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जापान में 6.1 तीव्रता के भूकंप के झटके

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जापान में शनिवार को नाजे से 169 किलो मीटर उत्तर-पश्चिम में 6.1 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। अमेरिकी भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण ने इसकी जानकारी दी।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप का केंद्र 29.3349 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 128.1371 डिग्री पूर्वी देशांतर पर 242.18 किलो मीटर की गहराई में था।

डोकलाम पार्ट-2 की नापाक कोशिश, SUV में भरकर आए चीनी सैनिक, भारतीय सेना ने खदेड़ा

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चीन ने एक बार फिर डोकलाम जैसी नापाक हरकत करने की कोशिश की है। लद्दाख के डेमचॉक सेक्‍टर में एसयूवी में भरकर चीनी सैनिक बॉर्डर पर पहुंच गए। लेकिन मुस्‍तैद भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों को वास्‍तविक नियंत्रण रेखा से बाहर खदेड़ दिया। चीन ने डेमचॉक सेक्टर में डेढ़ किलोमीटर तक घुसने का दावा किया था। लेकिन भारतीय सेना ने इंकार करते हुए कहा कि चीनी सैनिकों को लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पार करने नहीं दी और उन्‍हें बाहर खदेड़ दिया गया।

बताया जा रहा है कि 6 जुलाई को लद्दाख के डेमचॉक सेक्टर के क्योल गांव में दलाई लामा के जन्मदिन मनाने का चीनी सैनिकों ने किया था। विरोध करते हुए सिविल ड्रेस में चीन के 11 सैनिकों ने बैन दिखाए। करीब तीस-चालीस मिनट रुकने के बाद चीनी सैनिक वापस लौट गए। लेकिन लद्दाख में चीनी सैनिकों के घुसपैठ से भारतीय सेना ने इंकार किया है। भारतीय सेना ने कहा है कि चीनी सैनिकों ने lac यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल को पार नहीं किया।

डोकलाम से लिया सबक

चीन ने कुछ ऐसी ही हिमाकत क़रीब दो साल पहले की थी। जब चीन के सैनिक लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर भारतीय सीमा में घुसपैठ करके डोकलाम तक दाखिल हो गए थे। उस वक्त वहां तैनात भारतीय सैनिकों ने उन्हें खदेड़ दिया था। तनाव 73 दिनों तक तक बना रहा और आखिर चीन झुकने को मजबूर हुआ था। लेकिन ड्रैगन की फितरत है आदत से बाज़ ना आने की। इसलिए फिर एक बार चीन ने कुछ वैसी ही गुस्ताखी दिखाई है। लेकिन इस बार सेना की सतर्कता से चीनी मंसूबों पर पानी फिर गया।

रायपुर से अमरनाथ यात्रा पर गई महिला की दिल का दौरा पड़ने से मौत

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से तीर्थयात्रा पर गई एक महिला की मौत हो गई है. जानकारी के मुताबिक अमरनाथ यात्रा के दौरान महिला को दिल का दौरा पड़ा जिससे उनकी मौत हो गई. महिला का नाम पल्लवी खोकले बताया जा रहा है. मृत महिला रायपुर के जैनम विहार की रहने वाली बताई जा रही हैं. फिलहाल महिला के शव को रायपुर लाने की तैयारी की जा रही है.

मिली जानकारी के मुताबिक अमरनाथ यात्रा के दौरान रायपुर की रहने वाली महिला पल्लवी खोकले की मौत हो गई है. मौत की वजह दिल का दौरा बताया गया है. मिली जानकारी के मुताबिक अमरनाथ यात्रा के लिए रायपुर से 17 लोगों का दल रवाना हुआ था. बताया जा रहा है कि वापस लौटने के वक्त गुरुवार की सुबह पल्लवी खोकले को दिल का दौरा पड़ा. तबियात बिगड़ता देख उन्हे अस्पताल में भर्ती कराया गया. अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई है.

टमाटर, आलू और प्याज में आया उछाल

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टमाटर, आलू और प्याज महंगे हो गए हैं। फुटकर बाजार में गुरुवार को टमाटर 60 से 80 रुपये किलो बिका। आलू और प्याज का भाव 25 रुपये किलो तक पहुंच गया है। टमाटर के भाव में अचानक उछाल आया।

तीन दिन पहले तक टमाटर फुटकर बाजार में 40-50 रुपये किलो बिक रहा था। आलू और प्याज 20-20 रुपये किलो मिल रहा था। मंडी में सुबह बंगलुरु से आने वाला टमाटर 35-40 रुपये किलो में बिका तो फुटकर बाजार में तेजी से उछाल आया। मुंडेरा मंडी में सुबह 20-25 रुपये किलो बिक रहा था। आलू और प्याज भी पांच रुपये किलो महंगा हुआ। अन्य सब्जियों के भाव स्थिर हैं। मंडी प्रशासन और आढ़तियों ने बाहर से आने वाली सब्जियों का भाव बढ़ने की पु्ष्टि की। मुंडेरा मंडी के आढ़ती सतीश कुशवाहा ने बताया कि मौसम खराब होने और माल भाड़ा बढ़ने से टमाटर, आलू और प्याज के भाव में तेजी आई। सतीश के मुताबिक टमाटर बंगलुरु, आलू फतेहपुर और कानपुर तथा प्याज रीवा, सतना से आ रही है।

आराम से बैठे थे बीच सड़क पर, दम इतना कि किसी की हॉर्न बजाने की नहीं हुई हिम्मत…

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सड़क एक सेकेंड का भी ट्रैफिक जाम हो जाए तो आमतौर पर लोग गाड़ी का हॉर्न बजा-बजाकर परेशान कर देते हैं. किसी में भी इतना सब्र नहीं होता है कि थोड़ देर के लिए भी सड़क खाली होने का इंतजार करे. लेकिन सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियों में खाली सड़क पर एक के बाद एक गाड़ियां आती गईं लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हुई की अपनी गाड़ी का हॉर्न बजा दे. सड़क पर एक-एक कर कई गाड़ियां आती गईं और चुपचाप खड़े होकर सड़क के खाली होने का इंतजार करती रहीं. ना किसी ने हॉर्न बजाया और ना ही किसी ने सड़क को खाली करवाने के लिए हंगामा किया है.

प्लास्टिक खाने से नौ हिरणों की मौत

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पश्चिम जापान के मशहूर उद्यान में प्लास्टिक की थैलियां खाने के बाद हाल ही में नौ हिरणों की मौत हो गई. नैरा पार्क में 1,000 से अधिक हिरण हैं और पर्यटक उन्हें नजदीक की दुकानों पर मिलने वाले खास शर्करा मुक्त क्रैकर्स खिला सकते हैं. क्रैकर्स प्लास्टिक की थैलियों में नहीं आते लेकिन लोग अब भी इन्हें अपने पास रखते हैं. एक पशु चिकित्सक ने कहा कि हिरण प्लास्टिक को खाना समझ लेते होंगे. नैरा डीर प्रीजर्वेशन फाउंडेशन ने कहा कि मार्च से लेकर अब तक 14 में से नौ हिरणों की मौत हो चुकी है क्योंकि उनके पेट में प्लास्टिक मिली. उनके पेट से प्लास्टिक का कूड़ा और स्नैक्स के पैकेट पाए गए जिनमें से एक के पेट से सबसे अधिक 4.3 किलो का प्लास्टिक पाया गया.

अरबों में खेलने वाले इस शख्स ने एक लड़की के चक्कर में तबाह कर लिया अपना जीवन

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दक्षिण भारतीय के सरवना चेन ऑफ रेस्टोरेंट्स को सभी अच्छे से जानते है। इसके मालिक पी राजगोपाल की प्यार की कथा एवं बर्बादी चर्चा का विषय बनी है। दरअसल,मौत के एक मामले में उन्हें चेन्नई के सेशन कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुनाई है।

अपने ही कर्मचारी की पुत्री पर फिदा था राजगोपाल उद्योगपति राजगोपाल अपने चेन्नई में मौजूद आउटलेट के असिस्टेंट मैनेजर की पुत्री जीवा ज्योति पर फिदा था। जबकि लड़की किसी भी हालत में राजगोपाल से विवाह नहीं करना चाहती थी। इससे पूर्व राजगोपाल को उनके ज्योतिषियों ने सलाह दी कि यदि जीवा से उनकी शादी हो गई तो उनके कारोबार में और वृद्धि होगी।

राजगोपाल ने रची हत्या की साजिश 
जब लड़की ने राजगोपाल की लालसा पूरी नहीं करते हुए अपने प्रेमी संतकुमार से विवाह कर लिया तो राजगोपाल को ये बिल्कुल भी सहन नहीं हुआ एवं उन्होंने अपने गुर्गों से लड़की के पति को मौत के घाट उतरवा दिया। जब इस हत्याकांड का खुलासा हुआ तो इसमें राजगोपाल के सम्मिलित होने पर सभी निस्तेज रह गए।

राजगोपाल का दिलचस्प व्यावसायिक इतिहास 
बताया जाता है कि राजगोपाल के पिता तमिलनाडु के तूतीकोरीन में प्याज की खेती करते थे। पिता ने खेती से ऊपर उठकर कारोबार करने का मन बना लिया।

लिहाजा उन्होंने चेन्नई में एक सब्जी की दुकान खोल ली।इसी बीच कुछ मित्रों की सलाह पर उन्होंने एक खाने पीने की दुकान खोली। एक ज्योतिष ने दुकान में बड़ा निवेश कर इसे रेस्टोरेंट तैयार करने की सलाह दी।

राजगोपाल के पिता ने साल 1981 में चेन्नई में अपना पहला रेस्तरां खोला। क्वालिटी पर विशेष तवज्जो एवं ग्राहकों के खास ख्याल रखने की रणनीति ने शीघ्र ही रेस्तरां को लोकप्रिय बना दिया।

राजगोपाल भी अपने पिता के कारोबार में हाथ बंटाने लगे।कहा जाता है कि राजगोपाल ने पिता के खोले कारोबार को विस्तार दिया एवं इसे दूसरे देशों में भी फैलाया। जल्दी हीरेस्तरां का टर्नओवर अरबों में हो गया।

इसे नसीब का खेल ही कहें कि अरबों में खेलने वाले राजगोपाल ने एक लड़की हेतु अपनी जिंदगी तबाह कर ली। अब शख्स को ताउम्र जेल में ही सजा काटनी पड़ेगी।

रांची का शापित किला: जब भी होता है वज्रपात, इसी पर होता है

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रांची से 17 किलोमीटर दूर स्थित पिठोरिया का किला कभी जमींदार जगतपाल की शान हुआ करता था. लेकिन आज यह खंडहर में तब्दील हो गया है. आसपास के गांववाले इस किले के अंदर जाने से भी कतराते हैं. जमींदार का पूरा वंश खत्म हो चुका है. और वज्रपात ने इस किले की बर्बादी की पूरी कहानी लिख दी है. इलाके में जब भी आसमानी बिजली गिरती है. इसी किले पर गिरती है.

किले को लेकर प्रचलित हैं कई किवदंतियां 

इलाके के लोग बताते हैं कि जमींदार जगतपाल को शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव का श्राप लग गया. उसी के कारण आज ये किला खंडहर में तब्दील हो गया है. बुजुर्ग रमेश ठाकुर का कहना है कि इलाके में जब भी वज्रपात होता है, इस किले पर ही होता है. तब किले से धुएं का गुबार उठता नजर आता है. गांववालों का ये भी कहना है कि जमींदार जगतपाल ने क्रांतिकारियों को अंग्रेजों के हाथों पकड़वा दिया था. उसी कर्म का फल आज ये किला भोग रहा है.

किले की देख रेख करने वाले शिक्षक उमेश का कहना है कि इस किला को बनाने वाले कारिगरों के हाथ जमींदार जगतपाल ने कटवा दिये थे. उनके श्राप का ही नतीजा है कि किले पर वज्रपात का कहर टूटता रहता है.

किले पर वज्रपात के कई कारण 

हालांकि भू-गर्भ शास्त्री नीतीश प्रियदर्शी का कहना है कि किले में वज्रपात होने को लेकर लोककथाएं हो सकती हैं. लेकिन विज्ञान इसे नहीं मान सकता. उनके मुताबिक किले के ऊपर वज्रपात के कई कारण हो सकते हैं. मसलन वहां की मिट्टी, मौसम का मिजाज, ऊंचे जगह पर होना. इन वजहों से किले पर वज्रपात हो सकता है. खंडहर में तब्दील हुआ किला

कारण जो भी हो वज्रपात ने इस किले के वर्तमान को स्याह कर दिया है. जबकि इसमें मौजूद आकर्षक कलाकृतियां इसके समृध इतिहास की कहानी कहता है. लेकिन यह सब झाड़ियों, जहरीले सांपों और स्याह अंधेरे के राज में धूमिल होती जा रही हैं.

इन राजाओं के अजीब शौक को जानकर आप भी रह जाएंगे दंग!

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 विश्व में हर इंसान के अपने भिन्न शौक होते हैं जिन्हे वे अपनी हॉबी के तौर पर जारी रखते हैं। बता दें किआपको विश्व में ऐसे कई शख्स मिल जाएंगे जिनके शौकसचमुच में अजीबोगरीब है। दरअसल, आज हम आपको ऐसे राजा महराजा के सम्बन्ध में जानकारी देंगे जिनके शौक दूसरों से काफी अलग है।

महाराजा निज़ाम मीर उस्मान अली खां

हैदराबाद के महाराजा निज़ाम मीर उस्मान अली खां को बेशकीमती जवाहरातों का शौक था। उनका शौक इस हद तक था कि वे विश्व के पांचवें सबसे बड़े 184.97 कैरट के जैकब हीरों का उपयोग एक पेपर वेट जैसे ही करते थे। इनके मरने के पश्चात ये पूरा खजाना भारत सरकार के पास आ गया। उनके पास करीबन 2 बिलियन डॉलर खजाना प्राप्त हुआ था।

महाराजा महाबत रसूल खान

जूनागढ़ के राजा महाबत रसूल खान को कुत्ते पालने का शौक था। इनके पास लगभग 800 कुत्ते थे। प्रत्येक एक कुत्ते की देखभाल करने हेतु एक सैनिक भी था। अगर कुत्तों को कोईरोग होता था तो उनका इलाज भी ब्रिटिश सृजन करता था। साथ हो वो अपने कुत्तों का विवाह भी करवाते थे और उसवक्त कुत्तों की इस शाही शादी में 22,000 रूपए व्यय होते थे, जो वर्तमान में लगभग 2.25 करोड़ के बराबर हैं।

महाराजा जगजीत सिंह

महाराजा जगजीत सिंह कपूरथला के महाराज थे। वे लग्जरी ब्रांड लुइ विटन के सबसे बड़े ग्राहक थे। उनके पास लगभग 60 बड़े लुइ विटन के शानदार बक्से थे। कहीं सफर करने के दौरान वो इन्ही बक्सों को कैरी करते थे।

महाराजा गंगा सिंह

महाराजा गंगा सिंह अपने राज्य की जनता को काफी प्रेम करते थे और उन्हें सोना वितरण थे। एक बार तो उन्‍होंने अपने वजन के बराबर सोना गरीब लोगों में वितरण किया।

महाराजा जय सिंह

अलवर के महाराजा जय सिंह अपना जीवन सचमुच में काफी रॉयल अंदाज में जीते थे। उन्होंने लग्जरी कार कंपनी रोल्स रॉयस से बदला लेने हेतु 10 कारों की छतें निकलवा कर उन्हें कूड़ा उठाने हेतु लगा दिया था

अक्टूबर माह से मिलेगी कंफर्म सीट, अब ट्रेन में रिजर्वेशन मिलना होगा आसान

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किसी भी सफर पर जाने से पहले हमारे सामने जो सबसे बड़ी समस्या होती है वह है ट्रेन के भीतर रिजर्वेशन मिल पाना। हमे यात्रा से पहले ट्रेन के भीतर रिजर्वेशन को लेकर काफी मशक्कत करनी पड़ती है। लेकिन यात्रियों की इस समस्या को दूर करने के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। माना जा रहा है कि रेलवे के इस फैसले के बाद काफी हद तक यात्रियों को इस समस्या से निजात मिल सकती है। जानकारी के अनुसार अक्टूबर माह से हर रोज ट्रेनों के भीतर चार लाख अतिरिक्त सीटें मिलेंगी।New technology 
नई तकनीक का इस्तेमाल

जानकारी के अनुसार नई तकनीक के जरिए रेलवे लोगों की इस समस्या को कम करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए ट्रेन में अब ओवरहेड तार के जरिए बिजली की सप्लाई की जाएगी और जनरेटर कोच की जगह स्लीपर कोच ट्रेनों में लगाए जाएंगे। रेलवे के अधिकारियों ने बुधवार को इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि ट्रेनों में इस तकनीक को अपनाकर स्लीपर कोच में बढ़ोतरी की जाएगी, जिससे यात्रियों को काफी सहूलियत होगी।

बता दें कि अभी तक ज्यादातर ट्रेनों में दो जनरेटर कोच लगाए जाते हैं। जिसके जरिए अन्य डिब्बों में बिजली की सप्लाई की जाती है। लेकिन अब भारतीय रेल हेड ऑन जनरेशन तकनीक को अपनाने जा रही है। इसके जरिए जैसे इलेक्ट्रिक इंजिन को बिजली सप्लाई की जाती है उसी तरह से डिब्बो को भी बिजली सप्लाई की जाएगी। ऐसा पैंटोग्राफ नाम का उपकरण लगाकर डिब्बों को बिजली सप्लाई की जाएगी। इस तकनीक के बाद जनरेटर कोच की जरूरत नहीं पड़ेगी और ट्रेनों के भीतर अतिरिक्त कोच लगाए जा सकेंगे।

अधिकारियों ने बताया कि इस नई तकनीक के जरिए अक्टूबर माह तक पांच हजार डिब्बों को ट्रेन में लगाया जाएगा। जिससे लोगों को टिकट की मारामारी से काफी हद तक राहत मिलेगी। इससे ट्रेनों में ना सिर्फ सीटें बढ़ेंगी बल्कि डीजल के खर्च में भी कमी आएगी। हर वर्ष छह हजार करोड़ रुपए की भी बचत होगी। बता दें कि जनरेटर से ट्रेन में बिजली सप्लाई करने से साधारण डिब्बों में 40 लीटर डीजल की खपत हर घंटे होती है। वहीं एसी कोच में हर घंटे 65-70 लीटर डीजल खर्च होता है।