अब तक आपने लोगों को अपना फोन, सामान आदि टैक्सी में भूलते हुए सुना होगा। लेकिन क्या आपने किसी मां-बाप को उनका बच्चा भूलते हुए सुना है। जर्मनी के हैम्बर्ग में अजीबो गरीब मामला सामने आया है। एक कपल अपने स्वस्थ बच्चे की डिलीवरी के बाद उसे टैक्सी में लेकर घर आ रहे थे। लेकिन वो बच्चे को टैक्सी में ही भूलकर घर पहुंच गए। इस घटना का खुलासा हैम्बर्ग पुलिस ने किया।
हैम्बर्ग पुलिस ने बताया कि एक कपल ने दूसरी बार बच्चे को जन्म दिया। कुछ दिन अस्पताल में बिताने के बाद घर जाने के लिए कपल में टैक्सी पकड़ी। घर पहुंचने के बाद उन्होंने टैक्सी का भाड़ा दिया और टैक्सी से उतर गए। जैसे टैक्सी वहां से आगे बढ़ी उन्हें याद आया कि उनका बच्चा तो टैक्सी में ही छूट गया। उन्होंने टैक्सी का पीछा करने और उसे आवाज लगाने की कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
दरअसल बच्चा आराम से टैक्सी में सो रहा था, पूरे रास्ते भर उसने आवाज भी नहीं की। इसलिए उन्हें बच्चे के बारे में याद ही नहीं रहा। बच्चा पीछे वाली सीट पर चुप-चाप सो रहा था इस बात की भनक टैक्सी ड्राइवर को भी नहीं लगी। टैक्सी ड्राइवर अपनी कार अंडरग्राउंड पार्किंग में लगाकर लंच करने चला गया।
कुछ देर बाद वो लंच करके आया और फिर से टैक्सी लेकर यात्रियों के लिए एयरपोर्ट चला गया। टैक्सी में जब नया यात्री बैठा तो वो उसने कार में पहले से ही मौजूद बच्चे के बारे में पूछा। तब तक बच्चा पूरी तरह से जग गया था और उसने चिल्लाना भी शुरू कर दिया था। जिसके बाद टैक्सी ड्राइवर ने पुलिस को फोन कर बच्चे के बारे में जानकारी दी। बच्चे के बारे में गहन जांच पड़ताल के बाद बच्चे को उसके मां बाप से मिलाने में कामयाब हो गए।
भारतीय क्रिकेट टीम ने रविवार को ICC वर्ल्ड कप में सातवीं बार अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान को हरा कर जीत हासिल की. आज हम आपको भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट से जुड़ी कुछ ऐसे लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने सिर्फ एक देश नहीं बल्कि दोनों देशों के लिए क्रिकेट खेला है. चलिए जानते हैं उन लोगों के बारे में-
पाकिस्तान के लाहौर में जन्में अब्दुल कारदार ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत भारतीय टीम से की थी. अब्दुल ने 1946 में भारत की तरफ से इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था. इसके बाद अब्दुल हफीज कारदार को 1952 में पाकिस्तान की कप्तानी करने वाला पहला क्रिकेटर बनाया गया था. अब्दुल ने काफी कम उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया. उनका जन्म 17 जनवरी 1925 को हुआ था. इन्होंने महज 26 साल की उम्र 21 अप्रैल 1956 में दुनिया को अलविदा कह दिया था.
आमिर इलाही का जन्म भी लाहौर में हुआ है. इनका जन्म 1 सितंबर 1908 को हुआ था. भारत के लिए इन्होंने एक टेस्ट क्रिकेट मैच खेला था. इसके बाद 1952 इन्होंने पाकिस्तान के लिए टेस्ट मैच खेला. आमिर इलाही ने पाकिस्तान के लिए 5 टेस्ट मैच खेले.
गुल मोहम्मद का बाएं हाथ के बल्लेबाज थे. इनका जन्म 15 अक्टूबर 1921 को हुआ था. इन्होंने भी भारत और पाकिस्तान के लिए मैच खेला है. भारतीय क्रिकेट टीम के साथ इन्होंने अपने करियर की शुरुआत की. इसके बाद इन्होंने अपना आखिरी मैच पाकिस्तान के लिए खेला. इसके बाद इन्होने अपना रुख क्रिकेट प्रशासन की ओर कर लिया.
भारतीय क्रिकेट टीम से जोरदार हार मिलने के बाद पाकिस्तानी फैंस के साथ-साथ पाकिस्तान की सेना भी काफी बौखलाई हुई नजर आ रही है. क्रिकेट में मिली हार के बाद अब पाक के सेना प्रवक्ता ने कहा कि क्रिकेट और स्ट्राइक को एक साथ ना जोड़कर देखें. बता दें कि सेना का ये बयान अमित के बयान के बाद आया.
अमित शाह ने भारतीय टीम की जीत के बाद कहा था कि इसकी तुलना स्ट्राइक से की थी. अमित शाह के द्वारा की गई इस तुलना के बाद सोमवार को आईएसपीआर के महानिदेशक आसिफ गफूर ने गृहमंत्री अमित शाह से आग्रह किया है कि क्रिकेट में भारत से पाकिस्तान को मिली शिकस्त की तुलना स्ट्राइक से ना करें.
रविवार को गृहमंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर लिखा, “टीम इंडिया द्वारा पाकिस्तान पर एक और स्ट्राइक और नतीजा एक समान. इस शानदार प्रदर्शन के लिए पूरी टीम को बधाई. हर भारतीय गौरव का अनुभव कर रहा है और इस प्रभावशाली जीत पर जश्न रहा है.”
अमित शाह के इस ट्वीट के बाद गफूर ने अपने अकाउंट के जरिए अमित शाह को जवाब देते लिखा, “प्रिय अमित शाह, हां, आपकी टीम ने एक मैच जीता. (वे)अच्छा खेले. दो बिल्कुल अलग-अलग चीजों की तुलना नहीं की जा सकती, वैसे ही स्ट्राइक और मैच की तुलना नहीं की जा सकती.”
इस दौरान गफूर ने 26 फरवरी को भारतीय भारतीय वायुसेना द्वारा बालाकोट में किए गए एयर स्ट्राइक पर पाकिस्तान के जवाब का उल्लेख करते हुए कहा, “स्टे सप्राइज्ड.”
इस वक्त बिहार में चमकी बुखार से मर रहे बच्चों के अलावा अगर कोई बड़ी खबर है तो वो है भीषण गर्मी और लू की. झुलसा देने वाली गर्मी ने अब तक यहां करीब 200 लोगों की जान ले ली है, जबकि सैकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती हैं. औरंगाबाद में 60 से ज्यादा और गया में 35 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है. हाल इतना बुरा हो गया है कि सरकार को सूबे में धारा 144 लागू करनी पड़ी.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने लोगों से तापमान कम होने तक बाहर ना निकलने की अपील की है. मौसम विभाग ने आधिकारिक रूप से माना है कि बिहार ही नहीं देश के तमाम हिस्से अभी लू की चपेट में हैं.
बिहार के अलावा विदर्भ, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मराठवाड़ा, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और पुडुचेरी के कई इलाके भयंकर गर्मी की मार झेल रहे हैं, जो विकट लू की कैटेगरी में है.
मौसम विभाग ने जहां 18 जून को देश के कुछ हिस्सों में बारिश होने का अनुमान लगाया है, वहीं बिहार और बंगाल समेत देश के तमाम हिस्सों में लू जारी रहने की बात भी कही है.हाल ही में कई राज्यों में तापमान 45ºC से ऊपर चला गया. राजस्थान के चुरू में तो 1 जून को तापमान 50.8ºC रहा, जो राज्य में अब तक का सबसे ज्यादा तापमान था. 10 जून को दिल्ली में 48ºC तापमान के साथ नया रिकॉर्ड बना.
तेज गर्मी के साथ सूखे की मार ने गंभीर समस्या खड़ी की है. इस साल भारत का करीब 50 फीसदी हिस्सा सूखे की चपेट में है. उत्तर से दक्षिण तक पानी की काफी कमी है. चाहे चेन्नई हो या राजस्थान का कोई गांव, महाराष्ट्र का विदर्भ या मराठवाड़ा हो या फिर आंध्र प्रदेश या तेलंगाना का कोई गांव. सेंट्रल वॉटर कमीशन के मुताबिक, देश में 21 शहरों के 91 जलाशयों में उनकी कुल क्षमता का 20 फीसदी से भी कम पानी बचा है. मार्च और मई के बीच इस साल केवल 99 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई जो सामान्य से 23 फीसदी कम है.
यह पिछले 65 साल में मॉनसून से पहले की दूसरी न्यूनतम बारिश है. दक्षिण भारत में 47 फीसदी और उत्तर-पश्चिमी भारत में 30 फीसदी कम बारिश हुई है. महाराष्ट्र के विदर्भ में तो मॉनसून से पहले की बारिश 80 फीसदी कम हुई है.
भीषण गर्मी, सूखा और फिर बाढ़ हो या बार-बार आ रहे ताकतवर चक्रवाती तूफान, यह सब अब हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके हैं. इसके अलावा बेमौसमी बारिश, थोड़े वक्त में बहुत सारा पानी बरसना, ठंड का देर से आना और सर्दियों में आने वाली फुहारों का गायब हो जाना एक सामान्य अनियमितता हो गई है, जिसका असर खेती-बाड़ी से लेकर जीवन के हर हिस्से में पड़ रहा है. मौसम का यह असामान्य चक्र अर्थव्यवस्था से लेकर इंसानी वजूद का संकट पैदा कर रहा है.
लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी ग्लोबल वॉर्मिंग का असर दिख रहा है
सवाल यह है कि मौसम का यह क्रूर और मनमाना रूप क्या सिर्फ कुदरती मार है या इसके पीछे इंसानी हाथ भी है. दिल्ली स्थित सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) की कांची कोहली इसके पीछे एक बड़ी वजह इंसानी करतूत को मानती हैं. साथ ही वह इसके पीछे गर्वनेंस का मुद्दा भी अहम मानती हैं. वह कहती हैं कि बिना योजना के शहरीकरण, भवन निर्माण में कंकरीट का जबरदस्त इस्तेमाल, पेड़ों की कटान, पानी की फिजूलखर्ची और प्रबंधन का अभाव इसके पीछे की बड़ी वजहें हैं.कांची कोहली, CPRपहाड़ों में जिस तरह के घर बने या शहरी इलाकों में जिस तरह हमने पानी जमीन से खींचा है, वेट-लैंड के ऊपर भवन निर्माण कर दिया है और समुद्र तटीय इलाकों में मैंग्रोव जैसी वनस्पतियों को खत्म किया है. इसका असर मानवीय और वन्य जीवन पर काफी ज्यादा हो रहा है, जिसका सीधा संबंध मौजूदा संकट से है.
मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले दिनों देश के ज्यादातर हिस्सों में शहरों का तापमान सामान्य से काफी ऊपर रहा. हिल स्टेशन भी सामान्य तापमान से काफी गरम हैं. ऐसे में मानसून की देरी या कमी का डर सबको सता रहा है. महाराष्ट्र सरकार ने तो अगस्त में “क्लाउड सीडिंग” के जरिए कृत्रिम बारिश कराने के लिए 30 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है. मगर अहम बात वो है जिसकी ओर कोहली इशारा कर रही हैं यानी कुदरत के चक्र में इंसानी दखल.
दुनियाभर में वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने ग्लोबल वॉर्मिंग को मौजूदा संकट की बड़ी वजह बताया है. जिसकी चलते ध्रुवों की बर्फ पिघल रही है और समंदर का तापमान भी बढ़ रहा है. इसका असर लंबे सूखे की मार, असामान्य और बेवक्त बारिश, भयानक बाढ़ और चक्रवाती तूफानों की शक्ल में दिख रहा है.
देश में मौसम का बिगड़ैल मिजाज और उसका असर
साइक्लोन वायु को छोड़ भी दें तो पिछले 9 महीनों में 3 बड़े चक्रवाती तूफान भारत के तटों से टकराए हैं. अक्टूबर में चक्रवात तितली आया, जिसने करीब 3000 करोड़ रुपये का नुकसान किया. इससे 60 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए. इस तूफान की वजह से 60 से ज्यादा लोगों की जान गई. फिर नवंबर में गज की वजह से काफी तबाही हुई. इस साल मई में चक्रवाती तूफान फानी ने करीब 9000 करोड़ रुपये का नुकसान किया और करीब 1.5 करोड़ लोगों को विस्थापन पर मजबूर किया.सारे तूफानों का निशाना भारत का पूर्वी तट रहा. तमिलनाडु से लेकर आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में इनका असर दिखा. समंदर का तापमान जैसे-जैसे बढ़ेगा, वैसे-वैसे साइक्लोन ज्यादा संख्या में और ज्यादा विनाशकारी रूप में आएंगे.
पिछले साल छपी IPCC की स्पेशल रिपोर्ट ने साफ चेतावनी दी कि धरती का तापमान अगर इसी तरह बढ़ता रहा तो अगले 10 सालों में भयानक विनाशलीला शुरू हो जाएगी. रिपोर्ट कहती है कि भारत जैसे देशों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. भारत की हिमालय पर्वत श्रंखला में करीब 10 हजार ग्लेशियर हैं, जो बढ़ते तापमान की वजह से पिघल रहे हैं. हमारी समुद्र तट रेखा करीब 7500 किलोमीटर लंबी है और तटों पर 25 से 30 करोड़ लोग रहते हैं. इनमें में से बहुत सारे खेती और मछली व्यापार के लिए तटों पर निर्भर हैं.
साफ है कि जहां IPCC की रिपोर्ट में भारत के लिए कई स्तर पर तैयारी करने की चेतावनी है, वहीं खुद नीति आयोग कह रहा है कि भारत के 21 शहरों में अगले साल (2020 में) भूजल खत्म हो सकता है. अगर ऐसा हुआ तो देश की 10 करोड़ आबादी के पास कोई पानी नहीं होगा. ऐसे में लू या सूखे की क्या मार होगी इसका अंदाजा ही लगाया जा सकता है.
समुद्र तटों पर देश की 25 से 30 करोड़ आबादी रहती है और समुद्री जल जीवन पर इनमें से बहुतों की रोजी रोटी टिकी है
कुदरत की मार से लड़ने की आर्थिक कीमत भी काफी ज्यादा है. लाखों लोगों को नई जगह पर बसाना, बाढ़, सूखे और जल संकट के मद्देनजर आपदा प्रबंधन करना, खेती के नए तरीके ईजाद करना आसान नहीं होगा. जाहिर है ग्लोबल वॉर्मिंग की मार जो अभी सिर्फ हीटवेव के रूप में दिख रही है, वो देश की तरक्की पर बहुत विपरीत असर डाल सकता है. भारत को अगले 10 सालों में इसके असर से लड़ने के लिए कम से कम 70 लाख करोड़ रुपये चाहिये होंगे. वर्ल्ड बैंक कह चुका है कि जलवायु परिवर्तन की यह मार भारत की जीडीपी पर 2050 तक 2.8 फीसदी की चोट पहुंचा सकती है.
बिहार में लू हो या देश के तमाम हिस्सों में दिख रहा जल संकट. इनके समाधान का रास्ता एक ही है- नदी, जंगल और झरनों जैसे कुदरती संसाधन को बचाना और जल संचय के तरीकों को खोजना. जहां पेड़ों के कटान को रोकना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, वहीं जल संरक्षण के परंपरागत तरीकों (जैसे तालाब और कुओं का निर्माण और बारिश के पानी का संचय) का इस्तेमाल प्रमुख हथियार होने चाहिए.
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं ग्रामोधोग मंत्री गुरू रूद्र कुमार 18 जून मंगलवार को दोपहर 2 बजे राजीव भवन में बैठेंगे। इस दौरान मंत्री गुरू रूद्र कुमार विभाग से संबधित समस्याओं का निराकरण करने हेतु कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं कार्यकर्ताओं और आम जनता से आवेदन प्राप्त कर विभाग से संबधित शिकायत एवं सुझाव पर कार्यवाही, कांग्रेस कार्यकर्ताओं से चर्चा करेंगे
देश की 17वीं लोकसभा का पहला सत्र सोमवार से शुरू हुआ. संसद का मानसून सत्र 17 जून से 26 जुलाई तक चलेगा. इस सत्र की कार्यवाही अगर आप टीवी पर देख रहे होंगे तो गौर कीजिएगा कि लोकसभा में हरे रंग का कारपेट बिछा होता है. शायद ये आपने पहले भी गौर किया होगा कि लोकसभा में हरे और राज्यसभा में लाल रंग का कारपेट होता है. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों है? दिल्ली स्थित संसद की इमारत गोलाकार है, लेकिन इसके अंदर लोकसभा और राज्यसभा के कक्षों का आकार क्या है? आइए, संसद भवन के भीतर की कुछ दिलचस्प बातें जानें.
ब्रिटिश राज के समय में जब इस भवन के विचार का सूत्रपात हुआ था, तब इसका नाम काउंसिल हाउस सुझाया गया था. इसके भीतर तीन प्रमुख भवनों या कक्षों का विचार किया गया था. पहला राज्यों की परिषद जिसे बाद में राज्यसभा कहा गया, दूसरा वैधानिक सभा जिसे बाद में लोकसभा के तौर पर पहचाना गया और तीसरा था राजकुमारों का सदन, जो अब संसद भवन के पुस्तकालय का रूप ले चुका है. यह भी दिलचस्प है कि लाखों किताबों से भरी यह लाइब्रेरी देश की दूसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी है.
लोकसभा और राज्यसभा के अंदरूनी ढांचे में क्या फर्क हैं? और इन अंतरों के पीछे क्या कारण रहे हैं? इस संक्षिप्त लेख में इन तमाम बातों पर गौर करते हैं. एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर के डिज़ाइन पर बने संसद भवन का उद्घाटन 1927 में किया गया था. 6 एकड़ में फैले इस भवन को गोलाकार बनाया गया था और इसके डिज़ाइन का मुख्य स्रोत या प्रेरणा मध्य प्रदेश के मुरैना में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर की वास्तुकला थी.
क्यों होते हैं अलग-अलग कारपेट? गोल इमारत यानी संसद भवन के अंदर लोकसभा और राज्यसभा दो सदन सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं. लोकसभा में ग्रीन कारपेट बिछाया जाता है और राज्य सभा में रेड कारपेट. ऐसा किसी संयोगवश नहीं, बल्कि सोच विचारकर किया जाता है. चूंकि लोकसभा भारत की जनता का सीधे प्रतिनिधित्व करती है, इसलिए इन प्रतिनिधियों के ज़मीन से जुड़े होने के प्रतीक के तौर पर हरे रंग का इस्तेमाल होता है. घास या बड़े स्तर पर कृषि का प्रतीक हरे रंग को माना जाता है.
दूसरी ओर, राज्यसभा संसद का उच्च सदन कहलाता है. इसमें प्रतिनिधि सीधे चुनाव के ज़रिए नहीं बल्कि राज्यों के जन प्रतिनिधियों के आंकड़ों के हिसाब से पहुंचते हैं. राज्य सभा में रेड कारपेट बिछाने के पीछे दो विचार रहे हैं. एक लाल रंग राजसी गौरव का प्रतीक रहा है और दूसरा लाल रंग को स्वाधीनता संग्राम में शहीदों के बलिदान का प्रतीक भी समझा गया है. इस विचार के चलते राज्य सभा में रेड कारपेट बिछाया जाता है.
सेंट्रल हॉल, लाइब्रेरी, म्यूज़ियम और कैंटीन लोकसभा में 545 सदस्यों के हिसाब से बैठक व्यवस्था होती है, जबकि राज्यसभा में 245. लेकिन, जब दोनों सदनों का संयुक्त सत्र होता है, तब संसद भवन के सेंट्रल हॉल में बैठक व्यवस्था की जाती है. दोनों सदनों के बारे में एक रोचक जानकारी यह भी है कि अगर एरियल व्यू देखा जाए, तो लोकसभा और राज्यसभा के कक्षों का आकार अर्धगोलाकार जैसा है यानी घोड़े की नाल जैसा.
अब बात करते हैं लाइब्रेरी की. संसद भवन की लाइब्रेरी पहले संसद भवन परिसर में ही स्थित थी, लेकिन लगातार किताबों की संख्या बढ़ने के कारण संसद भवन से सटा एक अलग भवन इस लाइब्रेरी के लिए बनाया गया. यह लाइब्रेरी देश की दूसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी है. बलभद्र स्टेट, कोलकाता स्थित नेशनल लाइब्रेरी देश में सबसे बड़ी है, जहां 22 लाख से ज़्यादा किताबों का संग्रह है.
इसके साथ ही, संसद भवन की लाइब्रेरी के परिसर में देश की सांस्कृतिक विरासत की झांकी दिखाने वाला एक म्यूज़ियम भी है. संसद भवन की कैंटीन भी कई बार सुर्खियों में रही है क्योंकि यह बेहद कम दामों में भोजन की व्यवस्था है. 3 कोर्स भोजन सिर्फ 61 रुपये में यहां उपलब्ध होता है.
हिमाचल प्रदेश की बेटी ने अपने हुनर का जौहर दिखाते हुए लोगों की जान बचाने वाला एक जैकेट तैयार किया है। सुंदरनगर की बेटी प्रगति शर्मा ने सड़क हादसे के लिए जीवनदायनी जैकेट बनाया है।
लाइफ सेविंग जैकेट की कामयाबी का डंका अब देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी बजने वाला है। उन्होंने ऐसी जैकेट तैयार की है जो कि बाइक दुर्घटना होने पर चालकों की जान बचाएगी ऐसा दावा किया जा रहा है।
प्रगति ने यह जैकेट अपने संस्थान के प्रोजेक्ट के दौरान तैयार की है। वह राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान गांधीनगर गुजरात में अध्ययन कर रही हैं। अध्ययन के दौरान उनके द्वारा खोजी गई लाइफ सेविंग जैकेट को जीवन सुरक्षा बाइक वायु जैकेट नाम दिया है। इस जैकेट को बनाने के उपरांत प्रगति ने संस्थान में प्रथम 5 छात्र-छात्राओं में स्थान पाकर पुरस्कार प्राप्त किया है। लोगों तक यह जैकेट पहुंचाने के लिए इसका न्यूनतम रेट रखा गया है ताकि अधिक से अधिक लोगों तक यह जैकेट पहुंच सके, जिससे अधिक से अधिक लोग इस जैकेट का लाभ उठा सके।
लड़कियों को गोलगप्पे बहुत पसंद होते है और वे गोलगप्पे खाने का कोई मौका नहीं छोड़ती हैं। कुछ लोगों का मानना होता है कि गोलगप्पे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होते हैं लेकिन आपको बता दें कि अगर इन्हें सही मात्रा में खाया जाए तो ये स्वास्थ्य को बहुत फायदा पहुंचाते हैं। आप सोच रहे होंगे कि गोलगप्पे खाने से क्या फायदा हो सकता है तो आइए आपको बताते हैं इसके बारे में …………………..
गोलगप्पे के पानी को जलजीरा पाउडर, काला नमक और भुना हुआ जीरा आदि डालकर तैयार किया जाता है जिसकी वजह से ये पेट का हाजमा सही करने का काम करता है। गोलगप्पे खाने से गैस, बदहजमी जैसी समस्याएं नहीं होती हैं और खाना आसानी से पच जाता है।
अगर जी घबरा रहा है या उल्टी आ रही है तो ऐसे में गोलगप्पे का सेवन करने से फायदा होता है। वहीं अगर मुंह में छाले हो गए हैं तो गोलगप्पे खाने से जल्दी ही छाले सूखने लगते हैं।
लोकसभा चुनावों के चलते छह सीटों पर अब उपचुनाव होंगे. लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए सांसदों ने राज्यसभा सीटों से इस्तीफा दिया था. इन सभी सीटों पर 5 जुलाई को उपचुनाव होंगे. खाली हुई छह सीटों में एक बिहार, दो गुजरात और तीन ओडिशा की सीटें हैं.
बिहार से रविशंकर प्रसाद, गुजरात से अमित शाह और स्मृति ईरानी, ओडिशा से अच्युत सामंत, प्रताप केसरी देव और सौम्यरंजन पटनायक ने इस्तीफा दिया था. इन सभी सीटों पर 25 जून को नामांकन होगा. वहीं सभी सीटों के लिए मतदान 5 जुलाई को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक संबंधित विधानसभाओं में होगा. 5 जुलाई देर रात तक नतीजे आ जाएंगे.
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद बिहार से राज्यसभा सांसद थे. यह सीट उन्होंने पटना साहिब से चुनाव लड़ने के लिए छोड़ी थी. पटना साहिब सीट से कांग्रेस ने शत्रुघ्न सिन्हा को उम्मीदवार बनाया था. यहां का सबसे रोमांचक मुकाबला माना जा रहा था. जबकि नतीजों में रविशंकर प्रसाद को एकतरफा जीत हासिल हुई. इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार रविशंकर प्रसाद ने 2,84,657 वोटों के अंतर जीत प्राप्त की.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के गांधी नगर से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए राज्यसभा सीट से इस्तीफा दिया था. अमित शाह ने गांधी नगर सीट पर 5,57,014 मतों के अंतर से शानदार जीत प्राप्त की थी. अमित शाह के सामने कांग्रेस ने सी.जे चावड़ा को टिकट दिया था.
इस बार अमेठी की सीट पर सबकी निगाहें थीं क्योंकि इस सीट से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को चुनौती देने के लिए बीजेपी उम्मीदवार स्मृति ईरानी मैदान में थीं. यहां से स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को 55,120 वोटों के अंतर से हराया. यह कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी हार थी.
गुजरात की एक सीट जा सकती है कांग्रेस के खाते में
गुजरात की एक सीट कांग्रेस के पाले में जा सकती है. बीजेपी दोनों ही सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए पूरी कोशिश कर रही है. हालांकि गुजरात विधानसभा के मौजूदा विधायक की गिनती के अनुसार एक सीट बीजेपी को तो एक सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है.
विधानसभा में कांग्रेस के पास फिलहाल 72 विधायक हैं. जबकि बीजेपी के पास 100 विधायक हैं. जबकि बीजेपी के चार विधायको के सांसद बनने से बीजेपी का 104 का आंकड़ा 100 हो गया है. जबकि बीजेपी को दोनों सीट जीतने के लिए 120 विधायक चाहिए.
हैलो दोस्तोँ आज हम आपको बताएंगे अगर आपके घर में छिपकली हैं तो इसे बाहर कैसे निकाले। कई लोग छिपकली को भगाने के लिए घर में मोर के पंख और अंडे का इस्तेमाल करते है फिर भी वह नहीं भागती। तो चलिए जानते इसे बाहर निकालने के आसान तरीके…
– काली मिर्च के स्प्रे का उपयोग कर छिपकलियों को दूर भगा सकते है। इस स्प्रे को घर में बना सकते है। इसके लिए काली मिर्च पाउडर को पानी के साथ मिलाना होगा। अब इसे एक स्प्रे बोटल में डालें और जहां जहां छिपकली के होने की संभावना अधिक होती है, वहां इसे छिड़के। इसकी तेज दुर्गंध से छिपकलियों से आपको आसानी से छुटकारा मिल जायेगा।
– एक स्प्रे बॉटल लेकर प्याज का रस और पानी भर ले। इसमें कुछ बुँदे लहसुन के रस की मिला कर अच्छे से मिला ले। अब इसे घर के हर कोने में छिड़क दे। प्याज की स्लाइस और लहसुन की कली को धागे से बांध कर लटकाने से भी छिपकली भाग जाती है। प्याज में सल्फर पाया जाता है, जिससे बुरी दुर्गन्ध निकलती है। ठंडे बर्फ वाले पानी का स्प्रे भी कर सकते है, इससे भी छिपकली भाग जाती है।