लौकी बहुत ही सस्ती और पोषक तत्वों से परिपूर्ण सब्जी होती है। लौकी खाने से कई बीमारियों में बहुत ही ज्यादा लाभ मिलता है। 100 ग्राम लौकी में ऊर्जा 15.06 कैलोरी, प्रोटीन 600 मिलीग्राम, पोटेशियम: 170 मिलीग्राम और आयरन, 250 एमसीजी पाया जाता है। इसके अलाबा लौकी में और बहुत से पोषक तत्व पाए जाते हैं। आज मैं आपको ३ ऐसी बीमारियों के बारे में बताने जा रहा हूँ, जिनके लिए लौकी का सेवन बहुत ही फायदेमंद माना जाता है।
1.कोलेस्ट्रॉल लौकी का सेवान कोलेस्ट्रॉल के रोगियों के लिए बहुत ही उपयोगी माना जाता है। लौकी के नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल का लेवन सामान्य रहता है। इसके अलाबा लौकी दिल की बीमारियों में भी बहुत लाभकारी होती है।
2.पाचन क्रिया को मजबूत बनाती है लौकी पेट के रोगों में बहुत लाभदायक होती है। लौकी के जूस का सेवन करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और कब्ज जैसी समस्या भी खत्म हो जाती है।
3.वजन कम करने में मददगार लौकी का सेवन वजन कम करने में बहुत ही कारगर माना जाता है। अगर लौकी का नियमित जूस पीया जाय तो काफी हद तक मोटापा कम हो जाता है। लौकी को उबाल कर भी सेवन किया जा सकता है।
जून और जुलाई के महीने में भीषण गर्मी के साथ-साथ बारिश होने से नमी भी होगी. ऐसे में इन्हीं दो महीनों में सांपों के निकलने की सबसे ज्यादा घटनाएं होती हैं. सांप और अन्य जानवरों को पकड़ने का काम करने वाले एनजीओ वाइल्डलाइफ एसओएस के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में जून के पहले दस दिनों में ही दिल्ली में 15 सांप पकड़े गए हैं. जबकि यह संख्या जून के आखिरी दिनों तक लगातार बढ़ती जाएगी.
वाइल्डलाइफ एसओएस का कहना है कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती जाएगी, सांप ठंडी जगहों में शरण लेने के लिए घरों के अंदर घुसेंगे. ऐसे में घरों में सांप निकलने की घटनाएं रोजाना बढ़ती जाएंगी. जहां मई के महीने में यह संख्या 25 थी, जून में यह बढ़कर दोगुनी से भी ज्यादा हो जाएगी.
दो महीनों में निकलते हैं 40 फीसदी सांप एसओएस का कहना है कि जितनी कॉल्स पूरे साल भर में आती हैं, उसकी 40 फीसदी कॉल सिर्फ जून और जुलाई के महीने में आती हैं. एनजीओ को पूरे साल में करीब 300-350 कॉल आती हैं. जिनमें से करीब 100 कॉल जून में होती हैं. लिहाजा ये दो महीने सांपों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं. फिलहाल में एक से दो कॉल्स की संख्या बढ़कर रोजाना आधा दर्जन भी हो सकती है.
सांप निकले तो करें 9871963535 पर करें कॉल वाइल्डलाइफ एसओएस का कहना है कि अगर किसी को इलाके में सांप या अन्य कोई जहरीला जानवर दिखाई दे तो जिस कमरे या घर में सांप है, उस जगह को खाली करके उसका दरवाजा बंद कर दें. सांप को छेड़ें नहीं. इसके बाद तुरंत 9871963535 पर कॉल करें. यह वाइल्डलाइफ एसओएस का 24 घंटे खुला रहने वाला हेल्पलाइन का नंबर है. जिस पर कॉल जाते ही विशेषज्ञ तत्काल उस जगह के लिए रवाना होते हैं और जानवरों को पकड़ते हैं.
दिल्ली में पकड़ी गई हैं 36 प्रजातियां
एनजीओ का कहना है कि दिल्ली में अभी तक सांपों की कुल 36 प्रजातियां पकड़ी गई हैं. इनमें से कुछ काफी जहरीली हैं. जबकि कुछ सामान्य हैं. एसओएस के प्रवक्ता का कहना है कि लोग सांपों या जानवरों को देखते ही मारने के लिए दौड़ते हैं. जिसे रोकने के लिए वे सांपों को पकड़ते हैं और उन्हें सही सलामत जंगलों में छोड़ते हैं.
करीब 150 साल पहले रुद्रप्रयाग जिले के केदारनाथ इलाके में आर्कियोलॉजिस्ट की एक टीम गई थी, उसने एक तस्वीर खींची। ये संभवतः केदारनाथ मंदिर की सबसे पुरानी तस्वीर है। ऐसे दुर्गम पहाड़ों के बीच ऐसा भव्य मंदिर देखकर वो लोग हैरान रह गए।
150 साल पुरानी एक और तस्वीर साफ करती है कि केदारनाथ मंदिर के दक्षिणी हिस्से को लगभग छूकर बहता था मंदाकिनी नदी का पानी।
50 साल पहले की ही एक और तस्वीर साफ दिखाती है कि उस वक्त तक भी मंदिर के आसपास इंसान का कब्जा नहीं था। यहां पुजारियों के अलावा इक्का-दुक्का लोग ही दिखते थे। लोग दर्शन कर लौट जाते थे।
150 साल पुरानी ही एक और तस्वीर से साफ होता है कि उस वक्त मंदिर तक पहुंचने का रास्ता तक नहीं था। वहां आने वालों को बर्फ के बीच से होकर गुजरना पड़ता था। वहीं 50 साल पुरानी तस्वीर में नजर आती है मंदिर तक जाने की राह, पतली पगडंडी जिसपर खच्चरों के जरिए यात्री ऊपर तक पहुंचते थे।
यहां तक कि 40 साल पुरानी तस्वीर में भी मंदिर से सटे निर्माण नजर नहीं आते सिर्फ मंदिर के आसपास पुजारियों और पंडों के रुकने का इंतजाम था बाकी जो दर्शन के लिए आता था उसी रोज वापस लौट जाता था।
पुराने दौर में लोग केदारनाथ मंदिर के दर्शन करने बर्फ से ढके पहाड़ों से होकर गुजरते थे।
केदारनाथ धाम के मुख्य पुरोहित वागीशलिंग स्वामी कहते हैं कि केदारनाथ में इतने सारे लोग आते हैं लेकिन ज्यादातर आस्था और भक्ति के चलते नहीं बल्कि मौज-मस्ती के लिए आते हैं। शिव तो बैरागी हैं उन्हें सांसारिक सुख के साधनों और इच्छाओं से कोई लेनादेना नहीं है लेकिन उनके नाम पर यहां आने वाले तो उल्टी राह अपनाते हैं।
लेकिन धीरे-धीरे यहां इंसानी कब्जा बढ़ता गया-कुछ वैध तो ज्यादातर अवैध। वहां लाखों यात्री आते गए। सैलानियों का रेला जैसे-जैसे बढ़ा सुविधाओं के नए पहाड़ धाम में खड़े किए जाने लगे। धर्मशालाएं बनीं, होटल बने और पूरे इलाके का नक्शा ही बदल गया।
केदारनाथ मंदिर पत्थर के एक मजबूत चबूतरे पर खड़ा हुआ साफ नजर आता है जबकि हादसे से कुछ वक्त पहले तक इस मंदिर के आसपास की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी थी। मंदिर से सटकर दुकानें खुल चुकी थीं। उन दुकानों में रातदिन प्रसाद, पूजा सामग्री और खाने पीने का सामान बिक रहा था, कमाई की जा रही थी। किसी ने नहीं सोचा कि ये मंदिर सदियों पुराना है, इसे बनाने वालों ने खास विधि से इसे तैयार किया ताकि ये बर्फ और पानी दोनों झेल ले लेकिन उसके आसपास व्यापार की चाहत में खड़ी दुकानों को आखिर कौन बचाएगा।
और फिर 16 जून 2013 को प्रलय का वो दिन आया जब कुदरत ने रौद्र रूप दिखाते हुए अपना गुस्सा जाहिर किया। इस प्रलय के बाद केदारनाथ की तस्वीर ही बदल गई। सिवाय मंदिर के कुछ भी सलामत नहीं रहा।
केदारनाथ त्रासदी को आज एक साल पूरा हो गया है। केदारनाथ का आसमान धुला हुआ चटख नीला है, लेकिन एक साल आसमान मटमैला या घूसर नजर आ रहा था। जैसे नीचे जमीन का अक्स आसमान पर पड़ रहा हो। जमीन पर चारों तरफ मटमैला रंग था, स्लेटी रंग की चट्टानें थी मिट्टी और मौत। एक हजार साल पुराना ये मंदिर न जाने कितने बदलाव देख चुका है। मंदिर की 150 साल पुरानी तस्वीरें बताती हैं कि किस तरह इंसान ने कुदरत को मुंह चिढ़ाया, कैसे भक्ति के नाम पर, आस्था के नाम पर केदारनाथ में लालच की गंगा बहा दी, ऐसी अति की कि विनाश हो गया।
आपने अबतक इंसानों को ही कोर्ट में पेश होत देखा होगा, लेकिन आज हम आपके एक ऐसी घटना के बारे में बताने जा रहे हैं. जिसमें एक गाय को कोर्ट में पेश किया गया. दरअसल, राजस्थान के जोधपुर में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसमें एक गाय को अदालत में पेश किया गया. उसके बाद ही जज साहब ने फैसला सुनाया. इस पूरे मामले को जानकर यकीनन आप भी दंग रह जाएंगे.
ये मामला शिक्षक श्याम सिंह और कांस्टेबल ओमप्रकाश के बीच का है. दोनों में गाय के मालिकाना हक को लेकर पिछले साल अगस्त महीने से विवाद चल रहा था. इस मामले को लेकर मंडोर थाने में केस दर्ज किया गया. हालांकि थाना प्रभारी ने अपने स्तर पर इस मामले को सुलझाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वह नाकाम रहे और उसके बाद केस कोर्ट तक पहुंच गया.
इससे पहले थाना अधिकारी ने इस केस को निपटाने की खूब कोशिश की. इसके लिए एक दिन थाना अधिकारी गाय को बीच में खड़ा कर लिया. उसके बाद टीचर श्याम सिंह और कांस्टेबल ओम प्रकाश को गाय के दोनों ओर खड़ा कर लिया. उसके बाद दोनों से गाय को आवाज देने को कहा गया. लेकिन गाय ने दोनों की बातें नहीं सुनीं.
उसके बाद एक पक्ष ने यह दावा किया था कि गाय जब दूध देती है तो वो अपना दूध खुद पीती है. इसके बाद गाय को मंडोर गौशाला में रखा गया. साथ ही वहां पर सीसीटीवी कैमरा भी लगाया गया था, ताकि जब गाय दूध देने लगे तो यह देखा जा सके कि गाय अपना दूध खुद पीती है या नहीं? लेकिन इस तरीके से भी गाय का फैसला नही हो पाया.
उसके बाद ये मामला, इसी साल अप्रैल में कोर्ट में पहुंच गया. गाय को कोर्ट में पेश होने को बुलाया गया. लेकिन जज साहब को खुद ही कोर्ट रूम से बाहर आना पड़ा. उन्होंने गाड़ी में खड़ी गाय के आसपास दोनों दावेदारों को खड़ा किया. फिर जज ने बारी-बारी से दोनों को गाय को पकड़कर सहलाने और घुमाने को कहा.
इस दौरान जज साहब ने इस पूरी प्रक्रिया को बड़े ही ध्यान से देखा. फिर दोनों पक्षों के बयान दर्ज कराए गए. इस केस से जुड़े वकील के मुताबिक, इस मामले में गाय का भौतिक सत्यापन भी किया गया था. उसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया. जज साहब ने शनिवार को अपना फैसला सुनाते गाय को कांस्टेबल ओमप्रकाश के सुपुर्द कर दिया और गाय का मालिकाना हक उसी को दे दिया.
देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अपने ग्राहकों को बैंकिंग धोखाधड़ी से बचाने के उपाय बताए हैं. बता दें कि पिछले 11 सालों में SBI में 23,734.74 करोड़ रुपये के 6,793 धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं. RBI आंकड़ों के अनुसार, बैंकों में 50 हजार से ज्यादा धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें 2.05 लाख करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई है. देश में लगातार बढ़ रही बैंक धोखाधड़ी से ग्राहकों को बचाने के लिए SBI ने सावधानी बरतने के लिए कहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि फ्रॉड सिर्फ ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से ही नहीं, बल्कि एटीएम के जरिए भी हो रहे हैं.
फॉलो करें ये टिप्स-
>> अपने डिवाइस में रेगुलर एंटीवायरस स्कैन चलाते रहें. ब्राउजर के एड्रेस बार में यूआरएल (URL) टाइप करें. पब्लिक डिवाइस, ओपन नेटवर्क और फ्री वाई-फाई का इस्तेमाल न करें. इनका इस्तेमाल करने पर आपकी निजी जानकारी लीक होने का खतरा रहता है और आपका बैंक खाता खाली हो सकता है.
>> इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड हमेशा बदलते रहें. अपने बैंक खाते और नेट बैंकिंग की जानकारी फोन में सेव करके नहीं रखनी चाहिए. हमेशा लॉगिन डेट और टाइम चेक करते रहें.
>> अगर आप अपने फोन में बैंक खाता नंबर, पासवर्ड, एटीएम कार्ड या कोई अन्य जानकारी की तस्वीर रखते हैं तो आपकी जानकारी आसानी से लीक हो सकती है.
>> धोखाधड़ी से बचने के लिए आप किसी फिशिंग ईमेल पर कभी क्लिक न करें और ऑनलाइन भुगतान में हमेशा वन टाइम पासवर्ड (OTP) का विकल्प ही चुनें. इससे धोखाधड़ी की संभावना कम हो सकती है.
> अपने नेट बैंकिंग का पासवर्ड, ओटीपी, पिन, कार्ड वेरिफिकेशन कोड (CVV) और यूपीआई पिन को किसी के साथ साझा ना करें. अगर आप अपना पासवर्ड भूल जाते हैं तो उसकी रिकवरी स्मार्ट तरीके से करें.
पश्चिम बंगाल में डॉक्टर्स पर हुए हमले का विरोध तेज होते जा रहा है। पहले देश भर के मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर्स ने शुक्रवार को ओपीडी का बहिष्कार किया। अब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आएमए) के बैनर तले देश भर के निजी अस्पताल 17 जून को 24 घंटे के लिए बंद रहेंगे। सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं, कैजुअल्टी सेवाएं चलेंगी।
छत्तीसगढ़ आइएमए के अध्यक्ष डॉ. हेमंत चटर्जी ने कहा कि केंद्रीय स्तर पर कानून बनाने की मांग पर अगर केंद्र सरकार आश्वासन देती है तो आगे कोई फैसला लिया जाएगा। अन्यथा 17 की सुबह छह बजे से 18 की सुबह छह बजे तक हड़ताल रहेगी। इस दौरान निजी अस्पतालों की ओपीडी तो बंद रहेंगी। साथ ही पैथोलॉजी लैब और आइएमए के सभी सदस्य एसोसिएशन विरोध में क्लिनिक, अस्पताल, लैब बंद रखेंगे। बता दें कि इस आंदोलन का प्रदेश में भारी असर पड़ेगा। प्रदेश में 500 से अधिक निजी अस्पताल, क्लिनिक और पैथोलॉजी लैब हैं।
लोकसभा में करारी हार के बाद कांग्रेस गावों में खुद को और मजबूत करने में जुट रही है। हर गांव मे पार्टी को मजबूत करने के लिए युवाओं को जोड़ने का मिशन तैयार किया गया है। संगठन ने ग्रामीण युवाओं को पार्टी से जोड़ने की जिम्मेदारी युवा कांग्रेस को दी है। युवा कांग्रेस पहली बार गांव अध्यक्ष के पदों पर नियुक्ति करेगी। गांव अध्यक्ष अपनी कमिटी बनाएंगे, ऐसा करके हर गांव में युवाओं की फौज खड़ी करने की कवायद चल रही है।
लोकसभा में नौ सीटों पर हार की समीक्षा करने पर यह बात निकलकर आई कि युवाओं के एकतरफा वोट भाजपा को गए हैं। शहरी इलाको की तुलना में ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस का युवा वोट का प्रतिशत फिर भी ठीक था। इस कारण पार्टी ने तय किया है कि ग्रामीण इलाक़ों के युवाओं को ज्यादा फोकस किया जाए। इस पर पीसीसी ने युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पूर्णचन्द्र पाढ़ी से मिशन ग्रामीण युवा पर बात की है। उसके बाद पाढ़ी और युवा कांग्रेस के प्रदेश पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षो से गांव के दौरे पर चर्चा शुरू हो गई है।
ब्लॉक स्तर पर होगी बैठकें
युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अशरफ हुसैन ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष से लेकर दूसरे प्रदेश पदधिकारी गावों का 20 जून के बाद से दौरा शुरू करेंगे। ब्लॉक स्तर पर बैठकों का दौर चलेगा। संगठन के एक ब्लॉक में कई गांव आते हैं, इसलिए ब्लॉक की बैठक में ही गांव अध्यक्ष के नाम तय किये जाएंगे।
पहली बार बनाए जाएंगे गांव अध्यक्ष
युवा कांग्रेस में अभी तक प्रदेश अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, लोकसभा अध्यक्ष होते थे। गांव अध्यक्ष पहली बार बनाए जाएंगे।
पंचायत चुनाव की तैयारी भी चल रही
इस वर्ष के अंत मे नगरीय निकाय चुनाव होना है, उसकी तैयारी तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पहले ही शुरू कर दी है। जिलेवार बैठक का एक दौर हो चुका है। पार्टी नगरीय निकाय के साथ अगले साल होने वाले पंचायत चुनाव की तैयारी में भी लग गई है। युवा कांग्रेस के गांव अध्यक्षों की नियुक्ति पंचायत चुनाव की तैयारी का हिस्सा रहेगी।
उज्जैन। जिले के पुलिस मुखिया ने बिग बॉस में जाने से एक बार फिर इंकार कर दिया है। रियलिटी शो बिग बॉस में शामिल होने के लिए इस बार भी एसपी सचिन अतुलकर को ऑफर दिया गया था। मगर शासकीय सेवा व व्यवस्तता का हवाला देकर एसपी ने इंकार कर दिया।
एसपी सचिन अतुलकर की फिटनेस के चर्चे देशभर में हैं। सोशल मीडिया पर एसपी के लाखों फैन हैं। इसके चलते बिग बॉस में शामिल होने के लिए ऑफर आ रहे हैं।
लगातार दूसरे साल बिग बॉस की और से एसपी अतुलकर को ऑफर दिया गया था। मगर शासकीय सेवा और व्यस्तता के चलते एसपी ने इंकार कर दिया। बता दें कि एसपी अतुलकर रोजाना जिम में घंटों कसरत करते हैं। सोशल मीडिया फेसबुक व इंस्टाग्राम पर एसपी को लाखों फॉलोअर्स हैं। इसके अलावा एसपी को गुगल व यू ट्यूब पर भी सर्च किया जाता है।
एस-400 मिसाइल रक्षा सिस्टम एयर डिफेंस सिस्टम के तौर पर समझा जाता है. इस तकनीक और एस-400 मिसाइलों के लिए भारत ने रूस के साथ बड़ा रक्षा समझौता किया है और अमेरिका कुछ समय से इस समझौते को लेकर बीच में टांग अड़ाता दिख रहा है. इसके बावजूद भारत का रुख साफ है कि वह रूस के साथ इस रक्षा समझौते से कोई समझौता करने के मूड में नहीं है. आइए जानें कि क्या है ये एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम और कौन कौन से देश इस सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं?
एस-400 सिस्टम के विकास की शुरूआत रूस ने 1980 के दशक में कर दी थी. 12 फरवरी 1999 को अस्त्राक्हान में इस सिस्टम का सफल परीक्षण और उसके बाद 2001 में रूसी सेना में इस सिस्टम को तैनात कर दिया गया. इसके बाद इस सिस्टम को लेकर कुछ आपत्तियां उठीं और नए सिरे से परीक्षणों का दौर शुरू हुआ. फिर 2007 में इस सिस्टम को मंज़ूरी मिल गई. इसके बाद से ही एशिया और दूसरे महाद्वीपों के कुछ देशों ने इस सिस्टम के प्रति रुझान दिखाना शुरू किया.
एस-400 सिस्टम इसलिए है खास * 150 किमी की छल विरोधी रेंज है यानी रडार से बचने की चाल को नाकाम कर सकता है. * 0.4 वर्गमीटर के क्रॉस सेक्शन वाले रडार (आरसीएस) और 4800 मीटर/सेकंड की चाल वाले बैलेस्टिक निशाने के लिए इसकी रेंज 230 किमी तक है. * 4 वर्गमीटर के आरसीएस वाले निशाने के लिए यह 390 किमी तक की रेंज में कारगर है. * वर्तमान में उपलब्ध सबसे बेहतरीन मिसाइल डिफेंस सिस्टमों में से एक है ये सिस्टम. * इस सिस्टम को क्रूज़ मिसाइल और शॉर्ट रेंज की बैलेस्टिक मिसाइलों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है. * 40N6 किसी निशाने को 400 किमी तक की रेंज में मार सकता है. * एस-400 सिस्टम 600 किमी की दूरी तक भी एयरक्राफ्ट को ट्रैक कर सकता है.
किन देशों की सेना में है ये सिस्टम? ज़ाहिर तौर पर रूस की सेना में इस सिस्टम की सबसे बड़ी तैनाती है. भारत के साथ रूस ने 5.43 बिलियन डॉलर का सौदा किया है, जिसके तहत भारतीय वायुसेना को 2020 तक एस-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम की पांच रेजिमेंट्स मिलेंगी. रूस के पास 19 रेजिमेंट्स के अंतर्गत 39 बटालियन हैं.
रूस यह सिस्टम चीन को पहले ही बेच चुका है. 2014 में चीन के साथ इस सिस्टम के लिए समझौता हुआ था और 2018 से ही चीन को यह सिस्टम मिलना शुरू हो गया था. चीन इस सिस्टम का सफल परीक्षण भी कर चुका है. 2014 में ही अल्जीरिया को सिस्टम रूस ने बेचा था.
एस-400 सिस्टम का पहला खरीदार बेलारूस था. 2007 में ही बेलारूस ने ये सिस्टम मांगे थे और रूस ने 2016 में दो सिस्टम सौंपे थे. इनके अलावा, तुर्की भी इस सिस्टम का खरीदार है. रूस के साथ हो चुके समझौते के बाद इस साल जुलाई में तुर्की को रूस ये सिस्टम सौंप सकता है. वहीं, सउदी अरब भी रूस के साथ इस सिस्टम के लिए 3 बिलियन डॉलर से ज़्यादा का समझौता कर चुका है. सीरिया में भी इस सिस्टम की तैनाती की खबर है.
ये देश भी दिखा चुके हैं रुझान ईरान और अमेरिका के बीच बने हुए तनाव से पहले ही रूस ने अपने इस सिस्टम को बेचने पर रुख साफ करते हुए कहा था कि वह किसी भी देश को यह एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम बेचने को तैयार है, चाहे वह यूएसए ही क्यों न हो. रूस की इस घोषणा के बाद से कई देशों ने इस सिस्टम की खरीदी को लेकर रुझान ज़ाहिर किया है. इन देशों में दक्षिण कोरिया, इराक, मिस्र और कतर के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं.
वास्तव में, अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के चलते इस सिस्टम को लेकर हो रहे समझौते महत्वपूर्ण हैं क्योंकि रक्षा के नज़रिए से यह सिस्टम किसी भी देश के लिए बड़ी उपलब्धि है. ऐसे ही कारणों से अमेरिका अपने दबदबे का इस्तेमाल करते हुए कुछ डील्स को प्रभावित करने या अपनी शर्तें थोपने का दबाव बनाने की रणनीति भी बना रहा है.
अब आप अगली बार जब एटीएम (ATM) पैसा निकालने जाएंगे तो वहां नो कैश का बोर्ड नहीं देखने को मिलेगा. क्योंकि रिजर्व बैंक (RBI) ने एटीएम (ATM) में कैश की किल्लत को देखते हुए बैंकों को कड़े निर्देश जारी किए हैं. RBI का कहना है कि अगर अब किसी एटीएम में 3 घंटे से ज्यादा कैश नहीं रहेगा तो बैंक पर जुर्माना लगाया जाएगा. वहीं ATM की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए भी RBI ने कदम उठाए हैं. RBI ने सभी बैंकों से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके ATM दीवार या जमीन से लगे हुए हों. इसे सितंबर 2019 के अंत तक हर हाल में सभी बैंकों को पूरा करना है. हालांकि आरबीआई के मुताबिक इस नियम से अत्यधिक सुरक्षा वाले क्षेत्रों से छूट मिलेगी.
ATM में लगा सेंसर बता देता है कितना कैश है बाकी
बैंकों के पास ATM में कितना कैश है उसकी जानकारी के लिए पूरा सिस्टम है. दरअसल, ATM में जो सेंसर लगा होता है उसके जरिए बैंकों को रियल टाइम बेसिस पर ATM में कितना कैश बचा है, कब तक खाली होने जा रहा है और कितनी रकम डालनी है, इसकी पूरी जानकारी रहती है. RBI यह चाहता है कि जब बैंकों को ATM में कैश के बारे में सारी जानकारी पता है, तो बैंक ATM में कैश ना डालने को लेकर बहानेबाजी क्यों कर रहे हैं.
नकदी डालने के लिए ओटीसी लॉक सुरक्षा उपायों के तहत तय किया गया है कि नकदी डालने के लिए ATM का परिचालन सिर्फ डिजिटल वन टाइम कम्बिनेशन (OTC) लॉक के जरिये किया जाएगा. इसके अलावा 30 सितंबर, 2019 तक सभी ATM किसी ढांचे मसलन दीवार, जमीन या खंभे से जुड़े होने चाहिए. सिर्फ उच्च सुरक्षा वाले परिसरों में इसकी जरूरत नहीं होगी.
कुछ दिनों पहले NEFT और RTGS चार्जेज हटा दिया था राहत
कुछ दिनों पहले रिजर्व बैंक ने डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए RTGS और NEFT के जरिए फंड ट्रांसफर पर से चार्ज हटा दिया. RBI ने बेंकों से भी कहा कि वे इसका फायदा तुरंत अपने कस्टमर्स को दें. माना जा रहा है कि अब बैंक भी अपने ग्राहकों के लिए RTGS और NEFT के जरिए फंड ट्रांसफर पर चार्ज हटा या कम कर सकते हैं. इसके अलावा आरबीआई ने एटीएम के प्रयोग पर बैंकों द्वारा लिए जा रहे शुल्क का रिव्यू करने के लिए एक समिति का गठन भी किया है. समिति को अपनी पहली बैठक के दो महीने के भीतर रिपोर्ट सबमिट करनी है.