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छत्तीसगढ़ /मंत्रियों को नए सिरे से मिली जिलों की कमान, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया बदलाव

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मत्रियों के जिलों के प्रभार में बदलाव किया है। अब नए सिरे से जिलों का प्रभार सौंपा गया है। इसके तहत जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री रविंद्र चौबे को रायपुर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री टीएस सिंहदेव को जांजगीर-चांपा, गृह,पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ताम्रध्वज साहू को बिलासपुर जिले का प्रभार सौंपा गया है। 

नए सिरे से इन जिलों की सौंपी गई कमान

  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री टीएस सिंह देव को जांजगीर-चांपा, बलौदाबाजार-भाटापारा और मुंगेली जिले का प्रभारी मंत्री बनाया गया है।
  • लोक निर्माण, गृह, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ताम्रध्वज साहू को बिलासपुर और गरियाबंद जिले का प्रभार सौंपा गया है। 
  • कृषि एवं जैव प्राद्यौगिकी, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री रविन्द्र चौबे को रायपुर और रायगढ़ जिले का प्रभार दिया गया है। 
  • स्कूल शिक्षा, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम को बस्तर, कोरबा और बालोद जिले का प्रभार सौंपा गया है। 
  • परिवहन, आवास एवं पर्यावरण, खाद्य तथा वन मंत्री मोहम्मद अकबर को राजनांदगांव और दुर्ग जिले का प्रभारी मंत्री बनाया गया है। 
  • वाणिज्यिक कर (आबकारी), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कवासी लखमा को कबीरधाम, धमतरी और महासमुंद जिले का प्रभारी मंत्री बनाया गया है। 
  • नगरीय प्रशासन एवं विकास व श्रम मंत्री डाॅ. शिवकुमार डहरिया को सरगुजा और कोरिया जिले का प्रभार दिया गया है। 
  • महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया को बेमेतरा और जशपुर जिले का प्रभारी मंत्री बनाया गया है। 
  • लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गुरू रूद्र कुमार को उत्तर बस्तर (कांकेर), नारायणपुर और कोण्डागांव जिले का प्रभार दिया गया है। 
  • राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, वाणिज्यिक कर (पंजीयन एवं मुद्रांक) जयसिंह अग्रवाल को दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा), बीजापुर और सुकमा जिले का प्रभार सौंपा गया है। 
  • उच्च शिक्षा, कौशल विकास, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री उमेश पटेल को बलरामपुर-रामानुजगंज अौर सूरजपुर जिले का प्रभार सौंपा गया है।

करोड़ों रुपए में बिकती है व्हेल की उल्टी, जानें वजह

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मुंबई पुलिस ने व्‍हेल मछली की ‘उल्‍टी’ की तस्‍करी के आरोप में एक शख्स को पकड़ा है. ये उल्टी आखिर इतनी महंगी क्यों होती है, इसको जानना वाकई रोचक है. इसके अपशिष्‍ट पत्थर के रूप में जम जाने पर इसकी कीमत अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में करोड़ों रुपये हो जाती है. इसका इस्तेमाल खासतौर पर बेहद महंगे परफ्यूम बनाने में किया जाता है.

दरअसल दुनियाभर में कुछ लोग यही काम करते हैं, वो लगातार व्हेल मछली को तलाशते रहते हैं या खासकर उन जगहों पर होते हैं, जहां व्हेल मछलियां आती रहती हैं. उनकी उल्टी सूखने के बाद पत्थर बन जाती हैं, जिन्हें खोजने में लंबा इंतजार भी करना होता है. अगर किसी को ये पत्थर मिल गया तो फिर ये बाजार में करोड़ों का बिकता है.

कई वैज्ञानिक इसे व्‍हेल की उल्‍टी बताते हैं तो कई इसे मल बताते हैं. यह व्‍हेल के शरीर के निकलने वाला अपशिष्‍ट होता है जो कि उसकी आंतों से निकलता है और वह इसे पचा नहीं पाती है. कई बार यह पदार्थ रेक्टम के ज़रिए बाहर आता है, लेकिन कभी-कभी पदार्थ बड़ा होने पर व्हेल इसे मुंह से उगल देती है. वैज्ञानिक भाषा में इसे एम्बरग्रीस कहते हैं.

व्‍हेल मछली का जो अपशिष्ट का रूप ले लेता है, उसका इस्तेमाल महंगे परफ्यूम बनाने में होता है

एम्बरग्रीस व्हेल की आंतों से निकलने वाला स्‍लेटी या काले रंग का एक ठोस, मोम जैसा ज्वलनशील पदार्थ है. यह व्हेल के शरीर के अंदर उसकी रक्षा के लिए पैदा होता, ताकि उसकी आंत को स्क्विड(एक समुद्री जीव) की तेज़ चोंच से बचाया जा सके.

आम तौर पर व्हेल समुद्र तट से काफी दूर ही रहती हैं, ऐसे में उनके शरीर से निकले इस पदार्थ को समुद्र तट तक आने में कई साल लग जाते हैं. सूरज की रोशनी और नमकीन पानी के संपर्क के कारण यह अपशिष्ट चट्टान जैसी चिकनी, भूरी गांठ में बदल जाता है, जो मोम जैसा महसूस होता है.

Whale vomit
व्हेल मछली के इस अपशिष्ट की गंध शुरू में सामान्य होती है लेकिन अगर इसे कुछ दिनों तक रखा जाए तो ये सुगंध देने लगता है

व्हेल की पेट से निकलने वाली इस एम्बरग्रीस की गंध शुरुआत में तो किसी अपशिष्ट पदार्थ की ही तरह होती है, लेकिन कुछ साल बाद यह बेहद मीठी हल्‍की सुगंध देता है. इसे एम्बरग्रीस इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह बाल्टिक में समुद्र तटों पर मिलने वाले धुंधला एम्बर जैसा दिखता है. यह इत्र के उत्पादन में प्रयोग किया जाता है और इस वजह से काफी कीमती होता है. इसकी वजह से इत्र की सुगंध काफी समय तक बनी रहती है. इसी वजह से वैज्ञानिक एम्बरग्रीस को तैरता सोना भी कहते हैं. इसका वज़न 15 ग्राम से 50 किलो तक हो सकता है.

परफ्यूम के अलावा और कहां होता है इस्तेमाल?
एम्बरग्रीस ज्यादातर इत्र और दूसरे सुगंधित उत्पाद बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. एम्बरग्रीस से बना इत्र अब भी दुनिया के कई इलाकों में मिल सकता है. प्राचीन मिस्र के लोग एम्बरग्रीस से अगरबत्ती और धूप बनाया करते थे. वहीं आधुनिक मिस्र में एम्बरग्रीस का उपयोग सिगरेट को सुगंधित बनाने के लिए किया जाता है. प्राचीन चीनी इस पदार्थ को “ड्रैगन की थूकी हुई सुगंध” भी कहते हैं.

यूरोप में ब्लैक एज (अंधकार युग) के दौरान लोगों का मानना ​​था कि एम्बरग्रीस का एक टुकड़ा साथ ले जाने से उन्हें प्लेग रोकने में मदद मिल सकती है. ऐसा इसलिए था क्योंकि सुगंध हवा की गंध को ढक लेती थी, जिसे प्लेग का कारण माना जाता था.

इस पदार्थ का भोजन का स्वाद बढ़ाने के और कुछ देशों में इसे सेक्स पावर बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. मध्य युग के दौरान यूरोपीय लोग सिरदर्द, सर्दी, मिर्गी और अन्य बीमारियों के लिए दवा के रूप में एम्बरग्रीस का उपयोग करते थे.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बोले : किसानों के चेहरे में प्रसन्नता है, वही सबसे बड़ी उपलब्धि

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छत्तीसगढ़ हरदिहा साहू समाज के 81वॉ. वार्षिक महाधिवेशन में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहुंचे। इस दौरान समाज के प्रदेश अध्यक्ष सोमनाथ साहू व अध्यक्ष नन्दकुमार साहू सहित समाज के अन्य सदस्यों ने पुष्पहार से मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इस दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि अधिकांश घोषणा की थी, जिसे पूरा करने में सफल रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा दिमागी बुखार का कहर, मरने वाले बच्चों की संख्या हुई 130

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दिमागी बुखार से बिहार में मरने वालों की संख्या बढ़कर 130 हो गई है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई करने का निर्णय भी ले लिया है। याचिका में बीमारी से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों की एक टीम का गठन करने की तत्काल मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट 24 जून को सुनवाई के लिए सहमत हो गया है।
130 में से 112 मौत अकेले मुजफ्फरपुर में ही हुई हैं। यहां लोग अपने बच्चों को मुजफ्फरपुर के श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) अस्पताल ला रहे हैं। लोग आरोप लगा रहे हैं कि उनके बच्चों को अस्पताल में भर्ती नहीं किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि उन्हें कभी उनके बच्चों के लिए ओआरएस भी नहीं दिया गया।

यहां आ रहे माता-पिता का कहना है, “किसी ने हमें ओआरएस के बारे में कुछ भी नहीं बताया है और ना ही दिया है। हमें एईएस के लक्षण भी नहीं पता हैं। हमारे बच्चे 4-5 दिनों से बुखार में तप रहे हैं। डॉक्टरों ने हमें बच्चों के लिए दवाईयां लाने को कहा। और कहा कि अगर बच्चों का बुखार नहीं जाता है तो उन्हें भर्ती किया जाएगा। हमारे पास पैसे नहीं हैं।

हरा प्रदेश-कूल प्रदेश के नारे के साथ पौधारोपण कर प्रदेश को बनाए समृद्ध : सीएम कमलनाथ

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 सीएम कमलनाथ ने प्रदेश के नागरिकों से आव्हान किया है कि वे इस मानसून में प्रदेश को हरा-भरा बनाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि हर नागरिक अपने आस-पास एक पौधा ज़रूर लगाए और उसे वृक्ष बनने तक की जिम्मेदारी भी ले। उन्होंने वन विभाग सहित सभी विभागों से वृहद पौधारोपण अभियान चलाने व उसे  वृक्ष बनने तक की ज़िम्मेदारी सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने कहा कि लगने वाले पौधों का हर साल सोशल आडिट भी हो। पौधारोपण अभियान सिर्फ़ आँकड़ो की बाज़ीगरी तक ही सीमित ना हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा पर्यावरण जिन चुनौतियों से जूझ रहा है उसका सबसे बड़ा कारण वृक्षों का कटना और नए वृक्षों का नहीं लग पाना है।आज वृक्षों की कटाई के कारण हमें तापमान में वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है।कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि हर मानसून में पौधरोपण की रस्म अदायगी न होकर हमें अपने पर्यावरण और भावी पीढ़ी के भविष्य की चिंता करते हुए वास्तविक रूप से पौधरोपण अभियान से जुड़ना होगा। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में जितने वृक्ष लगाना बताए गए हैं ,जिनमें नर्मदा नदी के किनारे हुए पौधरोंपण भी शामिल है।अगर ये सच्चे अर्थों में लगे होते तो आज हमारा प्रदेश पूरे देश में पर्यावरण के मामले में श्रेष्ठ और हरा-भरा प्रदेश होता। प्रदेश के हर नागरिक को अपने प्रदेश और भावी पीढ़ी के भविष्य की चिंता करना होगी।
 

सभी हरा प्रदेश-कूल प्रदेश का संकल्प ले

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि सरकार ने निर्णय लिया है कि सड़कों के निर्माण के टेंडर के साथ ही सड़क के दोनों और पेड़ लगाने का भी प्रावधान किया जाए।
मुख्यमंत्री ने वन विभाग सहित सभी निर्माण से जुड़े और विशेषकर कृषि, ग्रामीण विकास, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा सहित अन्य विभागों को व्यापक पैमाने पर वर्षा ऋतु के दौरान पौधरोपण अभियान चलाने को कहा है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और युवाओं को वृक्षों के महत्व और पर्यावरण में उनकी भूमिका के बारे में जागरूक बनाने के लिये अभियान चलाया जाए ताकि वे पौधरोपण और वृक्षों की सुरक्षा के लिए संकल्पित हो सकें।
मुख्यमंत्री ने पौधरोपण अभियान में जन भागीदारी के साथ ही सभी जन-प्रतिनिधियों से भी अपील की है कि वे भी अपने-अपने स्तर पर वृहद पौधरोपण करें, लोगों को प्रेरित करे।हर जन-प्रतिनिधि पौधरोपण करे और उन्हें वृक्ष बनाने की जिम्मेदारी भी ले। तभी हमारा प्रदेश -हरा प्रदेश- कूल प्रदेश का हमारा संकल्प पूरा होगा।

छत्तीसगढ़ में पुलिस थाने आदर्श जनसुविधा केन्द्र के रूप में होंगे विकसित

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 छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक डी.एम.अवस्थी ने राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों, रेलवे पुलिस सहित राज्य के सभी थाना प्रभारियों को थानों को आदर्श जनसुविधा केन्द्र के रूप में विकसित किए जाने के निर्देश दिए हैं।
अवस्थी ने इस संबंध में लिखे पत्र में थाना पहुंचने पर नागरिकों के साथ सद्भावपूर्ण व्यवहार करते हुए उनकी समस्याओं के निराकरण करने को कहा हैं। उन्होंने कहा है कि सभी थानों में एक कक्ष को आगंतुक कक्ष के रूप में चिन्हित किया जाएगा। इस कक्ष में बैठने एवं स्वच्छ पीने के पानी की व्यवस्था रखी जाएगी। थाना पहुंचने वाले प्रत्येक नागरिक या आवेदक को इस कक्ष में सम्मान के साथ बैठाकर उसी बात सुनी जाए।
उन्होने पत्र में निर्देश दिया है कि प्रत्येक थाने में थाना प्रभारी तीन शिफ्ट के लिए तीन कर्मचारियों के नोडल कर्मचारी के रूप में नियुक्त करें। प्रत्येक शिफ्ट में एक नोडल कर्मचारी थाने में उपस्थित रहेंगे, जिनका यह कर्तव्य रहेगा कि थाने में पहुंचने वाले आवेदक को वे आगंतुक कक्ष में बैठाकर उनसे चर्चा करेंगे तथा उन्हें थाना प्रभारी या दिवस अधिकारी के समक्ष प्रथम सूचना पत्र दर्ज करने अथवा उचित वैधानिक कार्यवाही करने हेतु प्रस्तुत करेंगे।
थाना प्रभारी या दिवस अधिकारी ऐसे प्रत्येक आवेदक के आवदेन पर यदि संज्ञेय अपराध का होना पाया जाता है, तो तत्काल प्रथम सूचना पत्र दर्ज कर विवेचक के माध्यम से उसकी त्वरित विवेचना करावएंगे। यदि संज्ञेय अपराध का होना न पाया जाए, तो इसकी जानकारी आवेदक को देते हुए विधि अनुसार धारा-155 दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत कार्यवाही करेंगे।
उन्होने कहा कि सभी पुलिस अधीक्षक यह सुनिश्चित करें कि उनकी इकाई के सभी थानों को आदर्श जन सुविधा केन्द्र के रूप में विकसित किया जावें। जो थाना प्रभारी उक्त जनसुविधा कार्यों एवं व्यवस्थाओं को प्रभावी तरीकें से अपने थाने में लागू करने में असफल रहते हैं, ऐसे थाना प्रभारी के दायित्व से मुक्त कर दिया जावे एवं उनकी इस अयोग्यता का स्पष्ट उल्लेख उनकी सेवा-पुस्तिका में किया जावें, ताकि भविष्य में उन्हें थाना प्रभारी का दायित्व न सौंपा जाए।
पुलिस महानिदेशक ने सभी पुलिस अधीक्षकों को व्यक्तिगत रूप से सुनिश्चित करने को कहा है कि दुव्र्यवहार एवं भ्रष्ट आचरण प्रदर्शित करने वाले थाना प्रभारी एवं कर्मचारियों को कतई न बख्शा जाए, उनके विरूद्ध कठोरतम विभागीय कार्यवाही किया जाए।

सिकलसेल पूरी दुनिया के लिए गंभीर : सीएम भूपेश बघेल

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रायपुर। विश्व सिकलसेल दिवस पर हुए एक कार्यक्रम में बुधवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव, विधायक धनेंद्र साहू, स्वास्थ्य विभाग की सचिव निहारिका बारिक, विधायक गुलाब सिंह शामिल हुए। इसमें सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि सिकलसेल अनुवांशिक बीमारी है और यह बीमारी होना गंभीर है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा मेरे विधानसभा में 10 लाख लोगों का सिकलसेल जांच की गई। इसमें 283 लोगों को सिकलसेल रोगी मिले हैं। कार्यक्रम को स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव और धनेंद्र साहू ने भी संबोधित किया। सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि सिकलसेल पूरी दुनिया के लिए गंभीर है। 

वहीं स्वास्थ्य विभाग की सचिव निहारिका बारिक ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सेंट्रल फॉर एक्शन प्लान करने का प्रस्ताव दिया है। माता पिता को विदित होता है कि बच्चे को उक्त बीमारी फिर भी दुनिया में बदनामी के भय से सिलकसेल है नहीं बताते। लोग विवाह में व्यवधान आएगा इस कारण भी नहीं बताते। इस वजह से परेशानी बढ़ जाती है। 

छत्तीसगढ़ : 21 शंखवादक के साथ जगन्नाथ मंदिर से 4 जुलाई को निकलेगी रथयात्रा

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रायपुर के शंकर नगर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से चार जुलाई को रथयात्रा के पावन अवसर पर इस साल ओडिशा के इक्कीस शंखवादकधारी आएंगे। वे पूजा शुरू होने से लेकर रथयात्रा निकलने तक लगातार शंख बजाकर भगवान को प्रसन्न करेंगे। जगन्नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष पुरन्दर मिश्रा ने कहा कि रायपुर में हर साल की तरह इस साल भी जगन्नाथ पर्व पर धूमधाम से रथयात्रा निकालेंगे। इस वर्ष चार जुलाई को भगवान जगन्नाथ की पूजा होगी। इस दौरान रायपुर के निवासियों को भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने को मिलेगा और विशाल यात्रा निकाली जाएगी। पुरन्दर मिश्रा ने यह भी कहा कि समूचे ब्रह्माण्ड में एक मात्र जगन्नाथ मंदिर में जगन्नाथ भगवान बलभद्र, सुभद्रा के लिए तीन अलग-अलग रथ बनाए जाते हैं और भक्तों को प्रसाद के तौर पर आशीर्वाद देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत मंत्री विधायक और महापौर होंगे।

दो ग्रहों की हुई खोज, जहां हैं जीवन के आसार, धरती मिली गर्म और पानी की उम्मीद

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 दो ऐसे ग्रहों की खोजे की गई है, जो पृथ्वी के समान गर्म है और उनमें पानी हो सकता है। साथ ही यह जीवन का समर्थन करने के लिए अच्छा विकल्प हो सकते हैं। यह एक शोध में पता चला। वैज्ञानिक 2016 के बाद से 3.5-मीटर टेलीस्कोप का उपयोग करके पास के सितारों के पास मौजूद ग्रहों पर जीवन की खोज कर रहे हैं। अलमेरिया, दक्षिणी स्पेन में कैलार ऑल्टो वेधशाला और दो अन्य स्पैनिश दूरबीनों में कैद की गई छवियों में शोधकतार्ओं को हमारे सौर मंडल से लगभग 12.5 प्रकाश वर्ष दूर टेगेर्डन स्टार (एक ठंडा लाल बौना सितारे) से जुड़ी बड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। 

शोधपत्र के सह-लेखक इग्नासी रिबास ने कहा, टेगार्डन हमारे सूरज के द्रव्यमान का केवल आठ प्रतिशत है। यह सूर्य की तुलना में बहुत छोटा और बहुत कम चमकीला है। वास्तव में, पृथ्वी के बहुत करीब होने के बावजूद इसे 2003 तक खोजा नहीं गया था। सूर्य का तापमान जहां 5,500 सेल्सियस है, वहीं सितारे का तापमान लगभग 2,600 सेल्सियस है। यह हमारे सूर्य की तुलना में 10 गुना छोटा है, इसलिए यह 1,500 गुना कमजोर है और ज्यादातर अवरक्त तरंगों को प्रसारित करता है। एक बार तारे के मिल जाने के बाद वैज्ञानिकों ने डॉपलर तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसे वोबबल विधि के रूप में भी जाना जाता है, जो अपने चारों ओर ग्रहों का पता लगाने के लिए मूल तारे के रेडियल-वेग माप का उपयोग करता है। डॉपलर तकनीक ने कम से कम दो संकेतों का पता लगाया, जिन्हें अब ग्रहों टेगार्डन बी और टेगार्डन सी के रूप में पहचाना गया है।

टेगार्डन बी का द्रव्यमान पृथ्वी के समान है और प्रत्येक 4.9 दिनों में सितारे की परिक्रमा करता है। दूसरे ग्रह कक्षा को पूरा करने में 11.4 दिन का समय लेता है, जो उसके वर्ष की लंबाई है। रिबास ने कहा, दूसरे शब्दों में, यह अपने सितारे के बेहद नजदीक है। उन्होंने कहा, जितना प्रकाश हम सूर्य से प्राप्त करते है, उससे 10 प्रतिशत अधिक प्रकाश टेगार्डन एक प्राप्त करता हैं, इसलिए हम सोचते हैं कि यह बहुत गर्म हो सकता है और इसमें पानी नहीं हो सकता है। लेकिन यह सिर्फ अटकलें हैं, क्योंकि इसके जलवायु के तत्व हैं जो हमें नहीं पता है और इसका मतलब यह हो सकता है कि यहां क्या पता तरल पानी हो।

टेगार्डन एक रहने योग्य क्षेत्र के बीच में घूमता है, जिसका अर्थ है कि इसकी सतह पर तापमान 0 डिग्री सेल्युकस और 100 डिग्री सेल्यियस के बीच है, जिसका अर्थ है कि इसकी सतह पर बहुत अच्छी तरह से पानी हो सकता है। इसके अलावा वैज्ञानिक इस बात से उत्साहित हैं कि इसके दूसरे दोनों गृह प्राक्सीमा के साथ-साथ जीवन का समर्थन करने के लिए सबसे अच्छा विकल्प हैं। ये वे ग्रह हैं, जिन्होंने अब तक खोजे गए सभी ग्रहों पर वास के लिए सबसे अच्छी स्थिति प्रस्तुत की।

घर या बाहर बालों और स्किन को कैसे बचाएं प्रदूषण से, जानिए कैसे ..

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 बढ़ते प्रदूषण के कारण बालों और त्वचा पर विपरित प्रभाव पड़ता है। गर्मी, सर्दी, मानसून में त्वचा और बालों को प्रदूषण से सुरक्षित रखना जरूरी है। ऐसे में आप चाहे घर के भीतर रहें या बाहर वायु प्रदूषण से त्वचा और बालों की खास देखभाल करें। एयर कंडीशनर, रेफ्रीजरेटर और माइक्रोवेव से निकलने वाली गैसें आपकी त्वचा और बालों के लिए नुकसानदायक होती है। 

इस नुकसान से बचने के लिए जाने ये खास टिप्स – 

– अपनी त्वचा और बालों की क्लेंजिंग, टोनिंग और माइश्चराइजिंग करें। बालों को पर्याप्त पोषण दें ताकि वे रूखे और बेजान न हो जाएं।
– बाहर जाते समय अपने बालों को प्रदूषण से बचाने के लिए विशेष स्प्रे का इस्तेमाल करें। त्वचा पर भी सनस्क्रीन, एलोवेरा जैल या अन्य रक्षात्मक परत लगाएं। इससे आपकी त्वचा 6-7 घंटों के लिए प्रदूषण से सुरक्षित हो जाती है।