Home Blog Page 2990

छत्तीसगढ़ /जिलों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले आज से, 12 जुलाई तक चलेंगे

0

 प्रदेश में स्थानांतरण का सीजन शुक्रवार से शुरू हो जाएगा। जिला स्तर पर 28 जून से 12 जुलाई तक तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के तबादले प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से किए जाएंगे। कर्मचारी यूनियनों के नेताअों के भी स्थानांतरण सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के अनुसार होंगे। 30 जुलाई तक पदभार ग्रहण नहीं करने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

राज्य में दिसंबर में कांग्रेस सरकार बनने के बाद पहली बार राज्य संवर्ग के तबादले हो रहे हैं। नई तबादला नीति में स्पष्ट किया गया है कि शहर अौर गांवों में पदों को खाली और भरे पदों में सामंजस्य रखा जाएगा। जहां पहले से अधिक कर्मचारी हैं, वहां स्थानांतरण नहीं किए जाएंगे। दिव्यांग कर्मचारियों की पदस्थापना के वक्त आवागमन की सुविधा का ध्यान रखा जाएगा। जो कर्मचारी सालभर में रिटायर होने वाले हैं, उन्हें उनके विकल्प पर गृह जिले में भेजा जा सकता है।

आदिवासी जिले प्राथमिकता में: नई स्थानांतरण नीति में तय किया गया है कि राज्य के दस जिलों बस्तर, कोंडागांव, बीजापुर, राजनांदगांव, कांकेर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कोरबा और महासमुंद में सरकारी योजनाअों के अनुरूप तबादले होंगे। ताकि काम प्रभावित न हों। विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की पूर्ति सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर होगी। 


संशोधन समन्वय में जाएंगे : किसी भी तबादला आदेश में संशोधन या निरस्त करना हो तो ऐसे प्रस्ताव समन्वय में प्रस्तुत किए जाएंगे। समन्वय में अनुमोदन के बाद ही इसमें सुधार या निरस्तीकरण का फैसला होगा।


ये तबादले सालभर होंगे

{प्रतिनियुक्ति से वापस आने पर विभाग के अधीन की जाने वाली पदस्थापना। यदि उससे कोई अन्य कर्मचारी प्रभावित न होता हो।

{किसी विभाग के कर्मचारी (फर्स्ट क्लास को छोड़कर) की सेवाओं को अन्य विभाग या संस्था में प्रतिनियुक्ति पर या डिप्लायमेंट पर सौंपा जाना, यदि दोनों महकमें सहमत हों।

{पीएससी से या चयन समिति से चयनित नई नियुक्तियां और उम्मीदवारों को रिक्त पदों पर भेजना।

{न्यायालय के निर्देश के पालन में स्थानांतरण कर पदस्थापना करना। यदि कोई कर्मचारी प्रभावित न होता हो।

{पदोन्नति से पदस्थापना यदि कोई कर्मचारी प्रभावित न होता हो।

गांवों से शहरों में नहीं होंगे शिक्षकों के स्थानांतरण
तबादला नीति के मुताबिक शिक्षकों का तबादला शाला विशेष में तभी किया जाएगा जब वहां की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित न हो। इसका आशय यह है कि शिक्षकवार विद्यार्थियों और विषयवार शिक्षकों के मंजूर पदों की संख्या और कार्यरत विषयवार शिक्षकों से है। किसी भी स्थिति में गांवों से शहरों में ट्रांसफर मांगने वालों को प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा। 12 जुलाई के बाद जिला स्तर पर स्थानांतरण नहीं होंगे।

पंद्रह दिन के भीतर कर सकते हैं अपील

तबादला नीति का पालन करने का जिम्मा सचिवों और जिलों में कलेक्टरों का होगा। यदि कोई कर्मचारी तबादले से सहमत नहीं है तो वह  15 दिन के अंदर अपील कर सकेगा। दो प्रतियों के साथ अपील अावेदन सचिवों की समिति को पेश करना होगा। केस की जांच के बाद समिति संबंधित विभाग को अनुशंसा करेगी। फिर विभाग का दायित्व होगा कि वह यथोचित आदेश जारी करे।

राज्य स्तर पर 15 जुलाई से 14 अगस्त तक बदली

प्रदेश स्तर पर 15 जुलाई से 14 अगस्त तक विभाग के मंत्री के अनुमोदन से बदली हो सकेगी। ये प्रस्ताव सचिव के जरिए मंत्री को प्रस्तुत किए जाएंगे। शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में रिक्तियों को बैलेंस रखा जाएगा। अनुसूचित क्षेत्र से गैर अनुसूचित क्षेत्र में ट्रांसफर में एवजीदार के पहुंचते ही रिलीव किया जाए, यह ध्यान रखा जाएगा। प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के स्थानांतरण 15 फीसदी, तृतीय श्रेणी में 10 और चतुर्थ श्रेणी में 10 फीसदी तक ही तबादले होंगे। खास बात यह कि परस्पर सहमति या स्वयं के व्यय पर होने वाले तबादले इसमें काउंट नहीं होंगे।

अब अंतरिक्ष यात्री स्पेस स्टेशन में बना सकेंगे बिस्किट! नासा ने स्पेशल ओवन भेजा

0

नासा ने अंतरिक्ष यात्रियों को फ्रेश खाना खिलाने की तैयारी कर ली है. नासा ने इसके लिए एक स्पेशल ओवन स्पेस स्टेशन पर भेज दिया है. बताया जा रहा है कि इस ओवन में अंतरिक्ष यात्री बिस्किट बनाएंगे.

 अभी तक यात्री अंतरिक्ष में जाने से पहले डीहाइड्रेटेड या पका हुआ भोजन ले जाते थे. उम्मीद जताई गई है कि इस साल के अंत तक स्पेस में अंतरिक्ष यात्री बिस्किट बना लेंगे. नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री माइक मैसिमिनो ने जानकारी देते हुए कहा कि हम देखना चाहते हैं कि शून्य गुरुत्वाकर्षण में बिस्किट को बेक करने की प्रक्रिया कैसे काम करती है.

अभी तक यात्री अंतरिक्ष में जाने से पहले डीहाइड्रेटेड या पका हुआ भोजन ले जाते थे. उम्मीद जताई गई है कि इस साल के अंत तक स्पेस में अंतरिक्ष यात्री बिस्किट बना लेंगे. नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री माइक मैसिमिनो ने जानकारी देते हुए कहा कि हम देखना चाहते हैं कि शून्य गुरुत्वाकर्षण में बिस्किट को बेक करने की प्रक्रिया कैसे काम करती है.

 इस ओवन को जीरो जी किचेन और डबलट्री बॉय हिल्टन कंपनी ने मिलकर तैयार किया है. इस ओवन को देखें तो ये एक बेलनाकार कंटेनर जैसा दिखाई देता है. इस डिजाइन को जानबूझकर ऐसा तैयार किया गया है, जिससे माइक्रोग्रेविटी में खाने की चीजों को सेकने में मदद मिल सके. अंतरिक्ष का वातावरण पृथ्वी जैसा बिल्कुल भी नहीं है.

इस ओवन को जीरो जी किचेन और डबलट्री बॉय हिल्टन कंपनी ने मिलकर तैयार किया है. इस ओवन को देखें तो ये एक बेलनाकार कंटेनर जैसा दिखाई देता है. इस डिजाइन को जानबूझकर ऐसा तैयार किया गया है, जिससे माइक्रोग्रेविटी में खाने की चीजों को सेकने में मदद मिल सके. अंतरिक्ष का वातावरण पृथ्वी जैसा बिल्कुल भी नहीं है.

 स्पेस स्टेशन में पृथ्वी जैसा वातावरण तैयार करने के लिए कृत्रिम वातावरण तैयार किया जाता है. यह जानना रोमांचक होगा कि माइक्रोग्रेविटी में बिस्किट कैसे बनाया जाएगा. मैसिमिनो ने कहा कि इतिहास में ऐसा पहली बार होगा कि अंतरिक्ष यात्री स्पेस स्टेशन में बना बिस्किट खा सकेंगे. उन्होंने कहा कि अभी तो हमें इस बात की जानकारी नहीं है कि अंतरिक्ष में बिस्किट एक बार में ही बन जाएंगे या नहीं लेकिन इनकी खुशबू बेहद रोमांचक होगी.

स्पेस स्टेशन में पृथ्वी जैसा वातावरण तैयार करने के लिए कृत्रिम वातावरण तैयार किया जाता है. यह जानना रोमांचक होगा कि माइक्रोग्रेविटी में बिस्किट कैसे बनाया जाएगा. मैसिमिनो ने कहा कि इतिहास में ऐसा पहली बार होगा कि अंतरिक्ष यात्री स्पेस स्टेशन में बना बिस्किट खा सकेंगे. उन्होंने कहा कि अभी तो हमें इस बात की जानकारी नहीं है कि अंतरिक्ष में बिस्किट एक बार में ही बन जाएंगे या नहीं लेकिन इनकी खुशबू बेहद रोमांचक होगी.

 उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में बिस्किट बनाना केवल आनंद लेने के लिए ही नहीं है. हम देखना चाहते हैं कि माइक्रोग्रेवटी में ओवन कैसे काम करता है. बिस्किट को ओवन में सेकना, इसका आकार और स्वाद कैसा होगा? वैज्ञानिकों ने कहा कि पृथवी पर बन रहे कुकीज और स्पेस में बने कुकीज में कुछ फर्क जरूर होगा.

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में बिस्किट बनाना केवल आनंद लेने के लिए ही नहीं है. हम देखना चाहते हैं कि माइक्रोग्रेवटी में ओवन कैसे काम करता है. बिस्किट को ओवन में सेकना, इसका आकार और स्वाद कैसा होगा? वैज्ञानिकों ने कहा कि पृथवी पर बन रहे कुकीज और स्पेस में बने कुकीज में कुछ फर्क जरूर होगा.

छत्तीसगढ़ : ‘कर्जमाफी के साथ मेहनत का बेहतरीन दाम पाकर गदगद हैं जिले के किसान’

0

 सरकार की किसान हितैषी योजनाओं से जिले के किसान बहुत खुश हैं। धान की कीमत 2500 रुपए प्रति क्विंटल हो जाने से किसानों को अपनी मेहनत का उचित मूल्य तो मिला है साथ ही कर्ज माफी ने हजारों किसानों के कंधे का बोझ खत्म कर दिया है। अब किसान खुशी खुशी खेतों की तरफ रुख करने लगे हैं क्योंकि उनको मालूम है सरकार हर कदम पर उनके साथ है।

बलौदाबाजार विकासखंड के ग्राम पुरान के किसान कृष्ण कुमार यदु बताते हैं कि कई किसान पहले अपनी जमीन पर खुद खेती करने के बजाय अधिया रेगहा में दे देते थे। वो खुद भी अपनी आधी जमीन पर ही खेती करते थे।

मेहनत का सही दाम न मिलने से किसानों में निराशा व्याप्त थी। लेकिन इस साल उनके गांव के सारे किसान खुद की जमीन पर खेती करना चाहते हैं । किसानों का कहना है कि सरकार किसानों के लिए बहुत उदार है कर्जमाफी मिली है और धान की कीमत में भी इजाफा हुआ है। कृष्ण कुमार यदु का 50 हजार कर्ज माफ हुआ और उन्होंने 54 बोरा धान बेचा। धान की अच्छी कीमत मिली जिससे उन्होंने अपने घर की मरम्मत करवाई । उन्होंने बताया कि उनको अपने पशुओं की देखभाल के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलता था वो बोर खुदवाना चाहते थे लेकिन पैसे की किल्लत के कारण वो चाहकर भी कुछ कर नहीं पाते थे। लेकिन अब उनको कोई दिक्कत नहीं है । कृष्ण कुमार ने न केवल 50 हजार रुपए खर्च करके बोर खुदवाया बल्कि 1 लाख रुपए खर्च कर अपने 15 मवेशियों के लिए कोठा भी बनवाया है।

कृष्ण कुमार कहते हैं कि सरकार ने उनकी सारी मुसीबत दूर कर दी है।कृष्णकुमार को उम्मीद है कि इस साल भी बढि़या कीमत मिलेगी इसलिए वो अपने पूरे परिवार के साथ खेती में जुट गए हैं। इतना ही नहीं पहले उन्हें बीज और खाद का उठाव करने के लिए सायकल से आना पड़ता था। इस साल  कुछ किसान आपस में किराए का वाहन लेकर आये हैं। जिससे काफी सहूलियत हो गई है।

छत्तीसगढ़ : बिलासपुर जिले में अब तक 83.3 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

0

बिलासपुर जिले में 1 जून से आज तक  83.3 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज की गई। अधीक्षक भू-अभिलेख बिलासपुर से प्राप्त जानकारी अनुसार बिलासपुर तहसील में 44.8 मि.मी., बिल्हा में 69.6 मि.मी. मस्तूरी में 83.0 मि.मी. तखतपुर में 175.8 मि.मी., कोटा तहसील में 48.8 मि.मी., पेण्ड्रारोड में 108.9 मि.मी., पेण्ड्रा में 71.0 मि.मी., मरवाही में 64.6 मि.मी. वर्षा दर्ज की गई है।  

राज्य में सौर सुजला योजना से किसानों को मिल रहा है अनेक लाभ

0

 सौर सुजला योजना उन किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैै, ऐसे किसान जो पहले काफी दूर से अस्थाई बिजली कनेक्शन लेकर सिंचाई करते थे उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पडता था जैसे- अनियमित बिजली आपूर्ति, अत्यधिक साधन एवं बढ़ी लागत। सौर अब इन कृषकों को अब सिंचाई के लिये बिजली कनेक्शन की आवश्यकता नहीं है। उन्नत खेती की राह सोलर पंप ने बहुत ही आसान कर दी है। जिले में अब तक 297 किसानों ने अपने खेतों में सोलर पंप स्थापित किया है।

योजना के तहत कृषकों के 2, 3 और 5 एच.पी. के सोलर पंप की स्थापना की जाती है। जिन किसानों ने अपने यहां इसे लगाया है वे बहुत उत्साहित एवं खुश हैं तथा इसके लिए वे राज्य सरकार को धन्यवाद् देते हैं। इस योजना के माध्यम से कृषकों को लगभग 95 प्रतिशत अनुदान का लाभ मिलता है। बहुत ही कम राशि हितग्राही किसानों द्वारा लगाई जाती है।

ऐसे कृषकों को विद्युत देयक से छुटकारा मिलने के कारण आर्थिक बचत हो रही है, नियमित सिंचाई हो रही है, उनकी आमदनी में वृद्वि हो रही है।

यह कृषकों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका प्रदान कर रहा है। सोलर पंप पर्यावरण के अनुकूल है। इससे पर्यावरण प्रदूषित नहीं होता है। 

                 वर्तमान में कृषि विभाग के माध्यम से अब तक कुल 61 आवेदन प्राप्त हो चुके है। योजना की अधिक जानकारी के लिये अपने नजदीकी कृषि विभाग अथवा छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय उर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के कार्यालय मे संपर्क किया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ : व्यापारियों के हित में राज्य सरकार का बड़ा निर्णय: दुकान एवं स्थापना का केवल एक बार ही कराना होगा पंजीयन

0

छत्तीसगढ़ सरकार ने व्यापारियों के हित में बड़ा निर्णय लिया है। अब व्यापारियों को अपने दुकान और स्थापना का केवल एक बार ही पंजीयन कराना होगा। उन्हें अब बार-बार पंजीयन कराने के लिए परेशान नहीं होना पडेगा। उल्लेखनीय है कि व्यापारियों द्वारा इसके लिए लंबे समय से मांग की जा रही थी।

  मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल और श्रम मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने प्रदेश के व्यापारियों के हित को ध्यान में रखते हुए तथा राज्य के विकास और सुगम व्यापार के लिए यह दूरगामी निर्णय लिया है।

  श्रम विभाग के सचिव श्री सुबोध सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना अधिनियम 1958 के प्रावधान अनुसार प्रदेश के छोटे-बडे़ सभी प्रकार के व्यापारियों को अपने दुकान एवं स्थापना का पंजीयन श्रम विभाग में कराना आवश्यक है। पंजीयन के पांच वर्ष पश्चात नवीनीकरण का प्रावधान है। व्यापारियों द्वारा लंबे समय से नवीनीकरण के प्रावधान समाप्त करने की मांग की जा रही थी और इस संबंध में समय-समय पर अभ्यावेदन भी दिया जाता था।

        श्री सुबोध सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री बघेल एवं श्रम मंत्री डॉ. डहरिया के निर्देश पर श्रम विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना अधिनियम 1958 के तहत दुकान एवं स्थापनाओं के पंजीयन के बाद प्रत्येक पांच वर्ष में किए जाने वाले नवीनीकरण के प्रावधान को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इससे अब छोटे-बडे़ सभी प्रकार के व्यापारियों को उनके दुकान अथवा स्थापना का केवल एक बार पंजीयन कराना होगा। पंजीयन की नवीनीकरण की आवश्यकता नहीं होगी। इससे नवीनीकरण के लिए लगने वाले राशि, समय तथा उर्जा की बचत होगी एवं व्यापार में सुगमता होगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में अधिसूचना का प्रारूप जारी किया गया है। दावा-आपत्ति के बाद जुलाई 2019 में अंतिम अधिसूचना प्रकाशित की जाएगी।

विश्व बास्केट बॉल क्रीड़ा प्रतियोगिता का आयोजन राजनांदगांव में होगा- डॉ. प्रेमसाय सिंह : राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के विजेताओं का सम्मान

0

स्कूल शिक्षा मंत्री ड़ॉ प्रेमसाह सिंह टेकाम ने आज राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता 2017-18 के छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न खेलों के 781 पदक विजेता खिलाड़ियों का सम्मान किया। रायपुर के कालीबाड़ी स्थित रवीन्द्र मंच में आयोजित सम्मान समारोह में स्कूल शिक्षा मंत्री ने खिलाड़ियों को एक करोड़ 20 लाख 88 हजार रूपए की सम्मान राशि का चेक प्रदान किया।

इसके तहत स्वर्ण पदक प्राप्त 283 खिलाड़ियों को 59 लाख 43 हजार रूपए, रजत पदक प्राप्त 233 खिलाड़ियों को 34 लाख 95 हजार रूपए और कांस्य पदक विजेता 265 खिलाड़ियों को 26 लाख 50 हजार रूपए का चेक वितरित किया। स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी को 21 हजार रूपए, रजत पदक विजेता खिलाड़ी को 15 हजार और कांस्य पदक विजेता खिलाड़ी को 10 हजार रूपए की सम्मान राशि प्रदाय की गई।

डॉ. टेकाम ने बताया कि छत्तीसगढ़ को वर्ष 2020 में विश्व बास्केट बॉल क्रीड़ा प्रतियोगिता आयोजित करने का अवसर प्राप्त हुआ है। यह प्रतियोगिता राजनांदगांव में 20 से 25 अप्रैल के मध्य प्रस्तावित है।

डॉ. टेकाम ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए स्कूल स्तर पर अनेक कदम उठाए हैं। राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को क्रमशः 10, 15 एवं 20 अंक का बोनस प्रदाय किया जाता है। खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने प्रति वर्ष राज्य स्तरीय शाला क्रीड़ा प्रतियोगिता में ऐथेलेटिक्स में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को क्रमशः 5 हजार रूपए, 3 हजार रूपए और 2 हजार रूपए की राशि दी जाती है।

 पूर्व मंत्री एवं विधायक श्री सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि शासन द्वारा राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों का दैनिक भत्ता 100 रूपए से बढ़ाकर 150 रूपए प्रतिदिन प्रति छात्र किया गया है। इसी प्रकार शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों का दैनिक भत्ता 125 रूपए से बढ़ाकर 200 रूपए प्रतिदिन प्रति छात्र दिया जा रहा है। संचालक लोक शिक्षण श्री एस. प्रकाश ने बताया कि वर्ष 2016-17 में जहां राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ का 11 वां स्थान था, उसकी तुलना में वर्ष 2017-18 और 2018-19 में छत्तीसगढ़ का स्थान अपग्रेड हुआ है। इस वर्ष क्रमशः 5 वां एवं 6 वां स्थान प्राप्त किया।

हरियर छत्तीसगढ़ अभियान के तहत राज्य में 7 करोड़ 13 लाख पौधों रोपित किए जाएंगे : पांच नदियों के किनारें फलदार पौधों का होगा रोपण

0

हरियर छत्तीसगढ़ अभियान के तहत इस वर्ष छत्तीसगढ़ राज्य में 7 करोड़ 13 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य रखा गया है। राज्य की प्रमुख पांच नदियों इन्द्रावती, अरपा, खारून, शिवनाथ और सकरी नदी के किनारे 633 हेक्टेयर क्षेत्र में 7 लाख 38 हजार 826 पौधांे का रोपण किया जाएगा, इसमें फलदार पौधों के रोपण को प्राथमिकता दी जाएगी। राज्य के 594 नदी-नालों के किनारे लगभग 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण किए जाएंगे। राज्य के प्रमुख एवं बड़े तकनीकी शिक्षण संस्थाओं जैसे आईआईएम, आईआईआईटी, चिकित्सा महाविद्यालय कैम्पस बस्तर, चिकित्सा महाविद्यालय राजनांदगांव, जंगल सफारी सहित सभी नगरीय निकायों के प्रमुख उद्यानों में भी पौधरोपण किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में आयोजित हरियर छत्तीसगढ़ पौधरोपण कार्यक्रम की बैठक यह जानकारी दी। श्री बघेल ने निर्देश दिए कि वृक्षारोपण के लिए ऐसे स्थानों का चयन किया जाए जहां पौधों को वृद्धि के लिए अनुकूल वातावरण मिल सके। पौधरोपण के पश्चात पौधों के जीवित रहने और वृद्धि करने की गति की निगरानी की जाए। उन्होंने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों मंे फलदार वृक्षों के रोपण पर जोर दिया। उन्होंने औद्योगिक संस्थानों को भी हरियर छत्तीसगढ़ अभियान में अपनी भागीदारी निभाने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन आवासीय कालोनियों मंे भी अनिवार्य रूप से पौधरोपण और जल संरक्षण के कार्य करने पर जोर दिया। इसी तरह राज्य में निर्मित किए जा रहे गोठान में विशेष रूप से फलदार वृक्ष लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने गुरूर और धरसींवा विकासखण्ड में विशेष रूप से जल स्तर के बढ़ोत्तरी के लिए सहायक पौधों के रोपण के निर्देश दिए।

वन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री आर. पी. मण्डल ने बताया कि पौधरोपण का कार्य मुख्य रूप से वन विभाग, वन विकास निगम और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किया जाएगा। अन्य विभागों को भी पौधरोपण के लिए पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे।

बैठक में पौधरोपण के कार्य में औद्योगिक संस्थानों को अपेक्षित सहयोग देने के निर्देश दिए गए।औद्योगिक संस्थानों के द्वारा उत्पादित सामग्री और इस कार्य में हो रहे प्रदूषण के आधार पर उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में पौधरोपण करने की समझाइश दी गई है।

बैठक में वन मंत्री मोहम्मद अकबर, मुख्य सचिव श्री सुनील कुमार कुजूर, एनएमडीसी के सीएमडी श्री एन बैजेन्द्र कुमार, विशेष सचिव उद्योग श्रीमती अलरमेल मंगई डी सहित राज्य में कार्यरत् भिलाई स्टील प्लांट, एनटीपीसी, एसईसीएल, बालको, जायसवाल निक्को, एसकेएस पावर, जिंदल स्टील एन्ड पावर, बंजरंग पावर एन्ड इस्पात, राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड, सारडा एनर्जी एन्ड मिनिरल्स, गोदावारी पावर एन्ड इस्पात कम्पनियों के प्रतिनिधि और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ : ‘छानी के पानी घर म‘ अभियान : छः दिन में दो हजार से अधिक भवनों पर लगा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

0

 छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में मानसून के पहले बरसात का पानी सहेजने के लिए शुरू किए गए ’छानी के पानी घर म’ अभियान के पिछले छः दिनों में दो हजार 73 भवनो-ईकाईयों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का काम पूरा हो गया है। जिला कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल की पहल पर शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पहली बार एक साथ बारिश के पानी को बेकार बह जाने से रोकते हुए वापस जमीन में पहुंचाने के लिए एक साथ सरकारी और निजी भवनो-ईकाईयों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का अभियान चलाया जा रहा है। 20 जून से शुरू हुए ’छानी के पानी घर म‘ अभियान के तहत 30 जून तक एक साथ लगभग साढ़े चार हजार से अधिक भवनों-ईकाइयों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापना का काम तेजी से प्रगति पर है। 

    कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल ने आज यहां बताया कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा कलेक्टर्स कंाफ्रेस में दिए गए निर्देशों पर अमल करते हुए यह अभियान 20 जून से शुरू किया गया था। ‘छानी के पानी घर म‘ अभियान के तहत पहले छः दिनों में जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बने सरकारी भवनों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों के भवनों, शालाओं, अस्पताल भवनों सहित निजी व्यवसायिक भवनों एवं बड़े आवासीय भवनों पर एक साथ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का काम शुरू हुआ और छः दिनों में ही दो हजार 73 ईकाईयों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा दिया गया है।

      कलेक्टर श्रीमती कौशल ने बताया कि इस अभियान के लिए जिले के ग्रामीण क्षेत्रों तथा शहरी क्षेत्रों में विशेष जन जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया गया था और लोगों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग की जरूरतों तथा उसके तकनीकी पहलुओं की भी जानकारी दी गई थी। उन्होंने कहा कि जिले के शहरी क्षेत्रों में केवल छः दिनों में 513 ईकाईयों पर और ग्रामीण क्षेत्रों में एक हजार 560 भवनों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित कर दिया गया है। नगर निगम कोरबा में अब तक 447, नगर पालिका क्षेत्र दीपका में 19, नगर पालिका क्षेत्र कटघोरा में 30, नगर पंचायत क्षेत्र पाली में 11 और नगर पंचायत छुरी में छः इकाईयों पर अभियान के तहत काम पूरा हो गया है। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्र में जनपद पंचायत कोरबा में 427, करतला में 201, कटघोरा में 315, पाली में 240 और पोंड़ीउपरोड़ा में 377 भवनों-इकाईयों पर बारिश का पानी बचाने वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का काम पूरा किया जा चुका है। 

    कलेक्टर ने कहा कि कोरबा नगर निगम के सभी आठ जोनों में शासकीय कार्यालयों के भवनों, स्कूल भवनों, माहाविद्यालय, शासकीय एवं निजी अस्पतालों, बड़े व्यावसायिक एवं आवासीय भवनों को मिलाकर कुल आठ सौ भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किए जायेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में हर एक ग्राम पंचायत स्तर पर पंचायत भवन, शाला भवन, अस्पताल, बड़े आवासीय भवनों को मिलाकर 12-12 भवनों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित करने का लक्ष्य है। लक्ष्य अनुसार कोरबा जिले की सभी 390 ग्राम पंचायतों में इस तरह कुल 4680 भवनों पर एक साथ वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित होगी। शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक जोन स्तर पर 100 भवनों में यह काम किया जाना है। 

छत्तीसगढ़ : प्रदेश के किसानों को चार लाख 35 हजार क्विंटल बीज वितरित

0

 खेती के लिए किसानों को उन्नत बीज एवं खाद की आवश्यकता होती है। राज्य सरकार के कृषि विभाग द्वारा आगामी खरीफ मौसम के लिए किसानों को आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के माध्यम से धान, दलहन, तिलहन आदि बीज वितरण किया जा रहा है। खरीफ मौसम के लिए प्रदेश के किसानों को उनकी मांग के अनुरूप अब तक चार लाख 35 हजार 560 क्विंटल उन्नत किस्म के प्रमाणित बीज का वितरण किया गया है। 
    कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार किसानों को खरीफ मौसम के लिए प्रदेश के 27 जिलों की सहकारी समितियों के माध्यम से धान, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, अरहर, उड़द, मूंग, कुल्थी, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, रामतिल, सूर्यमुखी आदि प्रमाणित बीज लक्ष्य का आठ लाख 50 हजार 550 क्विंटल के विरूद्ध सात लाख 10 हजार 163 क्विंटल बीज भण्डारण किया गया तथा चार लाख 35 हजार 560 क्विंटल बीज का वितरण किया गया है।