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बड़ा फैसला : सोनिया गांधी चुनी गई कांग्रेस संसदीय दल की नेता

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद पीएम मोदी सहित 58 सांसदों ने मंत्री की शपथ ले ली है। वहीं सोनिया गांधी कांग्रेस संसदीय दल की नेता निर्वाचित हो गई है। आपको बता दें कि कांग्रेस के नवनिर्वाचित सांसदों की बैठक संसद के सेंट्रल हॉल में हुई। इस बैठक में कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुना जाना मुख्य एजेंडे में शामिल था। खबर आ रही है कि अगर कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने का फैसला राहुल गांधी नहीं बदलते हैं तो उन्हें लोकसभा में पार्टी का नेता चुनने के लिए मनाया जा सकता है। बैठक शुरू हुई तो कुछ ही मिनटों के अंदर सोनिया गांधी को फिर से संसदीय दल का नेता चुन लिया गया।

रहने के लिए झोपड़ी नहीं, साइकिल का करते हैं सवार, बने मोदी सरकार में मंत्री, पढ़ें पूरी खबर

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नई दिल्ली। 23 मई से पहले प्रताप सारंगी को ओडिशा के बाहर शायद ही कोई जानता था। लेकिन पिछले एक हफ्ते में वे देश के सबसे अधिक चर्चित चेहरों में रहे। वेशभूषा से राजनेता कम और साधु ज्यादा लगने वाले बालासोर से इस नवनिर्वाचित सांसद ने गुरुवार की शाम जब राष्ट्रपति भवन के अहाते में राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली, तब तालियों की गड़गड़ाहट से ही पता चल रहा था कि वे खासे लोकप्रिय हैं। 64 वर्षीय सारंगी की जिंदगी की झलक दिखाने वाली उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। गमछा पहने अपने घर के बाहर नल के पास नहाते हुए या फिर साइकिल पर या आॅटो रिक्शा पर चुनाव प्रचार करते हुए, मंदिर के बाहर पूजा करते हुए उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं।

सारंगी ने ओडिशा में बजरंग दल के अध्यक्ष के तौर पर भी काम किया है और उससे पहले वह राज्य में विश्व हिंदू परिषद के एक वरिष्ठ सदस्य भी रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लंबे समय से जुड़े रहे सारंगी जमीन से जुड़े कार्यकर्ता रहे हैं। सारंगी के खिलाफ दंगा, धार्मिक उन्माद भड़काने जैसे कई मामले दर्ज हैं, हालांकि उन्हें किसी भी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है। रात के ठीक आठ बजकर 55 मिनट पर दिल्ली में सारंगी शपथ ले रहे थे और बालासोर के भाजपा कार्यालय में जश्न मनाया जा रहा था। ढोल, नगाड़े बज रहे थे और मिठाइयां बांटी जा रही थीं।

बालासोर से ही चुने गए भाजपा विधायक मदन मोहन दत्त कहते हैं, हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार प्रकट करते हैं कि उन्होंने प्रताप नना (ज्यादातर लोग उन्हें इसी नाम से पुकारते हैं) जैसे कार्यकर्ता को अपने मंत्रिमंडल में स्थान दिया। वह केवल भाजपा के कार्यकर्ता ही नहीं थे, पूरा बालासोर आज जश्न मना रहा है। केवल बालासोर ही नहीं, बल्कि पूरा ओडिशा गुरुवार को जश्न मना रहा था। सोशल मीडिया में भी उनकी शपथ ग्रहण की तस्वीर छाई रही। नीलगिरी क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके सारंगी आज भी अपने गांव गोपीनाथपुर में एक कच्चे मकान में रहते हैं। गांव में ही नहीं भुवनेश्वर में भी उनकी मां उनके साथ रहती थीं। लेकिन पिछले साल उनके देहांत के बाद अब वे बिलकुल अकेले पड़ गए हैं।

हमेशा सफेद कुर्ता-पायजामा, हवाई चप्पल और कंधों पर कपड़े के झोले में नजर आने वाले इस अनोखे राजनेता को भुवनेश्वर के लोग आए दिन सड़क पर पैदल जाते हुए, रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करते हुए या सड़क किनारे किसी झोपड़ी होटल में खाना खाते हुए देखते हैं। 2004 से 2014 तक जब वे विधायक थे, तब भी उनकी जीवन शैली यही थी और आज भी वही है। भुवनेश्वर के एमएलए कॉलोनी में रहने वाले लोग जो उनके घर आते-जाते थे, वे यह देखकर हैरान होते थे कि वहां एक चटाई, कुछ किताबें और एक पुराने टीवी के अलावा कुछ नहीं था।

इस बार सारंगी के लिए चुनाव जीतना कतई आसान नहीं था। चुनाव मैदान में उनकी टक्कर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष निरंजन पटनायक के बेटे नवज्योति पटनायक से थी, तो दूसरी तरफ थे पिछली बार उन्हें एक लाख 42 हजार वोटों से हराने वाले बीजेडी के रवींद्र जेना। ये दोनों उम्मीदवार खासे अमीर थे। दोनों के प्रचार के लिए दर्जनों एसयूवी लगी हुई थी। इन दोनों उम्मीदवारों के सामने एक खटारा ऑटो रिक्शा की छत हटा कर उस पर खड़े होकर प्रचार करने वाले ‘प्रताप नना’ भारी पड़े हालांकि सारंगी सिर्फ 12 हजार वोटों के मामूली अंतर से जीत पाए।

उनकी जीत की खबर सुनकर भुवनेश्वर निवासी विवेक पाटजोशी ने कहा, “प्रताप नना की जीत से भारतीय गणतंत्र पर लोगों का डगमगाता हुआ भरोसा वापस आएगा। उन्हें विश्वास होगा कि भले लोगों के लिए राजनीति में अब भी कुछ जगह बची हुई है।
संघ और हिंदुत्व प्रताप सारंगी की राजनीति और उनके विचारों से असहमत लोगों की भी कमी नहीं है। सारंगी के आठ अप्रैल 2019 के शपथपत्र के अनुसार उनके खिलाफ सात आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा होना और दंगा, धार्मिक भावनाएं भड़काने आदि के मामले शामिल हैं। हालांकि शपथपत्र के मुताबिक उन्हें किसी भी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है।

जनवरी, 1999 में क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में आॅस्ट्रेलियाई डॉक्टर और समाजसेवी ग्राहम स्टेंस और उनके दो छोटे बच्चों की निर्मम हत्या के बाद जब संवाददाता ने उसी गांव में उनसे पहली बार मुलाकात की, तब वे बजरंग दल के राज्य प्रमुख थे। ग्राहम स्टेंस और उनके छोटे बच्चों की जिंदा जलाकर मार डालने के मामले में बजरंग दल के ही दारा सिंह को दोषी पाया गया था। सारंगी हिंदुओं के कथित जबरन धर्मांतरण के खिलाफ खुलकर अभियान चलाते रहे हैं। इस मुलाकात के समय दारा सिंह की गिरफ्तारी नहीं हुई थी, सारंगी हत्या की निंदा तो कर रहे थे लेकिन उनका जोर धर्मांतरण रोकने पर अधिक था।

आरएसएस और बजरंग दल से जुड़े होने के कारण जाहिर है कि उनके राजनीतिक विचार किसी से छिपे नहीं हैं, वे संघ की प्रचारक परंपरा से आते हैं और इसीलिए अविवाहित हैं। कुछ लोगों ने उन्हें ‘ओडिशा का मोदी’ का खिताब भी दे डाला है क्योंकि मोदी की तरह वे भी घर-बार छोड़कर निकल पड़े थे और संघ से जुड़े रहे हैं, हालांकि मंत्री बनने के बाद उनकी जीवनशैली मौजूदा दौर के मोदी जैसी होगी या नहीं, यह देखना बाकी है। आरके मिशन कोलकाता में कुछ समय बिताने के बाद वे वापस ओडिशा लौट आए, उहोंने कुछ दिन के लिए नीलगिरी कालेज में क्लर्क की नौकरी की। लेकिन नौकरी उन्हें रास नहीं आई।

तब तक आरएसएस की विचारधारा उनके दिलो दिमाग में बस गई थी। शीघ्र ही वे संघ की सहयोगी संगठनों के जरिए सामाजिक कार्यों में जुट गए। बालासोर और पड़ोसी मयूरभंज जिलों के आदिवासी इलाकों में कई स्कूल खोलेऔर कई गरीब, होनहार बच्चों की पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता दी। केंद्र में मंत्री बनने के बाद सारंगी की सेवा का दायरा जरूर बढ़ गया है लेकिन उन्हें करीब से जानने वाले लोगों को पूरा विश्वास है कि वे जैसे काम करते रहे हैं, वैसे ही करते रहेंगे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहुंचे अपनी मां बिंदेश्वरी देवी का हाल चाल जानने अस्पताल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की माता बिंदेश्वरी बघेल की तबियत दो दिनों से खराब चल रही है जिसके वे स्वास्थ्य लाभ लेने राजधानी रायपुर के निजी चिकित्सालय में भर्ती हैं। जहां उनके स्वास्थ्य का हालचाल जानने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहुंचे। डॉक्टरों ने सीएम बघेल को बताया कि तेजी के साथ स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।

आज खुलेंगे हेमकुंड साहिब के कपाट, दर्शन के लिए पहला जत्‍था रवाना

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हिमालय की पहाड़ियों में मौजूद प्रमुख तीर्थस्‍थल हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकालीन अवकाश के बाद आज से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे. प्रबंधन ट्रस्ट से मिली जानकारी के अनुसार 8 हजार श्रद्धालुओं का पहला जत्‍था गढ़वाल जिले के गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के लिए शुक्रवार को रवाना हो गया है. गोविंदघाट की दूरी हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे से करीब 21 किमी की है. हेमकुंड साहिब समुद्र तल से 15 हजार फीट की ऊंचाई पर एक झील किनारे स्थित है. मान्यता है कि यहां पर गुरु गोविंद सिंह ने झील किनारे तपस्या की थी.

सर्दियों में नहीं आ सकते हैं हेमकुंड 

सर्दियों के मौसम में भारी बर्फबारी और ठंड के चलते यहां पर आना संभव नहीं है. ऐसे में हेमकुंड साहिब के कपाट सर्दियों में बंद कर दिए जाते हैं और फिर जून में मौसम थोड़ा सामान्य होने पर इन्हें वापस खोला जाता है. कपाट को खोलने के लिए सेना की मदद ली जाती है. हर साल सेना यहां पहुंच कर रास्ते से बर्फ हटाने के साथ ही जरूरी सुविधाएं जुटाने का काम करती है.

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पहले 23 मई को खुलने थे कपाट
पहले हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई को खुलने थे लेकिन भीषण बर्फबारी को देखते हुए इसकी तारीख को टाल कर 1 जुन कर दिया गया. इस महीने के शुरु में ही आर्मी इंजीनियरिंग कोर की टीम हेमकुंड साहिब पहुंच गई थी और बर्फ़ हटाने के काम में जुट गई थी. हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के मैनेजर दर्शन सिंह के अनुसार हेमकुंड साहिब में पानी का इंतज़ाम कर लिया गया है.

UPPSC की कार्यप्रणाली को लेकर प्रियंका गांधी ने योगी सरकार पर साधा निशाना

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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती में पेपर लीक होने के मामले को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार पर शुक्रवार को निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि युवा ठगे जा रहे हैं, लेकिन बीजेपी सरकार कमीशनखोरों के हित साधने में मस्त है.

कांग्रेस महासचिव ने ट्वीट किया, ‘यूपीपीएससी के पेपर छापने का ठेका एक डिफाल्टर को दिया गया. आयोग के कुछ अधिकारियों ने डिफाल्टर के साथ सांठ-गांठ करके पूरी परीक्षा को कमीशन-घूसखोरी की भेंट चढ़ा दिया. सरकार रकार की नाक के नीचे युवा ठगा जा रहा है, लेकिन यूपी सरकार डिफाल्टर और कमीशनखोरों का हित देखने में मस्त है.’

https://twitter.com/priyankagandhi/status/1134428568685965313

बताते चलें कि यूपीपीएससी की भर्ती परीक्षाओं में धांधली उजागर होने से नाराज अभ्यर्थियों ने शुक्रवार को प्रयागराज स्थित यूपीपीएससी प्रदर्शन भी किया. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार के कार्यकाल में हुई भर्तियों को रद्द किया जाए और उनकी जांच सीबीआई से करवाई जाए.

गौरतलब है कि एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा का पेपर आउट होने के मामले में यूपी लोक सेवा आयोग की परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार को क्राइम ब्रांच और पुलिस की संयुक्त टीम ने गुरुवार को वाराणसी से गिरफ्तार कर लिया. जिसके बाद उन्हें पुलिस अभिरक्षा में साढ़े आठ बजे विशेष न्यायधीश भ्रष्टाचार निवारण लालचंद्र के आवास पर पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जिला जेल भेज दिया गया. अंजू के करीबियों पर भी अब शिकंजा कसने की तयारी है.

WhatsApp से हट गया है ये खास फीचर, जानिए और क्या-क्या बदला

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WhatsApp पर यूज़र्स अब दूसरों की प्रोफाइल सेव नहीं कर पाएंगे. WABetaInfo की रिपोर्ट के मुताबिक ऐप स्टोर में नया बीटा अपडेट मिला है, जिसके बाद वॉट्सऐप बहुत जल्द प्रोफाइल फोटो को कॉपी, सेव या डाउनलोड करने का ऑप्शन हटा देगा. बताया गया है कि यह फीचर पहले एंड्रॉयड के अपडेट में भी देखने को मिला था. हालांकि, ग्रुप चैट्स के लिए यह रिस्ट्रिक्शंस लागू नहीं है. यूज़र्स WhatsApp ग्रुप आईकन की फोटो अभी भी आसानी से सेव कर सकते हैं.

WABetaInfo के पेज पर इस फीचर को हटाने को लेकर कई लोगों ने ये भी कहा है कि किसी भी प्रोफाइल फोटो को सेव करने के लिए स्क्रीनशॉट अब भी लिए जा सकते हैं. ऐसे में भले कोई प्रोफाइल फोटो डाउनलोड ना कर सके, लेकिन उसका स्क्रीनशॉट आसानी से ले सकता है.

Audio को लेकर हुए बदलाव
WhatsApp ने ऑडियो फॉर्मेट को लेकर भी बदलाव किए हैं. वॉट्सऐप अब तक ऑडियो भेजने और रिसीव करने के लिए opus फॉर्मेट का इस्तेमाल करता था. मगर अपडेट के बाद WhatsApp ऑडियो फाइल्स को M4A फॉर्मेट में रिसीव करेगा और भेजेगा. कहा जा रहा है कि opus फॉर्मेट सभी ऐप्स सपोर्ट नहीं करता है, इसलिए ऑडियो फॉर्मेट को लेकर ये बदलाव किया गया है.

जल्द दिखेंगे विज्ञापन
फेसबुक ने हाल ही में कंफर्म कर दिया है कि साल 2020 से WhatsApp में विज्ञापन यानी कि Ads दिखना शुरू हो जाएंगे. नीदरलैंड्स में सालाना मार्केटिंग सबमिट के दौरान फेसबुक ने बताया कि शुरुआत में विज्ञापन यूज़र्स को WhatsApp स्टोरी सेक्शन में दिखाए जाएंगे. इंस्टाग्राम में इस तरह के विज्ञापन पिछले साल से ही शुरू किए जा चुके हैं. हालांकि ये 2020 में कब से शुरू होगा इसको लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है.

आज होगी कांग्रेस संसदीय दल की मीटिंग, चुना जा सकता है नया नेता

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कांग्रेस के नवनिर्वाचित लोकसभा सांसदों की पहली बैठक शनिवार को होगी, जिसमें कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) का नेता चुने जाने की संभावना है.

सूत्रों ने बताया कि अभी सीपीपी की अध्यक्षता सोनिया गांधी कर रही हैं और पार्टी के सभी 52 लोकसभा सांसद बैठक में मौजूद रहेंगे. इस बैठक में कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य भी शामिल होंगे.

उन्होंने बताया कि सीपीपी की बैठक संसद के सेंट्रल हॉल में होगी, जिसमें संसद के आगामी सत्र के लिए रणनीति भी तय की जाएगी.

सूत्रों ने बताया कि 17वीं लोकसभा के गठन के बाद अपनी पहली बैठक में कांग्रेस सांसद निचले सदन में अपने नेता का चुनाव भी कर सकते हैं.

उन्होंने कहा कि बीते 25 मई को हुई CWC की बैठक के बाद यह पहली आधिकारिक बैठक होगी जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शिरकत करेंगे. 25 मई को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनावों में मिली हार के बाद अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी.

राहुल तभी से अपने इस्तीफे पर अड़े हुए हैं. उन्होंने पार्टी के नेताओं से कहा था कि वह कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए उनके और बहन प्रियंका के नाम के अलावा किसी अन्य नाम पर विचार कर लें. CWC पहले ही उनके इस्तीफे को खारिज कर चुकी है और सबकी सहमति से यह प्रस्ताव पारित किया गया है कि राहुल मनमुताबिक पार्टी के हर स्तर पर बदलाव कर लें.

सेना होगी हाईटेक और अपने देश में बनेंगे हथियार, राजनाथ सबसे पहले करेंगे ये 6 काम

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देश के रक्षा क्षेत्र को लंबे वक्त से राजनाथ सिंह जैसे किसी कद्दावर नेता की जरूरत थी. इसकी वजह है कि रक्षा क्षेत्र को काफी समय से कुछ आधुनिकीकरण की जरूरत है ताकि उसके कामकाज में आने वाली कमियों को दूर किया जा सके. लंबे वक्त से रुके हुए संरचनात्मक सुधारों की दिशा में भी अनुभवी राजनाथ सिंह बदलाव ला सकते हैं. ऐसा ही एक सुधार है तीनों सेवाओं के प्रमुख की नियुक्ति और तीनों के एक साथ जुड़े कमांड्स की नियुक्तियां. राजनाथ सिंह जैसे अनुभवी और मजबूत नेता के रक्षा मंत्रालय संभालने से इस क्षेत्र में इन बदलावों के तुरंत आने की संभावना मजबूत हुई है-

भारत को बड़े रक्षा आयातक के टैग से दिलाएंगे मुक्ति

देश के नए रक्षा मंत्री के तौर पर राजनाथ सिंह के सामने करने को बहुत कुछ है. इन असंख्य चुनौतियों में उनके सामने चीन और पाकिस्तान के संयुक्त खतरे से निपटने की चुनौती तो होगी ही साथ ही भारत के कमजोर डिफेंस-इंडस्ट्रियल बेस को रणनीतिक रूप से मजबूत करने की चुनौती भी होगी ताकि भारत अभी भारत अभी दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातक की अपनी छवि से मुक्ति पा सके. भारत ने रक्षा उत्पादों के क्षेत्र में खुद को मजबूत किया है और आशा है कि अगले कुछ सालों में ज्यादातर दक्षिण एशियाई और विकासशील देशों में उसके हथियारों का प्रयोग बड़े स्तर पर देखने को मिलेगा.

रक्षा क्षेत्र में मैनेजमेंट के स्तर पर लाएंगे आमूलचूल बदलाव
हालांकि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली पहली एनडीए सरकार ने रक्षा क्षेत्र में सुधारों के लिए कुछ जरूरी कदम उठाए थे लेकिन अगर एक सार्थक बदलाव रक्षा क्षेत्र में देखना है तो पूरे देश के डिफेंस मैनेजमेंट में आमूल-चूल बदलावों की जरूरत है. पिछले पांच सालों में रक्षा क्षेत्र का नेतृत्व पहले अरुण जेटली फिर मनोहर पर्रिकर और फिर निर्मला सीतारमन के हाथों में आते-जाते रहने से इस बड़े क्षेत्र में बदलाव उतने प्रभावकारी तरीके से लागू नहीं कराए जा सके.

रक्षा क्षेत्र बहुत बड़ा है और उसमें जोन को लेकर अधिकारियों की तनातनी और एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करती लॉबियां बनी हुई हैं. राजनाथ सिंह के पास इन सारी ही परिस्थितियों से निपटने के लिए अच्छा-खासा अनुभव और राजनीतिक इच्छाशक्ति है. वे आसानी से अपने सुधारों को सुरक्षा की कैबिनेट कमेटी के जरिए नीचे तक पहुंचा सकते हैं.

शानदार साथियों का मिलेगा सहयोग
रक्षा से जुड़े हुए कई प्रस्ताव वित्त मंत्रालय में रुके हुए हैं. जिनपर एक अन्य तेजतर्रार मंत्री निर्मला सीतारमन जल्द ही फैसले लेंगी ऐसी आशा है. इसकी एक वजह उन्हें 20 महीने का रक्षा मंत्रालय का अनुभव होना भी रहेगा. सिंह को रक्षा सचिव संजय मित्रा और उनके गोवा के नेता जूनियर श्रीपद वाई नायक से भी इस मामले में मदद मिलेगी.

युद्ध की स्थिति में भारत के पास होंगे पर्याप्त हथियार
उनकी पहली प्राथमिकता 15 लाख सैनिकों को हथियारों की आपूर्ति करनी होगी. ताकि किसी युद्ध की स्थिति में उनके पास ठीक-ठाक समय तक डटे रहने के लिए पर्याप्त हथियार हों. फिर उन्हें भारतीय सेना के पास रणनीतिक रूप से जरूरी पनडुब्बियों, फाइटर प्लेन, हेलिकॉप्टर, माइनस्वीपर, आकाश में सुरक्षा, पैदल दस्तों के हथियारों और रात में लड़ाई की स्थिति में काम आने वाले हथियारों की पर्याप्त स्थिति रखना होगा. निश्चित तौर पर अच्छे सहयोगियों के साथ राजनाथ सिंह के लिए यह काम ज्यादा मुश्किल नहीं होगा.

DRDO भारत को रक्षा क्षेत्र में बनाएगा आत्मनिर्भर
राजनाथ सिंह को इन सबके अलावा DRDO पर विशेष ध्यान देना होगा साथ ही रक्षा क्षेत्र में प्राइवेट कंपनियों के सहयोग को उत्पादन बढ़ाने के काम में कैसे लाया जा सकता है यह सोचना होगा. मेक इन इंडिया का इस्तेमाल फाइटर जेट, हेलिकॉप्टर और दूसरे रक्षा उपकरण बनाने में कैसे हो सकता है. साथ ही पिछले पांच सालों में इन पर जो काम हुआ, उससे क्या सीखा जा सकता है यह सोचना होगा.

DRDO अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन पहले भी कर चुका है. अगर राजनाथ सिंह DRDO में संरचनात्मक बदलाव लाने में और प्राइवेट पार्टनरशिप को मजबूत करने में सफल रहे तो DRDO भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के मामले में जरूरी योगदान दे सकता है.

रक्षा साझेदारियों पर देना होगा विशेष ध्यान
इसके अलावा रणनीतिक साझेदारियों को भारत के रक्षा सहयोगियों के साथ और मजबूत कैसे किया जाएगा यह भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र होगा. इसमें चीन और पाकिस्तान के ख़तरों के खिलाफ भारत को इजरायल जैसे मजबूत रक्षा सहयोगियों के साथ अपनी साझेदारियां मजबूत करनी होंगीं.

श्रमिकों के कल्याण के लिए संकल्पित हैं राज्य सरकार : श्रम मंत्री डॉ. शिव डहरिया

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श्रम मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया की अध्यक्षता में आज यहां जगदपुर में बस्तर संभाग के श्रम अधिकारियों की बैठक लेकर विभागीय काम-काज की समीक्षा की। डॉ. डहरिया ने बैठक में कहा कि राज्य सरकार श्रमिकों के कल्याण के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। हर हाथ को काम मिले इस दिशा में कार्ययोजना तैयार की जाए। डॉ. डहरिया ने श्रमिकों के कार्य क्षमता में वृद्धि के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण दिलाने पर भी बल दिया। उन्होंने श्रमिकों के लिए संचालित सभी कल्याणकारी योजनाओं को धरातल तक पहंुचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। योजनाओं के क्रियान्वयन गड़बड़ी और लापरवाही पाए जाने पर संबंधितों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाएगी।
    डॉ. डहरिया ने कहा कि श्रमिकों के कल्याण के लिए प्रदेश सरकार पूरी तरह संकल्पबद्ध होकर प्रयास कर रही हैं। श्रमिकों केे कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने श्रमिकों को योजनाओं से लाभान्वित करने और श्रमिकों के पंजीयन सहित अन्य आवेदनों पर तत्काल कार्यवाही करने के निर्देश दिए। डॉ. डहरिया ने श्रमिकों के हित में प्राथमिकता और पारदर्शिता से काम करने तथा विभाग द्वारा अपनाई गई ऑनलाईन प्रक्रिया का पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागीय कार्य में तेजी लाने के लिए रिक्त पदों पर भर्ती की कार्यवाही की जाए। बैठक में उप श्रमायुक्त श्री एस.एल. जांगड़े, श्रम विभाग के उप संचालक श्री एन्थोनी तिर्की सहित संभाग के सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ : कर्ज माफी से किसानों को मिली बड़ी राहत : राजनांदगांव जिले के श्री पल्टन सिन्हा अब अपने दिव्यांग पुत्र को आगे भी पढ़ा सकेगा

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सत्ता संभालते ही राज्य के 19 लाख किसानों के 11 हजार करोड़ से अधिक की कर्ज माफी का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। इससे अल्प वर्षा एवं सूखे की मार झेल रहे राजनांदगांव जिले के छुरिया विकासखंड के ग्राम दैहान निवासी श्री पल्टन सिन्हा जैसे लाखों किसानों को बड़ी राहत मिली है। 

    श्री सिन्हा के पास कुल 3 एकड़ 16 डिसमिल कृषि भूमि है। खेती-किसानी के लिए उन्होंने खरीफ वर्ष 2018-19 में सहकारी समिति लमती से 25 हजार रूपए नगद तथा खाद-बीज एवं दवाईयों के लिए 7 हजार रूपए का ऋण लिया था, लेकिन गत वर्ष की सूखे एवं अल्पवर्षा के चलते फसल बहुत कम हुई। कम पैदावार के कारण ऋण अदा कर पाना उनके लिए संभव नहीं था। श्री सिन्हा ने बताया कि जैसे ही नयी सरकार ने उनका ऋण माफ कर किया वैसे ही उसमें उसके पूरे परिवार के सदस्यों में नये उत्साह का संचार हुआ। इससे अब उनके दिव्यांग पुत्र बलवंत और छोटी पुत्री लक्ष्मी की पढ़ाई-लिखाई सुचारू रखने में कठिनाई नहीं होगी। किसी प्रकार का ऋण नहीं होने पर अब वह आगामी खरीफ फसल के लिए भी ऋण ले सकेगा और खेती-किसानी के लिए साहूकारों से ऊंचे ब्याज दर पर ऋण लेने से बच सकेगा।