Home Blog Page 2968

10 साल में बहुत हालत सुधरी, फिर भी देश के 37 करोड़ लोग गरीब

0

भारत में 2005-06 से 2015-16 के बीच 27.1 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं. वहीं दुनिया के सबसे गरीब क्षेत्रों में झारखंड ऐसा क्षेत्र है, जहां गरीबी सबसे तेज कम हुई है. ग्लोबल मल्टीडायरेक्शनल पावर्टी इंडेक्स (MPI) 2019 में ये बातें सामने आई हैं. बता दें कि यह रिपोर्ट 11 जुलाई को जारी हुई है. इस रिपोर्ट को ऑक्सफोर्ड पावर्टी एंड ह्यूमन डिवेलपमेंट इनिशिएटिव (OPHI) और यूनाइटेड नेशन डिवेलपमेंट प्रोग्राम ने मिलकर तैयार किया है. इस रिपोर्ट में 10 इंडीकेटर्स के आधार पर गरीबी को लेकर 101 देशों की स्थिति बताई गई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, 2005-06 से 10 साल में कई पैमानों पर झारखंड में गरीबी 74.9 फीसदी से कम होकर 46.5 फीसदी पर आ गई. दुनिया के सबसे गरीबी क्षेत्रों में झारखंड के बाद गरीबी में सबसे तेजी से कमी कंमोडिया के रतनाक किरी में दर्ज की गई है.2005-06 से 2015-16 के बीच भारत की गरीबी 55.1 फीसदी से गिरकर 27.9 फीसदी (64 करोड़ लोगों से 36.9 करोड़ लोगों) पर आ गई.

विकासशील देशों के बीच, ऐसे 10 देश जिनकी कुल जनसंख्या 2 अरब है, भारत की MPI वैल्यू में सबसे तेज गिरावट आई है. भारत ने MPI के 10 इंडीकेटर्स में से ज्यादातर में सुधार किया है, जिनमें संपत्ति, खाने बनाने का ईंधन, स्वच्छता और पोषकता शामिल हैं. बता दें कि MPI में गरीबी की व्यापकता और तीव्रता दोनों को शामिल किया जाता है.भारत उन 3 देशों में शामिल है, जहां ग्रामीण इलाकों की गरीबी शहरी इलाकों की गरीबी की तुलना में तेजी से कम हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह गरीबी से निपटने वाले विकास का संकेत है.

ग्लोबल MPI के मुताबिक, भारत के जिन 4 राज्यों में सबसे ज्यादा MPI वैल्यू है, उनमें बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश शामिल हैं.

छत्तीसगढ़/ डाॅ. प्रेमसाय सिंह टेकाम का दौरा कार्यक्रम

0

स्कूल शिक्षा एवं कोरबा जिले के प्रभारी मंत्री डाॅ. प्रेमसाय सिंह टेकाम 12 और 13 जुलाई को कोरबा जिले के प्रवास पर रहेंगे और वहां आयोजित स्थानीय कार्यक्रम शामिल होंगे।
    डाॅ. सिंह 12 जुलाई को दोपहर 3.30 बजे रायपुर से कोरबा के लिए प्रस्थान कर रात्रि 8.30  बजे कोरबा के सीएसईबी रेस्ट हाऊस पहुंचेंगे और वहां स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं से भेंट करेंगे। जिले के प्रभारी मंत्री 13 जुलाई को कोरबा से सुबह 9 बजे प्रस्थान कर सुबह 9.30 बजे कटघोरा विकासखंड के ग्राम श्याहीमुड़ी के साडा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शाला प्रवेश उत्सव के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद कोरबा के सीएसईबी रेस्ट हाऊस के लिए प्रस्थान करेंगे। सर्किट हाऊस से दोपहर 12.30 बजे प्रस्थान कर जिला पंचायत के सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेंगे। डाॅ. सिंह इसके बाद करतला विकासखंड के ग्राम पटियापाली के लिए रवाना होंगे और वहां दोपहर 3.30 बजे मिडिल स्कूल में शाला भवन लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होने के बाद रायपुर के लिए प्रस्थान करेंगे।  

भाजपा सरकार को खबर तक नहीं, चीन ने चुपचाप मोड़ दी नदी, जानें पूरा मामला

0

सियांग (ब्रहमपुत्र) नदी को चीन ने अपने सिनजियांग प्राबिंस में मोड़ने संबंधी खबर के बारे में अरुणाचल प्रदेश सरकार के पास कोई अधिकारिक सूचना नहीं है। ये बातें अरुणाचल प्रदेश के तीन दिवसीय बजट के पहले दिन कांग्रेसी विधायक निनोंग इरिंग के सावालों का जबाव देते हुए राज्य के जल संसाधन मंत्री वांकी लोवांग ने कही। विधायग इरिंग ने सवाल किया था कि ब्रहमपुत्र (सियांग) नदी के पानी को मोड़ने के लिए चीन अपने इलाके में 1000 किमी लंबा एक टनल का निर्माण किया है। इस मामले पर विधायक ने सरकार से पूरी जानकारी मांगी थी।

गौरतलब है कि अरुणाचल प्रदेश सरकार ने विधानसभा में राज्य का बजट पेश किया। राज्य सरकार ने बजट में कृषि और उससे संबद्ध क्षेत्रों पर जोर दिया, जबकि सभी तरह की शराब पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया है। उप मुख्यमंत्री चौना मेन ने राज्य की भाजपा सरकार का 520.98 करोड़ रुपये के घाटे वाला बजट पेश करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप , 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कृषि पर जोर दिया गया है। भारत में बनी विदेशी शराब (आईएमएफएल), बीयर और वाइन पर लगने वाले शुल्क की दर को बढ़ाया गया है। लगातार दूसरी बार सत्ता में आने के बाद पेमा खांडू की अगुवाई वाली सरकार का यह पहला बजट है। बजट में मछली और मछली दाना का उत्पादन बढ़ाने के लिए ‘ नीली क्रांति ‘ शुरू करने का प्रस्ताव है। इसके लिए नए कार्यक्रमों ” मुख्यमंत्री नील क्रांति अभियान” की शुरुआत की जाएगी।

इसके तहत विशेष जलीय कृषि के लिए नए तालाब खोदने , पानी में डूबे क्षेत्रों को पुनर्जीवित करने , मौजूदा तालाबों का कायाकल्प करने , मौजूदा हैचरी का नवीनीकरण करने , नर्सरी बनाने और सजावटी मछली पालने के लिए जगह विकसित की जाएगी। वित्त मंत्रालय का भी जिम्मा संभाल रहे मैन ने 2019-20 के बजट अनुमान में कहा कि सरकार को 2018-19 के 13,483 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमानों के मुकाबले चालू वित्त वर्ष में 13,406.78 करोड़ रुपये के राजस्व व्यय की उम्मीद है। सरकार ने किसानों के लाभ के लिए बाजार स्थापित करने का प्रस्ताव किया है। यह बाजार ई – नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) से जुड़ा होगा जिससे कृषकों के उपज की ऑनलाइन बिक्री की जा सकेगी।

बिना छतरी वाला ये स्मार्टफोन तहलका मचा रहा है

0

रिहायशी इलाकों में बंदरों को पकड़ने पर करोंड़ों रुपये खर्च करने और उन्हें असोला वन्यजीव अभयारण्य भेजने के बावजूद राष्ट्रीय राजधानी में पिछले साल बंदरों के काटने के 950 मामले और दो लोगों के मरने का मामला दर्ज किया गया. ये आंकड़े दिखाते हैं कि बंदरों के खतरे को रोकने के प्रयास नाकाफी रहे.

लोगों के मुताबिक बंदरों की समस्या इसलिए बनी हुई है क्योंकि इन्हें पकड़ने और इनके बंध्याकरण की जिम्मेदारी नगर निगम की है या फिर वन्य विभाग की, इसी बात को लेकर फिलहाल भ्रम की स्थिति बनी हुई है. 2007 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से बंदरों को पकड़ने के लिये पिंजरा मुहैया कराने तथा नगर निगमों को इसे अलग-अलग स्थानों पर रखने का निर्देश दिया था. अदालत ने अधिकारियों को पकड़े गये इन बंदरों को असोला अभयारण्य में छोड़ने तथा वन विभाग को उन्हें भोजन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था ताकि ये बंदर वहां से कहीं और ना जायें.

मानव बस्तियों में बंदरों के प्रवेश को रोकने के लिये अदालत ने अधिकारियों को वैसी जगहों के बाहरी क्षेत्र में 15 फुट ऊंची दीवार बनाने का भी निर्देश दिया था जहां बंदरों को भेजा गया है. अधिकारियों ने बताया कि 20,000 से अधिक बंदरों को अभ्यारण्य भेजा गया लेकिन मानव बस्तियों में कितने बंदर इधर-उधर भटक रहे हैं, इसका कोई वास्तविक आंकड़ा नहीं है. इसके अलावा असोला अभयारण्य में भेजे गये बंदर भी मानव बस्तियों में वापस आ जाते हैं क्योंकि दीवारों में लोहे का ढांचा बना है जिससे ये बंदर आसानी से निकल आते हैं.

2018 में निगमों ने कुल 878 बंदरों को पकड़ा था जिसमें पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) ने सिर्फ 20 बंदर पकड़े थे. दक्षिण दिल्ली नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के तहत ‘रिसस मकाक’ एक संरक्षित पशु है, इसका मतलब है कि बंदरों को पकड़ने और उन्हें अभ्यारण्य भेजने की जिम्मेदारी वन विभाग की है. अधिकारी ने बताया कि इसलिए उच्च न्यायालय के निर्देश के कई अर्थ हैं. इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि बंदरों को पकड़ने और उनके बंध्याकरण के लिये कौन जिम्मेदार है. वन विभाग की दलील है कि मानव बस्तियों में पाये जाने वाले बंदर घरेलू हो जाते हैं, ऐसे में वे वन्य जीव नहीं रह जाते हैं.

दिल्ली के मुख्य वन्यजीव संरक्षक ईश्वर सिंह ने 2018 में बंदरों की आबादी रोकने के लिये उनके ‘लैप्रोस्कोपिक बंध्याकरण’ का सुझाव दिया था. इसके बाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर इस संबंध में एक समिति भी गठित की गयी जिसमें निगम संस्थाओं और डीडीए के अधिकारी, दिल्ली के मुख्य वन संरक्षक और गैर सरकारी संगठन एसओएस की सदस्य सोनिया घोष शामिल थीं. एसओएस ने आगरा विकास प्राधिकरण के साथ मिलकर बंदरों के बंध्याकरण परियोजना का सर्वेक्षण किया था. एक अधिकारी ने बताया कि बंदरों के बंध्याकरण के संबंध में वन विभाग द्वारा टेंडर निकाले जाने के बाद पशु अधिकार कार्यकर्ताओं के विरोध की वजह से कोई आगे नहीं आया.

पशु अधिकार कार्यकर्ता कुत्तों के बंध्याकरण का तो प्रस्ताव दे रहे हैं लेकिन वे बंदरों की सर्जरी का विरोध करते हैं. पशु अधिकार कार्यकर्ता गौरी मौलेखी की दलील है कि बंध्याकरण से बंदर ज्यादा आक्रामक हो सकते हैं. इसके बजाय वह बंदरों की आबादी को रोकने के लिये उनके गर्भनिरोधक टीकाकरण का समर्थन करती हैं. सरकार ने इस संबंध में राष्ट्रीय प्रतिरक्षाविज्ञान संस्थान और भारतीय वन्यजीव संस्थान को कोष जारी किया है जो इस टीके को विकसित कर रहे हैं.

करोड़ों रुपये खर्च फिर भी बंदरों से परेशान है दिल्ली वाले

0

रिहायशी इलाकों में बंदरों को पकड़ने पर करोंड़ों रुपये खर्च करने और उन्हें असोला वन्यजीव अभयारण्य भेजने के बावजूद राष्ट्रीय राजधानी में पिछले साल बंदरों के काटने के 950 मामले और दो लोगों के मरने का मामला दर्ज किया गया. ये आंकड़े दिखाते हैं कि बंदरों के खतरे को रोकने के प्रयास नाकाफी रहे.

लोगों के मुताबिक बंदरों की समस्या इसलिए बनी हुई है क्योंकि इन्हें पकड़ने और इनके बंध्याकरण की जिम्मेदारी नगर निगम की है या फिर वन्य विभाग की, इसी बात को लेकर फिलहाल भ्रम की स्थिति बनी हुई है. 2007 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से बंदरों को पकड़ने के लिये पिंजरा मुहैया कराने तथा नगर निगमों को इसे अलग-अलग स्थानों पर रखने का निर्देश दिया था. अदालत ने अधिकारियों को पकड़े गये इन बंदरों को असोला अभयारण्य में छोड़ने तथा वन विभाग को उन्हें भोजन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था ताकि ये बंदर वहां से कहीं और ना जायें.

मानव बस्तियों में बंदरों के प्रवेश को रोकने के लिये अदालत ने अधिकारियों को वैसी जगहों के बाहरी क्षेत्र में 15 फुट ऊंची दीवार बनाने का भी निर्देश दिया था जहां बंदरों को भेजा गया है. अधिकारियों ने बताया कि 20,000 से अधिक बंदरों को अभ्यारण्य भेजा गया लेकिन मानव बस्तियों में कितने बंदर इधर-उधर भटक रहे हैं, इसका कोई वास्तविक आंकड़ा नहीं है. इसके अलावा असोला अभयारण्य में भेजे गये बंदर भी मानव बस्तियों में वापस आ जाते हैं क्योंकि दीवारों में लोहे का ढांचा बना है जिससे ये बंदर आसानी से निकल आते हैं.

2018 में निगमों ने कुल 878 बंदरों को पकड़ा था जिसमें पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) ने सिर्फ 20 बंदर पकड़े थे. दक्षिण दिल्ली नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के तहत ‘रिसस मकाक’ एक संरक्षित पशु है, इसका मतलब है कि बंदरों को पकड़ने और उन्हें अभ्यारण्य भेजने की जिम्मेदारी वन विभाग की है. अधिकारी ने बताया कि इसलिए उच्च न्यायालय के निर्देश के कई अर्थ हैं. इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि बंदरों को पकड़ने और उनके बंध्याकरण के लिये कौन जिम्मेदार है. वन विभाग की दलील है कि मानव बस्तियों में पाये जाने वाले बंदर घरेलू हो जाते हैं, ऐसे में वे वन्य जीव नहीं रह जाते हैं.

दिल्ली के मुख्य वन्यजीव संरक्षक ईश्वर सिंह ने 2018 में बंदरों की आबादी रोकने के लिये उनके ‘लैप्रोस्कोपिक बंध्याकरण’ का सुझाव दिया था. इसके बाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर इस संबंध में एक समिति भी गठित की गयी जिसमें निगम संस्थाओं और डीडीए के अधिकारी, दिल्ली के मुख्य वन संरक्षक और गैर सरकारी संगठन एसओएस की सदस्य सोनिया घोष शामिल थीं. एसओएस ने आगरा विकास प्राधिकरण के साथ मिलकर बंदरों के बंध्याकरण परियोजना का सर्वेक्षण किया था. एक अधिकारी ने बताया कि बंदरों के बंध्याकरण के संबंध में वन विभाग द्वारा टेंडर निकाले जाने के बाद पशु अधिकार कार्यकर्ताओं के विरोध की वजह से कोई आगे नहीं आया.

पशु अधिकार कार्यकर्ता कुत्तों के बंध्याकरण का तो प्रस्ताव दे रहे हैं लेकिन वे बंदरों की सर्जरी का विरोध करते हैं. पशु अधिकार कार्यकर्ता गौरी मौलेखी की दलील है कि बंध्याकरण से बंदर ज्यादा आक्रामक हो सकते हैं. इसके बजाय वह बंदरों की आबादी को रोकने के लिये उनके गर्भनिरोधक टीकाकरण का समर्थन करती हैं. सरकार ने इस संबंध में राष्ट्रीय प्रतिरक्षाविज्ञान संस्थान और भारतीय वन्यजीव संस्थान को कोष जारी किया है जो इस टीके को विकसित कर रहे हैं.

एचआईवी वायरल लोड टेस्टिंग से 12 हजार मरीजों को मिलेगा लाभ : स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव

0

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री टीएस सिंह देव ने गुरुवार को एचआईवी पीड़ित मरीजों की बेहतर इलाज हो इसके लिए एचआईवी वायरल लोड टेस्टिंग मशीन का लोकापर्ण किया। इससे प्रदेश में 12 हजार से ज्यादा एचआईवी पीड़ित मरीजों की जांच कर बेहतर इलाज किया जा सकेगा।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि एचआईवी से निजात पाने में जितनी महत्वपूर्ण भूमिका दवाइयों की होती है, उतनी ही समय-समय पर जांच की भी। एक बार दवा शुरू होने के बाद, दवाओं का असर जानने के लिए मरीजों का वायरल लोड टेस्ट अर्थात शरीर में एचआईव्ही वायरस का लोड जानना जरूरी होता है। वायरल लोड टेस्टिंग एचआईव्ही संक्रमितों के बेहतर इलाज एवं उपचार से संबंधित प्रभावी प्रबंधन की एक नई तकनीक है। यह  मशीन नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन (नाको) द्वारा प्रत्येक राज्यों को प्रदान की गई है। छत्तीसगढ़ राज्य में यह पहली व एकमात्र मशीन है, जिसका संचालन चिकित्सा महाविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा किया जाएगा। इस मशीन के द्वारा एड्स पीड़ित मरीजों के उपचार व मॉनिटरिंग में मदद मिलेगी। साथ ही इस बात की जानकारी भी प्राप्त की जा सकेगी कि एंटी रेट्रो वायरल दवाईयों का कितना असर मरीजों पर हो रहा है।

कांग्रेस को ऐसे अध्यक्ष की जरुरत है जो ऊजार्वान हो और सबको साथ लेकर चले : सिंधिया

0

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज कहा कि कांग्रेस को ऐसे अध्यक्ष की जरुरत है, जो ऊजार्वान हो और सबको खासतौर से देश के पार्टी कार्यकर्ता को साथ लेकर चल सके। सिंधिया ने यहां पहुंचने के बाद राजा भोज हवाईअड्डे के बाहर संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा कि नए अध्यक्ष को राहुल गांधी के बताए मार्ग पर भी चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समय कांग्रेस को मजबूत बनाने के लिए सभी लोगों को एकसाथ कार्य करने की आवश्यकता है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जब सत्ता सही तरीके से नहीं मिल पाती है, तो वह दूसरे तरीके अपनाने लगती है। यही वजह है कि कर्नाटक के बाद गोवा का घटनाक्रम सामने आ रहा है। हालाकि उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की ही सरकार रहेगी और भाजपा यहां अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो पाएगी।

सिंधिया आज सुबह यहां नियमित विमान सेवा से पहुंचे हैं। उनका स्वागत करने सैकड़ों समर्थक हवाईअड्डा पहुंचे। सिंधिया इसके बाद विधानसभा में कार्यवाही देखने पहुंचे। वे दिन में मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ भोजन करेंगे और रात्रि में उनके समर्थक मंत्री तुलसी सिलावट के निवास पर रात्रिभोज करेंगे। वे रात्रिविश्राम के बाद कल सुबह नियमित विमान सेवा से दिल्ली जा सकते हैं। लोकसभा चुनाव में पराजय के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गांधी ने त्यागपत्र दे दिया है। उन्हें मनाने के तमाम प्रयासों के बावजूद राहुल गांधी ने हाल ही में साफतौर कह दिया है कि वे अध्यक्ष पद से अपना त्यागपत्र वापस नहीं लेंगे और कांग्रेस को नया अध्यक्ष ढूंढ लेना चाहिए।

छत्तीसगढ़ /राज्य सरकार की जांच के दायरे में अब सहकारी बैंकों के घोटाले

0

राज्य के सहकारी बैंक भी अब राज्य सरकार की जांच के दायरे में आ गए हैं। करोड़ों रुपए की अनियमितता के संदेह में जिला सहकारी बैंकों के खिलाफ जांच और कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसी कड़ी में राज्य सहकारी संस्थाआें के पंजीयक ने राजनांदगांव जिला सहकारी बैंक के संचालक मंडल को भंग करने का नोटिस जारी किया है। बैंक के संचालन का जिम्मा कलेक्टर को सौंपा गया है। संचालक मंडल को जवाब देने के लिए 31 जुलाई को बुलाया गया है। बैंक के अध्यक्ष सचिन सिंह बघेल हैं जो पूर्व सीएम रमन सिंह के करीबी रिश्तेदार हैं। जानकारी के मुताबिक जिला सहकारी बैंक राजनांदगांव के संचालक मंडल द्वारा पिछले कई साल से नियमों की अनदेखी कर संचालन किया जा रहा था।


लगातार वित्तीय अनियमितता के कारण बैंक के अलग-अलग सहकारी समितियों के कारण करोड़ों  का अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ा है। पंजीयक ने जांच में पाया कि बैंक द्वारा की गई कार्रवाई में विलंब के कारण बैंक पर 80 लाख रुपए से ज्यादा का ब्याज देना पड़ रहा है। इसी तरह आरबीआई की गाइडलाइन का उल्लंघन कर सीईआे के पद पर बैंक के शाखा प्रबंधक को बैठाया गया था जो कि इसके पात्र नहीं था।


इस तरह से की गईं अनियमितताएं : 

  • बैंक प्रबंधक पर प्रभाटोला समिति में 95 हजार रुपए के गबन का आरोप साबित हुआ था। लेकिन कानूनी कार्रवाई के बजाए उनके द्वारा पैसा जमा करने के बाद मामला रफा-दफा कर दिया गया।
  • इसी तरह दशरंगपुर के समिति प्रबंधक पर 11 लाख रुपए के धान की हेराफेरी का आरोप लगा था। उनके खिलाफ भी एफआईआर नहीं करवाई गई।
  • रणजीतपुर के समिति प्रबंधक पर 7 लाख 95 हजार आैर 22 लाख 35 हजार रुपए की अनियमितता के आरोप थे। जून 2016 में समिति प्रबंधक की मौत हो गई। उनके वारिशों को राशि जमान करने की नोटिस दी गई। 
  •  इसी तरह डेढ़ लाख रुपए के फर्जी विड्राल के आरोपी को भी पैसा जमा न करने का नोटिस जारी किया गया। 

हजारों किसानों को ऋणमाफी से वंचित करने का मामला  : जांच में यह भी पाया गया कि बैंक द्वारा अल्पकालीन कृषि ऋण माफी योजना पर भी गंभीरता से काम नहीं किया गया। इससे हजारों किसानों को ऋणमाफी लाभ से वंचित होना पड़ा। साथ ही उन्हें खरीफ के लिए नया ऋण नहीं मिला। जांच में यह भी पाया गया कि प्रबंधन की उपेक्षाआें के कारण बैंक पर कुल 2 करोड़ 98 लाख रुपए का अतिरिक्त भार आया है।

प्रदेश सरकार ने जारी किया आदेश, बच्चे का जन्म होते ही बनेगा जाति प्रमाण

0

अब छात्रा को जाति प्रमाण पत्र के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। प्रदेश सरकार ने आदेश जारी किया है कि अब बच्चे के जन्म के दिन ही उसका जाति प्रमाण पत्र बन जाएगा। जाति प्रमाण पत्र पिता की जाति को आधार बनाकर बनाया जाएगा। स्कूल में एडमिशन और नौकरी के लिए जाति प्रमाण पत्र बनवाने सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस परेशानी को देखते हुए सीएम भूपेश बघेल के निर्देश से अब बच्चे के जन्म के बाद उन्हें जाति प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। अब बच्चे का जन्म होते ही जन्म प्रमाण के साथ जाति प्रमाण पर जारी किया जाएगा।

अब कंपनी को कर्मचारियों को देनी होंगी ये सुविधाएं, बच्चों के लिए बनाना होगा झूलाघर

0

केंद्रीय कैबिनेट ने कर्मचारियों के हितों से संबंधित एक बिल पास किया है। कैबिनेट ने बुधवार को हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड बिल 2019 को मंजूरी दे दी। इस कानून के लागू होने के बाद कंपनियों को अपने कर्मचारियों का सालाना हेल्थ चेकअप करना अनिवार्य होगा। विज्ञापन

इसके अलावा कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए कैंटीन व उनके बच्चों के लिए झूलाघर (क्रेच) की सुविधा देनी होगी। श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार ने बताया कि सरकार का प्राथमिकता मजदूरों की हितों का ध्यान रखना है।

सरकार ने 3 श्रम कानूनों को मिलाकर ये एक कानून बनाया है। इस कानून से 40 करोड़ कामगारों को फायदा होगा। गंगवार ने बताया कि नए बिल में 178 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी हर महीने की तय तारीख को देने का प्रावधान किया है।

अब इस बिल को दो से तीन दिन के अंदर लोकसभा में पेश किया जाएगा। बता दें कि बिल में कर्मचारियों को अब अपॉइंटमेंट लेटर देना जरूरी कर दिया गया है। महिलाओं के लिए काम का टाइम सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही रहेगा।