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लोग बोले ‘वापस जाओ’ : 108 बच्चों की मौत के बाद नीतीश पहुंचे अस्पताल

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चुकी है. साथ ही करीब 200 बच्चे अब भी अस्पताल में भर्ती हैं. एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) और जापानी इंसेफलाइटिस (JE) को बिहार में ‘चमकी’ बुखार के नाम से जाना जाता है.

बता दें कि मुजफ्फरपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में हर साल ये बीमारी फैलती है. उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी और वैशाली जिले में इस बीमारी का ज्‍यादा असर दिख रहा है.

नीतीश कुमार के खिलाफ लोगों का विरोध प्रदर्शन

बिहार के सीएम नीतीश कुमार के पहुंचने पर मुजफ्फरपुर में श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के बाहर स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया.

नीतीश पहुंचे अस्पताल, लोग बोले ‘वापस जाओ’

बिहार के सीएम नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर पहुंचे हैं. वहां उन्हें लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा. गुस्साए लोगों ने श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज के बाहर नीतीश कुमार के खिलाफ नारे लगाए.

1200 किमी दूर अटका मानसून, चार दिन लगेंगे छत्तीसगढ़ पहुंचने में

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आज एक बार फिर से ‘वायु’ तूफान गुजरात के समुद्र तट से टकराने जा रहा है। इसके टकराने का इंतजार समूचा मौसम विभाग कर रहा है, क्योंकि इसके कारण ही मानसून आगे नहीं बढ़ पा रहा है। पूर्वानुमान है कि यह घटना होगी। उसके बाद मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा। मौजूदा समय में मानसून गंगटोक, मैसूर, मंगलोर में अटका हुआ है। इसकी छत्तीसगढ़ से दूरी 1200 किमी है। अगर परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल रहीं तो मानसून अब 20 के बजाय 21-22 तक छत्तीसगढ़ में दस्तक दे देगा। स्पष्ट है कि मानसून सीधे-सीधे 11-12 दिन देरी से आगे बढ़ रहा है। हालांकि अच्छी खबर यह है कि ‘वायु’ की मौजूदगी से छत्तीसगढ़ समेत समूचे मध्यभारत के कुछ हिस्सों अच्छी बारिश हो रही है।

रायपुर को छोड़ दें तो धमतरी, पेंड्रा, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर में खासी बारिश रिकॉर्ड हुई है। यही वजह है कि मौसम में ठंडक आ गई है। प्रदेश में सिर्फ बिलासपुर को छोड़ दें तो सभी जिलों का अधिकतम तापमान 40 डिग्री के नीचे आ गया है। हालांकि यह अभी भी सामान्य से अधिक बना हुआ है। राजधानी रायपुर में सोमवार को 50 फीसद बादल छाए रहे। उमस थी, मगर ठंडक भी थी। शाम होते-होते तेज हवाएं चलनी शुरू हो गईं। जानकारी के मुताबिक मानसून उत्तर-पूर्वी क्षेत्र से छत्तीसगढ़ में प्रवेश करने जा रहा है।

कहां कितनी बारिश – धमतरी में सर्वाधिक 94 मिमी, जगदलपुर 57, अंबिकापुर में 11, राजनांदगांव में 46, दुर्ग में 35.8 मिमी बारिश हुई। रायपुर इस मामले में भाग्यशाली नहीं रहा है। यहां हल्की बारिश माना बस्ती में ही हुई।

10 सालों में मानसून कब पहुंचा रायपुर

2009- 27 जून

2010- 17 जून

2011- 17 जून

2012- 18 जून

2013- 09 जून

2014- 19 जून

2015- 14 जून

2016- 17 जून

2017- 21 जून

2018- 26 जून

याद कीजिए जून 2007- जून 2007 में रायपुर में सर्वाधिक 649.3 मिमी बारिश दर्ज हुई थी, जो सर्वकालिक रिकॉर्ड है। उस समय ऐसी स्थिति थी मानो बादल फट गए हों। मगर बीते तीन सालों से औसत 167 मिमी बना हुआ है। स्पष्ट है कि बारिश अपेक्षाकृत जून में कम, अगस्त से लेकर अक्टूबर में सर्वाधिक बारिश होती है।

शहरों का तापमान

जिला- अधिकतम

रायपुर- 38.4

बिलासपुर- 40.7

पेंड्रा- 37.3

अंबिकापुर- 36.7

जगदलपुर- 30.1

दुर्ग- 39.2

राजनांदगांव- 37.1

मानसून में देरी की एकमात्र वजह है ‘वायु’ तूफान। जब तक यह गुजरात के समुद्र तट से टकरा नहीं जाता, तब तक मानसून आगे नहीं बढ़ेगा। हालांकि अभी मानसून को आगे बढ़ने के लिए ठीक-ठीक परिस्थितियां बनी हुई हैं। देर तो है, मगर कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश जारी है। – एचपी चंद्रा, वरिष्ठ मौसम वैज्ञानी, मौसम विज्ञान केंद्र, लालपुर

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की हॉकी खेलते तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल हो रही

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बिलासपुर जिल के बहतराई में नव निर्मित एस्ट्रोटर्फ हाकी खेल मैदान का लोकार्पण करते हुए स्व. बीआर यादव के नाम पर स्टेडियम का नाम रखने की घोषणा की. साथ ही बहतराई में 9वीं सब जूनियर हॉकी प्रतियोगिता का शुभारम्भ भी किया. इस दौरान उन्होंने हॉकी भी खेली.

 बहतराई स्थिति हॉकी स्टेडियम में 9वीं सब जूनियर ब्वायज नेशनल हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है. सीएम बघेल यहां प्रतियोगिता के उद्घाटन के लिए पहुंचे थे. इस दौरान बघेल ने स्टेडियम को एस्ट्रो टर्फ की सौगात भी सौंपी. प्रतियोगिता 17 जून से 2 जुलाई तक चलेगी.

बहतराई स्थिति हॉकी स्टेडियम में 9वीं सब जूनियर ब्वायज नेशनल हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है. सीएम बघेल यहां प्रतियोगिता के उद्घाटन के लिए पहुंचे थे. इस दौरान बघेल ने स्टेडियम को एस्ट्रो टर्फ की सौगात भी सौंपी. प्रतियोगिता 17 जून से 2 जुलाई तक चलेगी.

 मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश के लिए गौरव की बात है कि राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन लगातार हो रहा है. इससे नए खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ेगा. सीएम ने खिलाड़ियों से मुलाकात भी की.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश के लिए गौरव की बात है कि राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन लगातार हो रहा है. इससे नए खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ेगा. सीएम ने खिलाड़ियों से मुलाकात भी की.

 17 जून को उद्घाटन मैच बंगाल हॉकी एसोसिएशन और मुंबई हॉकी एसोसिएशन के बीच खेला गया, जिसमें दोनों ही टीम का स्कोर 0-0 रहा.

17 जून को उद्घाटन मैच बंगाल हॉकी एसोसिएशन और मुंबई हॉकी एसोसिएशन के बीच खेला गया, जिसमें दोनों ही टीम का स्कोर 0-0 रहा.

 बिलासपुर प्रवास के दौरान 17 जून को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात की.

बिलासपुर प्रवास के दौरान 17 जून को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात की.

राजनांदगांव से सेक्स रैकेट का पर्दाफाश, पुलिस ने आरोपियों को लिया हिरासत में

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छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में चल रहे देह व्यापार का भंडाफोड़ पुलिस ने कर दिया है. संदिग्ध हालत में पुलिस ने पुरुष और महिलाओं को हिरासत में लिया है. जानकारी के मुताबिक हिरासत में लेकर सभी पर पुलिस पीटा एक्ट के तहत कार्रवाई कर रही है. गण्डई इलाके का ये पूरा मामला है.

शिकायत के बाद पहुंची पुलिस

पूरा मामला गण्डई थाना क्षेत्र के नवापारा का है. जानकारी के मुताबिक नवापारा इलाके में कुछ समय से देह व्यापार का धंधा फल-फूल रहा था. इलाके में रहने वाले लोगों ने कई बार पुलिस से इसकी शिकायत की थी. शिकायत के बाद कार्रवाई करते हुई खुद पुलिस इलाके में ग्राहक बनकर पहुंची. पता चला इलाके के एक मकान में संदिग्ध गतिविधियां चल रही है. कार्रवाई करते पुलिस ने इलाके के एक मकान से 4 महिला और 4 पुरुष को संदिग्ध हालत में गिरफ्तार किया. बताया जा रहा है कि पुलिस को मौके से कुछ आपत्तिजनक चीजे भी मिली. सभी को पुलिस ने जब्त कर लिया है. सभी संदिग्ध पर पुलिस ने पीटा एक्ट के तहत कार्रवाई की है. फिलहाल आरोपियों को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है.

बारिश के मौसम में भूलकर भी न करें ये काम, हो सकते हैं बीमार

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मौसम की पहली बारिश के साथ ही मुंह झुलसाती गर्मी और लू से राहत मिल गई है. लेकिन बारिश के मौसम में अगर साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए तो कई बीमारियां भी हो सकती हैं. इस मौसम में इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है और अपच की समस्या भी सामने आती है. ऐसे में कई बार ऐसा भी हो सकता है कि मौसम का लुत्फ़ उठाने की जगह आपको अस्पताल के चक्कर लगाने पड़े. आइए जानते हैं कि बारिश के मौसम में किन बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है ताकि आपकी सेहत पर न पड़े कोई असर…

बारिश के मौसम में बहुत ज्यादा तला-भुना खाना नहीं खाना चाहिए. ऐसा खाना खाएं जो आसानी से पच जाए और बेहद हल्का हो. ऐसा करने से पाचन तंत्र ठीक रहता है और अपच की समस्या नहीं होती है.

बारिश के मौसम में इम्युनिटी पॉवर मजबूत न हो तो कई प्रकार के इन्फेक्शन हो सकते हैं. खाने में अदरक, प्याज, हल्दी, शहद और मेथी को शामिल करें. ये भोज्य पदार्थ आपकी इम्युनिटी को बढ़ाते हैं और हाजमे को दुरुस्त रखते हैं.

बारिश के मौसम में डायरिया और कब्ज की समस्या होना सामान्य बात है. इस समस्या से छुटकारे के लिए खूब सारा पानी पिएं और फास्ट फ़ूड खाने से बचें. मैदा और बेसन से बने खाद्य पदार्थों से परहेज करें.

बारिश के मौसम में ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिसमें फाइबर की मात्रा ज्यादा हो. फलों का सेवन करना भी फायदेमंद रहता है. इससे पेट से जुड़ी कोई समस्या भी नहीं होती है.

मप्र सरकार के 6 माह : कांग्रेस ने उपलब्धियां गिनाई, भाजपा ने खामियां

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मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को सोमवार को छह माह पूरे हो गए। इस छह माह को कांग्रेस ने जहां उपलब्धियों और हर वर्ग के जीवन में बदलाव लाने वाला बताया है, वहीं भाजपा ने इसे जनता को ठगने वाला करार दिया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार का राजधानी से लेकर अन्य स्थानों पर कमलनाथ सरकार के छह माह पूरे होने के उपलक्ष्य में उत्सव मनाया। मिठाइयां बांटी, आतिशबाजी की और जमकर नाच-गाना हुआ। जिला मुख्यालयों पर पार्टी नेताओं और मंत्रियों ने पत्रकारवार्ता कर सरकार की उपलब्धियां गिनाई।

कांग्रेस की मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा, ‘राज्य में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के दो घंटे के भीतर किसानों की कर्जमाफी का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। राज्य के लगभग 20 लाख किसानों की कर्जमाफी मई तक हो चुकी है। किसानों को गेहूं का समर्थन मूल्य 2000 रुपये प्रति कुंटल मिल रहा है।’

उन्होंने बताया, ‘इंदिरा गृह ज्योति योजना के तहत 100 यूनिट की खपत पर 100 रुपये बिजली का बिल देना होगा। इस योजना से 62 लाख हितग्राही लाभान्वित हो रहे हैं। प्रदेश में 10 हर्स पॉवर तक के कृषि पंपों का बिल आधा किया गया है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह-निकाह योजना की अनुदान राशि भी 51,000 रुपये कर दी गई है, जो पिछली सरकार में मात्र 28,000 रुपये थी। दिव्यांग महिला और सामान्य पुरुष के बीच विवाह को बढ़ावा देने हेतु प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी गई है।’

उन्होंने राज्य सरकार के फैसलों का ब्यौरा देते हुए बताया, ‘राज्य सरकार ने जहां पिछड़े वर्ग के आरक्षण को बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है, वहीं आíथक रूप से दुर्बल सामान्य वर्ग के नागरिकों के लिए भी 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू किया है। युवा स्वाभिमान योजना के माध्यम से युवाओं को 100 दिन की रोजगार गारंटी दी गई है। प्रदेश में गोवंश के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए अब तक लगभग 1000 गौशालाएं स्थापित करने का निर्णय लिया गया है, जिससे ग्रामीणों तथा मजदूरों को भी रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।’

उन्होंने बताया, ‘पुलिसकíमयों को सप्ताह में एक दिन अवकाश का प्रावधान किया गया है। उनका आवास भत्ता बढ़ाकर 5,000 रुपये करने के प्रयास शुरू हो चुके हैं। शासकीय सेवकों को जनवरी 2019 से देय महंगाई भत्ते की स्वीकृति दी गई है। कमलनाथ सरकार ने उद्योग नीति में संशोधन कर मध्यप्रदेश में लगने वाले उद्योगों में स्थानीय युवाओं को 70 प्रतिशत रोजगार देना अनिवार्य कर दिया है।’

लेकिन भाजपा ने कमलनाथ सरकार के छह माह के कार्यकाल को ठगने वाला बताया है। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘छह महीनों में कमलनाथ सरकार ने प्रदेश की जनता को छठी का दूध याद दिला दिया है। न बेरोजगार युवाओं को चार हजार रुपये भत्ता मिला है और न किसानों का कर्ज माफ हुआ है। प्रदेश में बिजली और कानून-व्यवस्था पूरी तरह फेल हो गई है। छह महीनों में सिर्फ जनता को ठगने का काम हुआ है। यह सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।’

मिश्रा ने रविवार और सोमवार को सरकार की ओर से जारी विज्ञापनों पर कहा, ‘प्रदेश सरकार ने जय किसान ऋण माफी योजना के बड़े-बड़े विज्ञापन देकर यह स्वीकार कर लिया है कि इन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से 10 दिनों में सारे किसानों का कर्ज माफ करने का झूठ बुलवाया था। किसानों का दो लाख रुपये का कर्ज माफ नहीं हुआ। कुछ किसानों का पांच से 10 हजार रुपये तक ही कर्ज माफ हुआ है। प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से लाभान्वित होने वाले किसानों की पूरी सूची नहीं भेजी है। सरकार के इस रवैये से 50 प्रतिशत किसान योजना का लाभ लेने से वंचित रह जाएंगे।’

मिश्रा ने कहा, ‘जब से प्रदेश सरकार बनी है प्रदेश की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। अधिकारियों के लगातार तबादलों से अविश्वास का भाव पैदा हुआ है।’

उन्होंने आरोप लगाया कि ‘प्रदेश में एक भी गौशाला का निर्माण नहीं हो पाया है। घोषणा-पत्र में बेटियों को स्कूटी देने की बात की थी, लेकिन अब तो लैपटॉप पर भी संकट खड़ा हो गया है।’

डॉक्टरों को हड़ताल का कितना हक, क्या कहता है कानून

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कोलकाता के NRS अस्पताल में एक डॉक्टर पर हुए हमले के विरोध में डॉक्टरों ने हड़ताल की. पश्चिम बंगाल के इन डॉक्टरों के समर्थन में देश के कई हिस्सों से दूसरे डॉक्टर भी सड़कों पर उतर आए और हड़ताल पर चले गए. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बातचीत के बाद डॉक्टरों ने अपनी हड़लात वापस ले ली है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट अपने कई फैसलों में कह चुका है कि मेडिकल अधिकारी और सरकारी अस्पताल मानव जीवन को बचाने के ‘कर्तव्य से बंधे’ हुए हैं.

इससे संबंधित मामलों में शीर्ष कोर्ट पहले कई फैसले दे चुका है. मई 1996 के एक केस में शीर्ष कोर्ट का कहना था कि चिकित्सा सहायता मुहैया कराने में विफलता ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन की गारंटी के मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया है.सुप्रीम कोर्ट तो यहां तक कह चुका है कि प्राइवेट डॉक्टर भी किसी के इलाज से इनकार नहीं कर सकते हैं.

कई दफा ऐसे केस सामने आए, जिसमें डॉक्टर अपनी पेशेवर प्रतिज्ञा का उल्लंघन करते हैं. पश्चिम बंगाल की हालिया घटनाक्रम के संदर्भ में ही संयोग से सुप्रीम कोर्ट के 6 मई 1996 को पश्चिम बंगाल खेत मजदूर समिति बनाम पश्चिम बंगाल सरकार के एक मामले को देखा जा सकता है. इसमें शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि सरकार की पहली ड्यूटी लोगों के कल्याण को सुरक्षित करना होता है.

सुप्रीम कोर्ट कहता है कि, ‘लोगों को पर्याप्त मेडिकल सुविधा मुहैया कराना राज्य के कल्याणकारी दायित्वों का अहम हिस्सा है. सरकार अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र संचालित कर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करती है और उन लोगों को मेडिकल सुविधा मुहैया कराती है जो इसकी मांग करते हैं.’

क्या कहता है संविधान

शीर्ष कोर्ट के 1996 के उस फैसले के मुताबिक, ‘संविधान का अनुच्छेद 21 राज्य को प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की रक्षा के अधिकार के दायित्व से लैस करता है. मानव जीवन का संरक्षण इस प्रकार सर्वोपरि है. राज्य संचालित सरकारी अस्पताल और उसमें कार्यरत मेडिकल अफसर मानव जीवन के संरक्षण की खातिर चिकित्सा सहायता मुहैया कराने को लेकर बाध्य हैं. किसी जरूरतमंद व्यक्ति को अगर सरकारी अस्पताल समय से इलाज मुहैया कराने में विफल रहता है तो यह संविधान के अनुच्छेद 21 का प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के अधिकार की रक्षा की गारंटी का उल्लंघन है.’

कर सकते हैं कोर्ट की अवमानना का केस

सुप्रीम कोर्ट में वकील संतोष कुमार इसी केस की बिनाह पर बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मतलब है कि कोई भी पीड़ित नागरिक सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के आदेशों के सहारे डॉक्टरों की हड़ताल को चुनौती दे सकता है और कोर्ट की अवमानना का केस दायर भी कर सकता है.

पश्चिम बंगाल खेत मजदूर समिति की याचिका पर ही सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया था जिसमें हकीम शेख नामक श्रमिक के ट्रेन से गिर जाने के बाद बंगाल के कई सरकारी अस्पतालों ने उनका इलाज करने से मना कर दिया था. यहां तक कि सरकारी अस्पतालों ने निजी अस्पताल में इलाज के लिए उन पर दबाव भी डाला.

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि, ‘सरकारी अस्पतालों के अधिकारियों ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हकीम शेख को मिले जीवन की सुरक्षा अधिकार की गारंटी का उल्लंघन किया.’ कोर्ट ने कहा, ‘राज्य हकीम शेख को मिले संवैधानिक अधिकार को देने से इनकार नहीं कर सकता है.’

उस समय शीर्ष कोर्ट ने फैसला दिया कि, ‘संविधान के भाग तीन के तहत गारंटी युक्त संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने के संबंध में यह तय है कि संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 (मौलिक अधिकार का प्रवर्तन) के तहत निवारण के माध्यम से इस तरह के उल्लंघन के लिए अदालत द्वारा पर्याप्त मुआवजा दिया जा सकता है.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामले में तहकीकात के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस लिलामॉय घोष के नेतृत्व में एक जांच समिति का गठन किया था. समिति की रिपोर्ट के बाद तत्कालीन राज्य सरकार ने अस्पतालों के लिए कई निर्देश जारी किए थे.

इलाज करना पेशेवर दायित्व

बहरहाल, इसी तरह एक दूसरे मामले में सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि संविधान का अनुच्छेद 21 राज्य को जीवन की सुरक्षा का दायित्व प्रदान करता है. कोर्ट के मुताबिक, ‘प्रत्येक डॉक्टर चाहे वह सरकारी हो या प्राइवेट प्रैक्टिस करता हो, उसका पेशेवर दायित्व है कि वह अपनी विशेषज्ञा के जरिये मानव जीवन की रक्षा करे. कोई भी कानून या राज्य चिकित्सा पेशे से जुड़े सदस्यों को अपने मेडिकल पेश के दायित्वों के निर्वहन में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है. दायित्व पूर्ण और सर्वोपरि होता है. कानून अगर उसमें हस्तक्षेप करता है तो उसे बरकरार नहीं रखा जा सकता है. इसलिए डॉक्टरों को अपना पेशवर दायित्व निभाने देना चाहिए.’

मैं पाकिस्तान टीम की मां नहीं हूं: सानिया मिर्जा

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विश्वकप में पाकिस्तान के भारत से हारने के बाद इतना रायता फैल चुका है कि अब समेटा नहीं जा रहा है। मैच के बाद सानिया मिर्जा और उनके पति शोएब मलिक की तस्वीर वायरल हो गई थी। तस्वीर में दोनो अपने दोस्तों के साथ किसी रेस्तरां में दिखाई दे रहे हैं।

इसी तस्वीर को लेकर पाकिस्तानी एक्ट्रेस वीना मलिक ने Sania Mirza को मुफ्त की सलाह दे डाली जिसके बाद सानिया का पारा भी गर्म हो गया और एक के बाद एक जवाब सानिया ने वीना मलिक को दे डाले। वीना मलिक को जवाब देते हुए सानिया ने कहा कि मैं पाकिस्तान टीम की मां, टीचर या प्रिंसिपल नहीं हूं।

सानिया और शोएब के दोस्तों के साथ रेस्तरां वाली तस्वीर पर वीना मलिक ने कहा था कि आप ऐसी जगह पर अपने बच्चे को कैसे ले जा सकती हैं जो कि जंक फूड रेस्तरां है। और क्या आप को यह नहीं पता कि बाहर का खाना खिलाड़ियो की फिटनेस पर बुरा असर डालता है।

वीना ने जो बात अपने में ट्वीट में कही थी वो यह थी कि – ‘सानिया मैं आप के बच्चे को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित हूं। आप लोग अपने बच्चे के साथ शीशा प्लेस में हैं, क्या यह खतरनाक नहीं है? और जहां तक मुझे पता है आर्ची के बारे में वहां सिर्फ जंक फूड मिलता है जो कि खिलाड़ियों के लिेए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। आप को यह बात अच्छी तरह से पता होनी चाहिए कि आप खिलाड़ी के साथ-साथ एक मां भी हैं।’

वीना के इस ट्वीट पर Sania Mirza ने भी जवाब दे डाला। सानिया ने कहा – ‘वीना, मैं अपने बच्चे को लेकर शीशा प्लेस नहीं गई थी। और में अपने बच्चे के लिए क्या करती हूं ये ना तो तुम्हारी और ना बाकी दुनिया की चिंता है। किसी दूसरे से ज्यादा अच्छे से मैं अपने बच्चे का ख्याल रख सकती हूं और दूसरी बात पाकिस्तान टीम की ना मैं मां हूं, ना उनकी डाइटीशियन और ना टीचर या प्रिंसिपल।’

अगले आठ सालों में चीन से अधिक हो जाएगी भारत की जनसंख्या: संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट

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इस वक्त दुनिया में सबसे अधिक जनसंख्या वाले देशों में पहला स्थान चीन का है और दूसरा स्थान भारत का। चीन ने इसमें कमी लाने के लिए कई तरह की योजनाएं शुरू की हैं लेकिन भारत में इस ओर कोई सख्त कदम अभी तक नहीं उठाया गया है। हाल ही में जनसंख्या वृद्धि पर संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट आई है, जिसमें भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है।इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2050 तक जनसंख्या के 970 करोड़ होने की संभावना है। वहीं साल 2027 तक भारत के दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में चीन से आगे निकलने का अनुमान है। 

संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग पॉपुलेशन डिविजन ने द वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रोस्पेक्ट 2019 हाइलाइट्स (विश्व जनसंख्या संभावना) मुख्य बिंदु प्रकाशित किया है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अगले 30 वर्षों में विश्व की जनसंख्या दो अरब तक बढ़ने की संभावना है। 2050 तक जनसंख्या के 7.7 अरब से बढ़कर 970 करोड़ तक पहुंच जाने का अनुमान है।   

वैश्विक जनसंख्या में जो वृद्धि होगी उसमें आधी से अधिक वृद्धि भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, इथियोपिया, तंजानिया, इंडोनेशिया, मिस्र और अमेरिका में होने का अनुमान है। इन देशों में भारत में सबसे अधिक वृद्धि होगी।

चीन में आ रही है कमी

जहां कई देशों में जनसंख्या लगातार बढ़ रही है, वहीं चीन जैसे कुछ देशों में इसमें कमी आ रही है। रिपोर्ट के अनुसार 2010 के बाद से 27 देश ऐसे हैं जिनकी जनसंख्या में एक या इससे भी अधिक फीसदी की कमी आई है। यह गिरावट प्रजनन क्षमता के निम्न स्तर के कारण होती है।

साल 2019 से 2050 तक 55 देशों और क्षेत्रों में आबादी में एक फीसदी या उससे अधिक की कमी आने का अनुमान है। इनमें से 26 की जनसंख्या में 10 फीसदी तक की कमी आ सकती है। उदाहरण के तौर पर चीन में इस समय अवधि में जनसंख्या में 3.14 करोड़ यानी 2.2 फीसदी कम होने का अनुमान है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कई देशों में प्रवास भी जनसंख्या में बदलाव का महत्वपूर्ण घटक है। 

रिपोर्ट के अनुसार 2010 और 2020 के बीच, 14 देशों या क्षेत्रों में दस लाख से अधिक प्रवासियों का आगमन देखा जाएगा, जबकि 10 देशों से इतने ही लोग अन्य देशों की ओर जाएंगे। 

रिपोर्ट में कहा गया है, “बड़ी संख्या में प्रवासी कामगारों की मांग (बांग्लादेश, नेपाल और फिलीपींस) के कारण प्रवास हुआ है। इसके अलावा हिंसा, असुरक्षा और सशस्त्र लड़ाई (म्यांमार, सीरिया और वेनेजुएला) के कारण भी बड़ी संख्या में लोगों ने दूसरे देशों की ओर प्रवास किया है। 

बेलारूस, एस्टोनिया, जर्मनी, हंगरी, इटली, जापान, रूसी संघ, सर्बिया और यूक्रेन में एक दशक में प्रवासियों की बढ़ोतरी दिखेगी। जिससे इन देशों को जनसंख्या के नुकसान की भरपाई करने में मदद मिलेगी।”

यहां के लोगों की सोते सोते हो जाती है मौत, Doctars के पास भी नहीं है इसका इलाज

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कहते है कि नींद हर इंसान को सबसे प्यारी होती है। दुनिया में सभी लोगों को कभी भी नींद आ जाती है। तभी तो कहा जाता है कि कभी भी नींद का विश्वास नहीं करना चाहिए। क्योंकि ये कभी भी आ सकती है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर लोग सड़क पर चलते चलते सो जाते हैं।

इतना ही नहीं अगर कोई ऑफिस भी जा रहा होता है तो वो भी सो जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि हम बात कर रहे हैं कजाकिस्तान के एक छोटे से गांव कलाची की। इस गांव के बारे में बताया जाता है कि गांव के लोग एक गंभीर समस्या से पीड़ित हैं। इसकी वजह से यहां के लोग कभी भी और किसी भी समय सो जाते हैं।

सबसे अलग बात ये है कि यहां के लोगों को इस बात तक का पता नहीं होता कि अगर ये एक बार सो गए, तो कब जागेंगे। इस गांव की आबादी 810 है। जिसमें से करीब 200 लोग इस बीमारी का शिकार हो रखे हैं। हैरान कर देने वाली बात है कि सोने की हद तब हो जाती है जब लोग एक बार सोने के बाद कभी भी नहीं उठ पाते हैं। कई ऐसे लोग हैं जिनकी सोते सोते मौत हो गई।

इस गांव के ऊपर वैज्ञानिकों द्वारा अध्ययन किया गया, तो पता चला कि इस गांव के क्षेत्र में कार्बन मोनो ऑक्साइड और हाइड्रो कार्बन की मात्रा काफी उच्च स्तर पर मौजूद है। सबसे चौंका देने वाली बात है कि डॉक्टर और वैज्ञानिक भी अभी तक नींद आने का कारण नहीं बता सके हैं।