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लीची खाने से हो रही बच्चों की मौत? मिलावटी चीजों को ऐसे पहचानें

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बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से मरने वालों की संख्या 97 तक पहुंच गई है. बुखार का जिम्मेदार लीची खाना बताया जा रहा है. वैसे आजकल खाने पीने की चीजों में मिलावट होना आम बात हो गई है. ऐसे में एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या वाकई चमकी नाम का ये बुखार खाली पेट ज़्यादा लीची खाने से हो रहा है या फिर मिलावटी लीची का सेवन करने से.

सब्जी और फलों में मिलावट आपकी सेहत को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है. ऐसे में सेहत के इस दुश्मन से अपने परिवार को बचाने के लिए अपनाएं ये खास उपाय.

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों में मिलावट का पता लगाने के लिए एक मैनुअल जारी किया है. डिटेक्ट एडल्ट्रेशन विद रैपिड टेस्ट (डीएआरटी) नाम की इस किताब में कई आसान परीक्षणों द्वारा बताया गया है कि आप कैसे आसानी से खाद्य पदार्थों में मिलावट का पता लगा सकते हैं.

सेब- फलों में सबसे ज्यादा मिलावट सेब में होती है. बासी खराब सेब को फ्रेश दिखाने के लिए कई बार उस पर वैक्‍स लगा दिया जाता है ताकि वो चमकदार दिखने लगे. ऐसे में खाने से पहले सेब को ऊपर से चाकू से कुरेद कर देख लें. अगर उसमे से कुछ सफेद-सफेद निकले तो समझ जाएं कि यह मिलावटी सेब है.

आइसक्रीम- आइसक्रीम का रंग ज्यादा सफेद दिखाने के लिए उसमें वाशिंग पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है. आइसक्रीम में मिलावट की पहचान करने के लिए उसमें कुछ बूंद नींबू के रस की डालें. अगर ऐसा करने पर आइसक्रीम में झाग बनने लगे तो समझ जाएं कि इसमें वाशिंग पाउडर मिला हुआ है. इस तरह की मिलावटी आइसक्रीम खाने से पेट संबंधी रोगों के साथ आपके लीवर पर भी बुरा असर पड़ सकता है.

नारियल तेल- नारियल तेल में मिलावट की पहचान करने के लिए उसे लगभग 30 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें. अगर उसमें किसी तरह की मिलावट की गई है तो नारियल तेल तो जम जाएगा लेकिन मिलावटी पदार्थ ऊपरी सतह में तैरता दिखाई देगा.

दूध में मिलावट- दूध में थोड़ा सा पानी मिलाकर उसे अच्छी तरह हिलाकर देख लें. अगर उसमें किसी तरह के डिटर्जेंट पाउडर की मिलावट की गई होगी तो दूध में झाग बन जाएगा. 

इस शराब से कर सकते हैं फैट कम,लगेगी डायबिटीज़ पर रोक

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शराब पीना सेहत के लिए हानिकारक होता है यह तो हम सभी जानते हैं लेकिन अगर हम कहे कि यह शराब आपकी सेहत को नुकसान नहीं फायदा देगी तो आप सोचने में पड़ जायेंगे. शराब किन चीज़ों से बनती है इसके बारे में आपको पता ही होगा. लेकिन हम आपको बताने जा रहे हैं कि आम के पत्तों से बनी शराब के क्या लाभ होते हैं. जी हां आज हम आपको एक ऐसी शराब के बारे में बताने जा रहे है जो आपकी सेहत के लिए फायदेमंद होगी.

दरअसल, जीवाजी यूनिवर्सिटी में हेल्थ सेंटर के छात्रों ने आम के पत्तों से शराब बनाई है. इसमें 8 से 12% तक अल्कोहल होगा और सबसे कमाल की बात यह है कि इस शराब के सेवन आपकी सेहत को कोई नुकसान नहीं होगा बल्कि फायदा ही होगा. आपकी जानकारी के लिए बता दें, आम के पत्तों से बनी यह शराब डायबिटीज की रोकथाम के साथ-साथ फैट कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर होगी.

आम के पत्तों की शराब में मैंगो फेरीन होता है, इससे डायबिटीज की रोकथाम होती है. शरीर का फैट कम होता है. इसमें एंटी वैक्टीरियल गुण भी होते हैं. गैलिक एसिड, पैरासिटिन, कैटाइचिन, इपि कैटाइचिन शरीर के उर्तकों क्षतिग्रस्त नहीं होने देता और एस्कॉर्बिक एसिड रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. इसमें कैल्शियम भी होता है जो हडि्डयों के लिए लाभदायक होता है.

शराब को बनाने में 45-50 दिन तक का वक्त लगा. इसे ग्लूकोज, कार्बोहाइड्रेट और पेप्टॉन प्रोटीन के किण्वन से बनाया जाता है. जेयू प्रबंधन अब इसे लोगों तक पहुंचाने के लिए किसी कंपनी के साथ अपने फार्मूले का एमओयू साइन करने का प्रयास कर रहा है.

यहां पर महिलाओं का चलता है राज, गुलामों जैसी है पुरुषों की जिंदगी

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भारतीय समाज में अब भी महिलाओं को चार दीवारी के अंदर रखा जाता है इनको ज्यादा छूट और आजादी नहीं दी जाती है। लेकिन इसी धरती पर एक देश ऐसा है जहां महिलाओं का है एकछत्र राज है, पुरुष सारी जिंदगी सिर्फ गुलामी करते हैं।

इस देश का नाम है ‘अदर वर्ल्ड किंगडम’ की जो 1996 में यूरोपियन देश चेक रिपब्लिक से बना था। हालांकि, इसे अन्य राष्ट्रों ने देश का दर्जा नहीं दिया है। इस देश की रानी पैट्रिसिया-1 है, जिसका यहां एकछत्र राज चलता है। यहां की मूल का दर्जा सिर्फ महिलाएं को ही मिला हैं।

यहां पुरुषों को गुलाम के अलावा कुछ भी नहीं समझा जाता। इस देश में दूसरे देश से आए पुरुषों को रानी के बैठने के लिए सोफा बनना पड़ता है, जिस पर वह बैठती हैं। यही नहीं, यहां अगर पुरुषों को शराब पीने से पहले मालकिन के पैरों में शराब चढ़ानी पड़ती है और इसके बाद ही गुलाम इसे पी सकता है।

फादर्स डे पर 12 साल की बेटी ने पिता को दी मुखाग्नि, मंजर देख रो पड़ा हर शख्स

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जब लोग फादर्स डे मना रहे थे, अपने पिता को बधाई दे रहे थे उस वक्त मध्य प्रदेश के इंदौर में एक बेटी अपने पिता की चिता को आग दे रही थी। 12 साल खुशी को भी इस दिन का बेसब्री से इंतजार था, लेकिन अफसोस उसके लिए यह दिन खुशियां नहीं बल्कि आंसुओं का सैलाब लेकर आया। यह मंजर जिसने भी देखा वह दहल गया।

एक्सीडेंट में फ्रैक्चर हो गया था पैर

दरसअल, गारमेंट व्यवसायी जय वाटवानी (38) का 15 दिन पहले एक दुर्घटना में पैर फ्रैक्चर हो गया था। बीते शनिवार की रात में जय के पैर में अचानक तेज दर्द उठा। वह पास के ही एक अस्पताल में गए, जहां डॉक्टर ने उन्हें इंजेक्शन लगाया, लेकिन दर्द कम नहीं हुआ। हालत बिगड़ती देख परिजन जय को एक अन्य निजी अस्पताल लेकर गए, लेकिन इसी दौरान दिल का दौरा पड़ने पर उनकी मौत हो गई। परिजन ने अंगदान की सहमति भी दे दी, लेकिन कुछ कारणों से उनके सिर्फ नेत्र दान हो सके।

मुखाग्नि देकर बोली बेटी- हैप्पी फादर्स डे

रविवार दोपहर यानी फादर्स डे पर जय का अंतिम संस्कार किया गया। जय की बड़ी बेटी खुशी को फादर्स डे के दिन ही अपने पिता को मुखाग्नि देनी पड़ी। इस दौरान उसने कहा, ‘हैप्पी फादर्स डे’ पापा। यह मंजर देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।

इस देश के पास अमेरिका से भी ज्यादा है परमाणु हथियार!

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परमाणु हथियारों से लैस देश अपने अस्त्रों को आधुनिक बनाने में जुटे हैं, हालांकि परमाणु हथियारों की संख्या में कमी आई है। अभी दुनिया में किसके पास कितने परमाणु हथियार हैं, जानिए।

इस वक्त दुनिया में नौ देशों के पास परमाणु हथियार हैं जिनमें अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इस्राएल और उत्तर कोरिया शामिल हैं। खबर के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हथियारों पर नजर रखने वाली संस्था स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति शोध संस्थान (सिपरी) का अनुमान है कि 2019 की शुरुआत में दुनिया में परमाणु हथियारों की संख्या 13,865 थी। इस आंकड़े में उन सभी हथियारों को गिना गया है जिन्हें तैनात किया गया है या फिर डिस्मेंटल किया जाना है।

सिपरी की ताजा रिपोर्ट कहती है कि भले ही दुनिया के परमाणु शक्ति संपन्न देश अपने हथियारों को आधुनिक बनाने में जुटे हैं लेकिन उनकी संख्या घट रही है। एक साल पहले के मुकाबले परमाणु हथियारों की संख्या 600 कम हुई है।

इसकी बड़ी वजह अमेरिका और रूस के बीच हुई स्टार्ट संधि है जिसके तहत दोनों देशों ने अपने परमाणु हथियार घटाए हैं। रूस के पास अभी 6,500 परमाणु हथियार हैं जबकि अमेरिका के पास 6,185 है। इनमें से एक चौथाई हथियारों को तैनात किया गया है।

स्टार्ट संधि 2021 में खत्म होने वाली है. दोनों देशों ने अभी इसे आगे बढ़ाने पर बात शुरू नहीं की है। सिपरी में परमाणु निरस्त्रीकरण, हथियार नियंत्रण और अप्रसार कार्यक्रम के निदेशक शैनन कील कहते हैं, ‘अगर दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सैन्य मतभेद कम नहीं हुए तो रूस और अमेरिका के परमाणु हथियारों में आ रही कमी की भावी संभावनाएं कमजोर हो सकती हैं।

सिपरी की रिपोर्ट कहती है कि रूस और अमेरिका, दोनों ही अपने परमाणु अस्त्रागार, मिसाइलों और डिलीवरी सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए व्यापक कार्यक्रम चला रहे हैं और इस काम पर खूब धन खर्च किया जा रहा है।

इस चिप के जरिए दुनिया को ‘दिमागी गुलाम’ बना सकता है चीन

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कुछ दिनों पहले चीन में तीसरे वर्ल्ड इंटैलिजेंस कांग्रेस के आयोजन में एक ऐसी चीज सामने आई जिससे हर कोई हैरान रह गया. पक्के तौर पर अगर ये कारगर हुई तो इंसानी दुनिया का भविष्य बदलकर रख सकती है. ये हमें चलता फिरता कंप्युटर तो बना सकती है लेकिन ये आशंका है कि इससे हम कहीं तकनीक की नई दुनिया में गुलाम ना बन जाएं.

हालांकि इसमें कोई शक नहीं कि चीन की ये तकनीक गजब की है. चीन ने इसे ब्रेन रीडिंग चिप के तौर पर पेश किया है. इसका वैज्ञानिक नाम है बीसी3 यानि ब्रेन कंप्युटर कोडेक चिप. वैसे बोलचाल में इसे ब्रेन टाकर कहा जा रहा है. ये बहुत छोटी लेकिन जबरदस्त स्पीड से काम करने में सक्षम चिप होगी.

यानि इस चिप के जरिए ब्रेन कंप्युटर इंटरफेस (बीसीआई) तैयार किया जा सकेगा. वैसे ये कांसैप्ट नया नहीं है. वैज्ञानिक इससे पहले भी बीसीआई डिवाइस बना चुके हैं, जिससे पैरालाइज व्यक्ति अपने रोबोटिक हाथ को नियंत्रित कर सकते हैं लेकिन अब तक कोई ऐसी चिप नहीं बनी जो आपके दिमाग में झांक सके या दिमाग को बाहुबली बना दे.

ये ऐसी डिवाइस होगी जो मानवीय ब्रेन को कंप्युटर्स से जोड़ेगी.इसे तैयार किया है चीन के सरकारी विभाग चीन इलैक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन और तियानजिन यूनिवर्सिटी ने मिलकर.

ये ब्रेन चिप क्या करेगी
लंबे समय से हम लोग सुनते आ रहे हैं विज्ञान की दुनिया ऐसी चिप विकसित करने में लगी है, जो हमारे शरीर में लगा दी जाएगी, जिससे हमारी हर गतिविधि या आने-जाने की जानकारी पता लगाई जा सकती है. निश्चित तौर पर ऐसी चिप तो विकसित हो चुकी हैं. लेकिन अब चीन ने जिस चिप को विकसित किया है, वो इससे कई कदम आगे है.

ये है चीन की वो ब्रेन चिप बीसीथ्री, जो आने वाले समय में दुनिया को बदल सकती है

ब्रेन करेगी कंप्युटर को कंट्रोल
मोटे तौर पर कहा जा रहा है कि इस चिप को लगाते ही हमारे ब्रेन की हर गतिविधि, हर जानकारी, हर इच्छा और हर मर्जी को कंप्युटर समझेगा. हम जो चाहेंगे वो वैसा करेगा यानि वो हमारे नियंत्रण में होगा और हमारी हर मर्जी का पालन करेगा. यानि हम जो चाहेंगे कंप्युटर करने लगेगा. वैसे ये दावा किया गया है कि इससे ब्रेन के न्यूरो संरचना पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

ब्रेन के इशारों पर नाचेगी दुनिया 
चीन के वैज्ञानिकों का् कहना है कि केवल कंप्युटर ही क्यों बल्कि कंप्युटर आधारित कोई भी डिवाइस, स्मार्टफोन बगैर हमारे हरकत में या कोई बटन दबाए बगैर हमारी मर्जी से संचालित होने लगेंगे. मान लीजिए आपने अपने दिमाग में ताजमहल की कोई जानकारी चाही तो आपके कंप्युटर की सक्रीन पर तुरंत ताजमहल की सारी जानकारी दिखने लग जाएगी. इसी तरह अगर किसी डॉक्टर को कॉल करना चाहते हैं तो चिप से जुड़ा स्मार्टफोन तुरंत आपके बोले बस आपने दिमाग की बात समझ कर डॉक्टर को फोन घुमा देगा.

आपके घर में कंप्युटर आधारित जितनी डिवाइस होंगी, सब इस चिप के बाद आपकी इच्छाओं या ब्रेन के इशारों के जरिए आपकी बात समझने लगेंगी या ब्रेन के सिगनल्स के जरिए आपके हुकुम का तालीम करने लगेंगी.
वैसे 2017 में नेटफ्लिक्स ने कहा था कि उसने एक ऐसा हेडबैंड बनाया है, जो पहनने वाले के माइंड को पढ़ सकता है और उस आधार पर उनके लिए शो फिक्स कर सकता है.

ये आपको बहुत ताकतवर भी बना सकती है लेकिन हर जानकारी को मास्टर कंट्रोल रूम तक भी पहुंचा सकती है

ब्रेन की छोटी सी भी हरकत बदलेगी सिगनल में 
चिप लगते ही ब्रेन से आने वाली तरंगें ही कंप्युटर को संचालित करेंगी और ये आपके निर्देशों को ग्रहण करेगा. सिगनल कैसे बनेंगे और कैसे कंप्युटर तक पहुंचेंगे, इसकी अपनी प्रक्रिया होगी. वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रेन टॉकर कहा जाने वाला ये चिप पहले दिमाग के अंदर सेरेब्रल कोर्टेक्स में पैदा होने वाले हर छोटे से छोटे इलैक्ट्रॉनिक आवेगों को पकड़ेगा. फिर इन्हें सिगनल में बदलेगा, जिसे कंप्युटर की ओर भेजा जा सकेगा.

पढाई, गेमिंग और चिकित्सा बन सकता है वरदान भी
ये विश्व की पहली ब्रेन कंप्युटर कोडेक चिप (बीसी3) है. भविष्य में, इस तकनीक का इस्तेमाल पढाई, गेमिंग और मेडिकल डिवाइस के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा. ये उन तमाम लोगों के लिए तो बहुत उपयोगी हो सकती है जो चल फिर भी नहीं सकते, उन्हें बोलने में दिक्कत होती है. अगर आपके शरीर के किसी हिस्से में कोई दिक्कत है, तो आपका ब्रेन सीधे वो जानकारी कंप्युटर को भेज सकेगा, जिसे आसानी से डॉक्टर समझ सकेंगे और इलाज में आसानी रहेगी.

अगर आप कोई गेम कंप्युटर पर खेल रहे हैं तो आपको बटन दबाने की जरूरत नहीं हैं बल्कि गेम की कमांड आपका दिमाग देगा और तुरंत स्क्रीन पर आप उसका पालन होते देखने लगेंगे.

अभी ये साफ नहीं है कि ये चिप ब्रेन में अंदर इंप्लांट की जाएगी या फिर शरीर के बाहर चिपकाई जाएगी

शरीर में कहां लगेगी ये चिप
ये चिप किस तरह लगेगी..क्या ये आपके दिमाग में इंप्लांट होगी या आप इसे बाहर अपनी शरीर पर लगा सकेंगे-ये अभी साफ नहीं हुआ है. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे बाहर भी पहना जा सकेगा.

यकीनन अगर कोई ऐसी चिप हरकत में आ गई और लोग इसे पहनने पर सहमत हो गए तो ये दुनिया एक अलग दौर और अलग तकनीक क्षेत्र में प्रवेश कर जाएगी.

हमेशा से लिए बन सकते हैं गुलाम

जैसे कि हर बात के दो पहलू होते हैं, उसी तरह इसके भी दो पहलु होने से इनकार नहीं किया जा सकता है. ये तय है कि अगर कोई चिप आपके दिमाग की बातों को पढ़ने लगेगा तो ये भी सही है कि आपकी सारी जानकारी, सारी सोच और सारी गतिविधियां भी कंप्युटर में रिकार्ड होंगी.

अगर ये चिप किसी नेटवर्किंग या सर्वर या मास्टर कंट्रोल रूम से जुड़ा होगा तो ये सारी बातें वहां भी बखूबी रिकार्ड होती रहेंगी. यानि साफ है कि आप एक अदृश्य तौर पर हमेशा के लिए डिजिटल कैदी बन जाएंगे.

ये चिप अगर आपकी हर गतिविधि को रिकार्ड करेगी तो आप मुसीबत में भी फंस सकते हैं और आप पर हमेशा एक अदृश्य नजर रहेगी

जेल भी पहुंच सकते हैं
अगर चिप के जरिए दिमाग को पढा जान लगेगा तो आपकी प्राइवेसी तो खत्म होगी बल्कि अगर आपके दिमाग में कोई साजिश या ऐसी योजना पल रही है, जिससे व्यवस्था को खतरा हो सकता है तो आप पकड़े भी जा सकते हैं.

ये भी संभव है कि चिप लगाते ही आप किसी सर्वर या मास्टर कंट्रोल रूम से जुड़ जाएं. जो आपकी हर हरकत पर बारीक नजर रखे. यानि ये चिप आने वाले समय में आपको अगर बंधुआ बना सकती है तो आपकी जिंदगी को खुली किताब भी बना सकती है, जहां जो कुछ आपका अपना है वो पराया हो जाएगा.

छत्तीसगढ़ में मजबूत विपक्ष की भूमिका निभा पाएगी बीजेपी?

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छत्तीसगढ़ में जब कांग्रेस की सरकार आई तब इसका विश्लेषण कांग्रेस की जीत कम और बीजेपी को जनता द्वारा हराना ज्यादा माना गया. हार के बाद करीब एक महीने तक बीजेपी इस सदमे से नहीं उबर पाई. वहीं पार्टी के कई नेताओं को विपक्ष की भूमिका में सहज होना भी काफी मुश्किल लग रहा था. लेकिन छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार को 6 महीने पूरे होने के बाद अब बीजेपी ने जनता के हित के लिए एक बड़े आंदोलन का एलान किया है जिससे सवाल उठ रहे है कि क्या वाकई बीजेपी एक मजबूत विपक्ष की भूमिका में आ चुकी है. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार ने जब अपने कुछ फैसले वापस लिए तब उसका श्रेय बीजेपी ने लिया. बीजेपी का दावा था कि उन्होंने एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाई तभी कांग्रेस सरकार को जनता के हित में फैसले लेने पड़ रहे है.

बीजेपी ने रखा ये दावा

हालांकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद 6 महीनों में भारतीय जनता पार्टी अभी तक कोई बड़ा आंदोलन नहीं किया. केवल मुद्दों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का ही दौर चलता रहा. इसके बाद होती किरकिरी से उबरी बीजेपी ने पूर्ण शराब बंदी को लेकर सरकार को घेरना शुरू किया. वहीं इसके बाद विधानसभा में किसानों की कर्ज माफी में हो रही अव्यवस्थाओं को लेकर भी बीजेपी ने घेरा. इसके बाद सरकार ने अपने किए घोषणा पत्र में बिजली बिल हाफ का जो वादा किया था उसकी भी घोषणा की. बीजेपी का दावा रहा कि सरकार ने उनके दबाव में यह फैसला लिया. बीजेपी का तो यह भी दावा है कि उन्होंने यदि मजबूत विपक्ष की भूमिका नहीं निभाई होती तो लोकसभा में जनता उन्हें हाथों हाथ नहीं लेती क्योंकि उन्होंने सरकार की पोल खोली है और इसलिए बीजेपी को लोकसभा में जीत हासिल हुई है.

पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह की दलील

बस्तर और सरगुजा में आदिवासियों के आंदोलन में बीजेपी कहीं भी खड़ी दिखायी नहीं दी. कई विवादित अधिकारियों को कांग्रेस की सरकार में तवज्जों मिला लेकिन बीजेपी ने कोई प्रदर्शन नहीं किया. अब जब प्रदेश के पूर्व मुखिया डॉ. रमन सिंह जनता के हितों को लेकर 22 जून को प्रदेशव्यापी आंदोलन की बात कह रहे है. डॉ. रमन सिंह का कहना है कि बीजेपी ने भूपेश सरकार को 6 महीने का वक्त दिया और अब पानी सिर से उपर चला गया है इसलिए ये प्रदर्शन किया जा रहा है.

कांग्रेस का तर्क
वहीं कांग्रेस सरकार के मंत्री कवासी लखमा का कहना है कि बीजेपी क्या कर रही है, उस पर कांग्रेस टिप्पणी नहीं करेगी. बल्कि लखमा ने 6 महीने में भूपेश बघेल की सरकार की उपलब्धियों को गिनाना शुरू कर दिया. इधर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बीजेपी के इस आंदोलन को राजनीतिक गतिविधि ही करार दिया है.

ग्लोइंग स्किन के लिए 35 की उम्र के बाद इन पांच फूड को जरूर खाएं

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ग्लोइंग स्किन के लिए महिलाएं क्या-क्या उपाय नहीं करती हैं. हमारी उम्र जैसे-जैसी बढ़ती जाती है हमारे शरीर का बिहेवियर भी बदलता रहता है, यह सिर्फ हमारे गाने सुनने के टेस्ट को ही नहीं बदलता है। 35 की उम्र के बाद हमारे मेटाबॉलिज्म के स्तर में भी धी-धीरे गिरावट आने लगती है, जिसके मतलब है हमें अपने खान-पान के प्रति सजग हो जाने का समय आ गया है। 35 साल की उम्र के बाद शुगर ड्रिंक, मीठा, स्नेैक्स की जगह हमें उच्च पोषक तत्वों को अपने खान-पान में शामिल करना चाहिए। हमें ऐसे खान-पान को तरजीह देनी चाहिए जो हमें कोलेस्ट्रॉल को कम करने तथा ब्लडप्रेशर और शुगर जैसी बीमारियों से दूर रखे।

हम अपने खान-पान को लेकर जितना सजग होते है उतने ही हम हेल्दी भी होते हैं। हमें क्या खाना है या क्या नहीं खाना है इसको लेकर की जाने वाली सतर्कता उम्र के साथ आने वाली बीमारियों से बचाकर रखता है। हम यहां आपको ऐसा कोई खान-पान नहीं बताने जा रहे हैं जो बहुत ही अाश्चर्यजनक हो या एक दम नया हो जिसे आप जानते ही न हों। आज जो हम आपको फूड्स बताने जा रहें है वह सस्ते और अासानी से हर जगह उपलब्धता वाले हैं।

बींसः डायट में हुए कई शोध से पता चलता है कि यदि रोजाना अपने खाने में हम बींस का उपयोग करते हैं तो एलडीए अर्थात बैड कैलेस्ट्राल को पांच प्रतिशत तक कम कर सकते हैं। इतना ही नहीं बींस का रोजाना इस्तेमाल से ब्लड शूगर को भी नियंत्रित किया जा सकता है।

ओट्सः 40 से अधिक उम्र के पुरूष और 55 से अधिक उम्र की महिलाओं को हार्टअटैक का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए 40 के बाद तो खान-पान में ऐसे फूड का इस्तेमाल करना ही नहीं चाहिए जो कैलेस्ट्राल को बढ़ता हो। इसके लिए आप अगर अपने खान-पान में ओट्स को शामिल करते हैं तो यह सबसे बेहतर स्टेप होगा। ओट्स फाइबर से भरपूर होते हैं जो बेहतर पाचन के साथ-साथ शरीर में कैलेस्ट्राल के बढ़ने से रोकने में मददगार होता है।

हरे पत्तेदार सब्जियां ः खाने में पालक, कोलार्ड, हरे पत्तेदार सब्जियां हमारा जीवन बढ़ाने के साथ-साथ हमारे दिमाग को भी तेज रखने में मदद करती हैं। कई शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि जो लोग रोजाना पालक को अपने डायट में शामिल रखते हैं उनकी याददाश्त बेहतर रहती है। जैसा की आप सभी जानते हैं उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त की कमजोरी भी आती है इसलिए हमें अपने खान-पान में हरे पत्तेदार सब्जियों को जरूर शामिल करना चाहिए।

सेबः सेब के बारे में आपने कई बार पढ़ा होगा की यह सेहत के लिए बहुत ही बेहतर डायट होता है। इसके रोजाना उपयोग से आप एलडीए आर्थात बैड कैलेस्ट्राल तो कम करते ही हैं साथ ही साथ आप डायबिटीज के खतरे से भी अपने आपको बचाकर रखते हैं। यह आसानी से हर जगह उपलब्ध रहता है आप इसे रोजाना की डायट में शामिल कर सकते हैं।

नट्सः हेल्दी डायट इंसान हो हेल्दी शरीर देता और उसे जीने का एहसास भी देता है, इसलिए अपने जीवन के 30 वें साल के बाद आपको चिप्स, कुकीज के उपयोग पर पाबंदी लगाकर उसकी जगह नट्स से बने स्नेक्स का उपयोग करना चाहिए। 2013 के एक रिसर्च में पाया गया था जो लोग नट्स का रोजान इस्तेमाल करते हैं उनमें हार्टअटैक कि संभावना 28 प्रतिशत कम हो जाती है।

17वीं लोकसभा आज से, लेकिन इस बार सदन में नहीं दिखेंगे राजनीति के ये दिग्गज चेहरे!

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17वीं लोकसभा का पहला सत्र आज से शुरू हो रहा है. इसमें ट्रिपल तलाक सहित कई महत्वपूर्ण बिलों और आम बजट पर सभी की निगाहें होंगी. इस लोकसभा में एक बात खास होगी. वह यह कि 16वीं लोकसभा के कई बड़े चेहरे इस बार नहीं दिखेंगे. इनमें लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, सुमित्रा महाजन, हुकुमदेव नारायण यादव, योगी आदित्यनाथ, कमलनाथ, सुषमा स्वराज, एचडी देवगौड़ा और शरद पंवार शामिल हैं.

 लालकृष्ण आडवाणी गांधी नगर सीट पर लगातार पांच बार से लगातार सांसद चुने जा रहे थे. वो 1991 सहित कुल छह बार सांसद बने थे. लेकिन इस बार बीजेपी ने उन्हें टिकट नहीं दी थी. उनकी जगह पार्टी अध्यक्ष अमित शाह इस सीट से लोकसभा पहुंचे हैं.

लालकृष्ण आडवाणी गांधी नगर सीट पर लगातार पांच बार से लगातार सांसद चुने जा रहे थे. वो 1991 सहित कुल छह बार सांसद बने थे. लेकिन इस बार बीजेपी ने उन्हें टिकट नहीं दी थी. उनकी जगह पार्टी अध्यक्ष अमित शाह इस सीट से लोकसभा पहुंचे हैं.

 मुरली मनोहर जोशी 15वीं लोकसभा सभा यानी 2009 में वाराणसी से सांसद चुने गए थे लेकिन 16वीं में इस सीट से नरेंद्र मोदी ने चुनाव लड़ा इसलिए उन्हें कानपुर भेज दिया गया. जोशी यहां से 2014 में सांसद बन गए. लेकिन 17वीं लोकसभा में उन्हें टिकट नहीं मिली. वो 1996, 1998 और 1999 में इलाहाबाद से सांसद बने. लेकिन इस साल चुनाव न लड़ने की वजह से वो संसद में नहीं दिखेंगे.

मुरली मनोहर जोशी 15वीं लोकसभा सभा यानी 2009 में वाराणसी से सांसद चुने गए थे लेकिन 16वीं में इस सीट से नरेंद्र मोदी ने चुनाव लड़ा इसलिए उन्हें कानपुर भेज दिया गया. जोशी यहां से 2014 में सांसद बन गए. लेकिन 17वीं लोकसभा में उन्हें टिकट नहीं मिली. वो 1996, 1998 और 1999 में इलाहाबाद से सांसद बने. लेकिन इस साल चुनाव न लड़ने की वजह से वो संसद में नहीं दिखेंगे.

 उमा भारती झांसी से सांसद थीं. वो पिछली मोदी सरकार में मंत्री रही हैं. लेकिन 2019 में उन्होंने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा. इसलिए वो भी संसद में इस बार नहीं दिखेंगी.

उमा भारती झांसी से सांसद थीं. वो पिछली मोदी सरकार में मंत्री रही हैं. लेकिन 2019 में उन्होंने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा. इसलिए वो भी संसद में इस बार नहीं दिखेंगी.

 सुषमा स्वराज 2009 और 2014 में मध्य प्रदेश की विदिशा सीट से सांसद चुनी गईं थीं. लेकिन इस बार पार्टी ने उन्हें चुनाव नहीं लड़वाया था. उन्हें मंत्री भी नहीं बनाया गया, ऐसे में संसद में उनका भाषण सुनने को नहीं मिलेगा.

सुषमा स्वराज 2009 और 2014 में मध्य प्रदेश की विदिशा सीट से सांसद चुनी गईं थीं. लेकिन इस बार पार्टी ने उन्हें चुनाव नहीं लड़वाया था. उन्हें मंत्री भी नहीं बनाया गया, ऐसे में संसद में उनका भाषण सुनने को नहीं मिलेगा.

 इंदौर से सांसद एवं लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन भी इस बार चुनाव नहीं लड़ा, इसलिए उन्हें भी हम इस बार लोकसभा में नहीं सुन पाएंगे.

इंदौर से सांसद एवं लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन भी इस बार चुनाव नहीं लड़ा, इसलिए उन्हें भी हम इस बार लोकसभा में नहीं सुन पाएंगे.

 हुकुमदेव नारायण यादव बिहार की मधुबनी लोकसभा सीट से सांसद थे. लेकिन बीजेपी ने 2019 के लिए उनके बेटे अशोक यादव को मैदान में उतारा था. उन्हें जनता ने जिताकर लोकसभा भेजा है. इसलिए हुकुमदेव नारायण यादव का जोशीला भाषण हमें इस बार लोकसभा में सुनने को नहीं मिलेगा.

हुकुमदेव नारायण यादव बिहार की मधुबनी लोकसभा सीट से सांसद थे. लेकिन बीजेपी ने 2019 के लिए उनके बेटे अशोक यादव को मैदान में उतारा था. उन्हें जनता ने जिताकर लोकसभा भेजा है. इसलिए हुकुमदेव नारायण यादव का जोशीला भाषण हमें इस बार लोकसभा में सुनने को नहीं मिलेगा.

 योगी आदित्यनाथ एवं कमलनाथ 16वीं लोकसभा के सांसद थे लेकिन योगी यूपी के सीएम बन गए और कमलनाथ एमपी के, इसलिए इन दोनों नेताओं की आवाज भी लोकसभा में नहीं सुनने को मिलेगी.

योगी आदित्यनाथ एवं कमलनाथ 16वीं लोकसभा के सांसद थे लेकिन योगी यूपी के सीएम बन गए और कमलनाथ एमपी के, इसलिए इन दोनों नेताओं की आवाज भी लोकसभा में नहीं सुनने को मिलेगी.

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा 2019 का लोकसभा चुनाव हार गए. उन्होंने तुमकुर सीट से चुनाव लड़ा था. जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) के संस्थापक देवगौड़ा 16वीं लोकसभा के लिए कर्नाटक की हासन लोकसभा सीट से चुनकर आए थे.

आखिर एक लीटर में कितना माइलेज देता है हवाई जहाज? नहीं जानते हैं तो जान लीजिए

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दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जो हवाई जहाज का सफर कर चुके हैं, लेकिन आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो आज तक कभी हवाई जहाज में नहीं बैठे हैं। वैसे तो लोग हवाई जहाज के बारे में बहुत ही बातें जानते होंगे, लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर हवाई जहाज एक लीटर में कितना माइलेज देता है? ये जानकारी आपको चौंका देगी। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हवाई जहाज प्रति सेकेंड में लगभग चार लीटर ईंधन खर्च करता है। अगर बात बोइंग 747 की करें तो यह एक मिनट की यात्रा के दौरान 240 लीटर ईंधन खर्च कर देता है। 

बोइंग के वेबसाइट के आंकड़ों के मुताबिक, बोइंग 747 विमान में 10 घंटे की उड़ान के दौरान 36,000 गैलन यानी 1,50,000 लीटर ईंधन का इस्तेमाल होता है। इस विमान में प्रति मील (12 लीटर प्रति किलोमीटर) लगभग पांच गैलन ईंधन जलता है। 

अगर बोइंग 747 एक किलोमीटर में 12 लीटर ईंधन खर्च करता है, तो इसका मतलब है कि यह विमान 500 यात्रियों को 12 लीटर ईंधन में लगभग एक किलोमीटर का सफर कराता है। इसके मुताबिक ये विमान एक किलोमीटर में प्रति व्यक्ति पर सिर्फ 0.024 लीटर ईंधन ही खर्च करता है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, बोइंग 747 जैसा विमान एक लीटर में कितना चलता है तो इसका जवाब होगा 0.8 किलोमीटर, जो सुनने में बहुत कम लगता है। यह विमान 12 घंटों के सफर के दौरान 172,800 लीटर का ईंधन खर्च करता है।