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स्कूलों-आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों और अस्पताल में मरीजों को मिलेंगे सेब, बागवानों को मिलेगा फायदा

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हिमाचल के सरकारी स्कूलों में दोपहर के भोजन और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को दूध-दलिये के साथ हिमाचल का सेब भी खाने को मिलेगा। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीज व रेल में सफर करने वाले यात्री भी हिमाचली सेब का स्वाद चख सकेंगे। प्रदेश सरकार का उपक्रम एचपीएमसी पहली बार बागवानों से सेब खरीदकर संबंधित विभागों को देगा। इस सेब को मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और रेलवे को भी बेचेगा। इन राज्यों से बातचीत चल रही है।

गुरुवार को बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में एचपीएमसी के निदेशक मंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया। बागवानी मंत्री ने बताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बाल कल्याण विभाग से बैठक कर उनके संस्थानों में सेब मुहैया करवाने की योजना तैयार करेंगे।

एचपीएमसी बागवानों से सेब खरीदकर संबंधित विभागों को देगा। इसे मंजूरी के लिए कैबिनेट की आगामी बैठक में लाया जाएगा। सेब खरीद के लिए 100 कलेक्शन सेंटर स्थापित होंगे। एचपीएमसी की इस नई व्यवस्था के बाद सेब बागवानों को इसका लाभ होगा।

एक तो उनके सी-ग्रेड सेब की बिक्री को नई मार्केट मिलेगी, वहीं एचपीएमसी समय पर बागवानों के पैसे का भी भुगतान कर पाएगा। अभी तक सेब बागवानों के सामने सी ग्रेड सेब का समय पर भुगतान नहीं हो पाना बड़ी समस्या है। 

दागी सेब की क्रेट में होगी ढुलाई

क्वालिटी खरीद के लिए सुपरवाइजर रखे जाएंगे। परवाणू में सेब की बोली लगेगी। शिमला जिले के पराला में बड़ी और गांवों में छोटी सेब प्रोसेसिंग यूनिटें खुलेंगी। बागवानों को कार्टन भी देंगे। 31 मार्च, 2018 तक एचपीएमसी 86.55 करोड़ के घाटे में था। इस घाटे को दूर करने और सेब मार्केट का विस्तार करने के लिए निदेशक मंडल की बैठक में यह फैसले लिए गए।

निदेशक मंडल ने फैसला लिया कि दागी सेब की ढुलाई इस बार क्रेट में होगी। ओलावृष्टि से चौपाल, जुब्बल कोटखाई, रोहड़ू, करसोग और जंजैहली में काफी फसल दागी हुई है। क्रेट में सेब परवाणू तक पहुंचाकर खराब होने से बचाया जा सकेगा। इससे सेब के दाम अच्छे मिलैंगे। परवाणू में होने वाली सेब की बिक्री के दौरान एचपीएमसी के वाइस चेयरमैन, एजीएम, जीएम सहित अन्य बड़े अधिकारी एक-एक दिन मौजूद रहेंगे। अभी 2.47 रुपये प्रति किलो के दाम पर यहां सेब बिकता है।

सब्सिडी लेने वाली प्रोसेसिंग यूनिटों से 15 को बैठक 
बागवानी मंत्री ने बताया कि कई उद्योगों ने प्रदेश में सेब प्रोसेसिंग के लिए सब्सिडी ली है, लेकिन कच्चा माल बाहरी राज्यों से ले रहे हैं। ऐसे उद्योग संचालकों के साथ 15 जुलाई को बैठक होगी। इस सीजन में यह उद्योग कितना सेब उठाएंगे, इस बैठक में फैसला लेंगे।

दारा सिंह पुण्यतिथि: एक ऐसा पहलवान जो बॉलीवुड का बना सुपरस्टार, पढ़ें जीवन के कुछ अनसुने किस्से

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ही-मैन की उपाधि से नवाजे गए धर्मेंद्र ने अपने संघर्ष के उन दिनों को याद करते हुए कहा था कि असली ही-मैन तो दारा सिंह जी हैं, जिनकी वजह से दर्शक फिल्में देखने जाते थे. बात एकदम वाजिब है. कभी पर्दे पर दारा सिंह की जोर आजमाइश दर्शकों को खूब लुभाती थी. साठ के दशक में एक दौर ऐसा भी था, जब मुंबई के आधे से ज्यादा थिएटरों में दारा सिंह की फिल्में धूम मचाती थीं.

‘किंगकांग’, ‘रूस्तम-ए-बगदाद’, ‘फौलाद’, ‘सैमसन’, ‘आया तूफान’, ‘हरक्यूलस’, ‘वीर भीमसेन’, ‘शेर दिल’, ‘बॉक्सर’, ‘राका’, ‘लुटेरा’, ‘सिकंदर-ए-आजम’, ‘सरदार’, ‘नसीहत’, ‘तूफान’, ‘थीफ ऑफ बगदाद’, ‘रूस्तम’, ‘बजरंग बली’ आदि 150 से ज्यादा फिल्मों में काम करनेवाले दारा सिंह के फिल्मों की लंबी फेहरिस्त है. इनमें एक्शन से लेकर पौराणिक और धार्मिक हर तरह की फिल्में हैं. रास आईं चरित्र भूमिकाएं दारा सिंह ने उम्र के एक पड़ाव पर चरित्र भूमिकाएं भी जमकर की. याद कीजिए मनमोहन देसाई की फिल्म ‘मर्द’ का एक सीन. घोड़ी पर सवार अमिताभ बच्चन शादी करने जा रहे हैं.

अचानक घोड़ी बिदक कर भाग जाती है. तब दारा सिंह बेटे बने अमिताभ को अपने कंधे पर उठा लेते हैं. बतौर चरित्र अभिनेता उन्होंने कई फिल्मों में अपनी सशक्त पहचान बनाई थी, मगर उनकी असली पहचान थी पहलवान नायक की. पहलवानी के चलते ही उन्हें फिल्मों में काम मिलना शुरू हुआ था. 50 के दशक की फिल्मों में उनकी कुश्ती कोे खूब प्रचारित किया जाता था. 1954 में रूस्तम-ए-हिंद की उपाधि पाने के बाद मानों उनकी पूरी दुनिया ही बदल गई. फिल्मों में उन्हें कुश्ती के दांव खेलते खूब दिखाया जाता था. 1962 में आई ‘किंगकांग’ ने तो उनकी किस्मत ही बदल दी थी.

एक एक्टर से लेकर राज्यसभा सदस्य तक उन्होंने हर जिम्मेदारी बखूबी निभाई. यही नहीं, सिने एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन (सिंटा) के अध्यक्ष के तौर पर उनकी विनम्रता और सहयोगी व्यवहार को आज भी लोग याद करते हैं. छोटे से गांव से आए थे अमृतसर जिले के छोटे से गांंव धरमू चाक में 19 नवंबर 1928 को जन्मे दारा सिंह को बचपन से ही कसरत और कुश्ती का शौक था. इस मामले में उन्हें माता-पिता बलवंत कौर और सूरत सिंह रंधावा का भी पूरा प्रोत्साहन मिला.

जब उन्हें फिल्म में पहली बार एक्टिंग का मौका मिला, तब उन्होंने निर्माता से कहा था, ”मैंने आज तक कोई फिल्म नहीं देखी है, फिर एक्टिंग कैसे करूंगा.” बहरहाल, पचास साल के अपने करियर में उन्होंने कई सम्मान अर्जित किए. बतौर निर्देशक आठ फिल्में भी बनाई. 1981 में कुश्ती को पूरी तरह से छोड़कर वह फिल्मों ओर टीवी के लिए सक्रिय हो गए थे. फिल्म ‘बजरंगबली’ में उन्होंने हनुमान के रोल को इतना जीवंत रंग दिया था कि रामानंद सागर ने कालजयी धारावाहिक ‘रामायण’ में सीधे दारा सिंह को यह रोल दे डाला. 80 दशक के इस सबसे पापुलर शो में दारा सिंह के रोल के क्रेज के बारे में कुछ बताने की जरूरत नहीं है. एक पहलवान से अभिनेता बनकर अपनी अदाकारी की छाप छोड़ने वाले दारा सिंह 12 जुलाई 2012 को इस दुनिया को छोड़कर चले गए.

रूबी रोमन किस्म के अंगूरों का एक गुच्छा 7.5 लाख रुपये में बिका

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जापान में मंगलवार को लाल अंगूरों का एक गुच्छा 1.2 मिलियन येन (करीब 7.5 लाख रुपये) में बिका. अंगूर की इस किस्म का नाम रूबी रोमन है. करीब 12 साल पहले अंगूर की यह किस्म मार्केट में आई थी. कनाजावा के थोक बाजार में इस अंगूर की रिकार्ड बोली लगाई गई. नीलामी में अंगूर के इस गुच्छे को ह्याकुराकुसो नाम की एक कंपनी ने खरीदा.

रूबी रोमन नाम का यह अंगूर आकार में बड़ा और स्वाद में बेहद मीठा व रसीला होता है. इसके हर दाने का वजन 20 ग्राम से भी ज्यादा होता है. खबर के मुताबिक अंगूर की इस किस्म को जापान के इशिकावा प्रांत में खेती से जुड़ी सरकारी समिति ने तैयार किया है.

जापान के इन लाल अंगूर के आकार को देखकर आप हैरान हो जायेंगे क्योंकि ये क्रेजी बॉल के आकार के होते हैं. ये अंगूर केवल जापान में ही उगाये जाते हैं. इसके एक गुच्छे में 30 अंगूर होते हैं और एक अंगूर का वजन 20 ग्राम तक होता है.

यह कंपनी जापान में होटल के कारोबार से जुड़ी है. इशिकावा सहकारी समिति का कहना है कि वह सितंबर तक रूबी रोमन किस्म के करीब 26 हजार गुच्छे निर्यात करेगी.

युवाओं को रोजगार देने मार्केट बनाएगी भूपेश सरकार, फूड फॉर ऑल स्कीम के लिए बनेगा कानून

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छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार ने प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने के लिए एक अहम निर्णय लिया है. युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश के हर नगरीय निकाय क्षेत्रों में मार्केट बनाने का निर्णय लिया गया है. भूपेश कैबिनेट की बैठक में ये अहम निर्णय हुआ. छत्तीसगढ़ के मुख्य अखबारों ने भूपेश कैबिनेट में हुए निर्णयों को शुक्रवार को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल की अध्‍यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्‍वपूर्ण निर्णय लिए गए. कैबिनेट की बैठक करीब तीन घंटे से ज्‍यादा समय तक चली. बैठक में निर्णय लिया गया कि राज्‍य के सभी नगरीय निकायों में पौनी पसरी माकेट शुरू किया जाएगा. इसमें लोहार, बांस, और गांव से जुड़े व्यवसाय शुरू किए जाएंगे. इससे युवाओं को रोजगार मिलेगा. 12 हज़ार से ज्यादा परिवारों को इस योजना का लाभ मिलेगा.

स्काई योजना पर ये फैसला
भूपेश कैबिनेट की बैठक में पूर्व की रमन सरकार की महत्वकांक्षी स्काई योजना पर भी निर्णय लिया गया. इसके तहत कंपनी से बात करके समीक्षा के बाद जरूरी जगह पर टॉवर लगाकर कनेक्टिविटी बढ़ाने का फैसला हुआ. योजना में 14202 टावर लगने थे, जबकि 202 टावर ही लग पाए. सरकार ने संचार क्रांति योजना के तहत अब मोबाइल फोन नहीं बांटने का निर्ण भी लिया है. कानून में होगा संसोधन
कैबिनेट की बैठक में बताया गया कि प्रदेश के सभी परिवारों को 35 किलो चावल देने की बात कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में थी. राशन कार्ड मामले में कानून में संसोधन की जरूरत है, इसलिए बैठक में इसपर सहमति बनी. फूड फॉर ऑल स्कीम के तहत अब प्रदेश के हर परिवार को इस सुविधा का लाभ मिलेगा. इसके लिए विधानसभा में कानून भी बनाया जाएगा. बैठक में अनुपूरक बजट का अनुमोदन किया गया है. विधायकों को मिलने वाले 2 करोड़ में 1.5 करोड़ विधायक और 50 लाख रुपये प्रभारी मंत्री के अनुसार खर्च करेंगे.

विधानसभा का मानसून सत्र आज से, इन मुद्दों पर सरकार को घेरेगा विपक्ष

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छत्तीसगढ़ के विधानसभा का मानसून सत्र 12 जुलाई से शुरू हो रहा है. मानसून सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी विपक्षी दलों ने कर ली है. मुख्य विपक्षी दल बीजेपी और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे ने किसान कर्ज माफी, बेरोजगारी, कानून व्यवस्था सहित कई मुद्दों पर सरकार को सदन में घेरने की योजना तैयार की है. इसके लिए दोनों ही विपक्षी दलों ने बैठक कर रणनीति भी तैयारी कर ली है.

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के विधायक सरकार के खिलाफ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाना चाह रहे हैं, लेकिन उनके विधायकों की संख्या पांच है. इनके गठबंधन वाले दल बसपा के दो विधायक हैं. अविश्वास प्रस्ताव के लिए 10 विधायकों की जरूरत पड़ेगी. इस कारण उन्हें बीजेपी विधायक दल का समर्थन लेना होगा. हालांकि बीजेपी सूत्रों की मानें तो वे फिलाहाल अविश्वास प्रस्ताव लाने के मूड में नहीं हैं. हालांकि बीते 11 जुलाई को बीजेपी विधायक दल की बैठक में सरकार को घेरने के लिए विभिन्न मुद्दों पर चर्चा जरूर की गई है.

इन मुद्दों पर घेरने की तैयारी
बीजेपी अपने विधायक भीमा मंडावी की लोकसभा चुनाव से ऐन पहले नक्सली हत्या, सूरजपुर में हिरासत में आदिवासी युवक की मौत, किसानों का कर्जमाफ नहीं होने, कानून व्यवस्था, बदलापुर की राजनीति, योजनाओं में बदलाव समेत कुछ और मुद्दों पर घेरने की तैयारी कर रही है. जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे इस बार शराबबंदी को मुख्य मुद्दा बनाकर सदन में सरकार को घेरने की योजना बनाई है. श्रद्धांजलि से शुरू होगा सत्र
विधानसभा का मानसून सत्र विधायक भीमा मंडावी सहित पूर्व सदस्यों के निधन के बाद उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ शुरू होगा. इसके बाद सदन की अन्य कार्यवाही शुरू होगी. सत्र के पहले दिन शुक्रवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक होने की संभावना है. हालांकि, उसके बाद शनिवार और रविवार को भी सत्र नहीं होगा, तब भी बैठक बुलाई जा सकती है. उसमें विपक्ष के किस मुद्दे पर सरकार की तरफ से कौन जवाब देगा, इस पर रणनीति बनेगी. इसके अलावा यह कोशिश भी रहेगी कि 15 साल सत्ता में रहने वाली भाजपा को उसके कार्यकाल के दौरान हुई गड़बड़ियों और कमियों में ही उलझाकर रखा जाए.

इस जानवर के दूध से बनता है दुनिया का सबसे महंगा पनीर, ये है कीमत

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ज्यादातर लोग पनीर खाने के शौकीन होते हैं, लेकिन क्या कभी आपने गधी के दूध का पनीर खाया है? अगर नहीं खाया तो बता दें कि सर्बिया के जेसाविका में गधी के दूध से पनीर बनता है और यह विश्व का सबसे महंगा पनीर बनाया जा रहा है. जिसकी कीमत करीब 78 हज़ार रुपये किलो तक होती है. इस पनीर के बारे में और भी चौंकाने वाली जानकारियां हैं क्योंकि ये गाय के दूध से नहीं बनता और न ही बहुत ज़्यादा मात्रा में बनाया जा सकता है. दुनिया के सबसे महंगे पनीर के बारे में दिलचस्प बातें जानें.

सफेद रंग का, घना जमा और स्वादिष्ट फ्लेवर युक्त यह पनीर सर्बिया के एक फार्म में गधी के दूध से बनाया जाता है और इसे बनाने वाले स्लोबोदान सिमिक की मानें तो ये पनीर न केवल लज़ीज़ होता है बल्कि सेहत के लिहाज़ से भी बेहतर विकल्प है. उत्तरी सर्बिया के एक कुदरती रिज़र्व को ज़ैसाविका के नाम से जाना जाता है. यहां सिमिक 200 से ज़्यादा गधों को पालते हैं और उनके दूध से कई तरह के उत्पाद तैयार करते हैं. आइए, आपको इन गधों और इस पनीर से जुड़ी और दिलचस्प बातें बताएं.

सिमिक का दावा है कि सर्बिया के इन गधों के दूध में मां के दूध जैसे गुण होते हैं. ‘एक मानव शरीर को जन्म के पहले दिन से ही ये दूध दिया जा सकता है और वो भी इसे ​बगैर पतला किए हुए.’ सिमिक इस दूध को कुदरत का वरदान कहते हैं और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद बताते हैं. उनका दावा है कि इसका सेवन अस्थमा और ब्रॉंकाइटिस जैसे कुछ और रोगों में फायदेमंद है.

इन दावों के बावजूद अब तक इस दूध पर वैज्ञानिक शोध नहीं हो सके हैं इसलिए सेहत के लिए इसके फायदे या गुणों के बारे में ज़्यादा मालूमात नहीं है. हालांकि यूनाइटेड नेशन्स ने इस दूध के बारे में कहा था कि ये उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है, जिन्हें गाय के दूध से एलर्जी जैसी समस्याएं हों. इसकी वजह ये भी थी कि इस दूध में प्रोटीन की मात्रा बहुत अच्छी होती है.

सिमिक की मानें तो दुनिया में उनसे पहले इन गधों के दूध से पनीर किसी ने नहीं बनाया. इस प्रॉडक्ट पर वो अपना ​अधिकार मानते हैं. जब उन्हें इस दूध से पनीर बनाने का आइडिया आया तो पहली समस्या ये थी कि इस दूध में कैसीन का स्तर कम होता है, जो पनीर के लिए बाइंडिंग एजेंट का काम करता है. लेकिन, चीज़ बनाने के लिए ज़ैसाविका के एक सदस्य ने सिमिक की मदद की और रास्ता ये खोजा गया कि अगर इस दूध में बकरी के दूध की कुछ मात्रा मिलाई जाए तो पनीर बनाया जा सकता है. खास बात ये है कि ये एक गधी एक दिन में एक लीटर दूध भी नहीं देती जबकि एक गाय से 40 लीटर प्रतिदिन तक दूध मिल सकता है. इसी वजह से इस पनीर का उत्पादन बहुत कम हो पाता है. एक साल में ये फार्म 6 से 15 किलो तक पनीर बनाता और बेचता है.

इस पनीर का उत्पादन कम होने के कारण इसकी कीमतें बहुत ज़्यादा हैं. इसके खरीदार ज़्यादातर विदेशी और पर्यटक होते हैं. सिमिक कहते हैं कि उनका फार्म गधों के दूध से साबुन और शराब का उत्पादन भी करते हैं. ये पनीर 2012 में तब चर्चा में आया था, जब सर्बिया के टेनिस स्टार नोवक डीजोकोविक के बारे में कहा गया था कि उनके लिए इस पनीर की सालाना सप्लाई की जाती है, हालांकि नोवाक ने इस खबर का खंडन किया था

अंडे दे रही हैं यहां की चट्टानें, वैज्ञानिकों के उड़े होश !

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दुनिया कई अनोखी चीजों से भरी पड़ी है। आज हम आपको ऐसी बात बताने जा रहे है। जिसके बारे में शायद ही आपने सोचा होगा। आप हम बात करने जा रहे है चीन की जो चीन अद्भुत चीजों से भरा पड़ा है। यहां कुछ न कुछ अजीब चीजें देखने जरूर मिल जाती है।

दरअसल, आज हम आपको ऐसी सी एक चट्टान के बारे में बताने जा रहे है। जो हर 30 साल में अंडे देती है। ये चिकने अंडे पहले तो एक कवच में होते हैं और चट्टान इनको सेती है लेकिन कुछ दिन बाद ये अंडे सतह पर गिर जाते हैं।

अब तक आपने जानवरों और पक्षियों को अंडे देते हुए देखा होगा और सुना होगा लेकिन इस रंगी-बिरंगी दुनिया में चट्टाने भी अंडे देती हैं। इस चट्टान ने बड़े-बड़े वैज्ञानिकों का भी दिमाग हिलाकर रख दिया है।

ये चट्टान चीन के दक्षिण-पश्चिमी में ‘गिझोउ’ प्रांत में है जो करीब 20 मीटर लंबी और 6 मीटर ऊंची है। इस चट्टान का नाम ‘चन दन या’ है। इन अंडों को स्थानीय लोग खुशी का प्रतीक मानते हैं। ये अंडे जब जमीन पर गिरते हैं तो गांव वाले इन्हें बटोर कर अपने घर ले आते हैं।

ये चट्टान 500 मिलियन साल पहले बनी थी। ये एक काली और ठंडी चट्टान है, जो कई क्षेत्रों में आमतौर पर मिल जाती है। इन चट्टानो का बदलता रूप वैज्ञानिकों को भी परेशान कर रखा था

दुनिया के सबसे छोटे देश जहां रहते हैं 1000 लोग, सुविधा जानकर होस उड़ जाएगा..

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आज जो मैं आप को बताने बाला हूँ वह जानकार आप को भी हैरानी होगी जी हाँ दुनिया में अनेक देश है जो अपनी अपनी खूबियों के कारण जाने जाते हैं जी हाँ इसमें कोई दुराई नहीं हैं पर आज जो मैं आप को बताने बाला हूँ वह बहुत ही हैरान करने बाला हैं आज हम आप को बताएगे संसार के सबसे छोटे देश के बारे में जी हाँ

आप को सबसे पहले यह भी बता दें की इस संसार के सबसे छोटे देश का नाम वेटिकन सिटी हैं यह देश रोम शहर के अंदर बसा हुआ है लेकिन इसको एक देश के रूप में मान्यता मिली हुई है

आप को यह भी जानकारी दें दें की यहां की जनसंख्या लगभग 1000 हैं जी हाँ आप को जानकार यह भी हैरानी होगी की ऐसा माना जाता है कि वेटिकन सिटी की स्थापना इसलिए की गई क्योंकि कैथोलिक चर्च के मुताबिक ईसा मसीह के प्रतिनिधि को पोप कहा जाता हैऔर तो और

पोप का निवास स्थान होता है वह किसी देश के अधीन नहीं होना चाहिए अब आप तो समझ ही गए होंगे इसलिए वेटिकन सिटी को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी गई तथा

ये संसार के नक्शे पर सबसे छोटा देश बना आप को यह भी जानकारी दें दें की भले ही इस देश को दुनिया का सबसे छोटा देश का दर्जा प्राप्त है पर आज जो मैं आप को बताने बाला हूँ वह आप को भी हैरान कर देने बाला होगा यहाँ आने के लिए पासपोर्ट का सहर लिया जाता हैं और तो और जो एक दूसरे देश जाने मैं नियम का पालन करना पड़ता हैं वह सब यह भी हैं

जानकर होगी हैरानी इस देश में एक भी सांप जीबित नही बचते, जानिए वजह

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आज जो मैं जानकारी देने बाला हूँ वह बहुत ही हैरान करने बाला हैं जी हाँ आप को यह भी बताए दें की वैसे तो सांप की प्रजातियां दुनिया के हर कोने में पाई जाती हैं जी हाँ आप को यह भी बता दें की अंटार्कटिका विश्व का एक मात्र ऐसा देश है जहां सांप बिल्कुल भी नहीं पाए जाते हैं जी हाँ

आप को यह भी जानकारी सुनकर बहुत ही हैरानी होगी पर मैं आप को यह भी बता दें की इसका रीजन ये हैं की वहां सांप ठंडी जगहों पर जीवित नहीं रह पते हैं और तो और आप कोण यह भी जानकारी दें दें की बहुत ही जल्दी इनकी मौत हो जाती हैं जी हाँ आपको बता दें कि

सांपों का अस्तित्व ये धरती पर लगभग 13 करोड़ वर्षों से हैंपर आज जो मैं आप को बताने बाला हूँ वह बहुत ही हैरान करने बाला हैं जी हाँ पर मैं आप को यह भी बता दें की जिसकी जानकारी बहुत कम लोगों को हैं आप को यह यह भी जानकारी दें दें की सांप अपने मुंह के आकार से बड़े शिकार को भी निगल जाता है जी हाँ पर आप को सबसे खाश बात यह भी बता दें

की सांप सालभर में तीन बार केंचुल यानि चमड़ी पूरी तरह से निकालते हैं चमड़ी उतारने के बाद सांप एक बार फिर से तरोताजा और फुर्तीला हो जाता है जिसके बाद वह और भी तेज़ी से शिकार करता हैं आपको जानकारी दें दें की सउदी अरब यमन और कुवैत में पाया जाने वाला सांप

हॉर्नड वाइपर एक ऐसी प्र​जाति है जिसके सिर पर दो सींग होते हैं और तो और यह बहुत ही अनोखा दिखाई देता हैं पर आप को यह भी जानकारी दें दें की वही अफ्रीका में पाया जाने वाला अजगर छोटी गाय तक को निगल जाता है आप इससे ही अंदाजा लगा सकते हैं की सांप कितना खतरनाक होता हैं

मंत्री परिषद की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय

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  •  प्रदेश के सभी 168 नगरीय निकायों में जन सामान्य एवं बेरोजगार स्थानीय नवयुवक एवं नवयुवतियों को आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के लिए ‘पौनी पसारी‘ योजना प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत सभी नगरीय निकायों में परम्परागत व्यवसाय जैसे-लोहारी, कुम्हारी, कोष्टा, बंसोड़ आदि के लिए चबूतरा एवं शेड निर्माण कर, उन्हें अस्थायी रूप से किराये पर उपलब्ध कराते हुए व्यवसाय करने की सुविधा दी जाएगी। योजना में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत शेड सुरक्षित रहेगा। योजना पर दो साल में 73 करोड़ रूपए की राशि व्यय होगी और करीब 12 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। 
  •    संचार क्रांति योजना (स्काई) की समीक्षा की गई। राज्य में मोबाइल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए 14,202 टाॅवर लगाए जाने थे, लेकिन इतनी संख्या में टाॅवर नहीं लगाकर केवल 1638 टाॅवर लगाए गए। बैठक में कम्पनी को पूर्व अनुबंध के अनुसार मोबाइल कनेक्टिविटी बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य में (विशेषकर बस्तर एवं सरगुजा क्षेत्र में) शेष टाॅवर लगाने हेतु निर्देशित किए जाने का निर्णय लिया गया।
  •    सार्वभौम सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम-2012 में संशोधन पर चर्चा की गई और पात्रता बढ़ाने संबंधी निर्णय लिया गया।
  •     खरीफ विपणन वर्ष 2018-19 के लिए धान उठाव हेतु लोडिंग एवं अनलोडिंग पर वर्तमान में 13 रूपए 50 पैसे का व्यय होता है। लेकिन इसके लिए केन्द्र सरकार द्वारा केवल 6 रूपए 49 पैसे की राशि दी जाती है। पूरी राशि देने के लिए केन्द्र से मांग प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया गया।
  •     कुछ समय पहले विधायक निधि की राशि एक करोड़ रूपए से बढ़ाकर दो करोड़ रूपए की गई थी। बैठक में निर्णय लिया गया कि विधायक निधि के इस दो करोड़ रूपए की राशि में से 1.50 करोड़ रूपए तक की राशि संबंधित विधायक की अनुशंसा पर स्वीकृत की जाएगी तथा शेष 50 लाख रूपए की राशि जिले के प्रभारी मंत्री की अनुशंसा पर स्वीकृत की जाएगी।
  •     मंत्री परिषद द्वारा विधानसभा सत्र में प्रस्तुत होने वाले अनुपूरक बजट का अनुमोदन किया गया।