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सकती है पुलिस रिंकू खनूजा खुदकुशी मामले में फंसे लवली खनुजा की रिमांड बढ़ाने की मांग कर

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सेक्स सीडीकांड मामले में संदेही रहे रिंकू खनूजा की आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में फंसे लवली खनूजा को पुलिस सोमवार को कोर्ट में पेश करेगी. पुलिस ने 2 दिनों का रिमांड लवली खनूजा का लिया था और पूछताछ के बाद सोमवार को उसे कोर्ट में पेश करेगी. पुलिस ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां लवली खनूजा से हासिल की है. लेकिन बताया जा रहा है कि लवली खनूजा ने अभी पूरी जानकारी नहीं दी है. इस कारण से पुलिस 3 दिन की और रिमांड कोर्ट से मांग सकती है. वहीं पुलिस अब इस मामले में 3 अन्य आरोपियों मानस साहू, विजय पंड्या और कैलाश मुरारका की भी तलाश कर रही है. बताया जा रहा है कि जल्द इनकी गिरफ्तारी कर सकती है.

परिजनों ने की थी शिकायत दर्ज

रिंकू खनूजा को आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने का केस दर्ज करने के बाद पुलिस ने लवली खनूजा को गिरफ्तार किया था. रिंकू खनूजा के परिजनों के बयान के आधार पर 20 जून को केस दर्ज किया गया था. मिली जानकारी के मुताबिक रिंकू के भाई ने सुनील सचदेव ने लवली खनूजा, विजय पंडया, मानस साहू और कैलाश मुरारका खिलाफ नामजद शिकायत की थी. रिंकू के परिजनों का आरोप है कि चारों अक्सर रिंकू को फोन पर धमकियां देते थे. बताया जा रहा है कि पुलिस ने इनका कॉल डिटेल भी निकाला है. कार्रवाई करते हुए पुलिस अब इस मामले में कुछ और लोगों को गिरफ्तार कर सकती है.

DU के पत्रकारिता के कोर्स में RSS की बुरी छवि पेश करने पर विवाद

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दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की अकादमिक परिषद के एक सदस्य ने आरोप लगाया है कि अंग्रेजी पत्रकारिता के अद्यतन पाठ्यक्रम में मुजफ्फरनगर दंगों और भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या किए जाने की घटनाओं पर पाठ शामिल हैं जो आरएसएस एवं उससे संबद्ध संगठनों को निशाना बनाने का प्रयास हैं।

विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद के सदस्य रसल सिंह ने यह भी कहा कि ऐसे पाठों की स्रोत सामग्री ”पक्षपाती” समाचार पोर्टलों से ली गई है जो अक्सर सरकार की आलोचना करते हैं।

उन्होंने कहा, “वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और उससे संबद्ध संगठनों यहां तक कि हमारे प्रधानमंत्री को भी निशाना बना रहे हैं। मैं अकादमिक परिषद की सोमवार की बैठक में यह मुद्दा उठाउंगा और सुनिश्चित करुंगा कि इसे अनुमति न मिले।”

इस बीच अंग्रेजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर राज कुमार ने कहा कि उनके विभाग का रुख किसी भी समुदाय की भावनाओं को आहत न करने को लेकर दृढ़ है।

सूत्रों ने बताया कि मुद्दे को विश्वविद्यालय की स्नातक पाठ्यक्रम संशोधन समिति पहले से ही उठा चुकी है और विवादित हिस्सों में सुधार होगा।

अरेस्ट हो सकते हैं आजम खान, निकला भू-माफिया, 26 किसानों को बंधक बनाकर हड़प ली करोड़ों की जमीन

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यूपी के रामपुर का जिला प्रशासन अब राज्य सरकार के ‘एंटी-भू माफिया’ पोर्टल पर सपा नेता आजम खान को भूमि माफिया के रूप में सूचीबद्ध करने पर विचार कर रहा है।

उत्तर प्रदेश में 2017 में सत्ता संभालने के तुरंत बाद ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भू-माफिया की पहचान करने और जमीन कब्जाने से संबंधित लोगों की शिकायत दर्ज कराने के लिए इस पोर्टल की शुरुआत की थी।

पुलिस के अनुसार, नवनिर्वाचित लोकसभा सदस्य आजम खान पर 30 से भी ज्यादातर मामले दर्ज हैं। जिनमें सबसे ज्यादा मामले सरकारी जमीन और गरीबों की जमीन हथियाने के हैं। रामपुर के पुलिस अधीक्षक अजय पाल शर्मा ने बताया कि जमीन हथियाने के कई मामलों को ध्यान में रखते हुए आजम खान का नाम एंटी-भू माफिया पोर्टल में सूचीबद्ध करने पर विचार किया गया है।

आखिर कुत्ते क्यों करते हैं हमेशा टांग उठाकर पेशाब, इस राज का रहस्य कर देगा सोचने पर मजबूर

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आज के समय में देखा गया है कि अधिकांश घरों में पालतू जानवर के रूप में कुत्ते को ;पाला जाता हैं क्योंकि इन्हें अपने मालिक के प्रति वफादार माना जाता हैं। कई लोग कुत्तों को शौकिया तौर पर पालते हैं तो कई सुरक्षा के लिहाज से। आपने गौर किया होगा कि जब भी कभी कुत्तों के मालिक उन्हें सैर पर लेकर जाते हैं तो कुत्ते किसी खम्बे या गाडी को ढूंढते हुए टांग ऊपर करके पेशाब करते हैं। आपके जहन में भी यह सवाल तो उठा ही होगा कि आखिर कुत्ते हमेशा टांग उठाकर ही पेशाब क्यों करते हैं। आज हम आपको इसराज का रहस्यबताने जा रहे हैं। तो आइये जानते है इसके बारे में।

कुत्ता स्वयं जहां रहता है, उस क्षेत्र को अपना प्रदेश मानकर उसमें सभी स्थानों पर अपनी पहचान छोडता जाता है। दूसरे प्राणियों की तरह कुत्तों की पेशाब में भी कुछ ऐसे रासायनिक घटक होते हैं जिसकी तीव्र गंध प्रत्येक कुत्ते के केस में बदलती रहती है। फेरोमोंस की यह गंध प्रायः सभी कुत्ते आसानी से पहचान सकता हैं।

अपने मालिक के साथ नाता बना रहे, अलग न हो जाए, घर न भूल जाए, इस कारण भी कुत्ता जिस स्थान पर रहता है, उस स्थान पर यहां-वहां पेशाब करके अपने चिन्ह छोडता जाता है। मालिक के घर की साइकल, स्कूटर या कार जैसी चलती फिरती चीजों पर भी कुत्ता इस कारण ही पेशाब करता रहता है। मालिक अपने कुत्ते को लेकर घूमने निकलता है तब भी राह चलते थोडे-थोडे अंतर से पेशाब कर रास्ते में अपने ‘पदचिन्ह’ छोडता जाता है। 

जब कुत्ते ऐसा करते हैं तो उसके पीछे उनका मकसद होता है दूसरे कुत्ते के लिए अपनी गंध छोड़ना। इतना ही नहीं वे इस गंध का इस्तेमाल अपने रास्ते की पहचान के तौर पर भी करते है। कुत्ते की टांग ऊँची करके पेशाब करने की वजह है, वे दूसरे कुत्ते की नाक के सामानांतर अपनी गंध छोड़ते हैं।

ससुर मुकेश अंबानी ने श्लोका के जन्मदिन पर बहू से मांगा खास गिफ्ट, Video के जरिए कही बात

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भारत के ही नहीं बल्कि एशिया के भी सबसे बड़े रईसों में से एक मुकेश अंबानी की बहू श्वोका मेहता ने 11 जुलाई को अपना जन्मदिन सेलिब्रेट किया है, हालांकि मिसेज आकाश अंबानी बनने के बाद उनका ये पहला बर्थ डे था, इसलिए इस बार का जन्मदिन उनका बड़ा खास था और इस खास को बेहद खास बनाया उनके ससुराल वालों ने, जी हां, श्लोका के बर्थडे के मौके पर अंबानी फैमिली ने एक खास वीडियो मैसेज शेयर किया है, जो कि बेहद इमोशनल, टचिंग और दिल को छू लेने वाला है।श्वलोका मेहता अंबानी 
अंबानी परिवार ने शेयर किया दिल छू लेने वाला Video

इस वीडियो में मुकेश अंबानी की पूरी फैमिली अपनी लाडली बहू को जन्मदिन विश कर रही है, इस वीडियो की शुरूआत श्लोका के बचपन की फोटोज होती है, जिसमें वो लिटिल आकाश के साथ शरारतें करती नजर आती हैं, दोनों की बॉडिंग शुरू से ही काफी अच्छी थी और शायद इसी वजह से बचपन की दोस्ती, पहले प्रेम और अब शादी में तब्दील हुई है।

मुंबई 
ससुर मुकेश अंबानी ने बहू से की खास डिमांड

श्लोका को वीडियो में सबसे पहले बर्थडे विश उनके ससुर मुकेश अंबानी कर रहे हैं, वो अपनी बेटी को बहुत सारी शुभकामनाएं देते हैं और कहते हैं कि डियर श्लोका, बतौर मिसेज श्लोका आकाश अंबानी के रूप में पहले जन्मदिन की बहुत बधाई, मुझे यकीन है कि अगले साल जब मैं तुम्हे बर्थडे विश करूंगा तो मैं दादा बन जाऊंगा, लेकिन तुम एक मां बन जाओगी। तुम्हें बहुत सारा प्यार, खुशी और सफलता मिले, बेटा।
नीता अंबानी ने कहा- मेरी प्यारी श्लोका, हैप्पी बर्थडे 
सासू मां नीता अंबानी ने किया विश

नीता अंबानी ने कहा- मेरी प्यारी श्लोका, हैप्पी बर्थडे। बतौर श्लोका मेहता अंबानी ये तुम्हारा पहला बर्थडे है। तुम्हारे आने के बाद हमारा घर सबसे बड़ा फूड डेस्टिनेशन बन गया है। नीता अंबानी आगे कहती हैं- अभी तक मैं और आकाश ही क्रिकेट के दीवाने थे। मुकेश अंबानी कभी-कभी देखने आते थे। तुम्हारे आने के बाद हमारा क्रिकेट केवल मुंबई इंडियन्स तक नहीं सिमट गया है। अब हमारा क्रिकेट वर्ल्ड कप, फैंटेसी क्रिकेट तक फैल गया है, तुम्हारी बातें, तुम्हारी किताबें, तुम्हारी चाय, सब हमारे लिए खास है क्योंकि तुम बेहद खास हो।

ईशा ने भी अपनी सहेली से भाभी बनी श्वलोका के बर्थडे विश किया 
ईशा अंबानी ने पति संग किया विश

ईशा ने भी अपनी सहेली से भाभी बनी श्वलोका के बर्थडे विश किया और कहा कि हमारी जिंदगी में आने के लिए बहुत शुक्रिया, आप मेरी भाभी ही नहीं मेरी बहुत अच्छी दोस्त भी हो।

‘हमारी शादी को चार महीने हो गए हैं, ये बेहतरीन जर्नी रही है, लव यू’ 
पति आकाश अंबानी ने ऐसे किया विश

वीडियो में आकाश अंबानी ने खास ढंग से अपनी वाइफ को विश किया है। आकाश ने कहा- तुम्हारा बर्थडे मेरे लिए साल का सबसे बड़ा सेलिब्रेशन होता है। इसी दिन मैं भगवान को शुक्रिया कहता हूं कि तुम इस धरती पर आई। मैं भगवान को मुझे तुम्हारा साथ देने के लिए भी धन्यवाद देता हूं। पिछले 11 साल हमारी जर्नी के सबसे बेहतरीन पल थे। हमने अपने अच्छे और बुरे वक्त में काफी कुछ सीखा है। श्लोका हमारी शादी को चार महीने हो गए हैं, ये बेहतरीन जर्नी रही है, लव यू।

जानिए क्यों कैलाश पर्वत पर आज तक नहीं चढ़ पाया कोई

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हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत का बहुत महत्व है, क्योंकि यह भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। लेकिन इसमें सोचने वाली बात ये है कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को अभी तक 7000 से ज्यादा लोग फतेह कर चुके हैं, जिसकी ऊंचाई 8848 मीटर है, लेकिन कैलाश पर्वत पर आज तक कोई नहीं चढ़ पाया, जबकि इसकी ऊंचाई एवरेस्ट से लगभग 2000 मीटर कम यानी 6638 मीटर है।

यह अब तक रहस्य ही बना हुआ है। कैलाश पर्वत पर कभी किसी के नहीं चढ़ पाने के पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं। कुछ लोगों का मानना है कि कैलाश पर्वत पर शिव जी निवास करते हैं और इसीलिए कोई जीवित इंसान वहां ऊपर नहीं पहुंच सकता। मरने के बाद या वह जिसने कभी कोई पाप न किया हो, केवल वही कैलाश फतह कर सकता है। ऐसा भी माना जाता है कि कैलाश पर्वत पर थोड़ा सा ऊपर चढ़ते ही व्यक्ति दिशाहीन हो जाता है।

चूंकि बिना दिशा के चढ़ाई करना मतलब मौत को दावत देना है, इसीलिए कोई भी इंसान आज तक कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ पाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक पर्वतारोही ने अपनी किताब में लिखा था कि उसने कैलाश पर्वत पर चढ़ने की कोशिश की थी, लेकिन इस पर्वत पर रहना असंभव था, क्योंकि वहां शरीर के बाल और नाखून तेजी से बढ़ने लगते हैं। इसके अलावा कैलाश पर्वत बहुत ही ज्यादा रेडियोएक्टिव भी है।

इसके अलावा कहते हैं कि कैलाश पर्वत का स्लोप (कोण) भी 65 डिग्री से ज्यादा है, जबकि माउंट एवरेस्ट में यह 40-60 तक है, जो इसकी चढ़ाई को और मुश्किल बनाता है। ये भी एक वजह है कि पर्वतारोही एवरेस्ट पर तो चढ़ जाते हैं, लेकिन कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ पाते। रूस के एक पर्वतारोही, सरगे सिस्टियाकोव ने बताया कि, ‘जब मैं कैलाश पर्वत के बिल्कुल पास पहुंच गया तो मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। मैं उस पर्वत के बिल्कुल सामने था, जिस पर आज तक कोई नहीं चढ़ सका, लेकिन अचानक मुझे बहुत कमजोरी महसूस होने लगी और मन में ये ख्याल आने लगा कि मुझे यहां और नहीं रुकना चाहिए।

उसके बाद जैसे-जैसे मैं नीचे आते गया, मेरा मन हल्का होता गया।’ कैलाश पर्वत पर चढ़ने की आखिरी कोशिश लगभग 18 साल पहले यानी साल 2001 में की गई थी। जब चीन ने स्पेन की एक टीम को कैलाश पर्वत पर चढ़ने की अनुमति दी थी। फिलहाल कैलाश पर्वत की चढ़ाई पर पूरी तरह से रोक लगी हुई है, क्योंकि भारत और तिब्बत समेत दुनियाभर के लोगों का मानना है कि यह पर्वत एक पवित्र स्थान है, इसलिए इस पर किसी को भी चढ़ाई नहीं करने देना चाहिए। हालांकि कहते हैं कि 92 साल पहले यानी साल 1928 में एक बौद्ध भिक्षु मिलारेपा ही कैलाश पर्वत की तलहटी में जाने और उस पर चढ़ने में सफल रहे थे। वह इस पवित्र और रहस्यमयी पर्वत पर जाकर जिंदा वापस लौटने वाले दुनिया के पहले इंसान थे। इसका उल्लेख पौराणिक साहियों में भी मिलता है।

यहाँ बिन पेट्रोल-डीजल चलती है गाड़ी, भारत की सबसे खतरनाक पहाड़ी : ग्रैविटी हिल

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लदाख के लेह की रहस्यमयी पहाड़ी के बारे में. यह पहाड़ी किसी जादू से कम नहीं है और वैज्ञानिकों का ऐसामानना है कि इस पहाड़ी में चुंबकीय शक्ति है, जो कि गाड़ियों को करीब 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अपनी ओर खींचती है. अतः इसीलिए इसे ‘मैग्नेटिक हिल’ भी कहा जाता है.

इस मैग्नेटिक हिल को ‘ग्रैविटी हिल’ के नाम से भी खूब जाना जाता है और माना जाता है कि इस पहाड़ी पर गुरुत्वाकर्षण का नियम भी पूरी तरह से फेल हो जाता है और गुरुत्वाकर्षण के नियम कि माने तो अगर हम किसी वस्तु को ढलान पर छोड़ दें तो वह नीचे की तरफ लुढ़केगी, लेकिन चुंबकीय पहाड़ी पर ऐसा नही देखने को मिलता है. यहां हम किसी कार को अगर गियर में डालकर छोड़ दें तो कार ढलान पर नीचे की ओर न जाकर ऊपर की ओर चढ़ने लगेगी.

बता दें कि यहां पर किसी तरल पदार्थ को भी बहाने पर वह नीचे की तरफ न जाकर ऊपर की तरफ ही जाएगा. साथ ही इस पर वैज्ञानिकों का ऐसा मानना है कि गुरुद्वारा पठार साहिब के पास स्थित पहाड़ी में गजब की चुंबकीय शक्ति है और इस पहाड़ी की चुंबकीय शक्ति से आसमान में उड़ने वाले जहाज भी नहीं बचते हैं. जानकारी की माने तो पहाड़ी के ऊपर से उड़ान भर चुके कई पायलटों ने यह दावा है कि यहां उड़ान भरते समय हवाई जहाज में कई झटके महसूस होते हैं और हवाई जहाज को पहाड़ी की चुंबकीय शक्ति से बचाने हेतु जहाज की रफ्तार में इजाफा कर दिया जाता है.

छत्तीसगढ़ : हर परिवार का बनेगा नया राशन कार्ड, आप ऐसे करें आवेदन

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छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार की फूड फॉर ऑल स्कीम को अमली जामा पहनाने की कवायद 15 जुलाई से शुरू हो रही है. इसके तहत हर परिवार का राशन कार्ड बनाया जाएगा. जिनके पास पहले से राशन कार्ड हैं, उन्हें भी नए कार्ड के लिए आवेदन करना होगा. क्योंकि योजना शुरू होने के बाद पुराने कार्ड अमान्य घोषित कर दिए जाएंगे. छत्तीसगढ़ के मुख्य अखबारों ने सोमवार के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

दैनिक भास्कर ने लिखा है- फूड फॉर ऑल योजना के तहत राज्य सरकार 15 से 29 जुलाई तक नए राशन कार्ड बनाने और पुराने राशन कार्ड के नवीनीकरण के लिए प्रदेशभर में शिविर लगाएगी. पांच साल से ज्यादा पुराने 58.54 लाख राशन कार्ड का नवीनीकरण किया जाएगा. आवेदन लेने के बाद एक से आठ सितंबर तक शिविर लगाकर नए राशन कार्डों का वितरण किया जाएगा.

पांच साल तक वैध
सार्वजनिक वितरण प्रणाली आदेश 2016 के खंड 4 उपखंड 6 के प्रावधानों के मुताबिक राशन कार्ड जारी किए जाने के 5 वर्ष तक ही वैध है. इस हिसाब से वर्ष 2013-14 में बनाए गए राशन कार्ड 2018-19 तक वैध हैं. इसके बाद इनकी वैधता समाप्त हो चुकी है. अब नए सिरे से जिले में राशन कार्ड बनाए जाएंगे. हालांकि अमान्य होने के बाद भी लोगों को परेशानी न हो, इसलिए पुराने कार्ड से ही राशन का वितरण किया जा रहा है. ऐसा तब तक चलेगा, जब तक नया राशन कार्ड नहीं मिल जाता. बीपीएल के साथ एपीएल राशन कार्ड भी बनाए जाएंगे। 

ऐसे करें आवेदन
नए राशन कार्ड बनवाने या नवीनीकरण के लिए एक पन्ने के आवेदन पत्र में जानकारी देनी होगी. साथ ही परिवार के मुखिया की 2 पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड और बैंक खाते की फोटोकापी लगेगी. नया राशन कार्ड निशुल्क बनाया जा रहा है. नया राशन कार्ड मिलने के बाद ही पुराना राशन कार्ड जमा करें.

प्रॉपर्टी टैक्स में छूट बिजली बिल हाफ की तरह राजधानी रायपुर के लोगों को जल्द ही प्रॉपर्टी टैक्स में 50 फीसदी छूट का फायदा मिल सकता है. चार महीने बाद नगरीय निकाय चुनाव है. अक्टूबर-नवंबर में आचार संहिता लग जाएगी. राज्य सरकार की ओर से संकेत मिले हैं कि इससे पहले ही टैक्स में छूट को लागू कर दिया जाए. कांग्रेस विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में इसकी घोषणा कर ही चुकी है. हालांकि रायपुर नगर निगम को संपत्तिकर के रूप में करीब 40 करोड़ मिलते हैं. इसपर 50 फीसदी छूट लागू होने से निगम को करीब 20 करोड़ का भार पड़ेगा. अफसरों का कहना है कि टैक्स में छूट की घोषणा सरकार की ओर से होगी. लिहाजा यह राशि शासन से निगम को मिल जाएगी. इस स्थिति में निगम को कोई अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा. बिजली बिल में भी छूट की राशि सरकार बिजली कंपनी को दे रही है. इस खबर को भी दैनिक भास्कर सहित अन्य अखबारों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

गुजरात में सात महिलाओं सहित जुआ खेल रहे आठ गिरफ्तार

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 गुजरात में राजकोट शहर के आजी डैम क्षेत्र में जुआ खेल रही सात महिलाओं सहित आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने रविवार को बताया कि खुफिया सूचना के आधार पर राधेश्याम सोसायटी शेरी-1 स्थित एक मकान पर शनिवार शाम छापा मारा गया।

इस दौरान वहां जुआ खेल रही सात महिलाओं और युवक को पकड कर उनसे 27 हजार 500 रुपये नकद तथा अन्य सामान जब्त कर लिया। पुलिस ने मामला दर्ज करके आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।

आराकोट मोरी क्षेत्र में महज एक साल के भीतर फल दे रहे हैं सेब के उन्नत प्रजाति के पेड़

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अनुकूल जलवायु होने पर भी मोरी क्षेत्र के कई गांवों में लगे सेब के बागीचों में तो बीस साल इंतजार के बाद भी फल नहीं आ रहे हैं, जबकि इसी प्रखंड के आराकोट क्षेत्र में कई किसानों ने रूटस्टॉक से तैयार सेब की हाईब्रिड प्रजाति किंग रॉट, गालाशिनीगो, आईडी-1, आईडी-2, आईडी-3, रूटस्टॉक एम-9, एम-111 व जनेवा आदि प्रजाति के सेब के पेड़ लगाकर महज एक साल के भी फसल लेनी शुरू कर दी है। खन्यासणी गांव में सूरत चौहान ने उद्यान विभाग से पौध लेकर 50 पेड़ लगाए, लेकिन बीस साल बाद भी बागीचे में सेब के पेड़ों पर कभी फल नहीं लगे। कमोबेश यही स्थिति गांव के मोहन सिंह व राजमोहन के 500 सेब के पेड़ों वाले बागीचों की भी है। इनके बागीचों से इस बार महज 40 पेटी सेब उत्पादन का अनुमान है। इसके उलट मोरी प्रखंड के आराकोट में महेंद्र राणा एवं आदित्य राणा ने कोका कोला कंपनी के सीएसआर मद से चल रही योजना के तहत इंडो डच हॉर्टिकल्चर कंपनी के सहयोग से अपने बागीचे में सेब की ऐसी प्रजाति लगाई कि वह एक साल में ही फल देने लगी है। महेंद्र राणा ने बताया कि उन्होंने सोलन हिमाचल के वाईएस परमार विवि व कुछ प्राइवेट नर्सरियों से तीन साल पुरानी पौध लेकर अपना 200 पेड़ का सेब का बागीचा तैयार किया। सहायक उद्यान अधिकारी एनके सिंह का कहना है कि बीते साल जिले में राष्ट्रीय बागवानी मिशन की 3.7 करोड़ और इस वर्ष 2.61 करोड़ की योजना है। किसान यदि मांग करें तो उन्हें केंद्रीय बागवानी बोर्ड में पंजीकृत नर्सरियों से उन्नत किस्म की सेब की पौध मुहैया कराई जाएगी। कोका कोला कंपनी के 65 करोड़ के सीएसआर मद से जिलों में किसानों को कौन सी प्रजाति एवं कहां से मंगा कर दी जा रही है, इसकी जानकारी नहीं है।