिन्दू को प्रवेश नही मिलता है.

कामाक्षी मंदिर

तमिलनाडु में स्थित कामाक्षी माता के मंदिर में भी किसी भी गैर हिन्दु को प्रवेश नही मिलता है. ये मंदिर अपने आप में अद्भुत कला का नमूना है और सभी लोग इस मंदिर को लेकर के काफी ज्यादा धार्मिक भी है. दूर दूर से यहाँ पर लोग माँ के दर्शन करने आते है.

हरे चारे में करें इस चीज का छिड़काव, बांझपन से पशुओं को मिल जाएगा छुटकारा

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किसान हरे चारे की प्रमुख फसलें बाजरा व ज्वार की बिजाई के दौरान फास्फोरस न्यूट्रेंस का इस्तेमाल अवश्य करें। फास्फोरस का प्रयोग नहीं करने से फसल में इस पोषक तत्व की कमी हो जाती है और इससे पशुओं में बांझपन एवं बार-बार गर्भधारण की समस्या बनती है। इस तत्व की कमी से पशु की प्रजनन प्रक्रिया अनियमित हो जाती है और पशुओं में बार-बार गर्भपात होने लगता है। फास्फोरस से प्रति एकड़ तीन से चार क्विंटल पैदावार बढ़ती है। आने वाले बाजरे के सीजन में किसान कपास की बिजाई के दौरान जमीन में डीएपी यानी फास्फोरस अवश्य डालें। बाजरा खासकर दक्षिणी हरियाणा की प्रमुख फसल है। अब तो सरकार ने इसका भाव भी 1950 रुपये प्रति क्विंटल कर रखा है। 

ये हैं बाजरे की प्रमुख किस्में
बाजरा की प्रमुख किस्मों में पाइनर 45, पाइनर 46, पाइनर 42 और पाइनर 19 प्रमुख रूप से शामिल हैं। इस किस्म के बीज से पौधे की लंबाई आठ से 10 फीट तक बढ़ती है। जिले में अब तक करीब आठ हजार एकड़ में बाजरा की बिजाई हो चुकी है।

इस खरीफ सीजन में बाजरा की बिजाई करीब 40 हजार एकड़ को पार करने की उम्मीद है। चरखी दादरी के अलावा महेंद्रगढ़, सतनाली, कादमा, नारनौल, बाढड़ा, रेवाड़ी एरिया में भी बाजरे की बिजाई की जाती है।

हरा चारा पशुओं के लिए 
प्रजनन प्रक्रिया संतुलित रखने के लिए फास्फोरस की जरूरत होती है। ऐसे में किसानों को चाहिए खरीफ की हरे चारे की बाजरा व ज्वार की फसलों में फास्फोरस न्यूट्रेंस अवश्य डालें। इससे प्रति एकड़ पैदावार भी बढ़ती है।

बाजरा, ज्वार में फास्फोरस डालें। दोनों फसल हरे चारे की हैं। हरे चारे में फास्फोरस न्यूट्रेंस होना जरूरी है। इसकी कमी से ही पशुओं में बांझपन होता है। – रमेश रोहिल्ला, कृषि विकास अधिकारी एवं टीए

जानिए कैसे मुंबई में 24 घंटे यहां मुफ्त में खाए खाना

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भूखे को खाना खिलाने से बड़ाकार्यकोई नहीं।यहां वर्सोवा में चल रहा कम्युनिटी फ्रीजरोजानाकरीब 70-80 लोगों की भूख मिटा रहा है।

यहां असपास के होटलोंवलोकललोगों के घर का बचा हुआ खाना तो आता ही है, साथ ही कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो खरीद कर खाना दे जाते हैं।आपकी जानकारी के लिए बताते चलेंकिवर्सोवा का यह कम्युनिटी फ्रीज बारह महीने ज़रूरतमंदों के लिए खुला रहता है,वलगभग रोज़ कम से कम 70-80 लोगों की भूख मिटाता है।मैनेजमेंट कमेटी से जुड़े श्याम कलवानी बताते है कि इस कम्युनिटी फ्रीज की शुरूआत 2017 में की थीवअब यह फ्रीज वर्सोवा इलाके के ज़रूरतमंद लोगोंवबच्चों का फेवरेट अड्डा बन चुका है

मुफ्त में मिलता है भरपेट खाना- मायानगरी मुंबई भले ही ग्लैमर की चकाचौंध में डूबी हो लेकिन इस शहर में अकसर आपकोमानवताकी मिसालें मिल जाती हैं।इनमें कई कहानियां तो ऐसी हैं कि आपको यकीन हो जाएगा कि शहर के सीने में भी एक दिल धड़कता है। >>यहां लोग बारिश, बाढ़, तूफान से लेकर किसी भी मुसीबत में एक दूसरे की मदद के लिए सबसे पहले आगे आते हैं।साथ ही अगर बात किसी को पेट भर खाना खिलाने की हो तो इसमुद्देमें भी मुम्बईकर पीछे नहीं है।मुम्बई के अंधेरी वर्सोवा इलाके में कम्यूनिटी फ्रीज ज़रूरत मंदों के लिए बेहतरीन सहारा है।

>>घर या होटल में बचे हुए खाने से ज़रूरतमंद लोगों की भूख मिटाने में असलभूमिकानिभाता है ये कम्युनिटी फ्रीज।इस कम्युनिटी फ्रीज में खाने का सामान रखा रहता हैवयहां आने वाला कोई भीआदमीअपनी भूख के हिसाब से यहां सेसारेहक़ से बिना किसी सवाल जवाब के खाना निकालकर खा सकता है।

यहां से आता है इस कम्युनिटी फ्रिज में खाना
ये कम्युनिटी फ्रीज बच्चे, रिक्शाचालक, भिखारियों के साथ-साथ आसपासकार्यकरने वाले ग़रीब लोगों का भूख लगने पर फेवरेट अड्डा है।एक तरफ जहां यहां लोग खाना खाने आते हैं तो वहीं खाना खिलाने वालों की भी कमी नहीं है।

>>कुछ लोग अपने घरों में बचा हुआ खाना यहां दे जाते हैं, तो कुछ यहाँ ख़रीद कर भी फ्रीज में रख कर जाते हैं।साथ ही आसपास के कई होटल भी बचा हुआ खाना बर्बाद करने की बजाय यहां रख जाते हैं।फ्रीज कोप्रारम्भकरने वाले प्रबंधन के लोग भी हर दिनप्रातः काल9.30 बजेवशाम 4.30 बजे यहां खाना रखने आते हैं।

2017 में की थी शुरूआत,वबढ़ाने की योजना
वर्सोवा का यह कम्युनिटी फ्रीज बारह महीने ज़रूरतमंदों के लिए खुला रहता है,वलगभग रोज़ कम से कम 70-80 लोगों की भूख मिटाता है।

>>मैनेजमेंट कमेटी से जुड़े श्याम कलवानी बताते है कि इस कम्युनिटी फ्रीज की शुरूआत 2017 में की थीवअब यह फ्रीज वर्सोवा इलाके के ज़रूरतमंद लोगोंवबच्चों का फेवरेट अड्डा बन चुका है हालांकि अब हम ऐसे कम्युनिटी फ्रीज मुम्बई में कईवजगहों पर भी खोलने कीप्रयासकर रहे है ताकि बचे हुए खाने को फेंकने की बजाय लोगों का पेट भरा जा सके।

यहाँ के औरतों की खूबसूरती देख रह जायेंगे दंग, नहीं आता किसी औरत को बुढ़ापा

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दुनियाभर में ऐसी कई जगहें हैं, जिनकी चर्चा वहां की महिलाओं की खूबसूरती की वजह से होती है। आज हम आपको एक ऐसी ही जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां की महिलाओं की खूबसूरती एक्ट्रेस को भी मात देती है।

हम बात कर रहे हैं पाकिस्तान के काराकोरम की पहाड़ियों पर रहने वाले हुंजा जाति की, जो न केवल महिलाओं की खूबसूरती के लिए फेमस है। बल्कि, यहां की महिलाएं 65 साल की उम्र में भी बच्चे को जन्म देती हैं। और भी जानिए इनके बारे में.उत्तरी पाकिस्तान की काराकोरम की पहाड़ियों में बसे हुंजा जाति की महिलाओं की संख्या लगभग 87 हजार है। ये दिखने में अपनी उम्र से काफी कम नजर आती हैं।

हुंजा समुदाय के लोग फिजिकली और मेंटली बहुत स्ट्रॉन्ग होते हैं। यहां कि महिलाएं 65 साल की उम्र में भी बच्चे को जन्म देती हैं और इसमें उन्हें कोई परेशानी भी नहीं होती। वहीं इनके मर्द 90 साल में भी पिता बन सकते हैं।इस्लाम धर्म का पालन करने वाले इन लोगों की आयु भी सामान्य से बहुत अधिक हैं, इस जाति के लोग करीब 120 साल तक जिंदा रहते हैं।

इनकी लाइफस्टाइल ही इनके लंबे जीवन का रहस्य है। ये लोग सुबह 5 बजे उठ जाते हैं और पैदल खूब घूमते हैं।यह लोग बीमार भी कम पड़ते हैं क्योंकि अपने खान-पान पर काफी ध्यान देते हैं। कहा जाता है कि ये लोग दिन में केवल दो बार ही खाना खाते हैं।हुंजा जाति के लोग वही खाना खाते हैं, जिसकी पैदावार वो खुद करते हैं। यहां के लोग प्रतिदिन अखरोट का सेवन करते हैं। इनका दूध, फल, मक्खन सब चीजें प्योर होती हैं। गार्डन में पेस्टिसाइड स्प्रे करना इस कम्युनिटी में बैन है।हुंजा वैली पाकिस्तान की सबसे ज्यादा पसंदीदा टूरिस्ट डेस्टिनेशंस में से एक है।दुनियाभर से लोग यहां की पहाड़ों में छुपी खूबसूरती देखने आते हैं।

अब नहीं होगी बिजली की खपत, एलपीजी गैस से चलेगा आपका रेफ्रिजरेटर

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 वाहनों में इस्तेमाल होने वाली गैस से फ्रिज चलाया जा सकेगा. यह कारनामा किया है, भरतपुर टेक्नीकल कॉलेज के छात्रों और प्रोफेसर की टीम ने. दरअसल रेफ्रिजरेटर में कूलिंग के लिए हाइड्रोकार्बन गैस की जगह एलपीजी गैस का टेस्ट किया गया, जो कामयाब रहा. इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ बिजली की खपत भी कम होगी.

अब तक आपने वाहनों को एलपीजी गैस से दौड़ते देखा होगा, लेकिन अब ये एलपीजी गैस आपके रेफ्रिजरेटर को संचालित करेगी. भरतपुर टेक्नीकल कॉलेज में ‘एलपीजी बेस्ड रेफ्रिजरेटर सिस्टम’ तैयार किया गया है. जिसे राजस्थान टेक्नीक यूनिवर्सिटी, कोटा से हरी झंडी मिल गई है. साथ ही प्रोजेक्ट के लिए 3 लाख रुपए का बजट भी स्वीकृत हो चुका है. दरअसल इस रेफ्रिजरेटर में कूलिंग के लिए हाइड्रोकार्बन के बजाय एलपीजी का इस्तेमाल किया गया. इसके इस्तेमाल से पर्यावरण संरक्षण के साथ ही बिजली खर्च भी बचेगा.

प्रोजेक्ट पर काम कर रही टीम ने 20 लीटर क्षमता का रेफ्रिजरेटर मॉडल तैयार किया. इसमें कूलिंग के लिए फियोन या हाइड्रोकार्बन गैस के बजाय एलपीजी का इस्तेमाल किया गया. दरअसल एलपीजी सिलेण्डर में पहले से ही काफी प्रेशर रहता है, इसलिए प्रेशर की और बिजली की जरुरत नहीं पड़ी. एक बर्नर से गैस सिलेण्डर को रेफ्रिजरेटर से जोड़ा गया और इसमें एलपीजी छोड़ी गई. यह एलपीजी रेफ्रिजरेटर में जाकर कूलिंग करती है. यही गैस दूसरे बर्नर से जुड़े चूल्हे तक सप्लाई होती है. जिस पर साथ में खाना बनाया जा सकता है.

डॉ. गुप्ता ने बताया कि अब इसी मॉडल के आधार पर प्रोजेक्ट के तहत कॉलेज में 200 लीटर क्षमता का रेफ्रिजरेटर तैयार किया जाएगा. मौजूदा समयमें रेफ्रिजरेटर में कूलिंग के लिए हाइड्रोकार्बन का इस्तेमाल किया जाता है. हाइड्रोकार्बन की वजह से ओजोन परत को क्षति पहुंचती है. वहीं इस रेफ्रिजरेटर में कूलिंग के लिए एलपीजी का इस्तेमाल करके पर्यावरण को हो रहे नुकसान को कुछ कम किया जा सकता है.