Home Blog Page 2992

छत्तीसगढ़ /केंद्र ने अब छत्तीसगढ़ में गरीबों का मिट्टी तेल कोटा 38 प्रतिशत घटाया

0

केंद्र सरकार ने अब राज्य को मिलने वाले मिट्टी तेल के कोटे में 38 प्रतिशत की कटौती कर दी है। इससे पहले केंद्र सरकार छात्रावासों और दाल-भात सेंटर के लिए अनाज देना बंद कर चुकी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने पहली तिमाही में 28 हजार 764 किलोलीटर मिट्टी तेल का आबंटन किया था, जबकि दूसरी तिमाही के लिए मात्र 17 हजार 880 किलोलीटर आबंटन तय किया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर मिट्टी तेल का कोटा बढ़ाने की मांग की थी। उनका कहना था कि मिट्टी तेल के अपर्याप्त कोटे की वजह से राज्य में 12.90 लाख राशन कार्डधारियों को केरोसिन का वितरण नहीं हो पा रहा है। 


एलपीजी सिलेंडरों के रिफिल कीमत के युक्तियुक्तकरण और एलपीजी वितरकों की संख्या में पर्याप्त प्रसार होने तक ईंधन के रूप में मिट्टी तेल की जरूरत बनी रहेगी। ऐसे में कटौती से गरीब परिवारों को अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद केंद्र ने मिट्टी तेल में भारी कटौती कर दी है।

छत्तीसगढ़ /मां के स्वास्थ्य लाभ की कामना लेकर भगवान की शरण में पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

0

मां के जल्द स्वस्थ होने की कामना लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गुरुवार सुबह भगवान की शरण में पहुंचे। उन्होंने आकाशवाणी चौक स्थित मां काली मंदिर में पूजा-अर्चना की और फिर बूढ़ा तालाब के सामने स्थित मंदिर में भगवान गणेश का पूजन किया। मुख्यमंत्री बघेल की मां विंदेश्वरी देवी की तबीयब खराब होने के बाद उन्हें 24 जून को राजधानी के रामकृष्ण अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यहां उनकी हालत गंभीर बताई गई है।

कार्डियॉरेस्पिरेट्री अरेस्ट के चलते कराया गया है भर्ती

  1. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सुबह सबसे पहले मां काली मंदिर पहुंचे। यहां पर उन्होंने मां को चुनरी चढ़ाई और विधिवत पूजा अर्चना की। इस दौरान उन्होंने मां की आरती भी उतारी। इसके बाद मंदिर में भगवान शिव और भैरव बाबा का पूजन किया और मां के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की। इसके बाद मुख्यमंत्री बूढ़ा तालाब के सामने स्थित भगवान गणेश के मंदिर पहुंचे और वहां भी पूजा अर्चना कर माथा टेका।
  2. मुख्यमंत्री की माता विंदेश्वरी देवी की सोमवार को अचानक तबीयत खराब हो गई थी। जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों ने बताया कि विंदेश्वरी बघेल को कार्डियॉरेस्पिरेट्री अरेस्ट हुआ। डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उनका सीपीआर किया और उन्हें वेंटिलेटर पर ले लिया। इसके बाद उनका डायलिसिस भी किया गया था। वर्तमान में उनकी स्थिति चिंताजनक है और उन्हें जीवन रक्षक उपकरणों पर रखा गया है। अस्पताल के डॉक्टरों की पूरी टीम सतत निगरानी कर रही है। किडनी से संबंधित रोग से वह पहले से पीड़ित हैं।

अंतागढ़ टेपकांड मामले में डॉ. पुनीत आज पहुंचेंगे SIT के दफ्तर, कहा नहीं दूंगा वॉइस सैंपल

0

अंतागढ़ टेपकांड में आरोपी बनाए गए डॉ. पुनीत गुप्ता गुरुवार को एसआईटी के सामने पेश होंगे। डॉ. पुनीत को वॉइस सैंपल देने के लिए नोटिस देकर बुलाया गया है लेकिन उन्होंने वॉइस सैंपल देने से इंकार कर दिया है। उन्होंने कहा, SIT ने नोटिस दिया है इसलिए पेश होने के लिए SIT के दफ्तर जाएंगे।

इसके पहले बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को भी SIT ने वॉइस सैंपल देने के लिए बुलाया था लेकिन अजीत वॉइस सैंपल देने SIT के दफ्तर नहीं पहुंचे थे। बता दें मंगलवार को अमित जोगी को और सोमवार को मंतूराम पवार को भी SIT ने वॉइस सैंपल देने के लिए बुलाया था।

लेकिन दोनों ने ही वॉइस सैंपल देने साफ इंकार कर दिया। अमित जोगी ने ट्विटर पर कहा था कि SIT चाहे तो उन्हें गिरफ्तार कर ले, लेकिन वह वॉइस सैंपल नहीं देंगे। वहीं मंतूराम पवार ने कहा था कि जब तक कोर्ट के आदेश की कॉपी नहीं दिखाई जाती है तब तक वॉइस सैंपल नहीं दूंगा।

गौरतलब है अंतागढ़ टेपकांड मामले में किरणमई नायक की शिकायत पर पंडरी थाने में मंतूराम पवार, पूर्व मंत्री राजेश मूणत, जनता कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी, डॉ. पुनीत गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

क्या है मामला – साल 2014 में कांकेर जिले के अंतागढ़ के तत्कालीन विधायक विक्रम उसेंडी ने लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद इस्तीफा दिया था। जिसके बाद वहां उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने पूर्व विधायक मंतू राम पवार को प्रत्याशी बनाया था। लेकिन नाम वापसी के अंतिम वक्त पर मंतूराम ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। जिससे भाजपा को एक तरह का वाकओवर मिल गया था। बाद में फिरोज सिद्दीकी नाम से एक व्यक्ति का फोन कॉल वायरल हुआ था।

राशन कार्ड धारकों लिए आई सरकार की तरफ से गुड न्यूज़

0

आज के समय में गरीब व्यक्ति के पास राशन कार्ड है यदि आपका भी राशन कार्ड बना हुआ है तो सभी राशन कार्ड धारकों के लिए जरूरी सूचना आई है। तो आईए जान लेते हैं इसके बारे में।

सभी राशन कार्ड धारकों के लिए यह जरूरी सूचना कैशलेस राशन डिपो होने को लेकर आई है दरअसल मोदी सरकार द्वारा भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए विभिन्न विभागों को ऑनलाइन को रही है। इस कड़ी में हरियाणा के खाद्य आपूर्ति विभाग ने डिपो होल्डर के माध्यम से उपभोक्ता को दिए जाने वाला राशन की पेमेंट नगद न लेकर कैशलेश करने वाली है। जिसकी शुरुआत भी कर दी गई है।

इसका कैशलेस योजना के तहत राशन कार्ड धारकों को बैंक खाता डिपो होल्डर के खाते से लिंक किया जाएगा राशन कार्ड धारक डिपो से जो भी सामान लेगा उतनी ही राशि बैंक खाते से कटकर सीधे डिपो होल्डर के बैंक खाते में चली जाएगी।

जामुन खाने के 5 जबरदस्त फायदे, जानने के बाद रह जाएंगे दंग

0

ब्लैक पल्म नाम से जाना जाने वाला जामुन दिखने में छोटा और चमकीला होता है। यह एक मीठा फल है जो बहुत लोगों का पसंदीदा होता है। जामुन में कई तरह के औषधीय गुण होते है। जिस वजह से जामुन खाने के फायदे भी अनेक है। इसमे मुख्यतः ग्लूकोज और फ्रक्टोज दो तत्व पाए जाते है। इसके बीज में प्रोटीन, और कैल्शियम की अधिकता पाई जाती है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि जामुन खाने के क्या क्या फायदे होते हैं?

जामुन खाने से 5 जबरदस्त होने वाले फायदें :-

1. जामुन के सेवन से पाचन क्षमता अच्छी रहती है और शरीर फिट रहता है। जामुन पाचन के लिए सबसे उपयुक्त नुस्खा है। इसे खाने से पाचन से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधाम होता है।

2. जामुन रक्त में शक्कर की मात्रा को नियंत्रित करता है, जिन लोगों को डायबिटीज है उन्हें ये खाने से फायदा मिलता है।इससे शुगर के मरीज को होने वाली समस्याए जैसे बार-बार प्यास लगना और बार-बार यूरिन होना आदि में फायदा मिलता है।

3. किडनी के स्टोन के इलाज के लिए यह रामबाण औषधि है। जामुन के बीज को सुखाकर बारीक़ पिस के पाउडर बनाये। इसे आपको दही में मिला कर खाना होगा और आपकी पथरी अपने आप निकल जाएगी।

4. रोजाना जामुन के साथ संतुलित भोजन लेने से शरीर की कमजोरी दूर हो जाती है और वजन तेजी से बढ़ने लगता है। शरीर की कमजोरी दूर करने के लिए अच्छा है।

5. यदि आप मुँह की बदबू से परेशान हैं तो आप जामुन के पत्तों का सेवन करके मुंह की बदबू से छुटकारा पा सकते हैं।

केन्द्र सरकार ने घटाया मिट्टी तेल का कोटा, CRPF जवान ने खुद को मारी गोली

0

केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने छत्तीसगढ़ को मिलने वाले मिट्टी तेल के कोटे को घटा दिया. इससे पहले दाल—भात केन्द्र के लिए अनाज देना केन्द्र सरकार बंद कर चुकी है. जबकि राज्य की भूपेश सरकार ने मिट्टी तेल का कोटा बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार को पत्र भी लिखा था. इसके बावजूद कोटा कम कर दिया गया है. छत्तीसगढ़ के मुख्य अखबारों ने इस खबर को गुरुवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

केन्द्र सरकार ने ​राज्य को मिलने वाले मिट्टी तेल के कोटे में 38 प्रतिशत की कटौती कर दी है. इससे पहले केंद्र सरकार छात्रावासों और दाल-भात सेंटर के लिए अनाज देना बंद कर चुकी है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने पहली तिमाही में 28 हजार 764 किलोलीटर मिट्टी तेल का आबंटन किया था, जबकि दूसरी तिमाही के लिए मात्र 17 हजार 880 किलोलीटर आबंटन तय किया है.

सीएम ने लिखी थी चिट्ठी
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर मिट्टी तेल का कोटा बढ़ाने की मांग की थी. उनका कहना था कि मिट्टी तेल के अपर्याप्त कोटे की वजह से राज्य में 12.90 लाख राशन कार्डधारियों को केरोसिन का वितरण नहीं हो पा रहा है. एलपीजी सिलेंडरों के रिफिल कीमत के युक्तियुक्तकरण और एलपीजी वितरकों की संख्या में पर्याप्त प्रसार होने तक ईंधन के रूप में मिट्टी तेल की जरूरत बनी रहेगी. ऐसे में कटौती से गरीब परिवारों को अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. इसके बावजूद केंद्र ने मिट्टी तेल में भारी कटौती कर दी है. नईदुनिया, ​पत्रिका, नवभारत सहित अन्य अखबारों ने भी इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

सीआरपीएफ जवान ने की आत्महत्या
बीजापुर जिला मुख्यालय में स्थित एक सीआरपीएफ 170 बटालियन में पदस्थ आरक्षक ने आत्महत्या कर ली है. आरक्षक का नाम दीपक कुमार शाह बताया जा रहा है. वो उत्तर प्रदेश का रहने वाला था. बीजापुर थाना क्षेत्र में स्थित सीआरपीएफ कैंप में उसने इंसास रायफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली है.

मानसून में देरी, बढ़ी गर्मी
बंगाल की खाड़ी में मानसूनी गतिविधियां कम होने से छत्तीसगढ़ में पिछले सप्ताहभर से बारिश रुक गई है. इस वजह से दिन का तापमान 10 डिग्री तक बढ़ गया है. मानसून आने से जहां राहत मिली थी, वहीं एक बार फिर राजधानी रायपुर समेत पूरा प्रदेश गर्मी और उमस की चपेट में है. हालांकि मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि 27 जून के बाद खाड़ी में सिस्टम डेवलप होने से राज्य में फिर से भारी बारिश होगी. मानसून ने छत्तीसगढ़ में 22 जून को प्रवेश किया और आगे बढ़ गया.

बेटे आकाश की करतूत पर सवाल पूछने पर कैलाश विजयवर्गीय बोले- तुम्हारी हैसियत क्या?

0

इंदौर से बीजेपी विधायक आकाश विजयवर्गीय के करतूत पर उनके पिता और बीजेपी के सीनियर लीडर कैलाश विजयवर्गीय से जवाब देते नहीं बन रहा है. आकाश के नगर निगम कर्मचारियों की पिटाई की घटना पर जब एक निजी चैनल के पत्रकार ने कैलाश विजयवर्गीय से सवाल पूछा तो वो उसे सुनकर भड़क गए.

बुधवार को मामला सामने आने के बाद पत्रकार ने कैलाश विजयवर्गीय से पूछा कि आपके बेटे ने कानून को अपने हाथ में लेकर निगम अधिकारियों की पिटाई की. इस पर पहले तो उन्होंने कहा कि मेरा बेटा गलत काम नहीं कर सकता. फिर जब पत्रकार ने दोबारा पूछा कि यह तो वीडियो में दिख रहा है कि आकाश अधिकारियों की पिटाई कर रहे हैं. इस पर वो और ज्यादा भड़क गए और पत्रकार को कहा कि आप जज हैं क्या? पत्रकार के बार-बार सवाल पूछने पर कैलाश विजयवर्गीय ने अपना आपा खो दिया और कहा कि तुम्हारी हैसियत क्या है?

आकाश विजयवर्गीय ने नगर निगम कर्मचारियों की बैट से की थी पिटाई

दरअसल आकाश विजयवर्गीय ने बुधवार को इंदौर नगर निगम के अधिकारियों की बल्ले से सरेआम पिटाई कर दी थी. मारपीट की इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. बताया जा रहा है कि निगम के कर्मचारी शहर में जर्जर हो चुके मकानों को तोड़ने आए थे. इस पर आकाश विजयवर्गीय ने उनसे बदसलूकी की और उन पर बुरी तरीके से भड़क गए. उन्होंने अधिकारियों की जोरदार तरीके से पिटाई कर दी. दरअसल, निगम की टीम जर्जर मकानों को खाली कराकर तोड़ना चाहती थी, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके.

इसके बाद आकाश विजयवर्गीय को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. उन्हें स्थानीय कोर्ट में पेश किया गया. आकाश को कोर्ट ले जाने के दौरान पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी. विधायक के समर्थक आसपास इकट्ठा हो गए. वे सरकार और निगम के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. घटना के बाद थाने पहुंचे आकाश ने अपना पक्ष रखा. आकाश ने कहा कि यह तो शुरुआत है हम भ्रष्टाचार और गुंगागर्दी को खत्म करेंगे.

बता दें कि कैलाश विजयवर्गीय पिछले कुछ वर्षों से राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. साथ ही वो पश्चिम बंगाल में बीजेपी के प्रभारी भी हैं. इसलिए उन्होंने पिछले साल हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव खुद नहीं लड़ा था. उनकी जगह पार्टी ने उनके बेटे आकाश विजयवर्गीय को टिकट दिया था.

लीजिए, अब आपकी सेवा में होंगी प्राइवेट ट्रेनें, भारतीय रेलवे तलाश रहा रूट

0

भारतीय रेलवे अब अपने सरकारी नेटवर्क पर प्राइवेट यात्री रेलगाड़ियों को दौड़ाने की तैयारी कर रहा है। भारतीय रेलवे इस पहल को जल्द शुरू करने के लिए रूट तलाश कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फिलहाल दिल्ली-लखनऊ और मुंबई-शिरडी के व्यस्त इलाकों पर रेलवे बोर्ड विचार कर रहा है। इसके अलावा जिन रूटों का मूल्यांकन किया जा रहा है उनमें बेंगलुरु-चेन्नई, अहमदाबाद-मुंबई और केरल में त्रिवेंद्रम-कन्नूर शामिल हैं। नीतिगत निर्णय के अनुसार सभी रूट 500 किलोमीटर वाले खांचे में फिट होते हैं।

दिल्ली-लखनऊ एक वाला रूट मुनाफे वाला है क्योंकि वर्तमान में हर दिन इस पर तकरीबन 50 ट्रेनों की सेवा रहती है। मुंबई-शिरडी वाला रूट शिरडी साईं मंदिर के कारण लोकप्रिय है और इसमें बहुत ज्यादा ट्रेनें नहीं हैं और यह एकमात्र ऐसा रूट है जिस पर शताब्दी ट्रेन की सेवा नहीं है।

500 किलोमीटर के मानक वाले दिल्ली-लखनऊ रूट पर यात्रियों की संख्या अच्छी-खासी रहती है और माल गाड़ियां भी इस पर कम नहीं हैं। इस पर दौड़ने वाली स्वर्ण शताब्दी ट्रेन महज 6.30 घंटे में यात्रा पूरी करती है। वहीं, करीब 330 किलोमीटर लंबे मुंबई-शिरडी रूट पर दो सुपरफास्ट ट्रेनें समर्पित हैं, वहीं, लंबी दूरी की अन्य ट्रेनों ज्यादा समय लेती हैं। सूत्रों के मुताबिक, भावी पहल को शुरू करने के लिए इन रूटों को आंका जा रहा है।

भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) को शुरू में दो ट्रेनें चलाने के लिए दी जाएंगी। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक अधिकारी इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि सौ दिनों के भीतर कम से कम एक ट्रेन चला सकेंगे।

बता दें कि भारतीय रेलवे लगातार यात्रियों की सुविधाओं को लेकर कई तरह की योजनाओं पर काम कर रहा है।

RBI का आदेश! अब कोई भी व्यक्ति सिक्के लेने से नहीं कर सकता इनकार, सभी कॉइन्स वैलिड

0

अब कोई भी दुकानदार नहीं कर सकता सिक्का लेने से मना. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को विभिन्न आकार-प्रकार और डिजाइन के सिक्कों को स्वीकार करने लेकर लोगों के बीच संदेह को दूर किया. RBI का कहना है कि जो भी सिक्के हैं, वे पूरी तरह से वैध मुद्रा हैं. लोगों को बिना किसी झिझक के उसे स्वीकार करना चाहिए. केंद्र सरकार द्वारा ढाले गए सिक्कों को आरबीआई चलन में डालता है. साथ ही केंद्रीय बैंक ने बैंकों से यह भी कहा है कि वे सिक्के बदलने आने वाले ग्राहकों को अपनी शाखाओं से नहीं लौटाएं. वे ग्राहकों से छोटी राशि के सिक्कों और नोट को स्वीकार करें.

समय-समय पर बदलते हैं सिक्के: RBI

रिजर्व बैंक ने कहा कि लोगों की लेन-देन की जरूरतों को पूरा करने के लिए समय-समय पर जो भी सिक्के चलन में लाए जाते हैं, उनकी विशेषताएं अलग होती हैं. वे विभिन्न विचारों, आर्थिक, सामाजिक और संस्कृति से प्रेरित होती हैं. आरबीआई ने कहा कि सिक्के लंबी अवधि के लिए चलन में बने रहते हैं. साथ ही अलग-अलग डिजाइन और आकार के सिक्के जारी किए जाते हैं.

संदेह से सिक्कों के चलन में रूकावट 
केंद्रीय बैंक ने कहा कि ऐसी रिपोर्ट है कि कुछ तबकों में ऐसे सिक्कों को लेकर संदेह है और इसके कारण कुछ व्यापारी दुकानदार और लोग सिक्के स्वीकार नहीं करते. इससे देश के कुछ हिस्सों में सिक्कों के मुक्त उपयोग और चलन बाधित हुआ है. रिजर्व बैंक ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान नहीं दें और इन सिक्कों को बिना झिझक वैध मुद्रा के रूप में स्वीकार करें.

अभी ये सिक्के हैं चलन में

फिलहाल विभिन्न आकार-प्रकार, डिजाइन के 50 पैसा, 1 रुपया, 2 रुपया, 5 रुपया और 10 रुपये की राशि के सिक्के चलन में हैं. केंद्रीय बैंक ने इसके साथ बैंकों से यह भी कहा है कि वे सिक्के बदलने आने वाले ग्राहकों को अपनी शाखाओं से नहीं लौटाएं. नोट और सिक्कों को बदलने के बारे में आरबीआई के परिपत्र में बैंकों को सलाह दी गई है कि किसी भी बैंक शाखा को छोटी राशि के नोट या सिक्कों को लेने से मना नहीं करना चाहिए. हालांकि, आरबीआई को बैंक शाखाओं द्वारा सिक्कों को स्वीकार नहीं करने के बारे में शिकायतें मिलती रही हैं.

मोदी सरकार ने कर ली है रेलवे को पूरी तरह निजी और विदेशी हाथों में सौंपने की तैयारी

0

लोगों को विश्व स्तरीय सुविधाएं मुहैया कराने का सपना दिखाकर सरकार रेलवे को टुकड़ों में निजी और विदेशी कंपनियों के हाथों को सौंपने की तैयारी कर रही है। ट्रेन, स्टेशन, कई तरह की सेवाएं तो इन कंपनियों को दी ही जाएंगी, वे रेल फैक्ट्रियां भी उन्हें धीरे-धीरे दे दी जाएंगी जो कोच और इंजन बनाने में महारत हासिल कर चुकी हैं और अब अपने उत्पाद विदेशों को निर्यात करने की तैयारी कर रही हैं।

वैसे, ऐसा भी नहीं है कि इस तरह की योजना पहली बार बनी है। अफसरों ने इस दिशा में पिछले डेढ़ दशक में कई बार कोशिशें कीं लेकिन यूपीए शासन के दौरान इन्हें तवज्जो नहीं दिया गया और उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। रेल कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों ने भी तब कड़ा रुख अपनाया था। लेकिन इस बार सरकार में विभिन्न स्तरों पर इस बारे में प्रक्रिया तेजी से चल रही है।

जून के दूसरे हफ्ते में रेल भवन में आयोजित महाप्रबंधकों की बैठक में रेलवे बोर्ड ने रेल मंत्री पीयूष गोयल के समक्ष ट्रेनों को निजी ऑपरेटरों को देने संबंधी रोडमैप पेश किया। इसमें रेलवे बोर्ड अध्यक्ष वी.के. यादव ने जो योजना पेश की है, उसके अनुसार, प्रीमियम ट्रेनों- राजधानी, शताब्दी और दुरंतो को निजी ऑपरेटरों के हाथ में सौंपकर यात्रियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं दी जा सकती हैं। इसके लिए इन्हें चलाने, इनकी देख-रेख करने आदि के काम आईआरसीटीसी (इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म) को सौंपने की योजना है। इसमें परिचालन का खर्च और रोलिंग स्टॉक (इंजन-कोच) का किराया आईआरसीटीसी को देना होगा। इसके अलावा रेल किराये से होने वाले मुनाफे का कुछ हिस्सा रेलवे को देना होगा। इसके एवज में टिकट बुकिंग और खानपान सेवा आदि का अधिकार आईआरसीटीसी के पास रहेगा। दस्तावेजों के अनुसार, कम भीड़ वाले रेलवे रूट और पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाले रूट पर आईआरसीटीसी और ट्रेन चला सकती है।

यह है पूरी योजना

रेलवे बोर्ड आगामी 100 दिनों में निजी ट्रेन ऑपरेटरों को ट्रेनें चलाने के लिए पसंद की अभिव्यक्ति (एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट) दस्तावेज जारी करेगा। इसमें निजी ट्रेन ऑपरेटर अपने मनपंसद रूट पर ट्रेन चलाने की इच्छा जाहिर करेंगे। इसी दौरान रेलवे ट्रेनें चलाने के लिए बोली आंमत्रित करेगा। अभी निजी ट्रेनऑपरेटरों के लिए कोई नियम तय नहीं किए गए हैं। जानकारों का कहना है कि यह काम आईआरसीटीसी की मदद से किया जाएगा। ट्रेनों का अधिकतम किराया रेलवे बोर्ड तय करेगा जिससे निजी ऑपरेटर किराये में मनमानी नहीं कर सकेंगे।

रेलवे बोर्ड के सदस्य यातायात गिरीश पिल्लई ने जनवरी माह में इस बात का इशारा कर दिया था कि प्रीमियम ट्रेनें चलाने के लिए निजी ऑपरेटरों की मदद ली जाएगी। परिवहन शोध एवं प्रबंधन केंद्र (सीट्राम) की ओर से आयोजित रेलवे के बिजनेस में ट्रांसफॉर्मेशन विषय पर अपने संबोधन में उन्होंने इसका जिक्र किया था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यात्री ट्रेनें चलाना घाटे का सौदा है। कुछ ट्रेनों को छोड़कर अधिकतर ट्रेनें घाटे में दौड़ रही हैं। रेलवे बोर्ड के दस्तावेजों में उल्लेख है कि ट्रेन परिचालन में आने वाली लागत का सिर्फ 53 फीसदी रेलवे को मिलता है, शेष यात्री को किराये में छूट दी जाती है।

मार महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगों पर

यही कारण है कि सरकार रसोई गैस पर सब्सिडी छोड़ने की अपील के बाद अब रेल यात्रियों से सब्सिडी छोड़ने की अपील करेगी। प्रीमियम ट्रेनों- राजधानी, शताब्दी और दुरंतो में फ्लैक्सी फेयर फार्मूला भी यात्री ट्रेनों में होने वाले घाटे की भरपाई नहीं कर पा रहा है। कई रूट पर ट्रेन के एसी-2 श्रेणी का किराया हवाई जहाज के किराये से अधिक है। यही कारण है कि 2018 में सात करोड़ रेल यात्री कम हो गए। इसे देखते हुए रेलवे ने 15 शताब्दी ट्रेनों से फ्लैक्सी फेयर हटा दिया था। फ्लैक्सी को लेकर जनता में रेलवे की किरकिरी होने पर 32 प्रीमियम ट्रेनों में लीन सीजन में फ्लैक्सी फेयर नहीं लेने का फैसला किया गया है।

नीति निर्माण से जुड़े शीर्ष निकाय नीति आयोग ने 2016 में रेलवे की खिंचाई करते हुए कहा था कि यात्री सेवा में नुकसान से निपटने के लिए किराये में बढ़ोतरी करना एकमात्र रास्ता नहीं है। रेलवे की लागत ढांचे में अकुशलता इसका प्रमुख कारण है। किराये से इतर स्रोत्रों की मदद से अपनी आय बढ़ानी चाहिए। लेकिन रेलवे बोर्ड ने इस दिशा में काम करने के बजाए प्रीमियम ट्रेनों को सीधे निजी ट्रेन ऑपरेटरों को सौंपने का फैसला किया है। इसका सबसे बुरा परिणाम यह हो सकता है कि वर्तमान में ट्रेनों में बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगों, गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों, पांच वर्ष तक आयु के बच्चों को मिलने वाली रियायात समाप्त कर दीजाए।