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जब मोदी को टीवी पर पीएम पद की शपथ लेते देखकर भावुक हुईं उनकी मां

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गुरुवार को नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ले रहे थे. पूरे देश में लोग उन्हें देख रहे थे. दुनिया भर से आए तमाम अन्य देशों के प्रमुख भी मोदी को शपथ लेते हुए देख रहे थे. इसी बीच उनकी मां भी अहमदाबाद के अपने घर में बैठकर टीवी पर उन्हें देख रही थीं. एएनआई पर आई एक फोटो में देखकर ऐसा लग रहा है जैसे वह ताली बजाते समय थोड़ी भावुक हो उठी हैं.

बता दें कि लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद नरेंद्र मोदी ने दूसरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री पद की गुरुवार को शपथ ली. शपथ लेने से पहले मोदी राजघाट पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि पर पहुंचे. उन्होंने महात्मा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी. इसके अलावा नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर शहीदों को नमन किया.

दूसरी बार ली शपथ
पीएम मोदी ने दूसरी बार राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में शपथ ली.  2014 में मोदी को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दक्षेस देशों के प्रमुखों सहित 3500 से अधिक मेहमानों की मौजूदगी में शपथ दिलाई थी. इससे पहले 1990 में चंद्रशेखर और 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में शपथ दिलाई गई थी. पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए शीर्ष विपक्षी नेता, उद्योग जगत के दिग्गज, फिल्मी सितारे, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और बिम्सटेक सदस्य देशों के नेताओं को आमंत्रित किया गया है.

PM मोदी ने ली शपथ तो अबु धाबी में कुछ इस अंदाज में मना जश्न, video viral

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प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. नरेंद्र मोदी के एक बार फिर प्रधानमंत्री बनने का जश्न जितना भारत में मनाया गया उतना ही असर दुनिया के अन्य देशों में भी देखने को मिला. संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबु धाबी के आइकॉनिक एडनॉक ग्रुप टावर को भारत और अबु धाबी के झंडे में रंगा दिखाया गया. टावर में अबू धाबी के राजकुमार पीएम शेख मोहम्मद बिन जायद के साथ भारत के प्रधानमंत्री की एक तस्वीर भी लाइट के जरिए दिखाई गई.

आइकॉनिक एडनॉक ग्रुप टावर पर अबू धाबी और भारत के ध्वज का वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में देखा जा सकता है कि मोदी 2.0 के जश्न में किस तरह से अबू धाबी की इमारतों को सजाया गया है. इसी तरह दुबई में स्थित बुर्ज खलीफा को भी भारतीय झंडे के रंग की रोशनी से रंगा गया है. वीडियो शेयर करते हुए, यूएई में भारतीय राजदूत नवदीप सूरी ने इस तरह के सम्मान पर प्रसन्नता व्यक्त की, उन्होंने लिखा, जिस तरह से अबू धाबी में भारत का जश्न मनाया गया है उससे पता चलता है कि दोनों दोस्तों के बीच सच्ची दोस्ती है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने भी इस पर गर्व व्यक्त किया, उन्होंने लिखा “एक असाधारण इशारा! UAE सरकार ने PM @narendramodi और मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह के अवसर पर #AbuDhabi में प्रतिष्ठित ADNOC भवन का निर्माण किया.

पिता के निधन के बाद अजय देवगन ने किया पहला ट्वीट, कही ये बात

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बॉलीवुड एक्टर अजय देवगन इमोशनल लेवल पर इस वक्त एक मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. हाल में उन्होंने अपने पिता वीरू देवगन को खोया है. उनके निधन की खबर से अचानक सभी हैरान थे और देवगन परिवार के लिए एक बड़ा झटका था. पिता के आखिरी दिनों में अजय देवगन भी फिल्म ‘दे दे प्यार दे’ का प्रमोशन छोड़ उन्हीं के साथ थे. लेकिन होनी को कौन टाल सकता है.

इस मुश्किल वक्त में ना केवल पूरा परिवार साथ था. बल्कि इंडस्ट्री से जुड़े उनके करीबी और साथियों ने भी उनका पूरा साथ दिया. अपने दोस्तों के इसी प्यार और अपनेपन पर आभार जताते हुए अजय देवगन ने एक ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, आपने जिस तरह से हमारे दुख को साझा किया है, उसके लिए हम आप सभी के आभारी हैं. आपकी प्रार्थना और साथ के लिए शुक्रिया.

अजय देवगन के इस ट्वीट पर उनके फैन्स और फॉलोअर्स ने उन्हें प्यार दिया और पिता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. अजय देवगन के पिता वीरू देवगन ने सोमवार(27 मई) को मुंबई में अंतिम सांसें लीं. उनकी सेहत काफी समय से खराब चल रही थी. वह मुंबई के सांताक्रूज में सूर्या अस्पताल में भर्ती थे. मुंबई में 27 मई 2019 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा. वीरू मशहूर स्टंट और एक्शन कोरियोग्राफर और डायरेक्टर थे. उन्होंने 80 से ज्यादा फिल्मों में एक्शन कोरियोग्राफ करने का काम किया. इसके अलावा उन्होंने ‘हिंदुस्तान की कसम’ नाम से आई फिल्म को डायरेक्ट भी किया था.

केवल एक्शन और डायरेक्शन नहीं वीरू देवगन ने बतौर एक्टर भी फिल्म में काम किया था. वह क्रांति (1981), सौरभ (1979) और सिंहासन (1986) जैसी फिल्मों में बतौर एक्टर नजर आए. बतौर एक्शन डायरेक्टर उनकी बेहतरीन फिल्मों में ‘फूल और कांटे’, ‘हिम्मतवाला’, ‘प्रेम रोग’, ‘क्रांति’, ‘दो और दो पांच’ जैसी फिल्में शामिल हैं.

वीरू पब्लिक इवेंट्स और पार्टीज़ में जाना ज्यादा पसंद नहीं करते थे. उन्हें पब्लिक में आखिरी बार फरवरी 2019 में अजय देवगन की फिल्म ‘टोटल धमाल’ की स्क्रीनिंग के मौके पर देखा गया था. पिछले कुछ दिनों से उनकी सेहत ज्यादा खराब थी. इस वजह से अजय देवगन ने फिल्म ‘दे दे प्यार दे’ के प्रमोशन को आखिर में छोड़ दिया था. क्योंकि वह पिता की सेहत को लेकर बेहद चिंतित थे.

मध्य प्रदेश से कांग्रेस के लिए अच्छी खबर, BSP विधायक जारी रखेंगे समर्थन

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लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली हार के बाद अंतर्कलह से जूझ रही मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार को एक बड़ी राहत मिली है. प्रदेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने राज्य की कांग्रेस सरकार को अपना बाहरी समर्थन जारी रखने की घोषणा की है.

बीएसपी उपाध्यक्ष रामजी गौतम का कहना है कि सांप्रदायिक और जातिवादी ताकतों को रोकने के लिए बीएसपी ने कांग्रेस सरकार को अपना बाहरी समर्थन दिया है. उन्होंने कहा,”हमने सांप्रदायिक और जातिवादी ताकतों को रोकने के लिए कांग्रेस सरकार को अपना बाहरी समर्थन दिया है और प्रदेश में कांग्रेस सरकार को समर्थन जारी रखने के लिए बसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्तर से निर्णय लिया गया है.”

मंत्रिमंडल में नहीं होंगे शामिल

बसपा विधायक के मंत्रिमंडल में शामिल होने के सवाल पर रामजी गौतम ने कहा हमारी पहली प्राथमिकता सरकार को बाहर से समर्थन देना है, न कि मंत्रिमंडल में शामिल होना. उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी के सुप्रीमो का स्पष्ट रुख मध्यप्रदेश में सरकार को बाहर से समर्थन देना है और सरकार में किसी मंत्री या अन्य पद को स्वीकार नहीं करना है.

बता दें कि बसपा के दो विधायक, भिंड से संजू कुशवाह और पथरिया से रामबाई, एक सपा विधायक और चार निर्दलीय विधायक कमलनाथ सरकार का समर्थन करने वाले सात विधायकों में से हैं.

बीजेपी पर खरीद-फरोख्त का आरोप-

वहीं, इससे पहले बीएसपी विधायक रामबाई ने आरोप लगाया था कि उन्हें बीजेपी 50 करोड़ और बड़े पद का प्रलोभन दे रही है. रमाबाई ने आरोप लगाया था कि बीजेपी मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार को गिराने में सहयोग की मांग कर रही है.

बता दें कि 30 अप्रैल को, मायावती ने प्रदेश में कांग्रेस सरकार को समर्थन देने पर पुनर्विचार करने के बारे में ट्वीट किया था. बीएसपी का यह रूख इसलिए अहम माना जा रहा है. क्योंकि मायावती गुना से बीएसपी के लोकसभा उम्मीदवार लोकेंद्र सिंह के कांग्रेस में शामिल होने और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन करने से नाराज़ हुई थीं.

मोदी कैबिनेट की पहली बैठक आज, हो सकता है मंत्रालयों का बंटवारा

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नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. पीएम मोदी के साथ उनकी सरकार में 57 मंत्रियों ने भी शपथ ली. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रधानमंत्री और उनके मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण के बाद मोदी सरकार की पहली कैबिनेट की बैठक शुक्रवार शाम को होगी. यह बैठक साउथ ब्‍लॉग में हो सकती है.

ऐसा बताया जा रहा है कि आज पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक में मंत्रालयों का बंटवारा भी हो सकता है. बता दें कि मोदी सरकार 2.0 में कुल 57 मंत्रियों ने शपथ ली. इनमें 24 कैबिनेट मंत्री, 25 राज्य मंत्री और 9 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) शामिल हैं. शपथ लेने वाले 20 चेहरे मोदी सरकार में पहली बार मंत्री बनाए गए हैं.

केंद्रीय मंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले शीर्ष नेताओं में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, डीवी सदानंद गौड़ा, निर्मला सीतारमण और रामविलास पासवान शामिल थे. समारोह में जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, गडकरी और पासवान ने हिन्दी में शपथ ली, वहीं गौड़ा और निर्मला सीतारमण ने अंग्रेजी में शपथ ली. मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल के कुछ प्रमुख मंत्री जिनमें सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, राज्यवर्धन सिंह राठौर और मेनका गांधी शामिल हैं, वे नए मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं हैं.

8000 लोगों के सामने ली शपथ

शीर्ष विपक्षी नेताओं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के अलावा कॉर्पोरेट जगत की सम्मानित हस्तियां, फिल्मी सितारे, प्रदेशों के मुख्यमंत्री बिम्सटेक देशों के नेताओं समेत करीब 8000 लोग शपथ ग्रहण समारोह का हिस्सा बने.

यह दूसरा मौका है जब मोदी ने राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में शपथ ली है. साल 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सार्क देशों के प्रमुखों सहित 3,500 से अधिक मेहमानों की उपस्थिति में मोदी को शपथ दिलाई थी. इससे पहले 1990 में चंद्रशेखर और 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी ने राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में शपथ ली थी.

शपथ ग्रहण में शामिल हुए ये विदेशी मेहमान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक से लेकर केंद्र की राजनीति में आने वाले नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने हर मैदान फ़तह करते हुए गुरुवार को प्रधानमंत्री के तौर पर न केवल अपनी दूसरी पारी का आग़ाज़ किया बल्कि पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद पूर्ण बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार सत्ता के शिखर पर पहुंचने वाले तीसरे प्रधानमंत्री बन गए.

संघ प्रचारक के रूप में शुरू हुआ था सफर

‘राष्ट्रवाद’ और ‘विकास’ के नारे के साथ अपने करिश्माई व्यक्तित्व से भगवा परचम लहराने वाले मोदी के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव में बीजेपी को कई राज्यों में 50 फीसदी से अधिक वोट और 303 सीटें मिलीं जबकि 2014 के आम चुनाव में भाजपा ने 282 सीटों पर जीत हासिल की थी. आंकड़े गवाह हैं कि इस बार भाजपा ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और हरियाणा जैसे कई राज्यों में अपना मत प्रतिशत बढ़ाया है. निश्चित तौर पर इस पूरी जीत के केंद्र में मोदी रहे हैं.

राष्ट्रवाद और विकास के नारे के साथ बुलंद होते मोदी ने न केवल हिन्दी में बेबाक होकर अपनी बात रखी बल्कि चुनाव की महाभारत में अभिमन्यु के साथ साथ अर्जुन की भूमिका भी निभाई. करारे आरोपों प्रत्यारोपों के बाद जब जीत हासिल हुई तो मोदी ने कहा कि वह पुरानी बातें भूल कर ‘सबका साथ सबका विकास एवं सबका विश्वास’ के मूल मंत्र के साथ आगे बढ़ेंगे.

12 साल तक रहे गुजरात के मुख्यमंत्री

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक से लेकर दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने तक मोदी का सफर लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा. 2014 में पहली बार देश के प्रधानमंत्री बनने से पहले मोदी गुजरात में 12 साल तक मुख्यमंत्री रहे. साथ ही उन्होंने पार्टी में तमाम तरह की जिम्मेदारियां निभाईं. उनकी छवि विकास पुरुष और भाजपा के ऐसे कर्णधार की रही जिनकी वजह से भाजपा अपने दम पर 303 सीटें जीतने में सफल रही.

लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए मोदी पंडित जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद पूर्ण बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार सत्ता के शिखर पर पहुंचने वाले तीसरे प्रधानमंत्री हैं. प्रधानमंत्री के रूप में पिछले कार्यकाल के दौरान मोदी की महत्वपूर्ण पहल जनधन योजना, डिजिटल इंडिया, आयुष्मान भारत, सभी को आवास, किसान सम्मान योजना, शौचालय एवं स्वच्छता अभियान आदि हैं. नोटबंदी और जीएसटी जैसे लिए गए उनके फैसले काफी अहम रहे हैं. हालांकि, विपक्ष ने इसका काफी विरोध भी किया.

उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा आतंकी हमले के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक को मोदी सरकार के मजबूत फैसले के रूप में देखा गया. लोकसभा चुनाव में भी राष्ट्रीय सुरक्षा सहित एयर स्ट्राइक के मुद्दे को भाजपा ने सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर रखा. और नतीजा सामने है.

बचपन में एक्टिंग का था शौक

17 सितंबर 1950 को गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर में जन्मे मोदी के पिता का नाम दामोदर दास और मां का नाम हीराबेन है. बचपन में मोदी वडनगर स्टेशन पर अपने पिता और भाई किशोर के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते थे. स्कूल के दिनों में मोदी एक्टिंग, वाद-विवाद, नाटकों में भाग लेते और पुरस्कार जीतते थे. वह एनसीसी में भी शामिल हुए. अभिनय का शौक वह 1975 में आपातकाल के दिनों में भी काम आया जब मोदी सरदार का रूप धरकर कई महीनों तक पुलिस को छकाते रहे.

17 साल की उम्र में जुड़े थे संघ से

बचपन से ही संघ की तरफ झुकाव रखने वाले मोदी ने 1967 में 17 साल की उम्र में घर छोड़ दिया . अहमदाबाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता लेने वाले मोदी बरसों बरस संघ के प्रचारक रहे. 1974 में वह नव-निर्माण आंदोलन में शामिल हुए. पढ़ाई जारी रही और मोदी ने गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में एमए किया.

हिन्दी, अंग्रेजी और गुजराती भाषाओं के जानकार पीएम मोदी का भाजपा से परिचय संघ के जरिये हुआ. 1980 के दशक में वह गुजरात की भाजपा इकाई में शामिल हुए. 1988-89 में उन्हें भाजपा की गुजरात इकाई का महासचिव बनाया गया.

1990 में आडवाणी की रथयात्रा में थी अहम भूमिका

लाल कृष्ण आडवाणी की 1990 की सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा के आयोजन में अहम भूमिका अदा करने के बाद 1995 में मोदी को भाजपा का राष्ट्रीय सचिव और पांच राज्यों का पार्टी प्रभारी बनाया गया. समय के पाबंद मोदी को 1998 में महासचिव (संगठन) की जिम्मेदारी मिली और इस पद पर वह अक्‍टूबर 2001 तक रहे.

2001 में केशुभाई पटेल को हटा कर मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया और इस पद पर वह लगातार 2014 तक रहे. सितंबर 2014 में मोदी को पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया. इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा 282 सीट जीतने में सफल रही और केंद्र में राजग की सरकार बनी. इस बार ‘‘मोदी मोदी’’ के नारे के बीच यह संख्या बढ़ कर 303 हो गई.

पीएम मोदी को मिल चुके हैं कई अवॉर्ड
लोकसभा चुनाव के पहले पीएम मोदी को कई देशों से अवॉर्ड मिला-

ऑर्डर ऑफ द सेंट एंड्र्यू एपोस्टल
जायेद मेडल
फिलिप कोटलर प्रेसिडेंशियस सम्मान
मोदीनॉमिक्स के लिए सियोल शांति पुरस्कार
चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवॉर्ड 2018
ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन
आमिर अमानुल्लाह खान अवॉर्ड ऑफ अफगानिस्तान
किंग अब्दुल अजीज सैश अवॉर्ड

शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे बॉलीवुड स्टार्स, एक ही फ्रेम में नजर आए कंगना और करण

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नरेंद्र मोदी गुरुवार शाम 7 बजे राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इस समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू के अलावा देश-विदेश के 8 हजार मेहमान शिरकत करेंगे। मेहमानों की लिस्ट में बॉलीवुड सेलिब्रिटीज के नाम भी शामिल हैं। कंगना रनोट, करण जौहर, अनिल कपूर, अनुपम खेर और हेमा मालिनी समेत कई बॉलीवुड स्टार्स शपथ समारोह के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। समारोह की खास बात ये रही कि इस समारोह में जहां कांग्रेस और बीजेपी एक साथ दिखाई दी। वहीं बॉलीवुड के कट्टर दुश्मन माने जाने वाले कंगना और करण को एक ही फ्रेम में स्पॉट किया गया। 

मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट हुए सेलेब्स

कंगना रनोट हमेशा से पीएम मोदी और बीजेपी की सपोर्टर रही हैं। उन्होंने पीए मोदी को जीत के बाद बधाई दी थी। कंगना समेत कई स्टार्स को मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया। 

2014 से ज्यादा भव्य होगा समारोह

राष्ट्रपति भवन में ये अब तक का सबसे बड़ा समारोह होगा। 2014 में जब मोदी ने तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के सामने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तब सार्क देशों के प्रमुखों समेत 3500 मेहमान आए थे। इस बार भी कार्यक्रम फोर कोर्ट (खुले परिसर) में ही होगा।

खेल और मनोरंजन जगत की हस्तियों को भी न्योता
सूत्र के मुताबिक, उद्योग जगत से मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, रतन टाटा शिरकत करेंगे। इनके अलावा पीरामल ग्रुप के अजय पीरामल, सिस्को सिस्टम्स के पूर्व सीईओ जॉन चैम्बर्स, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की चेयरमैन क्रिस्टीन लेगार्ड और माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिलगेट्स भी समारोह में आएंगे। इनके अलावा खेल जगत से पीटी उषा, राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले, जवागल श्रीनाथ, हरभजन सिंह, साइना नेहवाल, पुलेला गोपीचंद, जिमनास्ट दीपा कर्माकर भी शपथ ग्रहण में मेहमानों की लिस्ट में हैं। बॉलीवुड से शाहरुख खान, कंगना रानौत, संजय लीला भंसाली, करण जौहर को समारोह में आने का न्योता दिया गया है।

नगरीय प्रशासन और श्रम मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने ली बैठक बोले : सभी नगरवासियों के लिए शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता

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नगरीय प्रशासन और श्रम मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने कहा कि शहरी क्षेत्रों के रहवासियों के लिए पर्याप्त शुद्ध पेयजल की उपलब्धत कराना सरकार की प्राथमिकता में हैं। आम नागरिकों को सहजता के साथ जल आपूर्ति हो इस दिशा में बेहतर कार्ययोजना तैयार किया जाए। टैंकर मुक्त कर शत-प्रतिशत घरों में नल-जल की व्यवस्था सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में पेेयजल की संकट न हो इसकेे लिए कारगार उपाय किया जाए। डॉ. डहरिया ने कहा कि नगरीय निकायों में बने सभी बहुमंजिला भवनो में अग्निशमन की व्यवस्था हो इस पर विशेष ध्यान दिया जाए। सभी बहुमंजिला भवनों में अग्नि रोधक नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए। डॉ. डहरिया ने उक्त बातें  आज जगदलपुर में बस्तर संभाग के नगरीय निकायों की प्रगति की समीक्षा के दौरान कही। डॉ. डहरिया ने फर्जी हस्ताक्षर कर राशि का आहरण करने वाले कांकेर नगर पालिका के सब इंजीनियर श्री हेमन्त देवांगन और राशि का गबन करने वाले कोण्डागांव नगर पालिका के राजस्व निरीक्षक श्री बिरजु सोनबेरकर को निलंबित करने के निर्देश दिए।

    बैठक में डॉ. डहरिया ने कहा कि नगरीय निकायों के सुचारू संचालन और सुव्यस्थित विकास के लिए राजस्व वसूली भी एक आवश्यक हिस्सा है, इससे प्राप्त राशि संबंधित निकायों के विकास के लिए व्यय की जाती है, अतः लोगांें को राजस्व भुगतान के लिए जागरूक जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि करदाताओं को ऑनलाइन अथवा एस.एम.एस. भेजकर राशि भुगतान के संबंध में सूचित किया जाए।  

    डॉ. डहरिया ने कहा कि राज्य सरकार गौवंशी पशुओं को संरस्क्षित करने तथा परंमपरागत तरीके से गांवों की आर्थिक उन्नति के लिए नरवा, गरवा, घुरवा और बारी की कांसेप्ट पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में भी जहां-जहां डेयरी पालन किया जा रहा है उसे एक ही स्थान पर व्यस्थित किया जाए। सड़कों तथा शहरों में इधर-उधर घूम रहे पशुओं के लिए गोठान की तर्ज पर सरंक्षण तथा चारागाह केन्द्र बनाने पर जोर दिया।

    श्री डहरिया ने निकायों में निर्माणाधीन अधोसंरचना कार्यों और अधूरे कार्यो का निर्माण की समीक्षा की और अपूर्ण कार्यों को समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में शत-प्रतिशत शहरी गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग के उप सचिव श्री आर. एक्का, संयुक्त संचालक श्री पी.बी. काशी, अनुविभागीय अधिकारी श्री राजेश पात्रे, मुख्य अभियंता गण श्री भागीरथी वर्मा, श्री संजीव व्यवहार सहित बस्तर संभाग के सभी निकायों के मुख्य नगरपालिका अधिकारी और अभियंतागण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गाजियाबाद में छत्तीसगढ़ के मजदूर परिवार की बच्ची की हत्या को संज्ञान में लिया

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गाजियाबाद के कवि नगर थाना क्षेत्र में छत्तीसगढ़ से आये एक मजदूर परिवार की नौ साल की बच्ची की हत्या के मामले को  संज्ञान में लेते हुए दिल्ली में छत्तीसगढ़ के अधिकारियों को परिवार की सहायता के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को श्रमिक परिवार से संपर्क में रहने कहा है। कवि नगर में निवासरत मजदूर परिवार को सरकार की ओर से तत्काल आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करवायी गई है। 

माता-पिता की मौत, घायल बच्ची के इलाज का खर्च सीएम उठाएंगे

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सीएम भूपेश बघेल भदौरिया चौक पर सोमवार की सुबह हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल छात्रा नाहिदा के इलाज का पूरा खर्च उठाएंगे। इस हादसे में अपने माता-पिता को खो चुकी नाहिदा का इलाज रायपुर के रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में किया जा रहा है। सोमवार की सुबह 5 बजे तेज रफ्तार डंपर ने मोपेड को रौंद दिया था। हादसे में पेंड्री निवासी शरीफ खान (58), प|ी नूरी (55) ने दम तोड़ दिया था। जबकि नाहिदा (20) गंभीर रूप से घायल हो गई, रायपुर के मेकाहारा में शुरुआती इलाज के बाद उसे रामकृष्ण रेफर किया गया था। घायल छात्रा के बारे में जानकारी मिलने पर सीएम ने अफसरों को छात्रा की मदद करने और इलाज का पूरा खर्च उठाने का निर्देश दिया। 

बुरी तरह घायल होने पर भी खुद 112 की टीम को बुलाया: शरीफ खान कवर्धा के सिविल कोर्ट में मजिस्ट्रेट के ड्राइवर थे, वे शनिवार रात घर आए थे। रविवार का दिन परिवार के साथ बिताया, सोमवार की सुबह सभी ने सेहरी की। सेहरी के बाद शरीफ कवर्धा लौटने के लिए सुबह 5.30 की बस पकड़ने बस स्टैंड के लिए निकले। उनकी प|ी नूरी और बेटी नाहिदा उन्हें बस स्टैंड छोड़ने मोपेड से निकले। मोपेड नाहिदा चला रही थी। हादसे में नाहिदा के पैर भी कुचल गए। जिस वक्त घटना हुई चौक पर कोई मौजूद नहीं था। 

खून से लथपथ नाहिदा ने पहले मदद के लिए आवाज लगाई, फिर खुद मोबाइल से डायल 112 को हादसे की जानकारी दी, तब मदद के लिए टीम पहुंची। 

छत्तीसगढ़ से 1000 से अधिक यात्री जाएंगे अमरनाथ यात्रा पर

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साल 2019 में बाबा अमरनाथ की यात्रा 1 जुलाई से शुरू होकर 15 अगस्त तक चलेगी। यात्रा को मात्र एक माह का समय शेष रहने से अमरनाथ पर जाने वालों ने तैयारियां शुरू कर दी है। यात्रियों का ग्रुप बनने लगा है। जो यात्री पिछले कई सालों से लगातार यात्रा पर जा रहे हैं, उन लोगों ने नए यात्रियों को सलाह-मशविरा देना शुरू कर दिया है। वे नए यात्रियों को आश्वस्त कर रहे हैं कि रास्ते में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती। थोड़ी-बहुत मौसम की दिक्कतें आती हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त होने और भोजन, कैम्प में ठहरने की व्यवस्था होने से यात्रा का भरपूर आनंद लिया जा सकता है।

श्री अमरनाथ यात्रा सेवा समिति के प्रणव तिवारी बताते हैं कि समिति के नेतृत्व में हर साल 100 से अधिक यात्री बाबा बर्फानी के दर्शन करने का लाभ लेते हैं। इसके अलावा अलग-अलग ग्रुपों में लोगों ने जाने का प्लान बना लिया है। जम्मूतवी एक्सप्रेस से रिजर्वेशन भी करवा लिया है। 46 दिनों तक चलने वाली यात्रा में लगभग 700 यात्री दर्शन करने रवाना होंगे। चूंकि छत्तीसगढ़ से सप्ताह में दो दिन ही जम्मूतवी एक्सप्रेस सीधे जम्मू तक जाती है। इस वजह से लगभग डेढ़ महीने तक अलग-अलग सप्ताह में यात्रियों ने रिजर्वेशन करवाया है।

यात्रा शुरू होने के पूर्व सीधी ट्रेन नहीं

इस बार यात्रा 1 जुलाई से शुरू हो रही है और जम्मू तक सीधी ट्रेन 2 जुलाई को रवाना होगी जो 3 जुलाई की रात्रि में जम्मू पहुंचेगी। इसलिए छत्तीसगढ़ के यात्री 4 जुलाई को जम्मू से रवाना होने वाले जत्थे में शामिल होंगे। रायपुर स्टेशन से यात्रा 2 जुलाई को शुरू होगी और 3 जुलाई की रात जम्मू पहुंचेंगे।

जम्मू से 4 जुलाई को सुबह वाहन से पहलगाम पहुंचकर विश्राम करेंगे। 5 जुलाई को पहलगाम से चंदनबाड़ी होते हुए शेषनाग कैम्प पहुंचेंगे। 6 जुलाई को सुबह शेषनाग कैम्प से पंचतरणी कैम्प पहुंचकर विश्राम करेंगे। 7 जुलाई को पंचतरणी से श्रीअमरनाथ गुफा पहुंचकर बाबा अमरनाथ का दर्शन करके विश्राम करेंगे।

8 जुलाई को बाबा अमरनाथ गुफा से बांस टाल पहुंचेंगे। 9 जुलाई को बांसटाल से कटरा पहुंचकर माता वैष्णोदेवी के दर्शन करके विश्राम करेंगे। 10 जुलाई को कटरा से निकलकर वापसी में स्वर्ण मंदिर, बाघा बार्डर, दिल्ली होते हुए श्रद्धालु 11 जुलाई को वापस राजधानी पहुचेंगे।

समुद्र तल से 13600 फुट ऊंचाई पर है बाबा अमरनाथ धाम

बाबा अमरनाथ धाम को हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थस्थल माना जाता है। अमरनाथ की गुफा कश्मीर के श्रीनगर शहर के उत्तर-पूर्व में 135 किलोमीटर दूर समुद्रतल से 13600 फुट की उंचाई पर स्थित है। गुफा की लंबाई 19 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर तथा ऊंचाई 11 मीटर है।

मान्यता है अमरनाथ गुफा में ही भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। यहां शिवलिंग का निर्माण अपने आप प्राकृतिक बर्फ से होता है। करीब 10 फुट लंबा शिवलिंग चंद्रमा के घटने-बढ़ने के साथ घटता-बढ़ता है। सावन महीने के अंतिम दिन पूर्णिमा को यह पूरे आकार में आ जाता है। धीरे -धीरे शिवलिंग छोटा होता जाता है।

चंदनबाड़ी से 32 और बालटाल से 14 किलोमीटर है दूरी

श्रीअमरनाथ सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष गंगाप्रसाद यादव एवं प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष प्रणय तिवारी ने बताया कि अमरनाथ यात्रा सबसे कठिन यात्रा है। चंदनवाड़ी और बालटाल दो मार्ग से श्रद्धालु पहुंचते हैं। चंदनबाड़ी मार्ग से भोलेनाथ की पवित्र गुफा 32 किलोमीटर तथा बालटाल से 14 किलोमीटर की दूरी पर है। इस साल भी अलग-अलग जत्थे में करीब एक हजार यात्री रवाना होंगे। समिति के नेतृत्व में रास्तेभर यात्रियों का मार्गदर्शन किया जाएगा।